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- -राजकीय सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि- पुलिस के जवानों ने दिया गॉड ऑफ ऑनरदुर्ग / देश की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का पार्थिव शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया। निवास ग्राम गनियारी के मुक्तिधाम में उनके पुत्र श्री दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी। इससे पूर्व पुलिस के जवानों ने सम्मान में गॉड ऑफ ऑनर दिया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सांसद श्री विजय बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, श्री ललित चंद्राकर, श्री रिकेश सेन एवं श्री अनूप शर्मा तथा संभाग आयुक्त श्री एस.एन. राठौर, आईजी श्री अभिषेक शांडिल्य, कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह, एसएसपी श्री विजय अग्रवाल ने पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दिये। अंत्येष्ठी में विशाल जनसमूह और लोक कलाकार बड़ी संख्या में उपस्थित थे।ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ की लोक कला को विश्व पटल पर गौरवपूर्ण स्थान दिलाने वाली महान पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का आज रविवार तड़के निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और राजधानी रायपुर स्थित एम्स में उनका इलाज चल रहा था। डॉ. तीजन बाई ने आज सुबह करीब 3.15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का नाम जब भी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है, तो सबसे पहले जिन हस्तियों का नाम सामने आता है उनमें पद्म विभूषण डॉ. तीजनबाई प्रमुख हैं। अपनी ओजस्वी आवाज, अद्भुत अभिनय और रंग-बिरंगे तानपुरे के साथ महाभारत की कथाओं को जीवंत करने वाली तीजनबाई ने पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया। बिना औपचारिक शिक्षा प्राप्त किए उन्होंने अपनी प्रतिभा और अथक संघर्ष के दम पर देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की संस्कृति का परचम लहराया।डॉ. तीजनबाई का जन्म वर्ष 1956 में दुर्ग जिले (वर्तमान छत्तीसगढ़) के गनियारी गांव में पारधी समुदाय के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम चुनुकलाल (या हुनुकलाल) पारधी और माता का नाम सुखवती देवी था। बचपन में उन्होंने अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनीं और वहीं से पंडवानी के प्रति उनका लगाव शुरू हुआ। उस दौर में महिलाओं के लिए पंडवानी की कापालिक शैली में प्रस्तुति देना सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं था। जब तीजनबाई ने परंपरा को तोड़ते हुए मंच पर खड़े होकर अभिनय के साथ पंडवानी गाना शुरू किया, तो समाज ने उनका बहिष्कार तक कर दिया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कला को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया।पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगायन शैली है, जिसमें महाभारत की कथाओं का गायन और अभिनय किया जाता है। पहले महिलाएं केवल बैठकर श्वेदमती शैलीश् में पंडवानी प्रस्तुत करती थीं, जबकि कापालिक शैली में मंच पर अभिनय के साथ प्रस्तुति पुरुष कलाकार देते थे।तीजनबाई इस परंपरा को बदलने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने कापालिक शैली में मंच पर अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमा और स्वर के अद्भुत समन्वय से पंडवानी को नई पहचान दी। उनका तानपुरा कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष तो कभी दुर्याेधन की तलवार बन जाता है, जिससे दर्शक पूरी तरह महाभारत के दृश्य में खो जाते हैं।तीजनबाई ने अपनी कला का प्रदर्शन भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की सहित अनेक देशों में किया। उनकी प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय लोककला की नई पहचान बनाई। उन्होंने साबित किया कि लोककला किसी भाषा या सीमा की मोहताज नहीं होती। डॉ. तीजनबाई को कला जगत में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। पद्म भूषण से अलंकृत पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्म भूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) शामिल है। इसके अलावा देश-विदेश की अनेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है और कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियों से भी अलंकृत किया है।तीजनबाई केवल एक लोकगायिका नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक विरासत की सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा और मेहनत के सामने सामाजिक बंधन और कठिन परिस्थितियां टिक नहीं सकतीं। आज भी वे युवा कलाकारों को पंडवानी की शिक्षा देकर इस लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो एक छोटे से गांव की बेटी भी पूरी दुनिया में अपनी संस्कृति का परचम लहरा सकती है। डॉ. तीजनबाई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि भारतीय लोककला की ऐसी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
- दुर्ग / राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता विषयक जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में न्यायालयीन वादों की संख्या में कमी लाते हुए स्थानीय स्तर पर आपसी संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है।कार्यक्रम में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर तथा वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक ने ग्राम पंचायत भवन में आयोजित बैठक में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, महिला समूहों, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), युवाओं एवं गणमान्य नागरिकों से संवाद किया।अपने संबोधन में स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता न्यायालयीन प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने वाला एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्थानीय विवाद संवाद, समझदारी एवं निष्पक्ष मध्यस्थता के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे समय, धन एवं श्रम की बचत होने के साथ-साथ पारिवारिक एवं सामाजिक संबंध भी सुरक्षित रहते हैं।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, विधिक साक्षरता कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम स्तर पर संवाद आधारित विवाद समाधान की संस्कृति विकसित करना तथा प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय तक सरल एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के लिए जिले के चयनित ग्रामों में चरणबद्ध रूप से जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मध्यस्थता उन्मुख कार्यशालाएं एवं जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्वयं अपने छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित हों। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा का स्वागत करते हुए इसे ग्राम स्तर पर शांति, सद्भाव एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाली प्रभावी पहल बताया। ग्रामीणों ने भविष्य में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, पैरालीगल वालंटियर्स, आंगनबाड़ी एवं मितानिन कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आगामी दिनों में चयनित अन्य ग्रामों में भी इस प्रकार के संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" की परिकल्पना को व्यवहारिक रूप से साकार करते हुए न्याय तक सरल पहुंच, सामाजिक समरसता एवं विवादों के वैकल्पिक समाधान की संस्कृति को व्यापक स्तर पर विकसित किया जा सके।
- दुर्ग / छत्तीसगढ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों का प्रोत्साहित करने एवं सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष डॉ. खूबचंद बघेल, कृषक रत्न पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष 2026 का पुरस्कार वितरण राज्य स्थापना दिवस, 01 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में किया जाएगा। इस संबंध में कृषकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।संयुक्त संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी अनुसार इच्छुक कृषक जो खेती में नवाचार, जैविक कृषि, उत्पादन में वृद्धि, कृषि यात्रिकीकरण या जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, वे इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकते हैं। समस्त पात्र कृषक वे निर्धारित तिथि तक आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन जिला कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक अर्हताएँ एवं अन्य जानकारी संबंधित विकासखंड / जिला कृषि कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।कृषकों से प्राप्त आवेदनों का सत्यापन संयुक्त संचालक कृषि द्वारा गठित विकासखंड स्तरीय छानबीन समिति द्वारा किया जाएगा। विकासखंड स्तरीय समिति कृषकों के प्रक्षेत्रों में जाकर आवेदन में उल्लेखित अधोसंरचना, कृषि आदान, सिंचाई संसाधन व अन्य जानकारी का प्रत्यक्ष निरीक्षण व अवलोकन सत्यापन उपरांत प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत करेगी। जिला स्तरीय समिति द्वारा सूक्ष्म जांच उपरांत जिला से अधिकतम 03 उत्कृष्ट कृषकों का चयन कर जिला कलेक्टर के माध्यम से नामांकन संचालनालय कृषि को उपलब्ध कराया जाएगा।कृषक रत्न पुरस्कार छत्तीसगढ़ राज्य के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रखर कृषक नेता डॉ. खूबचंद बघेल के नाम पर दिया जाता है, जिनके योगदान को याद करते हुए यह सम्मान उन कृषकों को दिया जाता है जिन्होंने कृषि के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का कार्य किया है।
- दुर्ग / छत्तीसगढ़ सरकार की डिजिटल सुशासन पहल ‘सेवा सेतु’ प्रदेश के नागरिकों तक सीधे सरकारी सुविधाएँ पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुकी है, जिससे आमजन को अब छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसी तारतम्य में, डिजिटल सशक्तिकरण की एक प्रभावी झलक दुर्ग जिले के ग्राम बोरई में देखने को मिली, जहाँ विगत 3 जुलाई 2026 को आवेदित दो हितग्राहियों, जय ठाकुर और यमुना ठाकुर का सामाजिक प्रास्थिति (अनुसूचित जनजाति-गोड़) प्रमाण-पत्र अनुविभागीय अधिकारी श्री हरवंश सिंह मिरी द्वारा त्वरित रूप से स्वीकृत कर ऑनलाइन जारी किया गया। बिना किसी दफ्तर जाए, घर बैठे आईटी नियमों के तहत प्राप्त हुए ये डिजिटल दस्तावेज़ यह पुख्ता प्रमाण हैं कि ’सेवा सेतु’ व्यवस्था दूर-दराज के इलाकों में भी बेहद पारदर्शी, त्वरित और जन-अनुकूल तरीके से काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि ‘सेवा सेतु’ छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने की एक ऐसी खास पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से दूर-दराज विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वालों तक सरकार की योजनाएँ और सुविधाएँ पहुँचाना है। राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के तहत लगभग 36 विभागों की 528 सेवाएँ एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस नई डिजिटल व्यवस्था के शुरू होने से अब हितग्राहियों का समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है, साथ ही उन्हें अपनी पढ़ाई और नौकरी से जुड़े जरूरी प्रमाण-पत्र पाने के लिए दलालों और बिचौलियों से भी पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
- रायपुर । मंदिर हसौद तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम संकरी ( जावा ) के पंचायत ने ग्राम के कतिपय शासकीय भूमियों के खसरा नंबर व आबादी की भूमि पर कच्चे व पक्के चारदीवारी बना किये गये अवैध कब्जों को हटाने संकल्पित हो सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मंदिर हसौद तहसील में पदस्थ संबंधित नायब तहसीलदार नीलम ठाकुर व थाना प्रशासन को ज्ञापन सौंप अवैध कब्जों को हटवाने की मांग की है ।सरपंच लीना विक्की वर्मा व उपसरपंच सरिता शिवा साहू के साथ पंचगण सुनीता साहू , गोपी साहू , चंद्रकला यादव , डा खेमन साहू , कुबेर दास मानिकपुरी , कमलेश राव , राजकुमारी जांगड़े ने यह ज्ञापन सौंपा । उनके साथ सरपंच प्रतिनिधि विक्की वर्मा व पूर्व उपसरपंच शिवा साहू भी थे । पंच भूपेंद्र कुर्रे व मंगतीन वर्मा व्यक्तिगत कारणों के चलते शामिल नहीं हो पाये ।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना-2026 की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) कार्यालय द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार योजना की अवधि, जो पूर्व में 30 जून 2026 तक निर्धारित थी, अब 30 सितंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना को उपभोक्ताओं से मिल रहे अच्छे प्रतिसाद को देखते हुए इसकी अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा की थीउल्लेखनीय है कि कोरोना काल के दौरान आर्थिक कठिनाइयों के कारण बड़ी संख्या में घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ता समय पर बिजली बिल जमा नहीं कर सके थे। ऐसे उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना प्रारंभ की। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार पात्र उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल में लगभग 757 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत निम्नदाब घरेलू, बीपीएल एवं कृषि श्रेणी के अशासकीय उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल की मूल राशि एवं अधिभार में नियमानुसार छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। योजना की अवधि बढ़ने से ऐसे पात्र उपभोक्ताओं को तीन माह का अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जो अब तक किसी कारणवश इसका लाभ नहीं ले सके हैं।पावर कंपनी ने सभी पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 30 सितंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत कार्यालय से संपर्क कर योजना का लाभ उठाएं तथा बकाया बिजली बिलों का निराकरण कर छूट का लाभ प्राप्त करें। योजना की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी।
- -साय सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर असर; पीएम जनमन आवास और महतारी वंदन योजना से आदिवासी परिवार को मिला सुरक्षित घर, आर्थिक संबल और सम्मानपूर्ण जीवनरायपुर । शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है, तब वह केवल एक योजना नहीं बल्कि किसी परिवार के जीवन में परिवर्तन की नई कहानी बन जाती है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी की श्रीमती सरिता बैगा का जीवन इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और महतारी वंदन योजना के समन्वित लाभ से उनका परिवार आज सुरक्षित आवास, आर्थिक संबल और सम्मानजनक जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।पहले सरिता बैगा का परिवार एक कच्चे मकान में रहता था। बरसात शुरू होते ही पूरे परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। खपरैल की छत से पानी टपकता था, दीवारों में नमी भर जाती थी और हर वर्ष छत की मरम्मत तथा खपरैल बदलने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। छोटे बच्चों के साथ बारिश के दिनों में सुरक्षित रहना भी एक बड़ी चुनौती थी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप सरिता बैगा के परिवार को पीएम जनमन आवास योजना के तहत पक्का आवास स्वीकृत हुआ। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा ग्रामीण विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से योजना का लाभ समय पर मिला और आज उनका परिवार एक मजबूत, सुरक्षित एवं सुविधायुक्त पक्के घर में रह रहा है।नए आवास ने केवल उनके रहने की व्यवस्था नहीं बदली, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी बढ़ाई है। अब बारिश का मौसम उनके लिए चिंता नहीं, बल्कि राहत और सुकून लेकर आता है। बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर रहे हैं और परिवार सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है।सरिता बैगा को राज्य शासन की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता भी नियमित रूप से प्राप्त हो रही है। इस राशि से परिवार के दैनिक खर्चों, बच्चों की आवश्यकताओं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आया है।सरिता बैगा बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका परिवार भी पक्के घर में रहेगा। आज शासन की योजनाओं ने उनके सपनों को साकार कर दिया है। वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि सरकार की जनहितैषी योजनाओं ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास, आर्थिक सहयोग और बेहतर भविष्य का विश्वास दिया है।ग्राम पंडरीपानी में पीएम जनमन आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत गौरेला, ग्राम पंचायत तथा संबंधित मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका रही। योजनाओं के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन से पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल रहा है, जिससे विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। सरिता बैगा की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केवल आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाकर उन्हें सम्मान, सुरक्षा और विकास की नई दिशा भी प्रदान करता है।
- -3 किलोवाट रूफटॉप सोलर संयंत्र से बिजली बिल हुआ शून्य, डबल सब्सिडी से मिली बड़ी राहतरायपुर । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त पहल से संचालित इस योजना का लाभ लेकर सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत कंठी की निवासी श्रीमती अनीता चौधरी अब केवल बिजली की उपभोक्ता नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा का उत्पादन कर ऊर्जादाता बन गई हैं।श्रीमती अनीता चौधरी ने बताया कि पहले हर माह बढ़ते बिजली बिल का भुगतान उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। इसके बाद उनके घर की बिजली आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी होने लगी और उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया।उन्होंने बताया कि घरेलू उपयोग के बाद बची अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इस योजना से उनके परिवार का मासिक खर्च कम हुआ है और बिजली बिल की चिंता पूरी तरह समाप्त हो गई है।श्रीमती चौधरी ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापना के लिए उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार से संयुक्त रूप से लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस डबल सब्सिडी के कारण सोलर संयंत्र लगाना आसान और किफायती हो गया है। उन्होंने कहा कि अब सामान्य परिवार भी बिना अधिक आर्थिक बोझ के स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को अपना सकते हैं।उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर अपने घरों की छत पर सोलर संयंत्र स्थापित करें। इससे न केवल बिजली बिल में स्थायी बचत होगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। श्रीमती अनीता चौधरी ने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल आम नागरिकों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ हरित एवं सतत भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार हो रही है।
- रायपुर। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय पंडवानी डॉ. गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।श्री चौधरी ने कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस दुःखद घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों और प्रशंसकों को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
- -आधार कार्ड बनने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बन रही है। जशपुर जिले के ग्राम जोकबहला (ग्राम पंचायत नारायणपुर) निवासी 85 वर्षीय जॉन क्रूज़ मिंज की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान इसका प्रेरक उदाहरण है।जॉन क्रूज़ मिंज लंबे समय से आधार कार्ड बनवाने का प्रयास कर रहे थे। कई बार आधार नामांकन केंद्र जाने के बावजूद फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने तथा अन्य तकनीकी कारणों से उनका आवेदन निरस्त हो जाता था। आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें बैंकिंग सेवाओं, पेंशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आयुष्मान भारत सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।आखिरकार उन्होंने 19 जून को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक समन्वय किया और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू की।विभाग की सक्रिय पहल का परिणाम यह रहा कि मात्र तीन दिनों के भीतर, 22 जून को जॉन क्रूज़ मिंज का आधार कार्ड सफलतापूर्वक बन गया। वर्षों से चली आ रही उनकी समस्या का समाधान होने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों के प्रति हार्दिक आभार जताया।जॉन क्रूज़ मिंज ने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें कई आवश्यक सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी होती थी। अब आधार कार्ड मिलने के बाद वे बैंकिंग सेवाओं, पेंशन, राशन तथा आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।यह सफलता मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनसमस्याओं के त्वरित, संवेदनशील और समयबद्ध निराकरण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से वर्षों पुरानी समस्या का शीघ्र समाधान यह साबित करता है कि शासन और प्रशासन की सक्रिय कार्यप्रणाली से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सकता है।
- -पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका का पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; हजारों लोगों ने दी अंतिम श्रद्धांजलिरायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया।डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वाेच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया।राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया। डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढि़यों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
- -प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर उप मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त कियारायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दुखद खबर से हम सभी को गहरा आघात लगा है। उन्होंने प्रदेश की समृद्ध कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पंडवानी की पहचान डॉ. तीजन बाई से थी।श्री साव ने कहा कि उनका जाना देश के लिए और छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। करोड़ों दिलों पर तंबूरे की तान एवं बुलंद आवाज गूंजती रहेगी। श्री साव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई की पंडवानी प्रस्तुति अद्भुत थी। अपनी बुलंद आवाज, अभिनय, लयबद्धता और सहयोगियों के संगीत से वे ऐसी प्रस्तुति देती थी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पंडवानी के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश और विदेश में प्रसारित किया। गांवों में आज भी उनकी पंडवानी कथा अमर है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके सभी परिजनों और चाहने वालों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
- -पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोकगायिका के निधन पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताया गहरा शोक, कहा— छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल रत्न खो दियारायपुर । छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश और विश्व की लोक कला जगत में शोक की लहर है। उनके निधन पर प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत कला, दमदार प्रस्तुति और समर्पण से पंडवानी जैसी लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनका निधन प्रदेश और देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।गरीब परिवार से निकलकर विश्व मंच तक का प्रेरणादायी सफर24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा तथा माता का नाम सुखवती बाई था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उनके नाना ब्रजलाल परधा से उन्हें इस लोककला की प्रारंभिक शिक्षा मिली।महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिलाओं द्वारा पंडवानी की वेदमती शैली में बैठकर प्रस्तुति देने की परंपरा थी, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती देते हुए पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद, गायन और भाव-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुति देना शुरू किया। उनकी यही शैली आगे चलकर उनकी विशिष्ट पहचान बन गई।हबीब तनवीर ने पहचानी प्रतिभा, बदल गई जिंदगीप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां दीं।उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मॉरीशस, जापान सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का विश्वभर में परचम लहराया। उनकी प्रभावशाली आवाज, अभिनय और कथावाचन शैली ने विदेशी दर्शकों को भी भारतीय लोक परंपरा से परिचित कराया।देश-विदेश में मिले अनेक प्रतिष्ठित सम्मानलोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार तथा 2019 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त बिलासपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. (मानद उपाधि) प्रदान कर सम्मानित किया।नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणातीजन बाई ने न केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि इस लोकविधा से नई पीढ़ी के अनेक कलाकारों को भी जोड़ा। उनकी प्रेरणा से अनेक महिला कलाकारों ने पंडवानी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है।देशभर से उमड़ा श्रद्धांजलियों का सैलाबतीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके योगदान को सदैव अविस्मरणीय बताया।छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान रहेंगी अमरतीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाया और पंडवानी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनके निधन से भले ही लोककला जगत ने अपनी बुलंद आवाज खो दी हो, लेकिन उनकी कला, उनकी शैली और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनकी अमिट सांस्कृतिक विरासत भारतीय लोककला के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी।
- -पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम को भेंट किया गया जीपीएम की विशिष्ट पहचान ‘विष्णु भोग’ चावल, महिलाओं के आत्मनिर्भरता मॉडल और स्थानीय उत्पाद की सराहनारायपुर । गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के प्रवास पर पहुंचे पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम का स्वागत स्थानीय पहचान और कृषि समृद्धि के प्रतीक ‘विष्णु भोग’ चावल से किया गया। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने उन्हें जिले की विशिष्ट पहचान माने जाने वाले ‘विष्णु भोग’ चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। यह चावल जिले में बिहान योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पुलिस महानिदेशक को ‘विष्णु भोग’ चावल की विशेषताओं, उसकी गुणवत्ता तथा इसके उत्पादन और विपणन में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल न केवल स्थानीय कृषि उत्पादों को नई पहचान दिला रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय में भी वृद्धि कर रही है।पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम ने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘विष्णु भोग’ चावल केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से जिले की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलती है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिला समूहों द्वारा गुणवत्ता और परंपरा के साथ तैयार किए जा रहे ऐसे उत्पाद भविष्य में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान बनाएंगे। स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से किसानों और महिला समूहों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा, जिससे ग्रामीण विकास को भी गति मिलेगी।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार खिलारी तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
- -विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर हुई पैनल चर्चारायपुर / अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में सहकारिता क्षेत्र की चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहकारिता की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष श्री रामकिशुन सिंह ने किया।उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी श्रृंखला में विगत 4 जून को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष आयोजन किया गया।पैनल चर्चा में विकसित भारत-2047 के लिए सहकारिता क्षेत्र से अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों की भूमिका, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिला सशक्तिकरण में दुग्ध सहकारी संस्थाओं के योगदान, ग्रामीण रोजगार सृजन में मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका तथा नाबार्ड, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने का प्रभावी माध्यम है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को गति देने के लिए सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त श्री के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक श्री नाग, अपर आयुक्त श्रीमती सावित्री भगत, उपायुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त श्री बसंत कुमार, श्री मुकेश ध्रुव, श्री तिग्गा, श्री बुनकर, श्री गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त श्री युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम श्री भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों, लघु वनोपज संघ, दुग्ध महासंघ, सहकारी शक्कर कारखानों, एनसीडीसी तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के प्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।
- -दासन और एमडी श्री विवेक आचार्य ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत*-मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में सतत पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय रोजगार पर साझा दृष्टि; छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को लेकर हुई विस्तृत चर्चारायपुर । भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन श्री सुमन बिल्ला के रायपुर आगमन पर छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने रायपुर विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री बिल्ला भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में पर्यटन विषय के प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुए।इस अवसर पर श्री सुमन बिल्ला, डॉ. एस. भारती दासन एवं श्री विवेक आचार्य के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि छत्तीसगढ़ में पारिस्थितिकी पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, पुरातात्विक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, जनजातीय पर्यटन तथा ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का योजनाबद्ध विकास कर राज्य में रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की जा सकती है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन विकास का ऐसा मॉडल विकसित करने पर भी सहमति बनी, जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।बैठक में पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल प्रचार-प्रसार, गृह-आवास (होम-स्टे) व्यवस्था को बढ़ावा देने, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने तथा जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार और राज्य की सशक्त पहचान स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।पर्यटन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ राज्य को दिलाने, पर्यटन स्थलों के समग्र विकास तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में श्री सुमन बिल्ला ने "सतत समृद्धि के आधार के रूप में पर्यटन : छत्तीसगढ़ में आजीविका सृजन, संस्कृति का संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। इसके पश्चात उन्होंने "आगे की राह – विचार मंथन" विषय पर आयोजित संवादात्मक सत्र का संचालन भी किया। इन सत्रों में पर्यटन को सुशासन, सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका से जोड़ने के व्यावहारिक मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री सुमन बिल्ला के सुझावों तथा केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का पर्यटन क्षेत्र नई दिशा प्राप्त करेगा। इससे राज्य की जैव विविधता, ऐतिहासिक धरोहर, जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- रायपुर । अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में जब मानसून दस्तक देता था, तो वह अपने साथ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि ओरछा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए दुश्वारियों का दौर भी लेकर आता था। हर साल बारिश के चार महीने यहाँ के लोगों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होते थे। लेकिन इस साल तस्वीर जुदा है। नारायणपुर के ओरछा क्षेत्र में पिनगुंडा नाला पर बनी नई बॉक्स पुलिया ने विकास की एक नई इबारत लिख दी है। यह पुलिया सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए खुशहाली और कनेक्टिविटी का एक नया 'लाइफलाइन' बन चुकी है।पल्ली-छोटेडोंगर-ओरछा मार्ग पर स्थित पिनगुंडा नाला सालों से नारायणपुर और ओरछा के बीच एक अभेद्य दीवार बना हुआ था। मानसून के आते ही नाला उफान पर आ जाता, जिससे तहसील मुख्यालय ओरछा सहित दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट जाता था। उफनते नाले के कारण एम्बुलेंस नहीं आ पाती थी और गंभीर मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाते थे। नदी-नाले पार करने के जोखिम के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई हफ्तों बाधित रहती थी। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती थी और स्थानीय ग्रामीणों की कृषि उपज मंडियों तक नहीं पहुँच पाती थी।ग्रामीणों की इस दशकों पुरानी और बुनियादी समस्या को संवेदनशीलता से लेते हुए शासन द्वारा यहाँ एक सुदृढ़ पुलिया निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई। इस आधुनिक बॉक्स ब्रिज के बन जाने से बारिश के दिनों में भी नारायणपुर से ओरछा तक का मार्ग पूरी तरह निर्बाध और सुरक्षित हो गया है। घंटों का इंतजार और मीलों लंबा वैकल्पिक सफर अब गुजरे जमाने की बात हो गई है।इस एकल परियोजना ने ओरछा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। सुरक्षित और सुगम मार्ग मिलने से ग्रामीणों के ईंधन और कीमती समय, दोनों की बचत हो रही है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ अब बिना किसी रुकावट के सीधे गांवों तक पहुँच रही हैं। साथ ही शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन भी आसान हुआ है। इसके साथ ही कृषि उपजों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं का परिवहन आसान होने से स्थानीय व्यापार को एक नई गति मिली है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल नहीं, हमारा बेहतर भविष्य है। यह निर्माण उनके जीवन की सबसे बड़ी सौगातों में से एक है। सालों से हम इस नाले के सामने बेबस थे। बीमारों को खाट पर लादकर ले जाना पड़ता था। अब इस पुलिया के बनने से हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा डर दूर हो गया है। यह पुल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य का रास्ता है।
- रायपुर ।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर स्वर-कोकिला, पद्म विभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का निधन केवल लोककला जगत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अद्वितीय गायन शैली, असाधारण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। लोककला के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।राज्यपाल ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपना संपूर्ण जीवन लोककला की साधना, संरक्षण और संवर्धन को समर्पित किया। उन्होंने पंडवानी जैसी समृद्ध लोक परंपरा को विश्व मंच तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका व्यक्तित्व, कला-साधना और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढि़यों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और समस्त लोककला जगत को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
- -कांग्रेस हो चुकी है पीडीएफ याने पर्दा डालो फोर्स-कांग्रेस को गरीबों की नहीं, अपने करीबियों की चिंता है - डॉ. नवीन मार्कण्डेयरायपुर। भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय ने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नकटी ग्राम में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को लेकर कांग्रेस अब निम्न स्तरीय राजनीति कर रही है। कांग्रेस नकटी ग्राम के भोले-भाले लोगों को गुमराह करके बरगला रही है, और उन्हें गलत दिशा में ले जाकर आंदोलन कर रही है। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि यह सारा कृत्य कांग्रेस का किया-धरा है, लेकिन अब कांग्रेस अपनी उस करतूत को भूल नया पाखण्ड रचने में लगी है।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने आरोप लगाया कि आज नकटी का जो प्रकरण चल रहा है, उसकी स्क्रिप्ट बहुत पहले सन् 2020 में पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के शासनकाल में लिखी गई थी। उस समय हाउसिंग बोर्ड के जरिए वहां आवासीय कॉलोनी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हाउसिंग बोर्ड द्वारा जमीन मांगे जाने पर। पटवारी, आरआई व तहसीलदार ने चिह्नांकित कर सारी विधिसम्मत प्रक्रिया पूरी कर शासन को सौंपी गई। इसी दरम्यान 2022 में वहां आवासीय कॉलोनी बनने की जानकारी मिलते ही 2022-23 में वहाँ कब्जाधारियों की बाढ़ आ गई। पहले वहां लगभग 3 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा था, जिस पर कच्चे मकान चिन्हांकित हुए। डॉ. मार्कण्डेय ने बताया कि नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को आवास के लिए ढाई डिस्मिल जमीन दी जाती है। लेकिन यहां के कई लोगों ने 10 से 17-20 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा कर लिया है और उन लोगों ने 50 लाख रुपए मूल्य तक के मकान, बाड़ी बना ली है।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि नया राजधानी क्षेत्र के तहत नकटी ग्राम तीसरे लेयर का गांव है और इस लिहाज से उसका चरणबद्ध विकास होना है। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने आवासीय विकास के लिए जगह का चिन्हाकित कर प्रक्रिया पूरी की, उस नजरिए से वहां अतिक्रमण बढ़ा और लोगों ने आवश्यकता से अधिक जमीन पर कब्जा किया। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा वि अब इस मामले को लेकर कांग्रेस राजनीति कर रही है। गलत दिशा में ले जाकर लोगों को उकसाया जा रहा है। कांग्रेसी नेताओं को इस बात का जवाब देना चाहिए कि क्या अवैध कब्जों को वे प्रश्रय देते हैं या देना चाहते हैं? क्या अवैध कब्जा कांग्रेस के लोग पूरे प्रदेश में कराना चाहते हैं? जब कांग्रेस की सरकार थी तो सभी शासकीय भूमि को बेचने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया था, और उस समय कांग्रेस ने बड़े-बड़े नेता तक ने एकड़ों में रियायती दर खरीदें। गरीबों के शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास एवं अन्य प्रयोजन के लिए जो शासकीय जमीन होती है, उसे भी कब्जा करके कांग्रेस शासनकाल में बेचा गया है। बाद में हाईकोर्ट ने इस आदेश को निरस्त किया।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी एक करतूत को छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने पिछले समय 122 परिवारों को सेरीखेड़ी में बेघर किया। कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र इतना पतित हो गया है कि उस समय गरीबों को सेरीखेड़ी में हटाया गया, उन गरीबों को न एक इंच जगह तक दी गई और न ही एक कोई मकान दिया। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि आज घड़ियाली आंसू बहाकर कांग्रेसी प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगा रही है कि भाजपा गरीबों के खिलाफ हैं। गरीबों के खिलाफ तो कांग्रेस शुरू से रही है। गरीबी हटाने का नारा देते हुए कांग्रेसी गरीबी नहीं, गरीबों को ही मिटाने का काम करते रहे हैं। लेकिन भाजपा सरकार ने इस समय पिछले एक साल मे लगातार नकटी ग्राम के बाहर शासकीय जमीन पर अवैध कब्जाधारियों को नोटिस देते हुए उनके व्यवस्थापन की भी प्रक्रिया की। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि 29 जून को 61 परिवारों को आवास आबंटित किया और पंजी पर हस्ताक्षर करके ये सब आवास की चाबी लेकर नया रायपुर के सेक्टर-30 में शिफ्ट हुए। इसीलिए शासन-प्रशासन ने कब्जा हटाने की प्रक्रिया की तो उन परिवारों की जरूरत की चीजों तक को नुकसान भी नहीं पहुंचाया।भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि इतनी सब कुछ व्यवस्थित प्रक्रिया कांग्रेस को रास नहीं आई। कांग्रेस प्रदेश में ढाई साल से बैकफुट पर है, किसी प्रकार का मुद्दा नहीं है, जनहित की कोई बात नहीं कर रही है। इसलिए अब झूठे नैरेटिव सेट करके कांग्रेस लोगों को उकसाने के लिए आंदोलन कर रही है। डॉ. मार्कण्डेय ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार संवेदनशील होकर जन हित में कार्य कर रही है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि कांग्रेस द्वारा यह झूठा नैरेटिव सेट किया जा रहा है कि नकटी गांव को तोड़ दिया गया है। श्री श्रीवास ने कहा कि हमारी सरकार ने नकटी गांव को नहीं तोड़ा है। नकटी गांव में कुल 17 वार्ड हैं। उसमें से एक वार्ड, जहां पर कब्जा हुआ था, उनको विस्थापित किया गया है। बार-बार जो यह कहा जा रहा है कि विधायकों के लिए आवास बन रहा है, वह भी सच नहीं है। इन आवासों में अधिकारी-कर्मचारी भी रहेंगे। यह सामूहिक आवास योजना की प्रकिया है।इस दौरान पत्रकार वार्ता में रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर, रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्याम नारंग, जिला पंचायत उपाध्यक्ष संदीप यदु उपस्थित रहे।
- दुर्ग। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं विश्वविख्यात पंडवानी की अप्रतिम साधिका डॉ. तीजन बाई के निवास पहुँचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें अंतिम विदाई दी।उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपने अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण से छत्तीसगढ़ की लोकधारा को वैश्विक मंच पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका अवसान केवल एक महान लोककलाकार का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का विराम है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। मंत्री श्री यादव दिवंगत तीजन बाई के अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल हुए।उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन हमारी लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी साधना आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्वभर में स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। राज्य की कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके द्वारा स्थापित आदर्श और विरासत को सदैव सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाएगा।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन की शुरुआत योगाभ्यास के साथ की। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) नवा रायपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित विशेष योग सत्र में उन्होंने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि नियमित योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि व्यक्ति को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन और प्रभावी निर्णय क्षमता के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से चिंतन शिविर के दौरान दिन की शुरुआत योग से की गई, ताकि सकारात्मक ऊर्जा और एकाग्रता के साथ राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया जा सके। उन्होंने कहा कि योगाभ्यास के इस सामूहिक आयोजन से चिंतन शिविर 3.0 में सकारात्मक ऊर्जा के साथ अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश को नई दिशा मिलेगी ।योग सत्र में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव तथा आईआईएम रायपुर के अधिकारी भी उपस्थित थे।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने श्भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), नवा रायपुर में आयोजित चिंतन शिविर 3.0 के दूसरे दिन एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक पेड़ माँ के नाम अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक संवेदनाओं को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान से जुड़कर पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरित एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए जनभागीदारी आधारित पर्यावरण संरक्षण अभियानों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।
- -डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव सायरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई तथा छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। डॉ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
- रायपुर। पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रविवार तड़के रायपुर के AIIMS में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। छत्तीसगढ़ की इस महान लोक कलाकार ने अपनी सशक्त आवाज और प्रभावशाली अभिनय से पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को सुनाने की प्रेरणा उन्हें नाना से मिली थी।तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को भिलाई के गनियारी गांव में हुआ था। वे पारधी समुदाय से थीं। देश-विदेश में पंडवानी लोक गायिकी को पहचान दिलाने वाली तीजन की जिंदगी का सफर आसान नहीं रहा। इसी गायिकी की वजह से उन्हें समाज ने बेदखल कर दिया था। समाज से निकाले जाने के बाद भी उन्होंने गाना नहीं छोड़ा। उनके पिता का नाम चुनुकलाल और माता का नाम सुखवती था। तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखतीं थी। धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद हो गई। उनकी लगन और प्रतिभा को देखकर गायक उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें प्रशिक्षण दिया।13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय में महिला पंडवानी गायिकाएं केवल बैठकर गा सकती थीं, जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कापालिक शैली में गाते थे। तीजनबाई वे पहली महिला थीं, जिन्होंने कापालिक शैली में पंडवानी की।बचपन में स्कूल का मुंह न देख पाने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई साक्षरता अभियान में किसी तरह पांचवीं की सीढ़ी ही चढ़ पाईं। लेकिन उनकी पंडवानी की ऐसी धूम रही कि उन्हें भारत के 3 नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। तीजन बाई को 4 बार डॉक्टर ऑफ लिटरेचर यानी डी.लिट. की उपाधि मिली।तीजन बाई के निधन पर शोक और प्रतिक्रियाएं
-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई का जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है और उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला को विश्व मंच पर स्थापित किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने रायपुर एम्स पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
- -विधायक अनुज शर्मा एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने पद्म विभूषण तीजन बाई से अस्पताल में की मुलाकातरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण एवं विश्वविख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष के माध्यम उनका हालचाल जाना तथा मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की तथा हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।श्रीमती तीजन बाई से विधायक श्री अनुज शर्मा एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आज एम्स पहुंचकर मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. सिंह ने श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरभाष पर बातचीत भी कराई।विधायक श्री शर्मा ने कहा कि "पद्म विभूषण श्रीमती तीजन बाई हमारी लोककला की अमूल्य धरोहर हैं। मैं उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।" कलेक्टर डॉ. सिंह ने श्रीमती तीजन बाई के परिजनों से भी मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और शासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।












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