हौसलों को मिली उड़ान, ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबल
बिलासपुर/अपने हौसलों और आत्मविश्वास की बदौलत आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है, अब न केवल शहरी महिलाएं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की नई राह मिली है जिससे वे अपना जीवन संवार रही है और अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बन रही है। आज ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की महिलाएं आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इन योजनाओं की बदौलत अब महिलाएं न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।
जिले के कोटा विकासखंड के विचारपुर पंचायत के आश्रित ग्राम जुरेली की सुशीला बाई की जिंदगी में भी सरकारी योजना ने नई उम्मीद जगाई है। पहले सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल होता था, लेकिन स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्हें न केवल आजीविका के साधन मिले हैं साथ ही आत्मविश्वास का भी संचार हुआ है। महतारी वंदन योजना से हर माह मिलने वाली 1000 रुपए की राशि ने भी उन्हें बड़ी राहत दी है। अब वे घर के जरूरी खर्चों के साथ बच्चों की जरूरतों को भी आसानी से पूरा कर पा रही हैं। इसी तरह ग्राम सिलपहरी की उर्वशी भानू भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। वे बताती हैं कि यह राशि उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं है और इससे बच्चों की पढ़ाई और घर के छोटे-मोटे खर्च पूरे करने में मदद मिलती है, साथ ही वे स्व सहायता समूह से जुड़कर टेंट का व्यवसाय भी कर रही हैं जिससे उनकी अपमदनी बढ़ी है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रमतला की विजेता रामसनेही उर्फ अन्नू कोरी की है। उन्होंने रेशम और कोसा बीज उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रमतला रेशम अनुसंधान एवं विकास केंद्र से प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर उन्होंने मात्र एक माह में 12 हजार कोसा बीज तैयार कर एक मिसाल कायम की। उनकी इस उपलब्धि के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा सम्मानित भी किया गया। इस कार्य से उन्हें लगभग 40 हजार रुपए की आय हुई, जिससे उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक संबल दिया और बच्चों की शिक्षा व बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाए। विजेता कोरी को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का घर मिला, महतारी वंदन योजना से हर माह आर्थिक सहायता मिल रही है और बच्चों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना से जुड़े स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने मछली पालन का कार्य भी शुरू किया है, जिससे उनकी आय के नए स्रोत बने हैं।
इसी तरह मस्तूरी विकासखंड के ग्राम कर्रा में महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बिहान योजना के माध्यम से “बर्तन बैंक” की अनूठी पहल शुरू की है। गायत्री महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष गौरी यादव ने बताया कि पहले गांव में शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों में प्लास्टिक और थर्माकोल के डिस्पोजल का अधिक उपयोग होता था, जिससे गंदगी और पर्यावरण प्रदूषण काफी होता था , इसे देखते हुए महिलाओं ने सामूहिक रूप से स्टील के बर्तन खरीदकर बर्तन बैंक की शुरुआत की। अब गांव में होने वाले कार्यक्रमों के लिए ये बर्तन किराए पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे न केवल गांव में डिस्पोजल का उपयोग लगभग बंद हो गया है, बल्कि गांव का वातावरण भी स्वच्छ बना हुआ है। साथ ही बर्तन किराए से होने वाली आय से स्व सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
महिलाओं के हौसलों और सरकारी योजनाओं से मिले संबल से अब ग्रामीण महिलाओं का जीवन बदल रहा है और इस बदलाव से न केवल उनका जीवन संवर रह है बल्कि इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव परिवार समाज और देश पर भी पड़ रहा है, अब सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचकर महिलाओं का जीवन बेहतर बना रही हैं। महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना जैसी पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है सरकारी योजनाओं के सहयोग और अपनी मेहनत ,हौसलों के दम पर ग्रामीण महिलाएं सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। इन योजनाओं से लाभान्वित महिलाएं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की इन योजनाओं ने उन्हें सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।












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