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 "कानून की बारीकियों के साथ रचनात्मकता का संगम": अग्रिम विवेचना, जमानत और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर कार्यशाला संपन्न"

 दुर्ग/ छत्‍तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्रााधिकरण बिलासपुर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय दुर्ग के नवीन सभागार में विधिक ज्ञान और कलात्मकता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के तत्वावधान में "अग्रिम विवेचना, जमानत एवं इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस" जैसे गंभीर, प्रासंगिक और समसामयिक विषयों पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रात: 10:00 बजे आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। 
उक्त कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने कानून के तकनीकी पहलुओं को बहुत ही सरल अंदाज में प्रस्तुत किया। श्रीमती पल्लवी गुप्ता (सहायक जिला अभियोजन अधिकारी दुर्ग) ने 'अग्रिम विवेचना' की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एक बेहतर विवेचना ही न्याय की नींव होती है। श्रीमती शिक्षा मेश्राम (सहायक जिला अभियोजन अधिकारी दुर्ग) ने 'जमानत' के नवीनतम प्रावधानों और प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी। श्री सौरभ शेन्द्रे (असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम दुर्ग) ने वर्तमान डिजिटल युग में 'इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस' की महत्ता, संग्रहण और न्यायालय में उनकी ग्राह्यता पर सारगर्भित वक्तव्य दिया।
इस अवसर पर अपने सारगर्भित उद्बोधन में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने संबोधित किया कि "बदलते दौर में अपराधों की प्रकृति हाईटेक हो गई है, ऐसे में "अग्रिम विवेचना, जमानत एवं इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस" की बारीकियों को समझना अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों के लिए अनिवार्य है।" उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली में अग्रिम विवेचना, जमानत के सिद्धांत तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इनके विधिसम्मत एवं संवेदनशील प्रयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि अग्रिम विवेचना, जमानत एवं इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस वर्तमान आपराधिक न्याय प्रणाली के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने विवेचना को निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं विधिसम्मत ढंग से किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे अपराध के सही अनावरण के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की भी रक्षा होती है। जमानत के संदर्भ में उन्होंने ‘बेल इज़ द रूल, जेल इज़ द एक्सेप्शन’ के सिद्धांत का उल्लेख किया तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विधि के अनुरूप संग्रहण एवं प्रस्तुतीकरण को समय की आवश्यकता बताया।
 रंगोली और पेंटिंग प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र : प्रतिभा ने मोहा मन
 कार्यशाला की गंभीरता के बीच रचनात्मकता के रंगों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा विषय वस्तु पर आधारित एक भव्य और संदेशपरक रंगोली तथा बैनर तैयार किया गया था, जिसकी सभी ने सराहना की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह 'चित्रकला प्रदर्शनी' रही, जिसमें केन्द्रीय जेल दुर्ग के बंदियों और लीगल एड डिफेंस काउंसिल के स्टाॅफ द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया गया। इन पेंटिंग्स के माध्यम से न केवल कला का प्रदर्शन हुआ, बल्कि बंदियों और विधिक कार्यकर्ताओं की छिपी हुई प्रतिभा और भावनाओं को भी एक मंच मिला। इस अवसर पर जिला न्यायालय दुर्ग के न्यायाधीशगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव, जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के अधिवक्तागण, अभियोजन अधिकारीगण और न्यायालयीन एवं विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
 

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