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अप्रैल में बिजली की अधिकतम मांग 235 गीगावॉट होने की उम्मीदः सीईए

कोलकाता। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने मंगलवार को कहा कि अप्रैल, 2023 में बिजली की अधिकतम मांग नौ प्रतिशत बढ़कर 235 गीगावॉट हो सकती है जिसे पूरा करने के लिए समुचित योजना बनाने की जरूरत होगी। प्राधिकरण के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने यहां आयोजित ‘13वें एनर्जी कॉन्क्लेव 2022' में कहा कि इस साल की गर्मियों में पैदा हुए बिजली संकट की पुनरावृत्ति से बचने के लिए पहले से ही तैयारी करनी होगी। इस साल अप्रैल में बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 215 गीगावॉट हो गई थी, लेकिन कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों का उत्पादन कम होने से गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया था। प्रसाद ने कहा, ‘‘अगर हम सजग नहीं हुए तो अगले साल भी इसी तरह का संकट दोहराया जा सकता है। हमारे अनुमानों के मुताबिक, अप्रैल, 2023 में बिजली की मांग बढ़कर 230-235 गीगावॉट हो जाएगी जबकि अप्रैल, 2022 में यह करीब 215 गीगावॉट थी।'' उन्होंने कहा कि ऊर्जा बदलाव अवधि तक देश की तापीय बिजली क्षमता में वृद्धि जारी रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘भले ही हम कोयला आधारित बिजली क्षमता में चरणबद्ध कटौती की बात कर रहे हैं लेकिन वर्ष 2030 तक इसके बढ़कर 248 गीगावॉट हो जाने का अनुमान है। पनबिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा से समर्थन कम मिलने पर कोयला-आधारित बिजली उत्पादन 256 गीगावॉट तक भी पहुंच सकता है।'' फिलहाल देश में कोयला-आधारित बिजली उत्पादन करीब 210 गीगावॉट का होता है।
इसके साथ ही प्रसाद ने यह साफ किया कि कुल ऊर्जा उत्पादन में कोयला-आधारित बिजली क्षमता की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से घटकर 50 प्रतिशत रह जाएगी। वहीं स्थापित क्षमता के मामले में भी इसका हिस्सा घटकर 30-35 प्रतिशत हो जाएगा।

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