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 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशों पर शासकीय मेडिकल कालेजों का किया जा रहा है सशक्तिकरण

 -स्वशासीय सोसायटीज को वित्तीय स्वतंत्रता देने से मेडिकल कालेजों में आ रहे हैं बेहतर परिणाम 

-शासकीय मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में विशेष जनजाति पहाड़ी कोरवा मरीज के जटिल फ्रैक्चर का हुआ सफल ऑपरेशन
 रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य मे स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर खासा ध्यान दिया जा रहा है। तरक्की और राज्य में सुशासन का सफर स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार के रूप में लगातार नजर आ रहा है।  स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग ने नई सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया है। इसी दिशा में स्व. श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायगढ़ से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ लगातार अपनी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए और मरीजों के बेहतर इलाज के लिए प्रतिबद्ध है। इस कड़ी में अस्थि रोग विभाग में भर्ती विशेष जनजाति पहाड़ी कोरवा के सदस्य श्री करण सिंह कोरवा के जटिल व दुर्लभ फ्रैक्चर का सफल ऑपरेशन किया गया। करण सिंह कोरवा कोरबा  जिले में अपने गांव सियान जाते समय मोटरसाइकिरल से गिर गये थे। इससे उनके घुटने में गहरी चोट आई थी। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायगढ़ में भर्ती कराया गया था । उनके घुटने के नीचे की अस्थि का टुकड़ा (टिबिया कॉन्डाइल) जोड़ से टूट कर पीछे की तरफ रक्त वाहनियों एवं नसों के बीच में फंसा हुआ था। इस तरह का केस सामने आना अत्यंत दुर्लभ है। 
इससे रक्त वाहनियों तथा नसों (नर्व) को चोट लगने से पैरों में लकवा अथवा पैर काटने का खतरा लगातार बना होता है। ऑपरेशन के दौरान भी रक्त वाहनियों अथवा नसों में चोट लगने से पैरों में सुन्नपन का खतरा बना रहता है। मेडिकल कालेज रायगढ़ के अस्थि रोग विभाग के चिकित्सकों ने यह जटिल ऑपरेशन सफलता पूर्वक किया गया। इससे वर्तमान में मरीज अपना घुटना मोड़ पा रहा है  तथा मरीज का पैर भी बच गया है। कुछ ही दिनों में मरीज वॉकर के सहारे से चलना भी शुरु कर सकता है। इस तरह मेडिकल कॉलेज रायगढ़ एक और उपलब्धि के साथ प्रगति की ओर अग्रसर है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य के शासकीय मेडिकल कालेजों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें 2 करोड़ रूपए तक के कार्यों के लिए वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान की है। इससे मरीजों के त्वरित इलाज के लिए अब राज्य स्तर पर स्वीकृति लेने की आवश्यकता न होकर मेडिकल कालेज की स्वशासी सोसायटी खुद ही निर्णय ले सकती है।

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