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प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से स्वदेशी वस्तुएं खरीदने की अपील की

अहमदाबाद.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से केवल स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील करते हुए शनिवार को कहा कि भारत इस मोड़ पर गतिहीन नहीं बना रह सकता और उसे आत्मनिर्भर बनना होगा। मोदी ने कहा कि यदि लोग आगामी 25 साल तक स्थानीय उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं, तो देश को बेरोजगारी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। मोदी ने हनुमान जयंती के अवसर पर वीडियो लिंक के जरिए गुजरात के मोरबी में भगवान हनुमान की 105 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा, ‘‘भारत अब गतिहीन नहीं बना रह सकता... हम जागे हुए हैं या सो रहे हैं, हम जहां हैं, वहीं बने नहीं रह सकते। वैश्विक स्थिति ऐसी है कि पूरी दुनिया यह सोच रही है कि ‘आत्मनिर्भर' कैसे बनना है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश के संतों से अनुरोध करूंगा कि वे केवल स्थानीय उत्पाद खरीदने की लोगों को शिक्षा दें। ‘वोकल फॉर लोकल' मुख्य चीज है। हमारे घरों में, हमें केवल अपने लोगों की बनाई चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। कल्पना कीजिए, इससे कितनी अधिक संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा।'' मोदी ने कहा, ‘‘हमें विदेशी वस्तुएं अच्छी लग सकती हैं, लेकिन इनमें हमारे लोगों की कड़ी मेहनत, हमारी मिट्टी की सुगंध का एहसास शामिल नहीं होता।'' उन्होंने कहा, ‘‘यदि आगामी 25 साल में हम केवल स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं, तो हमारे लोग बेरोजगार नहीं रहेंगे।'' प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र क्षेत्र के मोरबी में ‘परम पूज्य केशवानंद जी' के आश्रम में भगवान हनुमान की प्रतिमा का अनावरण किया। यह ‘हनुमानजी चार धाम' परियोजना के तहत देश भर की चारों दिशाओं में स्थापित की जा रही चार प्रतिमाओं में से दूसरी प्रतिमा है। इस श्रृंखला में पहली प्रतिमा उत्तर में 2010 में शिमला में स्थापित की गई थी और दक्षिण भारत में रामेश्वमर में प्रतिमा का काम आरंभ हो गया है। मोदी ने भगवान हनुमान को सभी के लिए एक प्रेरणा और वनों में रहने वाली सभी प्रजातियों और आदिवासियों के सम्मान का अधिकार सुनिश्चित करने वाला बताते हुए कहा कि हनुमान ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के एक महत्वपूर्ण सूत्र हैं। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान राम कथा का अहम हिस्सा हैं और राम कथा की भावना ईश्वर के प्रति श्रद्धा के जरिए हरेक को एकजुट करती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह भारतीय आस्था, आध्यात्मिकता, हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा की ताकत है।'' मोदी ने कहा कि इसी भावना ने स्वतंत्रता से पहले के युग में भारत में विभिन्न वर्गों के लोगों को जोड़ा और देश को स्वतंत्रता प्राप्त करने का संकल्प लेने में मदद की। उन्होंने कहा कि भारत की आस्था एवं संस्कृति सद्भाव, समभाव और समावेशिता से उभरती है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने स्वयं सक्षम होने के बावजूद एक कार्य को करने के लिए सभी को साथ लेकर ‘सबका साथ, सबका विकास' का उदाहरण पेश किया। मोदी ने खोखरा हनुमान बांध से अतीत में अपने जुड़ाव का भी जिक्र किया, जहां प्रतिमा की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि वह उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने क्षेत्र में 1979 की मच्छू बांध आपदा को याद करते हुए कहा कि उस आपदा से सीखे गए सबक ने उन्हें 2001 के भुज भूकंप से निपटने में मदद की। उन्होंने कहा कि मोरबी को कच्छ में पर्यटन के विकास से भी लाभ हुआ है। उन्होंने गिरनार में रोपवे जैसे अन्य पर्यटक आकर्षणों का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे लोगों को एक पहाड़ी के ऊपर स्थित मंदिर तक पहुंचने में मदद मिली है। मोदी ने कहा, ‘‘भारत के पास पहले से ऐसी ताकत है कि यहां ज्यादा कुछ किए बिना पर्यटन का विकास किया जा सकता है।'' उन्होंने पर्यटन स्थलों को साफ रखने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अन्य लोगों को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिल सके। मोदी ने कहा कि देश के आध्यात्मिक नेताओं ने 1857 से पहले लोगों में आध्यात्मिक जागृति पैदा करके भारत की आजादी को नई ताकत प्रदान की। भारत की आजादी का संघर्ष 1857 में शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, हनुमानजी ने नि:स्वार्थ सेवा और श्रद्धा की जो भावना दिखाई, उससे भारत मजबूत होगा।

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