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 प्रतिबंधित 'थाई मांगुर' और 'बिग हेड' मछलियों के पालन, क्रय-विक्रय व परिवहन पूर्ण प्रतिबंधित

0– उल्लंघन करने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
दुर्ग. छत्तीसगढ़ शासन के मछली पालन विभाग के दिशा-निर्देशों के परिपालन में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जिले के भीतर विदेशी ’थाई मांगुर’ (क्लेरियस गैरीपिनस) और ’बिग हेड’ (हाइपोफ्थेलमिचिथिस नोबिलिस) प्रजाति की मछलियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अब जिले में इन प्रतिबंधित मछलियों के बीज उत्पादन, पालन, संवर्धन, क्रय-विक्रय तथा परिवहन जैसी गतिविधियों को पूरी तरह से रोक दिया गया है, और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मत्स्य पालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये विदेशी मांसाहारी प्रजातियां स्थानीय जलीय पर्यावरण और पारंपरिक मत्स्य पालन के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी हैं। ये आक्रामक मछलियां हमारे स्थानीय तालाबों और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर देती हैं और स्वदेशी मछलियों को खा जाती हैं, जिससे स्थानीय जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचता है। 
साथ ही, दूषित जल और हानिकारक अपशिष्टों को खाकर तेजी से बढ़ने वाली इन मछलियों के सेवन से मानव स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ता है और नागरिकों में कैंसर व त्वचा रोग जैसी घातक बीमारियों की आशंका बनी रहती है। इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए मछली पालन विभाग द्वारा एक विशेष उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है, जो जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार औचक निरीक्षण करेगा। यदि जिले के किसी भी निजी या शासकीय तालाब, बाजार अथवा परिवहन वाहन में प्रतिबंधित थाई मांगुर या बिग हेड मछली पाई जाती है, तो मत्स्य विभाग द्वारा उस पूरे स्टॉक को तत्काल ज़ब्त कर नियमानुसार नष्ट कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले मत्स्य पालकों, व्यवसायियों और बिचौलियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन अधिनियम के कड़े दंडात्मक प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। इसके अंतर्गत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 1 वर्ष का कठोर कारावास अथवा 10 हजार रुपये के नगद आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है।  
    मत्स्य विभाग ने जिले के सभी मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे केवल स्वीकृत व उन्नत स्वदेशी प्रजातियों का ही संवर्धन करें। किसी भी नागरिक को जिले में इन प्रतिबंधित मछलियों के अवैध पालन या क्रय-विक्रय की जानकारी मिलती है, तो वे इसकी सूचना तुरंत मछली पालन विभाग के कार्यालय या जिला प्रशासन को दे सकते है।
 

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