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- रायपुर/ कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार कलेक्ट्रेट स्थित रेडक्रॉस सभाकक्ष में जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकान गणना के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन ने की।प्रशिक्षण में अधिकारियों को जनगणना कार्य की प्रक्रिया, सर्वेक्षण की विधि, डेटा संकलन और दायित्वों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की बेहतर योजना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर कलेक्टर श्री मनीष मिश्रा, एसडीएम, नगर निगम जोन आयुक्त, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सीएमओ सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
- स्काडा सिस्टम देखा, संचालन को लेकर किया निर्देशित, दिए सुझावरायपुर/ आज रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देश पर नगर निगम अपर आयुक्त श्री लोकेश्वर साहू ने रावणभाठा फिल्टरप्लांट का औचक निरीक्षण कर फिल्टरप्लांट संचालन, पंप मोटर की स्थिति, फिल्टरेशन प्रक्रिया, प्रयोगशाला में टेस्टिंग की स्थिति , सभी टंकियों में जलभराव , स्काडा मॉनिटरिंग का प्रत्यक्ष अवलोकन कर स्काडा सिस्टम संचालन हेतु आवश्यक निर्देश एवं सुझाव दिए. अपर आयुक्त ने इंटेकवेल की जानकारी सभी प्लांट की व्यवस्था का निरीक्षण कर ग्रीष्मकालीन पेयजल की तैयारी हेतु आवश्यक निर्देश दिए. इस दौरान नगर निगम कार्यपालन अभियंता जल श्री नर सिंह फरेन्द्र एवं फ़िल्टरप्लांट के अन्य सम्बंधित अधिकारी एवं कर्मचारीगण की उपस्थिति रही.
- क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल व क्षेत्रीय विधायक व मंत्री गुरू खुशवंत सिंह को ज्ञापन सौंपारायपुर। खस्ताहाल कठिया आउटलेट से सिंचाई में होने वाली दिक्कतों की ओर ध्यानाकर्षण कराये जाने पर शासन ने इसके रिमाडलिंग व लाइनिंग कार्य के प्रस्ताव को बजट में शामिल तो कर लिया है पर इसे आज तक प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिल पाया है । चालू वित्तीय वर्ष में ही इसे प्रशासकीय स्वीकृति दिलाने की मांग को ले क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल व क्षेत्रीय विधायक व मंत्री गुरू खुशवंत सिंह को ज्ञापन सौंपा गया है ।महानदी जलाशय परियोजना के जल प्रबंध संभाग क्रमांक 01 के अधीनस्थ आने वाले जल उपभोक्ता संस्था टेकारी के अंतर्गत आता है कठिया आउटलेट । जीर्ण - शीर्ण इस आउटलेट से सिंचाई में होने वाली दिक्कतों की ओर ग्रामीणों एवं सिंचाई पंचायत द्वारा लगातार ध्यानाकर्षण कराये जाने पर बजट में शामिल यह कार्य आज तक प्रशासकीय स्वीकृति की बाट जोह रहा है। आसन्न 31 मार्च को वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्त होने के मद्देनजर टेकारी जल उपभोक्ता संस्था के अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र शर्मा के साथ गये ग्रामीणों के एक प्रतिनिधि मंडल ने जहां क्षेत्रीय सांसद को वहीं क्षेत्रीय जनपद सदस्य राजू मनहरे के साथ पहुंचे प्रतिनिधि मंडल ने क्षेत्रीय विधायक को ज्ञापन सौंप इस कार्य को इसी वित्तीय वर्ष में प्रशासकीय स्वीकृति दिलाने का आग्रह किया है ताकि जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू हो सके व किसानों को प्रभावी सिंचाई सुविधा मिल सके ।
- -सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 एवं क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर होगी नियुक्तिरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण एवं सहायक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विभाग द्वारा सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण करते हुए उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप भी तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को 24 फरवरी 2026 को विस्तृत जानकारी के साथ पत्र भी भेजा जा चुका है।प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पदों, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल के 25-25 पदों, कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15, वाणिज्य के 75, विधि के 10 पदों पर भर्ती के साथ ही क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद तथा ग्रंथपाल के 50 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी।विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम तथा विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को प्रेषित कर दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के पश्चात भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इन पदों पर नियुक्ति से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ता मिलेगी तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल तथा क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की शैक्षणिक बाधा का सामना न करना पड़े। विभाग द्वारा नियुक्त अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट एवं सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं से योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
- -36.40 किमी सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का काम जल्द होगा शुरू-उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित समयावधि में काम पूर्ण कराने के दिए निर्देश-गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मापदंडों के अनुरूप निर्माण सुनिश्चित करने को कहारायपुर ।राज्य शासन ने नांदघाट-मुंगेली सड़क के लिए 112 करोड़ 88 लाख 50 हजार रुपए की निविदा को मंजूरी दे दी है। निविदा स्वीकृति के बाद अब जल्दी ही 36.40 किमी लंबाई के इस सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का काम प्रारंभ हो जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने लोक निर्माण विभाग के मुंगेली संभाग के कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित समयावधि में काम पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मापदंडों के अनुरूप सड़क का निर्माण सुनिश्चित करने को कहा है।लोक निर्माण विभाग ने कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित कार्य का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्य किसी अन्य को सब-लेट (Sub-let) नहीं किया जाएगा तथा कार्य संपादन के लिए पावर-ऑफ-अटॉर्नी मान्य नहीं होगी। राज्य शासन द्वारा निविदा की मंजूरी इस शर्त पर दी गई है कि अनुबंध के पूर्व ठेकेदार से एडीशनल परफॉर्मेंस सिक्योरिटी (APS) की राशि की बैंक गारंटी जो संपूर्ण कार्यावधि के लिए प्रभावशील हो, प्राप्त कर ली जाए।
- -नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं-केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की मौजूदगी में देशभर की अमृत मित्रों के साथ साझा किए अपने काम के अनुभवरायपुर। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में छत्तीसगढ़ की जल योद्धाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। राज्य की दो महिलाओं, बिलासपुर नगर निगम की श्रीमती रुक्मिणी गोस्वामी और लोरमी की श्रीमती हेमलता खत्री ने केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल की मौजूदगी में देशभर की 1000 अमृत मित्रों के साथ अपने कार्यों के अनुभव साझा किए।केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT 2.0) के तहत शहरी जल प्रबंधन एवं सतत विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें छत्तीसगढ़ की 75 “अमृत मित्र” महिलाओं ने भागीदारी की। ये महिलाएं राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल संरचना संचालन तथा सामुदायिक जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने विगत 11 मार्च को रायपुर रेलवे स्टेशन में हरी झंडी दिखाकर महिलाओं के इस दल को नई दिल्ली के लिए रवाना किया था।“अमृत मित्र महोत्सव” में भागीदारी करने वाली स्वसहायता समूहों की ये महिलाएँ 'वीमेन फॉर ट्री' अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण, हरित क्षेत्रों के संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। छत्तीसगढ़ की ये “अमृत मित्र” महिलाएँ अपने-अपने शहरों में तकनीकी और सामुदायिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं। घरों तक सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने जल गुणवत्ता के परीक्षण, जल उपचार संयंत्रों (WTP) और वितरण नेटवर्कों के संचालन तथा रखरखाव में सहयोग के साथ ही जल संरक्षण तथा “कचरे से कंचन” जैसे अभियानों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का महत्वपूर्ण काम ये महिलाएं कर रही हैं।देशभर के स्वसहायता समूहों के सर्वोत्तम अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के इस राष्ट्रीय मंच को छत्तीसगढ़ की दो अमृत मित्रों ने भी साझा किया। बिलासपुर की श्रीमती रुक्मिणी गोस्वामी ने महोत्सव में कहा कि हम केवल पौधे ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपने शहरों के पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित बनाने का काम भी कर रहे हैं। इस पहल से हमें आजीविका का अवसर भी मिला है जिससे हम अपने परिवार की आय में योगदान दे पा रहे हैं।वहीं लोरमी की श्रीमती हेमलता खत्री ने राष्ट्रीय मंच पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जल संरक्षण के लिए वृहद पैमाने पर हम लोग वृक्षारोपण करने के साथ ही अपने बच्चे की तरह पौधों की देखभाल और रक्षा कर रहे हैं। इन पौधों को बढ़ते हुए देखकर हमें बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है।"अमृत मित्र महोत्सव के लिए चयनित महिलाओं को बहुत-बहुत बधाई... नई दिल्ली के भारत मंडपम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने कार्यों और अनुभवों को प्रस्तुत करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। 'वीमेन फॉर ट्री - अमृत मित्र योजना' से महिला समूहों को वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका का भी अवसर मिल रहा है। इस पहल से उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण के कार्य में योगदान देने का संतोष भी प्राप्त हो रहा है।" - उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव
- -संलिप्त लोगों के विरुद्ध की गई कड़ी कार्रवाईरायपुर । प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी कीमत पर अवैध मादक पदार्थों की खेती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शासन और प्रशासन के सभी अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता से जांच करने तथा इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ द्वारा सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि अपने-अपने जिलों के संवेदनशील एवं संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराया जाए। कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 15 दिवस के भीतर सर्वे पूर्ण कर अपने हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र सहित विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजें, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख हो कि जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती तो नहीं की जा रही है।प्रदेश में हाल ही में कुछ स्थानों पर अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आए हैं, जिन पर प्रशासन ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में अफीम के पौधों को जब्त कर नष्ट किया गया तथा आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।अवैध क़ब्ज़े के जेसीबी मशीन से हटाया गया ।इसी प्रकार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तुर्रीपानी (खजुरी) में राजस्व, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कार्रवाई करते हुए लगभग 1.47 एकड़ भूमि पर की जा रही अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया गया। कार्रवाई के दौरान करीब 18 क्विंटल 83 किलोग्राम अफीम के पौधे (लगभग 2 करोड़ रुपये मूल्य) जब्त किए गए तथा दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 एवं 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती, भंडारण, परिवहन या कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- रायपुर ।प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र के इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार माना है।केंद्र सरकार द्वारा यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जारी की जाएगी, ताकि प्रभावित राज्यों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। समिति के निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की गई है।केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों को त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।गौरतलब है कि यह अतिरिक्त सहायता राज्यों को पहले से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के अतिरिक्त है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि पहले ही जारी कर दी है। State Disaster Response Fund (SDRF) के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि National Disaster Response Fund (NDRF) के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।इसके अलावा आपदा जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए State Disaster Mitigation Fund (SDMF) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये तथा National Disaster Mitigation Fund (NDMF) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।
- -वर्षों से जोखिम उठाकर गुजर रहे राहगीरों को मिलेगी सुरक्षित आवागमन की सुविधारायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सिंगीबहार से कछुआकानी मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। लंबे समय से पुल की जर्जर स्थिति के कारण क्षेत्र के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के संज्ञान में मामला आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग को निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।बताया गया है कि सिंगीबहार–कछुआकानी मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जो छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। पुल के खराब होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों और मजदूरों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया को जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही संबंधित विभाग ने स्थल पर पहुंचकर पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। पुल निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या का अब समाधान होने जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुल बनने से आवागमन सुरक्षित होने के साथ ही आसपास के गांवों के विकास और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
- -ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्रीरायपुर। छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। श्री साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त श्री सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ श्री व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
- -मुख्यमंत्री श्री साय ने किया टीजेएसबी सहकारी बैंक की रायपुर शाखा का शुभारंभरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर के कटोरा तालाब में टीजेएसबी सहकारी बैंक की रायपुर शाखा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर में टीजेएसबी सहकारी बैंक की नई शाखा खुलने से प्रदेश की सहकारी गतिविधियों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता की भावना हमें सिखाती है कि हम मिलजुलकर आगे बढ़ें और एक-दूसरे को मजबूत बनाएं।मुख्यमंत्री श्री साय ने टीजेएसबी सहकारी बैंक की रायपुर शाखा में 24 घंटे संचालित एटीएम का भी शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सहकारी बैंक हमेशा आम आदमी के सबसे भरोसेमंद साथी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नई शाखा के खुलने से जरूरतमंदों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएँ मिलेंगी। छोटे दुकानदारों, स्वरोजगार करने वालों और अपना काम शुरू करने वाले युवाओं को इससे बड़ी सहायता मिलेगी। इससे स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “सहकार से समृद्धि” का जो विजन देश में शुरू हुआ है, उसे छत्तीसगढ़ में भी तेजी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी सहकारिता के इस मजबूत मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि टीजेएसबी बैंक ने एक छोटे से प्रयास के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी और आज इसका विस्तार कई राज्यों में हो चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टीजेएसबी बैंक की रायपुर शाखा भी सहकारिता की इसी भावना को आगे बढ़ाएगी और लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता खोलेगी। इस अवसर पर टीजेएसबी बैंक के अध्यक्ष श्री शरद गांगल, उपाध्यक्ष श्री वैभव सिंगवी, व्यवस्थापकीय संचालक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री निखिल आरेकर सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
- -मेडिकल कॉलेज रायपुर में शुरू होगी आईवीएफ सुविधा, जरूरतमंद दंपत्तियों को मिलेगा निःशुल्क लाभ-स्वास्थ्य मंत्री ने आईवीएफ और सरोगेसी केंद्रों की नियमित निगरानी और निरीक्षण के कार्ययोजना तैयार करने के निर्देशरायपुर । प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार और प्रजनन संबंधी सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में राज्य पर्यवेक्षक मंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 एवं एआरटी-सरोगेसी एक्ट 2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।मेडिकल कॉलेज रायपुर में शुरू होगी आईवीएफ सुविधा, जरूरतमंद दंपत्तियों को मिलेगा निःशुल्क लाभबैठक में विधायक सुश्री लता उसेंडी (कोंडागांव), श्रीमती रायमुनी भगत और श्रीमती गोमती साय सहित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त शिक्षा रितेश अग्रवाल और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।बैठक के दौरान संचालक महामारी नियंत्रण डॉ. सुरेन्द्र पामभोई ने दोनों अधिनियमों के प्रावधानों की जानकारी देते हुए प्रदेश में इनके क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी और एआरटी एक्ट का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।बैठक में लिंगानुपात की स्थिति सुधारने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। मंत्री श्री जायसवाल ने निर्देश दिए कि प्रदेश में सर्वाधिक और न्यूनतम सेक्स रेशियो वाले तीन-तीन जिलों का विस्तृत अध्ययन कराया जाए, ताकि असमानता के कारणों का पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश में सोनोग्राफी सेवाओं की कमी को देखते हुए एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए छह माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिक से अधिक प्रतिभागियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में भी यह सुविधा उपलब्ध हो सके।बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश में संचालित आईवीएफ और सरोगेसी केंद्रों की नियमित निगरानी और निरीक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि संबंधित हितग्राहियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। स्वास्थ्य मंत्री ने बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में गरीब और आमजन को बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर में शीघ्र ही आईवीएफ सुविधा प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है, जिससे जरूरतमंद दंपत्तियों को निःशुल्क लाभ मिल सकेगा।
- -वन मंत्री केदार कश्यप होंगे मुख्य अतिथिरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा “विजन: 2030 – छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए उच्च विकास व्यवसाय मॉडल का निर्माण” विषय पर 14 मार्च को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला अरण्य भवन, नवा रायपुर के ऑडिटोरियम में आयोजित होगी। कार्यक्रम में प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए सतत और उच्च विकास आधारित व्यवसाय मॉडल तैयार करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना है। इसमें वन उत्पादों में मूल्य संवर्धन, वानिकी गतिविधियों का विविधीकरण, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, वन आधारित उद्योगों के साथ साझेदारी को मजबूत करना तथा वर्ष 2030 तक नए राजस्व स्रोतों की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के वन विकास निगमों के प्रतिनिधि तथा वन आधारित उद्योगों के विशेषज्ञ भाग लेंगे और अपने अनुभव, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों तथा नवाचार आधारित व्यवसाय मॉडल साझा करेंगे l इसके साथ ही वन विकास निगमों के पूर्व प्रबंध संचालक (पूर्व एमडी) और पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पूर्व पीसीसीएफ) भी इस कार्यशाला में शामिल होकर अपने-अपने अनुभव और सुझाव भी साझा करेंगे।इस कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए सतत वानिकी, हरित विकास और वन आधारित उद्यमों के विस्तार के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने में सहायता मिलेगी।
- -प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मेला में किसानोपयोगी नवीन तकनीकें भी प्रदर्शित की जाएंगीरायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित स्वामी विवेकानंद अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा 14 एवं 15 मार्च को आयोजित दो दिवसीय एल्युमिनाई मीट ”एग्री टेक मिलन 2026“ में महाविद्यालय के पांच सौ से अधिक पूर्व छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। इस एल्युमिनाई मीट में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अन्य राज्यों से लगभग ढ़ाई सौ भूतपूर्व विद्यार्थियों के आने की संभावना है। इस अवसर पर दो दिवसीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मेला भी आयोजित किया जाएगा जिसमें कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न किसानोपयोगी नवीन प्रौद्यौगिकियां प्रदर्शित की जाएंगी। एग्री टेक मिलन 2026 का शुभारंभ कल दिनांक 14 मार्च को प्रातः 11 बजे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल करेंगे। समारोह की अध्यक्षता कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय वर्मा करेंगे। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के अधिष्ठातागण, निदेशकगण, कुलसचिव एवं छत्तीसगढ़ शासन कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय वर्मा ने बताया की महाविद्यालय में पहली बार एल्युमिनाई मीट का आयोजन किया जा रहा है जिसमें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत विगत लगभग 30 वर्षों में कृषि अभियांत्रिकी की पढ़ाई कर चुके 500 से अधिक भूतपूर्व विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इन पूर्व विद्यार्थियों में से अनेक विद्यार्थी संघ लोक सेवा आयोग तथा राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर आसीन हैं। इसके अलावा कुछ भूतपूर्व छात्र प्रतिष्ठित औद्योगिक तथा व्यवसायिक संस्थानों में निदेशक अथवा वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। अनेक विद्यार्थियों ने स्टार्टअप स्थापित कर अन्य लोगों को रोजगार प्रदान किया है। इसके अलावा लगभग 100 भूतपूर्व विद्यार्थी विभिन्न विश्विद्यालयो में निदेशक, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक के रूप में योगदान दे रहे हैं। डॉ. वर्मा ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में वर्ष 1997 में कृषि अभियांत्रिकी संकाय की स्थापना की गई थी जिसके अंतर्गत एम. टेक पाठ्यक्रम प्रांरभ किये गये थे। वर्ष 2008 में फार्म मशीनरी एवं पावर इंजिनियरिंग तथा सॉयल वाटर मैनेजमेंट में शोध पाठ्यक्रम शुरू किए गए। वर्ष 2014 में स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की स्थापना के साथ कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में विभिन्न स्नातक पाठ्क्रम प्रारंभ किये गए। उन्होनें बताया कि अब तक 700 से अधिक विद्यार्थियों ने कृषि अभियांत्रिकी के विभिन्न पाठ्यक्रमों में उपाधि प्राप्त की है। डॉ. वर्मा ने बताया कि कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय द्वारा अब तक 97 नवीन प्रौद्योगिकी विकसित की गई हैं तथा 32 डिजाईन पेटेंट किये गए हैं। उन्होंने बताया कि यह दो दिवसीय एग्री टेक मिलन 2026 एक ऐतिहासिक आयोजन होगा जिसका साक्षी यह महाविद्यालय बनने जा रहा है।
- -आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए होगा मामलों का निपटारारायपुर। आपसी सुलह (राजीनामा) के जरिए मामलों का निपटारा करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के तत्वावधान में शनिवार 14 मार्च 2026 को देशव्यापी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) बिलासपुर द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों एवं व्यवहार न्यायालयों में भी लोक अदालत आयोजित किए जाएंगे। यह कैलेण्डर वर्ष 2026 की पहली लोक अदालत होगी।लोक अदालत के दिन जिला न्यायालय एवं तालुका न्यायालय (व्यवहार न्यायालय) में लंबित शमनीय अपराध के प्रकरण मोटर दुर्घटना दावा से संबंधित प्रकरण, 138 एनआई एक्ट, के अंतर्गत चेक बाउंस का प्रकरण धारा 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता तथा मेट्रोमोनियल डिस्प्युट के अलावा जल कर, संपत्ति कर, राजस्व संबंधी प्रकरण ट्रैफिक चालान, भाड़ा नियंत्रण आबकारी से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किया जाएगा। इसी प्रकार बैंक विद्युत संबंधी प्री-लिटिगेशन प्रकरण, राजस्व न्यायालय खंडपीठ में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे, वारिसों के मध्य बटवारे का निराकरण किया जाएगा। न्यायालयों में बड़ी संख्या में लंबित प्रकरणों में कमी लाने के उद्देश्य से तथा प्रभावित पक्षकारों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में नेशनल लोक अदालत एक प्रभावशाली कदम है।नेशनल लोक अदालत के लिए खण्डपीठों का गठन कर विभिन्न प्रकरणों तथा प्री.लिटिगेशन का निराकरण किया जाएगा। लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय में राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरणों धारा. 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों, बैंक रिकवरी प्रकरण, सिविल प्रकरण, निष्पादन प्रकरण, विद्युत संबंधी मामलों तथा पारिवारिक विवाद के मामलों का निराकरण किया जाता हैं। इसके अतिरिक्त राजस्व, बैंक, विद्युत विभाग दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री.लिटिगेशन प्रकरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रस्तुत किए जाएंगे। विधिवत पंजीयन उपरांत संबंधित पक्षकारों के प्रकरण लोक अदालत खण्ड पीठ में निराकृत किए जाएंगे।इस तरह पक्षकार अपने न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से करा सकते हैं। इसके अलावा लोक अदालत में दूरसंचार विभाग, नगर निगम, नगर पालिका परिषद् में वसूली संबंधी लंबित प्रकरण प्री-लिटिगेशन प्रकरण, याददाश्त के आधार पर बंटवारा, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक रिकवरी प्रकरण, कब्जे के आधार पर बंटवारा से संबंधित प्रक्ररणों को निराकृत किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) के अंतर्गत कार्यवाही के मामले, रेन्ट कंट्रोल एक्ट, सूखाधिकार से संबंधित मामलों के साथ-साथ विक्रय पत्र, दानपत्र और वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण के मामले तथा अन्य प्रकृति के सभी मामले सम्मिलित और चिन्हांकित कर आपसी राजीनामा के आधार पर नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया जाएगा।
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मौके पर 159 आवेदनों का किया गया निराकरण
हितग्राहियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं सेकिया गया लाभान्वितबालोद/जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम पोण्डी में आज आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर ग्रामीणों के लिए सौगातों भरा रहा। इस दौरान शिविर में अनेक हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, वय वंदन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत नवनिर्मित आवासों के आवासपूर्णता प्रमाण पत्र, मुकबधिर हितग्राहियों को श्रवण यंत्र एवं दिव्यांग हितग्राहियों को छड़ी और इलेक्ट्रिक व्हील चेयर प्रदान करने के अलावा मत्स्य विभाग के योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को मछली जाल, आईस बाॅक्स प्रदान करने के साथ ही ग्रामीणों एवं हितग्राहियों को शासन के अनेक जनकल्याणकारी योजनओं से लाभान्वित किया गया। उल्लेखनीय है कि पिछले जनसमस्या निवारण शिविर की भाँति कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी एवं अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक ने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ बस में सवार होकर ग्राम पोण्डी पहुँचे। जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों के ग्राम पोण्डी पहुँचने पर ग्रामीणों एवं स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा कलेक्टर श्रीमती मिश्रा एवं अधिकारियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। पोण्डी जनसमस्या निवारण शिविर में आज जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम श्री नूतन कंवर, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष के अलावा जनपद अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती टेमरिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा जिला प्रशासन के आला अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। पोण्डी जनसमस्या निवारण शिविर में आज कुल 159 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसमें सभी 159 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। प्रशासन द्वारा इस शिविर क्षेत्र में पहले करते हुए आसपास के विभिन्न ग्रामों में विगत 10 दिनों में लोगों की मांगों एवं समस्याओं से संबंधित 1304 आवेदन प्राप्त किए गए, जिसका शत प्रतिशत निराकरण कर लिया गया है।जनसमस्या निवारण शिविर को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने शिविर में उपस्थित ग्रामीणों को जनसमस्या निवारण शिविर के आयोजन के महत्व एवं उद्देश्यों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक अमले की उपस्थिति सुनिश्चित कराकर उनकी वास्तविक जरूरतों, मांगों एवं समस्याओं से रूबरू कराने तथा उनके मांगों एवं समस्याओं का समुचित निराकरण सुनिश्चित करने का अभिनव प्रयास किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने केन्द्र एवं राज्य सरकार के द्वारा आम जनता के हित में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी देते हुए ग्रामीणों को शिविर में उपस्थित होेकर इन योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत किए गए मांगों एवं समस्याओं की जानकारी देते हुए कहा कि जिला स्तर एवं विभागीय योजनाओं के माध्यम से हल किए जाने वाले मांगों एवं समस्याओं का वे त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा उन्होंने शासन स्तर पर निराकृत होने वाले समस्याओं के निराकरण हेतु भी उचित कार्यवाही करने का भी आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को जीवन में जल का महत्व बताते हुए, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल संरक्षण हेतु सहभागिता निभाने तथा अपने-अपने घरों में सोख्ता गड्ढा बनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए उन्हें किसी भी स्थिति में बाल विवाह नही करने तथा इसके रोकथाम के कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की शपथ दिलाई। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री तोमन साहू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पोण्डी में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में कलेक्टर एवं जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी का आत्मीय अभिनंदन एवं स्वागत किया। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि शिविर में कलेक्टर श्रीमती मिश्रा एवं वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति से पोण्डी तथा अंचल के विकास को नई गति मिलेगी। इस दौरान अतिथियों के द्वारा नन्हें मुन्हें बच्चों को स्वादिष्ट खीर खिलाकार उनका अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इसके अलावा गर्भवती माताओं को सुपोषण किट भेंटकर उनका गोदभराई रस्म को पूरा किया गया। शिविर में अतिथियों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को जल संरक्षण के कार्यों के अंतर्गत पानी के संरक्षण एवं संवर्धन करने तथा उल्लास कार्यक्रम अंतर्गत 15 वर्ष या इससे अधिक के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के पुनीत कार्य में सहभागिता सुनिश्चित करने की भी शपथ दिलाई।आज आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में समाज कल्याण विभाग द्वारा 06 हितग्राहियों को श्रवण यंत्र, 03 हितग्राहियों को छड़ी तथा 01 हितग्राही को बैटरी चलित ट्राय सायकल तथा 04 दिव्यांग महिलाओं को मोटराइज्ड सिलाई मशीन प्रदान किया गया। राजस्व विभाग द्वारा 09 हितग्राहियों को ऋण पुस्तिका प्रदान किया गया। इसी तरह 84 हितग्राहियों को श्रम कार्ड, परिवहन विभाग द्वारा 39 हितग्राहियों को लर्निंग लाइसेंस, स्व सहायता समूह की 06 महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ऋण स्वीकृति का चेक प्रदान किया गया। इसी तरह मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 05, राष्ट्रीय पेंशन योजना के 05 एवं वृद्धापेंशन योजना के 05 हितग्राहियों को सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया। इसी तरह 120 हितग्राहियों को राशन कार्ड, 05 हितग्राहियों को जन्म प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत 10 हितग्राहियों आवास स्वीकृति एवं पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इसी तरह 80 हितग्राहियों को जाॅब कार्ड, 05 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, मछली पालन विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को 02 जाल एवं 02 आईस बाक्स प्रदान किया गया। कृषि विभाग द्वारा 05 हितग्राहियों को बैटरी चलित स्पेयर प्रदान किया गया। शिविर में स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग के स्टाॅल में चिकित्सकों के द्वारा ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क दवाइयां भी वितरित की गई। -
नीर चेतना अभियान के तहत गांव में निकाली गई जागरूकता रैली
बालोद/कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा एवं जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने आज बालोद विकासखण्ड के ग्राम पोण्डी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल होने के पूर्व ग्राम पोण्डी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर स्वच्छता कार्यक्रम की शुरूआत की। इस मौके पर कलेक्टर श्रीमती मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक एवं अधिकारी-कर्मचारियों ने मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर स्वच्छता अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। इस दौरान ग्रामीणों एवं महिलाओं के द्वारा ’जल है तो कल है’ तथा पौधरोपण एवं पानी के संरक्षण के संबंध में गगनस्पर्शी नारे भी लगाए।कलेक्टर श्रीमती मिश्रा एवं अधिकारियों ने ग्राम पोण्डी में जल संरक्षण एवं स्वच्छता अभियान के अंतर्गत किए जा रहे बेहतरीन कार्यों की भी भूरी-भूरी सराहना की। इस मौके पर एसडीएम श्री नूतन कंवर, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष सहित ग्राम पंचायत के सरपंच एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा अधिकारी-कर्मचारीगण उपस्थित थे। -
कोचिंग हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 20 अपै्रल
बालोद/जिला प्रशासन बालोद एवं जिला रोजगार कार्यालय द्वारा अग्निवीर भर्ती के अभ्यर्थियों को निःशुल्क कोचिंग प्रदान किया जाएगा। जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि जिले के इच्छुक आवेदक गूगल फार्म के माध्यम से 20 अपै्रल 2026 तक आवेदन आमंत्रित की गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय थल सेना में अग्निवीर भर्ती हेतु 13 फरवरी 2020 से 01 अप्रैल 2026 तक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया गया है। सेना भर्ती कार्यालय रायपुर द्वारा माह जून में उक्त पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा (सीईई) लिया जाना संभावित है। उक्त वेबसाइट पर आवेदन करने वाले बालोद जिले के अभ्यर्थियों को जिला प्रशासन बालोद और जिला रोजगार कार्यालय बालोद द्वारा निःशुल्क कोचिंग प्रदान किया जाएगा। उन्होेंने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी भारतीय थल सेना में अग्निवीर भर्ती हेतु पंजीयन पश्चात् 20 अपै्रल 2026 तक गूगल फार्म के लिंक https://forms.gle/y4JFWWQPjztdk1Ka9 के माध्यम से अथवा जारी किए गए क्यू आर कोड स्केन कर आवेदन कर सकते है। उन्होंने बताया कि आवेदक को सेना भर्ती कार्यालय द्वारा जारी पंजीयन क्रमांक एवं व्हाट्सएप्प मोबाईल नम्बर उल्लेखित करना अनिवार्य है। -
बालोद/राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2025-2026 की समाप्ति को देखते हुए शासकीय भुगतानों और आहरण प्रक्रियाओं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिसके अंतर्गत समस्त चैक आहरण अधिकारी 25 मार्च 2026 को शाम 05 बजे तक अपने चैकबुक कोषालय अधिकारी के पास जमा किया जा सकता है। इसके साथ ही उपयोग किए गए निरंक चेक का स्पष्ट विवरण कोषालय अधिकारी को चेक बुक के साथ दिया जाएगा। अति आवश्यक परिस्थितियों में 27 एवं 30 मार्च 2026 तक कोषालय अधिकारी, संचालक बजट के ई-मेल आईडी [email protected] के माध्यम से स्वीकृति प्राप्त कर संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी को चेकबुक उपलब्ध कराया जाएगा। जिस पर संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी के हस्ताक्षर एवं कोषालय अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षर किए जा सकते है। वित्तीय वर्ष के लेन-देन की समाप्ति के पश्चात आहरण एवं संवितरण अधिकारी की प्राप्ति अभिस्वीकृति लेकर चेकबुक वापस किया जा सकेगा। जारी किये गए समस्त चेकों का भुगतान 30 मार्च 2026 तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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कोषालयों में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट से संबंधित देयक स्वीकार करने एवं ई-कुबेर के माध्यम से भुगतान करने दिशा-निर्देश जारी
बालोद/छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति को देखते हुए बजट देयकों के भुगतान और ई-कुबेर के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य शासन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार इस वित्तीय वर्ष से संबंधित समस्त देयकों को कोषालयों और उपकोषालयों में जमा करने की अंतिम तिथि 25 मार्च, 2026 निर्धारित की गई है। इसी तरह सएनए-स्पर्श से संबंधित समस्त भुगतान के लिए देयक स्वीकृति की अंतिम तिथि 30 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। अंतिम तिथि के पश्चात देयक ekoshonline.cg.nic.in/eBill एवं ई-पेरोल संबंधी देयक ekoshonline.cg.nic.in/ePayroll Module में 27 मार्च 2025 तक नवीन एवं कोषालय द्वारा आपत्ति सहित वापस किए गए एवं जमा किए जा सकेंगें। 25 मार्च, 2026 तक कोषालय, उपकोषालय द्वारा स्वीकार किए गए देयकों पर ली गई आपत्तियों के नियमानुसार निराकरण कर प्रस्तुत किए जाने वाले देयकों पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा। वित्त विभाग द्वारा 25 मार्च 2026 के पश्चात यदि कोई सहमति, स्वीकृति जारी की गई है तो उन प्रकरणों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। भारत सरकार से प्राप्त राशि (शत प्रतिशत केन्द्रीय सहायत्ता अथवा केवल केन्द्रांश की राशि) से संबंधित देयकों एवं माननीय विधायकों के स्वत्वों से संबंधित देयकों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। राजभवन सचिवालय, विधानसभा सचिवालय, निवास कार्यालय से संबंधित प्राप्त देयकों, उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित देयकों पर भी उक्त प्रतिबंध लागू नहीं होगा। समस्त कोषालय, उपकोषालय अधिकारी को उक्त तिथि तक प्राप्त समस्त देयकों का निराकरण 30 मार्च 2026 तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। -
दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के लगभग 03 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
14 मार्च को आयोजित लोक अदालत में 9374 योजना के पात्र उपभोक्ताओं को मिलेगा सुनहरा अवसरबालोद/छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को आर्थिक राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘‘बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’’ का औपचारिक शुभारंभ 12 मार्च 2026 को मेडिकल कॉलेज रायपुर के ऑडिटोरियम में किया गया। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव एवं पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एमडी श्री भीमसिंह कंवर के मार्गदर्शन में तैयार यह योजना मुख्य रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल और कृषि श्रेणी के अशासकीय उपभोक्ताओं को बकाया राशि के बोझ से मुक्त करने के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल), दुर्ग रीजन के लगभग 03 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा, जिनके ऊपर 72 करोड़ रुपए की राशि बकाया है।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के माध्यम से 31 मार्च 2023 के पूर्व निष्क्रिय बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बकाया राशि भुगतान पर मूल राशि पर 75 प्रतिशत की छूट एवं अधिभार राशि पर 100 प्रतिशत की छूट, निष्क्रिय घरेलू श्रेणी के उपभोक्ता के लिए बकाया राशि भुगतान पर मूल राशि पर 50 प्रतिशत की छूट एवं अधिभार राशि पर 100 प्रतिशत की छूट तथा निष्क्रिय कृषि (स्थायी एवं अस्थायी) श्रेणी के उपभोक्ता के लिए बकाया राशि भुगतान पर मूल राशि पर 50 प्रतिशत की छूट एवं अधिभार राशि पर 100 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार 31 मार्च 2023 के पूर्व सक्रिय बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ता के लिए 05 वर्ष से अधिक अवधि के बकाया राशि भुगतान पर मूल राशि पर 75 प्रतिशत की छूट एवं अधिभार राशि पर 100 प्रतिशत की छूट तथा 01 वर्ष से 05 वर्ष तक अवधि के सक्रिय बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ता के लिए बकाया राशि भुगतान पर मूल राशि में 50 प्रतिशत एवं अधिभार राशि में 100 प्रतिशत की छूट की सुविधा मिलेगी।31 मार्च 2023 की स्थिति में सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं के लिए बकाया राशि भुगतान पर अधिभार राशि में 100 प्रतिशत छूट के साथ मूल राशि के किश्तों में भुगतान करने पर भी छूट की सुविधा मिलेगी। इसके तहत एकमुश्त भुगतान पर मूल राशि में 10 प्रतिशत एवं अधिभार राशि में 100 प्रतिशत, तीन किस्तों में भुगतान पर मूल राशि में 05 प्रतिशत एवं अधिभार राशि में 100 प्रतिशत तथा छः किश्तों में भुगतान पर मूल राशि में शून्य प्रतिशत एवं अधिभार राशि में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।शेष बकाया राशि की किस्तों में भुगतान पर आगामी माहों में कोई अधिभार देय नहीं होगा। इस योजना में छूट का लाभ लेने के लिए पात्र सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को मोर बिजली एप के माध्यम से या संबंधित वितरण केंद्र, जोन कार्यालय में जाकर पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए उपभोक्ता को अपनी कुल बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान जमा करना होगा। योजना को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए विभाग ने मीटर वाचकों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए प्रेरित करने पर मीटर वाचकों को, निष्क्रिय, सक्रिय घरेलू, बीपीएल या कृषि श्रेणी के बकायेदारों द्वारा एकमुश्त भुगतान पर प्राप्त धनराशि का 05 प्रतिशत (अधिकतम 1000 रूपये प्रति कनेक्शन) एवं किस्तों में भुगतान किये जाने पर संपूर्ण भुगतान प्राप्त होने पर प्राप्त धनराशि का 05 प्रतिशत (अधिकतम 500 रूपये प्रति कनेक्शन) प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।सीएसपीडीसीएल दुर्ग क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री संजय खंडेलवाल ने बताया कि 14 मार्च 2026 को आयोजित लोक अदालत में दुर्ग रीजन के 9374 समाधान योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा के जिला न्यायालयों में आयोजित इस लोक अदालत के माध्यम से उपभोक्ता मौके पर ही अपने प्रकरणों का निपटारा कर भारी छूट का लाभ उठा सकते हैं। विभाग ने अपील किया है कि सभी पात्र उपभोक्ता इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं और अपने बकाया बिजली बिलों का निपटान कर एक जिम्मेदार नागरिक के रुप में बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में सहयोग करें। -
बालोद/कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना (पीएम आशा) योजनांतर्गत प्राईस सपोर्ट स्कीम के तहत किसानों का पंजीयन समितियों के माध्यम से ई समयुक्ति पोर्टल में किया जाएगा। उन्होंने योजना अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में क्रमशः अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन तथा रबी विपणन वर्ष 2026-27 में क्रमशः चना, मसूर एवं सरसों फसलों की बुआई करने वाले कृषक अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से सेवा सहकारी समितियों में आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर एवं अपना पंजीयन कराने को कहा है। उक्त योजना अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले के लिए चिन्हांकित एजेंसी नेशनल को-ऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा पंजीकृत कृषकों की फसलों का उपार्जन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य जिसमें खरीफ फसल अरहर 8000 रूपए, मूंग 8768 रूपए, उड़द 7800 रूपए, मूंगफली 7263 रुपए, सोयाबीन 5328 रूपए एवं रबी फसल चना 5875 रूपए, मसूर 7000 रूपए एवं सरसों 6200 रूपए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल तय किया गया है। जिसके लिए कृषकों का पंजीयन ई समयुक्ति पोर्टल के माध्यम से पंजीयन करने की तिथि 28 फरवरी 2026 में वृद्धि कर अब 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। शासन द्वारा जिले में उपार्जन एवं भण्डारण के लिए उपार्जन केन्द्र के रूप में विकासखण्ड बालोद अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति सांकरा-ज, निपानी, लाटाबोड़, पीपरछेड़ी विकासखण्ड गुरूर अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति फागुन्दाह, गुरूर, सनौद, बासीन विकासखण्ड डौण्डी अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति डौण्डी, चिखलाकसा विकासखण्ड डौण्डीलोहारा अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति डौण्डीलोहारा, सुरेगांव, देवरी, नांहदा विकासखण्ड गुण्डरदेही अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति गुण्डरदेही, अर्जुदा, भांठागांव-बी, कसौंदा को निर्धारित किया गया है। योजनान्तर्गत शासन द्वारा पंजीकृत कृषकों से खरीफ फसल अरहर 3 क्विंटल, मूंग 3 क्विंटल, उड़द 3 क्विंटल, मूंगफली 7 क्विंटल, सोयाबीन 5 क्विंटल प्रति एकड़, एवं रबी फसल चना 6 क्विंटल, मसूर 2 क्विंटल, सरसों 5 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से कृषकों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि अपने क्षेत्र के संबंधित समिति उपार्जन केन्द्रों में पहुँच कर फसलों के रकबे का पंजीयन एवं फसल उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते है। -
बालोद/कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना (पीएम आशा) योजनांतर्गत प्राईस सपोर्ट स्कीम के तहत किसानों का पंजीयन समितियों के माध्यम से ई समयुक्ति पोर्टल में किया जाएगा। उन्होंने योजना अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में क्रमशः अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन तथा रबी विपणन वर्ष 2026-27 में क्रमशः चना, मसूर एवं सरसों फसलों की बुआई करने वाले कृषक अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से सेवा सहकारी समितियों में आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर एवं अपना पंजीयन कराने को कहा है। उक्त योजना अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिले के लिए चिन्हांकित एजेंसी नेशनल को-ऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा पंजीकृत कृषकों की फसलों का उपार्जन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य जिसमें खरीफ फसल अरहर 8000 रूपए, मूंग 8768 रूपए, उड़द 7800 रूपए, मूंगफली 7263 रुपए, सोयाबीन 5328 रूपए एवं रबी फसल चना 5875 रूपए, मसूर 7000 रूपए एवं सरसों 6200 रूपए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल तय किया गया है। जिसके लिए कृषकों का पंजीयन ई समयुक्ति पोर्टल के माध्यम से पंजीयन करने की तिथि 28 फरवरी 2026 में वृद्धि कर अब 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। शासन द्वारा जिले में उपार्जन एवं भण्डारण के लिए उपार्जन केन्द्र के रूप में विकासखण्ड बालोद अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति सांकरा-ज, निपानी, लाटाबोड़, पीपरछेड़ी विकासखण्ड गुरूर अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति फागुन्दाह, गुरूर, सनौद, बासीन विकासखण्ड डौण्डी अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति डौण्डी, चिखलाकसा विकासखण्ड डौण्डीलोहारा अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति डौण्डीलोहारा, सुरेगांव, देवरी, नांहदा विकासखण्ड गुण्डरदेही अन्तर्गत सेवा सहकारी समिति गुण्डरदेही, अर्जुदा, भांठागांव-बी, कसौंदा को निर्धारित किया गया है। योजनान्तर्गत शासन द्वारा पंजीकृत कृषकों से खरीफ फसल अरहर 3 क्विंटल, मूंग 3 क्विंटल, उड़द 3 क्विंटल, मूंगफली 7 क्विंटल, सोयाबीन 5 क्विंटल प्रति एकड़, एवं रबी फसल चना 6 क्विंटल, मसूर 2 क्विंटल, सरसों 5 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से कृषकों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि अपने क्षेत्र के संबंधित समिति उपार्जन केन्द्रों में पहुँच कर फसलों के रकबे का पंजीयन एवं फसल उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते है। -
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के तीन मेधावी छात्रों को 12 मार्च 2026 को कृषि महाविद्यालय, रायपुर के सेमिनार हॉल में आयोजित एक समारोह में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा अचीवर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अपने-अपने शैक्षणिक वर्षों में कक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्यार्थियों में कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, साजा (बेमेतरा) की प्रथम वर्ष की छात्रा दिलेश्वरी साहू, शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर के द्वितीय वर्ष के छात्र देविदत्त जेना तथा कृषि महाविद्यालय, रायपुर की तृतीय वर्ष की छात्रा अनुष्का चौरसिया शामिल थीं। कार्यक्रम में प्रत्येक विद्यार्थि को 31,000 रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय, रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने छात्रों में शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल छात्रों को और अधिक परिश्रम करने तथा समाज और कृषि क्षेत्र में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के निदेशक शिक्षण डॉ. ए.के. डेव ने भी इस पहल की सराहना करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा से आग्रह किया कि वह प्रतिवर्ष अचीवर्स अवॉर्ड का आयोजन करता रहे, जिससे छात्रों को उच्च शैक्षणिक उपलब्धियों की ओर प्रेरणा मिलती रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के उप क्षेत्रीय प्रबंधक श्री प्रदीप यादव ने कहा कि बैंक किसानों और छात्रों के कल्याण के प्रति सदैव प्रतिबद्ध है। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और शिक्षा का उपयोग समाज तथा कृषि समुदाय के उत्थान के लिए करें। उन्होंने समाज के कल्याण और राष्ट्र के आर्थिक विकास में कृषि स्नातकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में कृषि स्नातकों के लिए उज्ज्वल भविष्य की संभावनाएँ हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बैंक आने वाले वर्षों में भी युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे कार्यक्रम जारी रखेगा।
समारोह के अंत में बैंक ऑफ बड़ौदा और विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने तथा कृषि क्षेत्र के प्रतिभाशाली छात्रों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए किए जा रहे सहयोग की सराहना की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, निदेशकगण, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य तथा विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन कृषि महाविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता के तकनीकी अधिकारी डॉ. रामा मोहन सावू द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। -
प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मेला में किसानोपयोगी नवीन तकनीकें भी प्रदर्शित की जाएंगी
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित स्वामी विवेकानंद अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा 14 एवं 15 मार्च को आयोजित दो दिवसीय एल्युमिनाई मीट ”एग्री टेक मिलन 2026“ में महाविद्यालय के पांच सौ से अधिक पूर्व छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। इस एल्युमिनाई मीट में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अन्य राज्यों से लगभग ढ़ाई सौ भूतपूर्व विद्यार्थियों के आने की संभावना है। इस अवसर पर दो दिवसीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मेला भी आयोजित किया जाएगा जिसमें कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न किसानोपयोगी नवीन प्रौद्यौगिकियां प्रदर्शित की जाएंगी। एग्री टेक मिलन 2026 का शुभारंभ कल दिनांक 14 मार्च को प्रातः 11 बजे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल करेंगे। समारोह की अध्यक्षता कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय वर्मा करेंगे। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के अधिष्ठातागण, निदेशकगण, कुलसचिव एवं छत्तीसगढ़ शासन कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अजय वर्मा ने बताया की महाविद्यालय में पहली बार एल्युमिनाई मीट का आयोजन किया जा रहा है जिसमें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत विगत लगभग 30 वर्षों में कृषि अभियांत्रिकी की पढ़ाई कर चुके 500 से अधिक भूतपूर्व विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इन पूर्व विद्यार्थियों में से अनेक विद्यार्थी संघ लोक सेवा आयोग तथा राज्य लोक सेवा आयोगों के माध्यम से भारत सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर आसीन हैं। इसके अलावा कुछ भूतपूर्व छात्र प्रतिष्ठित औद्योगिक तथा व्यवसायिक संस्थानों में निदेशक अथवा वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। अनेक विद्यार्थियों ने स्टार्टअप स्थापित कर अन्य लोगों को रोजगार प्रदान किया है। इसके अलावा लगभग 100 भूतपूर्व विद्यार्थी विभिन्न विश्विद्यालयो में निदेशक, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक के रूप में योगदान दे रहे हैं। डॉ. वर्मा ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में वर्ष 1997 में कृषि अभियांत्रिकी संकाय की स्थापना की गई थी जिसके अंतर्गत एम. टेक पाठ्यक्रम प्रांरभ किये गये थे। वर्ष 2008 में फार्म मशीनरी एवं पावर इंजिनियरिंग तथा सॉयल वाटर मैनेजमेंट में शोध पाठ्यक्रम शुरू किए गए। वर्ष 2014 में स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की स्थापना के साथ कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में विभिन्न स्नातक पाठ्क्रम प्रारंभ किये गए। उन्होनें बताया कि अब तक 700 से अधिक विद्यार्थियों ने कृषि अभियांत्रिकी के विभिन्न पाठ्यक्रमों में उपाधि प्राप्त की है। डॉ. वर्मा ने बताया कि कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय द्वारा अब तक 97 नवीन प्रौद्योगिकी विकसित की गई हैं तथा 32 डिजाईन पेटेंट किये गए हैं। उन्होंने बताया कि यह दो दिवसीय एग्री टेक मिलन 2026 एक ऐतिहासिक आयोजन होगा जिसका साक्षी यह महाविद्यालय बनने जा रहा है।













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