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- मुंबई । बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) के चेयरमैन गौतम अदाणी और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश अदाणी को SFIO केस से बरी कर दिया। इस मामले में उन पर AEL के शेयर प्राइस में हेरफेर का आरोप था।Bar and Bench की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस राजेश एन लाढ़ा ने सेशंस कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें अदाणी और AEL को मामले से मुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। इस केस में ₹388 करोड़ के मार्केट रेगुलेशन वॉयलेशन के आरोप थे।अदाणी ग्रुप और AEL ने सेशंस कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके पक्ष में सीनियर एडवोकेट अमित देसाई और विक्रम ननकानी ने दलील दी कि इस मामले में आगे की कार्यवाही का कोई आधार नहीं है।2012 में SFIO द्वारा दायर चार्जशीट में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) और अदाणी ग्रुप पर स्टॉकब्रोकर केतन पारेख के साथ मिलकर शेयर प्राइस मैनिपुलेशन का आरोप लगाया गया था। यह मामला भारत के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट घोटाले (1999-2000) से जुड़ा है।2014 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अदाणी ग्रुप और AEL को आरोपों से बरी कर दिया था। हालांकि, नवंबर 2019 में मुंबई की सेशंस कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने SFIO की जांच को प्राइमा फेसी” (prima facie) सही मानते हुए कहा कि अदाणी ग्रुप के प्रमोटर्स ने कथित रूप से ₹388.11 करोड़ और केतन पारेख ने ₹151.40 करोड़ का अवैध लाभ कमाया था।मुंबई सेशंस कोर्ट के जज D E Kothalikar ने पहले अदाणी ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार माना था। इसके बाद, दिसंबर 2019 में हाई कोर्ट ने सेशंस कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसे बार-बार बढ़ाया गया और आखिरकार सोमवार को अंतिम फैसला सुनाया गया।फरवरी 2023 में, हाई कोर्ट ने SFIO (Serious Fraud Investigation Office) से देरी को लेकर सवाल किया। SFIO, जो कि केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आता है, को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने पूछा कि 10 फरवरी 2022 के बाद से कोई सुनवाई क्यों नहीं हुई, जब अंतरिम रोक बढ़ाई गई थी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले में कोई कार्रवाई न करने का कारण “बाहरी परिस्थितियां” हैं।गौरतलब है कि इसी दौरान, अदाणी ग्रुप अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के चलते विवादों में था। रिपोर्ट में अदाणी ग्रुप पर “स्टॉक मैनिपुलेशन और अकाउंटिंग फ्रॉड” का आरोप लगाया गया था, जिससे ग्रुप की साख पर सवाल उठे थे।
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- यह हैकथॉन स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों, स्टार्टअप्स और पेशेवरों के लिए
नई दिल्ली। ,दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने 5जी इनोवेशन हैकाथॉन 2025 की घोषणा की है। यह छह महीने तक चलेगा जिसका उद्देश्य सामाजिक और औद्योगिक चुनौतियों के समाधान के लिए अभिनव 5जी-संचालित समाधानों के विकास में तेजी लाना है। छात्रों, स्टार्टअप और पेशेवरों के लिए आयोजित यह कार्यक्रम मेंटरशिप, फंडिंग और 100 से अधिक 5जी यूज केस लैब्स तक पहुंच प्रदान करता है जिससे प्रतिभागियों को दूरदर्शी विचारों को तकनीक में बदलने में मदद मिलती है।यह हैकथॉन एआई-संचालित नेटवर्क के रखरखाव, आईओटी-सक्षम समाधान, 5जी प्रसारण, स्मार्ट स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक स्वचालन, गैर-स्थलीय नेटवर्क, डी2एम, वी2एक्स और क्वांटम संचार जैसे प्रमुख 5जी अनुप्रयोगों पर केंद्रित प्रस्ताव आमंत्रित करता है। प्रतिभागियों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग, सेवा की गुणवत्ता और कॉल-फ्लो परिदृश्यों जैसी 5जी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हैकथॉन प्रतिभागियों को अपने नवाचारों को अगले स्तर तक ले जाने में मदद करने के लिए कई तरह की सहायता प्रदान करता है। प्रतिभागियों को अपनी आईपी संपत्तियों के व्यवसायीकरण के लिए आईपीआर फाइलिंग में सहायता मिलेगी।कार्यक्रम संरचना एवं समय सीमायह हैकाथॉन कई चरणों में होगा। प्रत्येक चरण को प्रस्ताव प्रस्तुत करने से लेकर अंतिम मूल्यांकन तक विचारों को पोषित करने और विकसित करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। पहला चरण प्रस्ताव प्रस्तुत करना है जिसके तहत प्रतिभागियों को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाता है, जिसमें उनकी समस्या का विवरण, प्रस्तावित समाधान और अपेक्षित प्रभाव की रूपरेखा होती है। प्रत्येक संस्थान को दूरसंचार विभाग के स्क्रीनिंग के लिए पांच प्रस्तावों की सिफारिश करने का अवसर मिलेगा और क्षेत्रीय समितियां आगे के मूल्यांकन के लिए सर्वोत्तम प्रविष्टियों का चयन करेंगी।1 लाख रुपए की शुरुआती राशि की जाएगी प्रदानएक बार प्रस्तावों को शॉर्टलिस्ट कर लिया जाता है, तो क्षेत्रीय शॉर्टलिस्टिंग चरण में चयनित टीमों (150-200 प्रस्ताव) को अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त होगा। शीर्ष 25-50 टीमें प्रगति चरण में आगे बढ़ेंगी जहां उन्हें तीन महीने की अवधि (15 जून-15 सितंबर, 2025) में अपने प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए प्रत्येक को 1,00,000 रुपए की शुरुआती राशि प्रदान की जाएगी। इस चरण के दौरान प्रतिभागियों को सलाह, 5जी यूज केस लैब्स तक पहुंच और अपने विचारों को परिष्कृत करने के लिए परीक्षण बुनियादी ढांचे से लाभ होगा। यदि किसी भी समाधान को आईपीआर में परिवर्तित किया जा सकता है तो आईपीआर फाइलिंग के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी।विजेताओं की घोषणा अक्टूबर 2025 में की जाएगीअंतिम चरण मूल्यांकन और प्रदर्शन- सितंबर 2025 के अंत में होगा जहां टीमें अपने प्रोटोटाइप को तकनीकी विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। इस समिति में सरकार, शिक्षा और उद्योग जगत के 5-7 विशेषज्ञ शामिल होंगे। मूल्यांकन चार प्रमुख मानदंडों पर आधारित होगा: तकनीकी निष्पादन (40 प्रतिशत) , मापनीयता और बाजार तत्परता (40 प्रतिशत), सामाजिक और औद्योगिक प्रभाव (10 प्रतिशत) और नवीनता (10 प्रतिशत)। विजेताओं की घोषणा अक्टूबर 2025 में की जाएगी। शीर्ष टीमें देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी आयोजन- इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2025 में अपने नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी।पुरस्कार और मान्यताविजेताओं को प्रथम स्थान के लिए 5,00,000 रुपए, उपविजेता के लिए 3,00,000 रुपए और दूसरे स्थान के लिए 1,50,000 रुपए मिलेंगे। इसके साथ ही सर्वश्रेष्ठ विचार और सबसे नवीन प्रोटोटाइप को 50,000-50,000 रुपए मिलेंगे। 10 प्रयोगशालाओं को सर्वश्रेष्ठ 5जी यूज़ केस लैब्स के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र और सर्वश्रेष्ठ विचार के लिए एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।इस कार्यक्रम का बजट 1.5 करोड़ रुपए है जिसमें शुरुआती राशि, आईपीआर सहायता, मेंटरशिप और परिचालन लागत शामिल है। इसका उद्देश्य 50 से अधिक स्केलेबल 5जी प्रोटोटाइप विकसित करना, 25 से अधिक पेटेंट तैयार करना, शिक्षा, उद्योग जगत और सरकार के बीच सहयोग को मजबूत करना और स्टार्टअप के लिए सहायता प्रदान करना है। 15 मार्च से 15 अप्रैल 2025 तक प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे, 01 अक्टूबर 2025 को अंतिम विजेताओं की घोषणा की जाएगी और हर दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट और एक केंद्रीकृत ट्रैकिंग डैशबोर्ड के माध्यम से कार्यक्रम के लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा।5जी इनोवेशन हैकाथॉन 2025 को सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देकर 5जी तकनीक की परिवर्तनकारी क्षमता के उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्रयोगशाला अनुसंधान और बाजार-तैयार समाधानों को जोड़ने के लक्ष्य के साथ आयोजित यह हैकाथॉन, 5जी नवाचार में अग्रणी होने के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। - नयी दिल्ली ।अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर पर निर्णय, वैश्विक रुझान, शुल्क से संबंधित घटनाक्रम और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियां इस सप्ताह स्थानीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। वृहद आर्थिक आंकड़ों की घोषणा के बीच फरवरी के लिए थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े सोमवार को आएंगे। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘वैश्विक व्यापार को लेकर लगातार अनिश्चितताएं और अमेरिका में मंदी की आशंका स्थानीय बाजार की रफ्तार को प्रभावित कर रही है। यह रुख जारी रहेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हालिया ‘करेक्शन' के बाद मूल्यांकन में कमी, साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, डॉलर सूचकांक में नरमी और आने वाली तिमाहियों में घरेलू कंपनियों की आमदनी में उछाल की उम्मीद जैसे कारक बाजार के उतार-चढ़ाव पर कुछ अंकुश लगा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा व्यापार को लेकर अनिश्चितताएं बरकरार हैं।'' नायर ने कहा, ‘‘इस सप्ताह चीन के खुदरा बिक्री और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े वहां की आर्थिक वृद्धि दर को लेकर स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे।'' उन्होंने कहा कि इसके अलावा निवेशकों की निगाह अमेरिकी के खुदरा बिक्री और उत्पादन के आंकड़ों पर भी रहेगी। साथ ही सप्ताह के दौरान बैंक ऑफ इंग्लैंड भी ब्याज दर को लेकर निर्णय की घोषणा करेगा। इसपर भी सभी की निगाह रहेगी। पिछले सप्ताह वैश्विक व्यापार को लेकर तनाव बढ़ने और अमेरिका में मंदी की आशंका से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख- शोध, संपदा प्रबंधन सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘इस सप्ताह, हमारा अनुमान है कि कि बाजार कुछ उतार-चढ़ाव के साथ सीमित दायरे में रहेगा। बाजार की दिशा वैश्विक रुख और अमेरिकी शुल्क नीतियों से तय होगी।'' पिछले सप्ताह छुट्टियों के कारण कम कारोबारी सत्रों के दौरान बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में 503.67 अंक या 0.67 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 155.21 अंक या 0.68 प्रतिशत के नुकसान में रहा। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) प्रशांत तापसे ने कहा, ‘‘निवेशक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क लगाए जाने की आशंका और इसके कुल प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में कुछ और समय तक नकारात्मक रुख बने रहने की संभावना हैं।''
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नयी दिल्ली,। स्थानीय शेयर बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से पांच कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में पिछले सप्ताह सामूहिक रूप से 93,357.52 करोड़ रुपये की गिरावट आई। सबसे अधिक नुकसान सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को हुआ। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 503.67 अंक या 0.68 प्रतिशत नीचे आया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में 155.3 अंक या 0.69 प्रतिशत का नुकसान रहा। होली के अवसर पर शुक्रवार को शेयर बाजार बंद थे। समीक्षाधीन सप्ताह में इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार मूल्यांकन में गिरावट आई। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण चढ़ गया। इन पांच कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में सामूहिक रूप से 49,833.62 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। समीक्षाधीन सप्ताह में इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण 44,226.62 करोड़ रुपये घटकर 6,55,820.48 करोड़ रुपये रह गया। टीसीएस का मूल्यांकन 35,800.98 करोड़ रुपये घटकर 12,70,798.97 करोड़ रुपये पर आ गया। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में यह खिसक कर तीसरे स्थान पर आ गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत 6,567.11 करोड़ रुपये घटकर 5,11,235.81 करोड़ रुपये रह गई। एसबीआई का मूल्यांकन 4,462.31 करोड़ रुपये घटकर 6,49,489.22 करोड़ रुपये रह गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मूल्यांकन में 2,300.50 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह घटकर 16,88,028.20 करोड़ रुपये पर आ गया। इस रुख के उलट आईसीआईसीआई बैंक की बाजार हैसियत 25,459.16 करोड़ रुपये बढ़कर 8,83,202.19 करोड़ रुपये हो गई। एचडीएफसी बैंक का बाजार मूल्यांकन 12,591.60 करोड़ रुपये बढ़कर 13,05,169.99 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 10,073.34 करोड़ रुपये बढ़कर 5,15,366.68 करोड़ रुपये हो गया। बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 911.22 करोड़ रुपये बढ़कर 5,21,892.47 करोड़ रुपये पर और भारती एयरटेल का 798.30 करोड़ रुपये के उछाल के साथ 9,31,068.27 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। उसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस, भारतीय स्टेट बैंक, बजाज फाइनेंस, आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने शनिवार को एक बयान जारी कर हाल ही में इंडसइंड बैंक लिमिटेड को लेकर चल रही अटकलों पर सफाई दी। RBI ने दोहराया कि यह बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत (well-capitalised) और वित्तीय रूप से स्थिर है। यह स्पष्टीकरण बैंक से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के चलते पैदा हुई चिंताओं के बीच आया है।
RBI के अनुसार, इंडसइंड बैंक का कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो (CAR) 16.46 प्रतिशत था, जबकि प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR) 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त तिमाही के लिए 70.20 प्रतिशत था। इसके अलावा, लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 9 मार्च, 2025 तक 113 प्रतिशत था, जो रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट 100 प्रतिशत से काफी ऊपर है।RBI ने अपने प्रेस रिलीज में कहा, “बैंक के ऑडिटर द्वारा समीक्षित वित्तीय परिणामों (auditor-reviewed financial results) के अनुसार, 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त तिमाही के लिए बैंक ने 16.46 प्रतिशत का आरामदायक कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो और 70.20 प्रतिशत का प्रोविजन कवरेज रेशियो बनाए रखा है। बैंक का लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 9 मार्च, 2025 तक 113 प्रतिशत था, जबकि रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट 100 प्रतिशत है।”सभी जरूरी कदम उठाए बैंक: RBIकेंद्रीय बैंक ने यह भी पुष्टि की कि इंडसइंड बैंक ने अपनी इंटरनल सिस्टम की जांच और किसी भी वित्तीय प्रभाव को समझने के लिए एक बाहरी ऑडिट टीम को पहले ही नियुक्त कर लिया है। RBI ने बैंक के बोर्ड और मैनेजमेंट को निर्देश दिया है कि वे Q4FY25 के भीतर सभी जरूरी सुधार कदम पूरे करें और स्टेकहोल्डर्स के लिए पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करें।RBI ने कहा, “सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध खुलासों के आधार पर, बैंक ने अपनी मौजूदा प्रणालियों की समीक्षा और वास्तविक प्रभाव को जल्द से जल्द समझने व हिसाब करने के लिए एक बाहरी ऑडिट टीम को पहले ही नियुक्त कर लिया है।”इसमें आगे कहा गया, “बोर्ड और प्रबंधन को रिजर्व बैंक ने निर्देश दिया है कि सभी स्टेकहोल्डर्स को आवश्यक खुलासे करने के बाद, वर्तमान तिमाही यानी Q4FY25 के दौरान सुधारात्मक कदम पूरी तरह से पूरे किए जाएं।”RBI ने जमाकर्ताओं को आश्वासन दिया कि अटकलों भरे रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि बैंक की वित्तीय सेहत स्थिर है और यह नियामक की करीबी निगरानी में है।केंद्रीय बैंक का जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने का एक अच्छा रिकॉर्ड है। उसने पहले भी वित्तीय चुनौतियों जैसे YES बैंक, RBL बैंक, और ग्लोबल ट्रस्ट बैंक के पतन में हस्तक्षेप किया है। यहां तक कि PMC बैंक (2019) जैसे लंबे संकटों में भी, RBI ने जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि, इंडसइंड बैंक की स्थिति अलग है, क्योंकि नए फाइनेंशियल डेटा से पुष्टि होती है कि कोई संकट नहीं है। -
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक को सेंट्रल बैंकिंग लंदन द्वारा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया है। आरबीआई को ‘प्रवाह’ और ‘सारथी’ डिजिटल पहल के लिए चुना गया है। इससे केंद्रीय बैंक में पेपर का इस्तेमाल कम हुआ है।
आरबीआई ने अपने एक्स हैंडल पर घोषणा की कि केंद्रीय बैंक को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवॉर्ड 2025 के लिए चुना गया है। केंद्रीय बैंक ने पोस्ट में लिखा, “आरबीआई को इन-हाउस डेवलपर टीम द्वारा डेवलप किए गए ‘प्रवाह’ और ‘सारथी’ सिस्टम सहित अपनी पहलों के लिए सम्मानित और मान्यता दी गई है। पुरस्कार समिति ने इस बात पर गौर किया कि दोनों डिजिटल पहलों ने पेपर-बेस्ड सबमिशन के इस्तेमाल को कम किया है, जिससे आरबीआई की आंतरिक और बाहरी प्रक्रियाओं में बदलाव आया है।”सेंट्रल बैंकिंग ने एक प्रेस बयान में कहा कि ये दोनों पहल इस काम के लिए महत्वपूर्ण रही हैं। सारथी पहल के साथ आरबीआई के सभी इंटरनल वर्कफ्लो डिजिटल हो गए हैं। जनवरी 2023 में लाइव होने वाली इस पहल के साथ कर्मचारियों को डॉक्यूमेंट्स को सुरक्षित रूप से स्टोर और शेयर करने की सुविधा मिली। साथ ही रिकॉर्ड मैनेजमेंट में भी सुधार हुआ। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का दूसरा चरण मई 2024 में ‘प्रवाह’ के रूप में शुरू किया गया, जिसने एक्सटर्नल यूजर्स के लिए आरबीआई को विनियामक आवेदन प्रस्तुत करने के लिए एक डिजिटल माध्यम बनाया।प्रवाह पोर्टल के जरिए सबमिट और प्रोसेस्ड डॉक्यूमेंट्स को फिर सारथी डेटाबेस में प्लग किया जाता है, जहां उन्हें सेंट्रलाइज्ड साइबर सिक्योरिटी सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग के साथ आरबीआई के ऑफिस में डिजिटल रूप से संभाला जा सकता है।सारथी को सफलतापूर्वक अपनाना आंशिक रूप से आवश्यक समर्थन संरचनाओं को स्थापित करने में टीम के काम के कारण है।आईटी टीम ने सिस्टम बनाने से पहले कर्मचारियों की जरूरतों को समझने के लिए उनके साथ एक लंबी सहयोगी प्रक्रिया में भाग लिया और अपग्रेड को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक विभाग से वरिष्ठ ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किए।ऑनलाइन सारथी पाठशाला (‘स्कूल’) यूजर्स को सिस्टम से परिचित होने में मदद करती है और पाठशाला को इन-पर्सन ट्रेनिंग के साथ शुरू किया गया था। इसके अलावा, सारथी मित्र (‘मित्र’) प्रत्येक आरबीआई ऑफिस में ऐसे लोग होते हैं जो सिस्टम को अच्छी तरह से जानते हैं और किसी भी मुद्दे पर सहकर्मियों की मदद कर सकते हैं। -
नयी दिल्ली. वैश्विक बाजारों में मजबूती के रुख के बीच बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 600 रुपये की तेजी के साथ 89,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्चस्तर पर जा पहुंची। स्थानीय कारोबारियों ने यह जानकारी दी है। बुधवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 88,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 600 रुपये बढ़कर 89,050 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चस्तर पर फिर से जा पहुंचा। पहले यह 88,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। 20 फरवरी को, 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 50 रुपये बढ़कर 89,450 रुपये और 89,050 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चस्तर पर पहुंच गई। चांदी की कीमत भी 1,000 रुपये की तेजी के साथ करीब पांच माह के उच्च स्तर 1,01,200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,00,200 रुपये प्रति किलोग्राम बंद हुई थी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस), सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘सुरक्षित-निवेश के लिए मांग तथा उम्मीद से कहीं नरम अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति आंकड़ों (जिससे इस वर्ष फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नरमी बरतने का मामला बनता है) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की हाजिर कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई तक मजबूत हो गयी तथा घरेलू बाजार में यह एक नए रिकॉर्ड पर पहुंच गईं। वैश्विक मोर्चे पर, हाजिर सोना 11.67 बढ़कर 2,946.44 डॉलर प्रति औंस हो गया।
गांधी ने कहा कि व्यापारी अब अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों पर नजर लगाये हैं, जिसमें साप्ताहिक बेरोजगार दावे और पीपीआई/कोर पीपीआई (निर्माता मूल्य सूचकांक) शामिल हैं, ताकि समग्र मुद्रास्फीति आंकड़ों के बारे में अधिक संकेत प्राप्त किया जा सके. -
नयी दिल्ली. वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि वृहद आर्थिक स्थिरता से प्रभावित नीतियों और बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। इसके साथ यह दुनिया का सबसे अधिक मांग वाला उपभोक्ता बाजार होगा और वैश्विक उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी बढ़ेगी। भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2023 में 3,500 अरब डॉलर था और इसके 2026 में 4,700 अरब डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है। इससे यह अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा। भारत 2028 में जर्मनी से आगे निकल जाएगा क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था 5,700 अरब डॉलर तक हो जाएगी।
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, भारत 1990 में दुनिया की 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। यह 2000 में 13वें स्थान पर खिसक गया। 2020 में यह नौवें स्थान पर और 2023 में पांचवें स्थान पर पहुंच गया। विश्व जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में भारत की हिस्सेदारी 2029 में 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। रिपोर्ट में भारत के विकास के लिए तीन परिदृश्यों का अनुमान लगाया गया है। पहली स्थिति नरमी है, जहां अर्थव्यवस्था 2025 में 3,650 अरब डॉलर से बढ़कर 2035 तक 6,600 अरब डॉलर हो जाएगी। दूसरा आधार है, जहां यह बढ़कर 8,800 अरब डॉलर हो जाएगी और तीसरा परिदृश्य तेजी का है, जहां आकार बढ़कर 10,300 अरब डॉलर हो जाएगा। इसमें कहा गया है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी 2025 में 2,514 डॉलर से बढ़कर 2035 में नरमी के परिदृश्य में 4,247 डॉलर, आधार परिदृश्य के तहत 5,683 डॉलर और तेजी के परिदृश्य के तहत 6,706 डॉलर हो जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘आने वाले दशकों में वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। इसका कारण मजबूत जनसंख्या वृद्धि, लोकतंत्र, वृहद आर्थिक स्थिरता से प्रभावित नीति, बेहतर बुनियादी ढांचा, बढ़ता हुआ उद्यमी वर्ग और सामाजिक परिणामों में सुधार है।'' मॉर्गन स्टेनले ने कहा, ‘‘इसका तात्पर्य यह है कि भारत दुनिया का सबसे अधिक मांग वाला उपभोक्ता बाजार होगा, यह एक प्रमुख ऊर्जा बदलाव से गुजरेगा, कर्ज-जीडीपी अनुपात बढ़ेगा और जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।'' वर्तमान समय की बात करें तो मॉर्गन स्टेनली के अनुसार वृद्धि में सुधार होने की संभावना है।रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘हाल के सप्ताह में महत्वपूर्ण आंकड़ों का रुख मिला-जुला रहा है। लेकिन कुछ महीने पहले की तुलना में स्पष्ट रूप से बेहतर हैं। हमें उम्मीद है कि 2024 की दूसरी छमाही में नरमी के बाद राजकोषीय और मौद्रिक नीति समर्थन, सेवा निर्यात में सुधार के साथ आर्थिक वृद्धि में सुधार होगा।'' मॉर्गन स्टेनले ने कहा कि 31 मार्च, 2025 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि के 6.3 प्रतिशत और अगले वर्ष 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वृहद आर्थिक स्थिरता संतोषजनक स्तर पर रहेगी। जिससे नीति निर्माताओं के लिए चीजें बेहतर होंगी।'' आगे चलकर, खपत में सुधार व्यापक आधार पर होने की उम्मीद है क्योंकि आयकर में कटौती शहरी मांग को बढ़ावा देगी। इससे ग्रामीण खपत स्तरों में तेजी की प्रवृत्ति को समर्थन मिलेगा। मॉर्गन स्टेनले के अनुसार, निवेश को देखा जाए तो सार्वजनिक और घरेलू पूंजीगत व्यय से वृद्धि को गति मिली है। जबकि निजी कॉरपोरेट पूंजीगत व्यय में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सेवा निर्यात में मजबूती श्रम बाजार के दृष्टिकोण के लिए अच्छा संकेत है। साथ ही मुद्रास्फीति में नरमी से क्रय शक्ति में सुधार होने की संभावना है। - नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि इससे दूरदराज के इलाकों में रेलवे परियोजनाओं को मदद मिलेगी। वैष्णव ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘स्टारलिंक, भारत में आपका स्वागत है! इससे दूरदराज के क्षेत्रों की रेलवे परियोजनाओं को मदद मिलेगी।'' वैष्णव सूचना एवं प्रसारण के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भी हैं।उनकी यह टिप्पणी उद्योगपति मुकेश अंबानी की ‘जियो प्लेटफॉर्म्स' और सुनील मित्तल की ‘भारती एयरटेल' के साथ दो अलग-अलग समझौते के बाद आई है। ये समझौते मस्क के नेतृत्व वाली कंपनी स्पेसएक्स द्वारा भारत में स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं लाने के लिए किए गए हैं।
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू की गई 5G सर्विस वर्तमान में देश के 776 में से 773 जिलों में उपलब्ध हैं, जिसमें लक्षद्वीप भी शामिल है। संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को बताया कि 28 फरवरी तक देश भर में टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (टीएसपी) द्वारा 4.69 लाख 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशन (बीटीएस) स्थापित किए गए हैं।संचार मंत्रालय अनुसार, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (टीएसपी) ने देश भर में 5G सर्विस का विस्तार किया है और स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए नोटिस इनवाइटिंग एप्लीकेशन (एनआईए) में निर्धारित न्यूनतम रोलआउट दायित्वों से आगे निकल गए हैं। इन दायित्वों से आगे मोबाइल सर्विस का विस्तार टीएसपी के टेक्नो-कमर्शियल विचार पर निर्भर करता है।सरकार ने देश में 5G सर्विस को शुरू करने के लिए कई पहल की हैं, जैसे 5G मोबाइल सर्विस के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी, एडजस्टेड ग्रोस रेवेन्यू (एजीआर), बैंक गारंटी (बीजी) और ब्याज दरों को रेशनलाइज करने के लिए वित्तीय सुधार, 2022 की नीलामी और उसके बाद प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क को हटाना। इसके अलावा मंजूरी के लिए प्रक्रिया का सरलीकरण, आरओडब्ल्यू अनुमतियों और दूरसंचार अवसंरचना की स्थापना की मंजूरी को सुव्यवस्थित करने के लिए पीएम गतिशक्ति संचार पोर्टल और आरओडब्ल्यू (राइट ऑफ़ वे) नियमों का शुभारंभ और छोटे सेल और दूरसंचार लाइन की स्थापना के लिए स्ट्रीट फर्नीचर के उपयोग के लिए समयबद्ध अनुमति आदि। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के अनुसार, भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शानदार वृद्धि कर रही है और इसमें विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। लगभग 1,187 मिलियन ग्राहकों के साथ, शहरी टेली-घनत्व 131.01 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-घनत्व 58.31 प्रतिशत है। 5G का रोल-आउट तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्वदेशी डेटा सेट और लोकलाइज्ड डेटा सेंटर की स्थापना के साथ आसान बनाया जा रहा है।
- नयी दिल्ली. भारत का चीनी उत्पादन सितंबर को समाप्त होने वाले 2024-25 सत्र में 19 प्रतिशत घटकर 2.58 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले सत्र के 3.19 करोड़ टन के उत्पादन से कम है। अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (एआईएसटीए) ने यह जानकारी दी। नवीनतम अनुमान एआईएसटीए के दो करोड़ 65.2 लाख टन के पहले के उत्पादन अनुमान की तुलना में 7.2 लाख टन कम है। उत्पादन अनुमान में गिरावट की वजह महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में कम उत्पादन को बताया गया है। भारत के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन पिछले सत्र के 1.1 करोड़ टन से कम यानी 80 लाख टन ही रहने की उम्मीद है। देश के दूसरे शीर्ष उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन, 90 लाख टन अनुमानित है जो पहले के अनुमान के मुकाबले अपरिवर्तित है लेकिन पिछले सत्र में दर्ज 1.04 करोड़ टन के उत्पादन से कम है। कर्नाटक में चीनी उत्पादन 41 लाख टन रहने का अनुमान है, जो प्रारंभिक अनुमान से थोड़ा अधिक है, लेकिन अब भी पिछले साल के 53 लाख टन के उत्पादन से कम है।
- नयी दिल्ली। जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड (जेएसएल) ने मंगलवार को कहा कि वह वर्ष 2050 तक अपने शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कार्बन कटौती परियोजनाओं में 700 करोड़ रुपये का निवेश करने की प्रक्रिया में है। जेएसएल ने बयान में कहा कि अगले पांच वर्षों में विभिन्न पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं की स्थापना के लिए निवेश जारी रहेगा। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव विविधता संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और कार्बन कटौती प्रौद्योगिकी को अपनाना शामिल है। कंपनी ने कहा, ‘‘अगले पांच वर्षों में कार्बन कटौती परियोजनाओं में 700 करोड़ रुपये का निवेश करने का उद्देश्य वित्तीय और पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करना है। वित्त वर्ष 2034-35 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और कार्बन तीव्रता को 50 प्रतिशत तक कम करना और 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन को पूरा करना इसका लक्ष्य है।'' जेएसएल ने यह भी कहा कि उसने प्रकृति से संबंधित वित्तीय खुलासा (टीएनएफडी) रिपोर्ट पर एक कार्यबल गठित किया है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक लचीलापन और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के अवसरों का लाभ उठाते हुए प्रकृति से संबंधित जोखिमों की पहचान करना, उनका आकलन करना और उन्हें कम करना है। टीएनएफडी ढांचा अपने मापदंड और रणनीतिक लक्ष्यों को रेखांकित करने के लिए शासन, रणनीति, जोखिम और प्रभाव प्रबंधन के चार महत्वपूर्ण स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह रिपोर्ट जाजपुर, हिसार और विशाखापत्तनम में स्थित कंपनी की इकाइयों पर व्यापक जैव विविधता प्रबंधन योजनाएं (बीएमपी) और प्रकृति जोखिम आकलन प्रदान करती है।
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नयी दिल्ली. स्विगी ने सोमवार को उपवास के दौरान खाने से जुड़ी अधिसूचना रोकने की सुविधा शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत उपयोगकर्ताओं को उपवास के दौरान खाने को लेकर सूचना को रोकने की सुविधा मिलेगी। कंपनी ने बयान में कहा कि इस सुविधा से रमजान से शुरू होकर नवरात्रि तक व्रत या रोजा के दौरान खाने-पीने से जुड़ी कोई सूचना नहीं मिलेगी। साथ ही कंपनी उपयोगकर्ताओं को जरूरत होने पर मंच को तैयार रखेगी। स्विगी ने कहा, ‘‘उपयोगकर्ता कभी भी स्विगी ऐप से उपवास वाली सुविधा को चालू या बंद कर सकते हैं...उपवास के घंटों के बाद अधिसूचना अपने आप फिर से चालू हो जाएंगी।'' यह सुविधा पूरे वर्ष विभिन्न उपवास अवसरों के लिए उपलब्ध रहेगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को अपने भोजन संबंधी सूचनाओं के प्रबंधन में अधिक आसानी होगी।
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नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026 में भारतीय फार्मा बाजार में सालाना आधार पर 8-9 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। सोमवार को जारी एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (आईएनडी-आरए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में इस सेक्टर की वृद्धि सालाना आधार पर 7.5-8.0 प्रतिशत रहेगी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर कृष्णनाथ मुंडे ने कहा कि “भारतीय फार्मा बाजार में वित्त वर्ष 2024 में सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023 में सालाना आधार पर 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।”
इस साल फरवरी में फार्मा बाजार ने सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत का राजस्व दियाइस साल फरवरी में फार्मा बाजार ने सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत का राजस्व दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कीमत और नए लॉन्च में आई वृद्धि की वजह से देखी गई। कीमत में वृद्धि सालाना आधार पर 5.2 प्रतिशत और नए लॉन्च में सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।ओवरऑल फार्मा प्रोडक्ट्स की 12 महीने की रोलिंग बिक्री में 8.1 प्रतिशत की वृद्धिरिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, मूविंग एनुअल टोटल (एमएटी) या ओवरऑल फार्मा प्रोडक्ट्स की 12 महीने की रोलिंग बिक्री में फरवरी में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। कार्डियक थेरेपी ने फार्मा बाजार में एमएटी में 10.8 प्रतिशत की वृद्धि और मासिक बाजार हिस्सेदारी में 13.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।इसके बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी/सेंट्रल नर्वस सिस्टम और डर्मेटोलॉजी का स्थान रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी ओर, एंटी-इंफेक्टिव, रेस्पिरेटरी और गायनोकोलॉजी थेरेपी में फरवरी में कमजोर वृद्धि देखी गई। इस बीच, एक दूसरी हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि देश में फार्मा सेक्टर में तेजी से उत्पादन में वृद्धि देखी जा रही है।भारत बना जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायरमैकिन्से एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फार्मा सेक्टर 8 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा है और 2024 में निर्यात दरों में भी 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। एपीआई और बायोटेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए, इसने 8 प्रतिशत सीएजीआर से वृद्धि की है, जो वैश्विक औसत से दोगुना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर भी बन गया है, जिसकी फार्मा निर्यात वृद्धि दर 9 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है। - नई दिल्ली। ग्लोबल सबमरीन केबल नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने के साथ भारत में अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण बाजार पर और अधिक प्रभावी होने की क्षमता है। देश में वर्तमान में मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में स्थित 14 अलग-अलग लैंडिंग स्टेशनों पर लगभग 17 अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल हैं।देश में अभी लगभग 17 अंतर्राष्ट्रीय समुद्री केबल हैं जो मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में 14 अलग-अलग जगहों पर पहुंचते हैं2022 के अंत में इन केबलों की कुल क्षमता क्रमशः 138.606 टेराबाईट प्रति सेकंड (टीबीपीएस) और 111.111 टीबीपीएस थी। देश में अभी लगभग 17 अंतर्राष्ट्रीय समुद्री केबल हैं जो मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में 14 अलग-अलग जगहों पर पहुंचते हैं।सबमरीन केबल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटरों में टाटा कम्युनिकेशंस शामिलसबमरीन केबल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटरों में टाटा कम्युनिकेशंस शामिल हैं, जिसके पास मुंबई, चेन्नई और कोचीन में पांच केबल लैंडिंग स्टेशन हैं; ग्लोबल क्लाउड एक्सचेंज के पास मुंबई और त्रिवेंद्रम में स्टेशन हैं; भारती एयरटेल चेन्नई और मुंबई में स्टेशनों का संचालन करती है; सिफी टेक्नोलॉजीज और बीएसएनएल दोनों विभिन्न केबल लैंडिंग स्टेशनों के संचालन में शामिल हैं; वोडाफोन और आईओएक्स पुडुचेरी में एक नया केबल लैंडिंग स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है।पिछले महीने, भारती एयरटेल ने चेन्नई में नई एसईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन टेलीकॉम केबल उतारीपिछले महीने, भारती एयरटेल ने चेन्नई में नई एसईए-एमई-डब्ल्यूई 6 सबमरीन टेलीकॉम केबल उतारी। कंपनी ने 30 दिसंबर, 2024 को मुंबई में केबल पहले ही उतार दी थी। 21,700 रूट किमी (आरकेएम) सबमरीन केबल सिस्टम भारत को सिंगापुर और फ्रांस (मार्सिले) से जोड़ता है और स्थलीय केबल के माध्यम से इजिप्ट को पार करता है। इसके साथ, एयरटेल ने वैश्विक स्तर पर सबमरीन केबल सिस्टम में विविध क्षमता के साथ अपने नेटवर्क की उपस्थिति को और बढ़ाया है।मुंबई और चेन्नई में केबल लैंडिंग एयरटेल के डेटा सेंटर आर्म, एनएक्सटीआरए के साथ पूरी तरह से इंटीग्रेट होगी। एयरटेल का ग्लोबल नेटवर्क पांच महाद्वीपों में फैला हुआ है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर 34 केबल में निवेश किया है। सबमरीन केबल 99 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा एक्सचेंजों को ले जाती हैं।पिछले मााह मेटा ने भारत और अमेरिका के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 50,000 किलोमीटर की नई अंडर सी केबल परियोजना ‘वॉटरवर्थ’ की घोषणा कीपिछले महीने, मेटा ने भारत और अमेरिका के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 50,000 किलोमीटर की नई अंडर सी केबल परियोजना ‘वॉटरवर्थ’ की घोषणा की। कंपनी के अनुसार, प्रोजेक्ट वॉटरवर्थ अमेरिका, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में इंडस्ट्री-लीडिंग कनेक्टिविटी लाएगा। परियोजना पूरी हो जाने के बाद यह पांच प्रमुख महाद्वीपों तक पहुंच जाएगी और 50,000 किलोमीटर (पृथ्वी की परिधि से भी अधिक) तक फैलेगी, जिससे यह उपलब्ध उच्चतम क्षमता वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर दुनिया की सबसे लंबी केबल परियोजना बन जाएगी।सब सी केबल परियोजनाएं हैं ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़मेटा के अनुसार, भारत में डिजिटल सर्विस की बढ़ती मांग की वजह से यह निवेश आर्थिक विकास, लचीले इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इन्क्लूशन के लिए मेटा के कमिटमेंट की पुष्टि करता है, जो भारत के संपन्न डिजिटल लैंडस्कैप को सपोर्ट करता है और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को बढ़ावा देता है। सब सी केबल परियोजनाएं ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ हैं, जो दुनिया के महासागरों में 95 प्रतिशत से अधिक अंतरमहाद्वीपीय ट्रैफिक के लिए जिम्मेदार हैं, जो डिजिटल कम्युनिकेशन, वीडियो एक्सपीरियंस और ऑनलाइन लेनदेन को सहजता से सक्षम बनाती हैं।
- बेंगलुरु,। कर्नाटक राज्य आईटी/आईटीईएस कर्मचारी संघ (केआईटीयू) के आह्वान पर आईटी क्षेत्र में कार्य और जीवन के बीच हितकारी संतुलन का समर्थन करने के लिए रविवार को बेंगलुरु के ‘फ्रीडम पार्क' में 100 से अधिक लोग एकत्रित हुए। केआईटीयू के सलाहकार वसंतराज ने इस आयोजन पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि बेंगलुरु के एक तकनीकी केंद्र के रूप में दर्जे को देखते हुए कम से कम 6,000 लोगों को अपनी आवाज उठाने के लिए भाग लेना चाहिए था। वसंतराज ने कहा, “हकीकत तो यह है कि बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियां डॉलर विनिमय दर के माध्यम से लाभ कमा रहीं हैं लेकिन अंततः कर्मचारियों को निचोड़ रही हैं। पिछले तीन दशकों में आईटी उद्योग को दुनिया का केंद्र बन जाना चाहिए था लेकिन अब भी यह एक सेवा उद्योग ही बना हुआ है।” केआईटीयू के सदस्य राम ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन इंफोसिस के मानद चेयरमैन नारायण मूर्ति और एलएंडटी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एसएन सुब्रमण्यन की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया के लिए आयोजित किया गया था क्योंकि इन दोनों ने ही ‘वैल्यू चेन' क्षेत्र की विफलता के लिए कर्मचारियों को दोषी ठहराया है। राम ने कहा, “वे (नारायण मूर्ति और एसएन सुब्रमण्यन) काम के घंटों को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, मानो इससे समस्या हल हो जाएगी। लेकिन काम के घंटों में वृद्धि से वास्तव में उत्पादकता नहीं बढ़ती। चूंकि हाल ही में उनके बयान बड़ी तेजी से सामने आने लगे हैं इसलिए हमने अपनी आवाज के साथ इसका मुकाबला करने का फैसला किया, जिसमें कार्य और जीवन के बीच संतुलन के महत्व पर जोर दिया गया।”
- नयी दिल्ली। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी आईआईएफएल फाइनेंस ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित सात नई स्वर्ण-ऋण शाखाएं खोली हैं। आईआईएफएल फाइनेंस ने एक बयान में कहा कि ‘शक्ति' शाखाओं के नाम से ब्रांडेड ये नयी शाखाएं उन महिलाओं की ताकत और मजबूती का प्रतीक हैं, जो अपने समुदायों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाती हैं। इसमें कहा गया है कि ये शाखाएं सभी ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करेंगी, तथा महिला उद्यमियों के लिए विशेष लाभ और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम प्रदान करेंगी। प्रत्येक ‘शक्ति' शाखा में सभी कर्मचारी महिलाएं हैं। इससे 40 महिला पेशेवरों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
- नयी दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच चांदी भी निवेशकों को निवेश के लिहाज से आकर्षित कर रही है और इसने इस साल अब तक लगभग 11 प्रतिशत का रिटर्न (प्रतिफल) दिया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियाद और अन्य मूल्यवान धातुओं की तुलना में सस्ती कीमतों के साथ, चांदी का प्रदर्शन रिटर्न के लिहाज से अगले दो-तीन साल बेहतर रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सोने की तुलना में चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक होता है। इसका कारण यह निवेश परिसंपत्ति के साथ-साथ औद्योगिक धातु के रूप में उपयोगी और आकर्षक है। लेकिन यह सोने की तुलना में अधिक किफायती है, जिससे छोटे निवेशकों के लिए इसे खरीदना आसान हो जाता है। मेहता इक्विटीज लि. के उपाध्यक्ष (जिंस) राहुल कलंत्री ने कहा, ‘‘ देश में चांदी की कीमत एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) वायदा में बीते वर्ष 17.50 प्रतिशत चढ़ी है और यह 10 साल के औसत रिटर्न 9.56 प्रतिशत से अधिक है। पिछले दो साल में इसमें मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला है और इस साल भी अब तक इसमें 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ चांदी के हाल के प्रदर्शन को देखते हुए निवेशक आने वाले समय में इसमें संभावनाओं को लेकर सतर्क हुए हैं। वर्तमान में, चांदी वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 25 अप्रैल, 2011 को निर्धारित अपने रिकॉर्ड 50 डॉलर प्रति औंस से लगभग 35 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रही है। कीमत का यह स्तर बाजार में तेजी की उम्मीद करने वालों के लिए निवेश को लेकर एक आकर्षक प्रवेश बिंदु का संकेत हो सकता है।''उल्लेखनीय है कि एशियाई बाजार में चांदी वायदा कीमत बीते शुक्रवार को 0.17 प्रतिशत घटकर 33.28 डॉलर प्रति औंस रही। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के निदेशक (जिंस और मुद्रा) नवीन माथुर ने कहा, ‘‘एक जिंस के रूप में चांदी औद्योगिक धातु होने के कारण अत्यधिक अस्थिर रही है। साथ ही अनिश्चित आर्थिक परिदृश्य के दौरान निवेश उद्देश्यों के लिए भी इस पर गौर किया जाता है। हालांकि, अन्य कीमती धातुओं की तुलना में मजबूत बुनियाद और सस्ती कीमतों के साथ, अगले दो-तीन साल के परिदृश्य के हिसाब से रिटर्न के मामले में चांदी का प्रदर्शन अन्य कीमती धातुओं से बेहतर रहने की उम्मीद है। इसलिए उच्च रिटर्न को देखते हुए चांदी में निवेश अब भी बेहतर जान पड़ता है।'' चांदी के भाव में तेजी के कारणों के बारे में पूछे जाने पर माथुर ने कहा, ‘‘इस साल कीमती धातु के रूप में चांदी की कीमत लगातार ऊपर चढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका की अनिश्चित व्यापार नीतियां हैं। इससे इस साल सुरक्षित निवेश के रूप में सफेद धातु में प्रवाह देखा जा रहा है। औद्योगिक मांग बनी रहने के साथ अमेरिका में प्रमुख ब्याज दर के 2025 में नीचे आने की संभावना के साथ चांदी की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। इसलिए इस साल चांदी जैसी सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों की ओर रुझान भी बढ़ रहा है।'' कलंत्री ने कहा, ‘‘चांदी की कीमत में तेजी के कारणों में अमेरिका में ब्याज दर में गिरावट शामिल है, जिसने कीमती धातुओं को निवेश के लिहाज से अधिक आकर्षक बना दिया है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में नीतिगत अनिश्चितताओं के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर जारी तनाव में वृद्धि जैसे कारक भी इसके दाम में तेजी ला रहे हैं। इसके साथ यह लगातार दूसरा वर्ष है जब चांदी की औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है और यह आभूषण खरीद में गिरावट की भरपाई कर रही है।'' यह पूछे जाने पर कि निवेशकों के लिए सोने और चांदी में क्या बेहतर है, माथुर ने कहा, ‘‘सोने की तुलना में चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक होता है, क्योंकि यह एक औद्योगिक धातु के रूप में कार्य करने के साथ-साथ निवेश परिसंपत्ति के रूप में भी आकर्षक है। यह इस तथ्य से भी स्पष्ट है कि चांदी ने पिछले 15 वर्षों में सात बार नकारात्मक रिटर्न दिया है, जबकि सोने ने इसी अवधि में केवल तीन बार नकारात्मक रिटर्न दिया है। इसलिए एक दीर्घकालिक ‘कंजर्वेटिव' निवेशक के लिए 70:30 (70 प्रतिशत राशि सोने में और 30 प्रतिशत चांदी में) या फिर एक आक्रामक निवेशक के लिए 60:40 का आवंटन आदर्श और बेहतर माना जाता है।'' मेहता इक्विटीज के कलंत्री ने कहा, ‘‘सोना, चांदी की तुलना में अधिक स्थिर है और इसमें उतार-चढ़ाव कम होता है। साथ ही आर्थिक संकट, मंदी और मुद्रास्फीति के दौरान यह अच्छा प्रदर्शन करता है।
- नयी दिल्ली,। सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से सात के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में पिछले सप्ताह सामूहिक रूप से 2,10,254.96 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक लाभ में रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) रहीं। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,134.48 अंक या 1.55 प्रतिशत चढ़ा, वहीं एनएसई निफ्टी 427.8 अंक या 1.93 प्रतिशत के लाभ में रहा। समीक्षाधीन सप्ताह में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 66,985.25 करोड़ रुपये बढ़कर 16,90,328.70 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का बाजार मूल्यांकन 46,094.44 करोड़ रुपये बढ़कर 13,06,599.95 करोड़ रुपये रहा। बाजार मूल्यांकन में तेज उछाल के बाद टीसीएस एक बार फिर शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की बाजार हैसियत 39,714.56 करोड़ रुपये बढ़कर 6,53,951.53 करोड़ रुपये रही। भारती एयरटेल का मूल्यांकन 35,276.3 करोड़ रुपये बढ़कर 9,30,269.97 करोड़ रुपये हो गया। आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 11,425.77 करोड़ रुपये के उछाल के साथ 5,05,293.34 करोड़ रुपये पर और आईसीआईसीआई बैंक का 7,939.13 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 8,57,743.03 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत में 2,819.51 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और उसका बाजार पूंजीकरण 5,17,802.92 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस रुख के उलट एचडीएफसी बैंक का बाजार मूल्यांकन 31,832.92 करोड़ रुपये घटकर 12,92,578.39 करोड़ रुपये पर आ गया। बजाज फाइनेंस की बाजार हैसियत 8,535.74 रुपये घटकर 5,20,981.25 करोड़ रुपये रह गई। इन्फोसिस का मूल्यांकन 955.12 करोड़ रुपये घटकर 7,00,047.10 करोड़ रुपये रह गया। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। उसके बाद क्रमश: टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस, भारतीय स्टेट बैंक, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी का स्थान रहा।
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नयी दिल्ली. उद्योग जगत की अग्रणी महिलाओं का मानना है कि उचित मार्गदर्शन और सलाह को प्राथमिकता देने वाला एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र उन्हें सशक्त बना सकता है। उन्होंने कहा कि उद्यमशीलता का परिदृश्य अवसरों से भरपूर होने के बावजूद, विशेष रूप से महिलाओं के लिए कई तरह की बाधाएं लाता है। रुकम कैपिटल की संस्थापक और प्रबंध भागीदार अर्चना जहांगीरदार के अनुसार पूर्वाग्रह के अलावा मार्गदर्शन और संपर्क की कमी चलते महिलाओं को अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने में बाधा का सामना करना पड़ता है। आईवीसीए की उपाध्यक्ष सुनीता प्रसाद ने कहा कि महिलाओं के आदर्श कम हैं, जिससे मार्गदर्शन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। उद्योग को भविष्य की महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में महिलाओं की मौजूदगी बाधाओं को तोड़ने में मदद करती है और प्रेरणा का एक व्यापक प्रभाव पैदा करती है। प्रसाद ने कहा, “हमें महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप का समर्थन करने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए उत्प्रेरक, वित्तपोषण कार्यक्रमों और पहलों की आवश्यकता है। हमें ऐसे नेटवर्क बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जहां महिलाएं सहयोग कर सकें और आगे बढ़ सकें।” लेट्सवेंचर की सह-संस्थापक शांति मोहन ने कहा कि भारत की स्टार्टअप यात्रा एक निर्णायक बिंदु पर है, जहां सही मार्गदर्शन के साथ एक समावेशी परिवेश उद्यमिता के माध्यम से मूल्य सृजन की भारत की आकांक्षा को पूरा करेगा।
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नयी दिल्ली. भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) कंपनी ओला इलेक्ट्रिक वाहन और वाहन कलपुर्जा (पीएलआई-वाहन योजना) के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली भारत की पहली दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माता बन गई है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि योजना के तहत उसे वित्त वर्ष 2023-24 के निर्धारित बिक्री मूल्य के लिए कुल 73.74 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई पीएलआई-वाहन योजना का उद्देश्य वाहन क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और उन्नत, स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन समाधानों की स्वीकार्यता को बढ़ावा देना है। पीएलआई के लिए ओला इलेक्ट्रिक की पात्रता भारत की ईवी क्रांति में इसके नेतृत्व और एक मजबूत स्थानीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की इसकी प्रतिबद्धता दिखाती है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, “हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि, ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय से पांच मार्च, 2025 की तारीख का स्वीकृति आदेश प्राप्त हुआ है।” ओला इलेक्ट्रिक ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 के निर्धारित बिक्री मूल्य हेतु प्रोत्साहन के लिए 73.74 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।” सितंबर, 2021 में शुरू की गई पीएलआई-वाहन योजना का उद्देश्य वाहन क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और उन्नत, स्वच्छ और टिकाऊ गतिशीलता समाधानों को अपनाने को बढ़ावा देना है। पांच वर्षों में 25,938 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ इस योजना का लक्ष्य आयात पर निर्भरता को कम करना और देश को वैश्विक ईवी आपूर्ति शृंखला में एक प्रमुख कंपनी के रूप में स्थापित करना है।
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नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की लौह अयस्क खनन कंपनी एनएमडीसी ने बृहस्पतिवार को अमिताव मुखर्जी को अपना नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नियुक्त करने की घोषणा की। मुखर्जी अबतक कंपनी के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।
एनएमडीसी ने एक नियामकीय सूचना में एक्सचेंज को बताया कि अमिताव मुखर्जी को कंपनी के बोर्ड में सीएमडी के रूप में नियुक्त किया गया है। वह पदभार ग्रहण करने की तिथि यानी छह मार्च, 2025 से लेकर अपनी सेवानिवृत्ति की तिथि यानी 29 फरवरी, 2028 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, पद पर बने रहेंगे। नवंबर, 2018 में एनएमडीसी में निदेशक (वित्त) के रूप में शामिल होने के बाद, उन्होंने मार्च, 2023 से सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार संभाला। कंपनी ने कहा कि मुखर्जी एनएमडीसी स्टील लिमिटेड और लीगेसी आयरन ओर लिमिटेड के चेयरमैन भी हैं। लागत लेखाकार और भारतीय रेलवे लेखा सेवा (आईआरएएस) के 1996 बैच के वरिष्ठ अधिकारी मुखर्जी ने भारत सरकार में विभिन्न प्रमुख भूमिकाओं में काम किया है, और देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में, एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2023-24 में 4.5 करोड़ टन उत्पादन को पार करने वाली भारत की पहली लौह अयस्क खनन कंपनी बनने का ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में एनएमडीसी स्टील प्लांट के चालू होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में, कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया में सोने के खनन में प्रगति की है और वैश्विक खनन महाशक्ति बनने की दिशा में एक दूरदर्शी अंतरराष्ट्रीय विस्तार खाका तैयार किया है। - नयी दिल्ली. पिछले साल लक्जरी आवास खंड में सालाना मूल्य वृद्धि के लिहाज से दिल्ली वैश्विक स्तर पर 18वें स्थान पर रही। वैश्विक संपत्ति सलाहकार नाइट फ्रैंक की ‘द वेल्थ रिपोर्ट- 2025' के मुताबिक ‘प्राइम इंटरनेशनल रेजिडेंशियल इंडेक्स' (पीआईआरआई 100) का मूल्य 2024 में 3.6 प्रतिशत बढ़ा। रिपोर्ट में जिन 100 लक्जरी आवासीय बाजारों को शामिल किया गया, उनमें से 80 ने सकारात्मक या समान वार्षिक मूल्य वृद्धि दर्ज की। भारतीय शहरों में, दिल्ली 18वें स्थान पर है। यहां लक्जरी आवासीय कीमतों में सालाना 6.7 प्रतिशत वृद्धि हुई। दिल्ली का स्थान 2023 में 37वां था। इसी तरह बेंगलुरु 59वें स्थान से 40वें स्थान पर पहुंच गया। मुंबई 2023 से 13 स्थान नीचे गिरकर 21वें स्थान पर आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 18.4 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ सियोल रैंकिंग में सबसे आगे है, मनीला का 17.9 प्रतिशत वृद्धि के साथ दूसरा स्थान है। दुबई, रियाद और तोक्यो शीर्ष पांच में शामिल हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि दिल्ली और बेंगलुरु ने वैश्विक लक्जरी आवासीय बाजार में उल्लेखनीय वृद्धि का प्रदर्शन किया है, जिससे इन शहरों में बुनियादी ढांचे के विस्तार, आर्थिक वृद्धि और लक्जरी संपत्तियों की बढ़ती मांग का पता चलता है।
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निफ्टी में 10 दिन की गिरावट पर विराम
मुंबई. स्थानीय शेयर बाजार में बुधवार को जोरदार तेजी आई और दोनों मानक सूचकांक लंबी छलांग लगा गए। बीएसई सेंसेक्स जहां 740 अंक चढ़ गया, वहीं एनएसई निफ्टी में 10 दिन से जारी गिरावट पर विराम लगा। निचले स्तर पर बिजली और अन्य शेयरों में लिवाली से बाजार में रौनक लौटी। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 740.30 अंक यानी 1.01 प्रतशित चढ़कर 73,730.23 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 943.87 अंक तक चढ़ गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 254.65 अंक यानी 1.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,337.30 अंक पर बंद हुआ। इसके साथ, निफ्टी में 10 कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर विराम लगा। कारोबार के दौरान यह 312.25 अंक तक चढ़ गया था। छोटी कंपनियों के शेयरों से जुड़ा बीएसई समॉलकैप सूचकांक 2.80 प्रतिशत चढ़ा जबकि मझोली कंपनियों का बीएसई मिडकैप सूचकांक 2.66 प्रतिशत के लाभ में रहा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 7,97,247.7 करोड़ रुपये बढ़कर 3,93,04,041.75 करोड़ रुपये पहुंच गया। सेंसेक्स में शामिल शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, आईटीसी, नेस्ले इंडिया, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, एशियन पेंट्स और कोटक महिंद्रा बैंक में प्रमुख रूप से तेजी रही। दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक और जोमैटो के शेयर नुकसान में रहे।
मेहता इक्विटीज लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) प्रशांत तापसे ने कहा, ‘‘वैश्विक बाजारों में मजबूत संकेतों के साथ घरेलू सूचकांकों में तेजी आई। इसका कारण यह संकेत है कि वैश्विक व्यापार तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन कुछ शुल्क दरों को वापस ले सकता है। इससे धारणा मजबूत हुई।'' तापसे ने कहा कि इसके अलावा, फरवरी पीएमआई सूचकांक में वृद्धि जैसे स्थानीय कारकों ने भी बाजारों धारणा को मजबूती दी। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार के कारण फरवरी में भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में तेज वृद्धि देखी गई। इसके चलते उत्पादन में तेजी से विस्तार हुआ और रोजगार में पर्याप्त वृद्धि हुई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई व्यापार गतिविधि सूचकांक जनवरी के 26 महीने के निचले स्तर 56.5 से बढ़कर फरवरी में 59.0 हो गया। यह तेज विस्तार को दर्शाता है। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से अधिक अंक से विस्तार का संकेत मिलता है, जबकि 50 से नीचे का अंक गिरावट को दर्शाता है। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘भारत समेत उभरते बाजारों में तेजी देखी गई। इसे कमजोर अमेरिकी डॉलर से समर्थन मिला। मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अमेरिकी शुल्क लगाए जाने और जवाबी कार्रवाई के खतरे के बावजूद यह तेजी आई है।'' नायर ने कहा, ‘‘जारी व्यापार युद्ध के दीर्घकालिक परिणाम अनिश्चित बने हुए हैं। निकट भविष्य में अमेरिका में मुद्रास्फीति बढ़ने से प्रमुख ब्याज दर में कटौती की संभावना कम हो सकती है।'' उन्होंने कहा, ‘‘घरेलू स्तर पर, वाहन, धातु और आईटी जैसे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर लिवाली देखी गई। इसका कारण मूल्यांकन के निचले स्तर पर आना है। हालांकि, वैश्विक व्यापार तनाव और उनके संभावित दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों के बीच इस सुधार की स्थिरता अनिश्चित बनी हुई है।'' एशिया के अन्य बाजारों में जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में दोपहर कारोबार में तेजी का रुख था। वॉल स्ट्रीट मंगलवार को नुकसान में रहा था। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.49 प्रतिशत घटकर 70.69 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 3,405.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि ग्लोबल एनर्जी लैंडस्केप में भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए तीसरे सबसे बड़े बायोफ्यूल उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जो कि स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम को दिखाता है।
भारत ने इस साल जनवरी तक पेट्रोल में 19.6 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल कीकेंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में बताया, “भारत ने इस साल जनवरी तक पेट्रोल में 19.6 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल कर लिया है और मूल 2030 शेड्यूल से पांच साल पहले ही 20 प्रतिशत हासिल करने की तैयारी है, जिससे ईंधन आयात और उत्सर्जन में कमी आएगी।”पिछले 10 वर्षों के दौरान इथेनॉल ब्लेंडिंग पहल ने किसानों की आय में वृद्धि कीआधिकारिक अनुमान के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के दौरान इथेनॉल ब्लेंडिंग पहल ने किसानों की आय में वृद्धि की है क्योंकि यह गन्ने से बनाया जाता है, जो ग्रामीण रोजगार में वृद्धि को दर्शाता है। साथ ही 1.75 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर सीओ2 उत्सर्जन में कमी आई है और इसके परिणामस्वरूप 85,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इस प्रयास में सबसे आगे रही हैं, जिन्होंने देश भर में पेट्रोल के साथ इथेनॉल के अलग-अलग ब्लेंड पेश किए हैं।ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 131 डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट के साथ समझौते किएऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 131 डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट के साथ समझौते किए हैं। इन प्लांट से 745 करोड़ लीटर की वार्षिक उत्पादन डिजाइन क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने हाईर ब्लेंडिंग प्रतिशत को संभालने के लिए स्टोरेज कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में भी निवेश किया है।इथेनॉल100 ईंधन अब देश भर में 400 से अधिक आउटलेट पर उपलब्धकेंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि ई 100 ईंधन अब देश भर में 400 से अधिक आउटलेट पर उपलब्ध है, जो भारत को स्वच्छ, हरित भविष्य के करीब ले जा रहा है। यह प्रगति, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी की यात्रा है।पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने सबसे पहले मार्च 2024 में इंडियन ऑयल के 183 आउटलेट पर इथेनॉल (ई) 100 ईंधन लॉन्च किया। इसकी उच्च-ऑक्टेन रेटिंग के साथ, जो आमतौर पर 100-105 के बीच होती है, इथेनॉल 100 उच्च-प्रदर्शन इंजनों के लिए बेहतर साबित होता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए बेहतर दक्षता और बिजली उत्पादन सुनिश्चित करता है।इसके अलावा, इथेनॉल 100 का इस्तेमाल कई तरह के वाहनों में किया जा सकता है, जिसमें गैसोलीन, इथेनॉल या दोनों के किसी भी मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन शामिल हैं।भारत अब एलएनजी टर्मिनल क्षमता में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देशपुरी ने कहा, “शांत शहर डिगबोई से दुनिया के टॉप एनर्जी बाजारों तक, भारत की पेट्रोलियम यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व द्वारा निर्देशित लचीलेपन और प्रगति की कहानी है।” इस संदर्भ में, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत अब एलएनजी टर्मिनल क्षमता में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है, जो एक स्थिर और सुरक्षित एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित करता है। देश में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता भी है, जो एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत करती है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसने भारत को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का 7वां सबसे बड़ा निर्यातक बनने में भी सक्षम बनाया है, जिससे वैश्विक व्यापार और ईंधन सुरक्षा मजबूत हुई है।

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