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- नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग और अवैध तस्करी विरोधी दिवस पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नारकोटिक्स कंट्रोल (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने देश को नशे के खतरे से बचाने के लिए तैयार किए गए ‘विजन डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल’ का भी शुभारंभ किया। संबोधन में अमित शाह ने कहा कि देश आज नशे के खिलाफ लड़ाई के बेहद निर्णायक मोड़ पर खड़ा है और आने वाले तीन साल बेहद अहम होंगे।अमित शाह ने कहा कि 26 जून भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन है। एक ओर देश नशे के खिलाफ प्रभावी रोडमैप तैयार कर रहा है, वहीं आज महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती भी है। ‘बंकिम बाबू’ ने गुलामी के दौर में देश के आत्मविश्वास को जगाने का काम किया और ‘वंदे मातरम’ जैसी अमर रचना दी।उन्होंने कहा, “‘वंदे मातरम्’ केवल एक नारा या गीत नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रभक्ति और देश के पुनर्निर्माण का मंत्र है। आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का सबसे बड़ा उद्घोष भी ‘वंदे मातरम’ ही था। इतिहास गवाह है कि देश के अनेक स्वतंत्रता सेनानी फांसी के फंदे पर चढ़ते समय भी अपने अंतिम शब्द के रूप में ‘वंदे मातरम’ का ही उच्चारण करते थे।”गृह मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देश के अगले 100 वर्षों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी सरकारों, विभागों, संतों, युवाओं और मातृशक्ति को एक मंच पर आकर संयुक्त रूप से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई में समाज के हर वर्ग की भागीदारी बेहद जरूरी है।अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों से अपील की कि राष्ट्रीय नशीले पदार्थ समन्वय पोर्टल (एनसीओआरडी) की बैठकों को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें पूरी तरह परिणाम-उन्मुख बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बैठकों में लिए गए फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन हो, उनकी नियमित समीक्षा हो और कमियों का गंभीर विश्लेषण किया जाए, तभी वास्तविक सफलता मिलेगी।उन्होंने रियल-टाइम सूचना साझा करने पर भी विशेष जोर दिया। अमित शाह ने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने इसके लिए कई डिजिटल पोर्टल विकसित किए हैं। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि सभी ड्रग्स से जुड़े मामलों का विवरण समय पर इन पोर्टल्स पर अपलोड किया जाए, ताकि केंद्र सरकार लगातार निगरानी कर आवश्यक सुझाव और फीडबैक दे सके।गृह मंत्री ने कहा कि आज का नारकोटिक्स नेटवर्क लगातार विकसित हो रहा है। ड्रग्स तस्कर नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई और चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसलिए इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एक समग्र और आधुनिक रणनीति अपनानी होगी।उन्होंने साफ कहा कि ड्रग्स के अवैध कारोबार में शामिल अपराधियों के खिलाफ सरकार की नीति पूरी तरह बेहद सख्त होनी चाहिए। वहीं, जो लोग नशे के शिकार हैं, उनके प्रति सहानुभूति अपनाते हुए इलाज, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर देना चाहिए। अमित शाह ने पिछले वर्षों में नशे के खिलाफ हुई कार्रवाई के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स जब्त किए गए थे। जबकि 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि सरकार का अभियान लगातार प्रभावी और सफल दिशा में आगे बढ़ रहा है।उन्होंने यह भी बताया कि 2004 से 2014 के दौरान जब्त किए गए ड्रग्स की कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपए थी, जबकि 2014 से 2026 के बीच जब्त किए गए मादक पदार्थों का मूल्य बढ़कर लगभग 1 लाख 84 हजार करोड़ रुपए हो गया। उनके मुताबिक, यह नशे के कारोबार के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की व्यापकता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।संबोधन के अंत में अमित शाह ने कहा कि देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और समाज को मिलकर लगातार काम करना होगा। उन्होंने दोहराया कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले वर्षों में इस दिशा में और अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को कहा कि जोधपुर में 35 वर्षों से अधिक समय से प्रतीक्षित नया एयरपोर्ट टर्मिनल अब जनता की सेवा के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को नए टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। नई दिल्ली से जोधपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जोधपुर एयरपोर्ट केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए हवाई संपर्क का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था और हवाई यात्रा दोनों में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके चलते यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।शेखावत ने कहा कि मौजूदा टर्मिनल पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा था, इसलिए आधुनिक सुविधाओं से लैस नए टर्मिनल की आवश्यकता महसूस की गई। उन्होंने बताया कि टर्मिनल की तकनीकी मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और निरीक्षण समिति मौके पर मौजूद है। सभी औपचारिकताएं शुक्रवार शाम या अधिकतम शनिवार तक पूरी होने की उम्मीद है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 4 जुलाई से जोधपुर और पूरे पश्चिमी राजस्थान के लोगों को आधुनिक टर्मिनल के माध्यम से बेहतर और सुगम हवाई यात्रा की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि नया टर्मिनल क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति देगा। इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को राजस्थान को कई बड़ी विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इसी दिन लगभग 13,000 करोड़ रुपए की लागत वाली जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना का शिलान्यास भी किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जुलाई को बाड़मेर स्थित पचपदरा रिफाइनरी का भी उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम पहले 21 अप्रैल को प्रस्तावित था, लेकिन 20 अप्रैल को रिफाइनरी में आग लगने की घटना के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं।
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने औद्योगिक एवं वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करते हुए नॉन-डॉमेस्टिक पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति पर सभी क्षेत्रीय प्रतिबंध को हटा दिया है और पश्चिम एशिया संकट से पूर्व की आपूर्ति स्थिति बहाल की है। इसके अलावा एलपीजी की विशाल आपूर्ति, जिसे संकट की शुरुआत में निलंबित कर दिया गया था, को संकट-पूर्व खपत स्तरों के 50 प्रतिशत तक बहाल किया गया है जिससे वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुआ है। यह बहाली हाल ही में एलपीजी आपूर्ति की स्थिति में हुए सुधार के बाद की गई है।दरअसल, पश्चिम-एशिया संकट के दौरान, घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए, सरकार ने अनिवार्य वस्तु अधिनियम के अंतर्गत आदेश जारी किए थे, जिनमें सी3-सी4 स्ट्रीम को केवल एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करना था उन्हें पेट्रोकेमिकल व अन्य डाउनस्ट्रीम कामों से हटाकर इसके लिए उपयोग करना था। देश में एलपीजी के बेहतर उत्पादन और आयातित एलपीजी कार्गो की अनुमानित उपलब्धता के मद्देनजर सरकार ने एलपीजी पूल में सी3-सी4 स्ट्रीम में परिवर्तन को कम करने का भी निर्णय लिया है।वहीं, एलपीजी के अलावा दूसरे कामों के लिए सी3-सी4 स्ट्रीम का बढ़ा हुआ आवंटन लागू किया जाएगा लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर कोई असर न पड़े और देश में एलपीजी का कुल उत्पादन प्रतिदिन कम से कम 40 टीएमटी बना रहे। मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उच्च प्रौद्योगिकी केंद्र को पेट्रोकेमिकल तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए उन्नत सी3-सी4 स्ट्रीम का संगठनवार आवंटन जारी करने एवं मंत्रालय को नियमित रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न वैश्विक आपूर्ति बाधा उत्पन्न होने के बाद सरकार ने पूरे देश में घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है। जिसके बाद कुछ समय के लिए वाणिज्यिक पैक एलपीजी की आपूर्ति पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए। नीतिगत मध्यवर्तनों एवं तेल विपणन कंपनियों के समन्वित प्रयासों ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक आपूर्ति शृंखला होने के बावजूद आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद की।सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे औद्योगिक एवं वाणिज्यिक एलपीजी ग्राहकों का पूरा डेटा बनाए रखें जिससे कुशल योजना और आपूर्ति प्रबंधन को सुगम बनाया जा सके। ओएमसी के बीच एक एकीकृत क्षेत्रीय डेटाबेस भी रखा जाएगा ताकि निगरानी एवं संचालन समन्वय को मजबूत किया जा सके।साथ ही, सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन का विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। वाणिज्यिक एवं थोक उपभोक्ता, जो पहले ही पीएनजी पर स्थानांतरित हो चुके हैं वे पीएनजी का ही उपयोग करेंगे। अन्य पात्र एलपीजी उपभोक्ता, जिन्हें पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है या जो पीएनजी पर स्थानांतरित होने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के समन्वय से चरणबद्ध रूप से पीएनजी पर स्थानांतरित किया जाएगा।
- नई दिल्ली। चंपत राय ने शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। न्यास की स्थापना केंद्र सरकार ने 2020 में अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए की थी। एक अन्य न्यासी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया। इन दोनों के इस्तीफे से एक दिन पहले गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंदिर को दान की गई धनराशि में कथित घपले के लिए आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।राय के करीबी सूत्रों ने कहा कि उनके विरुद्ध कोई सीधा आरोप नहीं है लेकिन उन्होंने मामले की जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दिया। 79 वर्षीय राय संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और उन्हें 2018 में अंतरराष्ट्रीय विश्व हिंदू परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वहीं 65 वर्षीय मिश्रा न्यास के 15 न्यासियों में से एक हैं। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि संस्थान को राय द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव पद से इस्तीफा देने की कोई जानकारी नहीं है।अयोध्या की एक अदालत ने कथित दान राशि गबन मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों को सोमवार तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया। अभियोजन अधिकारी के. सी. वर्मा ने अयोध्या में मीडिया को बताया कि जांच के दौरान 79.8 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार कि गए आठ लोग हैं अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव। यादव को चंपत राय का पूर्व चालक बताया जाता है।अभियोजन अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए पांच से छह लोग बैंक कर्मचारी थे जिन्हें मंदिर में प्राप्त नकद दान की गिनती के लिए नियुक्त किया गया था और वे बैंक से वेतन प्राप्त कर रहे थे। उन्होंने बताया कि टिन्नू यादव बैंक कर्मचारी नहीं था बल्कि चालक के रूप में काम करता था जबकि सुभाष श्रीवास्तव दान गिनती प्रक्रिया का प्रभारी था।उधर उत्तर प्रदेश के देवरिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि गबन के आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई एसआईटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के तुरंत बाद शुरू हो गई। उन्होंने इस विवाद को कुछ राजनीतिक दलों द्वारा ‘हताशा’ में राम भक्तों को निशाना बनाने और अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास बताया।अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि सभी आरोपी अयोध्या में ही थे और उन्हें गुरुवार देर रात पूछताछ के लिए उठाया गया। मामला भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 306 (क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक के कब्जे में संपत्ति की चोरी), 316 (आपराधिक विश्वासघात), 317 (चोरी की संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) और 61 (आपराधिक साजिश) सहित अन्य प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन का विवाद 7 जून को सामने आया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया जिसने 23 जून को सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी। एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर 25 जून की रात प्राथमिकी दर्ज की गई और अयोध्या पुलिस ने शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की।समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा 7 जून को यह मुद्दा उठाए जाने के बाद कुछ आरोपियों के नाम सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे थे। तीन-सदस्यीय एसआईटी की अध्यक्षता लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एसआईटी ने इस सप्ताह राज्य सरकार को सौंपी गई अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कड़े सुझाव दिए हैं। विपक्षी नेताओं ने प्राथमिकी को आंखों में धूल झोंकने जैसा बताया है। उनका आरोप है कि इसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा सहित न्यास के वरिष्ठ पदाधिकारियों की कोई जिम्मेदारी नहीं तय की गई है।कांग्रेस ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को भंग करने की मांग की। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि एक ओर भाजपा पंजीकृत न्यासों को कड़े एफसीआरए नियमों के माध्यम से नियंत्रित करना चाहती है और दूसरी ओर आरएसएस जैसी पूरी तरह अपंजीकृत संस्थाएं हमारे देश के मंदिरों को ‘लूटने और बर्बाद करने’ के लिए स्वतंत्र हैं।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को अयोध्या में कहा कि चोरी के पीछे जो लोग हैं वे आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से हटाने की ‘साजिश’ भी कर रहे थे।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को राज्यों से गार्ड उपलब्ध कराने वाली निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंस से जुड़े मामलों सहित सभी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने को कहा। राष्ट्रीय राजधानी में निजी सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्यशाला में गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पुलिस आधुनिकीकरण) आर.प्रसन्ना ने कहा कि इन एजेंसियों को नया लाइसेंस तय समय-सीमा के भीतर जारी किया जाए और लाइसेंस नवीनीकरण के लंबित मामलों के निपटान में भी कोई कोताही न बरती जाए। एक बयान के मुताबिक, प्रसन्ना ने बताया कि इसी मामले में केंद्रीय गृह सचिव दो जुलाई को सभी राज्यों के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने इन एजेंसियों को पेश आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिये राज्यों के संबंधित अधिकारियों को 'प्राइवेट सिक्योरटी एसोसिएशन' के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर बैठक करने को भी कहा। गृह मंत्रालय की उप सचिव कृति गर्ग ने बताया कि सरकार निजी एजेंसियों से जुड़े मुद्दों पर राज्यवार नजर रख रही है ताकि इनके निपटान में कोई देरी न हो। गृह मंत्रालय के नेतृत्व में इस कार्यशाला का आयोजन 'सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री' (केप्सी) और फिक्की समेत पांच संगठनों ने संयुक्त रूप से किया, जिसमें डेढ़ दर्जन से ज्यादा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों ने शिरकत की। बयान के अनुसार, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए हर बार पुलिस सत्यापन कराने और कार्यालय बदलने पर नए सिरे से लाइसेंस लेने के नियम को गैर जरूरी बताते हुए इसे खत्म करने का सुझाव दिया।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को पासपोर्ट शुल्क के ढांचे में बदलाव किया जिसके तहत 36 पन्नों के नये सामान्य पासपोर्ट के लिए अब 1,500 रुपये की जगह 2,500 रुपये का भुगतान करना होगा। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना से यह जानकारी सामने आई। बीस जून को तैयार अधिसूचना के मुताबिक, पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन कर आवेदन शुल्क के ढांचे में बदलाव किया गया है। नए नियम एक जुलाई 2026 से लागू होंगे। अधिसूचना में कहा गया है कि 36 पन्नों के नये सामान्य पासपोर्ट या इतने ही पन्नों के पासपोर्ट को फिर से जारी किए जाने के लिए सामान्य आवेदन शुल्क 2,500 रुपये होगा, जबकि तत्काल सेवा के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। मौजूदा समय में 36 पन्नों के नये सामान्य पासपोर्ट या इतने ही पन्नों के पासपोर्ट को फिर से जारी किए जाने के लिए सामान्य आवेदन शुल्क 1,500 रुपये, जबकि तत्काल शुल्क 3,500 रुपये है। अधिसूचना के अनुसार, 60 पन्नों के नये सामान्य पासपोर्ट या इतने ही पन्नों के पासपोर्ट को फिर से जारी किए जाने के लिए सामान्य आवेदन शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये, जबकि तत्काल आवेदन शुल्क 4,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये कर दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है, "केंद्र सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा-24 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन के लिए उक्त नियम बनाए हैं। इन नियमों को पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 कहा जा सकता है। ये नियम एक जुलाई 2026 से लागू होंगे।" अधिसूचना में सरकार ने एक अनुसूची भी जारी की है, जो "पासपोर्ट नियम, 1980 की अनुसूची चार" की जगह लेगी। संशोधित अनुसूची में दो उप-श्रेणियों का जिक्र है---आवेदकों के लिए (18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोग/15 से 18 साल के बीच की उम्र के नाबालिग, अगर उन्होंने इस श्रेणी में आवेदन किया हो); और नाबालिग आवेदक (18 साल से कम उम्र के)।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ वार्ता करेंगे, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान में यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में भी शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो पोत भी हिस्सा लेंगे। मंत्रालय ने कहा, ''सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर जाएंगे और सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में विशेष अतिथि के रूप में भाग लेंगे।'' विदेश मंत्रालय ने कहा, ''यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत एवं स्थायी मित्रता की फिर से पुष्टि करेगी तथा सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी।'' प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था।
मंत्रालय ने कहा, ''यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ वार्ता करेंगे, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की जाएगी तथा पारस्परिक हित से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।'' विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की संसद को भी संबोधित करेंगे और भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री पड़ोसी के रूप में सेशेल्स का भारत के 'महासागर' (क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) दृष्टिकोण तथा 'ग्लोबल साउथ' के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में विशेष स्थान है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें सत्य, न्याय, साहस और अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी करोड़ों लोगों को सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर डटे रहने की प्रेरणा देती है।
पीएम मोदी ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत को नमन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि हजरत इमाम हुसैन का बलिदान आज भी अनगिनत लोगों को सत्य और न्याय की राह पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि उनकी शहादत साहस, दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास की अमर शक्ति की भी याद दिलाती है।हजरत इमाम हुसैन, पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के नवासे (दोहिते), हजरत अली और हजरत फातिमा के छोटे पुत्र थे। इस्लाम के इतिहास में उनका स्थान बेहद सम्मानित और महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने 61 हिजरी यानी 680 ईस्वी में कर्बला के मैदान में सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।इतिहास के अनुसार, इमाम हुसैन ने अत्याचारी शासक यजीद के सामने झुकने और उसकी सत्ता को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद कर्बला के युद्ध में उन्होंने अपने परिवार और 72 वफादार साथियों के साथ तीन दिन तक भूखे-प्यासे रहकर संघर्ष किया और शहादत स्वीकार कर ली, लेकिन अन्याय के आगे कभी सिर नहीं झुकाया।यह शहादत आज भी इस्लाम में अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। हजरत इमाम हुसैन का बलिदान केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सत्य, न्याय, साहस और इंसानियत की रक्षा का अमर संदेश देता है। यही वजह है कि सदियों बाद भी उनकी कुर्बानी दुनिया भर के लोगों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और सच्चाई के रास्ते पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। -
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने ‘नशा मुक्त भारत’ का संदेश दिया है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ड्रग्स के दुरुपयोग की वैश्विक चुनौती के खिलाफ सबसे मजबूत लड़ाई लड़ी है। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर ड्रग्स के खिलाफ हमारी राष्ट्रीय लड़ाई में शामिल सभी योद्धाओं को शुभकामनाएं।”
अमित शाह ने आगे लिखा, “मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने ड्रग्स के दुरुपयोग की वैश्विक चुनौती के खिलाफ सबसे मजबूत लड़ाई लड़ी है। इसके तहत नार्को-कार्टेल्स का कठोरता से सफाया किया जा रहा है और प्रभावित लोगों का उचित देखभाल और सहानुभूति के साथ इलाज किया गया है। यह दिन हमारी युवा पीढ़ी को ड्रग्स से बचाने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।”वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नशा सिर्फ व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके परिवार, समाज और राज्य की उन्नति में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा, “हमारा संकल्प देवभूमि उत्तराखंड को नशे के अभिशाप से मुक्त कर स्वस्थ, जागरूक और सशक्त युवाशक्ति के माध्यम से एक समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है। आइए, अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर हम सभी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति समाज में व्यापक जन जागरूकता फैलाने एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को प्रेरित करने का संकल्प लें।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “नशा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के विकास में बाधा है। यह व्यक्ति की सोच, स्वास्थ्य और भविष्य तीनों को कमजोर करता है। आइए, आज ‘अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस’ के अवसर पर नशा-मुक्त समाज की दिशा में हर व्यक्ति को जागरूक कर एक बेहतर कल की ओर बढ़ें।”वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस’ के अवसर पर लोगों से अपील करते हुए कहा, “आइए, हम सभी नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें।” उन्होंने कहा, “नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए घातक है। स्वस्थ, जागरूक और सशक्त राष्ट्र के निर्माण हेतु आवश्यक है कि हम स्वयं नशे से दूर रहें तथा जन-जागरूकता के माध्यम से दूसरों को भी इस बुराई से मुक्त होने के लिए प्रेरित करें।” मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भी ‘अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस जागरूक’ पर लोगों से बड़ी अपील की। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस जागरूक करता है कि नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सजग करते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान दें और स्वस्थ, सुरक्षित व सशक्त देश के संकल्प को साकार करने में अपनी भागीदारी निभाएं।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा से मुलाकात की। इस दौरान इस बात पर चर्चा की कि कैसे भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित बदलाव वित्तीय सेवाओं को ज्यादा सुलभ और किफायती बना रहा है।
पीएम मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “नीदरलैंड्स की महामहिम रानी मैक्सिमा से मिलकर खुशी हुई। वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वित्तीय स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रतिनिधि (यूएनएसजीएसए) भी हैं और लंबे समय से दुनिया भर में वित्तीय समावेशन की समर्थक रही हैं।”पीएम ने बताया कि इस बैठक के दौरान उन्होंने इस बात पर चर्चा की कि कैसे भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हो रहा बदलाव कैसे वित्तीय सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचा रहा है और उन्हें किफायती बना रहा है। इससे लोगों की ‘जीवन को आसान बनाने’ (Ease of Living) में मदद मिल रही है और बड़े स्तर पर लोगों को सशक्त बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपने अनुभवों को दुनिया भर के साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है।आपको बता दें, महारानी मैक्सिमा भारत दौरे पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वित्तीय स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रतिनिधि (यूएनएसजीएसए) के रूप में आई हैं। बुधवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर लिखा कि महारानी मैक्सिमा का यह दौरा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है। साथ ही यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव से सीखने और उसे समावेशी विकास व टिकाऊ विकास के लिए इस्तेमाल करने पर भी केंद्रित है।अपने दौरे के दौरान महारानी मैक्सिमा ने अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों से सीधे बातचीत की और वित्तीय सेवाओं के इस्तेमाल से जुड़े उनके अनुभवों और वित्तीय समस्याओं को समझा। यूएनएसजीएसए ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पोस्ट में जानकारी दी। उन्होंने भारत की ‘जन धन योजना’ के लाभार्थियों से भी मुलाकात की। यह सरकार की एक पहल है, जिसके तहत लोगों को आसान और सस्ती बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का काम किया गया है।यूएनएसजीएसए ने कहा कि इन बातचीत से मिली जानकारी उनकी आगे की बैठकों में मदद करेगी, जिनमें वह निजी और सरकारी क्षेत्र के नेताओं से मुलाकात करेंगी।प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले महीने नीदरलैंड्स की यात्रा के दौरान रानी मैक्सिमा और राजा विलेम-अलेक्जेंडर से भी मुलाकात की थी। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने महारानी मैक्सिमा को मीनाकारी और कुंदन के झुमके उपहार में दिए थे। ये दोनों ही भारत की प्रसिद्ध आभूषण कला परंपराएं हैं, जिनकी शुरुआत राजस्थान से हुई है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वेनेजुएला में भूकंप के कारण हुई तबाही पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि भारत इस लातिन अमेरिकी देश को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। वेनेजुएला के तटीय क्षेत्र में बुधवार शाम को आए शक्तिशाली भूकंपों के कारण कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई है और 700 लोग घायल हुए हैं। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''वेनेजुएला में भीषण भूकंप के कारण हुई तबाही से गहरा दुख हुआ है। मैं भारत के लोगों की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां की जनता, विशेष रूप से अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता है और इस कठिन समय में सभी प्रभावितों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने कहा, ''भारत हर संभव सहायता देने के लिए तैयार खड़ा है।''
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जम्मू. बाबा अमरनाथ के प्रति गहरी आस्था के चलते नेपाल से बड़ी संख्या में साधु-संत वार्षिक अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए जम्मू पहुंचने लगे हैं। इनमें से कई साधु वर्षों से लगातार इस यात्रा में शामिल होते आ रहे हैं और इसे अपनी धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। तीन जुलाई से शुरू होने वाली 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू शहर के ऐतिहासिक राम मंदिर में साधु-संतों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा तक जाने वाले साधुओं के लिए यह मंदिर प्रमुख पड़ाव और ठहरने का केंद्र है। नेपाल से आए साधु छोटा डोमी दास ने बताया कि वह पिछले नौ वर्षों से नियमित रूप से अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष साधु-संत बड़े उत्साह के साथ यात्रा में शामिल होते हैं और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नेपाल के ही एक अन्य साधु विष्णु देव ने कहा कि वह कई बार अमरनाथ यात्रा कर चुके हैं और इस बार भी यात्रा को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे। पहली बार अमरनाथ यात्रा पर आए बिचारे दास ने कहा कि बाबा अमरनाथ के दर्शन करना उनका लंबे समय से सपना था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को सुंदर और अपनापन महसूस कराने वाला स्थान बताया तथा शांति और सभी लोगों के कल्याण की कामना की। नेपाल के जनकपुर निवासी देव नारायण चौधरी ने कहा कि उनके गांव में अमरनाथ यात्रा को लेकर काफी उत्साह है और बड़ी संख्या में साधु तथा श्रद्धालु यात्रा के लिए रवाना हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि बाबा अमरनाथ सभी श्रद्धालुओं की रक्षा करेंगे। कठिन पर्वतीय मार्ग और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। नेपाल से आए निकिल दास ने कहा कि बचपन से उन्होंने सुना है कि बाबा अमरनाथ के दर्शन से आध्यात्मिक शांति मिलती है और जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं। एक अन्य साधु जमना दास ने बताया कि उन्हें जम्मू पहुंचने में 10 दिन लगे। उन्होंने यात्रा के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने पर भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था दो जुलाई को जम्मू से रवाना होगा। यात्रा तीन जुलाई से अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से शुरू होगी। नेपाल से आने वाले साधु-संतों की मौजूदगी भारत और नेपाल के बीच गहरे आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित करती है, जो राजनीतिक सीमाओं से परे आज भी मजबूत बने हुए हैं।
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वाराणसी। वाराणसी में भारत की पहली सार्वजनिक परिवहन रोपवे परियोजना के लिए किराया तय कर दिया गया है जिसके तहत वाराणसी छावनी रेलवे स्टेशन और गोदौलिया के बीच लगभग चार किलोमीटर की यात्रा के लिए 50 रुपये किराया निर्धारित किया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि प्रशासन ने हाल में निर्माणाधीन रोपवे परियोजना की किराया संरचना को अंतिम रूप दे दिया है। उन्होंने बताया कि वाराणसी छावनी स्टेशन से गोदौलिया तक की पूरी यात्रा का किराया 50 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं, विभिन्न स्टेशनों के बीच कम दूरी की यात्रा के लिए अलग-अलग किराया लिया जाएगा। बोरा ने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए स्मार्ट पास की व्यवस्था भी की गई है, जिससे नियमित यात्रियों को लाभ मिलेगा। स्मार्ट पास के साथ छावनी से गोदौलिया तक की यात्रा 40 रुपये में की जा सकेगी, जबकि विद्यापीठ से रथयात्रा स्टेशन तक के सफर के लिए आठ रुपये देने होंगे। उन्होंने बताया कि निर्धारित किराया दरों में हर वर्ष एक अप्रैल से पांच प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
बोरा के अनुसार, रोपवे के संचालन से यात्रा कम समय में और अधिक आरामदायक तरीके से पूरी हो सकेगी। छावनी से गोदौलिया तक का सफर महज 15 से 16 मिनट में पूरा होगा, जबकि सड़क मार्ग से यही दूरी तय करने में सामान्यतः 30 से 45 मिनट लगते हैं। उन्होंने बताया कि बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए छावनी रेलवे स्टेशन पर लॉकर कक्ष की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। टिकटधारकों को शुरुआती दो घंटे तक सामान रखने की सुविधा नि:शुल्क मिलेगी। इसके बाद 15 किलोग्राम तक के सामान के लिए 50 रुपये प्रति घंटा शुल्क देना होगा। बोरा ने बताया कि समूह यात्राओं के लिए प्रीमियम गोंडोला सेवा का किराया 2,000 रुपये प्रति यात्रा निर्धारित किया गया है। किसी संस्था या समूह द्वारा अग्रिम आरक्षण कराने पर प्रति गोंडोला प्रति यात्रा 1,200 रुपये शुल्क देना होगा। वाराणसी रोपवे परियोजना भारत की पहली और दुनिया की तीसरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे परियोजना है। लगभग 4.2 किलोमीटर लंबा यह रोपवे छावनी रेलवे स्टेशन (वाराणसी जंक्शन) को चर्च स्क्वायर (गोदौलिया) से जोड़ेगा। -
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का 'हब एंड स्पोक' मॉडल यात्रियों के यात्रा समय को कम करेगा और साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक अवसरों के और करीब लाएगा। 'हब एंड स्पोक' मॉडल के तहत पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा की शुरुआत को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए मोदी ने कहा कि बेहतर अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन, निवेश, शिक्षा और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने अपने एक संदेश में कहा, ''यह मॉडल छोटे शहरों के लोगों को निर्बाध यात्रा के माध्यम से वैश्विक गंतव्यों तक पहुंचने में सक्षम बनाता है, और साथ ही वस्तुओं व सेवाओं की आवाजाही को भी बढ़ावा देता है। इससे क्षेत्रीय विकास में मदद मिलेगी और भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत होगी।'' हब एंड स्पोक मॉडल का उद्देश्य टियर-दो और टियर-तीन (छोटे और मध्यम) शहरों के हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के साथ निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस मॉडल के तहत, एअर इंडिया ने बृहस्पतिवार को वाराणसी से अपनी उड़ान सेवाएं शुरू की हैं, जो यात्रियों को दिल्ली के रास्ते दुनिया के विभिन्न विदेशी शहरों से जोड़ेंगी। यह मॉडल भारत को वैश्विक विमानन केंद्र बनाने के मकसद से तैयार किया गया है। इसके तहत छोट व मझोले शहरों के हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से निर्बाध रूप से जोड़ा जाएगा। हब एंड स्पोक (एचएंडएस) मॉडल के तहत छोटे हवाई अड्डों यानी 'स्पोक' से यात्री बड़े हवाई अड्डों यानी 'हब' के जरिये अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुंच सकेंगे। इस व्यवस्था में छोटे शहरों से आने वाले यात्रियों को दिल्ली जैसे प्रमुख (हब) हवाई अड्डों के जरिये आगे की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ा जाएगा। इस मॉडल के तहत वाराणसी हवाई अड्डे से एअर इंडिया द्वारा संचालित की जाने वाली पहली उड़ान के उद्घाटन समारोह में नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने प्रधानमंत्री का यह संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पहल से यात्रियों के सफर का समय कम होगा, मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग होगा, विमानों की उपयोगिता बढ़ेगी और बड़े हवाई अड्डों पर भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ''सबसे महत्वपूर्ण है कि यह भारत के और अधिक क्षेत्रों को वैश्विक अवसरों के करीब लाएगा।'' प्रधानमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित इस संदेश को हवाई अड्डे पर प्रदर्शित भी किया गया।
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी है जहां से इस मॉडल के तहत उड़ान सेवाओं की शुरुआत हो रही है। उन्होंने संदेश में कहा, ''दुनिया के सबसे पुराने जीवंत शहरों में से एक और भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत का प्रतीक, वाराणसी 'विकास भी और विरासत भी' को एक साथ आगे ले जाने के हमारे दृष्टिकोण को दर्शाता है। बेहतर कनेक्टिविटी इसकी अनूठी पहचान को सुरक्षित रखते हुए दुनिया के साथ इसके संबंधों को और मजबूत करेगी।'' इस व्यवस्था के तहत छोटे शहरों से आने वाले यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आगे की यात्रा के लिए दिल्ली जैसे प्रमुख हवाई अड्डों के माध्यम से जोड़ा जाएगा। वहीं, इन उड़ानों से न केवल अपने गंतव्य की यात्रा शुरू करने वाले घरेलू यात्री सफर करेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर आगे जाने वाले ट्रांजिट यात्री भी इनमें शामिल होंगे। - नयी दिल्ली. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी आलोक शर्मा को बुधवार को विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के प्रमुख के रूप में नौ महीने का सेवा विस्तार दिया गया। एसपीजी प्रधानमंत्री और उनके आधिकारिक आवास पर उनके साथ रहने वाले परिवार के निकटतम सदस्यों को सुरक्षा प्रदान करती है। शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें 17 नवंबर 2023 को इस पद पर नियुक्त किया गया था। वह इस महीने 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। कार्मिक मंत्रालय ने बताया कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने शर्मा का कार्यकाल नौ महीने के लिए बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उनका सेवा विस्तार एक जुलाई 2026 से प्रभावी होकर 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगा।
- कोलकाता . कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को निर्माणाधीन तीन मंजिला एक गोदाम ढह जाने से पांच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 अन्य लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान स्वीकृत सभी निर्माण परियोजनाओं पर 31 जुलाई तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि हादसे के नौ घंटे से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी लगभग 15 मजदूर दुर्घटनास्थल पर कंक्रीट और स्टील के भारी मलबे के नीचे दबे हुए हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। हालांकि, राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। उन्होंने बताया कि ढह चुका यह गोदाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के तहत आने वाली एक निजी पट्टे की संपत्ति है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान निर्माण स्थल के सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार और मजदूर उपलब्ध कराने वाले दो लोगों मोहम्मद अताउल और सुभाष चौधरी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि इन लोगों को एक मृत मजदूर के परिवार की ओर सेदर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया। अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही और लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावना है।" इस बीच, गोदाम के मालिकों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हादसे के शिकार हुए एक मजदूर के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गोदाम मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हमने मंजूरशुदा नक्शा और अन्य संबंधित दस्तावेज जुटा लिए हैं। जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि मंजूरी की प्रक्रिया और इमारत के निर्माण में कोई अनियमितता तो नहीं बरती गई थी।" मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि इस जमीन की मालिक श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी है, और इसे 'बेहेरा ब्रदर्स' के पार्टनर शंभूनाथ बेहेरा को पट्टे पर दिया गया था। पुलिस ने कहा कि पट्टा धारक, निर्माण कंपनी के मालिकों और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के योजना मंजूर करने वाले अधिकारियों समेत कई अन्य लोग भी जांच के दायरे में हैं। दुर्घटनास्थल का दौरा करने वाले मुख्यमंत्री ने कहा कि गोदाम के "त्रुटिपूर्ण" निर्माण नक्शे को इसी साल 17 जनवरी को तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान केएमसी से मंजूरी मिली थी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मैंने जो देखा, उससे मुझे पूरा यकीन हो गया है कि यह हादसा बारिश या कमजोर मिट्टी के कारण नहीं हुआ है, जिस पर यह निर्माण किया जा रहा था। यह खराब ढांचागत डिजाइन की वजह से हुआ, जिसमें लोहे के खंभे कंक्रीट का वजन नहीं संभाल पाए और भरभराकर जमीन पर गिर गए।" उन्होंने कहा, "मैंने केएमसी आयुक्त और शहरी विकास एवं नगर नियोजन विभाग को पिछली सरकार द्वारा अनुमोदित सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं, विशेष रूप से व्यावसायिक इमारतों पर काम रोकने का निर्देश दिया है। इन सभी का ऑडिट किया जाएगा। ऐसे स्थलों पर निर्माण कार्य 31 जुलाई तक निलंबित रहेगा।" अधिकारी ने कहा कि जांच में सही पाए जाने की शर्त पर, इन स्थलों पर एक अगस्त से काम दोबारा शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद इस ऑडिट का दायरा हावड़ा और विधाननगर नगर निगम क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऑडिट एक बहु-एजेंसी टीम द्वारा किया जाएगा, जिसमें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन सेवा, कोलकाता पुलिस और केएमसी के अधिकारी शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "यह टीम मुख्य सचिव के मार्गदर्शन में काम करेगी। यह टीम अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले स्थल योजना, भवन नक्शों की जांच करेगी और मौके पर जाकर निरीक्षण करेगी।" अधिकारी ने कहा कि वह तारातला की बिल्डर कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा बृहस्पतिवार को विधानसभा में करेंगे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए भी शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बचाव कार्य में सेना की पूर्वी कमान की भी मदद ली जा रही है।इससे पहले अस्पताल के पदाधिकारियों ने बताया कि मलबे से निकाले गए सभी लोगों को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई गई है। उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज के लिए तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ, हड्डीरोग विशेषज्ञ और जनरल मेडिसिन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सकों की एक टीम बनाई गई है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ''तारातला इलाके में ब्रेस पुल के निकट ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर इस गोदाम की छत दोपहर के करीब गिर गई। इस घटना के समय कुछ लोग वहां काम कर रहे थे। हमे कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।'' घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान लोहे के बीम और कंक्रीट के बड़े-बड़े हिस्से ढह गए, जहां कई मज़दूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने मलबे के नीचे फंसे लोगों को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ''भूतल पर पर निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि पहली और दूसरी मंज़िल का आरसीसी ढांचा पूरा हो चुका था। अचानक पूरा ढांचा ढह गया।" शुभेंदु ने बताया, ''सेना ने उन लोगों से संपर्क कर लिया है जो अब भी मलबे में फंसे हुए हैं।'' उनके मुताबिक कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़ों को हटाने की ज़रूरत के मद्देनजर बचाव अभियान को पूरा करने में काफी समय लग सकता है। अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक,ढलाई के दौरान तीन मंज़िला गोदाम की छत ढह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गोदाम के निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता पुलिस, आपदा प्रबंधन समूह, नागरिक सुरक्षा और अग्निशमन एवं आपात सेवा की टीम घटनास्थल पर बचाव कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारी भी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं जबकि गिर चुके लोहे के बीम को हटाने के लिए क्रेन और मशीनों को लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार लोहे और कंक्रीट को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा किया गया तथा बचावकर्मी 'वर्टिकल ड्रिलिंग' के ज़रिए मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों और ड्रोन की मदद ले रही है। कोलकाता पुलिस के आपदा प्रबंधन दल के एक सदस्य ने कहा, ''हम मलबे के नीचे से आ रही मदद की पुकार को सुन वहां तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, हम दबे हुए लोगों को भरोसा दिला रहे हैं कि उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा।" सेना ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, '' मध्य कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन एक गोदाम के अचानक ढह जाने के बाद, भारतीय सेना की पूर्वी कमान की चार टुकड़ियों को तुरंत खोज और बचाव अभियान के लिए भेजा गया।'' सेना ने कहा, ''नागरिक प्रशासन द्वारा मदद की अपील किये जाने के तुरंत बाद, सेना के बचाव कर्मियों, विशेषज्ञ अभियंताओं और चिकित्सा कर्मियों की टीम बचाव कार्यों में मदद करने के लिए पहुंची।'' भारतीय सेना ने कहा कि एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) और कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर, उसके जवान कंक्रीट के भारी मलबे के नीचे फंसे माने जा रहे कई लोगों को खोजने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सेना ने कहा, ''सेना के वरिष्ठ अधिकारी बचाव कार्यों का समन्वय कर रहे हैं। पूर्वी कमान फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षा और भलाई के लिए प्रार्थना करती है और भरोसा दिलाती है कि उन्हें बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।'' इस घटना के बाद, राज्य सचिवालय में आपदा प्रबंधन समूह का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''इस त्रासदी में गई कीमती जानों पर मेरे दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। इस अकल्पनीय दुख की घड़ी में राज्य सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है और हम उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेंगे।'' उन्होंने युद्ध स्तर पर चल रहे समन्वित बचाव कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सेना, एनडीआरएफ,एसडीआरएफ, कोलकाता पुलिस और केएमसी मिलकर बचाव कार्य कर रहे हैं ताकि फंसे हुए हर कर्मियों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। साथ ही, मुख्यमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में कुछ समय से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे थे। मंत्री इंद्रनील खान ने कहा, "हम निश्चित रूप से दुर्घटना के कारणों और किसी भी तरह की अनियमितता की जांच करेंगे। लेकिन अभी प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों को बचाने की है।" घटनास्थल पर मौजूद कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में इमारत की डिज़ाइन और निर्माण में खामियों के सबूत मिले हैं, जिनकी वजह से यह हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद एक सिविल इंजीनियर ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ऊपर बने कंक्रीट का वजन संभालने के लिए लोहे की बीम मज़बूत नहीं थीं। साथ ही, मुझे कोई ब्रेस भी नहीं दिख रहे हैं, जिनकी ज़रूरत आरसीसी ढलाई को सहारा देने के लिए होती है।'' उन्होंने कहा, ''हमें यह देखना होगा कि क्या ढांचे के डिजाइन को नगर निकाय से मंजूरी मिली थी और अगर मिली थी तो क्या निर्माण उसी के अनुरूप हो रहा था।'' पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं। कोलकाता पुलिस के आयुक्त अजय नंद घटनास्थल पर बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राकेश सिंह ने आशंका जताई थी कि कई पीड़ितों की मौत बचाव कार्य शुरू होने से पहले ही चोटों के कारण हो गई होगी।
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नई दिल्ली । चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने के लिए तैयार है।बैठक के दौरान वांग यी ने कहा कि चीन और भारत को ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में उदाहरण पेश करना चाहिए।
भारत में चीन के राजदूत शू फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए लिखा, “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और केंद्रीय विदेश मामलों आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी ने नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वांग ने कहा कि चीन और भारत, दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य होने के नाते, ग्लोबल साउथ देशों के बीच एकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। चीन, ब्रिक्स के घूर्णन अध्यक्ष के रूप में भारत की जिम्मेदारियों का समर्थन करता रहेगा और ब्रिक्स सहयोग को मजबूत बनाने के लिए भारत के साथ काम करेगा।”उन्होंने आगे कहा, “चीन भारत के साथ मिलकर दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने, आपसी विश्वास बढ़ाने, संदेह दूर करने, संवेदनशील मुद्दों को सही तरीके से संभालने, आपसी लाभ वाले सहयोग को और मजबूत करने तथा भारत-चीन संबंधों की सकारात्मक दिशा को बनाए रखने के लिए तैयार है। यह दोनों देशों की जनता के मूल हितों के अनुरूप है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा अपेक्षाओं के भी अनुकूल है।”चीनी विदेश मंत्री ने सोमवार को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल की प्रगति की समीक्षा की और माना कि संबंधों के सामान्य होने की दिशा में धीरे-धीरे प्रगति हो रही है।इस बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, राजदूत शू फीहोंग और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।चीन के राजदूत की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान के अनुसार, वांग यी ने कहा कि भारत और चीन, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, इसलिए दोनों देशों को अपने संबंधों को केवल द्विपक्षीय नजरिए से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और वैश्विक दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए।उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति को व्यवहार में लागू करना चाहिए, सहयोग के जरिए अपने विकास और प्रगति को आगे बढ़ाना चाहिए और ग्लोबल साउथ के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।अजीत डोभाल के साथ बैठक में वांग यी ने ब्रिक्स के घूर्णन अध्यक्ष (Rotating Chair) के रूप में भारत की भूमिका का समर्थन दोहराया और कहा कि चीन, ब्रिक्स व्यवस्था के विकास और विस्तार के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।उन्होंने कहा, “एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करना जरूरी है। संवेदनशील मुद्दों को समझदारी से संभालना चाहिए और भारत-चीन सीमा विवाद को ऐसी जगह रखना चाहिए कि वह दोनों देशों के व्यापक संबंधों को प्रभावित न करे। दोनों पक्षों को समाज के सभी वर्गों में सही समझ विकसित करने की दिशा में भी काम करना चाहिए, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए मजबूत जनसमर्थन और सामाजिक आधार तैयार हो सके।” -
नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में सोने की माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इसके साथ ही राज्य में कमर्शियल स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू हो गया है। नायडू ने जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड द्वारा स्थापित इस फैसिलिटी के विस्तार की योजनाओं के तहत प्रोजेक्ट की दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखी।
देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर का गोल्ड माइनिंग वेंचर माने जाने वाले जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स प्रोजेक्ट को 405 करोड़ रुपए के निवेश से शुरू किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार, जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड प्रोजेक्ट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि शुरुआत में सालाना 400 किलोग्राम उत्पादन होगा, अगले साल से यह बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगा और अंततः इसकी क्षमता दो टन तक पहुंच जाएगी।राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1,500 एकड़ जमीन आवंटित की है, जिसमें पहले चरण में 600 एकड़ जमीन पर माइनिंग का काम शुरू होगा। इस प्रोजेक्ट से लगभग 700 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। राज्य सरकार को खदान से निकाले गए सोने की कीमत पर चार प्रतिशत रॉयल्टी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने एक ट्रेनिंग सेंटर का भी दौरा किया, जहां महिलाओं और युवाओं को माइनिंग साइट पर भारी गाड़ियां चलाने के लिए सिमुलेटर पर ट्रेनिंग दी जा रही है। उन्होंने मिनरल वाली मिट्टी ढोने वाली भारी गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।मुख्यमंत्री ने जोन्नागिरी में सोने के उत्पादन की प्रक्रिया का खुद निरीक्षण किया, जिसमें कच्चे अयस्क को निकालने से लेकर अंतिम उत्पाद बनने तक के सभी चरण शामिल हैं। उन्होंने प्रोडक्शन यूनिट के अलग-अलग हिस्सों का जायजा लिया और सोने के बिस्कुट समेत तैयार उत्पादों की जांच की। जियो-मैसूर के चेयरमैन प्रभाकरन, एमडी नवीन लाल चंद और अन्य लोगों ने उन्हें पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के इतिहास में आज एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत हुई है, और यह ‘रत्नों की भूमि’ रायलसीमा के केंद्र में हो रहा है। उन्होंने बताया कि देश अभी 800 किलोग्राम सोना आयात करता है और तेल के बाद यह देश का सबसे बड़ा आयात है। उन्होंने कहा कि यहां हर साल एक टन सोने का उत्पादन होगा। एक टन सोने के सालाना उत्पादन से हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि जोन्नागिरी का महत्व कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इस इलाके का इतिहास बहुत समृद्ध रहा है और इसे कभी सुवर्णगिरि’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा कि सुवर्णगिरि सम्राट अशोक की चार राजधानियों में से एक थी। सदियों पहले, यह इलाका सोने और रत्नों की प्रचुरता के लिए मशहूर था। पास में मौजूद अशोक के येर्रागुडी शिलालेख इस इलाके के शानदार अतीत की गवाही देते हैं। उन्होंने कहा कि रायलसीमा ‘रत्नों की भूमि’ के तौर पर जानी जाती है और श्री कृष्णदेवराय के शासनकाल में यहां रत्नों के ढेर बेचे जाते थे।उन्होंने कहा कि हमारे राज्य को दुनिया को कोहिनूर हीरा देने का गौरव हासिल है। समय के साथ ऐसे हालात बने जिनसे रायलसीमा के रेगिस्तान बनने का खतरा पैदा हो गया था। हमने सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करके और पानी की सप्लाई करके इस इलाके में नई जान फूंकी है; अब सोने की माइनिंग इसकी पुरानी शान को वापस लाएगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस इलाके का नाम फिर से ‘सुवर्णगिरि’ रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस गांव को गोद लिया जाएगा और इसे ‘सुवर्णगिरि मॉडल गांव’ के तौर पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम रायलसीमा को ‘रत्नला सीमा’ (रत्नों/समृद्धि की भूमि) में बदलने का अपना वादा पूरा कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जल्द ही पूरा देश सुवर्णगिरि गोल्ड फील्ड्स की चर्चा करेगा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेवा तीर्थ में ‘प्रगति’ की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह ICT-आधारित मल्टी-मॉडल प्लेटफ़ॉर्म है जिसे सक्रिय गवर्नेंस को बढ़ावा देने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के ज़रिए प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए बनाया गया है।
सेवा तीर्थ में हुई बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और मेट्रो रेल सेक्टर से जुड़े चार बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। चार राज्यों में फैले और लगभग 30,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले इन प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन प्रोजेक्ट की समय-सीमा, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, समस्याओं के समाधान और समय पर काम पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए किया गया।काम को कुशलतापूर्वक पूरा करने के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों और उद्योगों को मिलने वाले संभावित लाभ भी नहीं मिल पाते हैं। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे लंबित मुद्दों को मिशन मोड में हल करें और उच्चतम स्तर पर प्रोजेक्ट्स की बारीकी से निगरानी सुनिश्चित करें।पीएम मोदी ने प्लानिंग को बेहतर बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में तेज़ी लाने के लिए ‘PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ के प्रभावी इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने पोर्टल पर यूटिलिटीज़, इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर्स, मंज़ूरी और फ़ील्ड-लेवल डेटा सहित प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी को नियमित रूप से अपडेट करने को कहा। उनके अनुसार, सटीक और रियल-टाइम जानकारी रखने से रुकावटों की जल्द पहचान करने, एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर करने और बेहतर फ़ैसले लेने में मदद मिलेगी।प्रधानमंत्री ने ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ की प्रगति की समीक्षा भी की और अभियान को मज़बूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने जागरूकता पैदा करने, मरीज़ों की निगरानी करने और इस पहल का समर्थन करने के लिए समुदायों को लामबंद करने में NCC कैडेट्स और ‘MY भारत’ वॉलंटियर्स को शामिल करने का सुझाव दिया।इसके अलावा, पीएम मोदी ने साइबर क्राइम और डिजिटल अरेस्ट के मामलों से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा की और नागरिकों को ठगने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा समन्वित, संवेदनशील और समयबद्ध कार्रवाई की ज़रूरत है और इस बात पर ज़ोर दिया कि मदद पाने के लिए नागरिकों को कई विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।पीएम ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के बीच स्पष्ट जवाबदेही, तेज़ी से प्रतिक्रिया और मज़बूत तालमेल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने में मदद के लिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाने का भी आह्वान किया। - नयी दिल्ली ।भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के प्रमुख मुद्दों की समीक्षा की, जिसमें बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार और गैर-शुल्क बाधाओं का कम करना शामिल है। बुधवार को आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के बीच यहां दो दिन तक चली मंत्रिस्तरीय स्तर की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हुई। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, चर्चा अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने केंद्रित रही जो व्यापक बीटीए के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने एक ऐसे समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो संतुलित हो, व्यावसायिक रूप से सार्थक हो और दोनों देशों के व्यवसायों, किसानों, श्रमिकों तथा उपभोक्ताओं के लिए ठोस लाभ सुनिश्चित करे। बयान में कहा गया, '' दोनों नेताओं ने बीटीए के प्रमुख पहलुओं की व्यापक समीक्षा की, जिसमें बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, गैर-शुल्क बाधाओं का कम करना और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार शामिल है।'' दोनों पक्षों ने हाल के महीनों में वार्ता दलों द्वारा हासिल प्रगति की भी समीक्षा की।इसमें कहा गया, '' दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि जारी वार्ताएं आर्थिक संबंधों को और गहरा करेंगी तथा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेंगी।''
- अयोध्या (उप्र)। अयोध्या में स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में हुए कथित घोटाले की जांच के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच का हवाला देते हुए ट्रस्ट की आमदनी, खर्च, दान और बैंक खातों समेत संबंधित जानकारी देने से इनकार कर दिया है। राय ने जानकारी देने से ऐसे समय में मना किया है जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता रजनीश सिंह की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में दी गई शिकायत को जरूरी कार्रवाई के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को भेजा गया। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) विशु राजा को 23 जून को लिखे पत्र में अपर जिलाधिकारी (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने शिकायत में मांगी गई जानकारी के लिए राय से संपर्क किया था। पत्र के मुताबिक राय ने उन्हें बताया है कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच अभी जारी है और एसआईटी सभी जरूरी जानकारियां इकट्ठा कर रही है। द्विवेदी ने बताया कि राय ने कहा है कि मामले में जारी जांच को देखते हुए वांछित जानकारी नहीं दी जा सकती। भाजपा नेता रजनीश सिंह ने 12 जून को पीएमओ में दर्ज करायी गयी शिकायत में मांग की थी कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपने गठन की शुरुआत से लेकर अब तक के अपने सभी वित्तीय और संपत्ति संबंधी विवरण सार्वजनिक करे। इस सप्ताह की शुरुआत में पीएमओ द्वारा भेजी गई इस शिकायत में कई जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। पीएमओ ने 'समर्पण निधि' अभियान के जरिए एकत्र किये गये धन, अलग-अलग तरीकों से मिले दान, सोने-चांदी और गहनों के रूप में मिले योगदान, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन, ज़मीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन पर हुए खर्च और ऑडिट तथा निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं। सिंह ने शिकायत में कहा कि भारत और दूसरे देशों में करोड़ों भक्तों ने राम मंदिर के निर्माण में योगदान किया है इसलिए उन्हें यह जानने का नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि दान और चढ़ावे का इस्तेमाल किस तरह से किया गया है।
- कोल्लम (केरल). कोल्लम के कोट्टाराकारा के नीलेश्वरम में मंगलवार सुबह मिट्टी से लदा एक ट्रक (लॉरी) अचानक अनियंत्रित होकर एक बस स्टॉप से टकरा गया जिससे एक छात्र समेत कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और अन्य पांच घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक पर लदी सारी मिट्टी बस स्टॉप पर मौजूद लोगों के ऊपर गिर गई जिससे कई लोग मिट्टी के भारी ढेर के नीचे दब गए। पुलिस ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वालों में एक छात्र भी शामिल है, जो स्कूल जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था। घायलों में कुछ अन्य छात्र भी शामिल हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि तीन लोगों, पार्थिपन (15), हरिलाल (54) और अजयकुमार (50) को कोट्टाराकारा तहसील अस्पताल में मृत लाया गया था। इस दुर्घटना में पांच अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें गंभीर रूप से घायल हुए लोगों की पहचान ऋषभ (15), कौशिक (15) और निज़ाम (40) के रूप में हुई है। तीनों को विशेष उपचार के लिए कोल्लम के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि नवनीत कृष्णन (13) और जिबी मोल (15) को मामूली चोटें आई हैं।पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के बाद शुरुआत में यह पता लगाने के प्रयास किए गए कि क्या कोई और व्यक्ति मिट्टी के ढेर के नीचे फंसा हुआ है। एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया कि वह और कुछ अन्य लोग इस दुर्घटना में बाल-बाल बचे।उसने पत्रकारों को बताया, "मैं बस स्टॉप से कुछ दूरी पर खड़ी थी। लॉरी बहुत तेज गति से आ रही थी। मुझे नहीं पता कि उसके ब्रेक फेल हो गए थे या नहीं लेकिन उसने बस स्टॉप पर खड़े लोगों को टक्कर मार दी और वाहन में लदी मिट्टी उनके ऊपर गिर गई।" इस बीच, स्वास्थ्य और देवस्वओम मंत्री के मुरलीधरन ने अधिकारियों को निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे लोगों के लिए विशेष उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना से उत्पन्न होने वाली किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक विशेष मेडिकल टीम तैयार रखी गई है। मुरलीधरन ने कहा कि इन गतिविधियों का समन्वय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक के नेतृत्व में किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उन निजी अस्पतालों के भी संपर्क में हैं जहां घायलों का इलाज जारी है और वे सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। राज्य के मंत्रियों बिंदु कृष्णा और पी सी विष्णुनाध ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कोडिकुन्निल सुरेश के साथ दुर्घटनास्थल का दौरा किया और स्थानीय निवासियों से बात की। विष्णुनाध ने कहा कि घायलों के इलाज का सारा खर्च सरकार उठाएगी। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का मामला सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। कृष्णा ने कहा कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से स्कूल के समय के दौरान ट्रकों (लॉरियों) द्वारा तेज गति से भारी सामान ले जाने पर चिंता व्यक्त की। केरल विधानसभा में कोट्टाराकारा के विधायक के एन बालगोपाल ने भी यह मुद्दा उठाया।इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुरलीधरन ने कहा कि हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है और मृतकों के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने एक शोक संदेश में इस दुर्घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि निजी चिकित्सा केंद्रों सहित विभिन्न अस्पतालों में भर्ती घायलों को विशेष उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मंत्री बिंदु कृष्णा और विष्णूनाथ घटना की सूचना मिलते ही तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए थे और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने भी लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया।उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन छात्रों सहित सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा उपचार मिले, यह सुनिश्चित किया जाए। इस बीच, वाहन की जांच करने वाले मोटर वाहन विभाग (एमवीडी) के अधिकारियों ने कई गंभीर उल्लंघनों की रिपोर्ट दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह वाहन 17 साल पुराना था और यातायात व सुरक्षा उल्लंघनों के लिए पहले भी कई बार इसका चालान किया जा चुका था। दुर्घटना के बाद इसका 'फिटनेस' प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित चालक के पास ट्रक (लॉरी) चलाने के लिए वैध भारी वाहन लाइसेंस नहीं था। बताया गया है कि वह महज एक महीने पहले ही खाड़ी देश से लौटा था। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के समय अत्यधिक तेज गति ही इस हादसे का मुख्य कारण थी।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा सहयोग को गहरा करने और आतंकवाद, साइबर सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों जैसी साझा चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने, 'ग्लोबल साउथ' की प्राथमिकताओं को समर्थन देने तथा अधिक सुरक्षित, संरक्षित और समावेशी विश्व के निर्माण में योगदान देने पर केंद्रित होगी। 'ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।मोदी ने यह टिप्पणी ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात के बाद की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से मिलकर प्रसन्नता हुई। बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और आतंकवाद, साइबर सुरक्षा से लेकर उभरती प्रौद्योगिकियों तक की साझा चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।'' ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी यहां ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए आए हैं। ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। इसका 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ।
- नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में टकराव खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, भारत आने वाले 11 जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। शांति समझौते के तहत ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों पर से अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद, भारत ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया में हो रही गतिविधियों पर नजर रख रहा है और ऊर्जा की आपूर्ति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा, "आज की स्थिति के अनुसार, भारतीय झंडे वाले हमारे 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में हैं।इसके अलावा, हाल ही में दो और जहाज वहां पहुंचे हैं।" उन्होंने कहा, ''सत्रह जून को एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद से, भारत आने वाले 11 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं।" जायसवाल ने बताया कि इन जहाजों में भारतीय झंडे वाले तीन कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, जिनमें से हर एक में 2,85,000 मीट्रिक से ज्यादा कच्चा तेल है, साथ ही विदेशी झंडे वाला एक एलपीजी वाहक, विदेशी झंडे वाला एक कच्चे तेल का टैंकर और विदेशी झंडे वाले छह भारी मालवाहक पोत भी हैं, जिनमें खाद लदी है। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि भारत के झंडे वाले बाकी जहाज भी जल्द ही होर्मुज पार कर सकेंगे।"पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत रहा है।ईरानी कच्चे तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा, "हम पश्चिम एशिया से जुड़ी सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। जहां तक हमारी ऊर्जा आपूर्ति का सवाल है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हमारी नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।" उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि 1.4 अरब लोगों को किफायती कीमतों पर और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा मिल सके। यह लगातार हमारी नीति रही है।" जायसवाल ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि भारत के फलस्तीन के साथ दशकों से अच्छे संबंध रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमारी विकास साझेदारी रूपरेखा के तहत, हमने फलस्तीन में कई विकास परियोजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा, "इसके अलावा, हमने कई मौकों पर फलस्तीनी लोगों को मानवीय सहायता दी है। हम भविष्य में भी ऐसी मदद देना जारी रखेंगे।" जयसवाल ने भारत-यूएई रक्षा साझेदारी से जुड़े एक सवाल का भी जवाब दिया।उन्होंने कहा, "संयुक्त अरब अमीरात के साथ यह रिश्ता बहुत अहम है।" उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में इस रिश्ते में काफी सुधार आया है और इसमें रक्षा साझेदारी अहम भूमिका निभाती है।
- पुरी. ओडिशा सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह पुरी में 16 जुलाई से शुरू होने वाली भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा के लिए लगभग सात हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती करेगी और 475 सीसीटीवी कैमरे लगाएगी। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने रथ यात्रा को लेकर आयोजित दूसरी समन्वय बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ''इस बार राज्य सरकार ने जनवरी से ही रथ यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी थी और त्योहार को बिना किसी गड़बड़ी या घटना के संपन्न कराने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।'' हरिचंदन ने बैठक के दौरान कहा कि सभी संबंधित विभागों से रथ यात्रा शुरू होने से काफी पहले अपना काम पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।मंदिर परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था के प्रभारी एडीजीपी सौमेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि त्योहार के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत पुलिस बल की करीब 220 प्लाटून (एक प्लाटून में 30 जवान होते हैं) तैनात की जाएंगी। साथ ही, स्नान पूर्णिमा (20 जून) से नीलाद्रि बिजे (28 जुलाई) तक पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी। उन्होंने बताया कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं, जैसे भीड़ प्रबंधन, यातायात, कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण में तैनात किया जाएगा। प्रियदर्शी ने कहा कि उत्सव के दौरान एनएसजी की एक विशेष टीम तैनात की जाएगी और पूरे पुरी नगर निगम इलाके की निगरानी सीसीटीवी से की जाएगी। उन्होंने कहा, ''हमने अब तक 'बड़ा दांडा' (मंदिर के सामने की विशाल सड़क)पर लगभग 200 सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं।''एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए एक विशेष योजना बनाई गई है, क्योंकि पिछले साल ऐसी ही स्थिति में तीन लोगों की मौत हो गई थी। सुरक्षा के अलावा, सरकार की तैयारी स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी केंद्रित है क्योंकि 16 जुलाई को उत्सव के पहले दिन 10 लाख से ज़्यादा श्रद्धालुओं के एकत्र होने की संभावना है। राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा, ''स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिनमें ज़िला मुख्यालय अस्पताल में अतिरिक्त बिस्तर और एक विशेष बर्न यूनिट की स्थापना शामिल है।'' उन्होंने कहा कि बड़ा डंडा पर 30 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और दो 'कैजुअल्टी सेंटर' बनाए जाएंगे और उत्सव के दौरान एम्बुलेंस का एक बेड़ा तैनात किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि भारी भीड़ के मद्देनजर रेलवे 370 विशेष रेलगाड़ियों का संचालन करेगा और तीर्थयात्रियों के लिए अतिरिक्त टिकट काउंटर खोलेगा। उन्होंने बताया कि पार्किंग की सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जा रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने बैठक में बताया कि भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथों के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है।





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