ऊंटों के अवैध वध को रोकने के लिए सभी कदम उठाएं : उच्च न्यायालय
चेन्नई. मद्रास उच्च न्यायालय की पहली पीठ ने तमिलनाडु सरकार को ऊंटों की अवैध तस्करी या उनका वध रोकने के लिए सभी उपाय करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति डी बी चक्रवर्ती की पीठ ने कहा, “ अगर कोई शख्स ऐसी गतिविधियों में शामिल है तो प्रतिवादी (संबंधित अधिकारियों) को उस व्यक्ति के खिलाफ हर कदम उठाना चाहिए और इसमें पशुओं के साथ क्रूरता रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करना भी शामिल हो सकता है।” अदालत ने हाल में ‘पीपुल फॉर कैटल इन इंडिया' के सचिव जी अरूण प्रसन्न की ओर से दायर उसकी जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। तमिलनाडु में ऊंटों के अवैध परिवहन और वध पर रोक लगाने के वास्ते प्रभावी कदम उठाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने के लिए 2015 में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, ऊंटों को शहर में वध करने के उद्देश्य से लाया गया था और इसकी खबर अखबारों में भी छपी थी और तमिलनाडु में ऊंटों की प्राकृतिक रिहायश नहीं है। उन्हें राजस्थान या अन्य राज्यों से वध करने के उद्देश्य से लाया गया था और वध इतने क्रूर तरीके से किया गया था कि कोई भी इंसान इसे स्वीकार नहीं करेगा।


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