एनसीईआरटी: कक्षा नौ के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर शामिल, केवल नयी व्यवस्था के बारे में बात
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) ने कक्षा-9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है और ईमानदारी से कर चुकाने को नागरिकों का एक महत्वपूर्ण दायित्व बताने वाला संदेश भी दिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद, मंगलवार को 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' शीर्षक से किताब जारी की गई। पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था। एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी के अनुसार, अब छात्र नयी व्यवस्था के तहत कर स्लैब के हिसाब से आयकर की वास्तविक गणना को समझ सकते हैं – इस आयु के बच्चों (कक्षा 9) के लिए यह पहली बार है – और इसके साथ ही उन्हें यह संदेश भी दिया गया है कि ''ईमानदारी से और समय पर'' कर चुकाना ''हर नागरिक का एक अहम दायित्व'' है, जिससे देश का विकास होता है। 'अपनी व्यक्तिगत आय को प्रबंधित करना' शीर्षक वाला अध्याय कहता है कि पैसे को प्रबंधित करने का सफ़र बचपन से ही शुरू हो जाता है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, पैसे का समझदारी से प्रबंधन करने का मतलब सिर्फ़ ज़्यादा कमाना नहीं है, बल्कि हर चरण पर सोच-समझकर वित्तीय फ़ैसले लेना है-चाहे वह खर्च करना हो, बचत करना हो, निवेश करना हो, जोखिमों से सुरक्षा हो, ज़िम्मेदारी से उधार लेना हो या कर चुकाना हो। इसमें कहा गया है कि आज लोग जो फ़ैसले लेते हैं, वे उनके आर्थिक भविष्य को आकार देते हैं और आर्थिक अवसरों व चुनौतियों को प्रबंधित करते हुए आर्थिक स्थिरता पाने की उनकी क्षमता तय करते हैं। इस अध्याय में नयी आयकर व्यवस्था के तहत कर संबंधी स्लैब की एक सारणी दी गई है और इसमें बताए गए स्लैब के अनुसार कर की देनदारी का हिसाब लगाने के तरीके भी विस्तार से बताए गए हैं। इसमें पुरानी कर व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं है। पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भारत आयकर की गणना के लिए स्लैब प्रणाली का पालन करता है, जैसा कि सारणी में दिखाया गया है। इसके बाद नयी कर व्यवस्था के तहत कर स्लैब का एक चार्ट दिया गया है।
इसे एक अप्रैल, 2023 से 'डिफ़ॉल्ट' कर व्यवस्था बना दिया गया, जिसका मतलब है कि करदाताओं को अपने-आप इसमें शामिल कर लिया जाता है, जब तक कि वे खास तौर पर पुरानी व्यवस्था को न चुनें। इस अध्याय में ''व्यक्तिगत वित्त स्तंभों'' पर एक और खंड है, जिसमें हर स्तंभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है- जैसे आय, खर्चों की योजना, बचत, निवेश और सुरक्षा व जोखिम प्रबंधन।











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