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- आपने बाजरे की रोटी तो जरूर खाई होगी। लेकिन क्या आपने कभी मडुआ या रागी की रोटी खाई है। अगर नहीं तो आज हम आपको यहां बताएंगे कि मडुआ की रोटी खाने के क्या फायदे होते हैं। मडुआ की रोटी का स्वाद बिल्कुल बाजरे की रोटी के समान होता है। इसे बनाना भी आसान होता है।बाजरा लंबी-लंबी डंडियों में उगता है तो वहीं मडुआ जैसे एलोवेरा का पौधा होता है कुछ उससे अधिक लंबाई वाला पौधा होता है। उसमें छोटे-छोटे फूल आते हैं जिनमें मडुआ के दाने होते हैं। इन दानों को निकलवाकर पिसवाया जाता है। फिर उस आटे से आप रोटी, डोसा, केक, मोटी डबल रोटी, चिप्स कुछ भी बना सकते हैं। मडुआ की रोटी मक्खन के साथ खाने में बहुत लजीज लगती है तो वहीं इसे अक्सर सर्दियों में खाया जाता है। मडुए को अलग-अलग जगह अलग नामों से जाना जाता है। उत्तराखंड के कुमाऊं में इसे मडुआ और दक्षिण भारत में रागी कहा जाता है। उत्तराखंड में इस रोटी को खूब पसंद किया जाता है।मडुआ (रागी) रोटी खाने के फायदेरागी में कैल्शियम, प्रोटीन, ट्रिपटोफैन, आयरन, मिथियोनिन, फाइबर, लेशिथिन, फास्फोरस, कैरोटीन और कार्बोहाइड्रेट आदि भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है। इसलिए इसे सर्दियों में ही खाना चाहिए। मडुआ की रोटी खाने से शरीर को अनेक फायदे मिलते हैं। आइए जानते मडुआ की रोटी खाने के फायदे।1. पेट की समस्याओं से दिलाए निजातमडुआ में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है जो वजन कम करने में तो सहायक होता ही है। साथ ही पेट की समस्याएं जैसे अपच, एसिडिटी, कब्ज से भी राहत दिलाता है। मडुए की रोटी नियमित खाने से कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी ठीक रहता है।2. वजन कम करने में मददगारमडुआ की रोटी खाने से भूख पर नियंत्रण होने लगता है। जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। जब बार-बार भूख नहीं लगेगी तो वजन खुद-ब-खुद कंट्रोल रहेगा। दूसरा इसमें वसा कम होती है जिस वजह शरीर में फैट कम बढ़ता है। मडुआ में ट्रिप्टोफेन नामक एसिड पाया जाता है जो भूख को कंट्रोल करता है। इस तरह मडुआ की रोटी का नियमित सेवन करने से वजन नियंत्रित रहता है। वजन कम करने की तमाम कोशिशों से जो लोग नाकाम हो चुके हैं उन्हें इस रोटी का सेवन जरूर करना चाहिए।3. दांतों के लिए असरदारमडुआ में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यही वजह है कि यह दांतों की सभी परेशानियों के लिए रामबाण इलाज है। मसूड़ों की कमजोरी, सेंसटिविटी हो या दांतों का इनेमल हटना हो, सभी परेशानियों में यह असरदार है।4. हड्डियों को दे मजबूतीमडुआ में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। कैल्शियम हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मडुआ या रागी में कैल्शियम की मात्रा प्रचूर होती है इसलिए ये शरीर के हड्डी के रोगों को खत्म करता है। इसके नियमित सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं।5. डायबिटीज के रोगियों के लिए रामबाणमडुआ की रोटी खाने से भूख कम लगती है जिससे डायबिटीज के रोगी को बार-बार भूख नहीं लगती। दूसरा मडुआ ग्लूटन फ्री होता है। जिससे ग्लूकोज के स्तर में गिरावट आती है। इसके नियमित सेवन से डायबिटीज के मरीज को बहुत फायदा मिलता है। डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति अगर सुबह-शाम यह रोटी खाता है तो उसकी समस्या कम हो सकती है।
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दुनियाभर के करीब आधे से ज्यादा बच्चे और किशोरों को नाखून चबाने की आदत होती है। कई बार तो वयस्क होने के बाद भी लोगों की यह आदत नहीं छूटती। इसके अलावा बहुत से लोगों को आपने देखा होगा कि जब वे नर्वस होते हैं या फिर उन्हें किसी तरह की टेंशन होती है तो वे अपने नाखून चबाने लगाते हैं। आपने भी कभी-न-कभी ये काम जरूर किया होगा। वैसे तो नाखून चबाने की आदत अस्थायी होती है और इससे आम तौर पर किसी तरह का नुकसान नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में नाखून चबाना, किसी गंभीर मानसिक बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
विशेषज्ञों की मानें तो नाखून चबाने की आदत को मेडिकल टर्म में ऑनिकोफेजिया कहा जाता है। यह एक पैथोलॉजिकल (रोग संबंधी) मौखिक आदत है जिसकी वजह से ऊंगली के नाखूनों के साथ ही आस पास के टीशूज को भी नुकसान हो सकता है। वैसे तो नाखून चबाने की कोई निश्चित वजह नहीं है, लेकिन आम तौर पर यह आदत बचपन में शुरू होती है। किसी व्यक्ति में ये आदत क्यों या कैसे लग जाती है इसका भी कोई स्पष्ट कारण नहीं, लेकिन एक बार शुरू होने के बाद, इसे रोकना मुश्किल होता है। कुछ मामलों में नाखून चबाना किसी मानसिक बीमारी की संकेत भी हो सकता है।
1. जिन लोगों को नाखून चबाने की आदत होती है वे आम तौर पर ऐसा तब करते हैं जब उन्हें किसी वजह से एंग्जाइटी यानी बेचैनी महसूस होती है। इसका कारण ये है कि नाखून चबाने से तनाव, टेंशन और नीरसता या ऊबाउपन दूर करने में मदद मिलती है।
2. इसके अलावा बहुत से लोग नर्वस महसूस करने पर, अकेलापन महसूस करने पर या फिर भूख लगने पर भी नाखून चबाते हैं।
3. बचपन में बहुत से बच्चों को अंगूठा चूसने की आदत होती है जो कई बार बड़े होने पर नाखून चबाने की आदत में बदल जाती है।
4. इसके अलावा कुछ मानसिक बीमारियों की वजह से भी मरीज नाखून चबाने लगता है। वे बीमारिया हैं- अटेंशन डेफिसिट हाइपरऐक्टिविटी डिसऑर्डर , मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर , ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर , किसी अपने से बिछडऩे से जुड़ी चिंता (सेपरेशन एंग्जाइटी)।
5. कुछ लोगों में नाखून चबाने की आदत जेनेटिक भी हो सकती है। यानी जिन बच्चों के माता-पिता में यह आदत होती है, कई बार उनके बच्चे में भी नाखून चबाने की लत लग जाती हैष
नाखून चबाने के नुकसान
-नाखून और उसके आस पास की स्किन में सूजन या घाव होना
-नाखून का असामान्य दिखना
-नाखून और आस पास की स्किन में फंगल इंफेक्शन होना
-नाखून में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस के पेट में जाने की वजह से बीमार पडऩा
-नाखून चबाने की वजह से दांतों को भी होता है नुकसान - हर भारतीय रसोई में किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाने वाला धनिया कई औषधीय गुणों से युक्त है। आमतौर पर रसोई में इसका इस्तेमाल एक सामान्य मसाले के रूप में किया जाता है , लेकिन स्वास्थ्य को लेकर इसके बेहतरीन फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। धनिया के पत्तों से लेकर इसके बीज तक सभी का इस्तेमाल भारतीय खानों में किया जाता है। सुबह खाली पेट धनिया का पानी पीना कई समस्याओं के लिए रामबाण का काम करता है। धनिया पेट संबंधी समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह अपच, कब्ज, गैस और आंतों से जुड़ी समस्याओं के लिए बेहद लाभकारी है। धनिया को मूत्रवर्धक माना जाता है। इसका सेवन पेशाब से जुड़े रोगों में फायदेमंद होता है। शरीर के लिए अनेक फायदों से युक्त धनिया का पानी सुबह खाली पेट पीने से स्किन, बालों और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद फायदेमंद होता है। धनिया के पानी में विटामिन सी के साथ-साथ मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटेशियम की पर्याप्त मात्रा होती है जो हमारे शरीर के लिए बेहद स्वास्थ्यप्रद है।घर पर धनिया का पानी कैसे बनाएंकई औषधीय गुणों से युक्त धनिया का पानी बनाने के कई तरीके हैं। पहला तरीका यह है कि साबुत धनिया के एक चम्मच बीज को एक गिलास उबलते पानी में दाल दें और इसे कुछ देर तक उबलने दें। 2 से 3 मिनट बाद जब आपको लगे कि धनिया के बीज अच्छी तरह से उबल गए हैं तो इसे उतार लें और थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें। ठंडा होने के बाद इसका सेवन खाली पेट करें। दूसरा तरीका यह है कि धनिया के एक चम्मच बीज को आधा गिलास पानी में डालकर उसे रातभर उसी में रहने दें। सुबह में पानी को छानकर बीज को अलग कर लें, और इस पानी का सेवन सुबह खाली पेट करें। आप चाहें तो इसमें एक चम्मच नींबू का रस भी मिला सकते हैं। आप धनिया के पत्तों के रस का भी सेवन कर सकते हैं उसके लिए आपको धनिया के साफ पत्तों को पानी में भिगाकर रात भर के लिए रखना होगा उसके बाद सुबह इसे थोड़ी देर के लिए उबालकर छान लें। इसमें थोडा से नींबू का रस मिलाकर आप इसे चाय के तौर पर सुबह खाली पेट पी सकते हैं।धनिया पानी पीने के फायदे1. इम्यूनिटी बढ़ाएधनिया का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से शरीर की इम्यूनिटी बढती है। यह हमारे शरीर को कई रोगों से लडऩे की शक्ति देता है। धनिया में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट के गुण हमारे शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को अधिक मजबूत करते हैं।2. बेहतर पाचन में सहयोगीधनिया का पानी पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। धनिया में मौजूद औषधीय गुण शरीर के पाचन तंत्र को मजबूती देते हैं। शरीर के मेटाबोलिज्म को भी नियंत्रित करने में धनिया का पानी फायदेमंद होता है।3. वजन कम करने में सहायकधनिया में मौजूद गुण वजन घटाने में भी सहायक होते हैं। धनिया का पानी शरीर के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करता है जिसकी वजह शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद मिलती है।4. बालों के लिए उपयोगीबालों को मजबूती देने के लिए धनिया के पानी का सेवन बेहद फायदेमंद हैं। धनिया में मौजूद विटामिन सी के गुण इसे बालों के लिए बेहद उपयोगी बनाते हैं। रोज़ाना सुबह खाली पेट धनिया के पानी का सेवन टूटते और कमजोर बालों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।5. स्किन के लिए बेहद लाभकारीधनिया का पानी त्वचा के लिए रामबाण माना जाता है। धनिया में मौजूद आयरन आयरन, एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण इसे स्किन के लिए बेहद फायदेमंद बनाते हैं। सुबह रोज़ाना खाली पेट धनिया के पानी का सेवन करने से हमारी त्वचा साफ़ और चमकदार होती ही है और इससे त्वचा संबंधी रोगों के होने का ख़तरा भी कम हो जाता है। मुहांसे और चेहरे पर दाने आदि निकलने जैसी समस्याओं में धनिया का पानी बेहद उपयोगी होता है।6. शरीर को करता है डिटॉक्सरोज़ाना खाली पेट धनिया के पानी का सेवन हमारे शरीर को डिटॉक्स करने में बेहद उपयोगी माना जाता है। शरीर के अन्दर मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में धनिया बेहद उपयोगी होता है।आमतौर पर धनिया का पानी पीने से सामान्य स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन कुछ विशेष बीमारी या समस्या से ग्रसित लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए। गर्भावस्था और स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को धनिया का सेवन इस दौरान कम करना चाहिए और धनिया के पानी के सेवन से बचना चाहिए। डायबिटीज जैसे रोगों से पीडि़त लोगों को धनिया के पानी का सेवन नहीं करना चाहिए, धनिया के पानी का सेवन करने से ब्लड सुगर में कमी आती है जो कि डायबिटीज के रोगियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एलर्जी या ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोगों को भी धनिया और इसके पानी का सेवन करने से बचना चाहिए।-सांस लेने में दिक्कत-लिवर संबंधी रोग-एलर्जी की समस्या-गर्भावस्था और स्तनपान की स्थिति में-पीरियड्स कम आने की स्थिति-ब्लड सुगर के कम होने की स्थिति-सर्जरी की स्थिति मेंउपर बताए गए सभी परिस्थितियों में धनिया के पानी का सेवन नहीं करना चाहिए, ऐसी स्थिति में इसका सेवन करने के दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। इन समस्याओं से ग्रसित लोगों को धनिया उया उसके पानी के सेवन से पहले अपने चिकित्सक से सलाह लेना जरुरी है।
- भारतीय घरों में मैदा से बने नाश्ते का सेवन करना आम बात है जैसे, कचोरी, मठरी, नमक पारे, समोसे आदि। अब पिज़्ज़ा और ब्रेड भी इसमें शामिल हो गया है। मैदा सभी जंक फूड में पाया जाता है। माना की मैदे से बना अधिकतर खाना बहुत स्वादिष्ट होता है जैसे- रूमाली रोटी, नान, केक, पेस्ट्री, बेक्ड फ़ूड जैसे बिस्कुट, नमकीन, पास्ता, नूडल्स, समोसे ... ये सूची कभी न ख़त्म होने वाली है! लेकिन रिसर्च से यह बात सामने आई है कि मैदा स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक है।दरअसल मैदा से बने फूड्स को बनाने और लंबे समय तक प्रीज़र्व रखने की प्रक्रिया में कई हार्मफुल टोक्सिंस मिलाये जाते हैं, जो शरीर के लिए और भी ज्यादा नुकसानदेह हैं जैसे:1. बेंज़ोयल पेरोक्साइडबेंज़ोयल पेरोक्साइड, एक ब्लीचिंग एजेंट है, जिसका उपयोग करके, मैदे को सफेद रंग दिया जाता है। बेंज़ोयल पेरोक्साइड एक हानिकारक रसायन है जिसे दांतों को सफेद करने वाले उत्पादों और हेयर डाई में उपयोग करने के लिए डाला जाता है। अपने केंद्रित रूप में, यह काफी विस्फोटक हो सकता है।2. एलोक्सनमैदा को एक चिकनी बनावट प्रदान करने के लिए एक अन्य रसायन, एलोक्सन भी जोड़ा जाता है। पशु परीक्षण से संकेत मिले हैं कि ऐलोक्सान पैनक्रियाज़ की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप टाइप 2 मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है।3. बेंजोइक एसिडमैदे में खतरनाक रसायन जैसे बेंजोइक एसिड और सोडियम मेटा बाय-सल्फेट होते हैं, जो विशेष रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए गहन जोखिम कारक हो सकता है।मैदा का ज्यादा सेवन करने से होते हैं ये नुकसान1. मोटापे का खतरामैदे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक है, लगभग 71 यानी इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में कैलोरी की मात्रा दोगुनी होती है। इसलिए, इसे खाने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। ज्यादा कैलोरी खाने से शरीर की कोशिकाओं को आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज प्राप्त हो सकता है, जो वसा के रूप में जमा हो जाता है, जिससे तेजी से वजन बढ़ता है।2. पाचन संबंधी समस्याएंमैदे का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह है कि यह पाचन तंत्र में गड़बड़ी पैदा कर सकता है। मैदा में बहुत कम पोषण मूल्य और शून्य फाइबर होता है। फाइबर की कमी से इसे पचाना मुश्किल हो जाता है। यह चयापचय की दर को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और नियमित रूप से मल त्याग में बाधा उत्पन्न करता है जिससे कब्ज और अन्य पाचन समस्याएं हो सकती हैं।3. अन्य घातक बीमारियों को बुलावा देता हैज्यादा मैदा खाने से रक्तचाप में गड़बड़ी हो सकती है जिसकी वजह से ह्रदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। मैदे में कोलेस्ट्रोल होता है जो आर्ट्रीज़ ब्लॉक कर सकता है और तनाव को भी बढ़ा सकता है। इस सब का इम्युनिटी पर बहुत नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा मैदा एसिडिक होता है जो इन्फ्लामेंशन को बढ़ाता है।
- अगर आपका बच्चा दिखने में स्वस्थ लगता है, मगर उसे नींद नहीं आती है, चिड़चिड़ा है, खेलने में थक जाता है, रात में थकान की शिकायत करता है। पैरों में मालिश के बाद सोता है तो सतर्क होने की जरूरत है। यह बच्चे के शरीर में विटामिन डी की मात्रा बेहद कम होने के संकेत हैं जो आगे चलकर गंभीर बीमारियां दे सकते हैं। विटामिन डी की कमी के कारण बच्चे को रिकरंट इन्फेक्शन यानी बार-बार सर्दी-खांसी व मौसमी बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।एक रिसर्च में 30 फीसदी बच्चे दिखने में सामान्य मगर विटामिन डी की बेहद कमी वाले मिले हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हुए एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर हुए रिसर्च में दो तरह के बच्चों को शामिल किया गया है। एक तो ऐसे बच्चे जो दिखने में सामान्य थे। दूसरे ऐसे बच्चे जो दिखने में कुपोषित और अति कुपोषित श्रेणी के थे। ऐसे बच्चों पर डॉक्टरों ने रिसर्च किया है। शोधकर्ता डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में विटामिन डी की मात्रा बेहद कमी मिल रही है।नवजात शिशुओं और बच्चों में, विटामिन डी के लगातार कम स्तर से रिकेट्स (सूखा रोग) हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मुलायम हड्डियां, विकृत हड्डियां, हड्डियों का टूटना, खराब वृद्धि, और रक्त में कैल्सियम का स्तर कम होता है जिससे ऐंठन हो सकती है।कैसे करें बच्चों में विटामिन डी की कमी दूरवैसे तो इसकी कमी को पूरा करने के लिए सूरज की रोशनी बेहद फायदेमंद होती है। यह शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करने व हड्डियों में मजबूती दिलाने में मदद करता है। मगर आप डाइट में कुछ चीजों को शामिल करके भी इसकी कमी को पूरा कर सकते हैं।सोया से भरपूर चीजेंविटामिन डी से भरपूर चीजों की लिस्ट में सोया भी शामिल होता है। ऐसे में बच्चे की डाइट में सोया से भरपूर टोफू, दूध और सोयाबीन शामिल करें। इससे बच्चे को सही मात्रा में विटामिन डी मिलने के साथ शारीरिक व मानसिक विकास होने में मदद मिलेगी।दूधइसकी कमी पूरा करने के लिए दूध पीना भी बेस्ट ऑप्शन है। असल में दूध में कैल्शियम के साथ उचित मात्रा में विटामिन डी में पाया जाता है। इसलिए रोजाना 1 गिलास दूध का सेवन करने से बच्चे में इसकी कमी पूरी की जा सकती है। एक्सपट्र्स के अनुसार, 1 गिलास दूध का सेवन करने से दिनभर की जरूरत के अनुसार 1/4 विटामिन डी की मिल सकता है।संतरावैसे तो विटामिन-सी के लिए संतरा खाने की सलाह दी जाती है। मगर असल में, इसमें विटामिन-सी और डी सही मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में रोजाना इसका सेवन करने से विटामिन डी की सही मात्रा में मिलता है। एक्सपट्र्स के अनुसार, रोजाना 1 गिलास ताजे संतरे का जूस पीने से बच्चे में विटामिम डी की कमी पूरी करने में मदद मिलती है। इसके अलावा संतरे अन्य पोषक तत्व व एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। ऐसे में इसके सेवन से बच्चे की मांसपेशियों व हड्डियों में मजबूती आएगी। शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होने के साथ स्किन से जुड़ी परेशानियों से भी राहत रहेगी।मशरूममशरूम खाने में टेस्टी होने के साथ विटामिन डी से भरपूर होती है। इसके सेवन से मांसपेशियों व हड्डियों में मजबूती आने में मदद मिलती है। खासतौर पर बच्चे की ग्रोथ के लिए मशरूम काफी फायदेमंद मानी जाती है। ऐसे में इसे बच्चे की डेली डाइट में जरूर शामिल करें। आप इससे बच्चे को अलग-अलग डिशेज बनाकर खिला सकते हैं।अंडाअगर आप नॉन वेजीटेरियन है तो बच्चे की डाइट में अंडे शामिल करें। इसका सफेद भाग विटामिन डी से भरपूर होता है। ऐसे में इसके सेवन से बच्चे को इसकी कमी पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही उसकी सेहत में सुधार आएगा।
- डायबिटीज के मरीजों को मीठी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। नारियल पानी को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन की स्थिति रहती है कि शुगर के मरीज इसका सेवन करें या नहीं। आज हम इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि डायबिटीज के मरीज को नारियल पानी पीना चाहिए या नहीं...कच्चे नारियल से निकलने वाला पानी एक नैचरल ड्रिंक है जिसमें जीरो कैलोरीज होती हैं। साथ ही इसमें इलेक्ट्रोलाइट, पोटैशियम, आयरन, मैंग्नीज, विटामिन सी और फोलेट जैसे कई और पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नारियल पानी का स्वाद भले ही मीठा होता है लेकिन इसमें नैचरल शुगर होता है और आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल नहीं होता। इसलिए यह शरीर के शुगर लेवल को प्रभावित नहीं करता।ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है नारियल पानीडायबिटीज की बीमारी में नारियल पानी का क्या असर होता है, इस बारे में इंसानों पर तो कोई खास रिसर्च नहीं हुई है, लेकिन जानवरों पर की गई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि नारियल पानी का सेवन करने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। नारियल पानी में पाया जाने वाला पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन सी आदि इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है.सीमित मात्रा में ही पिएंहालांकि जर्नल ऑफ मेडिसिनल फूड में प्रकाशित एक स्टडी में यह भी बताया गया कि नारियल पानी भले ही डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करे, लेकिन ये याद रखना जरूरी है कि यह प्राकृतिक रूप से मीठा होता है और इसमें फ्रक्टोज भी होता है इसलिए बहुत अधिक मात्रा में नारियल पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डायबिटीज के मरीजों को रोजाना 1 कप (240 एमएल) से ज्यादा नारियल पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।नारियल पानी के हैं कई फायदे-नारियल पानी शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और माना जाता है कि इसके सेवन से किडनी स्टोन की बीमारी से बचा जा सकता है। नारियल पानी शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखने का एक अच्छा सोर्स है।-कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड्स को कम करके हृदय रोग के खतरे से भी बचाता है नारियल पानी।-चूंकि नारियल पानी में पर्याप्त मात्रा में पोटैशियम होता है इसलिए यह ब्लड प्रेशर कम करने में भी मदद करता है।-एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर नारियल पानी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाकर बीमारियों से लडऩे में भी मदद करता है।
- पीठ और कमर दर्द की समस्या आजकल आम हो चुकी है। इसका सबसे बड़ा कारण है रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दिक्कतें। आप किस तरह से बैठते हैं, चलते हैं या सोते हैं- इन तीनों का रीढ़ की हड्डी पर अच्छा और बुरा दोनों तरह का असर देखने को मिलता है., लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ गलत आदतों की वजह से हगी लोगों को आए दिन कमर और पीठ में दर्द की शिकायत रहती है। जानिए किन आदतों के कारण यह समस्या होती है-1. डेस्क जॉब या बहुत देर तक एक ही जगह पर बैठे रहनाअगर आप भी डेस्क जॉब करते हंै और घंटों तक अपनी सीट से उठ भी नहीं पाते तो निश्चित तौर पर आपकी इस आदत का रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ेगा। लंबे समय तक एक ही जगह पर एक ही पोजिशन में बैठे रहने से पीठ और कमर की मांसपेशियों, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है जिससे कुछ समय बाद वहां पर दर्द होने लगता है। इसके लिए आप कितनी ही आरामदेह कुर्सी इस्तेमाल करें, लेकिन अगर आप लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहेंगे तो आपका दर्द ठीक नहीं होगा। इसलिए हर 30 मिनट बाद अपनी जगह से उठें, 2-3 मिनट के लिए स्ट्रेचिंग करें और फिर वापस बैठ जाएं।2. गलत पॉस्चर आपकी रीढ़ का है दुश्मनकई लोगों को आपने देखा होगा कि जब वे कम्प्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते हैं तो उनकी पीठ और कंधा झुक जाता है। बहुत से लोग स्मार्टफोन यूज करने के दौरान भी लगातार अपनी गर्दन को झुकाकर रखते हैं। अगर लंबे समय तक इसी गलत पॉस्चर में बैठकर काम करें तो इसका रीढ़ पर बुरा असर पड़ता है और रीढ़ धीरे-धीरे सिकुडऩा शुरू हो जाती है जिससे न सिर्फ पीठ और कमर में दर्द होता है बल्कि शरीर की बनावट भी खराब हो जाती है. इसलिए हमेशा सीधे खड़े हों, पीठ और कमर को सीधा रखते हुए बैठें और योग करें। योग से पॉस्चर सही करने में मदद मिलती है।3. धूम्रपान करने से भी रीढ़ को होता है नुकसानअगर आप स्मोकिंग करते हैं तो आपको पीठ और कमर में दर्द होने का खतरा 3 गुना अधिक होता है । इसका कारण ये है कि ज्यादातर लोग इस बात को समझ ही नहीं पाते कि किस तरह स्मोकिंग, सिर्फ लंग्स को ही नहीं बल्कि हड्डियों को भी प्रभावित करता है और रीढ़ की हड्डी में मौजूद डिस्क, समय से पहले ही कमजोर होने लगता है। साथ ही स्मोकिंग की वजह से रीढ़ में खून का फ्लो भी कम हो जाता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।4. भारी बैगपैक का इस्तेमाल करनाजब बात बैक पेन की आती है तो इसके लिए भारी बैगपैक को भी जिम्मेदार माना जाता है। कंधे पर बैग टांगने की वजह से पीठ और कमर पर जोर पड़ता है और मांसपेशियां जो रीढ की हड्डी को सपोर्ट करती हैं, वे थक जाती हैं। वैसे बच्चे जो अपने बैगपैक में बहुत सारी किताबें भरकर उन्हें भारी कर लेते हैं उन्हें यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है।5.हाई हील्स से बचेंबहुत सी महिलाओं को हाई हील्स पहनना बहुत पसंद होता है , लेकिन जाने अनजाने उनकी यही आदत उन्हें कमर दर्द भी दे देती है। कई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि हाई हील्स स्पाइन यानी रीढ़ की हड्डी की नैचरल अलाइनमेंट (संरेखन) को बदल देती है जिससे भविष्य में पीठ और कमर दर्द होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा रोजाना नियमित रूप से हील्स पहनने की वजह से रीढ़ के साथ ही वर्टेब्रा यानी कशेरुकी डिस्क को भी नुकसान पहुंचता है।
- आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों की लाइफस्टाइल तेजी से बदलती जा रही है. जिससे वह अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाता है। यही वजह है कि लोग तेजी से कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जिसमें डायबिटीज, पेटदर्द और शरीर में कमजोरी होना आम बात हो गई है। आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल घर-घर में होता है. जी हां हम बात कर रहें हल्दी की जो कई बीमारियों की दवा भी है। आज हम आपको हल्दी के ऐसे ही कुछ फायदे बताने जा रहे हैं।डायबिटीज की समस्या से दिलाए निजातडायबिटीज एक ऐसी बीमारी बनती जा रही है, जिससे भारत में करोड़ों लोग परेशान हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हल्दी का सेवन करने से डायबिटीज की बीमारी में फायदा मिलता हैै। इस बात की जानकारी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के अध्ययन में सामने आई हैै। जिसमें बताया गया है कि हल्दी का सेवन करने से डायबिटीज को दूर करने में मदद मिलती हैै। इसलिए डॉक्टर भी डायबिटीज के मरीजों को हल्दी का सेवन करने की सलाह देते हैंै।पेटदर्द में कारगर इलाजपेटदर्द एक ऐसी परेशानी बन गई है जिससे लगभग हर इंसान जूझ रहा है. लेकिन पेट दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए हल्दी एक बेहद आसान उपाय हैै। इसके लिए गुड़ और हल्दी को पानी में उबालकर पी जाएं... पेट दर्द से आराम मिलेगा।हार्ट अटैक के खतरें को रखती है दूरहल्दी का नियमित इस्तेमाल करने हार्ट अटैक से भी बचाव रहता है. इस बात की जानकारी वैज्ञानिक अध्ययन में ही सामने आई है। इसलिए रात में सोने से पहले दूध के साथ हल्दी मिलाकर लें।कैंसर जैसी बीमारी में भी सहायकहल्दी में कैंसर लडऩे के गुण भी पाए जाते हैं. क्योंकि हल्दी में एंटी कैंसर एक्टिविटी पाई जाती है जो कैंसर से बचाए रखने में मदद करती है। खास तौर पर हल्दी पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के सेल्स को बढऩे से रोकती है।चोट में सहायकचोट लगने पर हल्दी का प्रयोग सदियों से किया जा रहा है। जिस जगह पर चोट लगती है उस जगर पर हल्दी का लेप लगाने से जल्दी आराम मिलता है। यही नहीं सूजन को कम करने में भी हल्दी अहम भूमिका निभाती है।स्किन की समस्याओं को भी करती है दूरजिस जगह पर मुंहासे और दाग-धब्बें होते हैं उस जगह पर हल्दी का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। हल्दी को पानी में उबालकर इस पानी से कुल्ला करने पर मुंह के छालों में आराम मिलता है।
- वजन घटाने की शुरुआत सुबह उठते ही शुरू हो जाती है। आपके नाश्ते पर बहुत हद तक निर्भर करता है कि वजन घटाने में आप कितनी जल्दी कामयाब हो सकेंगे। यदि सुबह उठते ही आपने बहुत ज्यादा भारी नाश्ते का सेवन कर लिया तो आपका वजन घटने की बजाय बढ़ने लगेगा। वजन घटाने के लिए बहुत जरूरी है कि आप ऐसे नाश्ते का सेवन करें जिसमें बहुत अधिक कैलोरी न हो और साथ ही आपके शरीर को सारे आवश्यक पोषण तत्व भी मिलते रहे ताकि शरीर कमजोर न हो। डाइटीशियन की सलाह से जानिए कि वजन घटाने में कौनसे आहार का नाश्ते के रूप में सेवन करना चाहिए।अंकुरित अनाजअंकुरित अनाज को पोषक तत्वों का खजाना भी कहा जाता है। इसमें बहुत कम कैलोरी होती है, जिससे कि वजन घटाने में इससे सहायता मिलती है। इसके सेवन से शरीर कमजोर नहीं होता क्योंकि इसमें प्रोटीन पाए जाते हैं। आप अंकुरित अनाज के रूप में आराम से काले चने, मूंंग, मोठ, सोयाबीन आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह अपने आप में श्रेष्ठ नाश्ता है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाता है।पोहानाश्ते में वैसे तो अधिकांश लोग पोहा खाना पसंद करते हैं और पोहा खाना सेहत के लिए भी अच्छा होता है। पोहे में कैलोरी बहुत अधिक नहीं होती है, साथ ही इसमें आयरन, पोटेशियम जैसे तत्व भी पाए जाते हैं। पोहे के सेवन से पेट भी जल्दी भर जाता है और लंबे समय तक भरा रहता है इसलिए इसे खाने से वजन नहीं बढ़ता है लेकिन पोहा खाते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पोहे पर सेंव न डालें या बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन न करें नहीं तो कैलोरी के साथ ही आपका वजन भी घटने की बजाय बढ़ने लगेगा।दलियादलिया एक ऐसा नाश्ता है, जिसमें अन्य नाश्ते के मुकाबले बहुत ही कम कैलोरी पाई जाती है। इसके सेवन से शरीर एकदम स्वस्थ रहता है और वजन भी नियंत्रण में ही रहता है। 100 ग्राम दलिये में लगभग 20 ग्राम फाइबर पाया जाता है, जो कि नाश्ते की पूर्ति अच्छे से तो करता ही है, साथ ही वजन भी कम करने में सहायता करता है। यदि आपको दलिया खाना पसंद नहीं है तो आप इसे सब्जियां और जीरा डालकर पका सकते हैं, यह स्वादिष्ठ लगने लगता हैइडलीउड़द की दाल, चावल और रवे से घर पर बनी इडली में कई सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। इडली को तेल में फ्राय नहीं करना होता है, साथ ही इसे पचाना बहुत आसान होताा है। इडली में प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं जो कि पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखते हैं, जिससे कि वजन घटाने में काफी हद तक सहायता मिलती है। ध्यान रखें कि आप वजन घटाने जा रहे हैं तो इडली के लिए घर पर बने बैटर का ही प्रयोग करें।
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पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए अपनी आंतों और पेट को साफ रखना बेहद जरूरी है। इससे आपको कब्ज, सुस्ती, कील-मुंहासों और पेट की तमाम बीमारियों से राहत मिलेगी। यहां जानें कोलोन की सफाई का ये सरल तरीका
हम जो खाना खाते हैं वह जब मलाशय से नहीं निकल पाता, तो कोलोन में ही जमा हो जाता है। यदि आपका पेट ठीक प्रकार से साफ नहीं होता तो, आपको कोलोन इंफेक्शन होने का भी खतरा हो सकता है। यह वेस्ट मटीरियल यदि लंबे समय तक पेट में पड़ा रहे तो टॉक्सिक हो सकता है और आपकी हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इन टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालना बहुत जरूरी है।यदि आप इन्हें बाहर निकालेंगे तो आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ेगा और आप अंदर से स्वस्थ और सुंदर बनेंगे। कई लोगों को पेट साफ न होने की वजह से मुंहासे आदि हो जाते हैं, जो कि इससे बिल्कुल ठीक हो सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे आसान से घरेलू उपाय बताएंगे, जिससे आप अपने सिस्टम को साफ कर सकते हैं।कोलोन की सफाई रखने से वजन कम करने में मदद मिलती है। आपके समग्र मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में सुधार। पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।oo कोलोन की सफाई के लिए घरेलू उपचारगार्सीनिया कंबोगियागार्सीनिया कंबोगिया आपकी भूख को दबाता है और आपके चयापचय को बढ़ाता है। यह न केवल आपके शरीर से सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, बल्कि शरीर के वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। आप गार्सिनिया कंबोगिया को अपने दैनिक आहार में भी शामिल कर सकते हैं। इसे 1 से 2 बार रोजाना लेने से पेट साफ हो जाएगा।लेमन डिटॉक्स ड्रिंकनींबू विटामिन सी से भरपूर होता है, जो चयापचय को बढ़ाता है और शरीर से गंदगी को बाहर निकालने में मदद करता है। नींबू एक प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट है, जो आपके शरीर को फ्री रैडिकल्स से बचाता है। एक अध्ययन के अनुसार, लेमन डिटॉक्स डाइट भी शरीर में वसा को कम कर सकता है। इसे लेने के लिए 1 गिलास गुनगुने पानी में, 1/2 नींबू और 1-2 चम्मच शहद मिलाएं। इसे रोज सुबह खाली पेट पिएं। चूंकि नींबू अम्लीय होता है और दांतों पर असर डाल सकता है, इसलिए इसे रोकने के लिए नींबू के सेवन के बाद अपने मुंह को सादे पानी से कुल्ला करना न भूलें।सेब का जूससेब में पेक्टिन (फाइबर) अघुलनशील और घुलनशील गुण होते हैं। यह आपके मल को भारी बनाने में मदद करता है और इसे पास करना आसान बनाता है। यह आपके वजन घटाने के प्रयासों में सहायता कर सकता है। इसके अतिरिक्त, सेब पेट के कैंसर की कोशिकाओं के विकास को भी सकता है। इसका उयोग करने के लिए 1 सेब लें और 1 कप पानी के साथ ब्लेंड कर लें। फिर इसको छान लें या फिर ऐसे ही पी जाएं। ऐसा आपको रोजाना करना होगा।कच्ची सब्जी का जूसकच्ची सब्जियों से निकाला गया जूस पीना आपके कोलन को साफ करने और आपके शरीर को डिटॉक्स करने में काफी मददगार है। इसकी के साथ यह वेट को भी बैलेंस करने में मदद करता है। दिन में कई बार आपको अपनी डाइट में पालक, चुकंदर, गाजर, टमाटर और ककड़ी का रस पीना चाहिए। डिब्बाबंद या तैयार किए गए रस से बचें, क्योंकि उनमें पोषक तत्वों और खनिजों की कमी होती है।दहीदही एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है, जो आंत के हेल्दी बैक्टीरिया का ख्याल रखता है। इससे पाचन की समस्या दुरुस्त होती है। दही का दैनिक सेवन आपके शरीर में प्रोबायोटिक्स के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जो बदले में, आंत को शुद्ध करने में मदद कर सकता है। प्रतिदिन 1 से 2 बार बिना चीनी या फल के सादा दही लें।सेब का सिरकाएप्पल साइडर विनेगर में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो आंत और मलाशय के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। एप्पल साइडर विनेगर में एसिटोबैक्टर नामक बैक्टीरिया की उपस्थिति होती है, जो पाचन में सहायता करता है और आपके पेट के लिए उचित कार्य करता है। यह पेट में एसिड नहीं बनने देता और वजन कम करने में मदद करता है।इन जरूरी बातों का भी रखें ख्यालजितना हो तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। शराब का सेवन कम करें। तंबाकू के सेवन से बचें। 50 वर्ष की आयु के बाद, नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं खासतौर पर कोलोन कैंसर के लिए। फाइबर, अनाज, साबुत अनाज, चोकर, दलिया, फल, और सब्जियों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। यह आपके मल त्याग को बढ़ाने और पेट के स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद कर सकता है।नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। - कहा जाता है कि मर्ज कोई भी फल कभी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं लेकिन यदि आपको डायबिटीज हुआ है, तब बहुत जरूरी है कि अन्य चीजों के साथ ही आप इस बात का भी ख्याल रखें कि किन फलों का सेवन आपको लगभग अब से त्याग ही देना है। कई सारे फलों में चीनी और कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो कि अचानक से आपके शरीर का ब्लड शुगर लेवल बढ़ाकर आपके सेहत को प्रभावित कर सकती है इसलिए अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी है कि आप इन फलों का सेवन न ही करें। डाइटीशियन द्वारा सुझाए गए फलों का सेवन मधुमेह के मरीज भूलकर भी न करें।अंगूरडायबिटीज के मरीजों का अंगूर का लालच बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि अंगूर दिखने में भले ही छोटे- छोटे होते हैं लेकिन यदि मधुमेह के मरीज इनका सेवन कर लें तो समस्या उनके लिए बड़ी-बड़ी खड़ी हो सकती है क्योंकि अंगूर में शुगर लेवल हाई होता है, जो कि शरीर में ग्लुकोज की मात्रा को बहुत अधिक बढ़ाता है इसलिए चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इसका सेवन नहीं ही करना चाहिए।चीकूचीकू का सेवन भी डायबिटीज के मरीज के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है क्योंकि चीकू के सेवन से ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ने लगता है, जो कि मरीज के लिए समस्या खड़ी कर सकता है। चीकू में कैलोरी भी बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है इसलिए कम या ज्यादा मात्रा में या जूस के रूप में, किसी भी तरह से डायबिटीज के मरीज को इस फल का सेवन नहीं ही करना चाहिए।केलास्वास्थ्य और ऊर्जा के लिए केला एक बहुत अच्छा फल है लेकिन डायबिटीज के मरीज यदि केले का सेवन करते हैं तो उनके लिए यह हानिकारक साबित हो सकता है। एक सामान्य केले में लगभग 14 ग्राम शुगर और 105 कैलोरी होती है। इतनी अधिक मात्रा में कैलोरी और शुगर का सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है इसलिए केले का छोटा सा हिस्सा या उसका शेक आदि भी इन मरीजों को नहीं लेना चाहिए।
- शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाले बदलाव पर तो ज्यादातर लोग ध्यान देते है, बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जिनका ध्यान पैरों की तरफ जाता होगा, लेकिन क्या आप जानते है? हमारे पैर सेहत के बारे में काफी कुछ बताते है। दरअसल पैर हमारी बॉडी का सिग्नल पॉइंट होते है, जो उन बीमारियों के संकेत देते हैं जिन पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके नतीजे गंभीर हो सकते ह। इसलिए पैरों में होने वाले बदलाव पर ध्यान दिया जाना चाहिए-- अगर आपकी एडिय़ों में हमेशा दर्द बना रहता है तो ये शरीर में यूरिक एसिड बढऩे के संकेत देता है। इसलिए यूरिक एसिड की जांच जरूर करवाना चाहिए।- अगर आपके पैर के अंगूठों और पंजों में सूजन हो जाती है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये संकेत किडनी की समस्या या एनीमिया होने के संकेत होते हैं।- आपके पैरों के नाखूनों पर यदि लाल रंग दिखाई दें तो, ये संकेत हार्ट इंफेक्शन की ओर इशारा करते है। ऐसा इसलिए होता है जब हमारी रक्त वाहनियां टूट जाती है।- बार-बार मॉश्चराइजऱ या कोल्ड क्रीम लगाने के बाद भी पैरों की स्किन सूखी या फटी रहती है। तो इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हो सकता हो थायरॉइड की जांच की जरूरत हो।- पैर में चोट लगने के बाद अगर लंबे समय तक वह ठीक नहीं हो रही हो, तो इसे बेहद गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि पैर की चोट इस बात का संकेत देती कि आपको शायद डायबिटीज हो सकती है। इसलिए शुगर टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए।- पैर के पंजों या घुटनों में हमेशा दर्द बना रहता है, और दवा खाने के बाद इसमें कुछ हद तक आराम मिलता है, तो यह गठिया की बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
- कुछ लोग सुबह सोकर उठते ही पहले पानी पीते हैं। वैसे पानी पीना सेहत के लिए अच्छा है, और अगर आप सुबह बिना ब्रश किए हुए भी पानी पीते हैं तो भी उससे सेहत को कोई नुकसान नहीं है। इसके अलावा नींबू , शहद मिश्रित गुनगुना पानी या फिर हल्दी-शहद मिश्रित गुनगुना पानी, गर्म पानी पीना सेहत के लिए लाभकारी है। आज हम जानेंगे कि सुबह-सुबह खाली पेट पानी पीने के क्या फायदे हैं।अगर दिन में सात से आठ गिलास पानी पिया जाता है तब वह सेहत के लिए अच्छा होता है। अगर आप उससे कम पानी पी रहे हैं तो दिन में पानी की मात्रा को बढ़ाएं। सुबह खाली पेट पानी पीने के फायदे हैं-1. पेट को ठंडकपानी पेट में सूदिंग एफेक्ट करता है। पानी पीने से पेट तो साफ होता ही है साथ ही पेट में ठंडक भी देता है। इसके अलावा शरीर के ऑर्गन्स सुचारू रूप से काम करने लगते हैं। टॉक्सीकेंट बाहर निकलते हैं। आंतों में जमा पानी भी निकलता है। जब पेट साफ होगा तो भूख भी लगेगी। शरीर से हानिकारक पदार्थ जब बाहर निकल जाते हैं तो शरीर साफ हो जाता है।2. कब्ज की शिकायत को करे दूरजिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है वह भी ठीक हो जाता है। यूरीन भी खुलकर आती है। पथरी के रोगियों को भी सुबह उठकर पानी ज्यादा पीना चाहिए।3. तनाव से मिलेगी मुक्तिआजकल की भागती दौड़ती जिंदगी में लोगों को न रात में नींद आती है और न दिन में। ऐसे में नींद पूरी न होने पर तनाव होना लाजमी है। बहुत बार लोगों ने महसूस किया होगा कि सुबह सोकर उठने पर सिर में दर्द और तनाव रहता है। ऐसे लोगों को सुबह उठकर पानी जरूर पीना चाहिए। ऐसा करने से मन को राहत मिलती है। और दिन अच्छा बीतता है। सुबह-सुबह जब पानी पीने से आपका तनाव दूर होगा तो आप दिन भर फ्रेश महसूस करेंगे।4. बेली फैट कम करने में मददगारफिजिकल एक्सरसाइज कम होने और नौकरी पेशा लोगों को व्यायाम करने के लिए समय न मिल पाने के कारण बेली फैट बाहर निकलने लग जाता है। जब यह थोड़ा ज्यादा बाहर निकल जाता है तो शरीर बेडोल हो जाता है। ऐसे लोगों को सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए। खाली पेट पानी पीने से मेटाबोलिक रेट बढ़ जाता है, जिससे खाना अच्छे से पचता है। इससे आपका वजन भी कम होता है।5. इम्यूनिटी बढ़ाने में मिलेगी मददपानी शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालता है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।6. त्वचा को निखारेजो लोग रोजाना सुबह खाली पेट पानी पीते हैं उनकी त्वचा चमकती रहती है। रोजाना पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है, और चेहरा चमकने लगता है। इसके नई कोशिकाएं भी बनती हैं, जो चेहरे की चमक को बढ़ाती हैं। पानी पीने से शरीर से तेजी से हानिकारक पदार्थ बाहर निकलते हैं। तो वहीं डॉक्टर ने बताया कि कम पानी पीने से चेहरे पर झुर्रियां और पोर्स बढऩे लगते हैं। इसलिए हेल्दी स्किन के लिए जरूरी है कि सुबह खाली पेट पानी पिया जाए।7. बालों में बढ़ाए चमककम पानी पीने से पानी की चमक चली जाती है। तो वहीं, ऐसा करने से बालों की अन्य समस्या भी बढ़ती हैं। जो लोग सुबह एक गिलास या दो गिलास पानी पीते हैं, उनके बालों की चमक बढ़ती है। बालों की सेहत ठीक रहती है। बाल तेजी से लंबे होते हैं।8. शरीर को रीहाइड्रेट करनारात की आठ घंटे की नींद के बाद शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जिससे वजह से शरीर हाइड्रेट हो जाता है। उसे पूरा करने के लिए सुबह खाली पेट पानी पीने से शरीर रीहाइड्रेट होता है। रोजाना पानी पीना शरीर में तरल पदार्थों की पूर्ति करते रहता है। इस तरह से शरीर के ऑर्गन ठीक से काम करते रहते हैं। सुबह पानी पीने से लिम्फैटिक सिस्टम भी ठीक रहता है।9. मस्तिष्क के लिए फायदेमंदहमारे दिमाग में लगभग 75 फीसदी पानी है। अगर दिमाग को जितना जरूरी है उतना पानी न दें, तो दिमाग ठीक से काम नहीं करेगा। तो इससे आप समझ सकते हैं कि पानी हमारे मस्तिष्क के लिए कितना जरूरी है। अगर आप सुबह की शुरूआत एक गिलास पानी से करते हैं तो आपका दिमाग तेजी से काम करता है।10. शरीर को पानी देते रहेंपानी पीना सेहत के लिए जरूरी है। अगर आप पानी नहीं पीते हैं तो कई बीमारियों को न्योता देते हैं। शरीर में पानी की मात्रा ठीक रहने पर पेट तो ठीक रहता ही है साथ ही पेट से संबंधित बीमारियां भी दूर रहती हैं।
- आजकल अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण पेट में गैस की समस्या का होना आम बात हो गई है। विशेषज्ञों की माने तो हर रोज प्रत्येक व्यक्ति 0.5 से लेकर लगभग 1.6 लीटर तक गैस का उत्पादन करता है। एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति दिन में कम से कम 10-20 बार गैस छोड़ता है। असल में गैस स्वस्थ पाचन का एक प्रोडक्ट है, जो कि बैक्टीरिया के बड़ी आंतों में कार्बोहाइड्रेट को तोडऩे के कारण बनता है। लेकिन जब अधिक गैस्ट्रिक समस्या होती है तब इस की वजह से ही डाइजेशन सिस्टम खराब हो जाता है। हालांकि आंतों की गैस आमतौर पर ज्यादा दर्दनाक नहीं होती। लेकिन जब यह रुक जाती है तब तनाव का कारण बनती है। गैस की समस्या कई वजहों से हो सकती है। अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो कभी-कभी यह जानलेवा भी हो सकती है। आज हम जानेंगे गैस की समस्या से राहत पाने के आसान उपाय....रुकी गैस की वजह से कौन से हो सकते हैं रोगगैस की समस्या कभी-कभी बड़ा रूप भी ले सकती है। जिसकी वजह से परेशानी तक झेलनी पड़ सकती है। इसकी वजह से फूड इनटोलरेंस की निम्न समस्या हो सकती हैं।सीलिएक रोगजब भी व्यक्ति ग्लूटेन का सेवन करता है यह ऑटोइम्यून विकार छोटी आंत में सूजन का कारण बनता है। तब छोटी आंत पूरी तरह से पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाती।लैक्टोज रोगइसमें डेयरी उत्पादों से बनी चीजें हमें नुकसान करती हैं। जिन्हें बचाने में कठिनाई होती है और यह गैस बन जाती है।फ्रक्टोज इनटोलरेंसइसमें ज्यादातर फल सब्जियों में मौजूद फ्रुक्टोज को पचाने में परेशानी होती है। जिस वजह से पेट में एसिडिटी यानी कि गैस की समस्या मांसपेशियों तक को प्रभावित कर देती है।इसके अलावा छोटी आंत में बैक्टीरियल ग्रोथ, जीईआरडी, बॉवेल सिंड्रोम आदि गंभीर परेशानी भी हो सकती हैं। जिनके लक्षण हैं पेट में दर्द और ऐंठन, मल त्याग के बाद काफी दर्द, सूजन, अत्यधिक पेट फूलना, कब्ज, दस्त आदि।क्या है उपचारज्यादातर लोगों को खाना खाने के बाद गैस की समस्या हो जाती है। इसे रोकने के लिए आपको क्या उपाय करने हैं। यह भी जानना जरूरी है।-अपनी लाइफस्टाइल में करें बदलाव। हर रोज प्राणायाम और योगासन करें। खाने को चबा चबा कर खाएं। प्रिजर्वेटिव जूस ना पिएं। ज्यादा से ज्यादा पानी पिए। पुराना खाना, दूषित पानी और जंक फूड से जितना हो सके दूरी बनाकर रखें। पेट में गैस की समस्या होने पर अजवाइन का सेवन करें। अदरक के सेवन से भी गैस की समस्या में राहत मिलती है। टमाटर का उपयोग करके गैस की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। सत्तू के सेवन से पेट की गैस से निजात पाया जा सकता है। लौंग का सेवन भी फायदेमंद है। -एलोवेरा पेट की गैस को दूर करती है। नारियल पानी पेट को ठंडक देने के साथ गैस से छुटकारा देता है। सेब का सिरका गैस से आराम दिलाता है। एक हीटिंग पैड या गर्म वाटर बोतल से पेट की सिकाई करें। अल्कोहल और धूम्रपान से बनाएं दूरी। सेब का सिरका गैस से आराम दिलाता है।----
- आज के दौर में घंटों तक बैठकर काम करना जैसे एक चलन बन गया है. लेकिन इस तरह की लाइफस्टाइल के कई नुकसान भी उठाने पड़ रहे हैं. आज के वक्त में गैस और कब्ज की समस्या से लगभग हर इंसान परेशान है. कही थोड़ा सा कुछ खा लिया, या फिर ज्यादा देर तक बैठ गए तो गैस और कब्ज बननी शुरू हो जाती है. लेकिन हम आपको आज कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके इस्तेमाल से आपकी गैस और कब्ज की परेशानी दूर हो सकती है.सेबअगर आप अपनी गैस और कब्ज की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो सेब एक ऐसा फल है जिसके नियमित सेवन करने से आपकी यह परेशानी खत्म हो जाएगी. दरअसल, सेब में फाइबर की मात्रा भरपूर पाई जाती है. जिसके सेवन से एसिडिटी नहीं बनती है.केलाकेला एक ऐसा फल है जो लगभग सभी को पसंद होता है. लेकिन अगर आप गैस और कब्ज की समस्या से छुटकारा चाहते हैं तो केले का सेवन करना शुरू कर दे. क्योंकि केले में पोटैशियम और फाइबर पाया जाता है, जो शरीर में पीएच लेवल को कम रखता है. ऐसे में आपके शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, जिससे आपको गैस और कब्ज की परेशानी नहीं होगी. खास बात यह है कि केले का नियमित सेवन आपको फिट भी रखता है.पपीतापपीता में भी फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. ऐसे में पपीता खाने से भी गैस और कब्ज की समस्या नहीं होती है. खास बात यह है पपीता खाना शरीर के लिए फायदेमंद भी माना जाता है. ऐस में आप अगर हर दिन पीपाता खाना शुरू कर दें तो आपको भी गैस और कब्ज की समस्या निजात मिलेगी.तरबूजतरबूज जिसे कई जगहों पर खरबूजा भी कहा जाता है. यह ऐसा फल होता है, जिसमें पानी की पर्याप्त मात्रा रहती है. इसके अलावा खरबूजा फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. जिसका सेवन करने से पेट साफ रहता है. इसके अलावा आपके शरीर का पीएच लेवल भी बैलेंस रहता है. यही वजह है कि तरबूज का नियमित सेवन करने से गैस और कब्ज की समस्या नहीं होती.नारियल पानीनारियल पानी भी गैस और कब्ज को दूर करने के लिए एक असरदार साधन है. नारियल पानी में फाइबर कंटेट पर्याप्त मात्रा में रहता है, इसके अलावा ये रिफ्रेशिंग नैचुरल ड्रिंक टॉक्सिंस को शरीर से दूर करने में सहायक होता है. जिससे शरीर में गैस और कब्ज नहीं बनती है.ठंडा दूध और दहीफूड्स के अलावा आप अगर ठंडा दूध और दही के इस्तेमाल से भी गैस और कब्ज की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. क्योंकि ठंडा दूध पेट में मौजूद एसिड को एब्जॉर्व कर लेता है. जिससे जलन नहीं होती. अगर आपको गैस बनती है तो ठंडा दूध आपके लिए फायदेमंद साबित होगा. इसी तरह दही भी डायजेस्टिव सिस्टम को हेल्दी रखता है. जिससे गैस और कब्ज की परेशानी दूर रहती है. तो दोस्तों अगर आप भी गैस और कब्ज की समस्या से परेशान है इन चीजों के इस्तेमाल से आपको फायदा मिल सकता है.
- सर्दियों के मौसम में बाजार में गांठ गोभी या गट्टा गोभी काफी नजर आती है। इसे कोहलरबी भी कहा जाता है। ये गोभी के ही परिवार की सब्जी है। जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन से लेकर कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है। जबकि इसमें फैट ना के बराबर होता है। गांठ गोभी में विटामिन्स भी बड़ी मात्रा में होते हैं, जिससे शरीर की इम्युनिटी तेजी से बढ़ती है। इसके सेवन से शरीर को ग्लूकोज, आयरन, मैग्निशियम के साथ पोटेशियम और कैल्शियम मिलता है। गांठ गोभी के कई स्वास्थ्य लाभ हैं-1. डाईजेशन करे दुरुस्तकई सब्जियों की तरह ही गांठ गोभी भी डाईजेशन सिस्टम दुरुस्त रखती है। इसमें फाइबर का अच्छा स्रोत होता है। जो पेट सम्बंधित सभी परेशानियों से निजात दिलाता है। इसलिए आंतों की देखभाल, कब्ज की समस्या, दर्द और सूजन को कम करने के लिए गांठ गोभी सेवन करने की सलाह दी जाती है।2. वजन करे कमशोध के मुताबिक गांठ गोभी को वजन कम करने की सबसे असरदार सब्जियों में से एक माना गया है। इसमें कैलोरी बेहद कम होती है। साथ ही लाभकारी पोषक तत्वों से भरपूर भी होती है। वहीं इसमें उपस्थित फाइबर आपको मोटा नहीं होने देगा और आपका वजन नियंत्रित रखेगा। आप इसे नाश्ते, लंच या डिनर कभी भी खा सकते हैं।3. शरीर को रखे एक्टिवगांठ गोभी में पोटेशियम की मात्रा आपके शरीर को एक्टिव रखने के लिए काफी है। अगर किसी को चलते-फिरने, सांस लेने में तकलीफ होती है, तो उन्हें इस जरूरत को पूरा करने के लिए गांठ गोभी का सेवन करना चाहिए।4. हाई ब्लडप्रेशर करे कंट्रोलइसमें मौजूद पोटेशियम हमारे शरीर में जाकर एक वासोडिलेटर की तरह काम करता है, जो ब्लड सक्र्युलेशन और धमनियों को दुरुस्त रखने में मदद भी करता है। इसके अलावा स्ट्रोक या हार्ट अटैक की संभावना कम होगी। यही नहीं गांठ गोभी में मौजूद पोटेशियम, सोडियम के साथ कोशिकाओं के बीच उपस्थित फ्लूड को रेगुलेट करता है।5. खून की कमी करे पूरीगांठ गोभी में पोटेशियम की तरह ही आयरन अच्छी मात्रा में होता है। आयरन शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) को बढ़ाने के लिए जरूरी है, ताकि एनीमिया न हो। वरना इसकी कमी से कमजोरी, थकान, सिरदर्द, पेट की बीमारियां, कमजोर इम्यूनिटी हो सकती है। गांठ गोभी में पाया जाने वाला कैल्शियम शरीर के आयरन इनटेक में सुधार करता है। इसलिए गांठ गोभी इम्यून और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम दोनों के लिए बूस्टर का काम करती है।6. हड्डियों को मिले मजबूतीगांठ गोभी के सेवन से कमजोर हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं। इसमें उपस्थित कैल्शियम, मैंगनीज से आपकी हड्डियों का विकास भी होगा और वो मजबूत भी होंगी।7. आंखों का रखे ख्यालगांठ गोभी बीटा कैरोटिन का सबसे अच्छा स्रोत होता है। जो शरीर में एक एंटीऑक्सिडेंट यौगिक की तरह काम करता है। इससे आंखें तेज होती हैं, व मोतियाबिंद की समस्या कम या धीमी होती है। ये आँखों में होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को भी कम करती है।8. कैंसर का खतरा होगा कमगांठ गोभी खाने से आप कैंसर जैसी समस्याओं से खुद को दूर रख पायेंगे। इसमें आइसोथायोसाइनेट्स, सल्फाफेन और इंडोल-3-कार्बिनोल सहित बहुत से शक्तिशाली फाइटोकेमिकल्स होते हैं। जो कैंसर से लडऩे में मदद करते हैं, व किसी भी तरह के संक्रमण या बैक्टीरिया से बचाव करते हैं।गांठ गोभी को खाने के नुकसानयदि किसी को अत्याधिक एसिडिटी की समस्या है तो उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यदि गांठ गोभी का उत्पादन ग्रीन हाउस में किया जाता है तब भी इसका सेवन करना उचित नहीं, क्योंकि ऐसे में इसमें नाइट्रेट की काफी मात्रा होती है। जो कि शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को रोकती है व कैंसर का कारण बनती है। इसके सेवन से कभी-कभी फूड एलर्जी हो सकती है।
- सुबह पेट साफ न होना छोटी-सी बात लग सकती है लेकिन उन लोगों को इस समस्या के बारे में अच्छी तरह पता है, जो अक्सर इसका सामना करते हैं। आपको भी अगर सुबह पेट साफ न होने की समस्या है, तो सुबह की शुरुआत लौंग चबाने से कर दें, जिससे आपकी समस्या काफी हद तक ठीक हो जाएगी। लौंग विटामिन सी, फाइबर, मैंगनीज, एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन-के से भरपूर होती है।आइए, जानते हैं सुबह खाली पेट दो लौंग चबाने के फायदे-इम्युनिटी बढ़ती हैलौंग में विटामिन सी और कुछ एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। यह आपके शरीर को किसी भी संक्रमण या बीमारियों से लडऩे में मदद करता है।पाचन में सुधार करती हैसुबह लौंग का सेवन करने से आपको पाचन संबंधी किसी भी समस्या का इलाज करने में मदद मिलती है। लौंग पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाती है, जो कब्ज और अपच जैसे पाचन संबंधी विकारों को रोकती है। लौंग फाइबर से भरा होता है जो आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।लिवर फंक्शन को बढ़ावा देती हैआपका लिवर शरीर को डिटॉक्स करता है और आपके द्वारा सेवन की जाने वाली दवाओं को मेटाबोलाइज करता है। अपने लिवर के कामकाज को बेहतर करने के लिए आपके पास रोज लौंग होनी चाहिए। लौंग में यूजेनॉल होता है, जो लीवर फंक्शन को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है।दांत दर्द को ठीक करती हैदांत दर्द को रोकने के लिए लौंग का तेल आमतौर पर दांतों पर लगाया जाता है। लौंग का सेवन दांत दर्द को कम करने में भी मदद कर सकता है। लौंग में संवेदनाहारी गुण होते हैं, जो कुछ समय के लिए असुविधा को रोकते हैं। इसके अलावा, अगर आप अपने दांत का इलाज करवा चुके हैं तो लौंग का सेवन दर्द को शांत करने में मदद कर सकता है।सिरदर्द से राहत देती है लौंगलौंग में यूजेनॉल होता है जिसमें एनाल्जेसिक और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह इस मसाले को सिर दर्द के लिए एक अद्भुत उपाय बनाता है। आप इनका सेवन कर सकते हैं। एक गिलास दूध के साथ लौंग का पाउडर लें। लौंग का तेल लगाने से भी आपको आराम मिल सकता है।हड्डियों के लिए अच्छी है लौंगलौंग में फ्लेवोनॉयड्स, मैंगनीज और यूजेनॉल होते हैं जो हड्डी और संयुक्त स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। लौंग का सेवन हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में मदद करता है।लिवर होता है मजबूतआपका लिवर शरीर को डिटॉक्स करता है और आपके द्वारा सेवन की जाने वाली दवाओं को मेटाबोलाइज करता है।अपने लिवर के कामकाज को बेहतर करने के लिए आपके पास रोज लौंग होनी चाहिए।
- हायपरटेंशन जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, अलसी ब्लड प्रेशर को बढ़ने से रोकती है और दिल की बीमारियों का खतरा कम करती है। इसमें फायबर की मात्रा अधिक होने के कारण यह कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करती है और आंतों में सूजन होने का खतरा घटाती है। अलग-अलग रिसर्च में कई फायदे सामने आने पर इसे सुपरफूड नाम भी दिया गया है। एक्सपर्ट का कहना है, इसे अधिक मात्रा में लेने से बचें। रोजाना 25 ग्राम से अधिक अलसी खाने पर सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी की शिकायत हो सकती है। हेयर और स्किन चमकदार बनाती है, लेकिन 25 ग्राम से अधिक न लेंसेहत के लिए क्यों फायदेमंद हैं अलसी?जब हम फाइबरयुक्त भोजन करते हैं, तो यह लंबे समय तक हमें पेट के भरे होने का अहसास कराता है, जिससे हम बार-बार खाने से बचते हैं। अलसी भी फाइबर से भरपूर होती हैं। हम जब एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त आहार के बारे में सोचते हैं तो फल-सब्जियां दिमाग में आते हैं। लेकिन एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर 100 सबसे आम खाद्य पदार्थों की सूची में अलसी 9वें नंबर पर है। एंटीऑक्सीडेंट्स हमारी कोशिकाओं को स्वस्थ रखते हैं। इसीलिए विशेषज्ञ इसे फायदेमंद मानते हैं।ओमेगा-3 हार्ट के लिए फायदेमंदअलसी में गुड फैट ओमेगा-3 पाया जाता है। जो हार्ट, हाई बीपी और कैंसर के मरीजों के लिए फायदेमंद है। ओमेगा-3 ज्यादातर मांसाहारी चीजों में अधिक पाया जाता है, लेकिन अलसी में यह पर्याप्त मात्रा में होता है। 2.50 लाख लोगों पर हुई स्टडी में भी यह साबित हुआ है कि ओमेगा-3 हृदय रोगों का खतरा 14 फीसदी तक घटाता है।कोलोन और स्किन कैंसर का खतरा घटाती है अलसीकनाडा में 6 हजार महिलाओं पर हुई एक स्टडी के मुताबिक, अलसी कैंसर का खतरा भी घटाती है। इसमें प्लांट फूड के मुकाबले 600 गुना लिग्निन अधिक होता है। यही लिग्निन कोलोन और स्किन कैंसर की आशंका को कम करता है।वजन घटाने में मददगारअगर आप वजन घटाने की शुरुआत कर रहे हैं, तो रोजाना अपनी डाइट में अलसी के बीजों को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें पर्याप्त मात्रा में फायबर और प्रोटीन होता है, जिससे भूख कम लगेगी और आप ओवरइटिंग से बच सकेंगे। ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सिडेंट्स मेटाबॉलिज्म को बढ़ाते हैं। बढ़ा हुआ मेटाबॉलिज्म वजन कंट्रोल करने में मदद करता है।पाचन शक्ति बेहतर होती हैअलसी में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचनशक्ति को बढ़ाकर कब्ज की समस्या को दूर करता है। इसमें मौजूद ओमेगा 3 और 6 फैटी एसिड तनाव के स्तर को कम करने में भी मदद करता है।
- बेर का फल जिसे चीनी सेब भी कहा जाता है एक मौसमी फल है। यह फल अनेक प्रकार के औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। अगर इसका सेवन सही तरीके से नहीं किया गया तो इसके नुकसान भी देखने को मिलते हैं।बेर में प्रमुख रूप से विटामिन, राइबोफ्लेविन और थायमिन जैसे तत्व पाए जाते हैं और इसके साथ बेर प्रोटीन, पोटेशियम और कैल्शियम समेत कई पोषक तत्वों का भण्डार माना जाता है। यह विटामिन सी का अच्छा स्रोत माना जाता है, आयुर्वेद के मुताबिक बेर के बीजों में कैंसर जैसी बीमारियों से लडऩे की क्षमता भी होती है। बेर के फल में पाए जाने वाले कुछ प्रमुख पोषक तत्व इस प्रकार हैं-विटामिन सी, ए, और बी कॉम्प्लेक्स-कार्बोहाइड्रेट-प्रोटीन-वसा-आयरन और कॉपर-कैल्शियम और फास्फोरस-सोडियम-जिंक-साइट्रिक एसिडबेर खाने के फायदेवैसे तो बेर का फल औषधीय गुणों से युक्त होने के कारण हर प्रकार से लाभदायक होता है लेकिन आयुर्वेद के हिसाब से भी बेर खाने के अनेकों फायदे हैं। बेर के फल, पत्तियों और बीज का उपयोग अनेक प्रकार से आयुर्वेद में किया जाता है। बेर का फल अपच और पित्तनाशक माना जाता है। इसके बीज गर्भावस्था में मतली, उल्टी और पेट दर्द को रोकने के लिए भी प्रयोग में लाये जाते हैं। बेर की पत्तियां और जड़ें आयुर्वेदिक काढ़ा बनाने में भी उपयोग में लायी जाती हैं। बेर के फल में विटामिन सी, कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस, पोटेशियम और जस्ता प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसकी वजह से यह शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है। पारंपरिक चिकित्सा और अनिद्रा जैसी बीमारियों के इलाज में भी बेर का प्रयोग किया जाता है। बेर खाने के कुछ प्रमुख फायदे इस प्रकार से हैं -1. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना2. पाचन तंत्र और कब्ज जैसी बीमारियों में फायदेमंद3. मस्तिष्क विकास में सहयोगी4. तनाव, अनिद्रा जैसी बीमारियों में उपयोगी5. शरीर की बैक्टीरिया से रक्षा6. बेर में मौजूद कैल्शियम दांतों और हड्डियों को मजबूत करता है7. लिवर से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी8. एंटी एजिंग तत्व चेहरे को रखते हैं साफ़9. बालों के विकास में लाभदायकबेर खाने के नुकसानतमाम पौष्टिक तत्वों और औषधीय गुणों से युक्त बेर के खाने से ज्यादातर लोगों को कोई नुकसान नही होता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में बेर का सेवन वर्जित हैं। कुछ आयुर्वेदिक शोध में कहा गया है कि अधिक मात्रा में बेर का सेवन करने से दस्त, सुस्ती, भूख का कम लगना या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका सेवन करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे --मधुमेह की बीमारी से पीडि़त लोगों को-लो फाइबर डाइट का पालन करने वाले लोगों को-लेटेक्स से एलर्जी होने पर भी बेर का सेवन नही करना चाहिए-पेट की गैस और सूजन से पीडि़त लोगों कोअगर आप कोई तनाव या अनिद्रा से जुड़ी दवाई का सेवन कर रहे हैं तो बेर के सेवन से परहेज करना चाहिए। तो, बेर के इन सभी फायदे और नुकसान को जानें और इन्हें अपने डाइट में शामिल करें।
- भुई आंवला एक जड़ी-बूटी है। आयुर्वेद के अनुसार, भुई आंवला के फायदे से अनेक बीमारियों को ठीक किया जाता है। भुई आंवला स्वाद में कसैला और मीठा होता है। अधिक प्यास लगने की परेशानी, खांसी, खुजली, कफ और बुखार आदि में भूमि आंवला के फायदे तो मिलते ही हैं, साथ ही लीवर के किसी भी प्रकार के रोग के लिए भुई आंवला को दिव्य औषधि भी माना जाता है। अगर आप इसे लेप घाव पर करेंगे तो इससे घाव भी ठीक हो जाता है। यह कुष्ठ रोग में भी उपयोगी होता है। आइए जानते हैं कि भूमि आंवला के औषधीय गुण से किस-किस रोग में लाभ मिल सकता है। इसके फल धात्रीफल की तरह गोल, लेकिन आकार में छोटे होते हैं। इसी कारण इसे भूधात्री और भूम्यामल भी बोला जाता है। भू-आंवला की तीन प्रजातियां होती है।-भुई आंवला पंचांग को चावल के पानी के साथ पीसकर घाव पर लगाने से घाव की सूजन ठीक हो जाती है। भुई आंवला के पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से भी घाव ठीक होता है। भुई-आंवला के कोमल पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।-सांसों से जुड़ी बीमारियों में भुई आंवला बहुत फायदेमंद होता है। भूम्यामलकी की 10 ग्राम जड़ को जल में पीस लें। इसमें 1 चम्मच मिश्री या शहद मिलाएं। इसे पिलाने से, और इसको नाक के रास्ते देने से सांसों के रोग में लाभ होता है।-भुई आंवला के पत्तों को पीस लें। इसमें नमक मिलाकर खुजली पर लगाएं। खुजली ठीक हो जाती है। इसे जांघों की खुजली में भी लगाया जा सकता है। जिस अंग पर चोट लगी होस, वहां भुई-आंवला के कोमल पत्तों पीसकर लगाएं। इससे चोट का दर्द कम हो जाता है।-भुई आंवला को सेंधा नमक के साथ तांबे के बर्तन में जल में घिसें। इसे आंखों के बाहर लेप करने से आंखों के रोग में लाभ होता है।-भूम्यामलकी के 50 ग्राम पत्ते लें। इसे 200 मिली जल में मिलाकर काढ़ा बना लें। इससे कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।-भुई आंवला के 50 ग्राम पंचांग को आधा लीटर जल में गर्म कर लें। जब काढ़ा एक चौथाई रह जाए है तो एक-एक चम्मच काढ़ा को दिन में दो बार पिलाने से खांसी में लाभ होता है। पिप्पली, लाल चन्दन, भुई आंवला, सारिवा और अतीस आदि द्रव्यों से बने घी का नियम से सेवन करें। इससे भी खांसी की बीमारी से आराम मिलता है।-भुई आंवला के 20 ग्राम पत्तों को 200 मिली जल में उबालें। इसे छानकर थोड़ा-थोड़ा पीने से पेट दर्द से आराम मिलता है।-भुई आंवला की जड़ और पत्तों से काढ़ा बना लें। इसे ठंडा होने पर लगभग 10-20 मिली मात्रा में दिन में दो बार लें। इससे जलोदर रोग में लाभ होता है।--छाया में सुखाए हुए भूमि आंवला को मोटा-मोटा कूटकर रख लें। अब 10 ग्राम भूम्यामलकी को 400 मिली पानी में पकाएं। जब यह एक चौथाई से भी कम रह जाए, तब छानकर सुबह खाली पेट, और रात को भोजन से एक घण्टा पहले सेवन करें। यह आंतों में होने वाले घाव (अल्सर) को ठीक करने वाली चमत्कारिक औषधि है।-सिर दर्द से आराम पाने के लिए घी में पिप्पली, लाल चन्दन, भुई आंवला , सारिवा और अतीस आदि द्रव्यों से मिला लें। इसका सेवन करें। इससे सिर दर्द ठीक हो जाता है।-भुई आंवला के कोमल पत्तों लें। पत्ते की एक चौथाई काली मिर्च लें। दोनों को पीस लें। पीसने के बाद जायफल के बराबर गोलियां बना कर 2-2 गोली दिन में दो बार दें। अगर कोई रोगी गंभीर बुखार से ग्रस्त है तो इससे लाभ होता है। इसके साथ ही बार-बार आने वाले गंभीर बुखार में भी लाभ होता है।---
- नोनी एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है, इसका पत्तियां, फल, जड़, तने इत्यादि का सेवन कई रोगों के उपचार में किया जाता है। यह विटामिन और प्रोटीन जैसे कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो सेहत और स्किन के लिए फायदेमंद है।नोनी स्वास्थ्य के लिए है फायदेनोनी एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसकी पत्तियां, तने और फल लगभग सभी हिस्से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इसमें डायबिटीज से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव करने की क्षमता होती है। इसके फलों से तैयार जूस भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।1. डायबिटीज करे कंट्रोलनोनी जूस का सेवन करने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। इसमें एंटीडायबिटीज गुण होते हैं, जो टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल कर सकते हैं। यह हमारे ब्लड में मौजूद शुगर और ग्लूकोज की मात्रा को कम करने में असरकारी हो सकते हैं। नोनी जूस में डायबिटीज को कंट्रोल करने की क्षमता होती है।2. इम्यूनिटी को बूस्ट करे नोनी जूसइसके जूस में एंटीऑक्सीडेंट गुणों के साथ-साथ कई अन्य गुण भी छिपे होते हैं। जो कई बीमारियों से बचाव में कारगर साबित हो सकते हैं।3. कैंसर में नोनी जूस के फायदेनोनी के जूस में कई ऐसे गुण हैं, जो गंभीर से गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। नोनी से तैयार जूस में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीकैंसर गुण छिपे होते हैं, जो कैंसर सेल्स को शरीर में पनपने नहीं देते हैं। इसके साथ ही यह धूम्रपान से होने वाले कैंसर से बचाव करने में असरकारी साबित हो सकता है। इतना ही नहीं नोनी में एंटीट्यूमर गुण समृद्ध रूप से होता है, जो कैंसर के ट्यूमर को बढऩे नहीं देता है।4. पाचन में करे सुधारपाचन से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने में नोनी असरकारी साबित हो सकता है। इसमें पेट में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने की क्षमता होती है। डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से इसका सेवन आंतों की सूजन जैसी परेशानी को भी ठीक किया जा सकता है। इसके साथ ही यह पाचन से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी ठीक कर सकता है।5. लिवर को रखे स्वास्थ्यनोनी में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं, जो लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों से सुरक्षित रखते हैं। इसके अलावा यह लिवर से जुड़ी तमाम परेशानियों को ठीक कर सकते हैं।6. सूजन की समस्याओं को करे दूरनोनी के जूस में कई बीमारियों को कंट्रोल करने का गुण छिपा होता है। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होता है, जो शरीर में होने वाले सूजन को कम करने में असरकारी है। रिसर्च में देखा गया है कि नोनी में पाए जाने वाले एंटीइंफ्लेमेटरी गुण, फेफड़ों की सूजन को कम करने में असरकारी होते हैं।7. वजन करे कंट्रोलवजन को कंट्रोल करने में नोनी फायदेमंद हो सकता है। सुबह खाली पेट इस रस के सेवन से मोटापा कंट्रोल होगा। इसमें एंटी-ओवेसिटी गुण पाए जाते हैं, जो बढऩे मोटापे को कंट्रोल कर सकते हैं।8. गठिया की परेशानियों होंगी दूरबढ़ती उम्र के साथ गठिया की समस्या होने लगती है। इस बीमारी के वजह से लोगों का चलना मुश्किल हो जाता है। गठिया में जोड़ों में दर्द और सूजन जैसी कई परेशानियां होने लगती हैं। ऐसे लोगों के लिए नोनी का जूस काफी फायदेमंद हो सकता है। इसमें एंटी-अर्थराइटिस गुण होता है। साथ ही ऑटोइम्यून विकार से होने वाले गठिया रोगों को कंट्रोल करने का गुण होता है।नोनी के नुकसाननोनी में पोटैशियम की अधिकता होती है, जो लिवर और हृदय रोगियों के लिए हानिकारक होती है। इसलिए एक्सपर्ट की सलाहनुसार ही इसका सेवन करें। कम वजन वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से आपके शरीर का वजन और अधिक घट सकता है। ब्लड शुगर की परेशानी से ग्रसित लोगों को इसके सेवन से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा कम हो जाती है।नोनी का सेवन सही और उचित मात्रा में करने के लिए आयुर्वेद एक्सपर्ट से जरूर संपर्क करें। अपने हिसाब से इसका सेवन ना करें, वरना यह आपके सेहत को फायदे पहुंचाने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट की सलाह लिए बिना इसका सेवन ना करें।
- सूखी खांसी एक ऐसी बड़ी बीमारी है, जिसके एक बार होने से इससे छुटकारा पाना आसान नहीं होता, लेकिन हम आपको बता रहे हैं सूखी खांसी से निजात पाने का कारगर घरेलू नुस्खा । इस नुस्खे में आपको इस्तेमाल करना है बस शहद, अदरक और मुलेठी का।खांसी-जुकाम शरीर की एक रक्षात्मक प्रणाली है, जो वायु मार्ग से बलगम, धूल या धुएं को साफ करने के लिए होती है। जब भी शरीर में कोई संक्रमण होता है या जैसे मौसम बदलने पर होने वाले आम फ्लू वगैरह, तो शरीर सबसे पहले नाक से उसे बाहर निकालने की कोशिश करता है, तो नाक में मौजूद म्यूकस पतला हो जाता है और नाक बहने लगती है, जिससे की संक्रमण या बैक्टीरिया उससे बाहर चला जाता है। जब हमारा शरीर उसे नाक से बाहर करने में सक्षम नहीं होता और संक्रमण गले तक पहुंच जाता है, तो आपका शरीर बलगम या खांसी की मदद से उसे बाहर फेंकने का प्रयास करता है। सूखी खांसी ठीक करने के लिए शहद, अदरक और मुलेठी का इस्तेमाल काफी कारगर होता है।शहद और अदरक में कई औषधीय गुण होते हैं। दोनों ही इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी ये काफी मददगार हैं। अदरक में फलेगम होता है जो एंटीमाक्रोबायल गुणों से भरपूर है। इसके साथ ही शहद डेम्यूलसेंट है, जो राहत देने वाला है। इनके अलावा मुलेठी खांसी को ठीक करने में मददगार है। सूखी खांसी से राहत के लिए एक चम्मच शहद में जरा सा अदरक का जूस डालें और पी लें। इसके कुछ देर बाद आप मुंह में मुलेठी की छोटी सी डंडी रखें। मुलेठी आपके गले को सूखने नहीं देगी। मुलेठी सूखे गले और खराश से राहत दिलाने का काम करेगी।अगर खांसी लंबे समय से आ रही है और साथ ही बलगम में खून निकल रहा है, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें। जब खांसी दो हफ्ते से ज़्यादा लंबे समय तक बनी रहती है, तब इसका डायग्नॉस्टिक टेस्ट करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
- अर्जुन एक ऐसा सदाबहार वृक्ष है, जिसमें कई औषधीय गुण मौजूद हैं। इसकी अंदरूनी छाल अधिक औषधीय गुणों से भरपूर है। साथ ही इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक भी करते हैं। यह कई गंभीर समस्या जैसे स्ट्रोक, हार्ट अटैक, हृदय फेलियर आदि रोगों पर प्रभावशाली है। आज हम जानेंगे अर्जुन की छाल के फायदे....अर्जुन की छाल से सेहत को अनेक फायदे मिल सकते हैं। इसके अंदर कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व जैसे- पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि मौजूद हैं, ऐसे में इसके प्रयोग से कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है। यह स्वाद में कसैली और तीखी होती है।मधुमेह के रोगियों के लिए उपयोगीमधुमेह के रोगियों के लिए अर्जुन की छाल बेहद उपयोगी है। ऐसे में मधुमेह से पीडि़त रोग अर्जुन की छाल के चूर्ण को देसी जामुन के बीजों के साथ मिलाएं व नियमित रूप से रात को सोने से पहले बने चूर्ण का सेवन करें। मात्रा जानने के लिए एक बार आयुर्वेदाचार्य से संपर्क करें। इसके अलावा आप घर पर अर्जुन की छाल का काढ़ा भी बना सकते हैं। इसके लिए आपको कदम्ब की छाल, अर्जुन की छाल, जामुन की छाल तथा आजवाइन को एक साथ बराबर मात्रा में पीसना होगा और गैस पर आधा लीटर पानी के साथ उबालना होगा। थोड़ी देर के बाद बने मिश्रण को छानें और ठंडा होने के बाद पी लें।त्वचा के लिए उपयोगीअर्जुन की छाल का प्रयोग त्वचा के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। इससे बना उबटन त्वचा को कई समस्याओं से दूर रख सकता है। अगर आप अपनी स्किन को टाइट करना चाहते हैं या चमकदार और साफ दिखाई देना चाहते हैं तो अर्जुन की छाल से बना लेप एक अच्छा विकल्प है। आप इसे घर पर ही बना सकते हैं। इसके लिए आपको बादाम, हल्दी, कपूर और अर्जुन की छाल को बराबर मात्रा में लेकर पीसना होगा और चेहरे पर लगाना होगा।मोटापे से छुटकारा दिलाएअर्जुन की छाल से बना काढ़ा नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी खुद-ब-खुद कम होनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए आपको अलग से व्यायाम करने की जरूरत नहीं है।दिल की सेहत के लिएअर्जुन की छाल हृदय संबंधी समस्या से लडऩे में मददगार हैं। ये न केवल अनियमित धड़कन संकुचन दूर करती है बल्कि हृदय में आई सूजन, स्ट्रोक के खतरे को भी दूर कर सकती है। यह दिल को ताकत पहुंचाती है। ऐसे में आम अर्जुन की छाल और जंगली प्याज को समान मात्रा में लें और उसका चूर्ण बनाएं। इस पाउडर को नियमित रूप से दूध के साथ सेवन करने से हृदय की ब्लॉकेज दूर होगी और मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी।मूत्र की रुकावट को दूर करेमूत्र से संबंधित रोगों को दूर करने में अर्जुन की छाल बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा गुर्दे या मूत्राशय की पथरी को निकालने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। ऐसे में अर्जुन की छाल को पीसकर दो कप पानी में उबालें और गैस से उतारकर रोगी को इसका सेवन करने के लिए दें। इसका सेवन दिन में दो बारकिया जा सकता है। ऐसा करने से न केवल पेशाब की रुकावट दूर होती है बल्कि शरीर में भी तंदुरुस्ती आती है।मुंह के छालेअर्जुन की छाल से मुंह के छालों को दूर किया जा सकता है। ऐसे में अर्जुन की छाल के चूर्ण को नारियल के तेल के साथ मिलाएं और छालों पर लगाएं। ऐसा करने से मुंह के छाले तुरंत ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति बुखार से पीडि़त है तो अर्जुन के चूर्ण को गुड़ के साथ सेवन करें। ऐसा करने से बुखार उतर जाएगा।अर्जुन की छाल से होने वाले नुकसानअर्जुन की छाल से रक्त स्राव के साथ शर्करा को भी कम किया जा सकता है। ऐसे में जो लोग बीपी या मधुमेह की दवाई का सेवन करते हैं उन लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर करें। गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन करने से पहले महिलाएं एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- कुसुम का फल बेर की तरह होता है । यह स्वाद में खट्टे होते हैं। कुसुम फल एक औषधि के रूप में काम करता है। इसकी जड़, छाल, बीज, पत्ते आदि का इस्तेमाल विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता है।कुसुम फल खाने के फायदे1. डायबिटिक मरीजों के लिए फायदेमंदकुसुम के फल में एंटी डायबिटीक प्रॉपर्टीज होती हैं। जिसे खाने से डायटिबिटक मरीजों को फायदा मिलता है।2. बच्चों के लिए फायदेमंदकुसुम का फल बच्चों की सेहत के लिए फायदेमंद भी है। इसे खाने से बच्चों के पेट में कीड़े की समस्या खत्म होती है।3. गंजेपन को करे दूरकुसुम के फल के बीज से निकाला गया तेल बालों में लगाने से बाल झडऩे की समस्या दूर होती है। यह गंजेपन की समस्या भी दूर करता है।4. कान के दर्द में सहायककुसुम का तेल कान के दर्द में सहायक होता है। उस तेल में लहसुन मिलाकर गर्म कर लें, फिर ठंडा होने पर कान में डालें। इससे कान के दर्द में मदद मिलेगी।5. अल्सर को करे ठीककुसुम के फल के बीज के पाउडर को घाव में लगाने से पुराना घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है। दरअसल यह एंटी बैक्टिरियल होता है जो कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है।6. शरीर रखे साफकुसुम फल शरीर को डिटॉक्स करता है। कुसुम के फल के बीज से अब साबुन भी तैयार किया जा रहा है।7. जोड़ों के दर्द में करे मददइस फल को खाने से जोड़ों का दर्द खत्म हो जाता है।8. माहवारी में उपयोगीइस फल में कई रोगों को खत्म करने की ताकत होती है। इसे खआने से माहवारी के दौरान होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है।9. चेहरे के लिए लाभदायकइस फल को खाने से चेहरे से गैर जरूरी बाल हट जाते हैं। साथ ही चेहरा चमकने लगता है।10. कैंसर में मददगारइस फल में कैल्शियम, फाॉसफोरस, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। इसमें वैनेलिक एसिड पाया जाता है। यह फल एंटी-इंफलामेंट्री, एंटी कैंसर होने के कारण कैंसर को पनपने से रोकता है।कुसुम फल को खाने के नुकसानकुसुम फल के अधिक इस्तेमाल से पेट खराब हो सकता है। तो वहीं गले में दर्द भी पैदा हो सकता है। इसलिए नियंत्रित रूप से फल को खाएं।
- क्या आपकी बार-बार सांस फूलती है? या फिर आपको थोड़ा-सा काम करने के बाद ही शरीर में दर्द और सीने में जकड़न की समस्या होने लगती है? अगर आपको ऐसी ही समस्याएं होती हैं, तो सावधान होने का वक्त है क्योंकि ये लक्षण आम नहीं बल्कि अस्थमा के भी हो सकते हैं इसलिए अगर आपको ज्यादा परेशानी हो रही है, तो आपको तुंरत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। आइए, जानते हैं अस्थमा के कुछ शुरुआती लक्षण क्या है-हमेशा सूखी खांसी का होनाज्यादातर लोगों को सर्दी-जुकाम या फिर ब्रोंकाइटिस में कफ या सूखी खांसी आती है लेकिन ये अस्थमा का भी संकेत हो सकता है। हंसने या लेटने के बाद आपकी खांसी और बढ़ जाती है और ये खांसी आपके गले से नहीं बल्कि छाती से आती है। इस तरह के अस्थमा को कफ वेरिएंट अस्थमा कहते हैं।हमेशा उबासी, सांस फूलनालगातार उबासी, सांस फूलना या गहरी सांस की वजह हमेशा ऐंगजाइटी या थकान होती है। बासी या गहरी सांस लेने से शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है और कार्बन डाइऑक्साइड भी ज्यादा बाहर निकलती है। ये तीनों चीजों वायुमार्ग में आए असंतुलन की वजह हो सकती हैं।रात में इन समस्याओं का बढ़नाआप कफ और सांस की घरघराहट की वजह से सो नहीं पाते हैं तो ये एक गंभीर समस्या हो सकती है। ठीक से ना सो पाने की वजह से एनर्जी कम हो जाती है और इसका असर मानसिक रूप से भी पड़ता है। क्रोनिक स्लीपलेसनेस को दिल की बीमारी या फिर डायबिटीज के संकेतों से भी जोड़ कर देखा जाता है।सीने में जकड़न का होनासीने में जकड़न या दर्द हमेशा दिल की बीमारी की वजह से नहीं होता है। ये भी अस्थमा का एक मुख्य लक्षण हो सकता है। सीने में जकड़न की वजह से अस्थमा अटैक आ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अस्थमा अटैक की वजह से सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ और कफ का अनुभव होता है।तेज-तेज सांसे लेनाकुछ लोगों में तेज-तेज सांस लेना भी अस्थमा का लक्षण माना जाता है। अमेरिका की क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, वयस्कों के सांस लेने की सामान्य दर 12 से 20 सांस प्रति मिनट होती है। अगर आप इससे अधिक तेजी से सांस ले रहे हैं तो आपको हाइपरवेंटिलेशन भी हो सकता है।
















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