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 कांग्रेस अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाए और इतिहास का अध्ययन करे : भाजपा

- प्रदेश प्रवक्ता व सांसद संतोष पाण्डेय ने स्वतंत्रता संग्राम में डॉ. हेडगेवार और रास्वसं की भूमिका पर सवाल उठाने पर खेड़ा को दिया करारा जवाब, 1921 के आंदोलन से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक संघ के राष्ट्र-समर्पण का दिया पूरा ब्यौरा
 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और सांसद संतोष पाण्डेय ने कांग्रेस व कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलीराम हेडगेवार के विषय में अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाना चाहिए। श्री पाण्डेय ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि आजकल कांग्रेसियों का अध्ययन, पठन और पाठन पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इतिहास की सही समझ न होने के कारण वे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने स्वतंत्रता संग्राम में डॉ. हेडगेवार और संघ के योगदान का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए कांग्रेस को इतिहास का पाठ पढ़ाया और बताया कि डॉ. हेडगेवार ने 1921 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था, जिसके लिए उन्हें 11 महीने का कठोर कारावास भुगतना पड़ा था। उस समय के तत्कालीन जिला कलेक्टर इरविन ने डॉ. हेडगेवार के भाषणों को अत्यंत देशभक्तिपूर्ण और ब्रिटिश हुकूमत के लिए खतरनाक बताते हुए उन पर एक साल के लिए भाषण देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। जब डॉ. हेडगेवार जेल से रिहा हुए, तो उनके स्वागत के लिए मोतीलाल नेहरू, हकीम अजमल खान, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी और विट्ठलभाई पटेल जैसे कांग्रेस के तत्कालीन शीर्ष नेता उपस्थित थे। अनेक महान क्रांतिकारी लगातार डॉ. हेडगेवार के संपर्क में थे और वे खुद 'अनुशीलन समिति' के सक्रिय सदस्य रहे थे। श्री पाण्डेय ने कहा कि वर्ष 1925 में संघ की स्थापना के बाद से ही महान क्रांतिकारी राजगुरु लगातार डॉ. हेडगेवार के संपर्क में रहे और अपनी गिरफ्तारी से पहले तक वे हमेशा उनका मार्गदर्शन लेते रहे। वर्ष 1929-30 में जब महात्मा गांधी ने 'नमक सत्याग्रह' शुरू किया, तो संघ ने तीन दिनों तक बैठक कर इसका पूरा समर्थन करने का निर्णय लिया। इसके बाद 1930 में वर्धा से जो सत्याग्रहियों का काफिला निकला, जिसमें करीब 10 हजार सभी संघ के ही स्वयंसेवक शामिल थे। संघ ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के साथ-साथ देश को मजबूत करने के लिए संगठन का कार्य भी निरंतर जारी रखा। 8 अगस्त 1942 को जब 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का आह्वान किया गया, तब चिमूर में संघ के कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर आंदोलन किया। इस आंदोलन में संघ के स्वयंसेवक श्री रायपुरकर अंग्रेजों की गोली का शिकार हुए और देश के लिए बलिदान हो गए।
भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कांग्रेस की संकीर्ण मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में पाठ्यपुस्तकों में केवल इंदिरा गांधी की 'वानर सेना' को ही पढ़ाने का काम किया और स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस ऐतिहासिक व गौरवशाली भूमिका को जानबूझकर अनसुना और अनदेखा कर दिया। इतिहास का हवाला देते हुए सांसद श्री पाण्डेय ने बताया कि वर्ष 1934 में महात्मा गांधी स्वयं वर्धा के संघ शिविर में आए थे और उन्होंने संघ की नीति, रीति और समरसता की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। इसके बाद वर्ष 1947 में गांधी जी दिल्ली की वाल्मीकि कॉलोनी में संघ के कार्यक्रम में शामिल हुए और वहां स्वयंसेवकों के अनुशासन को देखकर उसकी सराहना की। 1947 में देश ने विभाजन की जो विभीषिका देखी, उसे कोई भूल नहीं सकता। उस कठिन समय में लाहौर, मुल्तान और रावलपिंडी जैसे इलाकों में फंसे हुए हिंदुओं और पीड़ितों की जान बचाने तथा उन्हें सुरक्षित निकालने का काम अगर किसी ने अपनी जान पर खेलकर किया, तो वे संघ के स्वयंसेवक ही थे। श्री पाण्डेय ने कांग्रेस नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेसी थोड़ा पढ़ना-लिखना सीखें, इतिहास के पन्नों को पलटें और बिना तथ्यों के अनर्गल प्रलाप करना बंद करें।
तुष्टिकरण की राजनीति के लिए पूजनीय संतों और राष्ट्रभक्त संगठन को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश कभी सफल नहीं होगी
भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर दिए गए अमर्यादित व तथ्यहीन बयान पर भी तीखा पलटवार किया और कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट पर टिप्पणी सनातन विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। कांग्रेस के डीएनए में ही भगवान राम का विरोध शामिल है। यह वही कांग्रेस है जिसने सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व को काल्पनिक बताया था और राम मंदिर के निर्माण को रोकने के लिए वकीलों की फौज खड़ी की थी। भ्रष्टाचार की जननी कांग्रेस, जिसने देश में कोयला, 2G और कॉमनवेल्थ जैसे अनगिनत घोटाले किए, आज संतों और निष्कलंक ट्रस्ट पर सवाल उठा रही है, जो बेहद हास्यास्पद है। कांग्रेस जितनी बार प्रभु राम और राष्ट्रभक्त संगठनों पर कीचड़ उछालेगी, जनता उसे उतनी ही गहराई से राजनीति के पटल से साफ कर देगी। श्री पाण्डेय ने पवन खेड़ा और कांग्रेस आलाकमान अपने इस बेबुनियाद, अमर्यादित और देश को गुमराह करने वाले बयान के लिए तुरंत देश की जनता और राम भक्तों से माफी मांगें।

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