सच्चा नेतृत्व सिर्फ भाषण देने या चुनाव जीतने तक सीमित नहीं: मोहन भागवत
मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि असली नेतृत्व का मतलब भाषण देना, चुनाव जीतना या लोगों को उपदेश देना नहीं है, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करना और सफलता एवं प्रसिद्धि को साझा करना है। एक सच्चे नेता के गुणों का वर्णन करते हुए, भागवत ने एक श्लोक का उल्लेख किया और कहा कि एक नेता के पास ज्ञान होना चाहिए, उसे दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए, सफलता, प्रसिद्धि और भौतिक लाभ सभी के साथ साझा करने चाहिए तथा संघर्ष की स्थिति में एक योद्धा की तरह व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा आयुवर्ग के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए ये टिप्पणियां कीं। भागवत ने कहा, ''असल नेता वे होते हैं जो पीछे से नेतृत्व करते हैं। अंदर से बदलाव लाते हैं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व को लोगों के सामने खड़े होने, भाषण देने या चुनाव जीतने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भागवत ने कहा, ''मैं खुद को नेता नहीं मानता। मैं खुद को एक कार्यकर्ता मानता हूं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का मकसद लोगों को 'प्रकाश' की ओर ले जाना है। भागवत ने कहा, नेतृत्व का मकसद नेता तैयार करना है। इसका मकसद खुद नेता बने रहना नहीं है। मेरे नेतृत्व से नेता बनने चाहिए।








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