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  बाकुची चूर्ण के फायदे

 आयुर्वेद में कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो बहुत पॉपुलर नहीं हैं लेकिन बहुत प्रभावशाली हैं। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बाकुची  जिसे त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। खास बात यह है कि इसका प्रभाव त्वचा की बाहरी समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि कई अंदरूनी समस्याओं पर भी देखा गया है। आयुर्वेद के साथ-साथ इसके फायदों को विज्ञान ने भी सही माना है। आज इस लेख में हम जानेंगे बाकुची चूर्ण के फायदे।
 1. सफेद दाग में फायदेमंद
बाकुची चूर्ण का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सफेद दाग यानी विटिलिगो से जुड़े मामलों में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह त्वचा में रंग देने वाले तत्व मेलानिन की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। बाकुची का वैज्ञानिक नाम Psoralea corylifolia है। कई रिसर्च में भी सामने आया है कि Psoralea corylifolia में पाए जाने वाले Psoralen और Bakuchiol जैसे कंपाउंड्स त्वचा में पिगमेंटेशन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ क्लिनिकल स्टडीज में Psoralen आधारित थेरेपी को विटिलिगो के इलाज में सहायक पाया गया है। हालांकि इसका असर धीरे-धीरे दिखता है इसलिए इसे आयुर्वेद में लॉन्ग-टर्म सपोर्ट के रूप में देखा जाता है।
 2. स्किन इंफेक्शन में राहत
आयुर्वेद में बाकुची को प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर माना गया है। दाद, खाज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं में इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।
 कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि बाकुची में मौजूद एक्टिव कंपाउंड्स फंगस और बैक्टीरिया के ग्रोथ को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे स्किन क्लीनिंग और स्किन डिटॉक्स से जोड़कर देखा जाता है।
 3. बार-बार निकलने वाले कील-मुंहासे में उपयोगी
आजकल की लाइफस्टाइल में मुंहासे सिर्फ टीनएज की समस्या नहीं रह गई है। खराब पाचन, हार्मोनल असंतुलन और बढ़ता स्ट्रेस भी इसकी वजह बनते हैं। आयुर्वेदिक नजरिए से देखा जाए, तो बाकुची चूर्ण शरीर के अंदर जमा अशुद्ध तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जब अंदर की सफाई बेहतर होती है, तो उसका असर स्किन पर दिखता है। इससे त्वचा जवान बनी रहती है और व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से कम दिखाई देता है। इसी वजह से ऑयली स्किन और बार-बार पिंपल्स की समस्या में बाकुची को फायदेमंद माना जाता है।
 4. सोरायसिस और एक्जिमा में भी फायदेमंद
सोरायसिस और एक्जिमा जैसी स्किन कंडीशन में स्किन ड्राई, लाल और इरिटेटेड रहती है। आयुर्वेद में बाकुची को स्किन रिपेयरिंग गुणों वाला माना गया है। कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इसके बायोएक्टिव कंपाउंड्स स्किन सेल्स के हेल्दी रिन्यूअल को सपोर्ट कर सकते हैं। इसी वजह से इसे क्रॉनिक स्किन डिसऑर्डर में सहायक जड़ी-बूटी माना जाता है।
 5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद
आयुर्वेद में माना जाता है कि अगर पाचन सही है, तो आधी बीमारियां खुद-ब-खुद कंट्रोल में रहती हैं। बाकुची चूर्ण पाचन अग्नि को एक्टिव करने में मदद करता है। यह गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। जब डाइजेशन बेहतर होता है, तो शरीर पोषक तत्वों को भी सही तरीके से एब्जॉर्ब कर पाता है।
 कुल मिलाकर आयुर्वेद में त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बाकुची का प्रयोग पुराने समय से ही किया जाता रहा है। इसके साथ-साथ यह पाचन और इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी फायदेमंद है। आधुनिक स्टडीज भी इसके कई पारंपरिक दावों को सपोर्ट करती नजर आती हैं।
 

 

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