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राजनांदगांव जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, किसान भाई मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप खाद का करें उपयोग

 -  नील हरित शैवाल के उपयोग को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने हेतु चलाया जा रहा जनजागरूकता अभियान
- नील हरित शैवाल मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक

राजनांदगांव  । जिले के सहकारी समितियों में खरीफ 2026 हेतु उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा का भंडारण किया जा चुका है। साथ ही शासन द्वारा 30 अप्रैल 2026 से किसानों को पॉश मशीन के माध्यम से खाद वितरण किए जाने संबंधी निर्देश भी प्रसारित किए गए हैं। इस वर्ष खरीफ सीजन में धान के अतिरिक्त दलहन एवं तिलहन फसलों में उपयोग होने वाले उर्वरकों की मांग के अनुरूप खाद का भंडारण समय पूर्व सुनिश्चित कर लिया गया है। कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों के माध्यम से किसानों को केवल रासायनिक उर्वरकों का उपयोग न कर मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जैव उर्वरकों, तरल यूरिया, तरल डीएपी, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग हेतु जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने सभी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि किसानों को उर्वरकों के उठाव में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के अनुसार पॉश मशीन के माध्यम से नियमानुसार उर्वरकों का वितरण एवं जानकारी का संधारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि अनावश्यक खाद की कालाबाजारी को रोका जा सके। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में कुल 36 हजार 509 टन उर्वरक उपलब्ध है। इसमें यूरिया 13 हजार 752 टन, डीएपी 3 हजार 350 टन, एनपीके 9 हजार 806 टन, पोटाश 3 हजार 422 टन तथा एसएसपी 6 हजार 179 टन खाद सहकारी एवं निजी केन्द्रों में उपलब्ध है, जो इसी अवधि में गत वर्ष की उपलब्धता की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। इस वर्ष समितियों में यूरिया, डीएपी एवं पोटाश के अतिरिक्त एनपीके, एसएसपी, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का भी पर्याप्त मात्रा में भंडारण किया गया है। किसान सामान्यत: बीज बोवाई के समय एक एकड़ धान फसल में बेसल मात्रा के रूप में यूरिया, डीएपी एवं पोटाश का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही किसान एक एकड़ धान फसल हेतु डीएपी के स्थान पर दो बोरी एनपीके खाद जैसे 12 : 32 : 16, 20 : 20 : 0 : 13, 16 : 16 : 16, 24 : 24 : 0 एवं 28 : 28 : 0 का उपयोग कर यूरिया की खपत को कम कर सकते हैं। समितियों एवं निजी विक्रेताओं को डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद तथा टॉप ड्रेसिंग हेतु नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग एवं लाभों से किसानों को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कृषि विभाग द्वारा धरती माता बचाओ अभियान के माध्यम से नील हरित शैवाल के उपयोग को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने हेतु जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। किसानों को उनके प्रक्षेत्र में ही नील हरित शैवाल उत्पादन एवं उपयोग की विधि की जानकारी दी जा रही है। नील हरित शैवाल एक ऐसा जैव उर्वरक है, जो खेतों में पानी भरे रहने की स्थिति में शैवाल के रूप में विकसित होता है तथा वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मृदा में स्थिर करता है। इसके उपयोग से रासायनिक यूरिया की आवश्यकता को कम किया जा सकता है। कृषकों के हित में जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता एवं सुचारू वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। किसानों से अपनी आवश्यकता अनुसार सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केन्द्रों से खाद प्राप्त करें तथा मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की है।

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