हिन्दी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू
- दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी
इंदौर. ''मैं अगर अंग्रेजी माध्यम में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ता, तो मुश्किल विषय समझने के लिए मुझे गूगल और चैटजीपीटी की मदद लेनी पड़ती, लेकिन मातृभाषा हिन्दी में पढ़ाई के दौरान शिक्षक अंग्रेजी की तकनीकी बातों को भी आसानी से समझा देते हैं।'' इंजीनियरिंग के छात्र रोहित शर्मा का यह अनुभव नयी शिक्षा नीति के मुताबिक मध्यप्रदेश में मौजूदा अकादमिक सत्र से शुरू हुए हिन्दी माध्यम के नये बी.टेक. पाठ्यक्रम की तस्वीर पेश करता है।
मध्यप्रदेश में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई को हिन्दी माध्यम में उपलब्ध कराने की पहल इंदौर के श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) में की गई है। एसजीएसआईटीएस, सरकारी सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थान है और इसकी गिनती मध्य भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में होती है। अधिकारियों के मुताबिक खास बात यह है कि हिन्दी माध्यम से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में राज्य सरकार की ओर से दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के विशेष बैच के लिए 30 सीट निर्धारित की गई हैं और इसमें करीब 20 विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख सुनील अजमेरा ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया,''गुजरे बरसों में हमने देखा है कि 12वीं तक हिन्दी माध्यम में पढ़े कई विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई में कठिनाई महसूस करते हैं और इनमें से कुछ बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ देते हैं।'









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