ब्रेकिंग न्यूज़

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव को लेकर चिंता जताई, सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

एवियॉन (फ्रांस) .प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कनेक्टिविटी और व्यापार में सहयोग बढ़ाने के लिए 'जी-7', भारत और 'ग्लोबल साउथ' देशों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके एक वैश्विक व्यवस्था बनाने का बुधवार को सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने विकासशील देशों पर पश्चिम एशिया संकट के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने फ्रांस के एवियॉन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र के दौरान 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पैक्ट) नामक नयी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव रखा। मोदी ने जोर देकर कहा कि आधुनिक आर्थिक विकास को केवल व्यापार की मात्रा या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहा कि असली महत्व इस बात का है कि विकास किस दिशा में हो रहा है और उसका लाभ आखिर किसे मिल रहा है। मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट का ईंधन, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ने वाला प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर लंबे समय तक असर डालेगा। उन्होंने कहा कि सबसे कमजोर देशों पर भू-राजनीतिक संकटों का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, "यदि हम वास्तव में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना चाहते हैं, तो इन संकटों का बोझ केवल सबसे कमजोर देशों पर नहीं पड़ना चाहिए।" मोदी ने कहा, "हमारी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को ऐसी सहायता व्यवस्थाएं बनानी चाहिए, जो विकासशील देशों को इन झटकों का सामना करने और उनकी आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद करें।" मोदी ने कहा कि इस नयी व्यवस्था को महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की तर्ज पर बनाया जा सकता है। उन्होंने सवाल किया, "आईएमईसी की तरह, क्या हम अफ्रीका, लातिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप के देशों के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं?" प्रधानमंत्री ने कहा, "जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और 'ग्लोबल साउथ' देशों की भागीदारी के जरिये हम कनेक्टिविटी और व्यापार को तेज करने के लिए 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पैक्ट) की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "इसका उद्देश्य ऐसे गलियारे बनाना होना चाहिए, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अवसरों को आपस में जोड़ें।" आईएमईसी पहल को वर्ष 2023 में दिल्ली में हुए 'जी20' शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है, जिसमें सऊदी अरब, भारत, अमेरिका और यूरोप के बीच बड़े सड़क, रेल व समुद्री नेटवर्क बनाने की योजना है, ताकि एशिया, पश्चिम एशिया और पश्चिम के बीच एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके। पश्चिम एशिया में संकट के कारण यह परियोजना अभी शुरू नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा, "अच्छी बात है कि जी-7 के अध्यक्ष फ्रांस ने इस विषय को महत्व दिया है। आज की सच्चाई यह है कि जब विकास की बात होती है, तो सवाल सिर्फ सकल घरेलू उत्पाद या व्यापार के आंकड़ों का नहीं होना चाहिए। असली सवाल यह है कि विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में है?" मोदी ने कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि साझा विकास को केवल एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "जब भारत आगे बढ़ता है, तो आबादी का छठा हिस्सा आगे बढ़ता है। इसलिए भारत की विकास यात्रा सभी के लिए समावेश, बड़े स्तर पर विकास और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की कहानी है।" उन्होंने कहा, "पिछले 12 वर्षों में भारत 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के मंत्र पर आगे बढ़ा है। यही सिद्धांत दुनिया के साथ हमारे संबंधों का भी मार्गदर्शन करता है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएमईसी से व्यापार को तेजी मिलेगी, आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत होंगी और निवेश, रोजगार तथा नवाचार के नए अवसर पैदा होंगे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ देशों की ताकतों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, "आज कई समाज वृद्ध होते जा रहे हैं, जबकि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के पास युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की भरमार है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "इस प्राकृतिक मेल-जोल का फायदा उठाने के लिए एक वैश्विक कौशल साझेदारी बनाई जानी चाहिए। इसमें सभी देश मिलकर लोगों के कौशल की पहचान करेंगे और भरोसेमंद कुशल कामगारों के एक देश से दूसरे देश में जाने को बढ़ावा देंगे।" मोदी ने कहा कि भारत साझा वैश्विक समृद्धि में विश्वास करता है और यह केवल कथनों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कार्यों में भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस बैठक में मौजूद अधिकांश देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इससे साबित होता है कि भारत बंटवारे नहीं, बल्कि एकीकरण में; संरक्षणवाद नहीं, बल्कि साझेदारी में; और अनिश्चितता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि में विश्वास करता है।" उन्होंने कहा, "आने वाले समय में भारत आप सभी के साथ मिलकर साझा आर्थिक संबंध प्रगाढ़ बनाने और अधिक स्थिर, भरोसेमंद तथा समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए काम करता रहेगा।" मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ्रांस में हैं। सम्मेलन में भारत को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। 'जी-7' दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है। यह समूह अपने सदस्यों के लिए वैश्विक आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा एवं समन्वय करने का प्रमुख मंच है।

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english