आदिवासी सम्मान कांग्रेस को क्यों चुभ रहा है?
दीपक बैज के बयान पर केदार कश्यप का तीखा पलटवार
राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासियों के सम्मान का उपहास करना पूरे जनजातीय समाज का अपमान – कश्यप
बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों की भेंट पर कांग्रेस की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण
रायपुर। वनमंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से हुई भेंट को लेकर दिए गए बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक हताशा नहीं, बल्कि बस्तर के जनजातीय समाज, उसकी संस्कृति, परंपराओं और अस्मिता का खुला अपमान है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम किसी सरकार या राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और आदिवासी गौरव का महापर्व है। जिस आयोजन ने बस्तर के लोक कलाकारों, मांझी-चालकी व्यवस्था और जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया, उसी पर सवाल उठाना बताता है कि कांग्रेस आदिवासी समाज के सम्मान को भी राजनीतिक चश्मे से देख रही है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी से हुई ऐतिहासिक भेंट का भी उपहास उड़ाने का प्रयास किया है। आज़ादी के दशकों बाद पहली बार बस्तर के पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय प्रतिनिधियों को राष्ट्रपति भवन में सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया, उनसे आत्मीय संवाद हुआ और उनकी संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिली। यह हर बस्तरवासी और पूरे जनजातीय समाज के लिए गर्व का विषय है। ऐसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का मज़ाक उड़ाना केवल राजनीतिक अपरिपक्वता नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि जिस आदिवासी समाज को कांग्रेस ने दशकों तक केवल वोट बैंक समझकर देखा, आज जब उसी समाज को सम्मान, पहचान और राष्ट्रीय मंच मिल रहा है तो कांग्रेस को आखिर इतनी पीड़ा क्यों हो रही है? देशभर में बस्तर की संस्कृति की चर्चा हो रही है, लेकिन कांग्रेस इस गौरवपूर्ण अवसर में भी राजनीति खोज रही है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस को पहले यह बताना चाहिए कि अपने लंबे शासनकाल में उसने बस्तर की संस्कृति, लोक कलाकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कौन-सा ऐतिहासिक कार्य किया था। कांग्रेस के शासन में बस्तर की पहचान विकास और संस्कृति से नहीं, बल्कि नक्सली हिंसा, भय और पिछड़ेपन से जुड़ गई थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर शांति, विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बना रहा है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम पर सवाल उठाकर और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों के सम्मान का उपहास कर कांग्रेस ने केवल सरकार का नहीं, बल्कि उन हजारों आदिवासी कलाकारों, मांझी-चालकी व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों और पूरे बस्तर के स्वाभिमान का अपमान किया है, जिन्होंने इस गौरवपूर्ण अवसर को संभव बनाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बस्तर की सकारात्मक तस्वीर से परेशानी हो रही है क्योंकि उसकी राजनीति हमेशा भय, भ्रम और पिछड़ेपन पर टिकी रही है। लेकिन अब बस्तर बदल चुका है। आज का बस्तर अपनी संस्कृति पर गर्व करता है, विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और पूरे देश में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। इस परिवर्तन को कांग्रेस चाहे जितना नकारने या उसका उपहास करने का प्रयास करे, बस्तर की जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।












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