शेरों के आठ शावकों की मौत 'बाबेसिया' संक्रमण से नहीं, बल्कि गर्मी के कारण हुई : गुजरात के मंत्री
अहमदाबाद.। गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शनिवार को कहा कि राज्य में हाल में एशियाई शेरों के आठ शावकों की मौत 'बाबेसिया' संक्रमण या किसी विषाणु के चलते नहीं, बल्कि गर्मी के कारण हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जो 17 शेर बीमार पड़ गये थे और जिन्हें एहतियात के तौर पर पृथकवास में रखा गया था, उनमें से 12 को स्वस्थ्य होने के बाद वन में छोड़ दिया गया है। मंत्री ने कहा, ''भीषण गर्मी और उससे होने वाली कमजोरी के कारण शेरों के आठ शावकों की मौत हो गई। कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले शावकों की मौत हुई है। बाबेसिया परजीवी इसका कारण नहीं था।'' उन्होंने एक अलग वीडियो बयान में कहा कि गिर अभयारण्य में अल्पावधि में शावकों की मौत चिंता का विषय बन गई थी और शुरू में इसके लिए बाबेसिया परजीवी को जिम्मेदार माना जा रहा था। मोढवाडिया ने कहा, "इसी बीच, आसपास के क्षेत्र को रोगाणुमुक्त करने के लिए लगभग 600 शेरों का किलनी (टिक) निवारण व कृमिनाशक उपचार किया गया। पहले जो 17 शेर काफी बीमार थे और चल नहीं पा रहे थे, उनमें से 12 को पहले ही जंगल में छोड़ दिया गया है।" उन्होंने बताया कि शेष पांच शेर अब स्वस्थ हैं और जल्द ही उन्हें उनके पर्यावास में छोड़ दिया जाएगा। मोढवाडिया ने कहा कि हाल में किसी भी शेर की मौत किसी बीमारी के कारण नहीं हुई है, एक शेरनी की मृत्यु गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। उन्होंने कहा, "इसी तरह, पहले जिन शेरों की मृत्यु हुई थी, उनमें भी कोई खतरनाक विषाणु नहीं पाया गया।" इससे पहले 29 मई को मंत्री ने कहा था कि गिर सोमनाथ और अमरेली जिलों में संदिग्ध 'बाबेसिया' संक्रमण के कारण आठ शावकों की मृत्यु हो गई थी।






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