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 हर जिले में हो संस्कृत की पाठशाला: कौशल्या  देवी साय

 -  नृत्य नाटिका कलांजलि में मुख्य अतिथि की आसंदी से साय ने बताया- घर में कैसी हो मेहमान नवाज़ी
 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पत्नी कौशल्या देवी साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक जिले में संस्कृत की एक पाठशाला आवश्यक हो। जिसमें पहले से दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई हो और इसके माध्यम से हम अपने धर्म, संस्कृति को भली- भांति समझ सकें। कौशल्या मुक्ताकाश मंच में आयोजित कलांजलि नृत्य नाटिका के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। 
श्रीमती मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे जीवन में पहले धर्म होना चाहिए। फिर कर्म। इसके माध्यम से राजनीति, कैरियर और तमाम रास्ते खुलते चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि घर को मंदिर की तरह रखना और मानना चाहिए। यही वजह है कि हमारे घर में भोजन नहीं प्रसाद पकता है। उनके घर में मेहमान के लिए अलग से भोजन तैयार नहीं किया जाता। पकवान नहीं बनाए जाते, बल्कि घर में जो प्रसाद बना होता है, उसी से शादी में मेहमान का स्वागत सत्कार किया जाता है। 
कॉस्मिक क्रिएशन समिति, महाराष्ट्र मंडल रायपुर और संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन की ओर से आयोजित नृत्य नाटिका के भव्य आयोजन में सुमित्रा देवी साय ने कलांजलि नृत्य नाटिका के आयोजन की जमकर प्रशंसा की और इंदौर के कलाकारों की नृत्य एवं अभिनय शैली  से वे मंत्रमुग्ध रहीं। कौशल्या ने कहा की पुण्य श्लोक राजमाता अहिल्याबाई के जीवन से न केवल नारी समाज को बल्कि संपूर्ण मानव जगत को बहुत कुछ सीखना चाहिए। सनातन की रक्षा के लिए किए गए उनके कार्य आज भी हमारे लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं। कौशल्या देवी ने कहा कि इस विषय उनके पास बोलने के लिए और बहुत कुछ नहीं है इसलिए ऐसे बड़े आयोजन भी होने चाहिए, जिनमें सिर्फ बातें हों, सनातन की धर्म की संस्कृति और परंपरा की। जिसमें हम अपनी भावनाओं को आज की और भावू पीढ़ी के लोगों तक पहुंच सके। 
इस मौके पर विशेष अतिथि महापौर मीनल चौबे ने कविता की प्रीत भरी खूबसूरत पंक्तियों के साथ इंदौर के कलाकारों व दर्शक दीर्घा में बैठी नारीशक्ति, दर्शकों का अभिनंदन किया। साथ ही इस आयोजन की प्रशंसा की। वहीं कार्यक्रम की रूपरेखा सुनिश्चित करने वाले राजमाता अहिल्याबाई त्रिशताब्दी जयंती समारोह के अध्यक्ष एवं पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर सच्चिदानंद शुक्ला ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर से संबंधित बहुत सी ऐसी जानकारी दी, जो दर्शकों श्रोताओं के लिए भी चौंकाने वाली थी। संस्कृति विभाग के डायरेक्टर विवेक आचार्य ने भी कार्यक्रम का संबोधित किया। 
आभार प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि मुख्य अतिथि कौशल्या देवी साय की बातें जीवन में आत्मसात करने योग्य हैं। इसी तरह कलांजलि नृत्य नाटिका के माध्यम से अहिल्याबाई के जीवन दर्शन को भी हमें अपनी जिंदगी में उतारना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन संजय जोशी, शताब्दी पांडे और किशोरीखंगन ने किया।

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