राज्यसभा के 271वें सत्र की शुरुआत, सभापति सीपी राधाकृष्णन ने रचनात्मक चर्चा और अनुशासन पर दिया जोर
नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को 271वें सत्र के उद्घाटन पर सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण चर्चा की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस और निर्णय के लिए उपलब्ध समय का सदुपयोग करना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही सदन की गरिमा, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की भी अपील की।
सभापति ने अपने उद्घाटन संबोधन में सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्यसभा में सार्थक विचार-विमर्श की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि 271वां सत्र भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा। सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि इस सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर बहस और निर्णय के लिए उपलब्ध समय का प्रभावी उपयोग करें और कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग दें।
सभापति ने बताया कि इस सत्र से सचिवालय ने सदस्यों की सीटों पर उपलब्ध मल्टीमीडिया उपकरणों के जरिए नौ भाषाओं में लाइव एआई-आधारित समवर्ती अनुवाद की सुविधा शुरू की है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का दायरा चरणबद्ध तरीके से सभी 22 अनुसूचित भाषाओं तक बढ़ाया जाएगा। साथ ही उन्होंने सदस्यों से इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि इस सत्र की कार्यसूची में कई महत्वपूर्ण विधायी और विचार-विमर्श संबंधी विषय शामिल हैं। ऐसे में सभी सदस्यों को कार्यसूची के समयबद्ध निपटान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हर व्यवधान से राष्ट्र और जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा में देरी होती है।सभापति ने कहा कि मतभेद संसदीय लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें सदन की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और सभी सदस्यों को इस प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा बनाए रखने में योगदान देना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में सीपी राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को सफल, रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण सत्र की शुभकामनाएं दीं।










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