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 नकारात्मक खबरों और सोशल मीडिया से दूरी बनी सफलता की कुंजी : जेईइ एडवांस टॉपर शुभम कुमार

कोटा। सोशल मीडिया से पूरी तरह किनारा, नकारात्मक खबरों से दूरी और लक्ष्य पर अटूट ध्यान- बिहार के गया निवासी शुभम कुमार ने इसी मंत्र के दम पर संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में शीर्ष स्थान हासिल किया। सोमवार सुबह घोषित परिणामों के अनुसार, शुभम ने जेईई एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, गुरुग्राम निवासी कबीर छिल्लर महज एक अंक से पिछड़कर 329 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। दोनों ने ही कोटा के कोचिंग संस्थान से तैयारी की थी। शुभम ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, कोटा के शिक्षकों और अपनी कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने कहा, ''मैं दो साल से इस परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था, इसलिए अच्छे अंकों की उम्मीद स्वाभाविक थी।'' वह दो साल पहले कोटा आए थे जब वह कक्षा 11वीं में थे। शुभम के पिता शिव कुमार बिहार के गया में हार्डवेयर व्यवसायी हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं।
कोटा अक्सर छात्रों की आत्महत्या की खबरों के कारण सुर्खियों में रहता है, लेकिन शुभम ने इन नकारात्मक खबरों और मीडिया कवरेज से खुद को दूर रखा। उन्होंने कोटा की उस विशेष पारिस्थितिकी पर भरोसा जताया, जहां हर साल हजारों छात्र विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। शुभम ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी और फोन का उपयोग केवल माता-पिता और शिक्षकों से संपर्क के लिए करते थे। उन्होंने कहा कि वह रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे और अपने शौक के लिए क्रिकेट व बैडमिंटन केवल रविवार को ही खेलते थे। उन्होंने कहा, ''तनाव होने पर मैं पांच से 10 मिनट ध्यान करता था। मुझे लगता है कि तनाव के क्षणों में परिवार, रिश्तेदार और दोस्त बहुत काम आते हैं।'' शुभम ने कहा, ''कोटा शहर का योगदान उनकी सफलता में कम नहीं है।''
उन्होंने कहा कि विशेष अध्ययन सामग्री, अनुभवी शिक्षक और प्रतिस्पर्धी माहौल केवल कोटा जैसे शहर में ही मिल सकता है, कहीं और नहीं। उन्होंने कहा, ''मन में जनून होना चाहिए कि हमें कुछ करना है, तभी लक्ष्य हासिल होता है। मैंने हर चुनौती को प्रेरणा में बदला। मेरा पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर था। अब मैं आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) बॉम्बे से कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक करूंगा।'' पिता शिव कुमार ने कहा कि उन्हें बेटे की सफलता का पूरा भरोसा था।
उन्होंने कहा, ''वह यहां इतने समय से तैयारी कर रहा था, मुझे पता था वह अपना सर्वश्रेष्ठ देगा।'' मां कंचन देवी ने बेटे की उपलब्धि पर गर्व जताया। दूसरी तरफ, एक अंक से शीर्ष स्थान चूकने वाले कबीर ने कहा कि वह पढ़ाई या परीक्षा को लेकर कभी तनाव नहीं लेते। उन्होंने खुद को ''मानसिक रूप से बहुत मजबूत'' बताया और कहा कि किसी भी विषय को एक बार पढ़ना ही उनके लिए काफी होता है व जरूरत पड़ने पर वे उसे आसानी से याद कर लेते हैं। दोनों टॉपर्स में एक बात समान थी-सोशल मीडिया से पूरी दूरी।
कबीर ने कहा, ''मैं सोशल मीडिया बिल्कुल नहीं इस्तेमाल करता। व्हॉट्सएप और इंस्टाग्राम केवल शिक्षकों और दोस्तों से विषय चर्चा के लिए हैं।'' कबीर भी आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर विज्ञान करना चाहते हैं।
कबीर के पिता मोहित छिल्लर खुद आईआईटी से पढ़ाई कर चुके हैं और सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि मां प्रियंका छिल्लर एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। प्रियंका ने कहा, ''जिस तरह उसने मेहनत की, यह उम्मीद थी कि वह कुछ असाधारण करेगा।

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