सफलता की कहानी- बिहान से जुड़कर मनीषा ने संवारा अपना भविष्य
0- पार्लर व्यवसाय को मिला विस्तार, आत्मनिर्भरता के साथ लखपति दीदी बनने की ओर बढ़ाए कदम
दुर्ग. कभी घर के छोटे से कमरे में सीमित संसाधनों के साथ पार्लर चलाने वाली ग्राम पंचायत फुंडा की श्रीमती मनीषा ठाकुर आज अपनी स्वयं की दुकान संचालित कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें समूह की ताकत, बैंकिंग एवं ऋण सुविधाओं की जानकारी मिली, जिसका लाभ उठाकर उन्होंने अपने हुनर को व्यवसाय का रूप दिया। आज उनका पार्लर व्यवसाय अच्छी आमदनी का जरिया बन गया है और वे लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
मनीषा ठाकुर अम्बे स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। समूह में कुल 14 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। बिहान से जुड़ने से पहले मनीषा घर से ही पार्लर का संचालन करती थीं। सीमित संसाधनों और छोटी जगह के कारण वे अपने व्यवसाय का अधिक विस्तार नहीं कर पा रही थीं। आमदनी भी नियमित नहीं थी।
समूह से मिली जानकारी, ऋण सुविधा से खुला आगे बढ़ने का रास्ता
बिहान स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद मनीषा को समूह की बैठकों के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था, ऋण सुविधा और व्यवसाय विस्तार की जानकारी मिली। उन्होंने उपलब्ध ऋण सुविधा का लाभ लेकर अपने पार्लर व्यवसाय में आवश्यक संसाधन जुटाए और अपनी स्वयं की दुकान शुरू की। दुकान मिलने से ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के साथ व्यवसाय को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
सामान्य दिनों में 30 से 35 हजार, सीजन में 1 से 2 लाख तक पहुंचती है आय
मनीषा बताती हैं कि वर्तमान में उनके पार्लर से सामान्य दिनों में लगभग 30 से 35 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो जाती है। वहीं शादी-विवाह और त्योहारों के सीजन में ग्राहकों की संख्या बढ़ने पर उनकी आमदनी 1 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। बढ़ती आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि मनीषा के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है।
हुनर को मिला मंच, बढ़ा आत्मविश्वास
मनीषा कहती हैं कि उनके पास पार्लर का काम करने का हुनर पहले से था, लेकिन व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों और सही जानकारी की जरूरत थी। बिहान समूह से जुड़ने के बाद उन्हें यह अवसर मिला। समूह के माध्यम से मिली जानकारी और ऋण सुविधा ने उनके लिए आगे बढ़ने का रास्ता आसान किया।
आज मनीषा अपने व्यवसाय का संचालन स्वयं कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। उनकी सफलता यह बताती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और सहयोग मिले तो वे अपने हुनर को आजीविका का मजबूत साधन बना सकती हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग श्री बजरंग कुमार दुबे ने कहा कि बिहान स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। मनीषा ठाकुर की सफलता इस बात का उदाहरण है कि महिलाएं अपने हुनर और छोटे व्यवसाय को समूह के सहयोग से आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
मनीषा की कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर के बावजूद संसाधनों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पातीं। बिहान से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने व्यवसाय का विस्तार किया, बल्कि अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से लखपति दीदी बनने की राह भी तैयार की है।












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