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 जोखिमों से होने वाली क्षति की भरपाई के लिए जलीय कृषि बीमा योजना मत्स्य पालकों के लिए अत्यंत उपयोगी:   लखनलाल धीवर

-जलीय कृषि बीमा जागरूकता कार्यशाला संपन्न
-मत्स्य पालकों को दी गई योजनाओं एवं बीमा लाभों की जानकारी
 रायपुर।  राष्ट्रीय मात्स्यिकी कृषि विकास बोर्ड (एनएफडीबी) एवं मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त तत्वावधान में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना अंतर्गत जलीय कृषि बीमा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य के मत्स्य पालकों को जलीय कृषि बीमा योजना की जानकारी प्रदान करना तथा उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना के विभिन्न लाभों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से 200 से अधिक मत्स्य पालकों ने हिस्सा लिया। 
 कार्यशाला का शुभारंभ छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखन लाल धीवर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत् विकास में बीमा सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य जोखिमों से होने वाली क्षति की भरपाई के लिए जलीय कृषि बीमा योजना मत्स्य पालकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
कार्यक्रम में मत्स्य पालन विभाग के संचालक श्री एन.एस. नाग ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा तथा जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित मत्स्य पालकों को जलीय कृषि बीमा योजना का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।
राष्ट्रीय मात्स्यिकी कृषि विकास बोर्ड के बीमा विशेषज्ञ श्री मो. इफ्तिखार हुसैन ने जलीय कृषि बीमा योजना के प्रावधानों, पात्रता एवं लाभों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत प्रत्येक मत्स्य पालक को 1.00 हेक्टेयर जलक्षेत्र तक बीमा कराने पर एक बार प्रीमियम राशि का 40 प्रतिशत प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया जाता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला हितग्राहियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि का लाभ भी दिया जाता है। इस योजना के तहत अधिकतम 1.00 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।उन्होंने आगे बताया कि मत्स्य उत्पादन से संबंधित संरचनाओं जैसे पॉण्ड लाइनर, केज कल्चर, आरएएस (री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम) तथा बायोफ्लॉक इकाइयों को भी बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है। इन संरचनाओं के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार अधिकतम 1.00 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि तथा 1800 घनमीटर जल क्षमता तक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे मत्स्य पालकों को संभावित आर्थिक जोखिमों से सुरक्षा प्राप्त होती है।
कार्यशाला में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के स्टेट हेड श्री जय नारायण पटेल ने शासकीय पोर्टलों पर पंजीयन की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना एवं राष्ट्रीय मत्स्यिकी डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन कर हितग्राहियों की शंकाओं का समाधान किया। कार्यशाला में कृषि बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधि श्री वाघमारे एवं श्री आशीष अमित टोप्पो ने जलीय कृषि बीमा योजना के विभिन्न पहलुओं, बीमा दावों की प्रक्रिया, जोखिम कवरेज तथा योजना से मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य पालकों को समय पर बीमा कराने एवं आवश्यक दस्तावेजों के संधारण के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यशाला के दौरान मत्स्य पालकों के साथ संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। प्रतिभागियों ने योजना के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मत्स्य पालन व्यवसाय को सुरक्षित एवं लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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