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- नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले- जुले रुझान के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखी गई। घरेलू शेयर बाजार सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मंगलवार को हरे निशान पर बंद हुए। आज के कारोबार में सेंसेक्स 242 अंक मजबूत हुआ। वहीं, निफ्टी में 83 अंको की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में निफ्टी 18,147.65 पर बंद हुआ।BSE का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 242.27 अंक यानी 0.40 फीसदी मजबूत होकर 61,354.71 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 61,486.24 की ऊंचाई तक गया और नीचे में 61,255.00 तक आया। वहीं, दूसरी तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी में 82.65 अंक यानी 0.46 फीसदी की तेजी देखी गई। निफ्टी कारोबार के अंत में 18,147.65 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 18,180.25 की उंचाई तक गया और नीचे में 18,101.75 तक आया।आज के कारोबार में सेंसेक्स के शेयरों में 16 शेयर हरे निशान पर बंद हुए। टेक महिंद्रा, NTPC, टाटा स्टील, मारुति और इंफोसिस सेंसेक्स के टॉप 5 गेनर्स रहे। सबसे ज्यादा मुनाफा टेक महिंद्रा के शेयरों को हुआ। इसके शेयर करीब 2.92 फीसदी तक चढ़े।वहीं, दूसरी तरफ सेंसेक्स के शेयरों में 14 शेयर लाल निशान पर बंद हुए। सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, कोटक बैंक और टाटा मोटर्स सेंसेक्स के टॉप 5 लूजर्स रहे। सबसे ज्यादा नुकसान सन फार्मा के शेयरों को हुआ। इसके शेयर करीब 1.45 फीसदी तक गिर गए।
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नई दिल्ली। जीरा फिर महंगा होने लगा है और इसके भाव नई उंचाई पर पहुंच गए हैं। पिछले सप्ताह शुरुआत में इसके भाव मुनाफावसूली के कारण गिरे थे। लेकिन अब इसके भाव तेजी से बढ़ने लगे हैं। जानकारों के मुताबिक जीरा महंगा होने की वजह उत्पादन कम होने से इसकी आपूर्ति कम होने के साथ निर्यात मांग मजबूत होना मानी जा रही है।
कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स में एक सप्ताह पहले मुनाफावसूली के कारण 25 अप्रैल को जीरा का मई कॉन्ट्रैक्ट टूटकर 38,830 रुपये के स्तर पहुंच गया था। इसके बाद इसमें लगातार मजबूती देखी गई और आज इसने 46,250 रुपये क्विंटल का दिन का ऊपरी स्तर छू लिया, जो अब तक जीरा के वायदा भाव का सर्वोच्च स्तर भी है। इस तरह सप्ताह भर में जीरा करीब 20 फीसदी महंगा हो चुका है। सप्ताह भर में जीरा की बेंचमार्क ऊंझा मंडी में इसके हाजिर भाव 41,000 रुपये से बढ़कर 45,500 रुपये प्रति क्विंटल हो चुके हैं। यह भाव भी अब तक सबसे अधिक भाव है। जिंस विश्लेषक और एग्रीटेक कंपनी में रिसर्च हेड इंद्रजीत पॉल ने कहा कि पिछले सप्ताह मुनाफा वसूली के कारण कुछ दिन जीरा के भाव गिरे थे। पिछले सप्ताह के ही अंतिम दो कारोबारी दिनों से इसके भाव बढ़ने शुरू हुए और इस सप्ताह तो इसकी वायदा कीमतों में जोरदार तेजी देखी जा रही है। आज भी जीरा की वायदा कीमतों में 5 फीसदी तक बढ़ गई। जीरा के भाव बढ़ने की मुख्य वजह इसकी आपूर्ति कम होना है क्योंकि इस साल इसकी पैदावार काफी कम है। पिछले साल जीरा उत्पादन 6.29 लाख टन था। इस साल यह घटकर 3.8 से 4 लाख टन रह सकता है।50 हजार रुपये छू सकते हैं जीरा के वायदा भावआईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट व जिंस विशेषज्ञ अनुज गुप्ता कहते हैं कि हाल में बारिश से जीरा की आवक प्रभावित हो सकती है। इसका उत्पादन घटने से इसकी आपूर्ति पहले से ही कमजोर है। ऐसे में जल्द ही जीरा के वायदा भाव 50 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक जा सकते हैं। पॉल ने कहा कि जीरा की निर्यात मांग भी मजबूत बताई जा रही है। इससे भी जीरा के भाव 50 हजार रुपये तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। -
नई दिल्ली। बहुमूल्य धातुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सराफा बाजार में मंगलवार को सोने का भाव 225 रुपये के नुकसान के साथ 60,075 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। HDFC सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 60,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। चांदी की कीमत भी 380 रुपये की गिरावट के साथ 75,600 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।
HDFC सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक – जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘दिल्ली के बाजारों में सोने की हाजिर कीमत 225 रुपये की गिरावट के साथ 60,075 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रही थी।’ विदेशी बाजारों में सोना गिरावट के साथ 1,987 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी घटकर 25.05 डॉलर प्रति औंस रह गई। मंगलवार को एशियाई बाजारों के कारोबार के घंटों में सोने में गिरावट का रुख था। -
एनटीपीसी, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ने परमाणु बिजलीघरों के विकास के लिये समझौता किया
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी ने परमाणु बिजली परियोजनाओं के विकास के लिये सोमवार को न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआईएल) के साथ संयुक्त उद्यम समझौता किया। संयुक्त उद्यम कंपनी शुरू में दो दबावीकृत भारी-जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) परियोजनाएं... चुटका मध्य प्रदेश परमाणु बिजली परियोजना और माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु बिजली परियोजना विकसित करेगी। जहां चुटका मध्य प्रदेश परमाणु बिजली परियोजना के तहत 700-700 मेगावॉट क्षमता की दो इकाइयां लगायी जाएंगी, वहीं राजस्थान परमाणु परियोजना के तहत 700 मेगावॉट की चार इकाइयां लगायी जाएंगी। बिजली मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘एनटीपीसी लि. ने परमाणु बिजली परियोजनाओं के विकास के लिये न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ पूरक संयुक्त उद्यम समझौता किया है।'' समझौते पर हस्ताक्षर एनटीपीसी के निदेशक (परियोजना) उज्ज्वल कांति भट्टाचार्य और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के निदेशक (परियोजना) रंजय शरण ने किये। -
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बताया कि भारत तथा चीन के नेतृत्व वाले एशिया प्रशांत क्षेत्र का विकास 2022 के तीन दशमलव 8 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष चार दशमलव छह प्रतिशत तक बढने का अनुमान है। आईएमएफ ने अपने क्षेत्रीय आर्थिक सर्वेक्षण-एशिया तथा प्रशांत की जारी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी। वॉशिंगटन स्थित अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बताया कि यह क्षेत्र वैश्विक विकास में लगभग 70 प्रतिशत योगदान करेगा। एशिया तथा प्रशांत क्षेत्र 2023 में विश्व के सबसे प्रमुख क्षेत्रों में सबसे अधिक गतिशील रहेगा। भारत तथा चीन के इस सर्वेक्षण में आईएमएफ की रिपोर्ट कहती है कि इस क्षेत्र की दो सबसे बडी उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस वर्ष वैश्विक विकास में लगभग आधे का योगदान कर सकती हैं। इसके साथ एशिया तथा प्रशांत की शेष अर्थव्यवस्थाएं अतिरिक्त पांचवें भाग का योगदान कर सकती हैं। एशिया की गतिशीलता चीन की स्थिति में सुधार और भारत के विकास से संचालित होगी। वहीं 2023 में अन्य क्षेत्रों के साथ एशिया के शेष भागों में विकास निचले स्तर पर रहने की संभावना है।
इस बीच, आईएमएफ ने बताया कि वर्ष 2023 वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये एक चुनौतिपूर्ण वर्ष साबित हो सकता है। कडी मौद्रिक नीति के कारण धीमी गति के वैश्विक विकास और रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव आर्थिक गतिविधियों पर जारी रहेगा। आईएमएफ का कहना है कि मुद्रास्फीति के दबाव का बने रहना और अमरीका तथा यूरोप में वित्तीय क्षेत्र की मौजूदा समस्याएं जटिल आर्थिक परिदृश्य में अतिरिक्त अनिश्चितता बढायेगी। -
फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री नवीन जिन्दल ने चिकित्सा शिक्षा के अग्रणी संस्थान में 108 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहरायारायपुर । फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एफएफओआई) गर्व और सम्मान के साथ प्रतिदिन राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के माध्यम से देशभक्ति प्रदर्शित करने के लिए नागरिकों को जागरूक करने का अपना अभियान निरंतर चला रहा है और इसी मिशन के तहत सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी), पुणे के प्लेटिनम जुबली समारोह में फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री नवीन जिन्दल ने 108 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उसे राष्ट्र को समर्पित किया।1 मई, 1948 को स्थापित एएफएमसी एक प्रसिद्ध चिकित्सा संस्थान है जो चिकित्सा और नर्सिंग छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह संस्थान न केवल शांतिकाल बल्कि युद्ध के समय भी सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ तैयार करने के लिए जाना जाता है। आज यहां विशालकाय राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में राज्यसभा सांसद लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डीपी वत्स, डीजी-एएफएमएस लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह और एएफएमसी, पुणे के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोतवाल सहित सेना के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।विशालकाय ध्वज लोकार्पण के अवसर पर अपने संबोधन में श्री नवीन जिन्दल ने प्लैटिनम जुबली समारोह का हिस्सा बनाए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्र की सेवा में एएफएमसी की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, "भारतीय राष्ट्रीय ध्वज देश के नागरिकों के बीच एकता और समानता का प्रतीक है। फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया "हर घर तिरंगा-हर दिन तिरंगा" के उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय ध्वज में निहित संदेश को घर-घर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। एक बातचीत में उन्होंने कहा, &ह्नह्वशह्ल;फ्लैग फाउंडेशन राष्ट्रभक्ति के उद्देश्य से एक शपथ अभियान चला रहा है, मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि एफएफओआई की वेबसाइट पर जाएं और शपथ लें। अपने परिवार, रिश्तेदार को भी शपथ लेने के लिए प्रोत्साहित करें। शपथ के शब्द हैं- &प्त39;&प्त39;मैं संकल्प लेता हूं कि मैं स्वयं को राष्ट्र के लिए समर्पित करूंगा और अपने देश की भलाई के लिए कार्य करूंगा।"श्री जिन्दल ने कहा, &ह्नह्वशह्ल;जब हम अपने राष्ट्रीय ध्वज के नीचे खड़े होते हैं तो हमें इस राष्ट्र को महान बनाने के लिए एक नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पहचानना चाहिए। तिरंगा हमें यह भी याद दिलाता है कि देश और ध्वज से बढ़कर कुछ भी नहीं है।" उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को स्वस्थ रहने के गुर भी दिये और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों को दूर रखने के लिए भोजन में संयम रखने के उपाय भी बताए।इस अवसर पर राज्यसभा सांसद और एएफएमसी के पूर्व निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. डीपी वत्स ने कहा, "मैं देश भर में विशालकाय राष्ट्रीय ध्वज स्थापित करने के लिए श्री नवीन जिन्दल के मार्गदर्शन में फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा किये जा रहे उत्कृष्ट कार्य की सराहना करता हूं। मैं चाहता हूं कि स्कूलों के पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के बारे में एक अध्याय हो ताकि आने वाली पीढिय़ां भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के महत्व को जान सकें।फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के बारे मेंफ़्लैग फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया की स्थापना 1980 के सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत की गई थी। श्री नवीन जिन्दल द्वारा एक दशक लंबी कानूनी लड़ाई जीतने के बाद एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में फाउंडेशन ने देशवासियों को गर्व और सम्मान के साथ साल के 365 दिन अपने घर और प्रतिष्ठान में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रीय ध्वज के माध्यम से प्रतिदिन देशभक्ति प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया।श्री नवीन जिन्दल के एक दशक लंबे कानूनी संघर्ष के परिणामस्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने 23 जनवरी 2004 को फैसला सुनाया कि वर्ष के 365 दिन राष्ट्रीय ध्वज का सम्मानपूर्वक प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इस फैसले के बाद श्री नवीन जिन्दल ने तिरंगा फहराने के अधिकार के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया की स्थापना एक गैर-सरकारी संस्था के रूप में की। तिरंगा हर भारतीय के लिए प्रेरणा का सर्वोच्च प्रतीक है। यह वास्तव में हमारी मातृभूमि के लिए गर्व और सम्मान की सच्ची अभिव्यक्ति है। इस भावना के प्रचार-प्रसार एवं राष्ट्रीय ध्वज से प्रेरणा लेकर देश की भलाई का कार्य करने हेतु लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया विभिन्न परियोजनाएं चला रहा है। -
नई दिल्ली। डिफॉल्टर कर्जदारों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने के लिए केंद्र द्वारा जोर दिए जाने के बाद, अब सरकारी बैंकों द्वारा ‘बट्टे खाते में डाले गए ऋणों’ की वसूली के लिए एक विशेष अभियान जल्दी ही शुरू किया जा सकता है। कर्ज को बट्टे खाते में तब डाल दिया जाता है जब कर्ज ली गई रकम को तय समय के अंदर बैंक में नहीं जमा किया जाता। इन हालातों में बैंक अपनी बुक में non-performing assets (NPAs) को कम करने के लिए कर्ज की रकम को बट्टे खाते में डाल देता है। इसी बट्टे खाते में डाले गए कर्ज को वसूलने के लिए सरकारी बैंक एक विशेष अभियान चलाने जा रहे हैं। सरकार ने बैंकों से कहा है कि बट्टे खाते में डाले गए लोन पर ध्यान दें और इस वित्त वर्ष में कम से कम 2 लाख करोड़ रिकवर करने की कोशिश करें।
2021-22 तक छह साल में सरकारी बैंकों ने 8.16 लाख करोड़ रुपये के बैड लोन अपनी किताब से बट्टे खाते में डाले हैं। RBI के ताजा डेटा के मुताबिक 2022-23 के शुरुआती 9 महीनों में ही, सरकारी बैंकों ने 90,958 करोड़ के बैड लोन को बट्टे खाते में डाल दिया। अधिकारियों ने आगे कहा कि उनके बोर्ड से बातचीत करके, बैंक अपने-अपने टार्गेट तय करेंगे।एक बैंक अधिकारी ने कहा कि बैंक ने बट्टे खाते पर डाले गए लोन की रिकवरी के प्रयास किए हैं लेकिन कुछ केस अभी भी रिकवरी ट्रिब्यूनल और कोर्ट में लंबे समय से फंसे पड़े हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि बैंक वे ही लोन बट्टे खाते में डालते हैं, जिनकी रिकवरी जल्दी होनी मुमकिन न हो। इस तरह से उन लोन को बट्टे खाते में डाल दिया जाता है ताकि उसकी रिकवरी प्रोसेस शुरू की जा सके। -
नई दिल्ली। माल एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन अप्रैल में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 1.87 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह किसी एक महीने में जुटाया गया सबसे ज्यादा GST राजस्व है। जुलाई, 2017 में GST प्रणाली लागू होने के बाद से सबसे ज्यादा टैक्स कलेक्शन का पिछला रिकॉर्ड 1.68 लाख करोड़ रुपये था जो पिछले साल अप्रैल में बना था। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को अप्रैल, 2023 के टैक्स कलेक्शन आंकड़े जारी करते हुए कहा कि पिछले महीने सकल GST कलेक्शन 1,87,035 करोड़ रुपये रहा। इसमें केंद्रीय GST (CGST) 38,440 करोड़ रुपये, राज्य GST (SGST) 47,412 करोड़ रुपये और एकीकृत GST (IGST) 89,158 करोड़ रुपये के अलावा 12,025 करोड़ रुपये का सेस भी शामिल है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘एक साल पहले के समान महीने की तुलना में अप्रैल, 2023 में GST कलेक्शन 12 प्रतिशत ज्यादा रहा है।’’ इस दौरान घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात समेत) से मिलने वाला टैक्स राजस्व साल भर पहले की तुलना में 16 प्रतिशत ज्यादा है। वित्त वर्ष 2022-23 में GST का कुल कलेक्शन 18.10 लाख करोड़ रुपये रहा था, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत ज्यादा है। -
नई दिल्ली। बहुमूल्य धातुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सराफा बाजार में सोमवार को सोने का भाव 105 रुपये के नुकसान के साथ 59,975 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। HDFC सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 60,080 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमत 730 रुपये के उछाल के साथ 75,700 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
HDFC सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक – जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘दिल्ली के बाजारों में सोने की हाजिर कीमत 105 रुपये की गिरावट के साथ 59,975 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रही थी।’ विदेशी बाजारों में सोना गिरावट के साथ 1,981 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी बढ़कर 25.12 डॉलर प्रति औंस हो गई।गांधी ने कहा कि बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले कारोबारियों ने नए सौदों से दूरी बनाए रखी। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड को प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के माध्यम से करदाता आधार बढ़ाने के लिए एक कार्य योजना लागू करने का निर्देश दिया है। वित्त मंत्री सीतारामन ने आज नई दिल्ली में सीबीआईसी के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। उन्होंने सीबीआईसी को अगले सप्ताह तक अपनी स्वचालित जीएसटी रिटर्न जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया। वित्त मंत्री ने करदाता सेवाओं में निरंतर सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने के लिए, उन्होंने सीबीआईसी से पहले से दर्ज मामलों के पीछे के मूल कारण का विश्लेषण करने को कहा।
- -पंजाब की जनता के कल्याण के लिए आजीवन समर्पित रहे-वे एक नेकदिल इंसान थे, उनके निधन से राजनीति के एक युग का अंत हो गया-बठिंडा पहुंचकर श्री जिन्दल ने पुष्पांजलि अर्पित की, सुखबीर सिंह बादल से मिलकर दुख साझा कियारायपुर। कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद श्री नवीन जिन्दल ने आज पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल को बठिंडा के बादल गांव स्थित उनके आवास पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि श्री बादल लोकप्रिय और महान नेता थे, जो आजीवन किसानों और कमजोर वर्गों के हितों के लिए संघर्षरत रहे।श्री जिन्दल ने आज पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सरदार सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात कर उनके साथ दुख सांझा किया और पूरे परिवार को संकट की इस घड़ी में धैर्य बंधाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरदार प्रकाश सिंह बादल जनता के कल्याण के लिए आजीवन समर्पित रहे। वे एक नेकदिल इंसान थे, उनके निधन से राजनीति के एक युग का अंत हो गया।गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक सरदार प्रकाश सिंह बादल का 27 अप्रैल को निधन हो गया था। वे 1970-71, 1977-80, 1997-2002 और 2007-2017 तक पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। वे आजीवन किसानों के हितैषी रहे। उन्हें 16 अप्रैल को सांस लेने में परेशानी होने पर मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 27 अप्रैल को उनका निधन हो गया। वे पंजाब के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री रहे ही, सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
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मुंबई. होटल, रेस्तरां एवं संबंधित क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में नौकरी की मांग 60 प्रतिशत बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका प्रमुख कारण कोविड महामारी के बाद प्रतिबंध हटने के साथ यात्रा में आई तेजी है। नौकरियों के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट इन्डीड ने एक रिपोर्ट में कहा कि रोजगार देने वालों की तरफ से नौकरी के विज्ञापन देने के मामले में पिछले एक साल में लगभग 60 प्रतिशत वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा होटल, रेस्तरां उद्योग में सुधार के संकेत देता है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट इन्डीड मंच पर उपलब्ध मार्च, 2022 से मार्च, 2023 के बीच के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। होटल-रेस्तरां क्षेत्र में नौकरी देने के मामले में पिछले साल से 20.37 प्रतिशत वृद्धि के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सबसे आगे है। इसके बाद मुंबई और फिर बेंगलुरु का स्थान है। आंकड़ों के अनुसार, अंतरराज्यीय परिवहन बढ़ने के साथ ही होटल-रेस्तरां क्षेत्र में नौकरी के अवसरों की बढ़ती मांग भी जारी है। इन्डीड इंडिया एंड सिंगापुर करियर एक्सपर्ट सौमित्र चंद ने कहा, “कोविड महामारी के बाद से होटल-रेस्तरां उद्योग शायद सबसे प्रभावित क्षेत्रों में से एक था। यात्रा और पर्यटन फिर से बढ़ने के साथ इस क्षेत्र की प्रगति प्रभावशाली रही है क्योंकि यह तीव्र गति से बढ़ रहा है।” रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा नौकरियों में उछाल होटल प्रबंधक और यात्रा सलाहकारों के पदों पर आई, जिसके बाद रिजार्ट प्रबंधकों और यात्रा एजेंट की नौकरियां हैं।
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नई दिल्ली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सराफा बाजार में शुक्रवार को सोने का भाव 420 रुपये टूटकर 59,980 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। HDFC सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी।
पिछले कारोबारी सत्र में सोना 60,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। चांदी की कीमत भी 570 रुपये की गिरावट के साथ 74,600 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक श्रीराम अय्यर ने कहा, ‘विदेशों में कीमतों में कमजोर रुख के अनुरूप घरेलू सोने की कीमतों में गिरावट रही।’ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरावट के साथ 1,982 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी भी फिसलकर 24.82 डॉलर प्रति औंस रह गई। -
नई दिल्ली। पंजाब में मंडियों में गेहूं की आवक गुरुवार को एक करोड़ टन के पार हो गई। राज्य सरकार ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। कुल आवक में से लगभग 3.5 लाख टन व्यापारियों ने जबकि शेष गेहूं सरकारी एजेंसियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा।
बयान के अनुसार राज्य में गेहूं खरीद एक अप्रैल को शुरू हो गई थी लेकिन बेमौसम बरसात के कारण राज्य में कई स्थानों पर इसमें कुछ दिन पहले ही तेजी आई है। पंजाब के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारुचक ने कहा कि गेहूं खरीद अंतिम चरण में पहुंच गई है। गेहूं की कुल आवक पहले से ही एक करोड़ टन के पार हो गई है और इसमें पिछले वर्ष की कुल खरीद- 96 लाख टन को पीछे छोड़ दिया है।पिछले वर्ष की आवक से तुलना करते हुए मंत्री ने कहा कि “पंजाब के लिए यह गर्व का विषय है कि पूरे देश में आपूर्ति के मामले में पंजाब एक बार फिर सबसे आगे हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर कुल खरीद के लगभग 50 प्रतिशत गेहूं की उपज पंजाब में हुई है।” - नयी दिल्ली. सामाजिक क्षेत्र की ‘अटल पेंशन योजना (एपीवाई)' से 2022-23 में 1.19 करोड़ से अधिक नए अंशधारक जुड़े हैं जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उसने बताया कि 2021-22 में इस योजना से जुड़े वाले नए अंशधारकों की संख्या 99 लाख थी। मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि 31 मार्च, 2023 तक इस योजना से जुड़े अंशधारकों की कुल संख्या 5.20 करोड़ हो गई। अटल पेंशन योजना के तहत अंशधारक को 60 वर्ष की आयु से जीवनपर्यंत 1,000 से 5,000 रुपये की न्यूनतम गारंटी वाली पेंशन मिलती है और यह उनके द्वारा किए जाने वाले योगदान पर निर्भर करता है।
- नयी दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि विदेशों में स्थित अपने कारोबार की वृद्धि और वित्तपोषण के लिए उसने बॉन्ड के जरिये 75 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने शेयर बाजारों को यह जानकारी देते हुए कहा कि पांच साल की परिपक्वता अवधि वाले 75 करोड़ डॉलर के वरिष्ठ असुरक्षित निश्चित दर वाले बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनकी दर 4.875 प्रतिशत है जो अर्द्धवार्षिक आधार पर देय है। बैंक ने कहा कि इन बॉन्ड को पांच मई 2023 को उसकी लंदन शाखा से जारी किया जाएगा और सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज और गिफ्ट सिटी स्थित इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाएगा। इस महीने की शुरुआत में एसबीआई के निदेशक मंडल ने वैश्विक परिचालन के वित्तपोषण के लिए बॉन्ड के माध्यम से दो अरब डॉलर (लगभग 16,000 करोड़ रुपये) जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय बैंक घरेलू ऋणदाताओं के ‘कारोबार के मॉडल' पर नजदीकी नजर रखे हुए है क्योंकि खराब रणनीतियों से एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। दास ने अमेरिका में हाल की घटनाओं के लिए खराब कारोबारी मॉडल को भी एक वजह बताते हुए कहा कि भारत की बैंकिंग प्रणाली मजबूत बनी हुई है और वैश्विक घटनाक्रमों का इसपर खास प्रतिकूल प्रभाव देखने को नहीं मिला है। उनका यह बयान सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने के कुछ सप्ताह बाद आया है। इस घटनाक्रम से अमेरिका और यूरोप के वित्तीय क्षेत्र में संकट की स्थिति पैदा हो गई है। दास ने कहा कि अमेरिका के हाल के घटनाक्रमों से यह सवाल खड़ा हुआ है कि क्या व्यक्तिगत बैंकों का कारोबारी मॉडल सही था। रिजर्व बैंक प्रवर्तित ‘कॉलेज ऑफ सुपरवाइजर्स' द्वारा वित्तीय क्षेत्र की मजबूती पर एक वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए दास ने कहा, ‘‘भारत की वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई और कुछ आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय अस्थिरता का इसपर प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक ने अब बैंकों के कारोबारी मॉडल पर नजदीकी निगाह रखनी शुरू की है। इनमें किसी तरह की खामी से संकट पैदा हो सकता है।'' दास ने कहा कि कारोबारी मॉडल कई बार बैंक के बही-खाते के कुछ हिस्सों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, जो बाद में एक बड़ा संकट बन सकता है। दास ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक के दबाव परीक्षणों से पता चलता है कि अत्यंत संकट वाली स्थिति में भी भारतीय बैंक पूंजी पर्याप्तता अनुपात को न्यूनतम जरूरत से ऊपर रखने में सफल रहेंगे।'' उन्होंने बैंकों के प्रबंधन और निदेशक मंडल से नियमित रूप से वित्तीय जोखिम का आकलन करें और पर्याप्त पूंजी और तरलता ‘बफर' बनाने पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि बैंकों की लगातार मजबूती और सतत वृद्धि के लिए यह न्यूनतम नियामकीय जरूरत से अधिक होना चाहिए। गवर्नर ने अंशधारकों को सतर्क करते हुए कहा कि दुनियाभर में परंपरा से हटकर नीतियां अपनाई जा रही हैं। ऐसे में वित्तीय क्षेत्र में किसी तरह का ‘आश्चर्य' कहीं से भी देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक भविष्य के लिए भारतीय वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने और इसकी सतत वृद्धि को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। गवर्नर ने कहा कि भारतीय बैकों ने हाल के समय में दबाव और पूंजी बफर के मोर्चे पर सुधार दर्ज किया है। बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां अनुपात दिसंबर, 2022 में घटकर 4.41 प्रतिशत रह गया है, जो मार्च, 2022 में 5.8 प्रतिशत और 31 मार्च, 2021 को 7.3 प्रतिशत था।
- मुंबई।. विदेशी कोषों के प्रवाह तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एवं दूरसंचार कंपनियों के शेयरों में लिवाली बढ़ने से बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार चौथे कारोबारी दिन बढ़त के साथ बंद हुए। विश्लेषकों के मुताबिक, इन्फोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियों में जमकर लिवाली होने से कारोबारी धारणा को समर्थन मिला। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 348.80 अंक यानी 0.58 प्रतिशत चढ़कर 60,649.38 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 397.73 अंक तक उछल गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का मानक सूचकांक निफ्टी भी 101.45 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,915.05 अंक पर पहुंच गया। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, इन्फोसिस, भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, आईटीसी, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और नेस्ले के शेयर लाभ में रहे। दूसरी तरफ हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, भारतीय स्टेट बैंक, एशियन पेंट्स और विप्रो के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। व्यापक बाजार में बीएसई स्मॉलकैप 0.62 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि मिडकैप में 0.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘घरेलू बाजार धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं। विदेशी निवेशकों का पूंजी प्रवाह बढ़ने और सकारात्मक तिमाही नतीजों से उसे बल मिल रहा है। हालांकि, अगले सप्ताह आने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर करीबी नजर रहेगी।'' रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के उपाध्यक्ष (तकनीकी शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘वायदा अनुबंधों का मासिक निपटान होने के दिन बाजार में मजबूती बनी रही। चौतरफा तेजी के दौर में रियल्टी, आईटी और वाहन क्षेत्रों को सर्वाधिक लाभ हुआ।'' एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया के कॉस्पी, जापान के निक्की, चीन के शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग के हैंगसेंग में बढ़त दर्ज की गई। यूरोप के बाजार दोपहर के सत्र में सकारात्मक दिशा में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को काफी हद तक गिरावट के साथ बंद हुए थे। इस बीच अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.40 प्रतिशत चढ़कर 78.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशक एक बार फिर से खरीदार साबित हुए हैं। एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 1,257.48 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
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नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में मजबूती के रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने का भाव 520 रुपये के उछाल के साथ 61,120 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी।पिछले कारोबारी सत्र में सोना 60,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।चांदी की कीमत भी 440 रुपये की तेजी के साथ 75,340 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा कि दिल्ली में सोने की हाजिर कीमत 520 रुपये की तेजी के साथ 61,120 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।’’ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना तेजी के साथ 1,999 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि चांदी भी तेजी के साथ 25.05 डॉलर प्रति औंस हो गई। -
नयी दिल्ली. देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने बुधवार को कहा कि वह 10 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता वाले एक नए संयंत्र की स्थापना पर विचार कर रही है। घरेलू बाजार के साथ निर्यात की बढ़ती मांग पूरा करने के लिए यह संयंत्र लगाने की योजना है। एमएसआई के चेयरमैन आर सी भार्गव ने मार्च तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में इस नए संयंत्र की स्थापना से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संयंत्र इस समय हरियाणा के सोनीपत में निर्माणाधीन संयंत्र से अलग स्थापित किया जाएगा। हालांकि, अभी नए संयंत्र पर किए जाने वाले निवेश और उसकी जगह के बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन कंपनी के निदेशक मंडल ने 10 लाख वाहन उत्पादन की वार्षिक क्षमता वाला नया संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को सिद्धांत रूप से स्वीकार कर लिया है। एमएसआई के मुताबिक, नया संयंत्र चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा। इसे बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्रमशः विकसित किया जाएगा। दिग्गज वाहन कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में करीब 8,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करने का लक्ष्य रखा है। समाप्त वित्त वर्ष 2022-23 में इसने 6,300 करोड़ रुपये चिह्नित किए थे। कंपनी के पास मार्च, 2023 के अंत में करीब 45,000 करोड़ रुपये की नकदी थी। मारुति फिलहाल करीब 11,000 करोड़ रुपये की लागत से सोनीपत के खरखोदा में अपना नया संयंत्र लगा रही है। करीब 2.5 लाख वाहन प्रति वर्ष की शुरुआती क्षमता वाले इस संयंत्र के 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है। सोनीपत संयंत्र की कुल क्षमता 10 लाख वाहन की होगी। भार्गव ने कहा, ‘‘हमने सुजुकी के साथ मिलकर अगले आठ साल में आने वाली अनुमानित मांग का जायजा लिया। ऐसी उम्मीद है कि खरखोदा संयंत्र की पूरी क्षमता का इस्तेमाल हो जाएगा। ऐसे में हमने 10 लाख वाहनों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता खड़ी करने का फैसला किया है।'' उन्होंने कहा कि नए संयंत्र के वित्तपोषण के लिए कंपनी आंतरिक स्रोतों का सहारा लेगी। हालांकि, उन्होंने नए संयंत्र पर किए जाने वाले निवेश का आंकड़ा नहीं बताया लेकिन इसके सोनीपत संयंत्र पर हो रहे निवेश से थोड़ा अधिक होने के संकेत जरूर दिए। मारुति के फिलहाल दो संयंत्र मानेसर और गुरुग्राम में हैं जिनकी सालाना क्षमता करीब 15 लाख वाहनों की है। इसके अलावा कंपनी 7.5 लाख इकाइयों की क्षमता वाली सुजुकी मोटर गुजरात (एसएमजी) के साथ अनुबंधित उत्पादन भी करती है। कंपनी ने कहा कि टोयोटा के साथ साझेदारी के तहत उसे एक तीन कतार वाला एक बड़ा हाइब्रिड मॉडल मिलने वाला है। भार्गव के मुताबिक, कंपनी वर्ष 2030 तक अपने पोर्टफोलियो में छह इलेक्ट्रिक मॉडल जोड़ने का लक्ष्य रखती है। इनमें से अधिकांश मॉडल एसयूवी खंड में होंगे।
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मुंबई. वैश्विक बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच स्थानीय शेयर बाजार में बुधवार को चुनिंदा शेयरों में जोरदार लिवाली होने से मानक सूचकांक लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक सेंसेक्स 169.87 अंक यानी 0.28 प्रतिशत चढ़कर 60,300.58 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 232.08 अंक तक उछल गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 44.35 अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़त के साथ 17,813.60 अंक पर पहुंच गया। विश्लेषकों के मुताबिक, इंडसइंड बैंक, नेस्ले इंडिया और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी कंपनियों में मांग आने से कारोबारी गतिविधियां तेज रहीं। हालांकि, विदेशी पूंजी की निकासी जारी रहने और कमजोर वैश्विक संकेतों की वजह से तेजी की रफ्तार पर असर पड़ा। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में पावरग्रिड में सर्वाधिक 2.59 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ इंडसइंड बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, नेस्ले, एचसीएल टेक, एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स, एचडीएफसी बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचडीएफसी के शेयरों में भी तेजी रही। दूसरी तरफ बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में 0.84 प्रतिशत तक की गिरावट रही। व्यापक बाजार में बीएसई मिडकैप 0.97 प्रतिशत चढ़ गया जबकि स्मॉलकैप में 1.29 प्रतिशत की बढ़त रही।
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू बाजारों में काफी हद तक अमेरिकी बाजारों की छाया हावी रही। हालांकि, अमेरिकी वायदा में सुधार से बाजार की स्थिति कुछ बेहतर हुई। कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड में इक्विटी शोध (खुदरा) प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, ‘‘बृहस्पतिवार को वायदा एवं विकल्प सौदों का मासिक निपटान होने वाला है लिहाजा निवेशक अपनी स्थिति को बरकरार रखना चाह रहे हैं। लेकिन वैश्विक कमजोरी के बीच बाजार का टिके रहना अपने बुनियादी पहलुओं के मजबूत रहने का संकेत है।" एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग चढ़कर बंद हुआ, जबकि जापान का निक्की और चीन का शंघाई कम्पोजिट नुकसान में रहे। यूरोपीय बाजार दोपहर के सत्र में नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे। एक दिन पहले अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट आई थी। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.17 प्रतिशत चढ़कर 80.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पूंजी की निकासी जारी रखी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को 407.35 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे। -
नयी दिल्ली. देश की प्रमुख वाहन कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) के सभी वाहन अब कड़े उत्सर्जन मानकों के अनुरूप होंगे। कंपनी ने भारत चरण-छह (बीएस-छह) व्यवस्था के तहत उत्सर्जन नियमों का कड़ाई से पालन करने के उद्देश्य से अपने सभी श्रेणी के वाहनों को उन्नत किया है। कंपनी ने मंगलवार को बयान में कहा कि सभी हैचबैक, सेडान, एमपीवी (बहु-उद्देश्यीय वाहन), एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी वेहिकल) और वाणिज्यिक वाहन अब नये बीएस-छह के दूसरे चरण के वास्तविक ड्राइविंग उत्सर्जन नियमन के अनुरूप होंगे। साथ ही यह ई-20 ईंधन यानी 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन के भी अनुकूल हैं। बीएस-छह मानकों के दूसरे चरण का मुख्य आधार वास्तविक ड्राइविंग उत्सर्जन नियमन है।
इसमें कहा गया है कि नया वास्तविक ड्राइविंग उत्सर्जन अनुपालन व्यवस्था के तहत मारुति सुजुकी की कारों में उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली की वास्तविक समय पर निगरानी के लिये एक अत्याधुनिक प्रणाली होगी। यह किसी भी गड़बड़ी के मामले में चालकों को सूचित करेगी। मारुति की कार इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण (ईएससी) प्रणाली से लैस होगी। इस प्रणाली से गाड़ी चलाते समय चालकों का प्रतिकूल परिस्थिति में भी कार पर पूरी तरह से नियंत्रण बना रहता है। कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी सी वी रमन ने कहा, ‘‘मारुति सुजुकी में हम अपने वाहनों से उत्सर्जन को कम करने के लिये हमेशा नये उपाय कर रहे हैं। सरकार का नए बीएस-छह दूसरे चरण के मानदंडों को शामिल करने का कदम वाहनों से उनके पूरे जीवनकाल में उत्सर्जन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मारुति सुजुकी फिलहाल देश में 15 मॉडल बेचती है। -
मुंबई. इलेक्ट्रिक मोइलेबिलिटी स्टार्टअप जिप इलेक्ट्रिक ने कहा कि वर्ष 2024 तक अंतिम छोर तक डिलिवरी की सुविधा देने के लिए उसकी योजना जोमैटो के साथ मिलकर एक लाख इलेक्ट्रिक स्कूटर तैनात करने की है। जिप इलेक्ट्रिक ने बयान में कहा कि समझौते के तहत, कंपनी देश भर के विभिन्न शहरों में अंतिम छोर तक डिलिवरी सुविधा के लिए जोमैटो को डिलिवरी भागीदारी भी प्रदान करेगी। कंपनी ने कहा कि टिकाऊ परिवहन योजना के हिस्से के रूप में इस समय उसके 13,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेवा में हैं। कंपनी का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन में 3.5 करोड़ किलोग्राम तक की कमी लाना है। बयान में कहा गया है कि कंपनी का 2024 तक ईवी के जरिये से एक करोड़ से अधिक हरित डिलिवरी प्राप्त करने का लक्ष्य है।
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मुंबई. देश में शारीरिक श्रम की प्रधानता वाले रोजगार की कुल संख्या मार्च में सालाना आधार पर सात प्रतिशत बढ़कर 57,11,154 हो गई। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च के महीने में सुरक्षा सेवाओं में कार्यरत कामगारों की जरूरत बढ़ने से कुल श्रम-बहुल रोजगार में बढ़ोतरी दर्ज की गई। एक साल पहले मार्च, 2022 में श्रम-बहुल रोजगार की संख्या 53,38,456 रही थी। डिजिटल रोजगार मंच ‘बिलियन करियर्स' की तरफ से तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की तुलना में देश में सुरक्षा सेवाओं से जुड़े रोजगारों की संख्या तिगुनी हो गई है। मार्च के महीने में इस श्रेणी के रोजगार सालाना आधार पर 219 प्रतिशत बढ़ गए। क्वेस कॉर्प की अनुषंगी इकाई बिलियन करियर्स की यह रिपोर्ट कहती है कि कंपनियां अब मिलनसार, दोस्ताना और कार्यस्थल पर विवाद निपटाने की क्षमता रखने वाले सुरक्षा गार्ड को रखना पसंद कर रही हैं। इनकी बढ़ती संख्या सुरक्षित कामकाजी माहौल को अहमियत देने का सबूत है। मार्च, 2022 से मार्च, 2023 तक के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल भर पहले की तुलना में प्रशासनिक एवं मानव संसाधन कार्यों से जुड़े रोजगार में भी 61.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बिलियन करियर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमित निगम ने कहा, ‘‘बदलते आर्थिक परिवेश के बावजूद श्रम-बहुल कार्यों की मांग सुरक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों में बढ़ी है। यह कार्यस्थल पर विभिन्न पक्षों को संभाल सकने वाले पेशेवरों की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में मंगलवार को कहा कि भारत को कृषि उत्पादन में कमी, दामों में वृद्धि और भूराजनीतिक परिवर्तन जैसे संभावित जोखिमों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। मंत्रालय ने मासिक आर्थिक समीक्षा के मार्च संस्करण में कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अनुमानों के अनुरूप है लेकिन कुछ कारक ऐसे भी हैं जो वर्तमान की अनुमानित वृद्धि और मुद्रास्फीति के परिणामों के अनुकूल संयोजन को प्रभावित कर सकते हैं। समीक्षा में कहा गया, ‘‘अल नीनो जिससे सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, कृषि उपज में कमी और दामों में वृद्धि, भूराजनीतिक परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे संभावित जोखिमों को देखते हुए सतर्क रहना होगा, यह आवश्यक है।'' इसमें कहा गया कि ये तीनों कारक वर्तमान की अनुमानित वृद्धि और मुद्रास्फीति के परिणामों के अनुकूल संयोजन को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें कहा गया कि महामारी और भूराजनीतिक संघर्ष के कारण उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था 2022-23 में मजबूत रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘अर्थव्यवस्था में मजबूती देखी जा रही है, इसके सात प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का अनुमान है जो अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि की तुलना में अधिक है। चालू खाता घाटे में सुधार, मुद्रास्फीति के दबाव में कमी और नीतिगत दरों में वृद्धि का सामना करने के लिए पर्याप्त मजबूती वाली बैंकिंग प्रणाली से वृहद आर्थिक स्थिरता बढ़ती दिख रही है और इससे वृद्धि दर और भी टिकाऊ बनी है।'' वित्तीय क्षेत्र के बारे में रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग क्षेत्र पर निगरानी बढ़ाई है और इसके दायरे में आने वाले संस्थान बढ़े हैं। बैंकों पर दबाव का परीक्षण भी समय-समय पर किया जाता है। समीक्षा के मुताबिक जमा की तेजी से निकासी होने की आशंका नहीं है क्योंकि 63 प्रतिशत जमा परिवारों द्वारा किए जाते हैं जो निकासी जल्द नहीं करते। इन सब कारकों की वजह से भारत के बैंक अमेरिका और यूरोप के बैंकों से अलग हैं। हालांकि 2021-22 में पूरे वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 5.5 प्रतिशत था जो 2022-23 में बढ़कर 6.7 प्रतिशत पर पहुंच गया लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह 2022-23 की दूसरी छमाही में 6.1 प्रतिशत पर ही रहा जो पहली छमाही में 7.2 प्रतिशत था। इसमें कहा गया, ‘‘अंतरराष्ट्रीय जिसों के दामों में नरमी, सरकार के त्वरित कदमों और आरबीआई की मौद्रिक सख्ती ने घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति को काबू करने में मदद दी। परिवारों और व्यवसायों के लिए विभिन्न सर्वेक्षणों में भी ऐसा देखा गया है कि मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाएं भी स्थिर प्रतीत हो रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि चालू खाता घाटे के कम होने, विदेशी पूंजी की आवक से विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हो रही है।


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