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 ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विशेष जन-जागरूकता अभियान प्रारंभ

 - सरकार द्वारा अधिसूचित नियम 01 अप्रैल 2026 से प्रभावशील
 मोहला  । ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत  द्वारा “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026” के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विशेष जन-जागरूकता एवं जनसहभागिता अभियान प्रारंभ किया गया है। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित यह नियम 01 अप्रैल 2026 से प्रभावशील हो चुके हैं, जिनके अंतर्गत वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सुरक्षित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रावधान किए गए हैं।
            जिला प्रशासन ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण को नागरिकों का मौलिक अधिकार माना गया है तथा स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं। इसी के तहत जिले में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित किया जाएगा।
         अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन कर “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026” का वाचन-पाठन किया जाएगा तथा नागरिकों को स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही रैली, दीवार लेखन, स्कूल जागरूकता कार्यक्रम, श्रमदान, घर-घर संपर्क अभियान, सोशल मीडिया एवं व्हाट्सएप प्रचार जैसे विभिन्न सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
          जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब प्रत्येक परिवार एवं संस्थान के लिए कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण अनिवार्य होगा। नागरिकों को गीला अपशिष्ट, सूखा अपशिष्ट, सैनेटरी अपशिष्ट एवं विशेष देखभाल अपशिष्ट को अलग-अलग रखना होगा। खुले में कचरा फेंकना, कचरा जलाना तथा नालियों, तालाबों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अपशिष्ट डालना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। ग्राम पंचायतों को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कम्पोस्ट पिट निर्माण, ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर की स्थापना एवं नियमित स्वच्छता गतिविधियों के संचालन के निर्देश दिए गए हैं। वहीं जनपद पंचायतों को ग्राम पंचायतों की निगरानी, प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
          जिला प्रशासन ने यह भी बताया कि नियमों के उल्लंघन पर दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। खुले में कचरा फेंकने, कचरा जलाने, मिश्रित अपशिष्ट देने अथवा सार्वजनिक स्थलों को प्रदूषित करने पर स्पॉट फाइन, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकेगी। गंभीर मामलों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत अभियोजन, आर्थिक दण्ड एवं कारावास तक का प्रावधान है।
जिला प्रशासन ने समस्त जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों, स्व-सहायता समूहों, युवाओं एवं आम नागरिकों से स्वच्छ एवं स्वस्थ ग्राम निर्माण के लिए सक्रिय सहभागिता की अपील की है।

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