न्यायालय कलेक्टर राजनांदगांव द्वारा शासकीय पट्टे की भूमि के अवैध रूप से विक्रय करने के मामले में बड़ा फैसला
- पट्टे निरस्त, 7.826 हेक्टेयर भूमि शासकीय घास भूमि (चराई) के रूप में दर्ज करने के आदेश
राजनांदगांव । कलेक्टर न्यायालय राजनांदगांव द्वारा शासकीय पट्टे की भूमि को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना अवैध रूप से विक्रय किए जाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया गया है। घुमका तहसील के ग्राम डुडिया के ग्रामीणों की शिकायत पर दर्ज प्रकरण में कलेक्टर न्यायालय ने पट्टाधारियों द्वारा की गई भूमि बिक्री को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है। कलेक्टर न्यायालय द्वारा प्रकरण में संबंधित सभी पट्टाधारियों तथा जिनके द्वारा भूमि क्रय की गई है, उन के्रताओं को सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के दौरान किसी भी पट्टाधारी अथवा वर्तमान भूमिस्वामी द्वारा पट्टे की भूमि विक्रय के संबंध में सक्षम अधिकारी (कलेक्टर) की पूर्वानुमति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। न्यायालय ने पाया कि शासकीय पट्टे की भूमि के विक्रय में सक्षम अधिकारी की अनुमति नहीं लिया जाना छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 158 (3) तथा धारा 165 (7ख) उपधारा (1) के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसके आधार पर पट्टाधारी उमाबाई एवं अन्य 8 को जारी पट्टे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश पारित किया गया।
7.826 हेक्टेयर भूमि शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज -
कलेक्टर न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार घुमका तहसील के ग्राम डुडिया, प.ह.नं.-13 में संबंधित भूमि को वर्ष 1981-82 से पूर्व की स्थिति में लाते हुए शासकीय घास भूमि (चराई) के रूप में दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कुल 7.826 हेक्टेयर भूमि शामिल है, जिसमें विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि सम्मिलित है। इनमें खसरा नंबर 353/9, 282/2, 279/2, 281/1, 282/4, 281/2, 353/2, 353/3, 353/5, 353/6, 353/7 एवं 353/8 शामिल है।













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