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संभागीय सरस मेले को मिल रहा अच्छा प्रतिसाद

खरीदारी करने बड़ी संख्या में पहुंच रहे लोग, दिख रहा उत्साह
बिलासपुर/संभाग स्तरीय सरस मेले को मिल रहा लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए विभिन्न सामग्री की खरीददारी करने बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मेले में कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की  बिक्री हो रही है। समूह की दीदियों द्वारा बनाई गई सामग्री को ग्राहकों ने सराहा। मेले में स्टालों के जरिए सामग्री की बिक्री से समूहों को अच्छी आमदनी हो रही है।
     स्व सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की अभिनव योजना है राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन। येाजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त करने के प्रयास किये जा रहे हैं। महिला समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए संभाग स्तरीय सरस मेले का आयोजन 9 मार्च से 12 मार्च तक किया गया है। मेले में दीदियों द्वारा बनाई गई सामग्री लोगों को लुभा रही है।  खरीददारी करने पहुंची श्रीमती ज्योति ने बताया कि मेले में उन्होंने कोसा साड़ी की खरीददारी की है, कम कीमत पर बाजार में इस क्वालिटी की कोसा साड़ी मिलना मुश्किल है, उन्होंने अपील की कि लोग सरस मेले में आकर दीदियों का उत्साह बढ़ाएं। मेले में खरीददारी करने पहंुचे श्री सुरेश कुमार जांगडे ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास सराहनीय है, उन्होंने बताया कि मेले में दीदियों द्वारा बनाए गए गुणवत्तापूर्ण सामग्री कम कीमत पर उपलब्ध है। दीदियों द्वारा बनाए गए कोसा वस्त्र, हर्बल गुलाल, अगरबत्ती, हेंडमेड साबुन, सजावटी सामान, आचार, बड़ी, पापड़ सहित सभी सामग्री अच्छी गुणवत्ता के हैं जिसका लाभ लोगों को लेना चाहिए।
      ग्राम पंचायत नेवरा स्व सहायता की दीदी श्रीमती अश्वनी बंजारे ने बताया कि वह समूह की सचिव है और महिलाओं को साबुन और सर्फ बनाने का प्रशिक्षण देती है। मेले में उनके समूह द्वारा बनाए गए हर्बल साबुन की अच्छी बिक्री हो रही है और उन्हें मुनाफा मिल रहा है। इसी तरह जांजगीर चांपा जिले कि मीनू देवांगन ने बताया कि उनके समूह द्वारा कोसे की साड़ियां बुनी जाती है जिससे समूह की दीदियां आत्मनिर्भर बनी है। कोरबा जिले से आई सुनीता कश्यप ने बताया कि उनके समूह द्वारा कोसा धागा बनाकर उससे साड़ियां बनाई जाती है जिससे समूह की 40 दीदियां आत्मनिर्भर है। मस्तूरी ब्लॉक से आई श्रीमती अंजली पाटनवार ने बताया कि उनके समूह द्वारा अगरबत्ती का निर्माण किया जाता है। समूह के पास अगरबत्ती बनाने की पांच मशीनें है जिससे वे अगरबत्ती निर्माण और पैकिंग का कार्य करती है। इस काम से 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है, उन्होंने बताया कि समूह से जुड़कर महिलाओं में आत्मविश्वास आया है और वे घर से बाहर निकलकर अपनी आजीविका कमा रही है। सरकार द्वारा समूहों को उपलब्ध कराए जाने वाले ऋण से उन्हें काफी मदद मिलती है।  
    उल्लेखनीय है कि मुंगेली नाका मैदान में सरस मेले का आयोजन 9 मार्च से 12 मार्च तक किया गया है जहां दीदियों द्वारा अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। सरस मेले का उद्देश्य स्व सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना है।   

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