सिम्स बिलासपुर के चिकित्सकों की तत्परता से चाकू लगने से गंभीर घायल 15 वर्षीय किशोर को मिला नया जीवन
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के चिकित्सकों ने आपसी समन्वय, त्वरित निर्णय और विशेषज्ञ उपचार से चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय किशोर की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। सिरगिट्टी निवासी किशोर पर 11 जुलाई 2026 की शाम लगभग 8:30 बजे चाकू से हमला किया गया था। गंभीर अवस्था में उसे रात लगभग 9 बजे सिम्स के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया इसकी जानकारी डीन डॉ रमणेश मूर्ति को प्राप्त होने पर तत्काल निर्देश पर उपचार प्रारंभ किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार चाकू का वार पेट और छाती के महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच गया था। चोट इतनी गंभीर थी कि पेट की दीवार क्षतिग्रस्त होकर छोटी आंतें बाहर निकल आई थीं तथा दाहिनी ओर छाती में लगी गहरी चोट के कारण फेफड़ों पर दबाव बन गया था, जिससे मरीज को सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। आंतों में कई स्थानों पर छेद होने से पेरिटोनाइटिस, सेप्सिस और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जानलेवा जटिलताओं का खतरा उत्पन्न हो गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रत्येक मिनट मरीज के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग को तत्काल सक्रिय किया गया। वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश पटेल के निर्देशन में आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। शल्य चिकित्सा टीम में डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शुभा एक्का, डॉ. रवि राजवाड़े एवं पी.जी. रेजिडेंट डॉ. कुणाल शामिल रहे। ऑपरेशन थिएटर में ओ.टी. सिस्टर अंजिता ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
ऑपरेशन के दौरान छोटी आंतों में कई स्थानों पर हुए छेदों की सफलतापूर्वक मरम्मत की गई तथा पेट की गुहा में जमा रक्त को निकालकर आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचने और शीघ्र शल्य चिकित्सा किए जाने के कारण मरीज की जान बचाई जा सकी।
शल्य चिकित्सा के पश्चात मरीज को एनेस्थीसिया विभाग की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया, जहां विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा मिश्रा एवं पी.जी. रेजिडेंट्स की टीम ने 24 घंटे निगरानी रखते हुए वेंटिलेटरी सपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण एवं दर्द प्रबंधन किया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर मरीज को सर्जरी वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति स्थिर है तथा वह खतरे से बाहर है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि चाकू लगने जैसे गंभीर ट्रॉमा मामलों में 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार मिलना अत्यंत आवश्यक होता है। सिम्स के इमरजेंसी, सर्जरी एवं एनेस्थीसिया विभागों के समन्वित प्रयासों तथा आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण एक और गंभीर मरीज का जीवन बचाया जा सका है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता पर पूरी चिकित्सा टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक चिकित्सा अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, अनुशासित कार्यप्रणाली एवं टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सिम्स चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है तथा भविष्य में भी मरीजों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।













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