- Home
- सेहत
- कोलेस्ट्रॉल हमारे ब्लड वैसेल्स में पाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल एक वैक्स जैसा पदार्थ होता है। शरीर के लिए कोलेस्ट्रॉल जरूरी है , लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा हो जाए, तो बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाने से मोटापा, हार्ट डिसीज, हाई बीपी, डायबिटीज आदि समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को इसका असर आंखों में भी दिखता है।आंखें कमजोर हो सकती हैंकोलेस्ट्रॉल बढऩे के साथ आंखें कमजोर होने लगती है। अचानक से व्यकित अंधेपन की ओर नहीं बढ़ता। लेकिन सामान्य दिखने वाली चीजें भी धुंधली नजर आने लगती हैं। आंखों से दिखना कम हो जाने पर आंखों की जांच तुरंत करवानी चाहिए। जिन लोगों की आंखें पहले से ही कमजोर हैं, उन्हें उच्च कोलेस्ट्रॉल का ज्यादा असर पड़ता है।कॉर्निया को प्रभावित करता हैकोलेस्ट्रॉल बढऩे का बुरा असर कॉर्निया पर पड़ता है। मरीज की आंख में आर्कस सेनिलिस नाम की बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में कॉर्निया के चारों ओर भूरे या पीले रंग से छल्ले बन जाते हैं। कॉर्निया में कोलेस्ट्रॉल जमने के कारण ऐसा होता है। इसका इलाज सर्जरी से किया जाता है।रेटिना को प्रभावित करता हैकोलेस्ट्रॉल का स्तर बढऩे का बुरा असर रेटिना पर पड़ता है। कोलेस्ट्रॉल बढऩे के कारण रेटिनल वेन ऑक्लुजन नाम की बीमारी हो जाती है। इस बीमारी में रेटिना तक खून ले जाने वाली कोशिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं। ग्लूकोमा, डायबिटीज, हाई बीपी और ब्लड डिसआर्डर के मरीजों को ये समस्या ज्यादा होती है।आंखों के आसपास पीलापन बढ़ सकता हैहाई कोलेस्ट्रॉल के कारण आंखों के आसपास की त्वचा पीली हो जाती है। ऐसा कोलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण होता है। आंखों के आसपास छोटे दाने भी नजर आते हैं। इस समस्या को जैंथिलास्मा के नाम से जानते हैं। जो लोग स्मोकिंग करते हैं या जिन्हें डायबिटीज या हाई बीपी है उन्हें ये समस्या ज्यादा परेशान करती है।उच्च कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए क्या करें?--हाई कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचने के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट किया जाता है। समय-समय पर डॉक्टर की सलाह पर खून की जांच करवाते रहें।-खून में बैड कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतों को अपनाएं। जैसे- एक्सरसाइज करना, पानी का सेवन, हेल्दी डाइट लेना आदि।-अपनी डाइट में ताजे फल और सब्जियों को शामिल करें।-मीठी चीजों का सेवन न करें।-जंक फूड और फास्ट फूड का सेवन न करें।-अलसी के बीजों को हाई कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक माना जाता है।-खाने में लहसून की कली, मेथी के दाने और नींबू पानी का सेवन करें। इससे कोलेस्ट्रॉल घटाने में मदद मिलती है।
- जीरावन पाउडर को इंदौर की शान कहा जाता है। यह एक ऐसा टेस्टी मसाला जिस के बगैर शायद हम कुछ चीजें बनाने का सोच भी नहीं सकते हंै , जैसे पोहा कई तरह के नमकीन ,पापड़ ,सलाद और सबसे स्पेशल गराडू आदि बहुत सी चीजों में इसका उपयोग किया जाता है । इसे हम घर पर भी आसानी से बना सकते है ।आइए जानते है जीरावन बनाने की रेसिपी-आवश्यक सामग्री -खड़ा धनिया 40 ग्राम , जीरा 30 ग्राम, सौफ ,30 ग्राम, लौंग 10-12 , काली मिर्च 10-12, जायफल 1/2 , तेजपत्ता 5-6 , दाल चीनी एक छोटा टुकड़ा , हरी इलायची 5-6 , खड़ी लाल मिर्च 10-15, बड़ी इलायची 2-3 । इन सब मसालों को एक कड़ाही में हल्की मंदी आंच में सेंक लें । जब सारे खड़े मसाले अच्छी तरह से सिंक जाएं तो इसमें मिलाएं जिंजर पाउडर 1टी स्पून , अमचूर पाउडर 3टी स्पून , नमक 20 ग्राम , हल्दी 1टी स्पून, हींग 1/4 टी स्पून, जावित्री 10 ग्राम, ,काला नमक 1/2 टी स्पून । यह सारे मसाले सेंक कर ठंडा करके मिक्सर में अच्छी तरह से ग्राइंड करें । थोड़ा रुक रुक कर इसे अच्छे से थोड़ा दरदरा पीस कर तैयार करें । किसी साफ डिब्बे में रख कर आप इसे 4-5 माह तक इस्तेमाल कर सकते हंै ।---
- हार्ट अटैक या हार्ट संबंधी बीमारियों से बचाव करने के लिए डॉक्टर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने की सलाह दे देते हैं। दिल को मजबूत करने के लिए आप अपनी डाइट में डैंडेलियन (सिंहपर्णी) की चाय को शामिल कर सकते हैं। सिंहपणी एक छोटा का पौधा है। इस पौधे पर पीले रंग का फूल आते हैं। पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में डैंडेलियन (सिंहपर्णी) के फूल, जड़ और पत्तियों का इस्तेमाल बहुत किया जाता था। इसके पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें विटामिन ए, सी और डी, लोहा, मैग्नीशियम और पोटेशियम पाया जाता है। नियमित तौर पर डैंडेलियन का सेवन किया जाए तो ये कई बीमारियों से बचाव करने में मदद करता है।नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर छपे एक शोध के मुताबिक, डैंडेलियन में हाई पोटेशियम पाया जाता है। लगभग 100 ग्राम डैंडेलियन में 397 मिलीग्राम से ज्यादा पोटेशियम पाया जाता है। हाई पोटेशियम होने के कारण डैंडेलियन शरीर का ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही, डैंडेलियन नसों को साफ करके ब्लड फ्लो को सुधारता है। ब्लड फ्लो और ब्लड प्रेशर सही रखने से हार्ट को हेल्दी बनाने में मदद मिलती है।सिंहपर्णी की चाय बनाने की रेसिपी --एक पैन में 2 कप पानी गर्म करें। गर्म पानी में 2 से 3 चम्मच कटी हुई सूखी सिंहपर्णी की जड़ काटकर डालें। सिंहपर्णी की जड़ को 5 से 10 मिनट के लिए उबालें और इसे कप में छानें। कप में छानने के बाद आप सिंहपर्णी की चाय का आम चाय की तरह का आनंद ले सकते हैं। अगर आपको सिंहपर्णी की चाय का स्वाद पसंद नहीं आ रहा है, तो इसमें शहद मिलाया जा सकता है।सिंहपर्णी की चाय सेहत के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन इसका एक निश्चित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए। अगर इस चाय का ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो ये पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
- होली का त्यौहार रंग-गुलाल, गुजिया और ठंडाई के बिना अधूरा है। होली के मौके पर ठंडाई पीने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। रंगों की मस्ती के बीच ठंडाई का स्वाद इस त्यौहार की खुशियों को डबल कर देता है। ठंडाई को दूध, सूखे मेवों, गुलाब की पंखुड़ियों और मसालों के मिश्रण से बनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि ठंडाई हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। ठंडाई पीने से शरीर और दिमाग को ठंडक मिलती है। ठंडाई पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है, जिससे पेट में गैस, एसिडिटी और कब्ज आदि समस्याओं से राहत मिलती है। इससे पेट की जलन और पेट फूलने की समस्या भी दूर होती है। इतना ही नहीं, ठंडाई में मौजूद पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं।होली पर ठंडाई पीने के फायदे -इम्यूनिटी बूस्ट होती हैठंडाई पीने से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है। दरअसल, ठंडाई में इस्तेमाल होने वाले मसाले जैसे इलायची और सौंफ एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। इसके अलावा, ठंडाई में विटामिन, प्रोटीन, मिनरल आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। ठंडाई पीने से सर्दी-जुकाम, बुखार और संक्रमण से बचाव होता है।पाचन को दुरुस्त रखेठंडाई पीने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। ठंडाई सौंफ का प्रयोग किया जाता है, जो फाइबर से भरपूर होती है। साथ ही, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो पेट की जलन को शांत करने में मदद करते हैं। होली पर ठंडाई पीने से पाचन क्रिया बेहतर बनती है। इससे पेट में गैस, एसिडिटी, कब्ज और ब्लोटिंग की समस्या दूर होती है।शरीर को एनर्जी मिलेगीठंडाई में दूध, ड्राई फ्रूट्स और नट्स आदि का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। ऐसे में अगर आप होली पर ठंडाई का सेवन करेंगे, तो आप पूरे दिन ऊर्जावान और एक्टिव महसूस करेंगे। साथ ही, थकान भी महसूस नहीं होगी।याददाश्त मजबूत होती हैठंडाई में सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाता है, जो कई तरह के विटामिन और मिनरल से भरपूर होते हैं। ये पोषक तत्व न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। ठंडाई पीने से मेमोरी पावर बूस्ट होती है और तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है।ठंडाई बनाने की रेसिपीसामग्री4 कप दूध1/2 कप बादाम, काजू, पिस्ता2 चम्मच सौंफ के बीज2 चम्मच खसखस2 चम्मच खरबूजे के बीज2 चम्मच सूखे गुलाब की पंखुड़ियां4-5 काली मिर्च1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर1/2 चम्मच केसर की कलियांस्वादानुसार चीनीविधिहोली पर ठंडाई बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में खसखस, सौंफ, तरबूज के बीज, काली मिर्च, इलायची, गुलाब की पाखुंडियां और सूखे मेवे डालकर 1-2 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें। उसके बाद दूसरे बर्तन में थोड़ा सा दूध लें और उसमें केसर की कलियों को भिगोकर रख दें। बाद में सभी सूखे मेवों और नट्स को अच्छी तरह से ब्लेंड करके स्मूद पेस्ट बना ले। अब इसमें केसर वाला दूध और ठंडा दूध मिला दें। फिर सभी चीजों को अच्छी तरह ब्लेंड कर लें। थोड़ी देर फ्रिज में ठंडा कर लें और फिर बर्फ के टुकड़े डालकर इसका आनंद लें।
- मसाला थेपला गुजरात का बहुत लोकप्रिय व्यंजन है।आप इसे नाश्ते में चाय के साथ भी कहा सकते हैं और सफर पर साथ ले जाने के लिए भी रख सकते है। इन्हें आप मेथी,लौकी या सादा मसाले के साथ भी बना सकते हैं।सामग्रीगेहूं का आटा-एक प्यालाबेसन-2 बड़े चम्मच1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर1/4छोटा चम्मच हल्दी पाउडर1/4 छोटा चम्मच जीरा पाउडर1/4 छोटा चम्मच कसूरी मेथी-3 बड़े चम्मच अजवायन1/4 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन हरीमिर्च पेस्टएक बड़ा चम्मच तिल2 चम्मच दहीतेलआटा, बेसन व चावल का आटा मिलाएं। सभी मसाले व कसूरी मेथी मिलाएं (इसमें ताजी मेथी भी डाल सकते हैं)। दो बड़े चम्मच दही ,थोड़ा तेल व अदरक लहसुन-हरीमिर्च पेस्ट मिलाएं। पानी की सहायता से नरम गूंथ लें। छोटी-छोटी रोटी (थेपला) बनाकर तेल की सहायता से सेकें।--
-
होली का नाम सुनते ही आंखों के सामने रंग-बिरंगे गुलाल के साथ तन और मन को ठंडक पहुंचाने वाली ठंडाई की तस्वीर भी सामने आने लगती है। रंग और मौज-मस्ती के इस त्योहार पर ठंडाई बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं ठंडाई का सेवन सिर्फ परंपरा निभाने के लिए ही नहीं किया जाता है बल्कि गर्मियों में इसका सेवन करने से सेहत को स्वाद के साथ-साथ अनजाने में ही कई फायदे भी मिलते हैं। ऐसे में आइए जानते गर्मी के मौसम में ठंडाई पीने से सेहत को मिलते हैं क्या-क्या फायदे।
ठंडाई पीने से सेहत को मिलते हैं ये गजब के फायदे-
बनी रहती है पेट की सेहत-
गर्मी के मौसम में ठंडाई पीने से पाचन तंत्र को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलती है। ठंडाई में डाली जाने वाली सौंफ में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। जो गर्मियों में पेट को ठंडा रखने के साथ पेट फूलने की समस्या को भी दूर रखते हैं। इसके अलावा गर्मी के दिनों में अक्सर मुंह में छाले हो जाते हैं। इससे बचने के लिए नियमित ठंडाई का सेवन करने से भी लाभ होता है।
याददाश्त होती है मजबूत-
ठंडाई में डाले जाने वाले ड्राई फ्रूट्स और कई तरह के बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जिनका सेवन करने से शारीरिक फायदे ही नहीं बल्कि मानसिक फायदे भी मिलते हैं। इसका नियमित सेवन आपकी याददाश्त को मजबूत बनाने के साथ तनाव और चिंता को भी कम करने का काम करता है। सूखे मेवे से बनाई गई ठंडाई दिमाग को पोषण देने का काम करती है। यह दिमाग ठंडा रखती है जिससे तनाव और चिड़चिड़ेपन से भी राहत मिलती है।
इम्यूनिटी होती है बूस्ट-
ठंडाई में डाली जाने वाली सभी चीजें शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं। जिससे व्यक्ति की इम्यूनिटी मजबूत बनती है और वह सर्दी-जुकाम, बुखार जैसे वायरल संक्रमण की चपेट में कम आता है।
कब्ज की समस्या करें दूर-
गर्मियों में ज्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन करने से ज्यादातर लोगों को पेट में कब्ज की समस्या होने लगती है। लेकिन ठंडाई में डाली जाने वाली खसखस पोषक तत्वों का खजाना है। खसखस में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जिसकी वजह से यह पेट के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। इसके अलावा यह पेट की गैस, ब्लोटिंग और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करती है।
एनर्जी लेवल रखें अच्छा-
ठंडाई में डाले जाने वाले नट्स, ड्राई फ्रूट्स और बीज शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देने का काम करते हैं। वहीं ठंडाई बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला दूध एनर्जी ड्रिंक के रूप में काम करता है। जिससे गर्मियों में थकान महसूस नहीं होती है और व्यक्ति एक्टिव बना रहता है।
- - मौसम बदलने के साथ ही वायरल बुखार की समस्या शुरू हो जाती है। कई लोग हल्का बुखार और मौसमी बीमारियां होने पर घर पर ही इलाज करते हैं। ऐसे में बुखार को ठीक करने और इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए कुछ पत्तों की मदद ली जा सकती हैं।धनिया के पत्तेधनिया के पत्ते शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते है। बुखार कम करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। धनिया के पत्ते और बीजों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स गुण पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी को मजबूत करके शरीर को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। इसका इस्तेमाल करने के लिए 1/2 लीटर पानी में धनिया पत्ते डालकर इस पानी को पिएं। ऐसा करने से वायरल फीवर कम होने के साथ सर्दी, खांसी और जुकाम की परेशानी भी आसानी से दूर होगी।तुलसी के पत्तेऔषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के पत्ते शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। तुलसी के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मौसमी बीमारियों से शरीर की रक्षा करते हैं। इनका इस्तेमाल करने के लिए तुलसी की चाय पी जा सकती है, इसके पत्ते पानी से निगले जा सकते है और इसका पानी बनाकर पीया जा सकता है।सहजन के पत्तेसहजन के पत्ते शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं, जो बुखार को कम करने के साथ इम्यूनिटी को भी मजबूत करता है। सहजन के पौधे की छाल शरीर से विषैले टॉक्सिनस बाहत निकालकर शरीर को हेल्दी रखने में मदद करती हैं।ऑरिगेनो के पत्तेऑरिगेनो के पत्ते शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते है। ऑरिगेनो के पत्तों में कारवाक्रोल नामक तत्व पाया जाता है, जो बुखार कम करने के साथ मौसमी बीमारियों को भी दूर करने में मदद करता है। पानी में ऑरिगेनो के पत्तों को उबालकर उसमें हल्दी मिलाकर पीने से बुखार कम करने में मदद मिलती है।सेज के पत्तेसेज के पत्ते शरीर की कई समस्याओं को आसानी से दूर करते हैं। इसमें सैफिसिनोलाइड यौगिक गुण पाए जाते हैं, जो बुखार आदि में होने वाली समस्याओं को ठीक करने में मदद करता हैं। सेज के पत्तों को काढ़ा बनाकर पीया जा सकता है।इन पत्तों की मदद से बुखार को कम किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखें बुखार बढऩे पर डॉक्टर को दिखाकर ही दवाई लें।
-
अक्सर खान-पान में गड़बड़ी, इनएक्टिव लाइफस्टाइल और तनाव पेट गैस का कारण बनने लगते हैं। आज के समय में ज्यादातर लोग पेट गैस की समस्या से परेशान रहते हैं। जिससे राहत पाने के लिए उन्हें कई बार दवा तक का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन लंबे समय तक दवा का सेवन आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। कैनेडियन सोसाइटी ऑफ इंटेस्टाइनल रिसर्च के अनुसार पेट में गैस तब बनती है जब भोजन करते हुए हवा शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे शरीर में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन शरीर में आ जाता है। अगर आपको भी पेट गैस की समस्या अक्सर परेशान करती है तो आप कुछ देसी उपाय आजमाकर इस समस्या से राहत पा सकते हैं।
आइए जानते हैं पेट गैस से राहत देंगे ये उपाय-
छाछ-
छाछ में मौजूद लैक्टिक एसिड गैस्ट्रिक एसिडिटी से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। ऐसे में जब कभी आपको गैस की समस्या परेशान करे तो आप एक गिलास छाछ में थोड़ी सी काली मिर्च और धनिया का रस मिलाकर पी लें। इस उपाय को करने से आपको गैस से जल्दी राहत मिल जाएगी।
योग-
पेट में गैस बनने पर योगा करने से आपको लाभ मिल सकता है। योग करने से पेट की गैस तुरंत निकल सकती है। पेट की गैस से राहत पाने के लिए आप पवनमुक्तासन, भुजंगासन, प्राणायाम आदि का अभ्यास कर सकते हैं।
सोडा-
पेट में गैस बनने पर आप सोडे का सेवन भी कर सकता है। सोडा पेट की गैस को तुरंत निकालने में मदद कर सकता है। इसके बाद गैस बनने पर एक गिलास पानी लें। इसमें थोड़ा सा बेकिंग सोडा डालें और पी लें।
सौंफ-
पेट में गैस बनने पर आप सौंफ चबा सकते हैं। सौंफ में मौजूद तत्व पेट की गैस को बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए खाना खाने के बाद सौंफ और मिश्री का सेवन करें। आप चाहें तो सौंफ को पानी में उबालकर भी पी सकते हैं।
मालिश-
मालिश करने से पेट में बनने वाली गैस से छुटकारा मिल सकता है। इसके लिए आप किसी भी तेल को हाथ पर लेकर उसे पेट पर लगाते हुए हल्के हाथों से मालिश करें। पेट के अलावा आप हाथों और पैरों की मालिश भी कर सकते हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगा और पेट की गैस में भी तुरंत आराम मिल सकता है। -
शरीर की बाकी चीजों की तरह दांतों का साफ होना भी बेहद जरूरी है। हमारी स्माइल पर्सनैलिटी का जरूरी हिस्सा है। हालांकि कुछ लोग दांतों के पीलेपन के कारण परेशान रहते हैं। कुछ लोग रोजाना अच्छी तरह से दांतों को साफ करते हैं, लेकिन इसके बाद भी दांतों में पीलापन आ जाता है तो कई बार साफ-सफाई और हाइजीन का पूरा ध्यान न रखना भी इसका एक कारण हो सकता है। आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. दीक्षा भावसार ने अपने लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया है कि कैसे आप ओरल हाईजीन मेंटेन कर सकते हैं और कैसे दांतों का पीलापन दूर होगा।
ऑयल पुल्लिंग
ओरल आईजीन मेंटेन करने का ये एक बेहतरीन प्रोसेस है। मुंह में तेल घुमाने को आयल पुल्लिंग कहते हैं। कई सितारे भी इस ट्रिक को फॉलो करते हैं। यह आपके मसूड़ों और दांतों से रोगाणुओं को हटाने में मदद करता है। यह मुंह के छालों को दूर करने में मदद करता है और मांसपेशियों का भी व्यायाम करता है,जिससे उन्हें मजबूती और टोनिंग मिलती है। इसे करने के लिए तिल/सरसों या नारियल के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 15-20 मिनट तक तेल को मुंह में घुमाकर थूक दें।
नीम और बबूल की टहनियों का इस्तेमाल
ये जड़ी-बूटियां एंटी-माइक्रोबियल गुणों से पूण होती हैं। इन्हें चबाने से एंटी-बैक्टीरियल एजेंट रिलीज होते हैं जो मुंह के हेल्थ को बनाए रखने में मदद करते हैं। ऐसी टहनी चुनें जो आपकी छोटी उंगली जितनी मोटी हो। ब्रश की तरह बनाने के लिए एक कोने पर चबाएं और थोड़े-थोड़े अंतराल में बेसिन में थूकें। इसे पूरे मसूड़ों और दांतों पर ब्रश करें।
टंग स्क्रेपिंग
ओरल कैविटी की सफाई और टॉक्सिन्स हटाने के लिए जीभ साफ करना सबसे अच्छा है। कॉपर या स्टेनलेस स्टील के टंग स्क्रेपर से अपनी जीभ को रोजाना साफ करें।
हर्बल माउथ रिंस
त्रिफला या यष्टिमधु का काढ़ा एक अच्छा माउथ रिंसर के रूप में काम करता है। ओरल हाईजीन बनाए रखने के लिए इससे माउथ रिंस करें। इस बनाने के लिए त्रिफला या यष्टिमधु को पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। इसे गुनगुना होने पर इस्तेमाल करें।
दिन में दो बार ब्रश करें
एक्सपर्टी की मानें तो आपको हर खाने के बाद ब्रश करना जरूरी है, खासतौर पर चॉकलेट जैसी चिपचिपी चीजें खाने के बाद। हालांकि, ऐसा करना संभव नहीं हो पाता है इसलिए दिन में दो बार ब्रश करें। - सेहतमंद रहने के लिए जड़ी-बूटियां और हर्बल चाय का इस्तेमाल सदियों से किया जाता आ रहा है। लेमनग्रास टी भी उन्हीं में से एक है जो शरीर को कई फायदे पहुंचाने में मदद कर सकती है।लेमनग्रास के अद्भुत फायदे --वजन होता है कमलेमनग्रास की चाय में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है। यह आपके वजन को कम करने में मदद करता है। इस घास से बनी चाय पीने से आपका पेट भी भरता है और आप कम खाने से बच जाते हैं। चाय में पॉलीफेनोल्स होते हैं जो एनर्जी और फैट ऑक्सीकरण को बढ़ाने के लिए पाए जाते हैं, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है। इसका इस्तेमाल बॉडी डिटॉक्स के लिए भी किया जाता है, और यह आपके मेटाबॉलिज्म को किकस्टार्ट करता है। इसे पर्याप्त मात्रा में पीने से आपको पानी का वजन कम करने में मदद मिलती है।किडनी फंक्शनिंग होती है बेहतरलेमनग्रास टी एक अच्छे डिटॉक्स के रूप में काम करती है और यह किडनी को भी साफ करने में मदद कर सकती है। यह हमेशा उनके कामकाज में सुधार कर सकता है। लेमन ग्रास में मूत्रवर्धक गुण होता है। इसका सेवन करने से बार-बार पेशाब जाने की जरूरत हो सकती है। इससे शरीर के टॉक्सिन पेशाब के जरिए बाहर निकल सकते हैं। ऐसे में ये किडऩी फंक्शनिंग को बेहतर बना सकती है।कोलेस्ट्रॉल होगा मैनेजकोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में लेमन ग्रास फायदेमंद हो सकती है। रिपोर्ट की मानें तो लेमन ग्रास से अपच, गैस्टिक की समस्या और पेट संबंधित परेशानियों से राहत मिल सकती है। लेमनग्रास टी के एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण आपके श्वसन तंत्र की कंजेशन को कम कर सकते हैं, जिससे गले की खराश से राहत मिलती है। चाय में शरीर से टॉक्सिन को साफ करने में मदद मिलती है।गहरी नींद मिलेगीलेमनग्रास टी का शांत प्रभाव पड़ता है, जो गहरी नींद में मदद कर सकता है। यह अनिद्रा और चिड़चिड़ापन को दूर करने में भी मदद कर सकती है।एंग्जायटी वालों के लिए फायदेमंदरिपोर्ट की मानें तो लेमनग्रास के शांत प्रभाव चिंता को कम करने में मदद करते हैं। इसकी खुशबू से आप मन को शांत कर सकते हैं।कैंसर से निपटने में मददगाररिपोट्र्स की मानें तो लेमनग्रास का अर्क कैंसर के शुरुआती स्टेज को रोक सकता है। स्टडी से पता चला है कि कैसे लेमनग्रास का अर्क कैंसर के इलाज के लिए एक गैर विषैले विकल्प हो सकता है। कुछ रिपोर्ट की मानें तो लेमनग्रास प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में भी मदद करती है।लेमनग्रास चाय कैसे बनाएं--4 कप पानी2 कप कटे हुए लेमनग्रास के डंठलकैसे बनाएं--- एक मीडियम सॉस पैन में, पानी को तेज आंच पर उबालने के लिए ले आएं।- लेमनग्रास के डंठल डालकर 5 मिनट तक उबालें।- फिर इसे छान लें। और गरम या ठंडा परोसें।आप चाहें तो अपनी रोजाना की काली चाय में लेमनग्रास डाल सकते हैं।
- गैस बनना पेट की सबसे आम समस्याओं में से एक है। अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोगों को गैस के कारण छाती में भी गंभीर दर्द का अनुभव हो सकता है। यह दर्द छाती में दाईं या बाईं, दोनों तरफ देखने को मिल सकता है। पेट में गैस होना और इसके कारण छाती में दर्द की समस्या बहुत सामान्य है। यह स्थति तब पैदा होती है, जब हम तला-भुना, नमकीन, मसालेदार, पैकेज्ड फूड्स आदि का सेवन अधिक करते हैं। साथ ही कैफीनयुक्त ड्रिंक्स, सोडा, अल्कोहल आदि पीते हैं। हालांकि फूड एलर्जी के कारण भी पेट में गैस की समस्या हो सकती है। हालांकि, इससे आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।अगर आपको भी पेट में गैस की वजह से छाती में दर्द होता है, तो आपको बता दें कि कुछ घरेलू उपायों की मदद से आप इस समस्या से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। इस लेख में हम आपके ऐसे 5 घरेलू उपाय बता रहे हैं।गैस के कारण सीने में बाईं तरफ के लिए घरेलू उपाय-1. गर्म ड्रिंक्स का सेवन करेंगैस से छुटकारा पाने के लिए आप दिन में कई बार गर्म पानी और हर्बल चाय आदि का सेवन कर सकते हैं। जब आप ऐसा करते हैं तो हमारा पाचन तंत्र अतिरिक्त गैस को ट्रांस्फर करने में मदद करता है। जिससे छाती में जलन और दर्द की समस्या कम होती है।2. अदरक का सेवन करेंपाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में अदरक बहुत लाभकारी है। अगर आप सीधे तौर पर छोटा टुकड़ा अदरक चबाते हैं, या पानी में उबालकर इस पानी का सेवन करते हैं, तो इससे गैस को कम करे में मदद मिल सकती है। आप अपनी हर्बल चाय में भी अदरक शामिल कर सकते हैं।3. एक्सरसाइज करेंजब आप शारीरिक गतिविधियां करते हैं, तो यह पाचन तंत्र से गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। यही कारण है कि जब लोग थोड़ा चलते-फिरते हैं, तो उन्हें दर्द कम महसूस होता है। इसलिए कोशिश करें कि कुछ समय टहलें4. दही का सेवन करेंअगर आप दही में ईसबगोल सत्व को मिलाकर खाते हैं, यह भी पेट में गैस की समस्या दूर करने और पाचन को दुरुस्त करने में मदद मिलती है।5. जीरे का पानी पिएंअगर आप गर्म पानी में जीरा भूनकर, पीसकर इसका चूर्ण मिलाकर पीते हैं तो इससे गैस की समस्या दूर करने में मदद मिलती है।
- ज्यादातर भारतीय घरों में दाल और चावल बहुत ही स्वाद लेकर खाया जाता है। खासकर छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में खाने में दाल और चावल न हो तो भोजन अधूरा माना जाता है। कई लोगों को ऐसा लगता है कि दाल-चावल में खास पोषक तत्व नहीं पाए जाते हैं। इसलिए कई लोग दाल और चावल खाने से बचते हैं। खासकर जो लोग वजन घटाना चाहते हैं वो दाल और चावल को देखते ही इग्नोर कर देते हैं। लोगों को ऐसा लगता है कि दाल और चावल खाने से वजन घटने की बजाय बढ़ जाएगा। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो बिल्कुल गलत सोचते हैं। दाल और चावल न सिर्फ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं बल्कि वजन घटाने में भी मदद करते हैं। आइए जानते हैं वजन घटाने में दाल- चावल कैसे मदद करता है और इसे खाने का सही तरीका क्या है?वजन घटाने में कैसे मदद करता है दाल -चावल?दाल प्रोटीन, फाइबर का अच्छा सोर्स है। दाल और चावल को जब एक साथ खाया जाता है, तो शरीर को कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर भी मिलता है जो वजन घटाने में मदद करता है। एक्सपर्ट के मुताबिक काब्र्स और फाइबर का एक साथ सेवन करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सिस्टम बूस्ट करने में मदद मिलती है। मेटाबॉलिज्म सिस्टम स्ट्रांग रहने से शरीर का वजन और एक्स्ट्रा फैट घटाने में मदद मिलती है। एक्सपर्ट का कहना है कि दाल में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है जिससे आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है। पेट के लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करने से आप एक्स्ट्रा फैट या जंक फूड खाने से बच जाते हैं, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।डाइटिशियन के मुताबिक वजन घटाने वाले लोग अपनी डाइट में सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस को शामिल कर सकते हैं। सफेद चावल के मुकाबले ब्राउन राइस में अधिक मात्रा में फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है, जो वजन घटाने में मदद करता है।वजन घटाने के लिए कैसे खाएं दाल-चावल?डाइटिशियन के मुताबिक वजन घटाने के लिए दोपहर के लंच या रात के डिनर में दाल-चावल का सेवन किया जा सकता है। आप सप्ताह में 3 से 4 दिन दाल-चावल खाकर वजन को घटा सकते हैं।दाल-चावल बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान- जो लोग वजन घटाने के लिए डाइट में दाल -चावल को शामिल कर रहे हैं उन्हें इसे पकाते वक्त कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:- दाल को पकाने के बाद उसमें तेल, रिफाइंड से तड़का न लगाएं।-दाल में तड़का लगाने के लिए आप प्रोसेसड ऑयल की बजाय घी का इस्तेमाल कर सकते हैं।-सफेद चावल की बजाय ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें।-आप चाहें तो दाल में 2 से 3 तरह की सब्जियां मिलाकर पका सकते हैं।
- अनार खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। अनार में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो शरीर में खून की कमी को दूर करता है। अनार में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी बनाने में काफी लाभकारी है। अनार शरीर के साथ-साथ त्वचा और बालों को हेल्दी रखता है। अकसर लोग अनार को छीलकर खाते हैं और इसके छिलके को फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनार की तरह अनार का छिलका भी हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। एनसीबीआई के अनुसार, अनार के छिलके में प्रोटीन, मिनरल्स, पोटैशियम, कैल्शियम, फेनोलिक एसिड, फ्लेवेनोइड्स, टैनिन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। अनार के छिलके शरीर की कई समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हैं। तो आइए, जानते हैं अनार के छिलकों के फायदे और इसके इस्तेमाल का तरीका-खांसी और गले की खराश से दिलाए आरामखांसी और गले की खराश से आराम दिलाने में अनार का छिलका काफी फायदेमंद हो सकता है। अनार के छिलके की एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। यह खांसी और संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया से निजात दिलाने में मदद कर सकता है। इसके लिए अनार के छिलके के पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर गरारे करें। ऐसा करने से आपको गले की खराश और खांसी से जल्द राहत मिल सकती है।दिल की सेहत के लिए फायदेमंदअनार के छिलके दिल को स्वस्थ रखने में काफी फायदेमंद हैं। दरअसल, ये शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं। अनार के छिलके शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचा सकते हैं। इसके लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच अनार के छिलके का पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण को रोजाना पीने से हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का जोखिम कम होगा।पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करेअनार के छिलके पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पेट की सूजन और संक्रमण को दूर करने में फायदेमंद है। अनार के छिलके दस्त और बवासीर की सूजन को दूर करने में भी मददगार है। पाचन संबंधी समस्या होने पर आप अनार के छिलके के पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं।शरीर को डिटॉक्सिफाई करेअनार के छिलके एंटीऑक्सीडेंट्स गुणों से भरपूर होते हैं, इसलिए यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में फायदेमंद होते हैं। इसके साथ ही, यह लिवर और किडनी को भी स्वस्थ बनाए रखने में मददगार होता है। अनार के छिलकों से तैयार चाय का सेवन करने से बॉडी डिटॉक्स होती है और इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है।ओरल हेल्थ के लिए लाभकारीअनार के छिलके ओरल हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं। ये मुंह की बदबू, मसूड़े की सूजन और मुंह के छालों की समस्या को दूर करने में लाभकारी हो सकते हैं। इसके लिए आप धुप में सुखाए हुए अनार के छिलके को पानी में मिलाएं। दांतों को ब्रश से साफ करने के बाद इस मिश्रण से कुल्ला करें। ऐसा करने से आपके दांत स्वस्थ बनेंगे और सांसों की बदबू भी दूर होगी।
- गेहूं के ज्वारे के बारे में, तो आपने हजारों बार सुना होगा। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि इसको खाने से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। किसी संजीवनी से कम नहीं है ।गेंहू का ज्वारा. गेंहू के ज्वारे को इंग्लिश में वीटग्रास कहते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में ग्लूटाथियोन, विटामिन सी, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स आदि पाए जाते हैं। इसके सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता हैं और शरीर में सूजन की समस्या आसानी से दूर होती है। इसमें विटामिन-सी की मात्रा पाई जाती है, जो मसूंड़ों को स्वस्थ रखने के साथ ही दांतों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता हैं। इसके सेवन से शरीर की कई बीमारियां दूर होती हैं। ये शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करता है। आइए जानते हैं गेहूं के ज्वारे खाने के फायदों के बारे में।पाचन तंत्र को करे मजबूतगेहूं के ज्वारे खाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। इनके सेवन से कब्ज, एसिडिटी, मितली, अपच, उल्टी और पेट फूलने जैसी समस्याएं नहीं होती हैं। ये पेट को हेल्दी रखने में मदद करता है। इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन, अमीनो एसिड और विटामिन बी पचाने की क्षमता को बेहतर करते हैं और शरीर को स्वस्थ रखते हैं।कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करेंगेहूं के ज्वारे खाने से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता हैं। इसमें हाइपोलिपिडेमिक गुण पाए जाते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करके हार्ट को हेल्दी रखने में मदद करता है।डायबिटीज को करे कंट्रोलगेहूं के ज्वारे खाने से डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इसमें एंटीहाइपरग्लाइसीमिया और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में डायबिटीज के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। ये डायबिटीज के होने के खतरे को भी कम करता है।गठिया की समस्या को करे दूरगेहूं के ज्वार के सेवन से गठिया की समस्या आसानी से दूर होती हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो गठिया में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। नियमित इनके सेवन से शरीर हेल्दी रहता है।वजन कम करने में मददगारगेहूं के ज्वार खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें पोटैशियम और फाइबर की मात्रा पाई जाती हैं, जो वजन को कम करने के साथ पेट को हेल्दी रखने में मदद करता है। वजन को कम करने के लिए गेहूं के ज्वारे को आसानी से खाया जा सकता है। गेहूं के ज्वारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन ध्यान रखें इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य लें।
- पनीर का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इनका सेवन शुगर को कम करने, अनिद्रा की समस्या दूर करने और त्वचा के लिए किया जा सकता है। आयुर्वेद में भी पनीर के फूलों का इस्तेमाल कई तरह की समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है। पनीर के फूलों को ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।पनीर के फूल के फायदे1. डायबिटीज में लाभकारपनीर डोडा बेनिफिट्स फॉर डायबिटीज। डायबिटीज को नियंत्रण में रखने के लिए आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन्हीं में से एक है पनीर के फूल या पनीर डोडा। पनीर के फूल इंसुलिन को संतुलन में रखने में मदद करता है। सर्दियों में मधुमेह को कंट्रोल में रखने के लिए पनीर के फूल एक बेहतरीन औषधि है।2. अनिद्रा की समस्या दूर करेरातभर नींद न आना की समस्या अनिद्रा होती है। आजकल के बढ़ते तनाव, चिंता की वजह से अधिकतर लोग मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है, जो अनिद्रा का कारण बनता है। अगर आप अनिद्रा से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो पनीर के फूलों का सेवन कर सकते हैं। पनीर के फूल अनिद्रा से छुटकारा दिलाने में फायदेमंद है।3. मोटापा कम करेपनीर के फूल फॉर वेट लॉस। गलत खान-पान, खराब लाइफस्टाइल मोटापे के मुख्य कारण हैं। अगर आप मोटापे से परेशान हैं, तो पनीर के फूलों को सेवन कर सकते हैं। पनीर के फूल में कई ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो वजन कम करने में मदद करते हैं। वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज के साथ ही पनीर के फूलों को भी डाइट में शामिल कर सकते हैं।4. त्वचा के लिए फायदेमंदकील-मुहांसों, एंटी एजिंग, दाग-धब्बों जैसी त्वचा समस्याओं को दूर करने के लिए भी पनीर के फूलों के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पनीर के फूल का पानी पी सकते हैं। आप चाहें तो पनीर के फूलों का पानी स्किन पर भी लगा सकते हैं। इससे आपको त्वचा संबंधी समस्याओं में काफी आराम मिलेगा।5. सर्दी-जुकाम और बुखार में लाभकारीपनीर के फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें कई ऐसे औषधीय गुण होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं। पनीर के काढ़े का सेवन करके आप सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं। सर्दी-जुखाम के लिए अच्छा घरेलू उपाय है।पनीर के फूल के नुकसान--अगर पनीर के फूलों का सेवन गलत तरीके से किया जाएगा, तो इससे उल्टी की समस्या हो सकती है।-पनीर के फूल का अधिक सेवन करने से गैस, एसिडिटी की समस्या पैदा हो सकती है।- डायरिया, दस्त की समस्या है तो इसके सेवन से बचें।-गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।-गंभीर बीमारी होने पर भी पनीर के फूल को एक्सपर्ट की राय में ही लेना चाहिए।
- कई बार खांसी की समस्या में सीने में दर्द महसूस होता है। अक्सर हम इस दर्द को सामान्य संक्रमण का कारण मानकर घरेलू उपायों को अपनाने लगते हैं। लेकिन इस समस्या की वजह से कई अन्य तरह के रोग होने का खतरा होता है। ऐसा दर्द सीने में बार-बार हो सकता है। आपको बता दें कि हार्ट और फेफड़ों से जुड़े कई बड़े रोगों का लक्षण खांसी और सीने में दर्द होता है। इस तरह के लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।खांसी के साथ सीने में दर्द के कारणएक्यूट ब्रोंकाइटिसऑक्सीजन को फेफड़ों तक ले जाने और फेफड़ों से कार्बन डाई ऑक्सीजन बाहर लाने वाली नलियों में सूजन आ जाती है। कई बार सर्दी लगने पर लोगों को ऐसा महसूस होता है। इस नली में सूजन की वजह से सीने में दर्द महसूस होने लगता है और व्यक्ति को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।पेरिकार्डिटिसपेरिकार्डिटिस में हार्ट के चारों ओर द्रव से भरे टिश्यू की थैली होती है, जिसमें सूजन आ जाती है। इसकी वजह से व्यक्ति को सीने में दर्द महसूस होती है। ये एक तरह का हार्ट डिजीज है। इसके लक्षण व्यक्ति को तीन महीनों तक महसूस होते हैं। इसमें रोगी को थकान, सीने में दर्द, खांसी और बुखार होने लगता है।फ्लूसंक्रमण की वजह से आपको फ्लू की समस्या होती है। फ्लू होने पर व्यक्ति को मांसपेशियों में दर्द, बुखार, गले में दर्द, नाक का बहना, सिर दर्द और थकान महसूस होती है। इस समस्या में व्यक्ति को सीने में कफ हो जाता है और दर्द होने लगता है।सीओपीडीक्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) फेफड़ों से जुड़ी समस्या है। इसमें क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अस्थमा को भी शामिल किया जाता है। इस रोग में मरीज को सांस फूलने लगती है। लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफडों की कार्यक्षमता प्रभावित करती है। इसमें फेफड़ों में सूजन से बलगम की समस्या बढ़ जाती है। इसमें सीने में जकडऩ और दर्द महसूस होता है।जीईआरडीएसिड रिफ्लक्स एक पाचन संंबंधी रोग है, ये पेट में एसिड बनने से होता है। इससे मरीज को खाना पचाने में परेशानी होती है। ऐसा होने पर व्यक्ति को उल्टी आने का मन करता है। इस समय मरीज को सीने में जलन और दर्द महसूस होता है।खांसी और सीने में दर्द के अन्य कारणनिमोनियाप्लूरल डिसऑर्डरअस्थमाप्लनरी इम्बॉलिस्मलंग कैंसर,फेफड़ों संबंंधी अन्य रोग, आदि।सीने में दर्द और खांंसी की समस्या यदि दो से चार सप्ताह से है, तो ऐसे में तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। इन लक्षणों को अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।
- आजकलर जोड़ों में दर्द होने आम बात है। दर्द होने पर लोग गर्म सिंकाई या ठंडी सिंकाई करते हैं। दर्द से आराम दिलाने के लिए ये दोनों ही बहुत ही कारगर उपाय हैं। लेकिन यह जानना जरूरी हो जाता है कि जोड़ों के दर्द के लिए इन दोनों तरीकों में से बेहतर कौन-सा है?कब करें गर्म सिंकाईसबसे पहले बात करते हैं गर्म सिंकाई की। शरीर के जिस हिस्से में दर्द होता है, वहां गर्म सिंकाई की जाती है, ताकि ब्लड वेसल्स को फैलाने में मदद मिले। इससे जोड़ों को आराम मिलता है। इसी तरह गर्म सिंकाई गठिया के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द से भी आराम देता है। अक्सर देखने में आता है कि बुजुर्ग लोग मॉर्निंग स्टिफनेस से ज्यादा परेशान रहते हैं। ऐसे में भी आप गर्म सिंकाई कर सकते हैं। ऐसा 15-20 मिनट के लिए करने से दर्द में काफी आराम मिलता है। इससे जोड़ों की ऐंठन कम होती है, कमर दर्द में राहत मिलती है और पीठ के निचले हिस्से में भी आराम मिलता है।कब करें ठंडी सिंकाईजहां तक बात ठंडी सिंकाई की है, तो यह भी जोड़ों के दर्द में आराम देने का काम करता है। लेकिन ठंडी सिंकाई चोट या घाव के लिए बेहतर होता है। चोट पर ठंडी सिंकाई करने की वजह से रक्त प्रवाह कम होता है। साथ ही सूजन और टिश्यू की क्षति में कमी आती है। साथ ही बर्फ से सिंकाई करने से सूजन कम होती है, मांसपेशियों का दर्द कम होता है और जोड़ों के दर्द में भी यह कारगर है। लेकिन चोट और घाव के लिए ठंडी सिंकाई को प्राथमिकता दी जाती है।जोड़ों के दर्द के लिए क्या है बेहतरदोनों तरह की सिंकाई की अपनी-अपनी अहमियत होती है और दोनों ही तरह से सिंकाई की जाती है। जहां एक ओर ठंडी सिंकाई करने से ब्लड फ्लो में कमी आती है। इसलिए इसे अक्सर चोट लगने के 48 घंटों के भीतर ठंडी सिंकाई की जाने की सलाह दी जाती है। यहां तक कि ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को भी ठंडी सिंकाई (बर्फ से मालिश करना) या 10-15 मिनट के लिए ठंडे पैड का उपयोग करने के लिए कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर गर्म सिंकाई को शारीरिक गतिविधियों या एक्सरसाइज से पहले करने का सुझाव दिया जाता है। ऐसे में यह कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि आप अपनी जरूरत के अनुसार ठंडी या गर्म सिंकाई कर सकते हैं। लेकिन जहां तक जोड़ों के दर्द की बात है, तो इसके लिए विशेषज्ञ गर्म सिंकाई की सलाह देते हैं। हालांकि साथ ही यह सुझाव भी देते हैं कि सूजन होने पर गर्म सिंकाई नहीं की जानी चाहिए।----
- क्या आप वजन बढऩे की समस्या से परेशान हैं? क्या आपका पेट फूलता जा रहा है और कम करने के लिए आपको काफी मशक्कत करनी पड़ रही है? अगर ऐसा है, तो आपके लिए त्रिफला वजन कम करने में सहायक हो सकता है। त्रिफला को आंवला, हरड़ और बहेड़ा को मिलकर बनाया जाता है, जो कई तरह के समस्याओं में जड़ी-बूटी के रूप में काम करता है। ध्यान रहे कि वजन घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण का सेवन करने के साथ-साथ नियमित रूप से व्यायाम करना भी जरूरी है। यहां जानिए कि त्रिफला किस प्रकार फायदेमंद है।एंटीऑक्सीडेंट गुणएक शोध में पाया गया है कि एंटीऑक्सीडेंट गुण फ्री रेडिकल्स को नष्ट करके वजन को कम करने में सहायता कर सकते हैं । वहीं, त्रिफला चूर्ण में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसलिए, वजन घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण को फायदेमंद माना जा सकता हैफैटी एसिडवजन घटाने के लिए त्रिफला चूर्ण के फायदे देखे जा सकते हैं। त्रिफला में फैटी एसिड पाए जाता है , जो आपके वजन को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि ओमेगा-3 फैटी एसिड भूख को शांत रखने का काम करता है, जिससे मोटापे को कम किया जा सकता है।मोटापा कम करने के लिए त्रिफला का उपयोग कैसे करें?वजन से छुटकारा पाने के लिए आप त्रिफला का उपयोग इन विभिन्न तरीकों से कर सकते हैं :1. पानी के साथ- त्रिफला चूर्ण को पानी में मिलकर पिया जा सकता है। इसके लिए आप ठंडा और गर्म दोनों तरह के पानी का उपयोग कर सकते हैं। इसे सुबह खाली पेट पीना ज्यादा फायदेमंद होता है।2. नींबू और शहद के साथ त्रिफला- अगर सादे पानी के साथ त्रिफला को लेने से आपको स्वाद अजीब लगता है, तो आप हल्के गुनगुने पीने में नींबू व शहद मिला सकते हैं। इसे व्यायाम करने के बाद लिया जा सकता है।3. त्रिफला चाय- त्रिफला चूर्ण को चाय की तरह भी उपयोग कर सकते हैं। इसके पाउडर पानी में डालकर उबाल लें और फिर शहद डालकर पिएं। इसे सुबह और शाम पी सकते हैं।4. त्रिफला कैप्सूल- आपको त्रिफला कैप्सूल बाजार से आसानी से मिल जाएगा। इसे दोपहर में ले सकते हैं।-अगर आप घर में ही चूर्ण बना रहे हैं, तो ध्यान रहे कि आंवला, हरड़ और बहेड़ा अच्छे से सूखे हों।-आपको किसी तरह की शारीरिक या मानसिक समस्या है, तो इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।-त्रिफला चूर्ण का उपयोग करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उस चूर्ण को बनाए कितना समय हो गया है। साथ ही उसे किस तरह से रखा गया है। अधिक समय से बनाया हुआ चूर्ण का उपयोग न करें।त्रिफला के सेवन के साथ नियमित व्यायाम का भी ध्यान रखना जरूरी है।किन लोगों को त्रिफला नहीं खाना चाहिए-गर्भवती महिलाओं को त्रिफला चूर्ण के उपयोग से दूर रहना चाहिए। त्रिफला की तासीर गर्म होती है। इसलिए, गर्भपात का जोखिम बना रहता है।-जो महिलाएं शिशु को स्तनपान कराती हैं, उन्हें भी त्रिफला चूर्ण के सेवन से परहेज करना चाहिए।-मधुमेह के रोगियों को इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।-जिन्हें जल्दी एलर्जी हो जाती है, वो इसका सेवन न करें।
- भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से तरह-तरह की बीमारियों को दूर भगाने में किया जा रहा है। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बहेड़ा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि बहेड़ा को संस्कृत में विभीतकी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी में 'फीयरलेस' यानी 'निर्भय' कहते हैं, यानी यह बीमारियों का भय दूर करता है। पेट संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार और प्रबंधन के लिए इस जड़ी-बूटी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है। यह त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है। इसमें रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षाविज्ञानी गुण मौजूद होते हैं। आइये जानते हैं इसके फायदे.....लिवर के लिए फायदेमंद है बहेड़ाबहेड़ा में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद होते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि बहेड़ा किसी हानिकारक पदार्थ के संपर्क में आने पर लिवर में सूजन होने से रोकता है।डायबिटीज में भी है फायदेमंदबहेड़ा में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका अर्क इंसुलिन के स्तर में सुधार करने के अलावा खून में शुगर या ग्लूकोज के स्तर को बढऩे से रोकने में मदद कर सकता है।पेट के लिए है उपयोगीपारंपरिक रूप से बहेड़ा का उपयोग गैस्ट्रिक, अल्सर और गैस्ट्राइटिस से निजात पाने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका हाइड्रोक्लोरिक अर्क एसिडिटी को कम करने में मदद करता है, जो पेप्टिक अल्सर के जोखिम कारकों में से एक है।दिल के लिए है फायदेमंदअध्ययनों में यह पाया गया है कि बहेड़ा में मौजूद गुण खून के थक्के बनने से रोकते हैं और पहले से मौजूद खून के थक्कों को तोड़ते भी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि वाहिका में बनने वाले खून के थक्के की वजह से स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं।
- आज महाशिवरात्रि है। इस मौके पर भक्त भगवान शिव की अराधना कर उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान आप कई ऐसी चीजों का सेवन कर सकते हैं, जो आपको हेल्दी रखने में मदद करते हैं। तो जानते हैं महाशिवरात्रि के व्रत के लिए हेल्दी फलाहार-1. फ्रूट्स और ड्राई फ्रूट्स चाटमहाशिवरात्रि के व्रत में आप फ्रूट्स और ड्राई फ्रूट्स चाट का भी सेवन कर सकते हैं। व्रत के दौरान फल और मेवे का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। व्रत में फल और ड्राई फ्रूट्स खाने से आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स और मिनरल्स मिलेंगे। इससे आप पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस करें और जल्दी से भूख भी नहीं लगेगी। इसके लिए आप एक बाउल में फल काट लें। फिर इसमें भीगे हुए ड्राई फ्रूट्स डाल दें। इसमें सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर भी मिक्स करें।2. साबुदाने के खीरसाबुदाने की खीर स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। अगर आप व्रत में साबुदाने की खीर खाएंगे, तो इससे आप पूरे दिन एनर्जेटिक रहेंगे। साथ ही आपको थकान, कमजोरी भी महसूस नहीं होगी और ज्यादा भूख का अहसास नहीं होगा। साबुदाने की खीर खाने से आपको कई विटामिन्स और मिनरल्स भी मिलेंगे।3. फ्रूट रायताफ्रूट रायता भी एक अच्छा फलाहार होता है। फ्रूट रायता खाने से आपकी भूख मिटेगी, साथ ही आप में पूरे दिन एनर्जी भी रहेगी। इसके लिए आप एक बाउल में दही लें। इसमें अपने पसंदीदा फल और ड्राई फ्रूट्स डालें। अब आप इस तैयार रायते को महाशिवरात्रि के मौके पर खा सकते हैं। लेकिन रायते में नमक डालने से बचना चाहिए।4. ड्राई फ्रूट्स शेकड्राई फ्रूट शेक भी एक अच्छा फलाहार विकल्प है। आप ड्राई फ्रूट शेक को आसानी से घर पर ही बना सकते हैं। इसके लिए आप एक गिलास दूध लें। इसमें काजू, बादाम, अखरोट, किशमिश डालें। फिर अच्छी तरह से ग्राइंड कर लें। आप चाहें तो इसमें केला, स्ट्रॉबेरी आदि भी डाल सकते हैं। महाशिवरात्रि के व्रत में ड्राई फ्रूट शेक पीने से आपको पर्याप्ता एनर्जी मिलेगी, साथ ही आपको लंबे समय तक भूख भी नहीं लगेगी।5. रोस्टेड मखानामखाने में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और आयरन का अच्छा सोर्स होता है। इसके लिए आप मखाने को घी में रोस्ट कर लें। फिर व्रत के दौरान इनका सेवन करें। इससे आपको सभी विटामिन्स और मिनरल्स मिलेंगे, साथ ही आपको एनर्जी भी मिलेगी।
- पोटली मसाज भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति का एक हिस्सा है। पोटली मसाज कई तरह की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और तेलों को मिलाकर बनाई जाती है। कई बार पोटली मसाज में ताजा आयुर्वेदिक पत्तियों को मिलाया जाता है, तो कई बार इसमें तेल की मात्रा ज्यादा होती है। पोटली मसाज में मिलाए जाने वाली जड़ी-बूटियां दर्द और समस्या के हिसाब से तय की जाती है। पोटली मसाज करने से शारीरिक दर्द को दूर करने, स्किन को ग्लोइंग बनाने और शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मदद मिलती है।पोटली मसाज के फायदे क्या हैं--नियमित तौर पर पोटली मसाज करने से जोड़ों के दर्द, सिर दर्द और मांसपेशियों के दर्द से राहत पाई जा सकती है। सर्दियों के मौसम में जिन बुजुर्गों के घुटनों और जोड़ों में ज्यादा दर्द होने लगता है उन्हें दिन में दो बार पोटली मसाज करने की सलाह दी जाती है।-नियमित तौर पर पोटली मसाज करने से तनाव, डिप्रेशन और अनिद्रा की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। तनाव से जूझ रहे लोगों को शाम के समय पोटली मसाज करवाने की सलाह दी जाती है।-पेट में बनने वाले कब्ज, सूजन और दर्द से भी राहत दिलाने में पोटली मसाज काफी फायदेमंद साबित होती है।-पोटली मसाज करने से शरीर और चेहरे पर होने वाले दाग-धब्बे भी दूर होते हैं।पोटली मसाज में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?-आयुर्वेद के अनुसार तनाव और अनिद्रा से बचाव के लिए पोटली मसाज में अश्वगंधा के पाउडर और तेल का इस्तेमाल किया जाता है।-शारीरिक दर्द को खत्म करने के लिए पोटली मसाज में सरसों के बीज, नीम का तेल और अदरक का इस्तेमाल किया जाता है।-सिर के दर्द को खत्म करने के लिए पोटली मसाज में नींबू और पुदीने की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ जगहों पर सिर के दर्द के इलाज में मसाज पोटली में राई का भी इस्तेमाल होता है।-शरीर का ब्लड सर्कुलेशन ठीक करने के लिए चावल या चावल के आटे और रोजमेरी का इस्तेमाल मसाज पोटली में किया जाता है।-पोटली मसाज का प्रयोग 14वीं सदी से भारत और दुनिया के कई हिस्सों में शारीरिक समस्याओं के समाधान के तौर पर किया जाता रहा है। पोटली मसाज सुनने में जितनी आसान लगती है ये उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है। ध्यान रखें कि अगर आप मसाज पोटली से मसाज करना चाहते हैं तो एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।
- अर्जुन एक ऐसा सदाबहार वृक्ष है, जिसमें कई औषधीय गुण मौजूद हैं। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि अर्जुन की छाल के क्या फायदे होते हैं।1 - मधुमेह के रोगियों के लिए उपयोगीमधुमेह से पीडि़त रोग अर्जुन की छाल के चूर्ण को देसी जामुन के बीजों के साथ मिलाएं व नियमित रूप से रात को सोने से पहले बने चूर्ण का सेवन करें। या फिर कदम्ब की छाल, अर्जुन की छाल, जामुन की छाल तथा आजवाइन को एक साथ बराबर मात्रा में पीसकर इसे उबाल लें और ठंडा होने पर इस काढ़ेे का सेवन करें।2 - त्वचा के लिए उपयोगीअगर आप अपनी स्किन को टाइट करना चाहते हैं या चमकदार और साफ दिखाई देना चाहते हैं तो अर्जुन की छाल से बना लेप एक अच्छा विकल्प है। इसके लिए आपको बादाम, हल्दी, कपूर और अर्जुन की छाल को बराबर मात्रा में लेकर पीस लेना होगा और चेहरे पर लगाना होगा।3 - मोटापे से छुटकाराअर्जुन की छाल वजन कम करने में भी बेहद मददगार है। ऐसे में अर्जुन की छाल से बना काढ़ा नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी खुद-ब-खुद कम होनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए आपको अलग से व्यायाम करने की जरूरत नहीं है।4 - दिल की सेहत के लिएअर्जुन की छाल न केवल अनियमित धड़कन संकुचन दूर करती है बल्कि हृदय में आई सूजन, स्ट्रोक के खतरे को भी दूर कर सकती है। यह दिल को ताकत पहुंचाती है। ऐसे में आम अर्जुन की छाल और जंगली प्याज को समान मात्रा में लें और उसका चूर्ण बनाएं। इस पाउडर को नियमित रूप से दूध के साथ सेवन करने से हृदय की ब्लॉकेज दूर होगी और मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी।5 -मूत्र की रुकावट को दूर करेमूत्र से संबंधित रोगों को दूर करने में अर्जुन की छाल बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा गुर्दे या मूत्राशय की पथरी को निकालने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। ऐसे में अर्जुन की छाल को पीसकर दो कप पानी में उबालें और गैस से उतारकर रोगी को इसका सेवन करने के लिए दें।6 - मुंह के छालेअर्जुन की छाल से मुंह के छालों को दूर किया जा सकता है। ऐसे में अर्जुन की छाल के चूर्ण को नारियल के तेल के साथ मिलाएं और छालों पर लगाएं।7 - खांसी से राहतइसके लिए आपको अर्जुन की छाल को सुखाकर उसे पीसना होगा। उसके बाद उसमें अडूसा के पत्तों का रस निकालना होगा और मिलाना होगा। अब फिर से इस चूर्ण को सूखाना होगा और फिर से इस प्रक्रिया को दोहराना होगा। इसे तकरीबन छह से सात बार करने के बाद एक पैक तैयार होगा। उसे आपको शीशी में भरना होगा। अब इस पैक को शहद के साथ चाटना होगा। ऐसा करने से खांसी की समस्या दूर हो जाएगी।8 - उच्च रक्तचाप को कम करेजो लोग हाई ब्लड प्रेशर से परेशान रहते हैं उन्हें बता दें कि अर्जुन की छाल ट्राइग्लिसराइड की समस्या को कम करती है। कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ-साथ अर्जुन की छाल का पाउडर एनजाइना के दर्द को भी कम करता है।(नोट- कोई भी उपाय करने से पहले एक बार योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।)
-
खाना तो हमेशा सेहतमंद ही खाना चाहिए। अगर मीठा खाने का दिल करता है तो कुछ अनहेल्दी खाने से अच्छा है कि घर में कुछ टेस्टी और न्यूट्रिशन से भरपूर बनाएं। जिसे घर का हर सदस्य खा सके। अंजीर की खीर बनाने में आसान है और पोषण से भरपूर। इसे आप डायबिटीज के पेशेंट को भी खिला सकती हैं। कई बार डायबिटीज के मरीज मीठा खाने की डिमांड करते हैं। ऐसे में आप उनके लिए अंजीर की खीर बना सकती हैं। अंजीर ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ ही डाइजेशन के लिए वरदान है। कब्ज की समस्या में अंजीर बहुत फायदा पहुंचाता है। तो चलिए जानें कैसे बनेगी अंजीर की सेहतमंद खीर।
अंजीर की खीर बनाने की सामग्री
ड्राई अंजीर 10-12
दूध एक लीटर
चीनी तीन से चार चम्मच
छुहारा या खारक 4-5
काजू 10-12
बादाम 10-12
पिस्ता 10-12
केसर के धागे 3-4
हरी इलायची 3-4
कंडेस्ट मिल्क एक कप
देसी घी
अंजीर की खीर बनाने की विधि
सेहतमंद अंजीर की खीर बनाने के लिए सबसे पहले अंजीर को अच्छी तरह से धो लें। फिर इन्हें टुकड़ों में काट लें। पैन में देसी घी गर्म करें और उसमे अंजीर के टुकड़ों को डालकर धीमी आंच पर भून लें। दूसरी गैस पर गहरे तल के बर्तन में दूध उबलने के लिए रख दें। इस दूध में अच्छी तरह से भुने अंजीर को डालकर करीब 4-5 घंटे के लिए छोड़ दें।
कड़ाही में घी डालें और बादाम, छुहारा को भून लें। साथ में काजू और पिस्ता को भी भूनकर रख लें। जब ये ड्राई फ्रूट्स थोड़ा ठंडा हो जाए तो ग्राइंडर के जार डालकर पीस लें। इसमें हरी इलायची भी डाल दें। दूध में भीगी अंजीर को भी पीस लें।
इस तरह तैयार करें खीर
दूध को गैस पर उबलने दें। एक उबाल आने के बाद सारे पिसे ड्राई फ्रूट्स को डालकर चलाएं। खीर को गाढ़ा करने के लिए इसमे कंडेस्ड मिल्क डालें। साथ में चीनी डालकर चलाएं और आठ से दस मिनट तक पकने दें। गैस बंद कर दें और गर्मागर्म या ठंडा हो जाने के बाद सर्व करें। -
नमक एक ऐसी चीज है, जिसके बिना खाने का स्वाद नहीं आता है। लेकिन ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। दरअसल, खाने में प्रयोग होने वाला नमक 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोराइड से बना होता है। सोडियम शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। सोडियम शरीर में पानी और मिनरल्स को बैलेंस रखने का काम करता है। इसके साथ ही, सोडियम कोशिकाओं को ठीक से काम करने में भी मदद करता है। लेकिन शरीर नें सोडियम की अधिकता कई बार हानिकारक भी साबित हो सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका शरीर भी आपको कई ऐसे संकेत देता है, जो बताते हैं कि आप जरूरत से ज्यादा नमक खा रहे हैं। इस लेख में हम आपको शरीर में सोडियम की अधिकता के लक्षण बता रहे हैं -
शरीर में सूजन
अगर सुबह उठने के बाद आपका चेहरा फूला या सूजा हुआ नजर आता है, तो यह शरीर में हाई सोडियम लेवल का संकेत हो सकता है। ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन की समस्या हो सकती है। अगर आपको सुबह उठने के बाद उंगलियों और टखनों के आसपास सूजन दिखाई दे, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। यह सूजन शरीर के टिश्यू में ज्यादा तरल पदार्थ की वजह से हो सकती है, जिसे एडिमा के रूप में जाना जाता है।बार-बार पेशाब आनाबार-बार पेशाब आना भी हाई सोडियम लेवल का एक लक्षण हो सकता है। अगर आपको रात में भी बार-बार पेशाब करने जाने की जरूरत पड़ती है, तो यह खाने में ज्यादा नमक का एक बड़ा संकेत है। हालांकि, डायबिटीज या यूटीआई जैसी समस्याओं में भी यह लक्षण महसूस हो सकता है। इसलिए, ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।ज्यादा प्यास लगनाअगर आपको बार-बार प्यास लगती रहती है, तो यह भी ज्यादा नमक के सेवन का संकेत है। अधिक मात्रा में नमक का सेवन करने से आपको हर समय प्यास लग सकती है। दरअसल, हाई सोडियम वाले खाद्य पदार्थ आपके शरीर के द्रव संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसके कारण आप हर समय डिहाइड्रेटेड महसूस करते हैं। इस समयसा से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप भरपूर मात्रा में पानी पिएं।मांसपेशियों में कमजोरीमांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना भी शरीर में सोडियम की अधिकता का लक्षण हो सकता है। दरअसल, मांसपेशियों के बेहतर कामकाज के लिए सोडियम बहुत जरूरी है। शरीर में सोडियम का स्तर बढऩे के कारण आपकी हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। अगर आपको मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से अपने सोडियम लेवल की जांच करवाएं।बार-बार सिरदर्द होनाअगर आपको बार-बार सिरदर्द की समस्या हो रही है, तो यह भी हाई सोडियम लेवल का संकेत हो सकता है। दरअसल, ज्यादा नमक खाने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। जिसकी वजह से आपको बार-बार हल्का सिरदर्द हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए नमक का सेवन कम कर दें और खूब पानी पिएं।ये कुछ ऐसे लक्षण हैं, जो बताते हैं कि आप खाने में ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। इसलिए, अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। - सेहत के लिए पानी फायदेमंद होता है। हमारे शरीर के कुल वजन में 60 फीसदी पानी का होता है। शरीर को जितना पोषण तत्वों की जरूरत होती है, उससे ज्यादा पानी की होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक,एक व्यक्ति को रोजाना आठ से 10 गिलास पानी पीना चाह्ए। वहीं पानी पीने का तरीका और सही समय कई तरह की बीमारियों को भी दूर रखता है। अक्सर लोग ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं, हालांकि कुछ लोग गुनगुना पानी पीते हैं। लेकिन अगर आप सुबह-सुबह खाली पेट गर्म पानी पीते हैं तो ये सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। सुबह गर्म पानी पीने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। ऐसे में आपको खाली पेट पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। आइए जानते हैं सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने के फायदों के बारे में...पाचन तंत्र रहता है सहीखाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी पीने से आपका पाचन तंत्र सही रहता है। रोजाना सुबह सुबह पानी पीने की आदत होने से गैस की समस्या और पेट फूलने की समस्या से राहत मिलती है। शरीर से विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं।भूख बढ़ती हैस्वास्थ्य विशेषज्ञ के मुताबिक, खाली पेट गर्म पानी पीने से भूख भी बढ़ती है। इससे सुबह का नाश्ता करने में आपको परेशानी नहीं होती और भरपूर नाश्ता करने के कारण शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। थकान भी नहीं लगती।सिर दर्द से राहतअगर आपको सिर दर्द की समस्या है तो रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। दरअसल, शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी न होने से सिर दर्द होता है। इसलिए भरपूर मात्रा में पानी पिएं और रोज सुबह एक गिलास पानी के साथ दिन की शुरुआत करें।त्वचा में आता है निखारगुनगुना पानी पीने से त्वचा में निखार आता है। शरीर में अधिक विषाक्त पदार्थ होते हैं, तो इससे त्वचा पर दाग धब्बे हो जाते हैं। त्वचा मुरझा जाती है और चमक चली जाती है। पानी तो त्वचा में निखार लाने में मददगार होती ही है। रोज सुबह उठकर एक गिलास पानी पीने से दाग-धब्बे से भी मुक्ति मिलती है।

.jpg)
.jpg)

.jpg)





.jpg)








.jpg)

.jpg)


.jpg)


