स्मार्ट मीटर की रीडिंग 100 प्रतिशत सटीक, 4,800 से अधिक मामलों में चेक मीटर से हुई पुष्टि
0- भिलाई की एन.ए.बी.एल. टेस्टिंग लैब में 74 स्मार्ट मीटरों का उपभोक्ताओं के समक्ष परीक्षण, सभी में सही खपत दर्ज
0- राष्ट्रीय मानकों (BIS) के अनुरूप स्थापित हो रहे स्मार्ट मीटर
0- उपभोक्ता के परिसर में चेक मीटर लगाने पर नहीं लगता कोई शुल्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच में इनकी रीडिंग पूरी तरह सटीक पाई गई है। प्रदेशभर में लगभग 4,800 से अधिक परिसरों में स्मार्ट मीटर के साथ समानांतर ‘चेक मीटर’ लगाकर रीडिंग का मिलान किया गया, जिसमें सभी मामलों में दोनों मीटरों की रीडिंग एक समान रही। जांच में किसी भी स्मार्ट मीटर में तकनीकी त्रुटि अथवा बिना विद्युत का उपयोग किए रीडिंग बढ़ने का प्रमाण नहीं मिला है।
भारत सरकार की ‘रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम’ (RDSS) के तहत प्रदेश में स्थापित किए जा रहे स्मार्ट मीटर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के तकनीकी मापदंडों के अनुरूप प्रमाणित हैं। इनमें किसी भी प्रकार के सॉफ्टवेयर हेरफेर या मीटर तेज चलने की गुंजाइश तकनीकी रूप से असंभव है। स्मार्ट मीटर में दर्ज ऊर्जा खपत का निर्धारण तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाता है।
उपभोक्ता को अपने बिल अथवा मीटर की रीडिंग में विसंगति से संबंधित शिकायत होने पर वितरण कंपनी की तकनीकी टीम द्वारा परिसर में जाकर स्मार्ट मीटर की जांच की जाती है। उपभोक्ता के अनुरोध पर स्मार्ट मीटर की सीरीज में पूर्व में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाने के बाद दोनों मीटरों द्वारा दर्ज खपत की तुलना भी की जाती है जिसके लिये स्मार्ट मीटर की टेस्टिंग का उपभोक्ता से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है।
उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर फरवरी 2024 से स्थापित किए जा रहे हैं और इन मीटरों द्वारा वर्ष 2024, 2025 की भांति वर्ष 2026 में भी विद्युत खपत के वास्तविक उपयोग के अनुसार दर्ज की जा रही है। इसके अलावा उपभोक्ता के अनुरोध पर स्मार्ट मीटर की भिलाई स्थित एन.ए.बी.एल. टेस्टिंग लैब में उसके समक्ष टेस्टिंग करने का भी प्रावधान है। अब तक लगभग 74 स्मार्ट मीटरों का उपभोक्ताओं के समक्ष टेस्टिंग लैब में परीक्षण किया गया है तथा सभी स्मार्ट मीटरों द्वारा सही खपत दर्ज की गई है।
स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली खपत अथवा बिल बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि मीटर गलत बिल बना रहा है। बिजली खपत मौसम, घरेलू उपकरणों के उपयोग, उपभोक्ता की वास्तविक खपत तथा अन्य परिस्थितियों के कारण बदलती रहती है। बिजली बिल का मूल्यांकन केवल मीटर लगाने से पहले और बाद की रकम की तुलना से नहीं, बल्कि वास्तविक यूनिट खपत के आधार पर किया जाना चाहिए।
रायपुर संभाग के 3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के डेटा विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि बिजली बिलों में वृद्धि का कारण मीटर नहीं, बल्कि ग्रीष्म ऋतु में एयर कंडीशनर व अन्य भारी उपकरणों का अधिक संचालन था। मौसम बदलने के साथ जुलाई माह तक फरवरी माह की तुलना में विद्युत खपत में गर्मी की तुलना में कम खपत दर्ज होती है। अगस्त 2026 में इन्हीं उपभोक्ताओं की बिजली खपत में मई 2026 की तुलना में 32 से 57 प्रतिशत तक की स्वाभाविक गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि बिलिंग वास्तविक विद्युत उपयोग पर आधारित है।
स्मार्ट मीटर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीटर के आंकड़ों के अनुसार मार्च, अप्रैल, मई एवं जून 2026 में उपभोक्ताओं के परिसरों में विद्युत खपत अधिक दर्ज होने का मुख्य कारण एयर कंडीशनर, कूलर, व्हीकल चार्जिंग एवं वाटर पंप का उपयोग पाया गया है।
स्मार्ट मीटर लगने से मानवीय भूल (Human Error) और मीटर रीडर की मनमानी समाप्त हो रही है। अब उपभोक्ता अपने दैनिक बिजली उपयोग को रियल-टाइम ट्रैक कर सकते हैं। ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप और स्मार्ट मीटर वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी प्रतिदिन और प्रत्येक 30 मिनट की बिजली खपत को स्वयं लाइव देखा जा सकता है। इससे अवांछित खपत की तुरंत पहचान संभव है।
मीटर अथवा बिलिंग को लेकर किसी उपभोक्ता को संदेह होने पर टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 अथवा नजदीकी विद्युत वितरण केंद्र में संपर्क किया जा सकता है। विभाग प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी जांच और समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की जानकारी ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से स्वयं देख सकते हैं।











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