विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग - पीएम
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है। एक विशेष आलेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण से लोकतंत्र और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनेगा। उन्होंंने कहा कि इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी अत्यंहत दुर्भाग्यरपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण से जुडे महत्विपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने के लिए 16 अप्रैल को संसद का सत्र बुलाया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तथा आने वाले समय में विभिन्नी राज्यों् में विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के लागू होने के साथ आयोजित हों। उन्होंंने कहा कि पिछले कई दशकों से पिछली सरकारों द्वारा लोकतात्रिक संस्थांओं में महिलाओं को उचित स्थाकन देने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। उन्होंनने कहा कि इस सिलसिले में समितियां बनी, विधेयक के मसौदे पेश किए गए लेकिन सार्थक रूप से कुछ नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सितंबर 2023 में संसद ने आम सहमति की समान भावना के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लगभग आधी जनसंख्याप महिलाओं की है और देश के लिए उनका योगदान अमूल्यी है। अपने लेख में प्रधानमंत्री ने कहा कि विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण, देशभर की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और इस सिद्धांत की पुष्टि करता है कि समाज तभी आगे बढ़ता है, जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं। महिलाओं के योगदान का उल्लेगख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर उद्यमिता तक, खेल से लेकर सशस्त्र् बलों तक और संगीत से लेकर कला तक महिलाएं देश की प्रगति के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।










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