- Home
- देश
-
पुरुलिया (बंगाल). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह घुसपैठ के जरिए राज्य की भाषा और संस्कृति बदल रही है, आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है और ''महाजंगलराज'' चला रही है। आदिवासी आबादी वाले पुरुलिया में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक धार तेज करने की कोशिश की और चुनावी मुकाबले को ''विकास बनाम तुष्टीकरण'' की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा, ''घुसपैठ के कारण बंगाल की भाषा और संस्कृति बदल रही है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल की राजनीति ने राज्य के सामाजिक चरित्र को बदल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमला तेज करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण आदिवासी पहचान और भाषा की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा, ''संथाली भाषा का अपमान हो रहा है, जबकि मदरसा शिक्षा के लिए रिकॉर्ड बजट दिया जा रहा है। यह और कुछ नहीं, सिर्फ तुष्टीकरण है।'' प्रधानमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस शासन को बार-बार ''महाजंगलराज'' करार देते हुए आरोप लगाया कि पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम जैसे आदिवासी बहुल जिलों को सड़क, पेयजल, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के महाजंगलराज में आदिवासी बहुल जिले विकास और बुनियादी सुविधाओं में पिछड़ गए हैं।'' आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा को स्वाभाविक राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने स्थानीय गिरोहों के जरिए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया, ''तृणमूल गिरोह ने आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लिया है। सत्तारूढ़ दल को 'कट मनी' (रिश्वत) दिए बिना कोई काम नहीं होता।'' मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल ने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का विरोध इसलिए किया, क्योंकि उसे ज्यादा महिला जनप्रतिनिधियों से ''डर'' था। उन्होंने कहा, ''तृणमूल को डर था कि अगर ज्यादा महिला विधायक चुनकर आएंगी तो वे महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाएंगी। इसलिए उसने महिला आरक्षण का विरोध किया। मतदान के समय इस अपराध की सजा भी तृणमूल को देनी चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और उगाही ने राज्य में शासन व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों को पंगु बना दिया है। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के जंगलराज में रिश्वत दिए बिना कोई काम नहीं होता। जब रिश्वतखोरी थोप दी जाए तो उद्योग कैसे फलेंगे-फूलेंगे? इसलिए यहां उद्योग भी बदहाल हैं।'' भ्रष्टाचार को बेरोजगारी से जोड़ते हुए मोदी ने दावा किया कि तृणमूल के 15 वर्षों के शासन में पश्चिम बंगाल में खतरनाक स्तर की बेरोजगारी रही है। स्कूल भर्ती घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल नेताओं ने हजारों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा, ''तृणमूल मंत्रियों ने शिक्षकों की भर्ती में लूट की और हजारों युवाओं के साथ धोखा किया।'' उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल के हजारों स्कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं, क्योंकि नौकरियां ''लूट'' ली गईं। पश्चिम बंगाल के इस पश्चिमी हिस्से में सत्ता विरोधी लहर का दावा करते हुए मोदी ने कहा कि पुरुलिया के लोग अब बदलाव की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''पूरा पुरुलिया बदलाव चाहता है और कह रहा है 'पलटानो दरकार' (बदलाव जरूरी है)।''
मोदी ने कहा कि जहां-जहां भ्रष्टाचार और अत्याचार चरम पर पहुंचे, वहां लोगों ने आखिरकार भाजपा को विकल्प के रूप में चुना। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के भ्रष्टाचार और अत्याचार ने बंगाल की जनता को आतंकित कर दिया है। लेकिन अब लोग भाजपा को एकमात्र विश्वसनीय विकल्प मानते हैं।'' लोगों से वोट की अपील करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल को अब केंद्र में ही नहीं, राज्य में भी भाजपा सरकार चाहिए। उन्होंने कहा, ''आपने मुझे प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी दी है, अब बंगाल को भी भाजपा का मुख्यमंत्री चाहिए।'' भाजपा के ''डबल इंजन'' नारे को आगे बढ़ाते हुए मोदी ने दावा किया कि अगर केंद्र और राज्य दोनों जगह उनकी पार्टी की सरकार होगी तो पुरुलिया का विकास दोगुनी रफ्तार से होगा। उन्होंने कहा, ''जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों भाजपा के होंगे, तो पुरुलिया का विकास मौजूदा रफ्तार से दोगुना होगा।'' उन्होंने भरोसा जताया कि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा का मुख्यमंत्री शपथ लेगा। भाजपा शासित पड़ोसी राज्यों से तुलना करते हुए मोदी ने कहा कि आदिवासी समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व केवल भाजपा ने दिया है। उन्होंने कहा, ''ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हमने आदिवासियों को मुख्यमंत्री बनाया है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र ने आदिवासी मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाया और आदिवासी कल्याण के लिए विशेष धनराशि दी, जबकि तृणमूल सरकार ने इस क्षेत्र की अनदेखी की। भाषा और पहचान के मुद्दे पर भाजपा की स्थिति मजबूत करने की कोशिश करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी हर भाषा और बोली का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं को ज्यादा महत्व दिया गया है, ताकि गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़ सकें। मोदी ने कहा कि बंगाल में भाजपा सरकार बांग्ला, संथाली, कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को मजबूत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्ला भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा भाजपा सरकार ने दिलाया। - मोतिहारी. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने 2025 में 25 विदेशी नागरिकों को अवैध रूप से देश में रहने के आरोप में हिरासत में लिया। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इन 25 विदेशियों में बांग्लादेशी, श्रीलंकाई और संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इन देशों में अपने समकक्षों को विदेशी नागरिकों की हिरासत के बारे में सूचित कर दिया है। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में शनिवार को पूर्वी चंपारण के रक्सौल में हुई समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी सामने आई। इस बैठक में बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, जिलाधिकारी , पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल अधिकारी, जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। जिला प्रशासन द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, ''मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारत-नेपाल सीमा संबंधी मुद्दों पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। 2022 से 2026 के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में शराब की तस्करी के 22,500 मामले दर्ज किए गए, हथियारों की तस्करी के 779 मामलों में 1,179 गिरफ्तारियां हुईं। जाली मुद्रा के दस मामलों में 54.64 लाख रुपये की जब्ती की गई।'' बयान के मुताबिक ''विदेशी घुसपैठ के 41 अवैध मामलों में एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अकेले 2025 में 25 विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में बांग्लादेश, श्रीलंका और अबू धाबी के नागरिक शामिल हैं।
- नयी दिल्ली. भारत के महापंजीयक ने शनिवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में स्थित पासीघाट को चीनी शहर 'मेडोग' के रूप में दर्शाने वाले स्व-गणना मानचित्र से संबंधित 'समस्या' का समाधान कर लिया गया है। इस मुद्दे को मोहोंटो पांगिंग पाओ नामक एक 'एक्स' उपयोगकर्ता ने उठाया। उसने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक पोस्ट किया। सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर स्व-गणना करने का प्रयास करने के दौरान सामने आने वाले मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट को कथित तौर पर 'मेडोग' के रूप में दर्शाया गया था। पाओ ने पोस्ट में कहा, ''मेडोग चीन का एक कस्बा है! गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भारतीय हैं! यहां तक कि सरकारी पोर्टल भी वस्तुतः हमारे क्षेत्र को सौंप रहे हैं! तत्काल कार्रवाई की जरूरत है!'' महापंजीयक ने शाम को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, ''आज अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में सरकारी पोर्टल के जरिये स्व-गणना के दौरान मानचित्र स्थान को लेकर एक समस्या सामने आई।'' जनगणना आयुक्त ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मानचित्र सेवा प्रदाता के साथ यह मुद्दा उठाया गया था और इसका समाधान कर लिया गया है।
- नयी दिल्ली. भाजपा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के संकल्प को पूरा करने का वादा किया, और पार्टी प्रमुख नितिन नवीन ने कहा कि मोदी के रहते यह संभव है। शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और 2029 से विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था।राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने महिलाओं से माफी मांगी और कहा कि सरकार भले ही विधेयक को पारित नहीं करा पाई हो, लेकिन वह महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को कभी नहीं छोड़ेगी। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अधिनियम को पूरा करने का संकल्प लिया है, और हम भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इसे पूरा करेंगे।'' उन्होंने कहा, ''ऐसा इसलिए है क्योंकि 'मोदी है तो मुमकिन है'।''भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस और इसके सहयोगियों-तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शुक्रवार को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ मतदान करने पर उनका ''महिला-विरोधी'' चेहरा बेनकाब हो गया।
-
नई दिल्ली। अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट, ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों के बीच निकली मां गंगा की उत्सव डोली
सनातन धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक चार धाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है और अक्षय तृतीया के दिन, कल रविवार (19 अप्रैल) को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे।गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के मंदिरों में सजावट का काम भी शुरू हो चुका है, लेकिन इसी के साथ मां गंगा की उत्सव डोली आज शनिवार को उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए विधिवत पूजा-अर्चना के साथ रवाना हो गई।मां गंगा की उत्सव डोली को शनिवार को विधिवत पूजा के साथ रवाना किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा, और उल्लास का संगम देखने को मिला। मां गंगा की उत्सव डोली के रवाना होने के साथ भक्तों के बीच उत्साह देखा गया। रविवार को निर्धारित शुभ मुहूर्त में गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलते ही देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के दर्शन शुरू हो जाएंगे।मुखवा गांव में डोली प्रस्थान से पहले मां की उत्सव डोली की विशेष पूजा-अर्चना की गई और पूरे गांव को भव्य तरीके से सजाया गया। स्थानीय लोगों ने भी मां गंगा की डोली को ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों से मां के साथ विदा किया। पूरे मंदिर परिसर में श्रद्धालु की “जय मां गंगे” के जयकारों की गूंज सुनने को मिली। डोली यात्रा में भक्तों और अधिकारियों की भारी भीड़ देखने को मिली। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और साधु-संत, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय जनप्रतिनिधि, और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। सभी मिलकर मां गंगा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।वहीं दूसरी तरफ अक्षय तृतीया के मौके पर मां गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे, जिसको लेकर मंदिर समिति और प्रशासन की तरफ से पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। शीतकाल में अधिक बर्फबारी की वजह से गंगोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मां गंगा की विग्रह डोली को मुखवा गांव में बने मंदिर में स्थापित किया जाता है, और वहां पूरे विधान के साथ मां गंगा की पूजा की जाती है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित कराने के प्रयासों को 'विफल' करने के लिए कांग्रेस को 'महिला-विरोधी' करार दिया। रीजीजू ने कहा कि महिलाओं को निर्णय-निर्माण में उनका उचित स्थान दिलाने के लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे। बजट सत्र के समापन पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यद्यपि सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन को इस बात का दुख है कि महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, लेकिन वे इसे विफलता नहीं मानते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के अधिकारों को 'छीनने' के बाद 'जश्न मना रही है', जिसके लिए देश की महिलाएं उन्हें करारा सबक सिखाएंगी। रीजीजू ने कहा, ''यह साबित हो चुका है कि कांग्रेस महिला विरोधी है। उसे देश की महिलाओं के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष महिलाओं के अधिकारों को छीनने के बाद इसे जीत मान रहा है। लेकिन देश की महिलाएं उन्हें करारा सबक सिखाएंगी।'' मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की 'महिला विरोधी मानसिकता' उजागर हो गई है, जो पार्टी के लिए एक 'काला धब्बा' है। उन्होंने कहा, ''हमें दुख है, लेकिन हम इसे पार्टी और सरकार की विफलता नहीं मानते। उन्होंने देश की महिलाओं को ठेस पहुंचाई है। हम महिलाओं को सम्मान देना चाहते थे, उन्हें सशक्त बनाना चाहते थे…, हम ऐसा करना जारी रखेंगे।'' रीजीजू ने कहा कि सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन ने विधेयक पारित कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा, ''हम विपक्ष को शारीरिक रूप से किसी विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। मतदान लोकतांत्रिक तरीके से हुआ।'' विपक्षी दलों द्वारा विरोध में मतदान करने के बाद शुक्रवार रात लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो पाया। इस विधेयक के तहत, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीटों को वर्तमान संख्या 543 से बढ़ाकर 816 तक किया जाना था। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी। इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाला सत्तारूढ़ गठबंधन आवश्यक संख्या जुटाने में विफल रहा। मतदान के दौरान, 298 सदस्यों ने विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 मतों की आवश्यकता थी। रीजीजू ने कहा कि बजट सत्र के दौरान, लोकसभा में 12 विधेयक और राज्यसभा में एक विधेयक पेश किया गया।
उन्होंने बताया कि लोकसभा ने नौ विधेयक पारित किए, राज्यसभा ने नौ विधेयक पारित/वापस कर दिए और एक विधेयक लोकसभा से वापस ले लिया गया। मंत्री ने कहा, ''लोकसभा की उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत और राज्यसभा की लगभग 110 प्रतिशत रही।''
बजट सत्र के पहले भाग में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों की 13-13 बैठकें हुईं। दूसरे भाग में दोनों सदनों की 15-15 बैठकें हुईं। बजट सत्र के तीसरे भाग (16 से 18 अप्रैल तक) में लोकसभा और राज्यसभा की तीन-तीन बैठकें हुईं, जिससे सत्र के दौरान 81 दिनों में कुल बैठकों की संख्या 31 हो गई। -
नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद अपने कार्यालय में कई सांसदों से मुलाकात की। इस मौके पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता जेपी नड्डा, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, भाजपा अध्यक्ष और सांसद नितिन नवीन भी मौजूद थे। इस अनौपचारिक बैठक में उपस्थित अन्य संसद सदस्यों में दिग्विजय सिंह, राजीव शुक्ला, जॉन ब्रिटास, प्रमोद तिवारी, रंजीत रंजन, जेबी माथेर, शक्तिसिंह गोहिल, नासिर हुसैन और नीरज डांगी शामिल थे। सभापति ने दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद सांसदों से मुलाकात की।
-
हैदराबाद. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने शनिवार को कहा कि जलवायु और वायु प्रदूषण का अध्ययन करने तथा मौसम की निगरानी करने के लिए डिजाइन किए गए जी20 उपग्रह को 2027 में प्रक्षेपित किए जाने की उम्मीद है। 'इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया' में डीआरडीओ, इसरो और एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डॉ. नारायणन ने यह भी कहा कि भारत पहला देश है जिसने एक ही रॉकेट का उपयोग करके 100 से अधिक उपग्रहों को सफलतापूर्वक स्थापित किया है। उन्होंने कहा, ''फिलहाल हम जी20 देशों के लिए एक जी20 उपग्रह पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और हम 2027 तक इसका प्रक्षेपण करने जा रहे हैं।'' नारायणन ने कहा कि इसरो ने 34 देशों के 433 उपग्रहों सहित कई वाणिज्यिक मिशन पूरे किए गए।
उन्होंने कहा कि इसरो 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन की दिशा में काम कर रहा है।
इसरो प्रमुख ने कहा, ''अगर हम 2040 तक इसे हासिल कर लेते हैं, तो हम प्रक्षेपण तकनीक, उपग्रह तकनीक, अनुप्रयोग क्षेत्र और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के मामले में किसी भी अन्य अंतरिक्ष यात्री राष्ट्र के बराबर होंगे। हम 'विकसित भारत' की दिशा में काम कर रहे हैं।'' -
नयी दिल्ली. संसद का शनिवार को संपन्न हुआ बजट सत्र कई बातों को लेकर संसदीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया तथा इसी दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को सरकार शुक्रवार को लोकसभा की मंजूरी दिलवाने में विफल रही। सत्र के दौरान एक दुर्लभ बात उस समय भी देखने को मिली जब राष्ट्रपति अभिभाषण का धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जवाब के बिना ही पारित हो गया। हालांकि राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसी सत्र के दौरान लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध लाये अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई और निचले सदन ने बाद में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस प्रस्ताव पर चर्चा और इसे खारिज किए जाने तक बिरला ने अध्यक्ष के तौर पर सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं किया। राज्यसभा में इस सत्र के दौरान एक नया इतिहास तब दर्ज किया गया जब कोई मनोनीत सदस्य उप सभापति पद पर निर्वाचित हुआ। मनोनीत सदस्य हरिवंश को शुक्रवार को निर्विरोध उपसभापति निर्वाचित किया गया। इससे पहले भी हरिवंश लगातार दो बार उच्च सदन के उप सभापति पद पर निर्वाचित हो चुके हैं। किंतु उस दौरान वह जनता दल (यू) सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे। इसी सत्र में एक नया इतिहास यह भी बना कि सत्र का समापन होने से ठीक पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम की केवल धुन बजाये जाने के स्थान पर इसके पूरे छह अंतरों का पहले से रिकार्ड किया गया गान बजाया गया। लोकसभा में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर एकसाथ चर्चा की गयी। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पर हुए मतदान में यह पारित नहीं हो पाया। इस कारण से अन्य दो विधेयक को पारित करवाने के लिए सरकार ने रखा ही नहीं। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ था और इसका पहला चरण 13 फरवरी तक चला था। इसका दूसरा चरण नौ मार्च से शुरू हुआ और सरकार ने पहले घोषणा की थी कि यह दो अप्रैल तक चलेगा। किंतु दो अप्रैल को संसद के दोनों सदनों में घोषणा की गयी कि अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। सत्र को आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
-
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा होगा।
कैबिनेट ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त महंगाई भत्ता (डीए) और पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (डीआर) जारी करने की भी मंजूरी दी है। यह बढ़ोतरी मौजूदा 58 प्रतिशत की दर से 2 प्रतिशत ज्यादा है, जो महंगाई के असर को कम करने के लिए दी जा रही है।सरकार के अनुसार, डीए और डीआर बढ़ाने से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 6,791.24 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इस फैसले से लगभग 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 68.27 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलेगा। यह बढ़ोतरी 7वां केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किए गए फॉर्मूले के अनुसार की गई है। इस फैसले से कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी ओर प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग को लेकर भी वेतन संरचना में बड़े बदलाव की मांग तेज हो रही है।इसी बीच, नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) ने सरकार को दिए गए ज्ञापन में फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की है। अगर यह प्रस्ताव मान लिया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपए से बढ़कर करीब 69,000 रुपए तक पहुंच सकती है।फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा गुणक होता है, जिसके जरिए महंगाई और जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की सैलरी तय की जाती है। एनसी-जेसीएम ने इसके अलावा हर साल 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि, प्रमोशन पर दो इंक्रीमेंट और कम से कम 10,000 रुपए का लाभ देने जैसे सुझाव भी दिए हैं। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनर्स सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया। पीएम मोदी ने कहा कि नारी सब भूल जाती है अपना अपमान कभी नहीं भूलती। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी तब वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है उसकी सजा उन्हें जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है। जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, “कांग्रेस और उसके सहयोगी दल परिसीमन पर लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये लोग विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं क्योंकि बांटो और राज करो ये राजनीति कांग्रेस अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है और कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। “उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन सभी राज्यों की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। सब राज्यों की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है। कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, DMK जैसे दल इस भ्रूण हत्या के जिम्मेदार हैं।पीएम मोदी ने कहा, “महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है कि कांग्रेस एंटी रिफॉर्म पार्टी है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से कुछ छीनने का नहीं था, नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ न कुछ देने का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को 2029 के लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे लिए देशहित सर्वोपरि है। लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दलहित सबकुछ हो जाता है। दलहित देशहित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति को देशहित को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। इस बार भी यहीं हुआ। कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है। -
नई दिल्ली। पुणे एयरपोर्ट से विमान सेवाओं का परिचालन फिर से शुरू हो गया है। भारतीय वायु सेना के एक विमान से जुड़ी घटना के बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। भारतीय वायु सेना ने बताया कि पुणे हवाई अड्डे पर शुक्रवार रात करीब 22:25 बजे लैंडिंग के दौरान एक लड़ाकू विमान के अंडरकैरिज में खराबी आ गई और वह रनवे पर ही फंस गया। इस तकनीकी खराबी के कारण रनवे पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया और हवाई अड्डे पर विमानों का परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
भारतीय वायु सेना एटीसी के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया था कि रनवे से रुकावट हटाने और सामान्य विमान परिचालन फिर से शुरू करने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगेगा। इस घटना के बाद, रनवे कुछ समय के लिए पूरी तरह से बंद रहा। इस बीच, मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया गया और पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इसके बाद शनिवार सुबह 07:30 बजे से विमानों की रवानगी फिर से शुरू हो गई। जबकि विमानों का आगमन सुबह 08:00 बजे से शुरू हुआ।गौरतलब है कि पुणे हवाई अड्डा, जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के विमानों के संचालन का केंद्र है। महाराष्ट्र के प्रमुख विमानन केंद्रों में से एक है। रनवे की उपलब्धता में किसी भी तरह की रुकावट से आमतौर पर व्यस्त समय (पीक आवर्स) के दौरान कई विमानों के आगमन और प्रस्थान पर असर पड़ता है।गुरुवार को हुई एक अलग घटना में दिल्ली हवाई अड्डे पर स्पाइसजेट का एक विमान अकासा एयर के एक खड़े विमान से टकरा गया। इस टक्कर से दोनों विमानों को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। यह घटना दोपहर लगभग 2:15 बजे हुई। उस समय लेह से आया स्पाइसजेट का विमान अपने निर्धारित ‘बे’ (पार्किंग स्थल) की ओर बढ़ रहा था, तभी वह अकासा एयर के विमान के संपर्क में आ गया। अकासा एयर का वह विमान उस समय हैदराबाद के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था।शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, स्पाइसजेट विमान का दाहिना ‘विंगलेट’ क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि टक्कर के कारण अकासा एयर विमान के बाएं ‘हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर’ (विमान को संतुलित रखने वाला हिस्सा) को क्षति पहुंची। अकासा एयर के एक प्रवक्ता ने बताया कि दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली उसकी उड़ान (फ्लाइट क्यूपी 1406) घटना के बाद वापस अपने ‘बे’ पर लौट आया। प्रवक्ता ने कहा, “शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि अकासा का विमान उस समय स्थिर (खड़ा) था, जब किसी अन्य एयरलाइन का विमान उससे टकरा गया।” -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से जुड़े एक संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोक दिया और लोकसभा में इसे रोके जाने का ‘जश्न’ मनाया।
कल शुक्रवार को सदन में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि वे “बेहद परेशान करने वाली और शर्मनाक” थीं, और आरोप लगाया कि विपक्ष ने न सिर्फ बिल का विरोध किया, बल्कि उसे रोककर नारे भी लगाए।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, गोयल ने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन के दूसरे सहयोगी बहस करने के लिए नहीं, बल्कि बिल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए एक साथ आए थे। उन्होंने लिखा, “आज, लोकसभा में एक बेहद परेशान करने वाला और शर्मनाक नज़ारा देखने को मिला। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और ‘इंडी’ गठबंधन बहस करने के लिए नहीं, बल्कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लिए एक अहम संविधान संशोधन बिल को पास होने से रोकने के लिए एक साथ आए। एक ऐसा बिल जो महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की गारंटी देना चाहता था, उसे न सिर्फ खारिज किया गया, बल्कि हैरानी की बात यह है कि जीत के नारों के साथ उसका जश्न भी मनाया गया।”उन्होंने पोस्ट में कहा, “यह विरोध की राजनीति नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं के साथ सोच-समझकर किया गया विश्वासघात है।” विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए, गोयल ने कहा कि यह साफ नहीं था कि आखिर किस बात का जश्न मनाया जा रहा था; उन्होंने आगे कहा कि ऐसे काम पितृसत्ता का समर्थन करने और महिलाओं के अधिकारों को दबाने के बराबर हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि बिल को रोककर, विपक्ष ने महिलाओं को विधायी निकायों में उनका सही प्रतिनिधित्व देने से मना कर दिया है। गोयल ने पोस्ट में कहा कि ये घटनाएँ एक बड़े पैटर्न को दिखाती हैं, और उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर महिलाओं के सशक्तिकरण का विरोध करने और राष्ट्रीय प्रगति से ऊपर राजनीतिक हितों को रखने का आरोप लगाया।केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है। यह एक पैटर्न है।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष का रवैया न तो महिलाओं के हितों के अनुरूप था और न ही देश की आकांक्षाओं के।गोयल ने आगे कहा कि इस मुद्दे के राजनीतिक नतीजे होंगे, और जोर देकर कहा कि महिला वोटर इन घटनाओं को याद रखेंगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “उनकी सोच सबके सामने आ गई है, जो न तो महिलाओं के हितों के साथ है और न ही एक उभरते भारत की आकांक्षाओं के साथ। हमारी नारी शक्ति का यह अपमान न तो भुलाया जाएगा और न ही माफ़ किया जाएगा। यह बात दूर-दूर तक फैलेगी, हर निर्वाचन क्षेत्र, हर राज्य और हर चुनाव में इसकी गूंज सुनाई देगी। भारत की महिलाएं याद रखेंगी कि कौन उनके साथ खड़ा था और कौन उनके खिलाफ।”केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष के इन कामों की ‘राजनीतिक कीमत’ न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि अन्य चुनावी मुकाबलों में भी देखने को मिलेगी।उन्होंने कहा, “इस धोखे की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी, न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि पूरे भारत में हर चुनाव में।” -
नई दिल्ली। मनोनीत सदस्य हरिवंश लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुन लिए गए हैं। उन्हें निर्विरोध चुना गया। राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने श्री हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा। श्री हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के राज्यसभा से सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त हुए राज्यसभा के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें मनोनीत किया था।
तीसरी बार उपसभापति चुने जाने के बाद श्री हरिवंश कहा कि मतभेद और स्वस्थ बहस लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय कामकाज में व्यवधान के लिए कोई जगह नहीं है।इससे पहले, राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री हरिवंश को तीसरी बार उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। श्री मोदी ने कहा कि उनकी बुद्धिमत्ता ने सदन के वातावरण को अधिक परिपक्व और रचनात्मक बनाने में योगदान दिया है।राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी श्री हरिवंश को बधाई दी। हालांकि श्री खरगे ने चिंता व्यक्त की कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद वर्ष 2019 से रिक्त है।राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि श्री हरिवंश का राज्यसभा के उपसभापति के रूप में एक बार फिर निर्विरोध निर्वाचित होना संतोष की बात है। श्री नड्डा ने कहा कि उनके नेतृत्व में सदन की कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है। सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। -
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान में परिसीमन के प्रावधान किए गए हैं और इससे प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का तर्कसंगत वितरण होगा। उन्होंने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की संख्या में वृद्धि होगी। जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की संख्या में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। श्री शाह लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न हों।
इन विधेयकों का उद्देश्य नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को लागू करना है। 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाने वाला संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम लागू हुआ। इस कानून के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं।विपक्षी गठबंधन की आलोचना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण के संवैधानिक संशोधन का किसी ने विरोध नहीं किया, लेकिन विपक्ष के सभी सदस्यों ने खुलकर महिला आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही 1971 में परिसीमन प्रक्रिया को सीमित किया था और अब वही इसका विरोध कर रही है। -
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की कथित दोहरी (ब्रिटिश) नागरिकता से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अहम आदेश जारी करते हुए रायबरेली के कोतवाली थाना पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस को पूरे मामले की जांच करने को कहा गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने पारित किया। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। मामले के याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे “ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है और यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा व जनहित से जुड़ा है। विग्नेश शिशिर ने दावा किया कि अदालत के समक्ष ऐसे दस्तावेज पेश किए गए, जिनमें कथित तौर पर ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े तथ्य शामिल हैं। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। याचिकाकर्ता के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत से मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आग्रह किया था, जिस पर अदालत ने जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी। विग्नेश शिशिर ने कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाते समय उन्हें सुरक्षा से जुड़े खतरे महसूस हो रहे हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय से अपनी सुरक्षा बढ़ाने और सीआरपीएफ के माध्यम से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने देशवासियों और समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना इस मामले को आगे बढ़ाना संभव नहीं होता। साथ ही उन्होंने आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भी समर्थन की अपेक्षा जताई।
-
नई दिल्ली। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण मंजूरी नहीं मिल सकी। विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े। संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 के सदन में खारिज होने के कारण परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 सहित अन्य दो विधेयकों को पारित करने के लिए पेश नहीं किया गया।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार लोकसभा और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। वे लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ संपन्न हों।उन्होंने कहा कि देश को उत्तर-दक्षिण के आधार पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लक्षद्वीप जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश को भी उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार के समान अधिकार प्राप्त हैं।विपक्षी गठबंधन की आलोचना करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए संवैधानिक संशोधन का किसी ने विरोध नहीं किया, लेकिन विपक्ष के सभी सदस्यों ने स्पष्ट रूप से महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही 1972 में परिसीमन प्रक्रिया को बाधित किया था और अब वही इसका विरोध कर रही है। श्री शाह ने स्पष्ट किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को मान्यता नहीं देता है।लोकसभा और विधानसभा में एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से लाया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 आज सदन में पारित नहीं हो सका। लोकसभा में उपस्थित कुल 489 सदस्यों में से विधेयक को दो तिहाई बहुमत 326 सांसदों का समर्थन नहीं मिल सका। विधेयक पर मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान के परिणाम घोषित करते हुए कहा कि इस विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक बहुमत प्राप्त नहीं होने के कारण इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 सहित अन्य दो विधेयक संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन दोनों विधेयकों को पारित करने के लिए पेश नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने का ऐतिहासिक अवसर गवां दिया है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति भवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि 18 अप्रैल को रक्षकों की अदला-बदली का समारोह नहीं होगा। यह समारोह एक सैन्य परंपरा है, जो हर हफ्ते आयोजित की जाती है, ताकि राष्ट्रपति के अंगरक्षकों का एक नया समूह कार्यभार संभाल सके। एक बयान में कहा गया, ''कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति की आगामी राजकीय यात्रा के संबंध में आयोजित होने वाले औपचारिक स्वागत समारोह के पूर्वाभ्यास के कारण 18 अप्रैल को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में रक्षकों की अदला-बदली का कार्यक्रम नहीं होगा।'' दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग रविवार से भारत की तीन-दिवसीय यात्रा पर आने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य बढ़ते भूराजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर व्यापार, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।
-
नई दिल्ली। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा लगाए गए वीटो के मुद्दे पर भारत ने किसी भी पक्ष का समर्थन करने से परहेज करते हुए तटस्थ रुख अपनाया है।
गुरुवार को जनरल असेंबली की मीटिंग में वीटो पर बोलते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने इस मुद्दे पर कहा, “हमने सभी देशों से बातचीत और डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने और तनाव कम करने और असल मुद्दों को सुलझाने की अपील की है।” उन्होंने कहा, “हमने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की भी अपील की है।”यह मीटिंग असेंबली के एक प्रोसेस के तहत बुलाई गई थी, जिसके तहत जो स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव पर वीटो करते हैं, उन्हें दस दिनों के अंदर अपने कामों के बारे में बताने के लिए उसके सामने पेश होना होता है।7 अप्रैल को रूस और चीन ने काउंसिल के चुने हुए सदस्य बहरीन के पेश किए गए प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया। इस प्रस्ताव में ईरान से कमर्शियल शिपिंग पर हमले रोकने और नेविगेशन की आजादी में रुकावट न डालने की मांग की गई थी।रूस और चीन ने असेंबली में अपने वीटो का बचाव किया, जबकि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों ने कई दूसरे देशों के साथ मिलकर वीटो की आलोचना की। अपने छोटे, 90-सेकंड, 198-शब्दों के बयान में, हरीश दोनों पक्षों से दूर रहे, लेकिन स्ट्रेट में नेविगेशन की आजादी पर भारत की स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा, “भारत के लिए अपनी एनर्जी और आर्थिक सुरक्षा के लिए खास चिंता की बात होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल शिपिंग है।” यह स्ट्रेट दुनिया भर के तेल ट्रैफिक के 20 फीसदी के लिए चोकपॉइंट है और इसके रुकने से भारत पर असर पड़ा है।उन्होंने आगे कहा, “भारत इस बात पर दुख जताता है कि इस लड़ाई में कमर्शियल शिपिंग को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया। इस लड़ाई के दौरान जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की कीमती जानें गईं।” उन्होंने कहा, “हम फिर से कहते हैं कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और बेकसूर सिविलियन क्रू मेंबर्स को खतरे में डालना या होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालना मंजूर नहीं है। इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए।”28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट में जहाजों पर हमला किया, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरानी पोर्ट्स पर नेवल ब्लॉकेड लगा दिया। भारत ने वीटो को लेकर भले ही तटस्थ रुख अपनाया हो, लेकिन उसने 11 मार्च को बहरीन द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनने का फैसला किया था, जिसमें ईरान के मध्य पूर्व के पड़ोसी देशों पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 13-0 मतों से पारित किया गया, जबकि रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लेते हुए इसे बिना वीटो के पास होने दिया।पिछले हफ्ते प्रस्ताव पर वीटो को लेकर रूस की उपस्थायी प्रतिनिधि एना एम इवेस्टिग्नीवा ने कहा कि यह एकतरफा था और इसने इजरायल और अमेरिका की उन कार्रवाइयों को अनदेखा कर दिया जिनकी वजह से लड़ाई शुरू हुई। उन्होंने कहा कि इससे लड़ाई जारी रखने और उसे बढ़ाने के लिए बिना शर्त मंजूरी मिल जाती है। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कांग ने कहा कि बीजिंग बहरीन और खाड़ी देशों की बड़ी चिंताओं को समझता है, लेकिन उसने प्रस्ताव पर वीटो इसलिए किया क्योंकि इससे अनऑथराइज्ड सैन्य ऑपरेशन को सही साबित करने का दिखावा होता।खाड़ी देशों और जॉर्डन की तरफ से बोलने वाले कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि तारिक एम. ए. एम. अल्बनई ने उस प्रस्ताव पर वीटो लगाने की आलोचना की, जो “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक साफ और सीधे खतरे से जुड़ा था।” उन्होंने कहा कि खाड़ी देश आम सहमति के लिए बड़े पैमाने पर बातचीत के आधार पर एक और प्रस्ताव पेश करेंगे। अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि चीन और रूस ने जानबूझकर आंखें बंद कर ली और इससे भी बुरा, ईरान की ओर से अपने पड़ोसियों पर हमलों, अपने ही लोगों के खिलाफ उसके आतंक और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके जानलेवा कब्जे को रोकने की कोशिश को होने दिया। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह फर्टिलाइजर समेत जरूरी शिपमेंट को बुआई के मौसम में दक्षिण एशिया पहुंचने से रोककर खाद्य संकट पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह साफ है कि किसने जिम्मेदारी के बजाय रुकावट को चुना।” -
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अवैध रसायनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आम, केला और पपीता जैसे फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय निदेशकों को फल मंडियों, गोदामों और भंडारण स्थलों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
खासतौर पर ‘मसाला’ नाम से प्रचलित कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर नजर रखने को कहा गया है, जिसका उपयोग व्यापारी फलों को जल्दी पकाने के लिए करते हैं।प्राधिकरण ने कहा कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (प्रतिबंध और बिक्री पर रोक) विनियम, 2011 के तहत कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग पूरी तरह गैरकानूनी है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है और इससे निगलने में दिक्कत, उल्टी, त्वचा पर घाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसके अलावा, FSSAI ने एथिफोन (ethephon) के गलत इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। हालांकि एथिलीन गैस को सुरक्षित तरीके से सीमित उपयोग की अनुमति है, लेकिन फलों को सीधे रासायनिक घोल में डुबोना नियमों का उल्लंघन है।नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए FSSAI ने थोक बाजारों और वितरण केंद्रों में विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी स्थान पर प्रतिबंधित रसायन पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत कानूनी कार्रवाई का आधार माना जाएगा।प्राधिकरण ने यह भी कहा कि यदि फल के साथ कैल्शियम कार्बाइड पाया जाता है, तो इसे सबूत मानते हुए संबंधित कारोबारियों के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।जांच के दौरान अधिकारी स्ट्रिप पेपर टेस्ट के जरिए एसीटिलीन गैस की मौजूदगी का पता लगा सकेंगे। साथ ही, ताजे फलों पर अवैध रूप से वैक्स या सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल पर भी सख्ती बरती जाएगी। FSSAI का यह कदम उपभोक्ताओं की सेहत को सुरक्षित रखने और बाजार में सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में अहम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज शुक्रवार को एक बार फिर देश की माता-बहन और बेटियों का स्मरण करते हुए उनसे आशीर्वाद बरसाने की कृपा की। इस संबंध में पीएम मोदी ने एक्स पर साझा सुभाषितम् में कहा, ”हमारी नारी शक्ति एक सशक्त भारत की पहचान है। आज देश की माताएं, बहनें और बेटियां अपने अटूट संकल्प, निष्ठा और सेवा-भाव से हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं।”
दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ अध्याय शाकम्भरी स्तुति का श्लोक का किया जिक्रउन्होंने श्री दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ अध्याय (शाकम्भरी स्तुति) के श्लोक ”देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्ति समूहमूत्र्या।तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न:॥” का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी ही शक्ति से इस ब्रह्मांड की रचना की। वह समस्त देवताओं की शक्तियों के सामूहिक स्वरूप के रूप में अवतरित हुईं हैं।पीएम मोदी ने लिखा- ‘मां की आराधना सभी देवता और महान ऋषि समान रूप से करते हैं’प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, ”मां की आराधना सभी देवता और महान ऋषि समान रूप से करते हैं और उनके समक्ष हम श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे देवी हम पर अपना मंगल आशीर्वाद बरसाएं।” उल्लेखनीय है यह श्लोक देवी के सर्वव्यापी, शक्ति स्वरूपा रूप की स्तुति करता है। इसकी स्तुति से ज्ञान, बल और शक्ति प्रदान होती है। -
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती के अवसर पर देशभर के नेताओं ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें एक सच्चा जननेता बताया, जो अपने साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा के लिए जाने जाते थे।
पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। इस वर्ष उनकी 100वीं जयंती वर्ष की शुरुआत हो रही है और यह एक समृद्ध एवं न्यायपूर्ण भारत के उनके स्वप्न को साकार करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।”उन्होंने कहा, “चंद्रशेखर जी को एक ऐसे जननेता के रूप में याद किया जाता है, जो साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा से परिपूर्ण थे। भारत की माटी से गहराई से जुड़े हुए और आम नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सादगी और स्पष्टता का संचार किया।”उन्होंने आगे कहा, “मुझे वे अवसर भली-भांति याद हैं, जब मुझे उनसे मिलने और हमारे राष्ट्र के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मैं भारत के युवाओं से आह्वान करता हूं कि वे भारत की प्रगति की दिशा में उनके विचारों और प्रयासों के बारे में अधिक से अधिक पढ़ें।”इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी उन्हें याद करते हुए विनम्र अभिवादन किया। उन्होंने अपने संदेश में चंद्रशेखर के योगदान को नमन किया। वहीं, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें एक लोकप्रिय राजनेता और प्रखर वक्ता बताया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “लोकप्रिय राजनेता, प्रखर वक्ता, पूर्व प्रधानमंत्री, श्रद्धेय चंद्रशेखर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों एवं वंचितों के समग्र उत्थान हेतु समर्पित आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा, “जनसंघर्षों से निकले प्रखर समाजवादी नेता, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। स्पष्टवादी व्यक्तित्व, सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली आपकी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।” -
नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार आज का दिन बेहद खास है क्योंकि आज वैशाख अमावस्या है। वैशाख अमावस्या के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व होता है। माना जाता है कि आज के दिन मिट्टी का मटका पानी से भरकर दान करने से 100 गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। वैशाख अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के संगम पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए हैं और तीर्थयात्री संगम में पवित्र स्नान कर रहे हैं।
संगम के तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रात: काल से ही स्नान कर रही है। तटों पर पितरों को शांति प्रदान करने के लिए पूजा-पाठ का आयोजन भी हो रहा है। संगम किनारे बैठे एक पुजारी ने बताया कि वैशाख अमावस्या सिर्फ खुद के कल्याण का जरिया नहीं है, बल्कि इस दिन पितरों की शांति और पिंडदान जैसे कार्यों का भी महत्व है। वैशाख महीने में जो एक बार भोजन करते हैं, वो निरोगी और भगवान के प्रिय हो जाते हैं और उनकी हर मुराद पूरी होती है। इसके साथ ही वैशाख के महीने में ब्राह्मण को दिया दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ब्राह्मणों को माला, कपड़े और गौ दान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन सुखमय होता है।स्नान करने पहुंचे श्रद्धालु ने बताया कि पुराणों में वैशाख के महीने में गंगा स्नान और दान का बहुत महत्व बताया गया है, जो अपने परिवार और घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ गंगा स्नान करता है, उसे आजीवन जन्म और मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। हम पूरे परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए आए हैं।श्रद्धालु ने आगे बताया, “हम अपने पूर्वजों की शांति के लिए गंगा स्नान के लिए आए हैं। उनके नाम से ही दान किया जाएगा। सुबह से ही गंगा नदी के किनारे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा हैं और लोग दूर-दूर से गंगा स्नान के लिए आ रहे हैं। घाटों पर पितृ पूजा भी करवा सकते हैं और आज का दिन पिंडदान के लिए बहुत शुभ है।” -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। राज्यसभा में सदन की कार्रवाई प्रारंभ होने के कुछ देर बाद ही राज्यसभा में नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। शपथ लेने वालों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, असम से प्रमोद बोरो व बिहार से उपेंद्र कुशवाहा शामिल रहे।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का बतौर सांसद यह पहला कार्यकाल है। वह बिहार से राज्यसभा के सांसद चुने गए हैं। बिहार से ही भाजपा के शिवेश कुमार ने भी राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ ली। बिहार से निर्वाचित जनता दल यूनाइटेड के रामनाथ ठाकुर ने भी सांसद के तौर पर शपथ ली। असम से भाजपा के तेराश गोवाला, जोगेन मोहन, यूपीपी (एल) के प्रमोद बोरो ने शपथ ली। हरियाणा से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध ने राज्यसभा सदस्य की शपथ ली।इसके अलावा, तेलंगाना से कांग्रेस के वेम नरेंद्र रेड्डी और अभिषेक मनु सिंघवी और हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के अनुराग शर्मा ने राज्यसभा की शपथ ली। महाराष्ट्र से भाजपा के विनोद तावड़े, ओडिशा से भाजपा के सुजीत कुमार, छत्तीसगढ़ से भाजपा की लक्ष्मी वर्मा व कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम ने शपथ ली। गौरतलब है कि गुरुवार को संसद में देश की महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन का उल्लेख किया गया। सांसदों ने पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई के निधन पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की।राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को बताया कि विख्यात गायिका आशा भोसले ने अपने आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और भारतीय संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाई। उन्हें पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। आशा भोसले का 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था।सदन को यह भी बताया गया कि मोहसिना किदवई का 8 अप्रैल 2026 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह राज्यसभा की सदस्य रहीं और छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने राज्यसभा में दो कार्यकाल पूरे किए। उनका जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हुआ था। करीब छह दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों में सेवा दी। वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहीं और केंद्र सरकार में भी कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उनके निधन को देश ने एक अनुभवी जननेता, कुशल प्रशासक और प्रतिष्ठित सांसद की क्षति बताया। सदन ने दोनों महान हस्तियों के निधन को देश की अपूरणीय क्षति बताया। अंत में सभी सदस्यों ने खड़े होकर दिवंगत आत्माओं की स्मृति में मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति की ओर से नामित हरिवंश नारायण सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय में उपसभापति पद के लिए नामांकन किया। वे जनता दल(यू) से सदन में दो बार निर्वाचित एवं दोनों बार राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं।
राज्यसभा में शुक्रवार को उपसभापति का निर्वाचन होगा। विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर आपत्ति जाहिर करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसका अर्थ है कि बिना विरोध हरिवंश फिर से उपसभापति बन जायेंगे।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट में कहा कि विपक्ष ने शुक्रवार को निर्वाचन प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है। हालांकि इसके पीछे हरिवंश का निरादर करने का कोई ईरादा नहीं है। विपक्ष को उम्मीद है कि हरिवंश अपने तीसरे कार्यकाल में विपक्ष के अनुरोधों के प्रति अधिक सहिष्णु और ग्रहणशील होंगे।जयराम रमेश ने तीन आपत्तियां जताई है। उनका कहना है कि 7 सालों से लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली है। राज्यसभा में राष्ट्रपति की ओर से मनोनीत किसी व्यक्ति को इससे पहले कभी भी उपसभापति पद के लिए विचार नहीं किया गया है। वहीं, उन्हें तीसरी बार मौका देते समय विपक्ष से विचार भी नहीं किया गया।पिछले माह राष्ट्रपति ने हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित किया था। हरिवंश नारायण सिंह का 9 अप्रैल को उपसभापति के तौर पर कार्यकाल समाप्त हो गया। तब से यह पद खाली है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति सदन का संचालन करते हैं।










.jpg)

.jpg)




.jpg)

.jpg)
.jpg)







.jpg)