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 असफलता से नहीं, एक जैसे किरदार निभाने से लगता है डर : विक्रांत मैसी

 मुंबई ।अभिनेता विक्रांत मैसी ने कहा है कि उन्हें अपनी फिल्मों के असफल होने से अधिक डर एक जैसे किरदार निभाने और रचनात्मक दोहराव से लगता है और यही वजह है कि वह हर फिल्म में स्वयं को नये रूप में पेश करने का प्रयास करते हैं। मैसी को '12वीं फेल', 'सेक्टर 36', 'हसीन दिलरुबा', 'दिल धड़कने दो', 'लुटेरा', 'प्रितम एंड पेड्रो' और 'ब्रोकन बट ब्यूटीफुल' जैसी फिल्मों और ओटीटी सीरीज में भूमिकाओं के लिए सराहा गया है। उन्होंने कहा कि बॉक्स ऑफिस पर सफलता भी महत्वपूर्ण है, लेकिन एक अभिनेता के लिए सबसे बड़ा डर ''किरदारों का दोहराव'' और ''अभिनय में नयापन खत्म हो जाना'' होता है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई फिल्म सिनेमाघरों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करे तो इसे ठीक नहीं कह सकते। उन्होंने कहा, ''आप चाहते हैं कि फिल्म कमाई करे और ज्यादा से ज्यादा लोग उसे देखें। हालांकि, प्री-सेल (रिलीज से पहले फिल्म के संगीत तथा ओटीटी और टेलीविजन पर प्रदर्शन के अधिकार को बेच देने) से आपकी न्यूनतम लागत निकल आती है।'' उन्होंने कहा कि बेशक, आप चाहते हैं कि फिल्म अच्छा कारोबार करे, लेकिन एक अभिनेता के तौर पर सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि आप बार-बार वही किरदार निभाने लग जाएं।'' उन्होंने कहा, ''दोहराव और अभिनय में नयापन खत्म हो जाना ही वास्तव में डरावनी चीज है। मुझे असफल होने का डर नहीं लगता, क्योंकि जब आप नये प्रयोग करते हैं तो कभी-कभी असफलता भी मिलती है।'' मैसी ने बताया कि 2024 में उन्होंने सात महीने के लिए काम से विराम लिया था, क्योंकि उन्हें लगने लगा था कि उनके अभिनय में दोहराव आने लगा है। इस दौरान उन्होंने अपने अभिनय पर गौर किया। उन्होंने कहा, ''अपने काम का पुनर्मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है। दुनिया अभूतपूर्व गति से बदल रही है, इसलिए एक रचनात्मक कलाकार के रूप में आपको लगातार खुद को बेहतर बनाना पड़ता है।'' अभिनेता मैसी (39) जल्द ही नेटफ्लिक्स पर आने वाली ओटीटी सीरीज ''मुसाफिर कैफे'' में नजर आएंगे। इस सीरीज के साथ वह निर्माता के रूप में भी अपनी शुरुआत कर रहे हैं। वह आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के जीवन पर आधारित प्रस्तावित बायोपिक ''व्हाइट'', अभिनेता सनी सिंह के साथ 'यार जिगरी' सहित कई अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं। मैसी ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद कई लोगों ने उन्हें एक खास छवि बनाए रखने की सलाह दी थी, लेकिन वह जोखिम उठाने और अलग-अलग तरह की कहानियां चुनने में विश्वास रखते हैं। उन्हें ''12वीं फेल'' में अभिनय के लिए 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला था। उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा ऐसी फिल्में करना चाहता था जिनमें कहानी को आगे बढ़ाने की मुख्य जिम्मेदारी मेरे कंधों पर हो और मुझे दमदार भूमिकाएं निभाने का मौका मिले...मैंने हमेशा ही लीक से हटकर काम किया है।'' मैसी ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि अपने काम के जरिए समाज पर सार्थक प्रभाव छोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा के साथ ''12वीं फेल'' में काम करने के अनुभव ने सिनेमा के प्रति उनका नजरिया व्यापक किया, जिसके बाद उन्होंने ''मुसाफिर कैफे'' के जरिए फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ''मुझे लगा कि मैं अभिनय से आगे बढ़कर भी सिनेमा में योगदान दे सकता हूं और 'मुसाफिर कैफे' इसके लिए सबसे उपयुक्त फिल्म लगी।'' भोपाल और मसूरी की पृष्ठभूमि पर आधारित ''मुसाफिर कैफे'' लेखक दिव्य प्रकाश दुबे के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। यह श्रृंखला तीन अजनबियों की आपस में जुड़ी यात्राओं की कहानी है, जो प्रेम, बिछड़ने और आत्म-खोज के सफर से गुजरते हैं। इसमें मैसी, चंद्र मोहन शर्मा की भूमिका निभा रहे हैं, जो ऐसी जिंदगी की तलाश में है जिसे वह सचमुच अपना मान सके। अभिनेत्री वेदिका पिंटो ने सुधा और महिमा मकवाना ने प्रीति का किरदार निभाया है। यह सीरीज 24 जुलाई से नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होगी।

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