कारगिल के शहीदों को नमन, राजनाथ बोले- हर दुस्साहस का मिलेगा जवाब
नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक आयोजित 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस यात्रा में सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा बलों के 28 बाइक सवार अपने परिवारों के साथ 1,900 किलोमीटर की दूरी तय कर 1999 के कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यात्रा का आदर्श वाक्य ‘एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम’ रखा गया है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 1999 की विजय भारत के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है कि देश अपनी भूमि, पहचान और सम्मान पर किसी भी शत्रुतापूर्ण दुस्साहस का पूरी शक्ति से जवाब देगा। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के कठिन मौसम में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को वापस हासिल किया और तिरंगे का गौरव कायम रखा। रक्षा मंत्री ने परम वीर चक्र से सम्मानित कप्तान विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) के योगदान को याद करते हुए कहा कि ये सभी वीर सैनिक देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। यात्रा के दौरान बाइक सवार चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्मारक सहित कई प्रमुख सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अलावा वे वीरांगनाओं से मुलाकात कर उनके साहस और योगदान का सम्मान भी करेंगे। यह अभियान 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास में संपन्न होगा।
इस अभियान के दौरान बाइक सवार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा कलश अपने साथ लेकर जाएंगे, जिसे कारगिल में शहीदों की स्मृति में अर्पित किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कारगिल की मिट्टी का मिलन वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और देश के वीर नायकों की अमर गाथा का प्रतीक बनेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि शौर्य विजय यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों से आए सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और नागरिकों को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं और पृष्ठभूमियां होने के बावजूद एक तिरंगा, एक राष्ट्र और वीरों के प्रति साझा सम्मान ही भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान विशेषकर युवाओं में देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा और उन्हें कर्तव्य, सम्मान तथा नि:स्वार्थ सेवा के मूल्यों के प्रति प्रेरित करेगा।









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