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कृषि शिक्षा से खुले हैं देश में विकास के नये द्वार : राज्यपाल

 *ऊर्जा से भरे प्रतिभाशाली युवाओं के सहयोग से होगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण : मुख्यमंत्री*

 

*_इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री_*

*_4 हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रदान की उपाधि, विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक वितरित_*

रायपुर/राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि कृषि एक शानदार व्यवसाय है और इससे जुड़कर कृषि स्नातक देश के विकास में अपना योगदान दे सकते है। कृषि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर नवीन कृषि अनुसंधानों, प्रौद्योगिकी तथा नवाचारां का उपयोग कर देश की तरक्की में भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने जय जवान जय किसान जय विज्ञान का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि के क्षेत्र में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग ने भारत में विकास के नये द्वार खोले हैं। श्री डेका ने कृषि स्नातकों तथा शोधर्थियों से आव्हान किया कि वे अपने ज्ञान के उपयोग से भारत को विश्व का सबसे विकसित देश बनाने में अहम भूमिका निभाएं। राज्यपाल श्री डेका आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। दीक्षांत समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम भी शामिल हुए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 तक उत्तीर्ण चार हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पी.एच.डी की उपाधियां प्रदान की गई। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को 16 स्वर्ण, 18 रजत एवं 4 कास्य पदक प्रदान किए गए। दीक्षांत उद्बोधन इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एण्ड बायोटेक्नोलॉजी, नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. वांगा शिवा रेड्डी द्वारा दिया गया। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विद्यार्थियों को दीक्षोपदेश दिया। इस अवसर पर भव्य शोभा यात्रा भी निकाली गई जिसमें अतिथियों सहित विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, प्रबंध मण्डल के सदस्य, प्रशासनिक तथा विद्यापरिषद के सदस्य तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी शामिल हुए।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि देश के लगभग 30 करोड़ बच्चे, युवा विभिन्न स्तरों पर शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं। उनके उज्जवल भविष्य के लिए गुणवत्ता युक्त भोजन, शिक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना हम सभी की प्राथमिकता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू कर पूरे देश में शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम खोले गए हैं। जिसमें डिग्री के साथ कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। भारत को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कृषि की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश और दुनिया की बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए खाद्यान्न एवं अन्य भोज्य सामग्री की हमेशा जरूरत पड़ेगी। उन्होंने डॉ स्वामीनाथन तथा डॉ. कुरियन के योगदानों का जिक्र करते हुए हरित क्रांति तथा श्वेत क्रांति के माध्यम से देश को खाद्यान्न एवं दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब नीली क्रांति का दौर है और आज मत्स्य पालन में देश काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने भूटान और ताइवान प्रवास के दौरान कृषि कार्य से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों को साझा किया। श्री डेका ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की है एवं हम सबको इसे प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य करना है। वर्तमान में हम सभी प्रकार के भोजन, अनाज, तिलहन, सब्जी, फल, दूध, मांस, मछली आदि के साथ लगभग 1000 मिलियन टन भोजन का उत्पादन कर रहे हैं। वर्ष 2047 तक इसे 1500 मिलीयन टन तक बढ़ाना होगा। यह एक चुनौती पूर्ण कार्य है। बदलते मौसम एवं बाजार के उतार चढ़ाव से कृषि में जोखिम बढ़ गया है। श्री डेका ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि ऐसी तकनीक का विकास करें जिससे किसानों की लागत कम हो एवं आय बढ़े। हमें प्राकृतिक खेती एवं दलहन, तिलहन के उत्पादन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता हैं। श्री डेका ने कहा कि हमारे देश के कुल वर्कफोर्स की संख्या का 45 प्रतिशत भाग अभी भी कृषि में लगा हुआ है एवं इस वर्कफोर्स के जीवन यापन को ऊपर उठाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। कम ऊर्जा की आवश्यकता वाले छोटे-छोटे कृषि यंत्र विकसित करे जिससे कृषि में लागत, मानव श्रम एवं विशेष रूप से महिलाओं की मेहनत कम हो सके। कृषि के क्षेत्र में लोगों को बनाए रखना आज एक बड़ी चुनौती है। कृषि कार्य को आसान बनाना एवं उनकी आय बढ़ाना हमारा प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। राज्यपाल ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार तथा कृषि प्रसार के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यां की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विकास में कृषि विश्वविद्यालय के योगदान को रेखांकित किया।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हमेशा कृषि क्षेत्र के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। उन्होंने हमेशा नवाचारों, अनुसंधानों और उद्यमिता के विकास को प्रोत्साहित और प्रेरित किया है। हमारे युवा सकारात्मक ऊर्जा से भरे हैं। उनके पास नये विचार हैं। हमें उन्हें प्रोत्साहित करना है। सुविधाएं उपलब्ध करानी हैं और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना है। मुझे इस बात की खुशी है कि यहां विश्वविद्यालय कैंपस में इसके लिए बहुत अच्छा वातावरण आप लोगों ने उपलब्ध कराया है। जीवन में नई संभावनाओं को प्राप्त करने के लिए शिक्षा बेहद आवश्यक है। हमारा देश अपनी शिक्षा व्यवस्था की वजह से ही विश्व गुरु रहा है। हमें अपनी शिक्षा संस्थाओं को लगातार बेहतर करना होगा ताकि एक बार पुनः भारत वैश्विक शिक्षा का केंद्र बन सके। मुख्यमंत्री श्री साय ने काह कि आधुनिक युग विज्ञान एवं तकनीक का युग है। आपने जो ज्ञान अर्जित किया है, उस ज्ञान एवं तकनीक का उपयोग समाज के हित में, देश एवं प्रदेश के विकास में करने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़वासियों की आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करें और विकसित छत्तीसगढ गढ़ने में अपना बहुमूल्य योगदान दें। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से हम अपने प्रदेश में  कृषि विकास को नई ऊंचाइयों पर स्थापित करेंगे। कृषि वैज्ञानिकों और उद्यमियों की सहभागिता से हम किसानों के जीवन को खुशहाल और समृद्ध बनाएंगे। जिन विद्यार्थियों को आज पदक और उपाधि प्राप्त हुई है, मैं उन सबको हार्दिक बधाई देता हूँ एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न फसलों की 160 से अधिक किस्में और 100 से अधिक उन्नत कृषि तकनीक विकसित की गई है। दुनिया जलवायु परिवर्तन के खतरों से जूझ रही है और इसका सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। यह खुशी की बात है कि कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने वाले बीज तैयार कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का बलरामपुर से लेकर सुकमा तक कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र और कृषि विज्ञान केन्द्र का मजबूत नेटवर्क है जिनकी सहायता से विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कृषि को राज्य की उन्नति का उत्प्रेरक मानते हुए इस विश्वविद्यालय को देश की दूसरी हरित क्रांति का अग्रदूत बनाने का संकल्प लें। अनुसंधान केंद्रों में हो रही अच्छी रिसर्च का पूरा लाभ के लिए इन्हें किसानों तक पहुंचाना होगा। छत्तीसगढ़ के कृषि विश्वविद्यालय में धान के 23,250 जर्मप्लाज्म हैं, जो कि विश्व में दूसरी नम्बर की सर्वाधिक संख्या है। इसके अतिरिक्त अन्य फसलों की लगभग 6000 किस्में विश्वविद्यालय में संग्रहित हैं। कृषि विश्वविद्यालय एक फसली क्षेत्र को बहुफसली क्षेत्र में परिवर्तित करने, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आय एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने हेतु सतत् प्रयत्नशील है। इन सभी उपलब्धियों तथा उत्कृष्ट कार्यों के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति, वैज्ञानिक, छात्र तथा किसान भाई बधाई के पात्र हैं। इनके सतत् प्रयास से प्रदेश में खेती को नई पहचान मिली है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी के क्षेत्र में भी निरंतर प्रगति कर रहा है। नए अनुसंधान और तकनीक के माध्यम से किसान अपना उत्पादन बढ़ा रहे है और आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे है। इस कार्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है। समारोह में दीक्षांत भाषण इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एण्ड बायोटेक्नोलॉजी, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डॉ. वांगा शिवा रेड्डी ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. सी.पी. खरे द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रबंध मण्डल तथा विद्या परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।

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