उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम में ली गौ सेवकों एवं अधिकारियों की बैठक
-पशु संरक्षण एवं उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने गौ सेवकों से लिए सुझाओ
-रेस्क्यू एवं संरक्षण को लेकर दिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश
रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आज कबीरधाम जिला कार्यालय के सभाकक्ष में गौ सेवकों एवं संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में सड़क पर विचरण करने वाले पशुओं, बीमार एवं घायल पशुओं के रेस्क्यु, उपचार तथा उनके लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने गौ सेवकों से उनके कार्य के दौरान आने वाली समस्याओं की जानकारी ली और पशुओं के बेहतर संरक्षण एवं उपचार के लिए आवश्यक सुझाव भी लिए। बैठक में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र कुमार यादव, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल, अपर कलेक्टर श्री नरेन्द्र पैकरा, गौ सेवक श्री नीलेश सोनी, श्री संस्कार दुबे, श्री तरूण साहू, श्री अंकुश विश्वकर्मा, अनमोल ठाकुर, श्री वैदिक मिश्रा, श्री नीरज ठाकुर, श्री अमित चंद्रवंशी सहित जनप्रतिनिधि, गौ सेवक उपस्थ्ति थे।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि गौ सेवक दिन-रात बीमार और घायल पशुओं की सेवा में जुटे रहते हैं। वे पूरी मेहनत, लगन और सेवाभाव के साथ सड़क पर घायल अवस्था में मिले पशुओं का रेस्क्यु कर उन्हें उपचार के लिए पशु चिकित्सालय तक पहुंचाते हैं। गौ सेवकों द्वारा किए जा रहे इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पशुओं की सेवा और संरक्षण के लिए उनके प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गौ सेवक जब भी किसी सेवा कार्य अथवा घायल पशु के रेस्क्यु के संबंधितकार्य हेतु संपर्क व्यवस्था को दुरुस्त किया जाय। उनकी समस्या के समाधान के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बैठक में पशुपालन विभाग के चिकित्सकों, सहायक चिकित्सकों एवं अन्य उपलब्ध मानव संसाधन तथा विभागीय सेटअप की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों की पदस्थापना स्थल, किन-किन क्षेत्रों में कौन से चिकित्सक कार्यरत हैं तथा किन स्थानों पर चिकित्सकीय सेवाओं की आवश्यकता है, इसकी भी जानकारी ली। उन्होंने सभी चिकित्सकों की बैठक आयोजित कर जिले में पशुओं के उपचार एवं रेस्क्यु व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां पशुओं के उपचार की अधिक आवश्यकता है, वहां चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि बीमार एवं घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने चिकित्सकों को सेवाभाव, ललक और मेहनत के साथ कार्य करने की बात कही।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जिले में उपलब्ध पशु रेस्क्यु वाहन के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि पशु रेस्क्यु वाहन को 24 घंटे संचालित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि सड़क दुर्घटना में घायल अथवा बीमार पशुओं की सूचना मिलने पर तत्काल रेस्क्यु टीम मौके पर पहुंच सके। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदारी और संपर्क व्यवस्था को भी व्यवस्थित करने के निर्देश दिए।
बैठक में स्वर्ण जयंती परिसर का निरीक्षण कर वहां पशु चिकित्सालय को शिफ्ट करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने गौ सेवकों, अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से कहा कि परिसर का निरीक्षण कर पशु चिकित्सालय को वहां स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि बड़े और व्यवस्थित स्थान पर पशुओं के उपचार, देखभाल एवं विश्राम के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जहां बीमार एवं घायल पशुओं को उपचार के साथ सुरक्षित स्थान, पर्याप्त खुला क्षेत्र तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इससे गौ माता सहित अन्य पशुओं के संरक्षण और सेवा कार्य को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बैठक में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने के संबंध में भी चर्चा की। उन्होंने आसपास के गांवों के किसानों से संपर्क कर अधिक से अधिक पैरादान कराने के लिए प्रेरित करने कहा। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा फसल अवशेष के रूप में उपलब्ध पैरा को जलाने के बजाय गौवंश के लिए दान किया जाए, इससे पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने गौ सेवकों एवं संबंधित लोगों से कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में वीडियो एवं अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए किसानों को पैरादान के लिए जागरूक करें।
बैठक में सड़क पर बैठे पशुओं को दुर्घटना से बचाने के लिए दुर्घटना संभावित एवं अत्यधिक मोड़ वाले स्थानों को चिन्हांकित करने पर भी चर्चा हुई। ऐसे स्थानों पर आवश्यकतानुसार बेरिकेडिंग अथवा अन्य सुरक्षा उपाय करने का सुझाव दिया गया, जिससे सड़क पर बैठे पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही वाहन चालकों को भी ऐसे स्थानों पर सावधानी बरतने के लिए जागरूक करने की बात कही गई।














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