- Home
- सेहत
- भोजन में हल्दी का प्रयोग तो हम सभी करते हैं। इसके अलावा, अद्भुत आयुर्वेदिक हर्ब और मसाले का प्रयोग कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए एक प्रभावी औषधी के रूप में भी किया जाता है। रेगुलर हल्दी का प्रयोग तो हम सभी करते हैं, लेकिन अंबा हल्दी कुछ मामलों में रेगुलर हल्दी की तुलना में अधिक फायदेमंद होती है ।आंबा हल्दी खाने के फायदे1. कोशिकाओं को नुकसान से बचाए: एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने की वजह से शरीर में फ्री-रेडिकल्स के कारण होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करती है और कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है.2. त्वचा के लिए लाभकारी है: अंबा हल्दी त्वचा की खुजली, खुजलीदार स्कैल्प, त्वचा रोग और कई आम समस्याओं को दूर करने में बहुत प्रभावी है।3. पाचन रखने दुरुस्त: यह पाचन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसके अलावा, यह मेटाबॉलिज्म में भी सुधार करती है। किसी भी प्रकार की गैस्ट्रिक समस्या, अपच और अन्य आंत से जुड़े रोगों से अम्बा हल्दी आपको बहुत राहत देती है।4. वात दोष को करे संतुलित: यह शरीर में वात को संतुलित करने में मदद करती है। वात दोष के असंतुलन के कारण किसी भी प्रकार के दर्द से राहत दिलाने में अंबा हल्दी लाभकारी है। यह आपको जोड़ों के दर्द, गठिया आदि जैसी स्थितियों से भी राहत दिलाएगी।5. एलर्जी के लक्षण करे कम: इसमें एंटी-एलर्जी गुण होते हैं, इसलिए अगर किसी को अस्थमा, खांसी, सर्दी और अन्य एलर्जी संबंधी समस्याएं हैं, तो इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अंबा हल्दी डाइट में शामिल कर सकते हैं।6. अंबा हल्दी में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो लाइपोक्सिनेज और इंड्यूसिबल के बढ़े हुए लेवल को कम करने साइटोकिंस के उत्पादन को रोकने का काम करती है। जिससे सूजन और तनाव कम होता है। इसके अलावा इससे जोड़ों में दर्द कम करने में भी मदद मिलती है। कच्ची हल्दी को डाइट का हिस्सा बनाने से आपको भी ये फायदे मिल सकते हैं।7.कच्ची हल्दी में करक्यूमिन के साथ-साथ जरूरी ऑयल्स होते हैं। जो दर्द को खींचने का काम करते हैं। अगर आप नियमित रूप से अंबा हल्दी का सेवन करते हैं, तो आपको पुराने से पुराने दर्द को भगाने में मदद मिल सकती है।8. कच्ची हल्दी के अर्क में कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने की क्षमता होती है। इसे साथ ही लिवर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का छुटकारा अंबा हल्दी को डाइट में शामिल करने से मिल सकता है। अंबा हल्दी में इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। जो टेंशन को दूर करने के साथ साथ दिमाग को भी शांत रखने का काम करती है।9. अंबा हल्दी में करक्यूमिन के तत्व मौजूद होते हैं। जो कैंसर कोशिकाओं को शरीर में बढ़ने से रोक सकते हैं। इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर और महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करती है।अंबा हल्दी का सेवन कैसे करें--अपच की समस्या के लिए इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और इसमें सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाएं। उसके बाद खा लें।-त्वचा की समस्याओं और अन्य त्वचा की स्थितियों के लिए अंबा हल्दी का रस बनाएं और 10-15 मिलीलीटर रस का दिन में 2 बार सेवन करें।-खांसी, सर्दी, अस्थमा और कमजोर इम्यूनिटी के लिए छोटे टुकड़े काटें और शहद के साथ लें।-जोड़ों के दर्द और वात दोष के असंतुलन से जुड़े रोगों के लिए इसे कच्चा खाएं या इसका जूस बनाकर पिएं।
- बहुत से लोग इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए कई तरह की दवाइयों का सेवन करने लगते हैं। लेकिन यह दवाइयां अंदरूनी तौर पर शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में बदलते मौसम में इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए शहद का सेवन किया जा सकता हैं। शहद में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे सोडियम, पोटेशियम, फाइबर, आयरन, विटामिन बी6 और विटामिन सी पाया जाता हैं। शहद के सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होने के साथ अंदरूनी तौर पर शरीर गर्म रहता है। आइए जानते हैं फिट क्लीनिक की डाइटिशियन सुमन से कि बदलते मौसम में शहद से इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं।शहद और गर्म पानीइम्यूनिटी मजबूत करने के लिए बदलते मौसम में शहद का सेवन किया जा सकता है। इसका सेवन करने के लिए 1 गिलास हल्का गुनगुना पानी लें। इसमें 1 चम्मच शहद को मिलाकर रोज सुबह पिएं। ऐसा करने से पाचन-तंत्र हेल्दी रहने के साथ इम्यूनिटी भी मजबूत होगी।शहद और अदरकशहद और अदरक के सेवन से कई समस्याओं से राहत मिलती है। इसका सेवन करने के लिए छोटा सा अदरक को कद्दूकस करके 1 चम्मच रस निकालें। अब इस रस में 1/2 शहद को मिलाकर मिश्रण तैयार करें। अब इस मिश्रण को खाएं। यह मिश्रण सर्दी से राहत देने के साथ गले की खराश और खांसी को भी दूर करता है।शहद और नींबूइम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए शहद और नींबू का सेवन भी किया जा सकता है। नींबू विटामिन सी से भरपूर होता है। इसके सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है और बीमारियों से बचाव होता हैं। इसका सेवन करने के लिए 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच शहद और 1 नींबू का डाल कर मिलाएं। इस ड्रिंक को पीने से इम्यूनिटी मजबूत होने के साथ वजन कम होने में भी मदद मिलती हैं।शहद के फायदे-शहद के सेवन से पाचन-तंत्र मजबूत होने के साथ कब्ज, अपच और एसिडिटी से बचाव होता हैं।-शहद के सेवन से वजन कम करने में भी मदद मिलती है।-शहद में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो खांसी को कम करने में मददगार होता है।-शहद के सेवन से हार्ट संबंधित बीमारियां कम होती हैं।-शहद के सेवन से बेहतर नींद आने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए शहद को इन तरीकों से सेवन किया जा सकता हैं। हालांकि, अगर आपको कोई बीमारी या एलर्जी की समस्या हैं, तो डॉक्टर से पूछकर ही इसका सेवन करें।
- आम तौर से पाए जाने वाले इमली को अरबी और फारसी भाषा में दिए गए - हिंदी तामर और भारतीय खजूर सही मायने में उद्बोधक नाम है। भूरे रंग की नाज़ुक फली के अंदर जो मांसल खट्टा फल होता है उसमे टारटारिक एसिड और पेक्टिन समाविष्ट है। आमतौर पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय व्यंजनों में एक स्वादिष्ट मसाले के रूप में इमली का प्रयोग किया जाता है। खास तौर पर रसम, सांभर, वता कुज़ंबू (Vatha Kuzhambu), पुलियोगरे इत्यादि बनाते वक्त इमली इस्तेमाल होती है और कोई भी भारतीय चाट इमली की चटनी के बिना अधूरी ही है। यहां तक कि इमली के फूलों को भी स्वादिष्ट पकवान बनाने के उपयोग में लिया जाता है।इसके पत्ते शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं एवं अपित्तकर हैं और पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा, इसके पत्तों को पीलिया के इलाज में भी उपयोग में लाया जाता है। इमली के पेड़ की छाल एक स्तम्मक के रूप में काम आती है। इमली के फल का गूदा पाचन प्रणाली को शीतलता प्रदान करता है एवं रेचक और रोगाणु रोधक (anti-septic) भी होता है।1. पाचन विकारपके हुए फल का गूदा पित्त्त की उलटी, कब्ज और गैस की समस्या, अपचन के इलाज मे लाभदायक है। यह कब्ज़ मे भी लाभकारी है। पानी के साथ इसके गूदे को कोमल करके बनाया हुआ निषेध भूख मे कमी, भोजन ग्रहण की इच्छा मे कमी होने पर लाभकारी है। इमली के दूध का पेय भी पेचिश के इलाज मे काफी लाभकारी है।2, स्र्कवी या स्कर्वी | विटामिन-सी की कमीइमली में विटामिन सी की मात्रा प्रचुर होती है और यह स्र्कवी को रोकने और उसके इलाज में लाभदायक है।3. सामान्य सर्दी-जुकाम को दूर करने के लिएइमली और काली मिर्च का रसम, दक्षिण भारत मे सर्दी-जुकाम के इलाज के लिये इसे प्रभावशाली घरेलू नुस्खा माना जाता है।4, जलने परइमली की कोमल पत्त्तिया जलने का घाव के इलाज मे काफी लाभकारी है। उसे एक ढके हुए बर्तन पर आग से गरम करते है| फिर उसे अच्छे से पीस कर उसे छान लेते है जिससे रेतिले पदार्थ निकल जाये (अलग हो जाए)। छानने के बाद उसे तिल के तेल के साथ मिलाकर जले हुए भाग पर लगाया जाता है। इससे घाव कुछ दिनों में ही ठीक हो जाता है।
- सुबह के समय ब्रेकफास्ट में बहुत से लोग अंकुरित चना और मूंग यानी स्प्राउट्स का सेवन करते हैं। खासकर, जिम जाने वाले लोग। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें प्रोटीन और डाइट्री फाइबर के साथ कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो न सिर्फ वजन घटाने बल्कि बॉडी बिल्डिंग और मांसपेशियां बढ़ाने में भी मदद करते हैं। साथ ही इनका सेवन करने से कई बीमारियों का खतरा भी कम होती है और पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर रहती हैं। लेकिन हम में से ज्यादातर लोग स्प्राउट्स खाने का सही तरीका नहीं जानते हैं। आयुर्वेद की मानें तो स्प्राउट्स खाने का पूर्ण लाभ सिर्फ तभी मिल सकता है, जब आप इनका सही तरीके से सेवन करते हैं। इस लेख हम हम आपको इनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं...आयुर्वेद के अनुसार स्प्राउट्स खाने के नियम"आयुर्वेद के अनुसार,अंकुरित दाल, फलियां और चना कभी-कभार लेना ठीक रहता है। उदाहरण के लिए, इन्हें सप्ताह में एक या दो बार लिया जा सकता है। यदि सामान्य फलियों और अनाजों को अंकुरित अनाजों से बदल दिया जाए, तो इनसे प्राप्त होने वाले प्रोटीन और फैट की मात्रा में कुछ बदलाव हो सकते हैं। हमारा शरीर अच्छी तरह से व्यवस्थित और केंद्रित पोषक तत्वों को अधिक महत्व देता है। हालांकि, स्प्राउट्स पोषण से भरपूर होते हैं। इसलिए इसे पचाना भारी होता है। इसे पचने योग्य बनाने और अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए अपने आहार में अंकुरित अनाज को शामिल करने के लिए इन नियमों का पालन करने की जरूरत है...1. दैनिक सेवन न करेंअपनी दिनचर्या में अंकुरित अनाज को शामिल न करें, इसे हमेशा कभी-कभार खाएं, क्योंकि यह पचने में भारी होता है और इसमें संक्रमणकारी गुण होते हैं।2. उबालकर खाएंसेवन से पहले स्प्राउट्स को उबाल लें। इसे कच्चा न खाएं, उबालने के बाद यह पचने में और भी आसान हो जायेगा।3. पाचक मसाले डालेंअंकुरित अनाज को पकाते समय पाचक मसाले डालें, मसाले जैसे जीरा पाउडर, काली मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर आदि।
-
शरीर को हेल्दी और मजबूत रखने के लिए प्रोटीन, कैल्शियम, और विटामिन की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। ज्यादातर लोगों में खून की कमी के चलते कमजोरी होने लगती है। आयरन का काम खून बनाना, हीमोग्लोबिन लेवल को कंट्रोल करना है। इसी के साथ ये शरीर में एनर्जी बढ़ाते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। आयरन की कमी से ज्यादातर लोगों को थकान हो सकती है। इसकी वजह से रंगत भी काली होने लगती है। अगर आपके शरीर में भी आयरन की कमी है तो आप आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा बताई ये चीजें खा सकते हैं।
आयरन बढ़ाने के लिए चीजेंआंवला, चुकंदर और गाजर बढ़ाएगा खूनचुकंदर और गाजर आयरन से भरपूर होते हैं और आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है। इन तीनों को एक साथ खाने से आयरन बढ़ाएगा। आप आंवला, चुकंदर और गाजर का जूस पी सकते हैं।तिल के बीज से बनाएं लड्डूये आयरन, कॉपर, जस्ता, सेलेनियम, विटामिन बी 6, फोलेट और ई से भरे होते हैं। इसे खाने के लिए लगभग 1 बड़ा चम्मच काले तिल लें, और फिर इन्हें सूखा भून लें। फिर इसमें एक चम्मच शहद और घी के साथ मिलाएं। फिर इसका लड्डू बनाएं।खजूर, अंजीर और किशमिश है फायदेमंदइन तीनों चीजों से आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर, विटामिन ए और सी से भरपूर है। आप 2-3 खजूर, 2 अंजीर और एक बड़ा चम्मच किशमिश लें और फिर इसे रात भर भिगोएं। इससे एनर्जी बढ़ती है और आयरन का लेवल बढ़ता है।दुबा घासयह बीटा-कैरोटीन, विटामिन के, फोलिक एसिड, कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, विटामिन सी,से भरपूर होते हैं। रोजाना सुबह सबसे पहले इसका केवल 1 चम्मच दुबा खाने से आपकी इम्यूनिटी बूस्ट होगी।रोजाना खाएं एक अनारअनार विटामिन के, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम और प्रोटीन से भरपूर होता है। यह विटामिन सी से भरपूर होता है। अनार में विटामिन सी की हाई मात्रा होती है। इससे शरीर में आयरन बढ़ता है।मोरिंगामोरिंगा की पत्तियां पर्याप्त मात्रा में आयरन, विटामिन ए, सी और मैग्नीशियम से भरपूर होती हैं। रोजाना सुबह खाली पेट घी/शहद के साथ 1 चम्मच मोरिंगा पत्ती का पाउडर लें। - मौसम बदलने के कारण कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता हैं। बहुत से लोग इस मौसम में काफी जल्दी बीमार होते हैं क्योंकि उनकी इम्यूनिटी काफी कमजोरी होती हैं। इस मौसम में अगर ठीक से देखभाल न कि जाएं, तो मौसमी बीमारियां आसानी से लग जाती हैं। अक्सर लोग बीमारियों से बचने के लिए कई तरह के पाउडर या दवाइयों का सेवन करते हैं। लेकिन बार इनके सेवन से भी मन मुताबिक रिजल्ट नहीं मिलता है। ऐसे में बदलते मौसम में इम्यूनिटी बढ़ाने और मौसमी बीमारियों से बचने के लिए हर्बल चाय का सेवन किया जा सकता हैं। यह चाय पीने से अंदरूनी गर्माहट मिलती हैं और शरीर भी स्वस्थ रहता हैं।पुदीना चायबदलते मौसम में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए पुदीना चाय का सेवन किया जा सकता हैं। पुदीना चाय पीने से मौसमी बीमारियों से बचाव होने के साथ तनाव कम करने में मदद मिलती है। यह चाय पीने से मौसमी बीमारियों का खतरा कम होता हैं। इस चाय को बनाने के लिए 2 कप पानी रखें। उसमें 5 से 8 पुदीना की पत्तियां डालकर और 1/2 छोटा चम्मच काली मिर्च डालकर 5 मिनट के लिए उबालें। जब पानी आधा रह जाएं, तो छानकर इसे पिएं। स्वाद के लिए इसमें शहद को भी मिलाया जा सकता है।अदरक की चायबदलते मौसम में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए अदरक की चाय का सेवन किया जा सकता हैं। अदरक में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो सर्दी, जुकाम और खांसी से बचाव करते हैं। अदरक की चाय बनाने के लिए 1 कप पानी में 1 चम्मच कद्दूकस की हुए अदरक को मिलाएं। अब पानी को अच्छे से उबलने के बाद इसें छानकर कप में डालें। इसमें 1 चम्मच नींबू का रस और शहद मिलाकर पिएं।हल्दी की चायबदलते मौसम में हेल्दी रहने के लिए हल्दी की चाय का सेवन भी किया जा सकता है। हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर की सूजन को दूर करने के साथ इम्यूनिटी को भी मजबूत करते हैं। हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को स्वस्थ रखते हैं। 1 कप पानी में 1/4 चम्मच हल्दी, 1 चुटकी काली मिर्च और 1 चुटकी दालचीनी पाउडर डालकर मिलाएं। अब इसे छानकर उपर से शहदल मिलाकर पिएं।ग्रीन टीअगर आप भी बदलते मौसम में इम्यूनिटी को बढ़ाना चाहते हैं, तो डाइट में ग्रीन टी को अवश्य शामिल करें। ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडे्टस इम्यूनिटी को मजबूत करके शरीर को स्वस्थ रखते हैं। इस चाय को पीने से वजन कंट्रोल में रहता है। दिन में 1 कप ग्रीन टी का सेवन किया जा सकता हैं।कैमोमाइल टीबदलते मौसम में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए कैमोइल टी का सेवन किया जा सकता हैं। यह चाय पीने से सर्दी-जुकाम में राहत मिलने के साथ कई बीमारियों से राहत मिलती हैं। यह हर्बल चाय पाचन को हेल्दी रखने के साथ शरीर को स्वस्थ रखता हैं।बदलते मौसम में इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए यह हर्बल चाय पी जा सकती हैं। हालांकि, अगर आपको कोई बीमारी या एलर्जी की समस्या हैं, तो डॉक्टर से पूछकर ही इन चाय का सेवन करें।
- नियमित आंवला खाने के अनेक फायदे हैं। आयुर्वेद के अनुसार हरेक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए रोज 1-2 आंवला जरूर खाने चाहिए। पोषक तत्व और कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही, इसमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। इसके अलावा, आंवले में डाइट्री फाइबर, आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। यह न सिर्फ शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है, बल्कि कई गंभीर रोगों से भी आपको दूर रखने में मदद करता है। इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर, त्वचा और बालों को स्वस्थ रखने तक, रोज आंवले का सेवन संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। क्या आपने कभी आंवले का सलाद खाया है? आंवला को डाइट में शामिल करने और इसके स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने का यह भी एक आसान तरीका है। इस लेख में हम आपके साथ आंवले का सलाद खाने के फायदे और रेसिपी के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।आंवले का सलाद खाने के फायदे--पाचन संबंधी समस्याएं करे दूर-बालों को रखे स्वस्थ-डायबिटीज और बीपी रखे कंट्रोल-कोलेस्ट्रॉल कम करने में करे मदद-हृदय रोगों का खतरा करे कम-शरीर को इंस्टेंट एनर्जी-वजन घटाने में करे मददआंवले के सलाद की रेसिपीसामग्री:1 बड़ा चम्मच मूंगफली का मक्खन1/2 बड़ा चम्मच जैतून या राइस ब्रान का तेल1 चम्मच शहद1/2 छोटा चम्मच मिर्च पाउडर3/4 छोटा चम्मच नमक1 चम्मच अनारदाना पाउडर1 चम्मच अमचूरसजावट के लिए मेवे या बीज2 बड़े चम्मच नींबू का रसजरूरी सब्जियां4 आंवले कटे हुए1 शिमला मिर्च4 सलाद के पत्ते1 टमाटर1 खीरा (वैकल्पिक)बनाने का तरीकाएक बाउल में पहले तेल और पीनट बटर डालें। उसके बाद इसमें आंवला और सब्जियों को छोड़कर सभी सामग्रियां डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। अंत में सभी सब्जियां डालें और मिस्क करें। बस आपका आंवले का सलाह तैयार है। इसका आनंद लें।
- सर्दियों का मौसम शुरू होने से कई दिनों पहले ही मौसम में बदलाव आने लगता है। वातावरण में शुष्क हवा चलने से त्वचा में ड्राईनेस बढ़ने लगती है, इस कारण त्वचा में भी बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में त्वचा में खुजली, इरिटेशन, रेडनेस जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इस समस्या से राहत पाने के लिए आप घर में ही पाए जानें वाली कुछ चीजें इस्तेमाल कर सकते हैं, तो ये नैचुरल मॉइस्चराइजर का काम कर सकती हैं। आइए इस लेख के माध्यम से जानें इस बारे में।नारियल तेल से मसाजदादी-नानी के नुस्खों से लेकर ब्यूटी हैक्स तक नारियल तेल जरूर इस्तेमाल किया जाता है। यह त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है और स्किन को हाइड्रेटेड भी रखता है। वहीं इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा के संक्रमण को रोकने में मदद कर सकते हैं। इसे आप रात में बॉडी में मसाज करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।शहदसर्दियां आने से पहले ही अगर आपकी स्किन ड्राई होने लगी हैं, तो शहद से बेहतर क्या ही होगा। नहाने से पहले कच्चे दूध में शहद मिलाकर चेहरे पर मसाज करें। शहद में मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं, जो स्किन को हाइड्रेट करने में मदद कर सकते हैं। इससे त्वचा की ड्राईनेस कम होगी और स्किन पर ग्लो भी आएगा।गुनगुना घीघी को हल्का गर्म करके शरीर पर लगाने से त्वचा की ड्राईनेस कम होती है। यह बहुत ही पुराना और आजमाया हुआ नुस्खा है। घी में हेल्दी फैट्स और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं, जो स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए आप नहाने से एक घंटा पहले गुनगुने घी से शरीर की मसाज कर सकते हैं।एलोवेरा जेलअगर आप चेहरे के लिए कोई लाइट मॉइस्चराइजर ढूंढ रहे हैं, तो एलोवेरा जेल एक अच्छा विकल्प है। यह स्किन को गहराई तक मॉइस्चराइज करता है और ग्लोइंग भी बनाए रखता है। एलोवेरा जेल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की खुजली और इंफेक्शन से राहत देने में भी मदद करते हैं। इसके लिए आप इसे नहाने के बाद इस्तेमाल कर सकते हैं।बादाम का तेलबादाम के तेल में आवश्यक विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं, इसे रात में सोते दौरान चेहरे पर मसाज करें। यह स्किन की ड्राईनेस कम करने के साथ डार्क स्पॉट्स से राहत देने में भी मददगार है।इन चीजों का भी रखें ध्यान--अपनी त्वचा के लिए ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल न करें, इससे त्वचा की ड्राईनेस बढ़ती है।-केमिकल फेशियल और स्किन ट्रीटमेंट् कम करवाएं, अन्यथा इससे त्वचा की ड्राईनेस बढ़ सकती है।-पर्याप्त पानी पिएं और फलों का सेवन भी करें, इससे आपकी स्किन हेल्दी रहेगी।-इन 5 चीजों को आप नैचुरल मॉइस्चराइजर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको स्किन एलर्जी रहती है, तो इस्तेमाल से बेहतर पहले पैच टेस्ट जरूर करें।
- कोयनार एक प्रकार का साग है, जिसकी सब्जी खाई जाती है। मुननगे की तरह कोयनार के पत्ते और फूल दोनों खाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल बुखार, बुखार के बाद की कमजोरी और संक्रमण से होने वाली लंबी बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उसे ठीक करने में किया जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन और खनिज होते हैं। आज हम जानेंगे कि इस सब्जी को कैसे बनाया जाता है ।विभिन्न् भाषाओं में नाम*रोंगा-कंचन (असमिया),* कोइराल (बंगाली),*कनियार (हिंदी),*देवकंचन (कन्नड़),*रक्ता चंदन (मराठी),कैसे बनाएं सागसामग्री- कोइनर के पत्तेजीरा (जीरा)लाल मिर्च, साबूतप्याज़ (प्याज)सरसों तेल (सरसों तेल)कोयनार के अच्छे पत्ते लें। थोड़ा सा सरसों का तेल गरम करें और आँच को कम करने से पहले एक स्मोकिंग पॉइंट पर ले आएँ। जीरे के साथ तेल तडक़ाएं। लाल मिर्च डालें और मिर्च जलने से पहले प्याज डालें और उसे सुनहरा होने तक भून लें। अब इसमें साग डालकर पकाएं। इसे चावल या रोटी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है।कोयनार साग खाने में जितना स्वादिष्ट लगता है स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इम्यून सिस्टम को भी बूस्ट करता हैं। इसे छत्तीसगढ़ में कोईलार भाजी कहते हैं और झारखंड में कोयनार साग। इसे खाने से शरीर में आयरन और खून की कमी पूरी होती है । इस साग का सेवन करने से कब्ज की शिकायत भी दूर होती है।
- करवा चौथ का व्रत हर महिला के लिए बहुत खास होता है। इस व्रत में सुबह 4 बजे सरगी खाने के बाद सीधा रात में ही खाना खा पाते हैं। ऐसे में ज्यादातर घरों में तला-भूना जैसे कि पूरी, कचोड़ी, पकोड़े जैसी चीजें बनती हैं। वहीं दिनभर के उपवास के बाद रात में भारी खाना खाने से तबीयत भी खराब हो सकती है। इसलिए करवा थाली में हमेशा ऐसे पकवानों को शामिल करना चाहिए, जो आपके पाचन के लिए भी नुकसानदायक न हो। अगर आप कंफ्यूज हैं, कि आपको अपनी करवा थाली में किन पकवानों को शामिल करना चाहिए, तो ये 3 हेल्दी रेसिपीज आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। ये रेसिपीज बदलते मौसम में भी आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, तो चलिए जानते हैं बनाने की विधि।ड्राई फ्रूट खीरकरवा थाली में मीठा रखना काफी जरूरी होता है। वहीं कुछ लोग तो मीठा खाकर ही व्रत खोलते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग, मालपुआ, रसगुल्ले या हलवे जैसी चीजें ज्यादा रखते हैं। लेकिन इन चीजों के अधिक सेवन से पाचन खराब भी हो सकता है। ऐसे में आप ड्राई फ्रूट्स की खीर तैयार कर सकते हैं। इसमें हेल्दी फैट्स के साथ भरपूर मात्रा में सभी पोषक तत्व होते हैं, जो व्रत के बाद आपको एक्टिव रखने में मदद कर सकते हैं।खीर के लिए आप मखाने, काजू, बादाम, चिरैंजी, पिस्ता को घी में रोस्ट करके ग्राइंड कर लें। अब कढ़ाई में दूध उबालें और इसमें खजूर का पल्प डालें। आखिर में ड्राई फ्रूट से तैयार किया गया पाउडर खीर में मिलाएं। खीर को 15-20 मिनट तक पकाएं और गरमा गर्म सर्व करें।वेजिटेबल पुलावआपकी तीखे की क्रेविंग के लिए वेजिटेबल पुलाव अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इसमें पर्याप्त सब्जी इस्तेमाल की जाती है, जिससे यह आपके लिए हैवी मील नहीं होगा। इसके लिए टमाटर, पनीर, मटर, आलू, गाजर, शिमला मिर्च को काटकर एक प्लेट में रख लें। अब खड़े मसालों के साथ सब्जियां भूनें और भीगे हुए चावल डालें। दो सीटी में आपके खूशबूदार और स्वादिष्ट पुलाव बनकर तैयार हो जाएगा।खीरे का रायताअगर आप करवा चौथ में डिनर के लिए तली-भूनी चीजें रख रही हैं, तो ऐसे में खीरे का रायता पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे तैयार करने के लिए दही में खीरे को कद्दुकस करके डाला जाता है। इसके बाद काला नमक, धनिया डालकर हींग-जीरे का देसी छौंक डाला जाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ फीलिंग भी होता है। इसे आप करवा थाली में साइड मील के तौर पर शामिल कर सकते हैं।इन व्यंजनों को करवा थाली में शामिल किया जा सकता है। ये पाचन को नुकसान नहीं करेंगी, साथ ही इनके सेवन से आप ओवरईटिंग की फीलिंग भी नहीं होगी
- बहुत से लोगों के साथ यह समस्या देखने को मिलती है, कि वे रात में एक अच्छी नींद लेने के बाद भी काफी थकान महसूस करते हैं। ऐसा होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। अगर आपको कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है और फिर भी दिनभर शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं, तो इससे छुटकारा दिलाने में राजगिरा आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।थकान दूर करने के लिए राजगिरा के फायदेराजगिरा को कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे चौलाई, रामदाना और अमारंथ। यह एक ग्लूटेन-फ्री अनाज है, जिसमें डाइट्री फाइबर बहुत अच्छी मात्रा में मौजूद होता है। राजगिरा के बीज और इसकी पत्तियां, दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जिससे यह शरीर को एनर्जी प्रदान करने में मदद करता है। जिन लोगों को थकान और कमजोरी महसूस होती है या किसी बीमारी से ठीक हो रहे हैं, उनके शरीर में ऊर्जा बढ़ाने और जल्द रिकवरी में यह बहुत मदद करता है।थकान दूर करने के लिए राजगिरा का प्रयोग कैसे करथकान दूर करने के लिए आप राजगिरा के बीज और पत्तियों का सूप बनाकर पी सकते हैं। यह पचने में भारी होता है, लेकिन अगर आप अच्छी तरह पकाकर इसका सेवन करते हैं, तो यह आसानी से पचने योग्य बन सकता है। इसके लिए आप इसे पकाते समय जीरा, काली मिर्च और घी जैसी चीजों का प्रयोग कर सकते हैं। इस तरह पकाकर खाने से इसे जल्द पचाने और अधिकतम लाभ पाने में मदद मिलेगी।कभी-कभी थकान दूर करने के लिए राजगिरा का सेवन करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन यह सलाह दी जाती है कि आपको इसका सेवन नियमित नहीं करना चाहिए। इसका अधिक सेवन करने से शरीर में कफ दोष बढ़ता है। इसलिए हफ्ते में 2 बार सेवन करना ही पर्याप्त है।
- डॉक्टर के अनुसार ब्लड प्रेशर एक स्थिति है जिसके कारण व्यक्ति को हार्ट अटैक और स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही, स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याए होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि समय रहते आपको अपनी लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव कर हाई बीपी जैसी समस्याओं से बचाव कर लेना चाहिए। डाइट में काबुली चने को शामिल करने से हाई बीपी की समस्या को कम नियंत्रित करने में मदद मिलती है। आगे जानते हैं इसके फायदों के बारे में।ब्लड प्रेशर के लिए फायदेमंद है काबुली चनापोटेशियम से भरपूरपोटेशियम एक महत्वपूर्ण मिनरल है जो ब्लड प्रेशर के लेवल को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आपके शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है। दरअसल, सोडियम की वजह से शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। एक कप पके हुए काबुली चने से आपको करीब 477 मिलीग्राम पोटेशियम मिलता है।हाई फाइबरकाबुली चने में फाइबर की मात्रा पाई जाती है। हाई फाइबर डाइट ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक होती है। फाइबर के कारण मोटापा तेजी से कम होता है। साथ ही, नसों में जमा प्लाक कम होने में मदद मिलती है। इससे नसों की ब्लॉकेज खुल जाती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे हाई बीपी की समस्या में आराम मिलता है।सोडियम की मात्रा कम होनासोडिम को हाई बीपी का एक मुख्य कारण माना जाता है। प्रोसेस्ड फूड में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकती है। वहीं, काबुली चने में सोडियम की मात्रा कम होती है, जो शरीर में सोडियम के स्तर को कम करने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जा सकता है।मैग्नीशियम का मुख्य स्रोतमैग्नीशियम शरीर के लिए आवश्यक मिनरल होता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ब्लड वेसल्स (नसों) को आराम देने में मदद करता है। जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है। काबुली चने के एक कप में लगभग 48 मिलीग्राम मैग्नीशियम पाया जाता है।हार्ट हेल्थ के लिए महत्वपूर्णकाबुली चने न केवल ब्लड प्रेशर, बल्कि हार्ट हेल्थ के लिए भी आवश्यक माना जाता है। इसमें विटामिन सी और ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और शरीर की सूजन को कम करने में मदद कर सकता हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और शरीर की सूजन हाई ब्लड प्रेशर का कारण बन सकते हैं।डाइट में कैसे करें शामिल-काबुली चने को आप दाल के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसके साथ रोटी या चावल खा सकते हैं।-उबले हुए काबुली चने का सेवन किया जा सकता है। इसमें थोड़ा सा मसाला डालकर इसका स्वाद बढ़ जाता है।-सलाद के साथ भी आप काबुली चने के मिक्स करके डाइट में शामिल कर सकते हैं।जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है वह लाइफस्टाइल में भी बदलाव अवश्य करें। शराब व सिगरेट से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, रोज सुबह करीब आधा घंटा योग व प्राणायाम करने से ब्लड प्रेशर की समस्या में आराम मिलता है। यदि, हाई बीपी की समस्या अधिक है, तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- हम में से ज्यादातर लोग जिमीकंद की सब्जी का सेवन करते हैं। यह सब्जी खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है, उतनी ही सेहत के लिए लाभकारी भी होती है। जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, यह उनकी समस्या को दूर करने के लिए एक रामबाण औषधि साबित हो सकती है। यह बवासीर में सुधार करने में भी मदद करती है। लेकिन यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि आपको इसका लाभ सिर्फ तभी मिल सकता है, जब इसका सही तरीके से सेवन कर सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि कब्ज और बवासीर से छुटकारा पाने के लिए जिमीकंद या सूरन का सेवन कैसे कर सकते हैं?कब्ज और बवासीर में कैसे लाभकारी है सूरनसूरन या जिमीकंद एक पोषण से भरपूर सब्जी है। इसमें डाइट्री फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे कई विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, सूरन शरीर से बवासीर को नष्ट करती है। यह पेट में जमा होने वाली गैस, साथ ही शरीर में वात के असंतुलन के कारण होने वाली स्थितियों में सुधार करती है। बवासीर और कब्ज की समस्या शरीर में वात दोष के असंतुलन के कारण ही पैदा होती हैं। इसके अलावा, सूरन का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में कई पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है जैसे, बवासीर, पेट दर्द और कब्ज जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग।कब्ज और बवासीर ठीक करने के लिए सूरन का प्रयोग कैसे करेंइसके लिए आपको एक साफ-सुथरी सूरन लेना है। इसे अच्छी तरह सुखाकर, इसका पाउडर बना लेना है। इस पाउडर का सेवन आपको रोज छाछ में मिलाकर पीना है। ऐसा नियमित रूप से करने से जल्द आपकी स्थिति में सुधार होने लगेगा। एक चम्मच पाउडर सूरन का पाउडर पर्याप्त है, अधिक मात्रा में इसका सेवन न करें।
- सर्दियों के मौसमी फलों में सिंघाड़ा सबसे ज्यादा खाना पसंद किया जाता है। यह फल न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है। लोग इसे कच्चा और उबालकर भी खाना पसंद करते हैं।100 ग्राम सिंघाड़े में मौजूद पोषक तत्व -कैलोरी - 97 kcalकार्बोहाइड्रेट - 24 ग्रामआहारीय फ़ाइबर - 3 ग्रामप्रोटीन - 2 ग्रामवसा - 0.1 ग्रामविटामिन बी 6 - 0.12 मिलीग्रामपोटैशियम - 584 मिलीग्राममैंगनीज - 0.2 मिलीग्रामसिंघाड़ा खाने के हेल्थ बेनिफिट्सकैलोरी में कमसिंघाड़े में कैलोरी कम मात्रा में मौजूद होती है, जिस कारण यह वजन कंट्रोल करने के लिए डाइट में शामिल करना एक अच्छा विकल्प बन सकता है।फाइबर का अच्छा स्रोतसिंघाड़े को फाइबर का एक अच्छा स्रोत माना जाता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है।पोषक तत्वों से भरपूरसिंघाड़ा पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसमें पोटेशियम और मैंगनीज जैसे आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।एंटीऑक्सीडेंट गुणइसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट सेल्स को नुकसान होने से बचाने में मदद कर सकता है।हाइड्रेटेड रखेसिंघाड़े में पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण, ये आपको हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।ग्लूटेन-मुक्तसिंघाड़ा स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है, इसका उपयोग अक्सर ग्लूटेन-मुक्त आटा और स्नैक्स तैयार करने के लिए किया जाता है।फेट में कमसिंघाड़े में वसा बहुत कम होती है, जो दिल के स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।ब्लड प्रेशर में फायदेमंदसिंघाड़े में मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।पाचन स्वास्थ्यसिंघाड़ा खाने से आपका पाचन स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इसमें मौजूद फाइबर स्वस्थ पाचन में मदद करता है।अपनी डाइट में सिंघाड़ा कोई भी व्यक्ति शामिल कर सकता है, लेकिन जो लोग स्वस्थ वजन बनाए रखना चाहते हैं और अपने पाचन स्वास्थ्य को बेहतर रखना चाहते हैं उनके लिए ये एक बेहतर विकल्प है। अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है तो एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
- अधिकतर लोग व्रत के दौरान आलू से बनी चीजों का सेवन करते हैं। आलू लोगों को काफी पसंद होता है और व्रत के लिए इससे कई तरह की रेसिपीज तैयार की जा सकती हैं। आज हम आलू से बनी कुछ रेसिपी बताने जा रहे हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ ही शरीर के लिए फायदेमंद है।1. आलू फ्राईसामग्री-2 चम्मच- तेल, 1 चम्मच- मूंगफली,2 आलू- मीडियम साइज के कटे हुए, स्वादनुसार- सेंधा नमक, स्वादनुसार- काली मिर्च पाउडरबनाने का तरीकाआलू फ्राई की रेसिपी बनाने के लिए इन्हे धोकर छील लें और छोटे टुकड़े में काट लें। अब एक पैन लें इसमें तेल गर्म करके जीरा तडक़ाए। अब इसमें मूंगफली को हल्का सा फ्राई करें और निकाल लें। अब इस तेल में आलू डालकर कुछ देर चलाएं। आलू पकने के बाद इसमें सभी मसाले डालकर ढ़क्कर रख दें। जब बनने वाली हो, तो इसमें मूंगफली डालकर हरा धनिया से गर्निश करें। आलू फ्राई खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, इसके सेवन से पाचन-तंत्र से जुड़ी समस्याएं भी ठीक होती है। आलू को फ्राई करने से इसमें प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है।2. आलू का मीठा हलवासामग्री-3 चम्मच- घी, 5 चम्मच- नारियल का बुरादा,1/2 चम्मच- चिरौंजी,स्वादनुसार- चीनी,2 से 3- इलायचीआलू का मीठा हलवा बनाने का तरीकाआलू का मीठा हलवा बनाने के लिए आलू को उबालकर अच्छे से मैश कर लें। अब कडाही में घी गर्म इसमें नारियल और चिरौंजी को हल्का फ्राई होने के बाद निकाल लें। अब इसमे मैश किए हुए आलू को डालें। आलू को ब्राउन तक रोस्ट करें। जब यह पक जाएं, तो इसमें चीनी और इलायची को डालकर मिक्सर करें। जब हलवा बनने हो, तो इसमें नारियल और चिरौंजी डालकर मिक्स करें। यह हलवा खाने से इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ वजन बढ़ाने में मदद मिलती है। व्रत में इसको खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है।3. दही आलूसामग्री,3 से 4- आलू,1 कटोरी-दही,स्वादनुसार- सेंधा नमक, स्वादनुसार- काली मिर्च पाउडर, 1/2 चम्मच- भुना हुआ जीरा पाउडरदही आलू बनाने का तरीकादही आलू बनाने के लिए आलू को उबाल छील लें। अब इन आलू को छोटे टुकड़ों में काट कर प्लेट में रखें। ऊपर से दही, सेंधा नमक, काली मिर्च और भुना हुआ जीरा पाउडर मिला कर मिक्स करें। आपके दही आलू तैयार है। व्रत में खाने के लिए यह एक बढिय़ा ऑप्शन है। इसको खाने से शरीर लंबे समय तक हाइड्रेट रहता है, हड्डियां मजबूत होती है और पाचन-तंत्र भी हेल्दी रहता हैं।
- नवरात्र शुरू हो गए हैं। कई लोग व्रत के दौरान लोग गेहूं के आटे के बजाय अन्य तरह के आटे को खाते हैं, जिसे सात्विक और व्रत में खाए जाने योग्य समझा जाता है। ऐसे ही दो किस्म के आटे हैं, कुट्टू का आटा और सिंघाड़े का आटा। दोनों ही किस्म के आटों का अपन-अपना महत्व है। जहां एक ओर कुट्टू का आटा खाने की वजह से पाचन शक्ति बेहतर होती है, बाल और त्वचा पर इसका अच्छा असर पड़ता है और भी कई तरह के फायदे मिलते हैं। वहीं, सिंघाड़े के आटा विटामिन के का अच्छा स्रोत हैकुट्टू के आटे में मौजूद पोषक तत्वकुट्टू के आटे में डाइट्री फाइबर होता है। जब आप कुट्टू का आटा खाते हैं, तो लंबे समय तक पेट भरे रहने का अहसास होता है। इसका मतलब है कि कुट्टू का आटा खाने के बाद अप ओवर ईटिंग से बच जाते हैं यानी एस्क्ट्रा मंचिंग नहीं करते हैं। इसी तरह, इसमें सिंघाड़े की आटे की तुलना में प्रोटीन भी काफी मात्रा में होता है और इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है, जो ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, सिंघाड़े के आटे की तुलना में इसमें कैलोरी काउंट थोड़ा ज्यादा होता है। यह नहीं, अगर कोई ग्लूटन इंटोलरेंस है, तो उन्हें कुट्टू के आटे का सेवन नहीं करना चाहिए।सिंघाड़े के आटे में मौजूद पोषक तत्वसिंघाड़े का आटा कोई भी आसानी से खा सकता है, क्योंकि इसे पचाना काफी आसान होता है। आमतौर पर, इसे खाने के बाद पेट से जुड़ी बीमारियां नहीं होती हैं। इसके अलावा, कुट्टू के आटे के मुकाबले कैलोरी काउंट भी इसमें कम पाया जाता है। वहीं, इसके साइड इफेक्ट की बात करें, तो सिंघाड़े के आटे में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा कुट्टू के आटे की तुलना में कम होती है और ब्लड शुगर के स्तर को अचानक से बढ़ाने में अपने योगदान दे सकता है।वजन कम करने के लिए क्या है बेहतर?कुट्टू का आटा हो या सिंघाड़े का आटा। दोनों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। इसके बावजदू, दोनों में किसी एक को बेहतर नहीं कहा जा सकता है। इसकी वजह है, हर व्यक्ति का स्वास्थ्य अलग होता है। किसी को कुट्टू का आटा सूट कर सकता है, तो किसी को सिंघाड़े का आटा। इसके अलावा, यह आपकी बॉडी प्रेफरेंस पर भी निर्भर करता है। कुछ लोग प्रोटी पर ज्यादा फोस करते हैं, इसके लिए कुट्टू का आटा बेहतर विकल्प है। वहीं, अगर आप कैलोरी सेवन को कम रखना चाहते हैं और आसानी से पचने वाला कुछ खाना चाहते हैं, तो सिंघाड़े के आटा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। आप अपनी हेल्थ के अनुसार, इनमें से किसी भी एक आटे को चुन सकते हैं। अगर एलर्जी या कोई और हेल्थ कंडीशन है, तो एक बार एक्सपर्ट से बात कर लेना सही है।
- शारदीय नवरात्रि में कुछ लोग नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पहला और अंतिम नवरात्र ही व्रत रखते हैं। उपवास रखने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। लेकिन, जिन लोगों को पहले ही कुछ स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, उनको उपवास रखते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। व्रत के दौरान कुछ लोगों को चक्कर और थकान महसूस होती है। ऐसे में आप फलों और पौष्टिक चीजों का सेवन कर सकते हैं। इस दौरान आप पनीर खीर का सेवन कर सकते हैं।पनीर खीर बनाने के लिए आवश्यक सामग्रीपनीर - करीब 200 से 300 ग्रामदूध - 200 से 250 ग्राम (बिना फैट वाला दूध भी ले सकते हैं)चीनी - करीब आधा कप (शहद का भी उपयोग कर सकते हैं)केसर - चार से पांच धागे (चार चम्मच दूध में भिगोए हुए)इलायची पाउडर - करीब एक चौथाईबादाम - 10 से 12 बारिक कटे हुएपिस्ता - 10 से 12 बारिक कटे हुएकिशमिश - 10 से 12गुलाब की पंखुडियां - 5 से 6 सजावट के लिए।पनीर खीर बनाने बनाने की रेसिपी-सबसे पहले आप एक कढ़ाई या पैन में दूध को डालकर गर्म करें।-इसके बाद आप दूध में ग्रेटेड (कद्दूकस किया हुआ) पनीर को मिक्स कर दें।-अब दूध को हिलाते रहें।-कुछ देर के बाद दूध गाढ़ा होने लगेगा।-करीब 10 से 15 मिनट के बाद जब दूध हल्का गाढ़ा हो जाए तो इसमें चीनी को मिला दें।-करीब एक से दो मिनट के बाद आप इसमें इलायची का पाउडर मिक्स कर दें।-इसके बाद कुछ देर खीर को पकाएं और आंच को बंद कर इसमें केसर वाले दूध को डालकर मिक्स करें।-अब, इसे अच्छी तरह मिक्स करें और ऊपर से बादाम, पिस्ता और किशमिश डालें।-साथ ही, सर्व करने से पहले गुलाब की पत्तियों को क्रश करके गार्निश कर सकते हैं।नवरात्रि में पनीर खीर रेसिपी के फायदे -प्रोटीन से भरपूर: पनीर की खीर में हाई प्रोटीन होता है। इससे आपकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही व्रत में एनर्जी लेवल बना रहता है।एंटीऑक्सीडेंट: पनीर खीर में चीनी की जगह पर आप शहद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं इसमें मौजूद केसर में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो आपको सेहतमंद बनाते हैं।कैल्शियमा का सोर्स: पनीर में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। कैल्शियम से हड्डियों और दांतो को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलती है।पोषण तत्व से युक्त: बादाम, पिस्ता और किशमिश पोषक तत्वों से युक्त होते हैं। इनमें हेल्दी फैट, फाइबर, मैग्निशियम, विटामिन ई जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।व्रत में पनीर खीर खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है। इससे आपको व्रत में भूख का अहसास नहीं होता है। साथ ही, आपको कमजोरी और थकान भी महसूस नहीं होती है।
- शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में लोग नवरात्रि की तैयारियों में जुट गए हैं। शारदीय नवरात्रों में नौ दिनों तक पूजा पाठ किया जाता है। लोग इन दिनों में व्रत रखते हैं, देवी का पूजन करते हैं। व्रत रखने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं। इस दौरान साबूदाने का सेवन करने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं। साथ ही, आपके शरीर का एनर्जी लेवल बना रहता है। आगे इस लेख में जानते हैं कि व्रत के दौरान साबूदाने का आप किस तरह से सेवन कर सकते हैं।व्रत में साबूदाने को डाइट में कैसे शामिल करें?साबूदाने की खिचड़ीसाबूदाने की खिचड़ी बनाने के लिए आवश्यक सामग्रीसाबूदाना - करीब एक कपनींबू का रस - दो से तीन चम्मचमूंगफली के दाने - करीब 50 ग्रामआलू - दो (कटे हुए)करी पत्ते - 8 से 10हरी मिर्च - आपके स्वादानुसारसेंधा नमक - स्वादानुसारघी - करीब दो बड़े चम्मचसरसों के बीज - करीब आधा चम्मचसाबूदाने की खिचड़ी बनाने की रेसिपीसाबूदाने की खिचड़ी बनाने के लिए आप साबूदाने को करीब 3 से 4 घंटे पहले भिगोकर रख दें।इसके बाद इसे छान लें।अब गैस पर आप कढ़ाई चढ़ाएं। इसमें घी डालें।जब घी गर्म हो जाए, तो इसमें सरसों को बीज डालें।इसके बाद आप इसमें मूंगफली, करी पत्ता, हरी मिर्च डालकर चला लें।जब यह पक जाए तो इसमें आलू डालकर थोड़ा पका लें।अंतिम में आप साबूदाने को डालें और इसे करीब 4 से 5 मिनट पकने दें।आपकी साबूदाने की खिचड़ी तैयार हैं। इसे नींबू का रस मिलाएं और हरे धनिये से खिचड़ी को गार्निश करें।साबूदाने की चाटसाबूदाने की चाट बनाने के लिए आवश्यक सामग्रीसाबूदाना - 1 कपआलू - 1 उबला हुआहरी मिर्च - 2घी या तेल - 2 बड़े चम्मचदही - करीब दो से चार बड़े चम्मचसेंधा नमक - स्वादानुसारटमाटर - दो बारीक कटे हुएखीरा - आधा बारीक कटा हुआसाबूदाने की चाट बनाने रेसिपीगैस पर पैन चढ़ाएं।इसे बाद पैन में तेल या घी को डालें।जब घी गर्म हो जाए तो इसमें पहले से भीगे हुए साबूदाने को डालें।साबूदाने को कुरकुरा होने तक पकाएं। इसके बाद इसे एक प्लेट में निकाल लें।इसके बाद एक कढ़ाई को गर्म करें। इसमें आलू और साबूदाने के डालें।अब कढ़ाई में मिर्च और नमका डालकर मिक्स कर दें।इसे एक प्लेट में निकालें। ऊपर से दही, टमाटर और खीरे को मिक्स कर दें।आपकी चाट तैयार है। आप व्रत में भी इसका सेवन कर सकते हैं।साबूदाना के लड्डू कैसे बनाएं?साबूदाने का लड्डू बनाने के लिए आवश्यक सामग्रीसाबूदाना - एक कपघी - करीब एक कपचीनी - एक कपनारियल - आधा कद्दूकस किया हुआइलायची पाउडर - करीब 2 चम्मचमेवे - बारिक कटे हुएसाबूदाना के लड्डू बनाने की रेसिपीलड्डू बनाने के लिए आप कढ़ाई को गैस पर रखें।इसके बाद उसमें साबूदाना डालकर धीमी आंच पर पकाएं।जब साबूदाना ब्राउन हो जाए और कुरकुरा हो जाए तो गैस बंद कर इसे प्लेट में निकाल लें।ठंडा होने पर आप साबूदाने को बारिक पीस लें।इसके बाद एक पैन में नारियल को भून लें।इसमें साबूदाना और चीनी मिला लें। इसके बाद गैस बंद कर दें।एक दूसरे पैन में घी डालकर मेवे को करीब 2 से 4 मिनट के लिए भून लें।अब लड्डू के मिक्सचर में इलायची पाउडर और भूनें मेवे को डालकर मिक्स करें।इसके बाद इससे लड्डू तैयार कर लें। व्रत में इस लड्डू को खाने से आपको काफी फायदे मिलती है।इसे भी पढ़ें: शरीर को एनर्जेटिक रखे साबूदाना, रोजाना खाने से मिलेंगे ये 6 लाभसाबूदाना खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, और पाचन शक्ति के साथ वजन नियंत्रित होने में मदद मिलती है। ऐसे में व्रत के दौरान साबूदाने का सेवन करने से आपको थकान और कमजोरी नहीं होती है।
- मान्यता है कि परिजात के फूलों का वृक्ष समुद्र मंथन से बाहर निकलता है। इसलिए हिन्दू धर्म में इस फूल को मंदिर में चढ़ाना काफी ज्यादा शुभ माना जाता है। परिजात के फूलों को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है। कई लोग इसे सिंघाड़ा के फूल भी कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में भी इस फूल का काफी ज्यादा महत्व है। जी हां, परिजात के फूलों ही नहीं बल्कि इसकी पत्तियां, जड़ इत्यादि का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। आइए जानते हैं परिजात के फूल से स्वास्थ्य को होने वाले अद्भुत फायदे?1. बुखार को करता है कमपारिजात का फूल मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया बुखार सहित विभिन्न प्रकार के बुखार को ठीक करता है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि पारिजात की पत्ती और छाल का अर्क बुखार को तुरंत ठीक करने के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। इतना ही नहीं, यह डेंगू और चिकनगुनिया बुखार में प्लेटलेट काउंट बढ़ाने में भी आपकी मदद करता है।2. अर्थराइटिस के लक्षणों को करे कमपरिजात के फूल गठिया की परेशानियों को दूर करने में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसके फूल और पत्तों में सूजनरोधी गुण होता है। साथ ही विशिष्ट तरह का ऑयल मौजूद होता है, जो घुटनों के दर्द का इलाज करने में फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका इस्तेमाल आप चाय के रूप में या फिर इसके फूलों से तैयार ऑयल को मसाज के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।3. सूखी खांसी का करे इलाजक्या आप लगातार खांसी और गले में जलन से पीडि़त हैं? अगर हां, तो ऐसी स्थितियों में भी पारिजात की पत्तियों और फूलों से बनी चाय आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इसके इस्तेमाल से सर्दी-खांसी, ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं का इलाज किया जा सकता है। यह अस्थमा मरीजों के लिए काफी ज्यादा प्रभावी माना जा सकता है। पारिजात के कुछ फूल और पत्तियां लें, इसमें अदरक और 2 कप पानी डालकर करीब 5-7 मिनट तक उबालें। इसके बाद पानी को छान लें और शहद मिक्स करके चाय की तरह पिएं।4. डायबिटीज का करे इलाजडायबिटीज की परेशानी से जूझ रहे मरीजों के लिए परिजात का फूल फायदेमंद हो सकता है। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकता है। पिछले अध्ययनों से पता चलता है कि पारिजात के फूलों के अर्क में शक्तिशाली एंटी-डायबिटीज गुण होते हैं, जो डायबिटीज की परेशानी को दूर कर सकते हैं।5. इम्यूनिटी करे बूस्टपारिजात के फूल और पत्तियां इथेनॉल की उपस्थिति होती है, जो आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा दे सकती है। यह आपके शरीर के लिए इम्यूनोस्टिम्युलेटरी के रूप में कार्य कर सकती है।ध्यान रखें कि परिजात के फूल और पत्तियां स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी हो सकती हैं। हालांकि, किसी भी परेशानी में इसका प्रयोग करने से पहले अपने हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
-
वजन का बढ़ना जितना आसान है उसे घटाना उतना ही मुश्किल होता है। खूब मेहनत करने के बावजूद कई बार उतना वजन कम नहीं होता है, जितने की उम्मीद होती है। वजन घटाने के लिए सबसे अच्छा है कि आपको हेल्दी डायट फॉलो करनी चाहिए। कुछ लोगों को वेट लॉस करने के दौरान बाहर का खाना खाने की क्रेविंग होती है और शाम होते-होते वह लोग जंक फूड खा ही लेते हैं। ऐसे में आपको शाम 4-6 बजे के बीच में एक काम कर लेना चाहिए। जानिए क्या?
4-6 बजे के बीच करें ये काम
अगर आप वजन कम कर रहे हैं और दिन की शुरुआत हेल्दी करते हैं लेकिन शाम होते ही आप कुछ जंक फूड खा लेते हैं तो आपको न्यूट्रिशिनिस्ट द्वारा बताए गए इस तरीके को अपनाएं। हाल ही में करीना कपूर की न्यूट्रिशिनिस्ट ने बताया की अगर कोई व्यक्ति वजन घटाना चाहता है तो उसे शाम 4-6 बजे के बीच ईवनिंग स्नैक्स खा लेना चाहिए। ये नियम उनके लिए भी अच्छा है जो लोग हेल्दी खाने की शुरुआत करना चाहते हैं।
इस समय पर क्यों?
एक्पर्ट बताती हैं कि 4-6 बजे के बीच में कोर्टिसोल लेवल ड्रॉप होता है। ऐसे में इस दौरान आपको कुछ खाने की जरूरत होती है। अगर आप इस दौरान कुछ नहीं खाते हैं तो इससे आपको रात को नींद नहीं आएगी। जिसकी वजह से आपकी सेहत पर गलत असर होगा। इसी के साथ जब आप इस समय पर कुछ खाते हैं तो इससे आपको बहुत ज्यादा थकावट महसूस नहीं होगी।
ईवनिंग स्नैक में क्या खाएं
ईवनिंग स्नैक में आप कुछ ऐसा खा सकते हैं जो हल्का हो और जिसे आसानी से बनाया जा सके। आपको ज्यादा भूख नहीं है तो आप मुरमुरा, मखाना, भुना चना या कोई फ्रूट खा सकते हैं। अगर भूख ज्यादा है तो आप एक दाल चीला, वेजिटेबल सैंडविच, प्लेन डोसा खा सकते हैं। ध्यान रखें आपको कुछ हेल्दी ही खाना है। -
घरों में मौजूद एयरकंडीशनर और फ्रिज से निकलने वाली गैस से कई बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। अमेरिका में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि इस गैस के प्रभाव के कारण कैंसर, मलेरिया, मोतियाबिंद और त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
अध्ययन के शोधकर्ताओं ने बताया कि एयरकंडीशनर और फ्रिज में हाइड्रोफ्लोरोकार्बन यानी एचफएफसी गैस भरी जाती है और इनसे इसी गैस का उत्सर्जन होता है। एल्युमिनियम प्रोसेसिंग के समय भारी मात्रा में बनती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह गैसें हमारे वायुमंडल में करीब 50 हजार साल तक बनी रह सकती हैं। जलवायु पर इनका काफी बुरा असर पड़ता है। फ्लोरीन और हाइड्रोजन के परमाणुओं से बनाई गई यह गैस धरती को सूर्य के विकिरण से बचाने वाली ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे निकलने वाली क्लोरीन गैस ओजोन के तीन ऑक्सीजन परमाणुओं में से एक के साथ क्रिया करती है। फ्लोरीन का एक परमाणु ओजोन के एक लाख अणुओं को खत्म करता है। नतीजतन ओजोन परत लगातार पतली होती रहती है और बीमारियां बढ़ रही हैं।
समुद्री तटों पर रहने वालों को ज्यादा खतरा-
शोधकर्ताओं ने बताया कि समुद्र तटों के नजदीक रहने वाली आबादी को इससे सबसे ज्यादा नुकसान उठाना होगा। ओजोन परत को धरती की छतरी और पर्यावरण का सुरक्षा कवच भी कहा जाता है। अगर ओजोन परत बहुत ज्यादा पतली हो जाती है तो धरती पर जीवन काफी मुश्किल हो जाएगा। दरअसल, ओजोन परत के ज्यादा पतला होने पर पराबैंगनी किरणें आसानी से धरती पर पहुंचेंगी। पराबैंगनी किरणों के घातक प्रभाव के तौर पर ही गंभीर बीमारियां बढ़ेंगी।
समुद्री जीवों विलुप्त हो रहे, ग्लेशियर पिघल रहे-
शोधकर्ताओं का कहना है कि ओजोन परत को होने वाले नुकसान के कारण पराबैंगनी किरणों के सीधे धरती पर पहुंचने से कई समुद्री जीव विलुप्त हो रहे हैं। वहीं, नासा के मुताबिक, ओजोन परत में उत्तरी अमेरिका के आकार से भी बड़ा छेद हो गया है, जो काफी चिंताजनक है। ओजोन परत में पहला छेद कंटार्कटिका के ठीक ऊपर बना है। इसलिए क्षेत्र के ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार बढ़ गई है। इससे कई समुद्र तटीय इलाकों के डूबने का खतरा भी बढ़ रहा है।
यूरोपीय देशों ने लगाई पाबंदी-
यूरोप में 2023 की शुरुआत से ही इन गैस के इस्तेमाल को धीरे-धीरे बंद करने की शुरुआत की जा चुकी है। यह गैस लोगों की सेहत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। इसके चलते यूरोपीय संघ के देशों के बीच एक संधि समझौता हुआ है। इसके तहत संघ के सभी 27 सदस्य देश साल 2050 तक इन गैसों के इस्तेमाल पर पूरी पाबंदी लगाने पर सहमत हुए हैं।
1913 में हुई थी ओजोन परत की खोज-
ओजोन लेयर की खोज 1913 में फ्रेंच वैज्ञानिक फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी। ब्रिटेन के मौसम विज्ञानी जीएमबी डोबसन ने नीले रंग की गैस से बनी ओजोन परत के गुणों का विस्तार से अध्ययन किया। डोबसन ने 1928 से 1958 के बीच दुनियाभर में ओजोन परत के निगरानी केंद्रों का नेटवर्क स्थापित किया। ओजोन की मात्रा मापने की इकाई डोबसन को जीएमबी डोबसन के सम्मान में ही शुरू किया था। -
आंखों को कभी-भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। आंखों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए जरूरी उपाय अपनाना चाहिए। आमतौर पर खराब जीवनशैली हमारी आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। स्ट्रेनफुल लाइफस्टाइल के कारण हमें लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने, स्क्रीन पर पढ़ने करने या अन्य गतिविधियों को अंजाम देना पड़ता है। इससे आंखों में तनाव और थकान हो सकती है। पर क्या वास्तव में स्ट्रेस आईसाइट को प्रभावित करता है?
तनाव पहुंचाता है आंखों को गंभीर नुकसान
लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने, खराब रोशनी, या लंबे समय तक एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करने से सूखापन, लालिमा और असुविधा जैसे लक्षण हो सकते हैं। दूसरी ओर जब हम गंभीर रूप से तनावग्रस्त और एंग्जाइटी फील करते हैं, तो शरीर में एड्रेनालाइन का हाई लेवल आंखों पर दबाव पैदा कर सकता है। इसके कारण दृष्टि धुंधली हो सकती है। लंबे समय तक एंग्जाइटी से पीड़ित लोग पूरे दिन आंखों के तनाव से पीड़ित हो सकते हैं।
क्या होता है आंखों पर तनाव का असर
लोग अकसर यह सवाल करते हैं कि क्या भावनात्मक तनाव दृष्टि समस्याओं का कारण बन सकता है? तो इसका जवाब है हां। जब हम गंभीर रूप से तनावग्रस्त और एंग्जाइटी फील करते हैं, तो शरीर में एड्रेनालाइन का लेवल बढ़ जाता है, जो आंखों पर दबाव पैदा कर सकता है। इस तरह, भावनात्मक तनाव दृष्टि समस्याओं का कारण बन सकता है।
क्या हो सकते हैं आई स्ट्रेस के लक्षण
आंखों में दर्द, थकान, जलन या खुजली, आंखों से पानी आना या सूख जाना, धुंधली या डबल विजन होना, सिरदर्द, गर्दन, कंधे या पीठ में दर्द आई स्ट्रेस के लक्षण हो सकते हैं। इनके अलावा प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि हो सकती है। इसे फोटोफोबिया कहा जाता है। यह भी महसूस हो सकता है कि आंखें खुली रखना मुश्किल है।
इन तरीकों से करें बचाव
एलोवेरा जेल का करें इस्तेमाल
आंखों की स्ट्रेस को कम करने के लिए एलोवेरा जेल को आंखों के चारों ओर धीरे-धीरे लगाया जा सकता है। इसे आंखों के अंदर नहीं लगायें। इससे जलन और लालिमा कम होगी।
खीरे के टुकड़े रखें
बंद पलकों पर खीरे के टुकड़े रखने का क्लासिक उपाय सूजन को कम करने और थकी हुई आंखों को शांत करने में मदद कर सकता है।
आंखों में गुलाब जल डालें
प्रत्येक आंख में शुद्ध गुलाब जल की कुछ बूंदें थकी हुई आंखों को ताजगी और रि जुवेनेशन प्रभाव डाल सकती हैं।
थोड़ी देर के लिए आंखें बंद करके रखें
एंग्जाइटी के कारण अगर ब्लर विजन हो रहा है तो बेहतर है कि थोड़ी देर के लिए अपनी आंखें बंद करके लेट जाएं। इससे विजन के बारे में घबराहट कम हो सकती है। एंग्जाइटी को ठीक कर और अपने पैनिक अटैक को रोककर ब्लर विजन को को रोका जा सकता है। बंद पलकों पर खीरे के टुकड़े रखने का क्लासिक उपाय सूजन को कम करने और थकी हुई आंखों को शांत करने में मदद कर सकता है। चित्र : अडोबी स्टॉक
आंखों के लिए हमेशा याद रखें ये नियम
लंबे स्क्रीन टाइम के दौरान आंखों के तनाव को रोकने के लिए हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें। इस समय कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करें। नियमित रूप से पलकें झपकाएं: अधिक बार पलकें झपकाने का सचेत प्रयास करें, क्योंकि इससे आपकी आंखों में नमी बनी रहेगी और सूखापन कम होगा।
उचित प्रकाश व्यवस्था
सुनिश्चित करें कि आपके ऑफिस में अच्छी रोशनी हो। हार्ड और चमकदार रोशनी से बचें, जो आंखों की थकान में योगदान कर सकती हैं।
गर्म सेक
बंद आंखों पर गर्म सेक लगाने से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त परिसंचरण में सुधार होता है। लंबे स्क्रीन टाइम के दौरान आंखों के तनाव को रोकने के लिए हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें - आयुर्वेद में आवंला मानव शरीर के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद माना गया है, इसका इस्तेमाल खाने और दवाई दोनों के रूप में किया जाता है। आंवले में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटेशियम, एंटी-ऑक्सीडेंट, फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिसके सेवन से कई बीमारियां दूर होती है और व्यक्ति हेल्दी रहता है।आंवला में छिपे आयुर्वेदिक गुणआंवला में वयस्थापन ( Vayasthapana ) गुणआयुर्वेद के अनुसार आंवला में उम्र को कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं, जिसे वयस्थापन गुण कहा जाता है। आंवले में वस्थापन वह इंग्रीडियंट है जो स्किन को पोषण देता है और व्यक्ति को जल्दी बूढ़ा होने से बचाता है, यानि इसमें एंटी एजिंग गुण मौजूद होते हैं। आंवले में मौजूद वयस्थापन ( Vayasthapana ) गुण तीनों दोषों को संतुलन में रखकर स्किन को हेल्दी रखने में मदद करती है।आंवला में वृष्य गुण ( Vrishya Quality )आयुर्वेद के अनुसार आंवले में वृष्य चित्कित्सा गुण होते हैं, जो प्रजनन क्षमता के लिए अच्छा माना जाता है। आंवले में मौजूद वृष्य ( Vrishya ) गुण प्रजनन से जुड़ी समस्याओं को कम कर बांझपन की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं। वृष्य चिकित्सा आयुर्वेद की आठ प्रमुख विशेषताओं में से एक है, जो महिला और पुरुष के प्रजनन क्षमता को बढ़ा सकता है और व्यक्ति को यौन रूप से शक्तिशाली और सक्षम बना सकता है। अगर कोई कंसीव करने की कोशिश कर रहा है तो वह ज्यादा आंवले का सेवन कर सकता है।आंवला में त्रिदोष गुण ( Tridosha Quality )आयुर्वेद के अनुसार आंवले में त्रिदोष ( Tridosha ) गुण होते हैं, जो तीनों दोष यानि वात, पित और कफ को बैलेंस करने में मदद करता है। इसके सेवन से आंख की रोशनी तेज होती है, स्किन हेल्दी रहती है, फेफड़ों से जुड़ी समस्या समेत कई हेल्थ बेनिफिट्स मिलते हैं। ऐसे में किसी भी उम्र के लोग इसका सेवन कर सकते हैं।आंवला खाने के तरीके-पाउडर - आप आंवले का सेवन पाउडर के रूप में कर सकते हैं, आपको बस 1 चम्मच आंवला पाउडर को सुबह खाली पेट 1 चम्मच शहद या गर्म पानी के साथ लेना है।-रस - 20 मिलीलीटर आंवले का रस सुबह गर्म पानी के साथ लेना पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है।-च्यवनप्राश - च्यवनप्राश में मौजूद मुख्य सामग्री आंवला है, तो आप सुबह खाली पेट या खाना खाने के 2 घंटे बाद गर्म पानी के साथ 1 चम्मच च्यवनप्राश ले सकते हैं।आंवले का मुरब्बा या अचार - आप आंवले का मुरब्बा या अचार बना कर भी इसका सेवन कर सकते हैं।आंवला कैंडी - आप आंवले को टुकड़ों में काटकर धूप में सुखा सकते हैं और रोजाना कैंडी के रूप में खा सकते हैं।आंवला खाने के बेनिफिट्स-उम्र बढ़ने की समस्या को रोकने में फायदेमंद-प्रजनन क्षमता में सुधार करें-बालों के झड़ने की समस्या रोकें-पाचन संबंधी समस्याओं से दिलाए राहत-थायराइड करें कंट्रोल-ब्लड शुगर को करें संतुलित-आंखों की बढ़ाए रोशनी
-
कई बार आपने महसूस किया होगा कि मोबाइल या कंप्यूटर में ज्यादा देर तक काम करने से हाथों की उंगलियों में दर्द होने लगता है। दरअसल, यह दर्द ट्रिगर फिंगर का संकेत हो सकता है। ट्रिगर फिंगर हाथों की एक समस्या है। इसे स्टेनोज़िंग टेनोसिनोवाइटिस (stenosing tenosynovitis) भी कहा जाता है। इसमें हाथों की उलगियों के टेंडन में सूजन आ जाती है। आइये जानते हैं कि एक्सरसाइज के ट्रिगर फिंगर की समस्या को कैसे कम किया जा सकता है।
उंगलियां झुकाना
उंगलियों को मोड़ने वाला व्यायाम करने के लिए आप उंगली के ऊपरी जोड़ के ठीक नीचे पकड़ें। इसके बाद आप अन्य उंगलियों को सीधा या स्थिर रहने दें और जिस उंगली को पकड़ा है उसे सिर को हल्के हाथों से मोड़े। इसे करते समय यदि उंगलियों में दर्द महसूस हो, तो इस एक्सरसाइज को तुरंत रोक दें।
बॉल को दबाना
हाथों की एक्सरसाइज के लिए एक फॉम की बनी हुई बॉल आती है। इस बॉल को हथेली पर रखें और हाथों से बॉल को दबाएं और दोबारा खोलें। इस प्रक्रिया को दो से चार बार करें। अगर, हाथों में दर्द हो रहा हो तो बॉल को बंद करने के लिए आप दूसरे हाथ का सपोर्ट ले सकते हैं।उंगलियों और अंगूठे को छुएंइसमें आपको उंगलियों के ऊपरी हिस्से को अंगूठे के ऊपरी हिस्से के साथ मिलाते हुए उंगलियों पर हल्का दबाव डालना होता है। यह किसी मुद्रा की तरह हो सकता है। इससे भी हाथों की उंगलियों के टेंडन में आराम आता है।टिप एंड रिस्ट बैंडइस एक्सरसाइज से हाथों की उंगलियों के लचीलेपन में सुधार होता है। इसे एक्सरसाइज को आप किसी भी समय कर सकते हैं। इसमें आपको उंगिलयों के ऊपरी भाग को हथेली पर छुकाने का प्रयास करना होता है। आप बारी-बारी हर उंगली के साथ ये अभ्यास कर सकते हैं। इससे आपको आराम मिलेगा।हैंड टर्नइस एक्सरसाइज को करने के लिए आप हाथ की हथेलियों को नीचे की ओर करते हैं हाथ को किसी टेबल पर रखें। इसके बाद हथेलियों को ऊपरी की ओर ले जाएं। इस स्थिति में हाथ को कुछ सेंकेड के लिए होल्ड करें। फिर उसे दोबारा पहले की पोजीशन में लाएं। इससे हाथोंं के टेंडन पर खिंचाव पड़ता है और उनमें आराम आने लगता है।अगर, दर्द ज्यादा हो रहा हो, तो अंतिम में आप उंगलियों पर ठंडे व गर्म पानी की सिकाई कर सकते हैं। इससे आपको उंगलियों के दर्द में राहत मिलती है। लेकिन, रोग को दूर करने के लिए डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें। -
सेब खाने के फायदे बहुत हैं। आपने शायद ये भी सुना हो कि दिन में एक सेब खाने से आप डॉक्टर से दूर रह सकते हैं। दरअसल सेब अन्य फलों के मुकाबले सबसे ज्यादा लाभदायक और हेल्दी फल माना गया है। सेब में विटामिन्स और नुट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो शरीर में मौजूद हर तरह की बीमारी को दूर करने में फायदेमंद होते हैं। जब आप सुबह सेब खाते हैं तो इसका प्रभाव दोगुना हो जाता है। कहते हैं कि रात में सेब खाना खराब होता है क्योंकि यह पेट में एसिड बनाता है। लेकिन यह उतना बुरा नहीं है जितना सोचा था क्योंकि सेब डाइजेशन में भी सहायक होता है। सेब बहुत हेल्दी अल्कलाइन खाद्य पदार्थ हैं। सेब में फाइबर और विटामिन सी, ए और के तो होता ही है साथ ही इनमें कैलोरी की मात्रा भी कम होती है। सेब में कोई फैट या कोलेस्ट्रॉल नहीं पाया जाता है।
खाली पेट सेब खाने के फायदेपेट से जुड़ी कैसी भी समस्या हो सेब के सेवन से बहुत राहत मिलती है। लेकिन सुबह सुबह खाली पेट सेब खाना सबसे ज़्यादा फायदेमंद होता है।1. दिल को रखता है हेल्दीअगर आप सुबह खाली पेट सेब खाते हैं तो इससे दिल की सेहत अच्छी रहती है। सेब में मौजूद फाइबर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। इसके अलावा सेब में विटामिन सी और पोटैशियम भी होता है। ये तत्व हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम करते हैं। इसलिए जिसे हृदय रोग हो या ना हो, दोनों ही को सुबह खाली पेट सेब का सेवन करना चाहिए।2. वजन को रखता है नियंत्रितसुबह खाली पेट सेब खाना हर तरह से फायदा पहुंचता है। अगर आप अपने वजन को नियंत्रण में रखना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट सेब का सेवन कर सकते हैं। रोज सुबह एक सेब खाने से आप अपना वजन कम करने में सफलता पा सकते हैं। सेब में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। एक तो इसे खाने से आपको ज्यादा देर तक भूख नहीं लगती है। यही वजह है कि आप बार बार ज्यादा खाने से बचे रहते हैं और आपका वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इस तरह सेब खाने के फायदे बहुत हैं।3. इम्युनिटी बढ़ाता हैसेब एक है मगर इसके गुण अनेक हैं। तमाम तरह कि बीमारियों से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना बहुत आवश्यक है। इसके लिए रोज सुबह खाली पेट एक सेब खाने से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं। सेब में विटामिन सी, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।4. खून की कमी दूर करता हैजब हमारी बॉडी में आयरन की कमी होने लगती है तब शरीर में कमजोरी महसूस होती है। ये इस बात का संकेत है कि हमारी बॉडी में खून की कमी हो गई है। अगर आप नियमित रूप से खाली पेट सेब का सेवन करते हैं तो इससे खून की कमी जैसी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। सेब में आयरन की भरपूर मात्रा होती है जो खून को साफ करने के साथ साथ शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन का उत्पादन भी करता है।5. उत्तम डीटॉक्सीफिकेशन प्रॉपर्टीजअगर आप सुबह सेब खाते हैं तो उससे आपके शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल और जमा हुआ नमक खत्म हो जाता है। इसलिए यदि आप लंबे समय तक सेब का सेवन करते हैं तो इससे मेटाबोलिज्म में सुधार होता है।6. नजर होती है तेजआंखों की कमज़ोरी को सेब दूर कर सकता है। इसलिए आपको चाहिए कि अगर आंखों की रोशनी बढ़ानी है तो बच्चों के साथ साथ आपको भी रोजाना एक सेब जरूर खाना चाहिए।7. अस्थमा रोग में फायदेमंदसेब खाने के फायदे तो कमाल के हैं। सेब अस्थमा के रोग में भी फायदा पहुंचाता है। दमा से छुटकारा दिलाने में सेब या फिर सेब का जूस आपकी बहुत मदद कर सकता है। सेब में मौजूद होता है फ्लेवोनोइड्स जो फेफड़ों को ताक़त देने का काम करता है। यही कारण है कि सेब खाने से अस्थमा रोग से राहत मिलती है।8. कब्ज़ दूर करता हैसेब कई मर्ज़ का इलाज है। अगर आपको सुबह पेट ना साफ होने की शिकायत है तो सुबह एक सेब आपको ज़रूर खाना चाहिए। ये आपकी कब्ज़ की समस्या का समाधान कर सकता है। कब्ज, गैस और डाइजेशन की समस्या में खाली पेट सेब का सेवन करना लाभदायक होता है। सेब में फाइबर होता है जो धीरे-धीरे कब्ज की समस्या को कम करता है। आप अगर चाहें तो सेब की जगह इसके मुरब्बे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।9. पथरी से देता है राहतसेब एक खास फल है और इसमें कई तरह की बीमारियों का इलाज भी छुपा हुआ है। अगर किसी को पथरी की शिकायत है तो सेब उसका भी इलाज है। पथरी के रोगियों के लिए सिर्फ सेब ही नहीं बल्कि सेब का जूस और सेब का सिरका भी उनकी सेहत को बनाए रखने में सहायक होता है। सेब खाने से पथरी के दर्द में भी आराम मिलता है। सुबह खाली पेट सेब खाने के फायदे बहुत हैं और आपको भी इसका सेवन जरूर करना चाहिए I10. दाँत करता है मजबूतसेब खाने के फायदे कई हैं। सेब आपके शरीर से बीमारियों को तो दूर रखता ही है साथ ही ये बैक्टीरिया और वायरस को भी समाप्त करने में सक्षम है। सेब खाने से दांत की बहुत सी समस्याएं दूर हो जाती हैं। जिसको भी पायरिया की बीमारी हो उसे सेब जरूर खाना चाहिए क्योंकि सेब का छिलका दाँतों की कैविटी को दूर करता है।11. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सहायकसेब डायबिटीज के रोगियों के लिए भी बहुत बेहतर है। अगर आप सेब को छिलके समेत खाएं तो डायबिटीज में ये बहुत लाभ पहुंचाता है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायक होता है। देखा, सेब खाने के फायदे कितने सारे हैं।12. हड्डियों को मजबूत करता हैसेब में भरपूर कैल्शियम होता है। इसको रोज़ खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं। खाली पेट सेब खाने का फायदा ये है कि इससे आपकी हड्डियां मजबूत होंगी और आपके शरीर को कैल्शियम की भी भरपूर मात्रा मिलती रहेगी।13. थकान और स्किन के लिए उपयोगीस्किन यानी आपकी त्वचा बहुत सेंसेटिव होती है। इसको साफ़ रखना आपकी ज़िम्मेदारी है। आज पल्यूशन और गंदे वातावरण ने आपसे आपकी त्वचा का आकर्षण छीन लिया है। ऐसे में सेब का उपयोग आपकी त्वचा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। सेब विटामिन सी से भरपूर होते हैं। सेब की विटामिन सी कंटेन्ट का लगभग आधा हिस्सा सिर्फ उसके छिलके में होता है। इसलिए सेब को छिलके के साथ खाना अच्छा होता है। सेब में एक एंटी-एजिंग का प्रभाव भी होता है जो सर्दी की रोकथाम और थकान पर काबू पाने में बहुत असरदार है। सच तो ये है कि सेब औषधि से भरपूर फल है और सेब के फायदे अनगिनत हैं।

.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpeg)

.jpg)
.jpg)

.jpg)
.jpg)





.jpg)






.jpg)


