नाट्योत्सव के दूसरे दिन 'मलिसंध्या' और 'चौकीदार' का भावप्रवण मंचन

-कविता संग्रह 'अंतरंगा तरंगालु' विमोचित
- दो नाटिकाओं और एकांकी का जीवंत मंचन
- चित्रा ने शास्त्रीय नृत्य पेश कर दिल जीता
टी सहदेव
भिलाई नगर। एसएनजी विद्याभवन में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय तेलुगु नाट्योत्सव के दूसरे दिन दो नाटिकाओं और एकपात्र अभिनय को कलाकारों ने जीवंत किया। दोनों नाटकों में आंध्रप्रदेश के फनकार, जबकि एकांकी में स्थानीय कलाकार ने अपनी भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। यह उत्सव दो सांस्कृतिक संस्थाओं कलांजलि और पीएमकेएम के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है।
कविता संग्रह 'अंतरंगा तरंगालु' विमोचित
इस दौरान प्रख्यात लेखिका टी सुब्बालक्ष्मी के कविता संग्रह 'अंतरंगा तरंगालु' का विमोचन भी किया गया। उन्हें इस मौके पर सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, शॉल देकर सम्मानित किया गया। वहीं कलांजलि के संस्थापक एम माधव का भी सम्मान किया गया, अपने सम्मान से अभिभूत माधव ने मंच को जैसे ही चूमा, वैसे ही वहां पर मौजूद लोगों की आंखें भर गईं। इस उत्सव का मंगलवार को अंतिम दिन है। उत्सव के दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश, बालाजी और नटराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई।
दो नाटिकाओं और एकांकी का जीवंत मंचन
नाट्योत्सव के दूसरे दिन ऑडिटोरियम में बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति के बीच एल मुत्यालु राव के निर्देशन में श्री शिर्डी कल्चर क्रिएशन्स द्वारा पेश नाटिका 'मलिसंध्या' (गोधूलि बेला) के हास्य दृश्यों तथा पति-पत्नी के बीच की नोकझोंक का दर्शकों ने लुत्फ उठाया। वहीं एक और नाटिका पी वेंकट बाबू के निर्देशन में प्रस्तुत 'चौकीदार' में सत्तालोलुप राजनेता की कुटिलता और उसके अंत को दिखाया गया। जिसे एसवी रंगाराव कला श्रवंती एंड वेंकटेश्वरा नाट्य मंडली ने शानदार ढंग से प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में एम माधव ने एकपात्र अभिनय करके 'कर्ण' की भूमिका अभिनीत की, जिसमें महाभारत की अहम पात्र कुंती जब महारथी कर्ण को बताती हैं कि वे उनके ज्येष्ठ पुत्र हैं। यह ज्ञात होने पर कर्ण के अंतर्मन में जो द्वंद्व चलता है, उसे बड़े ही मार्मिक ढंग से पेश किया गया।
चित्रा ने शास्त्रीय नृत्य पेश कर दिल जीता
एक निश्चित अंतराल में कलांजलि ऑर्केस्ट्रा के गायक-गायिकाओं ने संगीतमय प्रस्तुति देकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर भिलाई की तिरुमला महिला मंडली के कलाकारों के शारदा, एस ललिता, पी अनिता, आशा और सृजना ने जहां फिल्मी गानों की धुन पर समूह नृत्य पेश किया, वहीं पी चित्रा ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर ऑडिटोरियम में बैठे हर दर्शक का दिल जीत लिया। इससे पहले गायक बी वेंकट रमन ने सुंदरकांड के द्वितीय भाग का पाठ किया।


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