- Home
- छत्तीसगढ़
- 0- BRICS 2026 में रायपुर के. जी. उमाठे विद्यालय का स्कूल जियोस्पेशियल प्रोजेक्ट शोकेस के लिए हुआ चयन0- छत्तीसगढ़ से एकमात्र विद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया नवाचारपूर्ण जियोस्पेशियल प्रोजेक्ट0- कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने दी शुभकामनाएँरायपुर। रायपुर जिले के लिए गर्व की बात है कि पी. जी. उमाठे उत्कृष्ट शासकीय विद्यालय, शांति नगर का चयन प्रतिष्ठित BRICS 2026 School Geospatial Project Showcase के लिए किया गया है। छत्तीसगढ़ से चयनित यह एकमात्र विद्यालय है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जियोस्पेशियल परियोजना का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को बधाई दी ।डॉ सिंह ने कहा कि यह सफलता प्रदेश के अन्य विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार एवं जियोस्पेशियल शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन 22 जुलाई 2026 को भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), तिरुपति में आयोजित किया गया, जिसमें ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष विद्यार्थियों द्वारा तैयार जियोस्पेशियल परियोजनाओं का प्रदर्शन किया गया जिसकी उपस्थित प्रबुद्ध तथा आमजनों ने सराहना की।पी.जी. उमाठे उत्कृष्ट शासकीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने शिक्षिका श्रीमती रीता मंडल के मार्गदर्शन में "Building Sponge City Together" विषय पर अपनी परियोजना प्रस्तुत कर जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया।यह कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा भारती विद्यापीठ इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च (BVIEER), पुणे के सहयोग से आयोजित किया गया।विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती रीता मंडल को परियोजना मार्गदर्शक के रूप में चयनित किया गया। वहीं विद्यालय की छात्रा वार्तिका पाटिल (कक्षा 8) एवं छात्रा उमेश्वरी साहू (कक्षा 7) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने नवाचारपूर्ण जियोस्पेशियल प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण किया।विद्यार्थियों ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल मैपिंग एवं अन्य आधुनिक जियोस्पेशियल तकनीकों का उपयोग करते हुए सतत विकास लक्ष्य (SDG-6) "सभी के लिए स्वच्छ जल और स्वच्छता" विषय पर उत्कृष्ट कार्य किया। उनके अभिनव प्रयासों के आधार पर विद्यालय को यह महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ।
- 0- कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जिले के सभी कृषकों को शीघ्र पंजीयन करने की अपील कीबालोद. भारत सरकार के द्वारा किसानों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने हेतु शुरू किए गए एग्रीस्टैक पोर्टल में किसानों के पंजीयन कार्य के अंतर्गत बालोद जिले के 02 लाख 62 हजार 126 खाता धारकों किसानों में 23 जुलाई 2026 तक कुल 01 लाख 51 हजार 535 खाताधारक किसानों का एग्रीस्टैक किसान पंजीयन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीकृत सभी कृषकों के खसरों की एंट्री कार्य भी पूरा कर लिया गया है। संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष ने बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन कराने हेतु शेष रह गए जिले के 01 लाख 10 हजार 591 सह खाताधारक किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन कार्य पूर्ण करने हेतु किसानों को सहकारी समितियों एवं लोक सेवा केन्द्र में बुलाकर उनका पंजीयन कार्य पूरा किया जा रहा है।कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन कार्य को अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं किसान हितैषी बताते हुए इसकी भूरी-भूरी सराहना की है। उन्होंने बालोद जिले के सभी किसानों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने हेतु निर्धारित समयावधि में अपने प्रत्येक खातों का एग्रीस्टैक पोर्टल में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने की अपील की है। जिससे कि उन्हें धान एवं अन्य फसलों के समर्थन मूल्य पर बिक्री एवं शासन के विभिन्न किसान हितैषी योजना का लाभ लेने हेतु किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो सके।कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए एग्रीस्टैक पोर्टल के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल एक डिजिटल कृषि मंच है। इसके तहत किसानों को विशिष्ट 11 अंकों की फार्मर आईडी दी जाती है। जो उनके आधार कार्ड एवं भूमि रिकार्ड से जुड़ी होती है। एग्रीस्टैक पोर्टल का मुख्य उद्देश्य किसानों और कृषि से जुड़ी जानकारियों का केन्द्रीयकृत डाटाबेस तैयार करना है। उन्होंने इसके लाभ के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि किसानों के सभी खातों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन हो जाने से प्रधानमंत्री किसान योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कृषि अनुदानों का लाभ सीधे पात्र किसानों को पारदर्शी तरीके से मिलता है। इसके अलावा एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन हो जाने से किसानों को खाद, बीज या सरकारी योजनाओं के लिए बार-बार पटवारी के चक्कर नही लगाने पड़ते और बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नही पड़ती।शासन के मंशानुरूप किसानों को शासकीय योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त करने हेतु भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए एग्रीस्टैक पोर्टल में किसानों को अपने प्रत्येक खातों का अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना आवश्यक है। इसके अभाव में किसानों को अपने धान एवं अन्य फसलों के समर्थन मूल्य पर बिक्री के अलावा राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है।उल्लेखनीय है कि बालोद जिला प्रशासन द्वारा इस संबंध में जिले के सभी किसानों एवं संयुक्त खाताधारकों के लिए आवश्यक सूचना जारी की गई है। जिससे वे समय रहते अपना पंजीयन सुनिश्चित करा सकें। जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए सूचना में बताया गया है कि यदि किसी एक ऋण पुस्तिका या खाते में 2, 3 या 4 लोगों के नाम दर्ज हैं, तो उन सभी संयुक्त खाताधारकों का अलग-अलग एग्रीस्टैक पंजीयन कराना अनिवार्य है। इसके अलावा जिन किसानों के नाम एक ही खाते में अलग-अलग खसरा नंबर दर्ज हैं, उन सभी संबंधित खाताधारकों को उन्हीं खसरा नंबरों पर अपना पंजीयन कराना होगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्राम पंचायत, पटवारी, कृषि विभाग, सेवा सहकारी समिति अथवा लोक सेवा केंद्र से भी संपर्क कर सकते हैं।
- बालोद. जिले के गुंडरदेही विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला अचैद में शासन की महत्वाकांक्षी योजना ’सरस्वती साइकिल योजना’ के अंतर्गत निःशुल्क साइकिल वितरण प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी किया गया। इस योजना से विद्यालय की 32 छात्राएं लाभान्वित हुईं। इस गरिमामयी कार्यक्रम में शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों, प्राचार्य, विद्यालय के स्टाफ एवं अभिभावकों की उपस्थिति में बालिकाओं को साइकिल वितरण किया गया। सरस्वती साइकिल योजना का सकारात्मक प्रभाव अब धरातल पर दिखने लगा है। सुलभ आवागमन और समय की बचत से बालिकाओं में स्कूल आने की ललक साफ झलकती है। अचैद के विद्यालय में पास के गांवों, जैसे खुटेरी, फुंडा, बोरगहन, रजोली के विद्यार्थी अध्ययन करने आते हैं। साइकिल मिलने से बालिकाओं का सफर सुरक्षित, सुगम और समय की बचत करने वाला हो गया है, जिसके कारण बालिकाएं नियमित विद्यालय आती हैं।इस योजना के कारण लम्बी दूरी के कारण होने वाली थकान अब बालिकाओं की उपस्थिति के आड़े नहीं आती है, जिसके फलस्वरूप उनकी दैनिक उपस्थिति में स्पष्ट सुधार परिलक्षित हो रहा है। अब वे पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ समय पर स्कूल आती हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर पालकों के लिए एक संबल के समान है। पालकों को बच्चों के आवागमन के साधन जुटाने के लिए किसी आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता, जो उनके लिए एक बड़ी राहत है। विद्यालय में वितरित की गई ये 32 साइकिलें केवल भौतिक सामग्री नहीं हैं, बल्कि इन बालिकाओं के ऊँचे सपनों और उज्ज्वल भविष्य की ओर मजबूत कदम हैं।
- 0- प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाने हेतु प्रगतिरत कार्यों को शीघ्र पूरा करने के दिए निर्देशबालोद. मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में हर घर नल (जल जीवन मिशन) की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल जीवन मिशन वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस योजना से महिलाओं का समय बचेगा और जलजनित बीमारियों में कमी आएगी तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, सभी जिलों के कलेक्टर एवं विभागीय अधिकारी शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित वर्चुअल बैठक के दौरान संयुक्त जिला कार्यालय बालोद के एनआईसी कक्ष में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी एवं संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में मिशन मोड में कार्य करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि वे प्रत्येक माह जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करें। बैठक में मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी और हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है, उनका 31 अगस्त तक भौतिक सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन योजनाओं का कार्य अधूरा है, उन्हें 31 दिसंबर तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।मुख्य सचिव ने कहा कि जिला कलेक्टर समयबद्ध तरीके से रनिंग बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करें, जिससे निर्माण कार्य बाधित नही हो। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वीबी-जी राम जी एवं स्थानीय संसाधनों, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), सांसद निधि, विधायक निधि, सीएसआर एवं अन्य उपलब्ध स्रोतों से आवश्यक वित्तीय व्यवस्था कर योजनाओं को पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जिले को जलस्रोतों का आकलन कर नए स्रोतों की पहचान करने, जलस्रोत संरक्षण एवं रिचार्ज व्यवस्था विकसित करने तथा प्रत्येक स्रोत के संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं में वर्तमान स्रोत से पेयजल उपलब्ध कराना संभव नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान कर शीघ्र कार्रवाई की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल से वंचित नहीं रखा जा सकता। बैठक में सोलर आधारित नल जल योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि योजना-वार विश्लेषण कर स्वीकृत राशि एवं व्यय का समुचित मिलान किया जाए।मुख्य सचिव श्री विकासशील ने प्रत्येक जिले को हर घर जल के लिए नया लक्ष्य निर्धारित करने एवं गांवों को इकाई मानकर शत-प्रतिशत नल जल कवरेज सुनिश्चित करने तथा जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके।
- भिलाईनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना के मोर मकान-मोर आस घटक अंतर्गत नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में झुग्गी बस्ती एवं गैर स्लम क्षेत्रों में किरायेदार के रूप में निवासरत परिवारों से आवास योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लगातार आवेदन आमंत्रित किए जा रहे है। योजना के तहत परिवारों द्वारा वर्तमान में कुल 348 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं।प्राप्त आवेदन पत्रों की पात्रता संबंधी जांच एवं दस्तावेजों के परीक्षण के दौरान 340 आवेदन पूर्ण एवं पात्र पाए गए, जबकि आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में 08 आवेदन अपूर्ण (अपात्र) पाए गए हैं। पूर्ण एवं अपूर्ण दस्तावेजों सहित जमा किए गए समस्त आवेदन पत्रों को पात्रता की जांच एवं परीक्षण के लिए निकाय स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। इसी क्रम में गुरूवार को नगर पालिक निगम भिलाई के सभागार कक्ष में निकाय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के उपस्थित सदस्यों द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के मोर मकान-मोर आस घटक के अंतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों का बारीकी से परीक्षण किया गया। समिति द्वारा आवेदकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं पात्रता संबंधी आवश्यक मापदंडों का अवलोकन करते हुए आवेदन पत्रों की जांच की गई। बेघर परिवारों को लगातार आवास हेतु आवेदन वितरण किया जा रहा है, जिसे आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर जमा भी कराया जा रहा है। नगर निगम के आवास शाखा द्वारा प्राप्त आवेदन पत्रों को समिति के समक्ष प्रस्तुत कर परीक्षण उपरांत पात्र हितग्राहियों को सक्षम स्वीकृति प्राप्त कर 10 प्रतिशत राशि जमा कराकर लाटरी के माध्यम से आवास आबंटन की कार्यवाही किया जा रहा है।नगर निगम द्वारा योजना के तहत प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया को नियमानुसार आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ प्रदान किया जा सके। समिति द्वारा आवेदन पत्रों की जांच के पश्चात पात्र एवं अपात्र आवेदनों का नियमानुसार निर्धारण किया जाएगा। निगम प्रशासन का उद्देश्य है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को शासन की आवासीय योजना का लाभ पारदर्शी एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया जा सके। दस्तावेज परीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी दिनेश कोसरिया, सहायक अभियंता नितेश मेश्राम, लेखाधिकारी चंद्रभूषण साहू, राजस्व अधिकारी जे.पी.तिवारी, उप अभियंता दीपक देवांगन, आवास प्रभारी विदयाधर देवांगन, नम्रता ठाकुर उपस्थित रहे।
- 0- संवाद, सौहार्द एवं आपसी सहमति से विवादों के समाधान का दिया गया संदेशदुर्ग. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।जिसके संबंध में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग एवं जिला प्रशासन, दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में आज ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के अंतर्गत एक भव्य एवं प्रभावी विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों के समन्वित सहयोग एवं जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।उक्त कार्यक्रम का आयोजन राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वय एवं सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जिला दुर्ग स्थित भारती लॉ कॉलेज के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण की गरिमामयी एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता भी रही, जिन्होंने सामुदायिक मध्यस्थता एवं विधिक जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं प्रभावी बनाया। विधि के विद्यार्थियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि न्याय एवं सामाजिक समरसता के मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है।कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों के मध्य इस महत्वपूर्ण जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार करना था कि किसी भी प्रकार के छोटे-बड़े सामाजिक, पारिवारिक अथवा सामुदायिक विवादों का समाधान केवल न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव नहीं है, बल्कि उन्हें आपसी संवाद, समझ, सहमति एवं सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से भी सौहार्दपूर्ण एवं सम्मानजनक ढंग से सुलझाया जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता ऐसी प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें किसी भी पक्ष की हार अथवा जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की भावनाओं, आवश्यकताओं एवं हितों का सम्मान करते हुए ऐसा समाधान खोजा जाता है, जिसे सभी पक्ष स्वेच्छा एवं संतोषपूर्वक स्वीकार कर सकें।कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों से संबंधित जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी प्रदान करते हुए ग्रामीणजनों को विधिक अधिकारों, सामाजिक उत्तरदायित्वों एवं शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जागरूक किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली एवं जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।उक्त कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बी.एम.ओ. देवेन्द्र बेलचंदन, महिला एवं बाल विकास विभाग से सुपरवाइजर ममता साहू, जनपद पंचायत से परियोजना अधिकारी (पी.ओ.) गौरव मिश्रा, राजस्व विभाग से पटवारी सतीश दीवान, पशु चिकित्सा विभाग से प्रेमलता देवांगन तथा भारती लॉ कॉलेज से असिस्टेंट प्रोफेसर संपदा बैस एवं सरिता गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर का विशेष योगदान रहा, जिनके समन्वय एवं मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों के मध्य प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उनके द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता एवं विधिक जागरूकता के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से किए गए प्रयासों ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं जनोपयोगी बनाया।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग एवं जिला प्रशासन, दुर्ग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विभिन्न विभागों के समन्वित सहयोग, शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता एवं जनसहभागिता के माध्यम से सामाजिक सौहार्द, विधिक जागरूकता एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल सिद्ध हुआ। सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से समाज में संवाद, सहयोग एवं आपसी विश्वास की भावना को सशक्त बनाने का यह प्रयास निश्चित रूप से न्याय सुलभता के लक्ष्य को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- 0- कलेक्टर ने अधिकारी-कर्मचारियों को पूरे समय मुस्तैद रहकर कार्य करने के दिए निर्देश0- बाढ़ आपदा के संबंध में मदद हेतु जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 07749-223950 सार्वजनिक की गईबालोद. छत्तीसगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले में दैवीय विपत्ति एवं प्राकृतिक आपदा की घटनाओं से बचाव एवं राहत कार्यों के सुचारू संचालन हेतु बालोद जिले में जिला एवं अनुविभाग स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। राज्य शासन के निर्देशानुसार इस दौरान उत्पन्न किसी भी स्थिति से निपटने हेतु संयुक्त जिला कार्यालय में स्थापित जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अलावा अनुविभाग स्तर पर स्थापित किए गए नियंत्रण कक्ष को 24 घण्टा क्रियाशील रखा गया है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने जिला एवं अनुविभाग स्तरीय नोडल अधिकारियों के अलावा सभी अधिकारी-कर्मचारियों को पूरे समय में मुस्तैद रहकर बाढ़ आपदा के कारण उत्पन्न किसी भी स्थिति में आम जनता को तत्काल मदद उपलब्ध कराने हेतु त्वरि कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा के निर्देशानुसार जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अलावा अनुविभाग स्तरीय नियंत्रण कक्ष में अधिकारी-कर्मचारियों की अलग-अलग पालियों में ड्यूटी लगाई गई है। उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक आपदा से बचाव एवं राहत व्यवस्था के संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी देने या प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर 07749-223950 पर संपर्क की जा सकती है। इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई हेतु अपर कलेक्टर श्री अजय किशोर लकड़ा (मोबाइल नंबर 9425252314) को नोडल अधिकारी तथा जल संसाधन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री के.एल. नेताम (मोबाइल नंबर 789837994) को बाढ़ नियंत्रण कक्ष का प्रभारी अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसी तरह अनुविभाग एवं तहसील स्तर पर भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, इसके अंतर्गत अनुविभाग बालोद के लिए अनुविभागीय अधिकारी श्री नूतन कुमार कंवर (मोबाइल नंबर 7974926756), गुरूर के लिए श्री रामकुमार सोनकर (मोबाइल नंबर 9179675044), गुंडरदेही के लिए श्रीमती प्रतिमा ठाकरे झा (मोबाइल नंबर 8770911099), डौंडीलोहारा के लिए श्री शिवनाथ बघेल (मोबाइल नंबर 6267842188) और डौंडी के लिए श्री सुरेश साहू (मोबाइल नंबर 7587030552) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसी तरह तहसील स्तर पर बालोद के लिए तहसीलदार सुश्री संध्या नामदेव (मोबाइल नंबर 6264897027), गुरूर तहसील के लिए तहसीलदार श्री हेमंत कुमार पैकरा (मोबाइल नंबर 9755003989), गुंडरदेही तहसील के लिए तहसीलदार श्री हनुमंत सिंह श्याम (मोबाइल नंबर 9685561564), डौंडीलोहारा तहसील के लिए तहसीलदार श्री हिंसा राम नायक (मोबाइल नंबर 9407750314), डौंडी तहसील के लिए तहसीलदार श्री देवेन्द्र नेताम (मोबाइल नंबर 9407704570), अर्जुन्दा तहसील के लिए तहसीलदार श्री चन्द्रशेखर चन्द्राकर (मोबाइल नंबर 9406253971) तथा मार्री बंगला देवरी के लिए श्री प्रीतम कुमार साहू (मोबाइल नंबर 9907419970) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- 0- विद्यार्थियों को पाॅक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, चाइल्ड हेल्पलाइन, साइबर क्राइम, गुड टच बैड टच के बारे में दी गई जानकारीबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अमित सिन्हा के मार्गदर्शन तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री गजानंद साहू के नेतृत्व में आज शासकीय स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लाटाबोड़ में जिला बाल संरक्षण इकाई एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के संयुक्त तत्वावधान में एक व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम 2012, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, गुड टच-बैड टच, साइबर क्राइम तथा बाल अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही किसी भी प्रकार के शोषण या संकट की स्थिति में सहायता प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया से बच्चों को अवगत कराया गया। इस अवसर पर संस्था के प्राचार्य श्री फतेराम कोसरिया, व्याख्यातागणों सहित जिला बाल संरक्षण इकाई, मिशन वात्सल्य, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं मिशन शक्ति के समन्वयक, परामर्शदाता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आउटरीच वर्कर उपस्थित थे। कार्यक्रम का मंच संचालन श्री चमन लाल सिन्हा द्वारा किया गया। इस जागरूकता शिविर में बड़ी संख्या में बालक-बालिकाएं उपस्थित रहे।
- -आकाशीय बिजली से मृतक की पत्नी को मिला मुआवजा, परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का जताया आभार..जशपुरनगर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया एक बार फिर जरूरतमंद परिवार के लिए राहत का माध्यम बना।सीएम कैंप कार्यालय में की गई गुहार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आकाशीय बिजली की चपेट में आकर जान गंवाने वाले व्यक्ति की पत्नी को 4 लाख रूपये की मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी गई। राहत राशि मिलने के बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी संवेदनशील पहल से समय पर न्याय और आर्थिक सहायता मिल सकी।प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम झरन (मसरिघाट), पोस्ट घुमरा, तहसील तपकरा निवासी मुनिका बाई विश्वकर्मा के पति की आकाशीय बिजली गिरने से असामयिक मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद लंबे समय तक मुआवजा राशि नहीं मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन देकर सहायता की गुहार लगाई थी।आवेदन प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने प्रकरण का शीघ्र निराकरण करते हुए प्रक्रिया करते हुए आवेदिका के बैंक खाते में मुआवजा राशि का भुगतान करा दिया।मुआवजा राशि मिलने पर आवेदिका एवं उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय तथा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी समस्या का त्वरित समाधान हुआ, जिससे संकट की घड़ी में परिवार को बड़ी राहत मिली।गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त होने वाले आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है, जिससे जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को समयबद्ध राहत मिल रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निराकरण किया जा रहा है।
- -एमसीबी के किसान राय सिंह बोले - गांव के किसानों की सफलता से मिली प्रेरणा-कम लागत और बेहतर उत्पादन की उम्मीदरायपुर। छत्तीसगढ़ में खेती अब परंपरागत तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है। इसका ताजा उदाहरण एमसीबी जिले के ग्राम केल्हारी के किसान राय सिंह हैं, जिन्होंने इस खरीफ सीजन में पहली बार अपनी फसल के लिए नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया है। पिछले वर्ष गांव और आसपास के किसानों को मिले बेहतर परिणामों से प्रेरित होकर उन्होंने भी इस नई तकनीक को अपनाया है।राय सिंह ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति से नैनो डीएपी प्राप्त करते हुए बताया कि खेती में नई तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है तो किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष गांव के कई किसानों ने नैनो डीएपी का उपयोग किया था, जिससे उनकी फसलों की बढ़वार बेहतर रही और उत्पादन में भी वृद्धि हुई। इन्हीं सकारात्मक अनुभवों को देखकर उन्होंने इस वर्ष स्वयं भी इसका उपयोग करने का निर्णय लिया।राय सिंह के अनुसार पहले पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियां ढोनी पड़ती थीं, जबकि नैनो डीएपी की छोटी बोतल को आसानी से बैग में रखकर घर लाया जा सकता है। इससे समय, श्रम और परिवहन की परेशानी कम होती है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि वैज्ञानिक खेती ही भविष्य की जरूरत है और इससे खेती अधिक लाभकारी बनाई जा सकती है।कृषि विभाग भी किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग, वैज्ञानिक खेती और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के संबंध में लगातार प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दे रहा है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि करना है।
- -अब पानी लाने में नहीं होता घंटों का संघर्ष-स्वच्छ पानी से सुधरा स्वास्थ्य, बच्चों की पढ़ाई को मिला नया संबलरायगढ़ । विकासखंड घरघोड़ा के ग्राम पंचायत छर्राटांगर अंतर्गत ग्राम डोकरबुड़ा आज जल जीवन मिशन की सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। 176 परिवारों और 772 की आबादी वाले इस गांव में अब प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्याप्त पेयजल नियमित रूप से पहुंच रहा है। कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करने वाले ग्रामीण आज घर बैठे स्वच्छ पेयजल की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। इस परिवर्तन ने न केवल लोगों की दिनचर्या को आसान बनाया है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को भी नई दिशा दी है।डोकरबुड़ा की श्रीमती कुंतीमा राठिया बताती हैं कि पहले उन्हें प्रतिदिन कई बार लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता था। घर की जिम्मेदारियों के साथ पानी की व्यवस्था का पूरा दायित्व उनके कंधों पर था, जिससे दिन का बड़ा हिस्सा इसी कार्य में बीत जाता था। कई बार बच्चों को भी पढ़ाई छोड़कर पानी लाने में सहयोग करना पड़ता था। लेकिन जल जीवन मिशन के तहत घर तक नल कनेक्शन मिलने के बाद अब यह परेशानी पूरी तरह समाप्त हो गई है। समय की बचत होने से वे परिवार की बेहतर देखभाल करने के साथ अन्य घरेलू एवं आयवर्धक कार्यों पर भी ध्यान दे पा रही हैं।जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक परिवार तक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। इसके बाद स्वच्छ पेयजल की नियमित उपलब्धता से जलजनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है। चिकित्सा पर होने वाला खर्च घटा है और परिवारों का जीवन पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ एवं सुरक्षित हुआ है। वहीं अब बच्चों को पानी लाने की जिम्मेदारी नहीं निभानी पड़ती, जिससे वे नियमित रूप से विद्यालय जाकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। गांव में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।जल जीवन मिशन ने डोकरबुड़ा में केवल नल से पानी पहुंचाने का कार्य नहीं किया, बल्कि पूरे गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाया है। ग्रामीण अब जल संरक्षण, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के महत्व को समझते हुए जिम्मेदारी के साथ इसका उपयोग कर रहे हैं। हितग्राही श्रीमती कुंतीमा राठिया कहती हैं, जल जीवन मिशन ने हमारे घर तक केवल नल से पानी ही नहीं पहुंचाया, बल्कि समय की बचत, बेहतर स्वास्थ्य, महिलाओं को सम्मान और परिवार के लिए एक सुरक्षित एवं खुशहाल भविष्य की नई उम्मीद भी दी है। आज हर घर जल से हमारा जीवन पहले से कहीं अधिक आसान और सुखद हो गया है। आज ग्राम डोकरबुड़ा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचता है तो केवल प्यास ही नहीं बुझती, बल्कि पूरे गांव के विकास को नई गति मिलती है।
- -रुपडेगा की सुदामा रावत बनीं लखपति दीदी-किराना दुकान, मनिहारी, सिलाई और सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय से हर साल 3 लाख रुपये की आय-गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आत्मविश्वास की दिखा रहीं राहरायपुर। कभी खेती-बाड़ी तक सीमित रहने वाली रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम रुपडेगा की श्रीमती सुदामा रावत की जिंदगी अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर लखपति दीदी बनने का गौरव भी हासिल किया।सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य सुदामा रावत ने शुरुआत में समूह से मिली सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) का उपयोग खेती-बाड़ी के लिए किया। खेती से परिवार की जरूरतें तो पूरी हो जाती थीं, लेकिन उन्होंने यहीं रुकने के बजाय कुछ बड़ा करने का सपना देखा। इसी सोच ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। समूह के सहयोग और बैंक से मिले 5 लाख रुपये के मुद्रा ऋण के सहारे उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज वे किराना दुकान के साथ मनिहारी सामग्री की बिक्री, सेंटरिंग प्लेट किराये पर उपलब्ध कराने तथा सिलाई सेंटर का सफल संचालन भी कर रही हैं।सुदामा रावत की लगन और मेहनत का परिणाम यह है कि आज वे हर वर्ष लगभग 2 से 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा बेहतर हुई, स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ीं और परिवार का जीवन स्तर पहले की तुलना में काफी सुधरा है। अब गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरणा लेकर स्व-सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। वे स्वयं भी महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, प्रशिक्षण लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया। आज वे अपने व्यवसाय का सफल संचालन करने के साथ-साथ गांव की महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देने का कार्य भी कर रही हैं।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने का काम कर रहा है। सुदामा रावत इसकी जीवंत मिसाल हैं। समूह से जुड़कर उन्होंने आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी और आज वे सम्मानजनक जीवन जीते हुए अपने गांव में नई पहचान बना चुकी हैं। सुदामा रावत कहती हैं, मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। नियमित बचत करें, प्रशिक्षण लें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें। सरकार और समूह का सहयोग महिलाओं को लखपति दीदी बनने का अवसर देता है।
- -वीबी-जी रामजी के तहत एक ही स्थल पर लगे 1717 नाशपाती के पौधे-फलदार पौधों से पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहलरायपुर । विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में हरित विकास, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ विकासखंड स्थित ग्राम कोठली में एक ही स्थल पर 1717 नाशपाती के पौधों का वृहद पौधरोपण कर हरित विकास का नया अध्याय रचा गया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीणों, विशेषकर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए भविष्य में आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में सामरी विधायक श्रीमती उद्देश्वरी पैंकरा ने पौधरोपण कर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का संकल्प है।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि फलदार पौधों का रोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि इन पौधों के संरक्षण और देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपी जाएगी, जिससे पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ भविष्य में फल उत्पादन के माध्यम से उनकी आय में भी वृद्धि होगी।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीणों तथा स्कूली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक पौधरोपण कर पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया। इस दौरान ग्राम कोठली की श्रीमती प्रभावती दिवाकर ने अपनी बेटी ऋषिका रवि के नाम पर नाशपाती का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण और बेटी के प्रति स्नेह का प्रेरक संदेश दिया। वहीं कक्षा 10वीं की छात्रा गायत्री पैकरा ने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार की यह पहल हरित विकास, जलवायु संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने का प्रभावी मॉडल बन रही है, जिसमें फलदार वृक्षों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
- -प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिली उड़ान, स्वरोजगार स्थापित कर 6 युवाओं को दिया रोजगाररायपुर । प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत नया व्यवसाय शुरू करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र और सेवा का लोन प्राप्त किया जा सकता है। इसमें 15% से 35% तक सब्सिडी भी मिलती है, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में एक बड़ा सहारा है। छत्तीसगढ़ में हज़ारों लोगों ने अपने सपनों को साकार किया है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास प्रदेश के युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। बस्तर जिले के जगदलपुर निवासी श्री किशन जंगम इसकी प्रेरक मिसाल हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने नौकरी की तलाश करने के बजाय स्वयं का उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। आज वे न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि छह स्थानीय युवाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी साकार कर रहे हैं।36 वर्षीय किशन जंगम ने स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद दूसरों के अधीन कार्य करने के बजाय स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का संकल्प लिया। प्रिंटिंग व्यवसाय में उनकी विशेष रुचि थी, लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण यह सपना अधूरा नजर आ रहा था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, जगदलपुर से मार्गदर्शन प्राप्त कर योजना के तहत आवेदन किया। वर्ष 2019 में पंजाब नेशनल बैंक, जगदलपुर शाखा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, साथ ही 1.50 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी भी प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने जगदलपुर में एफसीआई गोदाम के सामने 'मेसर्स कार्तिक प्रिंटर सप्लायर्स' की स्थापना की। आधुनिक मशीनों की स्थापना और गुणवत्ता आधारित सेवाओं के बल पर किशन का व्यवसाय लगातार आगे बढ़ता गया। उनकी मेहनत, ग्राहक विश्वास और व्यावसायिक समझ का परिणाम है कि आज उनके प्रिंटिंग प्रतिष्ठान का वार्षिक कारोबार 30 से 35 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।किशन जंगम की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। व्यवसाय के विस्तार के साथ उन्होंने 6 स्थानीय युवाओं को अपने प्रतिष्ठान से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया। आज उनके इस प्रयास से छह परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है और अनेक युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।किशन जंगम का कहना है कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी प्रदान किया। वे स्वयं भी अपने परिचित युवाओं को सरकारी स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर अपना उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करते हैं।किशन जंगम की सफलता इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और अवसर मिले तो वे न केवल अपनी तकदीर बदल सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर सकते हैं।
- रायपुर। किसी भी गांव के स्वस्थ और समृद्ध भविष्य की नींव स्वच्छ पेयजल से ही पड़ती है। जब लोगों को शुद्ध और संक्रमणमुक्त पानी मिलता है, तो न केवल बीमारियों पर अंकुश लगता है, बल्कि पूरे गांव का जीवन स्तर भी बेहतर होता है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रांपा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का क्लोरीनेशन अभियान इसी बदलाव की मिसाल बनकर सामने आया है। विभाग की पहल से अब गांव के हैंडपंपों और सोलर जल स्रोतों से मिलने वाला पानी अधिक सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त हो गया है। इससे जलजनित बीमारियों की आशंका में उल्लेखनीय कमी आई है और ग्रामीणों का भरोसा स्वच्छ पेयजल पर पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की तकनीकी टीम और हैंडपंप टेक्निशियनों ने ग्राम रांपा के सभी प्रमुख जल स्रोतों का निर्धारित मानकों के अनुरूप क्लोरीनेशन किया। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से पानी में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणकारी सूक्ष्मजीवों का प्रभावी नियंत्रण किया गया, जिससे पेयजल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी के कारण डायरिया, टाइफाइड और अन्य जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। क्लोरीनेशन अभियान के बाद अब ग्रामीण निश्चिंत होकर हैंडपंप और सोलर जल स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं।गांव के लोगों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। साथ ही इस अभियान ने उन्हें जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने, जल संरक्षण करने और सुरक्षित पेयजल के महत्व के प्रति भी अधिक जागरूक बनाया है। ग्रामीणों ने भविष्य में भी जल स्रोतों की साफ-सफाई बनाए रखने और उनका जिम्मेदारी से उपयोग करने का संकल्प लिया है।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जल जीवन मिशन के तहत जिलेभर में नियमित रूप से क्लोरीनेशन अभियान संचालित कर रहा है। विभाग का उद्देश्य केवल पेयजल को शुद्ध करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करना भी है।
- -मुफ्त चूजे और दाने से कुक्कुट पालन को मिलेगा बढ़ावारायपुर / ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने और कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करने के लिए बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना चलाई जा रही है।इस योजना के तहत किसानों और महिलाओं को नाममात्र अंशदान पर 28 दिवसीय चूज़े और कुक्कुट आहार (दाना) सीधे घर तक उपलब्ध कराए जाते हैं। छोटे, सीमांत किसानों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को अतिरिक्त आय का साधन प्रदान करना है। सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों के लिए कुक्कुट पालन अब आय का नया साधन बनने जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और पशुपालन के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों को निःशुल्क कुक्कुट इकाइयां उपलब्ध कराई गई हैं।सुकमा जिले के कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक डॉ. संदीप इंदुरकर के मार्गदर्शन में छिंदगढ़ विकासखंड के तोंगपाल क्षेत्र के ग्राम लेदा, कंकापाल, तोंगपाल, मारेंगा और टीपनपाल में 50 कुक्कुट इकाइयों का वितरण किया गया। योजना के तहत प्रत्येक चयनित हितग्राही को 45 उन्नत नस्ल के चूजे और उनके पालन-पोषण के लिए 10 किलोग्राम पौष्टिक दाना निःशुल्क दिया गया।सरकारी सहायता से ग्रामीणों को कुक्कुट पालन शुरू करने के लिए प्रारंभिक सहयोग मिला है। चूजे और दाना निःशुल्क मिलने से हितग्राहियों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हुआ है। अब वे कुक्कुट पालन को अपनी अन्य आजीविका गतिविधियों के साथ जोड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। कुक्कुट पालन ग्रामीण परिवारों के लिए कम लागत में शुरू किया जा सकने वाला व्यवसाय है। इससे अंडे और मुर्गियों की बिक्री के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने के अवसर मिलते हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के स्थायी अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस अवसर पर ग्राम लेदा में आयोजित वितरण कार्यक्रम में जनपद सदस्य और सरपंच सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। उन्होंने ग्रामीणों के हित में किए गए इस प्रयास की सराहना की।सरकारी योजना से मिले इस सहयोग से तोंगपाल क्षेत्र के ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। यह पहल ग्रामीण परिवारों को सहायता से स्वरोजगार और स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन रही है।
- -धमतरी की महिलाएं वनोपज से बना रहीं उत्पाद, केंद्र ने किया 4.37 करोड़ रुपए का कारोबाररायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का दुगली वन धन विकास केंद्र आदिवासी महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख मॉडल बन चुका है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के मार्गदर्शन में 10 महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से, यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं की आय और सामाजिक स्थिति को सशक्त बना रहा है। यह केंद्र पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के माध्यम से लगभग 25 प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार करता है।प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा किए हैं। इस योजना से जुड़कर धमतरी जिले के दुगली वन धन विकास केंद्र की महिलाएं अब वनोपज का मूल्य संवर्धन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और अपने परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के सहयोग से संचालित दुगली वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति ने अपनी मेहनत और लगन से उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आधुनिक प्रशिक्षण, मशीनरी और तकनीकी सहयोग से केंद्र में विभिन्न वन उपज और स्थानीय संसाधनों से उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। मार्च 2026 तक इस केंद्र ने लगभग 4.37 करोड़ रुपए का कारोबार किया है।दुगली वन धन विकास केंद्र से जुड़ी महिलाओं को वन उपज के संग्रहण के साथ-साथ उसके प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण दिया गया। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होने लगा। अब महिलाएं केवल कच्ची वन उपज बेचने के बजाय उससे तैयार उत्पाद बनाकर अधिक आय अर्जित कर रही हैं।केंद्र की सदस्य कु. रंभा टेकाम कहती हैं कि वन धन विकास केंद्र से जुड़ने के बाद महिलाओं को अपनी मेहनत का बेहतर लाभ मिल रहा है। प्रशिक्षण और सुविधाओं के कारण अब वे आत्मविश्वास के साथ विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे अपने परिवार की जरूरतों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।दुगली वन धन विकास केंद्र के उत्कृष्ट कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2021 में केंद्र को उत्कृष्ट कार्यों के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।यह केंद्र आज महिला सशक्तिकरण, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रेरक उदाहरण बन चुका है। प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के माध्यम से दुगली की महिलाएं वन उपज को आय का साधन बनाकर 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को साकार करने में योगदान दे रही हैं।दुगली वन धन विकास केंद्र की यह सफलता बताती है कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचता है और समुदाय की भागीदारी जुड़ती है, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और समाज की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं।
- -अब सुरक्षित घर में सम्मान और सुकून के साथ बीत रहा जीवन: संतोषी पटेलमुंगेली। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) गरीब परिवारों के लिए सम्मानजनक जीवन का मजबूत आधार बन रही है। योजना के माध्यम से ऐसे हजारों परिवारों का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना साकार हो रहा है, जो कभी कच्चे और असुरक्षित मकानों में रहने को मजबूर थे। यह योजना आज आवास निर्माण के साथ ही ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है। जिले में ऐसे अनेक परिवार इस योजना से लाभान्वित होकर खुशहाल जीवन की ओर अग्रसर हैं।इसी कड़ी में मुंगेली विकासखंड के ग्राम देवगांव की श्रीमती संतोषी पटेल की जिंदगी भी प्रधानमंत्री आवास योजना से पूरी तरह बदल गई है। कभी बारिश के मौसम में टपकती छत, दीवारों में दरारें और हर पल चिंता के बीच जीवन बिताने वाला उनका परिवार आज अपने पक्के, सुरक्षित और सुविधायुक्त घर में सम्मानपूर्वक रह रहा है। संतोषी पटेल के बेटे अंकुश ने बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बरसात के दिनों में घर में पानी भर जाता था और परिवार को रातभर जागकर समय बिताना पड़ता था। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी और हर मौसम अपने साथ नई परेशानियां लेकर आता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास मिलने के बाद उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। अब परिवार को सुरक्षित छत, स्वच्छ वातावरण और बेहतर जीवन की सुविधा मिल रही है। बच्चों को पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल मिला है और पूरे परिवार में भविष्य को लेकर नया आत्मविश्वास जागा है।संतोषी पटेल ने बताया कि यह घर केवल ईंट और सीमेंट से बना मकान नहीं, बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा, सम्मान और खुशियों का नया आधार है। अब उन्हें हर मौसम में किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती और परिवार सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना ने उनके परिवार को नया जीवन दिया है। आज उनका सपना साकार हो चुका है और वे आत्मसम्मान के साथ अपने पक्के घर में रह रहे हैं।
- रायपुर। कबीरधाम जिले की ग्रामीण महिलाओं ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने उन्हें प्रदेशभर में नई पहचान दिलाई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी 40 महिलाएं पहली बार ‘सोलर दीदी’ बनकर न केवल ग्रामीण घरों को रोशन कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की नई मिसाल भी गढ़ रही हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की पहल पर ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना को जिला पंचायत कबीरधाम ने प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा। जिला पंचायत, बिहान और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के सहयोग से कवर्धा के वंदे मातरम संकुल संगठन को सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत किया गया। टाटा कंपनी ने संगठन की 35 महिलाओं को सोलर पैनल स्थापना और तकनीकी कार्यों का विशेष प्रशिक्षण दिया।अभियान के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। जिले में लगभग 40 घरों में सोलर पैनल लगाने के आदेश मिल चुके हैं। इनमें ग्राम समनापुर की श्रीमती अंजनी पटेल के घर 3 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित किया गया है। इसकी लागत 1.80 लाख रुपये है, जिसमें 1.20 लाख रुपये का ऋण संकुल के माध्यम से तथा शेष राशि हितग्राही द्वारा वहन की गई। पीएम सूर्य घर के तहत स्वयं सहायता समूहों के परिवारों को छह प्रतिशत ब्याज पर ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है।कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के अनुसार, प्रशिक्षित महिलाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं खुली हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को भी इस पहल से जोड़ने की तैयारी है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में तीन और महिलाओं के यहां सोलर पैनल स्थापना का कार्य जारी है। कभी रोजगार की तलाश में रहने वाली ये महिलाएं आज तकनीकी दक्षता के साथ पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। ‘सोलर दीदी’ के रूप में उनकी यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और हरित ऊर्जाकृतीनों को नई दिशा दे रही है।
-
राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ शासन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उद्यानिकी फसलों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ मौसम में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। सहायक संचालक उद्यान ने बताया कि उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे किसानों को कम तापमान, अधिक तापमान, कीट-व्याधि के प्रकोप के अनुकूल मौसम, अनियमित वर्षा की स्थिति निर्मित होना, ओला वृष्टि, प्रतिकुल मौसम से होने वाले हानि से बचाने के लिए पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू की गई है। खरीफ वर्ष 2026 में राजनांदगांव जिले अन्तर्गत बीमा कराने वाले कृषकों को अधिसूचित फसल टमाटर, बैंगन, मिर्च, अदरक, केला, पपीता, अमरूद के अनुसार निर्धारित कुल बीमित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत अथवा वास्तविक प्रीमियम जो भी कम हो राशि कृषक अंश के रूप में ऋणी एवं अऋणी दोनों प्रकार के कृषकों को जमा करना होगा। बीमा कराने के लिए अऋणी कृषक फसल लगाने का स्वघोषित प्रमाण पत्र, नक्शा खसरा, आधार कार्ड, आईएफएससी कोड सहित अन्य आवश्यक जानकारी उल्लेखित बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति की आवश्यकता होगी। ऋणी कृषकों के लिए विकल्प चयन के आधार पर क्रियान्वित होगी। योजना में शामिल नहीं होने के इच्छुक ऋणी कृषक को भारत सरकार द्वारा जारी चयन प्रपत्रानुसार हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा आवेदन की अंतिम तिथि के 7 दिवस पूर्व तक संबंधित वित्तीय संस्थान में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। निर्धारित समय-सीमा में हस्ताक्षरित घोषणा पत्र जमा नहीं करने पर संबंधित बैंक द्वारा संबंधित मौसम के लिए स्वीकृत व नवीनीकृत की गई अल्पकालीन कृषि ऋण को अनिवार्य रूप से बीमाकृत किया जाएगा। इस मामले में बैंक द्वारा किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर संबंधित बैंक किसानों के स्वीकार्य दावों के भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
उद्यानिकी फसल अंतर्गत टमाटर का बीमित राशि 1 लाख 20 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 6 हजार रूपए, बैंगन का बीमित राशि 77 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 3 हजार 850 हजार रूपए, मिर्च का बीमित राशि 90 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 4 हजार 500 रूपए, अदरक का बीमित राशि 1 लाख 50 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 7 हजार 500 रूपए, केला का बीमित राशि 1 लाख 65 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 8 हजार 250 रूपए, पपीता का बीमित राशि 1 लाख 25 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 6 हजार 250 रूपए, अमरूद का बीमित राशि 45 हजार रूपए एवं किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 2 हजार 250 रूपए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा ओलावृष्टि व चक्रवाती हवाओं के लिए जोखिम तिथि फसलों के लिए निर्धारित की गई है। केला फसल हेतु 1 जनवरी 2027 से 31 मई 2027 तक ओलावृष्टि एवं 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027 तक चक्रवाती हवाएं, पपीता फसल हेतु 1 जनवरी 2027 से 30 अप्रैल 2027 तक ओलावृष्टि एवं 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027 तक चक्रवाती हवाएं तथा मिर्च फसल हेतु 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 तक ओलावृष्टि के लिए निर्धारित की गई है।
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना एवं उद्यानिकी फसलों के बीमा के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए राजनांदगांव विकासखंड अंतर्गत वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी शासकीय उद्यान रोपणी पेण्ड्री श्री रविन्द्र कुमार मेहरा के मोबाईल नंबर 6232644992, डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत उद्यान विकास अधिकारी शासकीय उद्यान रोपणी अछोली श्री बीएल राणा के मोबाईल नंबर 9424136877 एवं उद्यान विकास अधिकारी शासकीय उद्यान रोपणी अछोली श्री केके डेहरिया के मोबाईल नंबर 9907035625, डोंगरगांव विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण उद्यान विकास अधिकारी शासकीय उद्यान रोपणी सुखरी व विकासखंड प्रभारी श्री अरविन्द कुमार कुर्रे के मोबाईल नंबर 9770968048, छुरिया विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण उद्यान विकास अधिकारी व विकासखंड प्रभारी श्री गिरजा शंकर राणा के के मोबाईल नंबर 8319107897 पर संपर्क किया जा सकता है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी कार्यालय सहायक संचालक उद्यान कलेक्टोरेट मुख्यालय कमरा नंबर 73 व 77 जिला राजनांदगांव से प्राप्त की जा सकती है। -
- कलेक्टर ने अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट के संबंध में शासकीय एवं निजी स्कूलों के प्राचार्य एवं चिप्स के अधिकारियों की बैठक ली
- 15 अगस्त के पहले आधार अपडेशन का कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश
- बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
- 30 सितम्बर तक बायोमेट्रिक अपडेशन की नि:शुल्क सुविधा
- बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बसों एवं वाहनों की जांच करने के निर्देश
- शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों का निजी शालाओं में प्रवेश तथा नीट व जेईई एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में ली जानकारी
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने गुरुवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में जिले में आधार के अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट के संबंध में शासकीय एवं निजी स्कूलों के प्राचार्य एवं चिप्स के अधिकारियों की बैठक ली। कलेक्टर ने जिले में एमबीयू के तहत 5 से 17 आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं के आधार के अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेशन का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में लगभग 7 हजार आधार अपडेशन का कार्य लंबित है। जिसे यथाशीघ्र पूर्ण करने कहा। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए शिक्षा विभाग, चिप्स के अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभाग आपस में समन्वय करते हुए बच्चों के आधार अपडेशन का कार्य करें। उन्होंने कहा कि आधार अपडेशन कार्य शासन की योजनाओं के अंतर्गत लाभ लेने, छात्रवृत्ति, बैंकिंग सेवाओं तथा आगामी महाविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए आवश्यक है। सभी स्कूल के प्राचार्य इस कार्य को गंभीरतापूर्वक पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि अभिभावक भी स्वत: नजदीकी आधार सुविधा केन्द्र में जाकर बच्चों का आधार अपडेशन का कार्य पूर्ण करा सकते हैं। उन्होंने 15 अगस्त 2026 के पहले आधार अपडेशन का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शासकीय एवं निजी स्कूलों में आधार अपडेशन के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेशन के लिए 30 सितम्बर 2026 तक नि:शुल्क सुविधा प्रदान किया गया है। इसके पश्चात 125 रूपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाएगा। कलेक्टर ने सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से किशोरी बालिकाओं की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे विशेष टीकाकरण अभियान एचपीवी टीकाकरण अंतर्गत 14 वर्ष से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए शिविर लगाने एवं जागरूकता हेतु समन्वय करने कहा। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बसों एवं वाहनों की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूली वाहन के चालक सड़क पर विपरीत दिशा में वाहन न चलाएं तथा यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों का निजी शालाओं में प्रवेश तथा नीट व जेईई एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने नीट, एनआईटी, जेईई की परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों को सम्मानित करने कहा। कलेक्टर ने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम अभियान अंतर्गत पौधरोपण कार्य में सभी स्कूलों की सहभागिता होनी चाहिए। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रवास सिंह बघेल, सहायक ई-जिला प्रबंधक श्री आशीष स्वर्णकार, जिला आधार समन्वयक श्री अंकित सिंह, समस्त शासकीय एवं निजी स्कूलों के प्राचार्य एवं अधिकारी उपस्थित रहे। - -महासमुंद एवं बागबाहरा के कुल 88 दिव्यांगजनों को 135 निःशुल्क सहायक उपकरणों का किया गया वितरणमहासमुंद / जिले के दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर एवं सुगम जीवन उपलब्ध कराने जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के समन्वय से गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर मांगलिक भवन, बागबाहरा रोड, महासमुंद में निःशुल्क सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विकासखंड महासमुंद एवं बागबाहरा के चिन्हांकित दिव्यांगजनों को विभिन्न सहायक उपकरण वितरित किए गए। यह कार्यक्रम एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) योजना के अंतर्गत भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), जबलपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। इससे पूर्व प्रथम चरण में जिले में मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविर आयोजित कर पात्र दिव्यांगजनों का चयन किया गया था।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद पंचायत महासमुंद की अध्यक्ष श्रीमती दिशा रामस्वरूप दीवान एवं उपाध्यक्ष श्रीमती हुलसी चंद्राकर ने दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान कर उनके बेहतर जीवन एवं आत्मनिर्भरता की कामना की। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, जिला पंचायत सीईओ सुश्री अनुपमा आनंद मौजूद थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों ने उपस्थित सभी दिव्यांगजनों एवं प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाते हुए समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।शिविर में विकासखंड महासमुंद के 67 दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, वॉकिंग स्टिक, सुगम्य केन तथा टीएलएम किट सहित विभिन्न सहायक उपकरण निःशुल्क वितरित किए गए। वहीं विकासखंड बागबाहरा के 21 दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, वॉकिंग स्टिक, स्मार्टफोन एवं टीएलएम किट प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 88 दिव्यांगजनों को 135 सहायक उपकरणों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस अवसर पर उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह, जनपद पंचायत महासमुंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एलिम्को जबलपुर के प्रबंधक श्री बंशीलाल साकेत, कनिष्ठ प्रबंधक श्री धर्मेंद्र यादव, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के रीजनल मैनेजर श्री राजेश बाघमारे, प्रशासनिक प्रबंधक श्री विनीत भाटी सहित समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।
- -टीबी मुक्त ब्लॉक व जिला बनाने पर जोर-मानवीय संवेदना के साथ मरीजों का उपचार करें - कलेक्टरमहासमुंद / जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक गुरुवार को कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुविधाजनक और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक मानवीय संवेदना के साथ मरीजों का उपचार करें एवं सकारात्मक व्यवहार करें। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सुश्री अनुपमा आनंद, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. आई. नागेश्वर राव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू धृतलहरे, बीएमओ, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित थे।बैठक में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (टीबी), राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री लंगेह ने कहा कि वर्ष 2026 तक टीबी मुक्त पंचायत, टीबी मुक्त विकासखंड एवं टीबी मुक्त जिला बनाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ प्राप्त किया जाए। इसके लिए संभावित मरीजों की समय पर पहचान, जांच, उपचार तथा उपचार पूर्ण होने तक सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों के लिए संचालित निक्षय पोषण योजना सहित अन्य सुविधाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाए तथा जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की सहभागिता से जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में टीबी उन्मूलन को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए, जिससे नए मरीजों की शीघ्र पहचान एवं उपचार सुनिश्चित हो सके। बैठक में बताया गया कि अभी तक 305 ग्राम पंचायते टीबी मुक्त हो गई है। वर्तमान में जांच के दौरान टीबी 754 मरीज उपचाररत हैं।बैठक में कुष्ठ रोग नियंत्रण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि रोगियों की शीघ्र पहचान, नियमित उपचार तथा दिव्यांगता रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। उन्होंने स्वास्थ्य अमले को घर-घर सर्वे एवं जनजागरूकता गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में वर्तमान में 524 मरीज उपचाररत् हैं। जिनका सघन इलाज किया जाए। समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को और मजबूत बनाया जाए। उच्च जोखिम प्रसव वाले प्रकरणों पर प्रारंभ से ही निगरानी रखते हुए संस्थागत प्रसव हेतु सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने कहा कि गैर संचारी रोग नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाकर डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसे बीमारियों का सतत उपचार करें। कलेक्टर ने सिकल सेल, एनीमिया मुक्त भारत और चिरायु टीम को भी सक्रियता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। इसके अलावा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए।इसके अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण, आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, पोषण पुनर्वास केन्द्र, परिवार कल्याण कार्यक्रम, मलेरिया एवं डेंगू नियंत्रण, एनीमिया नियंत्रण तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जाए। योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जाए और प्रत्येक स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक दवाओं एवं जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित रहे।
-
बिलासपुर /कभी हर बारिश के बाद ठरकपुर गांव का पानी नालों से बहकर दूर निकल जाता था। खेतों में नमी नहीं टिकती थी, कुएं और नलकूप सूख जाते थे, किसान एक फसल तक सीमित रहते थे लेकिन आज वही ठरकपुर गांव जल संरक्षण की ताकत से आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई मिसाल बन चुका है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित सामुदायिक सीसी चेक डैम ने न केवल वर्षा जल को सहेजने का काम किया, बल्कि किसानों के जीवन में ऐसा सकारात्मक बदलाव लाया, जिसने खेती, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान की।
जिले के मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पंचायत ठरकपुर में वर्ष 2025-26 के दौरान 19.01 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से निर्मित सामुदायिक सीसी चेक डैम आज ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कृषि समृद्धि का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। इस चेक डैम के निर्माण से गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां पहले वर्षा का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, वहीं अब उसका संरक्षण होने से खेतों, कुओं और नलकूपों में वर्षभर पानी उपलब्ध रहने लगा है। इससे किसानों को सिंचाई, पशुपालन और आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। ठरकपुर गांव लंबे समय से जल संकट और मिट्टी कटाव जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। वर्षा का पानी तेजी से बह जाने के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा था और रबी सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्राम पंचायत ने मनरेगा के तहत नाले पर सीसी चेक डैम निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे स्थानीय ग्रामीणों और मनरेगा श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
चेक डैम बनने के बाद वर्षा जल का संचयन होने लगा और पानी धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। इससे आसपास के कुओं और नलकूपों का जलस्तर बढ़ा तथा गांव में सिंचाई की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब किसान वर्ष में दो से तीन फसलें लेने लगे हैं। टमाटर, मिर्च जैसी नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मिट्टी का कटाव कम होने से खेतों की उर्वरता भी बनी हुई है। जल उपलब्धता बढ़ने से पशुपालन को भी नई दिशा मिली है। वर्षभर नाले में पानी रहने से पशुओं के लिए पेयजल और चारे की समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है, जिससे दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खेती और पशुपालन दोनों पहले की तुलना में अधिक लाभकारी हो गए हैं। गांव के एक किसान बताते हैं, पहले हमारी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। चेक डैम बनने के बाद सिंचाई की सुविधा मिलने से अब हम टमाटर और मिर्च जैसी नकदी फसलें उगा रहे हैं। हमारी वार्षिक आय लगभग दोगुनी हो गई है और अब खेती लाभ का सौदा बन गई है। यह जल संरक्षण की संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है। -
रायपुर, कोरबा, और बिलासपुर, प्रेस क्लब के प्रस्ताव का भिलाई , दुर्ग, राजनांदगांव और कांकेर जगदलपुर प्रेस क्लब अध्यक्षों ने किया समर्थन
कोरबा/रायपुर। कोरबा प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रेस क्लबों के अध्यक्षों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर में कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ हुई हिंसक घटनाओं की एक स्वर में कड़ी निंदा की तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
बैठक में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने पत्रकारों पर हो रहे हमलों के विरोध में निंदा प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव का बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अभिजीत मिश्रा, कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष नौशाद खान ने समर्थन किया , इस मौके पर बिलासपुर, कोरबा के वरिष्ठ पत्रकारों और प्रेस क्लब पदाधिकारियों कवरेज के दौरान पत्रकारों पर हिंसा को चिंता जनक बताया और सभी प्रेस क्लब अध्यक्षों ने सर्वसम्मति बना कर ऐसी घटना की निंदा करने का सुझाव रखा
बैठक में वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि जंतर-मंतर में कवरेज कर रहे वरिष्ठ पत्रकारों रोहित रंजन, देव कोटक, शेफाली, आर्यन आनंद, लोकेश ठाकुर एवं अन्य मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट, मोबाइल एवं घड़ी छीनने, कपड़े फाड़ने तथा पत्रकारिता के उपकरणों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं न केवल निंदनीय हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा आघात हैं।
बैठक में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि देशभर में पत्रकारों के साथ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका सत्य को समाज तक पहुंचाने की है। ऐसे में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे पत्रकारों पर हमला किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि पत्रकारों पर हमला केवल किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने का प्रयास है। ऐसी घटनाओं के दोषियों पर त्वरित एवं कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी पत्रकारों को डराने या सच की आवाज दबाने का दुस्साहस न कर सके।
बैठक में प्रस्तावित निंदा प्रस्ताव की जानकारी भिलाई प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल गुप्ता, राजनांदगांव प्रेस क्लब के अध्यक्ष सचिन अग्रहरि, दुर्ग प्रेस क्लब के अध्यक्ष संतोष मिश्रा तथा जगदलपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मनोज गर्ग और कांकेर प्रेस क्लब अध्यक्ष योगेश सिन्हा को भी दी गई सभी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
सभी प्रेस क्लबों ने अपने-अपने प्रेस क्लब में भी संबंध में प्रस्ताव पारित करने की भी बात कही है,, चर्चा में शामिल प्रेस क्लब अध्यक्षों ने संयुक्त रूप से कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। पत्रकारों के साथ हिंसा, धमकी और भय का वातावरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख प्रेस क्लब पीड़ित पत्रकारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और केंद्र तथा दिल्ली प्रशासन से दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं कठोर कार्रवाई की मांग करते हैं।
कोरबा में आयोजित इस बैठक में कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष नौशाद खान रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी,बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अभिजीत मिश्रा सहित रायपुर प्रेस क्लब कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव भूपेश जांगड़े के साथ कोरबा प्रेस क्लब के संरक्षक कमलेश यादव, वरिष्ठ पत्रकार एवं पदाधिकारी गण राजकुमार शाह , राकेश श्रीवास्तव , रमेश राठौड़ , दिनेश राज , कृष्णा राठौर, ई जयंत, सादिक शेख, आकाश शर्मा , बिलासपुर प्रेस क्लब पूर्व अध्यक्ष, वीरेंद्र गहवाई, निर्मल माणिक, बिलासपुर प्रेस क्लब उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सचिव संदीप करिहार, कोषाध्यक किशोर कुमार सिंह, सह सचिव हरिकृष्ण गंगवानी, कैलाश यादव मौजूद थे।



























.jpg)