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राजनांदगांव । शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था राजनांदगांव में 16 जून 2026 को सुबह 9.30 बजे से विजन इंडिया सर्विस प्राईवेट लिमिटेड द्वारा मारूति सुजुकी मोटर इंडिया लिमिटेड हंसलपुर गुजरात प्लांट के लिए प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया गया है। आईटीआई संस्थानों से वर्ष 2018 से 2024 तक उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थी एवं प्रशिक्षण सत्र 2023-2025, सत्र 2024-2025, सत्र 2025-2026 व सत्र 2024-2026 के व्यवसाय फिटर, डीजल मैकेनिक, मोटर मैकेनिक, टर्नर, मशीनिष्ट, वेल्डर, विद्युतकार, टूल एण्ड डाई मेकर, सीओई (आटोमोबाईल), ट्रेक्टर मेकेनिक, पेंटर जनरल में प्रशिक्षणरत 18 वर्ष से 26 वर्ष आयु वर्ग के केवल पुरूष प्रशिक्षणार्थी अपने समस्त शैक्षणिक तथा आवश्यक प्रमाण 10वीं, आईटीआई, आधार कार्ड, पेन कार्ड, दो पासपोर्ट साईज फोटोग्राफ के साथ प्लेसमेंट कैम्प में शामिल हो सकते है।
- राजनांदगांव । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव में जनभागीदारी समिति एवं महाविद्यालय परिवार के संयुक्त तत्वावधान में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से समाजसेवी कोमल सिंह राजपूत, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रवि सिन्हा, प्राचार्य डॉ. निर्मला उमरे, जनभागीदारी समिति सदस्य नमिताब जैन, पंकज कुरंजेकर, आशीष सुरे, राजेश यादव सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।इस अवसर पर समाजसेवी कोमल सिंह राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण प्रकृति का संतुलन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में कम से कम एक पौधे का रोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। उन्होंने युवाओं से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रवि सिन्हा ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को शुद्ध नहीं करते, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। वृक्षारोपण के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं उनकी नियमित देखभाल करने का आग्रह किया।महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निर्मला उमरे ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता विकसित करना शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देते हैं। संगोष्ठी सभा का सफल संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के अधिकारी एस आर कन्नौजे ने किया।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों दादूराम सोनकर, रितेश देवांगन, अजय श्रीवास्तव, रमेश सोनवानी,रघुवीर वाधवा सहित सभी पर्यावरण मित्रो ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया
- -फिट इंडिया साइकिलिंग अभियान का हिस्सा बनने नागरिकों से जुड़ने की अपीलमहासमुंद / खेल एवं युवा कल्याण महासमुंद द्वारा संचालनालय, खेल एवं युवा कल्याण रायपुर के निर्देशानुसार विश्व सायकल दिवस के उपलक्ष्य में 07 जून रविवार को सायकल रैली, योगा, जुम्बा, आत्मरक्षा जैसे गतिविधियों का आयोजन मिनी स्टेडियम महासमुंद से प्रातः 07 बजे से प्रारंभ किया जायेगा। साइकिल रैली मिनी स्टेडियम से सुबह 8 बजे प्रारंभ होकर बरोंडा चौक, शास्त्री चौक, गांधी चौक होकर मिनी स्टेडियम महासमुंद में समापन किया जाएगा। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किए गए फिट इंडिया आंदोलन का उद्देश्य सभी नागरिकों के दैनिक जीवन में फिटनेस को अभिन्न अंग बनाना है। इस अभियान को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 'मन की बात' के 117वें और 128वें एपिसोड में भी सम्मानित किया गया है, जो नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को बढ़ावा देने में इसके महत्व को रेखांकित करता है। खेल अधिकारी खेल एवं युवा कल्याण महासमुंद ने जनप्रतिनिधि, अधिकारी/कर्मचारियों, खेल संघों के खिलाड़ियों, गणमान्य नागरिक, मेरा युवा भारत, एन सी सी, भारत स्काउट एंड गाइड, रेड क्रॉस, पत्रकार, छात्रावास, साईकिल स्पोर्ट्स, विभिन्न संगठन एवं संस्था, खेल प्रेमी, महाविद्यालय एवं विद्यालय के विद्यार्थियों से अपील किया हैं कि अधिक से अधिक संख्या में भागीदारी करें। विश्व साइकिल दिवस 2026 समारोह में सुचारू भागीदारी और रिकॉर्ड रखने के लिए, सभी व्यक्तियों और समूहों से अनुरोध है कि वे आधिकारिक पोर्टल: https://fitindia.gov.in/world-bicycle-day पर पंजीकरण करें।
- -शपथ ग्रहण एवं छात्र-छात्राओं की विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गयामहासमुंद / विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामान्य वन मंडल महासमुंद अंतर्गत वन परिक्षेत्र महासमुंद द्वारा वन विद्यालय महासमुंद में वृहद स्तर पर पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा उपस्थित रहे। इस अवसर पर जिला स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष श्री ऐतराम साहू, पूर्व विधायक श्री विमल चोपड़ा तथा अन्य जनप्रतिनिधिगण भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण से हुई. जिसमें अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही विद्यार्थियों के लिए निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।मुख्य अतिथि विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने उपस्थित जनसमुदाय को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई तथा एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए वृक्षारोपण आवश्यक है। श्री ऐतराम साहू ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण स्वस्थ जीवन का आधार है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।कार्यक्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी महासमुंद, सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी महासमुंद, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन विद्यालय महासमुंद के प्रशिक्षु, वनकर्मी, सुरक्षा श्रमिक एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- -पशुपालकों से प्रतिदिन 17 हजार लीटर क्रय किया जा रहा है-वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित तथा 30 नई समितियां प्रारंभ किया जाएगामहासमुंद / जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख साधन है। 21वीं पशुगणना के अनुसार जिले में 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है।विभागीय जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है। देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है।जिले में दुग्ध विपणन का कार्य दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। पिछले वर्ष जहां 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित थीं, वहीं शासन की "सहकारिता से समृद्धि" की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालकों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है।जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु सेक्स सॉर्टेड सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी।महासमुंद जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। नीति आयोग के सहयोग से महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार का अवसर प्राप्त हो रहा है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है।हालांकि दाना एवं पशु आहार की कीमतों में लगातार वृद्धि होने से पशुपालकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा उनके द्वारा लगातार दूध की कीमतों में वृद्धि की मांग की जाती रही है। इसके बावजूद जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।
- - ग्राम में संचालित विकास कार्यों की समीक्षा की- विश्व पर्यावरण दिवस एवं एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के तहत ग्राम मुड़पार में विशेष ग्रामसभा आयोजित- ग्रामसभा में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने के संबंध में की गई चर्चाराजनांदगांव । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजनांदगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़पार में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रभारी सचिव श्री अविनाश चम्पावत, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह, राज्य सलाहकार (एसबीएम-जी) श्रीमती अभिलाषा आनंद शामिल हुए। विशेष ग्राम सभा में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया। ग्रामसभा में पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण तथा सतत ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रभारी सचिव श्री अविनाश चम्पावत ने ग्रामीणों को स्वच्छता की शपथ दिलाई।प्रभारी सचिव श्री अविनाश चम्पावत ने ग्राम में संचालित विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए ग्रामीणों से सुझाव प्राप्त किए। उन्होंने गांव में अधिक पौधरोपण, नालियों पर सुरक्षा जाल अथवा ढक्कन लगाने तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित ग्राम वातावरण निर्माण करने कहा। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा अपनाकर परिवार बिजली व्यय में कमी ला सकते हैं तथा पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने ग्राम मुड़पार के ग्रामीणों को अधिक से अधिक योजना से लाभान्वित के लिए प्रोत्साहित किया। जिससे बिजली बिल शून्य होगा और अधिक बिजली का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। जिला पंचायत सीईओ सुश्री सुरूचि सिंह ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं आगामी कार्यों की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। राज्य सलाहकार श्रीमती अभिलाषा आनंद ने स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, पुर्नचक्रण एवं उसके पर्यावरणीय तथा आर्थिक लाभों पर प्रकाश डालते हुए स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। ग्रामसभा में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, स्वच्छता एवं सतत ग्रामीण विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने कहा गया। ग्रामीणों ने ग्राम को स्वच्छ, हरित एवं आदर्श ग्राम बनाने का संकल्प लिया। ग्राम सभा में जनपद पंचायत सीईओ श्री मनीष साहू ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सहायक कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) श्री फैज मेमन ने जल रक्षा मिशन एवं जिला समन्वयक डॉ. छोटेलाल साहू ने स्वच्छता के संबंध में ग्रामीणों को जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।
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राजनांदगांव। दीनदयाल भूमिहीन मजदूर कल्याण योजना अंतर्गत खातों में संशोधन की कार्रवाई पोर्टल के माध्यम से 10 जून 2026 तक की जा रही है। ऐसे हितग्राही जिनकी राशि विभिन्न कारणों से अंतरण नहीं हो पाई है, उनके खातों के संशोधन निर्धारित तिथि तक पोर्टल के माध्यम से करा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के 196 तथा नगरीय क्षेत्र के 31 हितग्राहियों को खाता संशोधन निर्धारित अवधि तक कराने की अपील की गई है।
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-उप मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
रायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कोण्डागांव जिला मुख्यालय में लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जिले के तीनों नगरीय निकायों कोंडागांव , केशकाल और फरसगांव में वर्षा ऋतु के पहले आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने, नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही सड़क, पुल एवं पुलिया निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने पर जोर दिया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में कहा कि कोण्डागांव जिला विकास की असीम संभावनाओं से परिपूर्ण है। केशकाल घाट बायपास के निर्माण से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी, इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों से समय के साथ प्रभावी कार्यशैली अपनाने, नई तकनीकों का उपयोग करने तथा समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।श्री साव ने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र लंबे समय तक विकास की प्रतीक्षा करता रहा है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारी पूरी ऊर्जा, क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए टीम भावना के साथ कार्य करना आवश्यक है।उप मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा के दौरान सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को वर्षा ऋतु से पूर्व नालियों की सफाई पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने तथा अधिकारियों को अनिवार्यतः प्रातः भ्रमण करने के निर्देश दिए। द्वारा नियमित मॉर्निंग विजिट करने पर भी बल दिया। साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों को मिशन मोड में पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों को स्वच्छ, सुंदर एवं सुविधायुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन के कार्यों में अपेक्षित प्रगति लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने सभी निर्माण एवं पेयजल योजनाओं का नियमित फील्ड निरीक्षण करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन सड़कों, पुलों एवं भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति का आकलन करते हुए कार्यों में तेजी लाने तथा उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने खेल विभाग की समीक्षा के दौरान खेल गतिविधियों के समन्वित एवं प्रभावी आयोजन सुनिश्चित करने को कहा।बैठक में जल प्रदाय परियोजनाओं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), आकांक्षी शौचालय निर्माण, राजस्व वसूली, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं सहित विभिन्न विभागीय योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। कोंडागांव की कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चन्द्रा, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी और चारों विभागों के विभागाध्यक्ष कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। - -नए सोलर पंपों की स्थापना से हजारों ग्रामीणों को मिली राहत, जनजातीय क्षेत्रों में बहाल हुई जल आपूर्तिरायपुर । प्रदेश के दूरस्थ, पहाड़ी एवं जनजातीय अंचलों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों और निर्देशों से महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। मंत्री के मार्गदर्शन में सूरजपुर जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा बंद पड़े सोलर पेयजल पंपों की मरम्मत तथा नए पंपों की स्थापना कर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को पुनः सुचारु किया गया है।सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड सहित विभिन्न दूरस्थ ग्रामों में तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया गया। ग्राम करौटी-ए (परसापारा), कोलुहा भाटपारा एवं बैजानपाठ में नए मोटर पंप स्थापित कर सोलर पंपों को पुनः कार्यशील बनाया गया, जिससे ग्रामीणों को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने लगा है।इसके अलावा भैयाथान विकासखंड के दतिमा आमापारा इंद्रावास, कसकेला औरापारा तथा सूरजपुर विकासखंड के लटोरी कुशवाहापारा एवं मंजीरा फुलवारपारा में भी खराब सोलर पंपों की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति बहाल की गई। वहीं चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के भाटपारा गांव में नया मोटर पंप स्थापित कर लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का समाधान किया गया, जिससे विशेष रूप से पंडो समुदाय के परिवारों को बड़ी राहत मिली है।मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि प्रदेश के अंतिम छोर तक मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसी भी ग्रामीण को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था बहाल होने पर राज्य सरकार, मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें घर के समीप ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। यह पहल ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, महिलाओं एवं बच्चों के श्रम की बचत करने तथा जनजातीय अंचलों में जीवन स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
- रायपुर ।दुर्ग जिले में एक नये ट्रैवलर की ट्रेसिंग की गयी जो सुडान से आया है। कोई लक्षण नहीं, संपर्क का कोई इतिहास नहीं होने के कारण होम आइसोलेशन में है, वर्तमान में आज दिनांक तक कुल 04 अंतर्राष्ट्रीय यात्री आये हैं। जिसमें से 01 कांगो से दुर्ग 31 मई 2026 आयी हैं तथा 02 अंतर्राष्ट्रीय यात्री भिलाई में 02 जून 2026 को आये हैं, जिनमें से 01 इथोपिया से एवं 01 युगांडा से आये हैं। 04 जून 2026 को 01 ट्रैवलर सुडान से आया है। सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने बताया कि चारों अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को होम आइसोलेशन में 21 दिन के लिए रखा गया हैं। जिनका प्रतिदिवस सुबह एवं शाम टेलीफोन के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ली जा रही हैं। वर्तमान में चारों यात्री स्पर्शाेन्मुख एवं पूर्णतः स्वस्थ हैं। उन्हंे किसी प्रकार की तकलीफ होने से ट्रेसिंग टीम / स्वास्थ्य विभाग / कंट्रोल रूम एवं कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, दुर्ग को जानकारी देने हेतु बताया जा रहा है।इबोला-वायरसलक्षण - बुखार, उल्टी, पेट दर्द, जोड़ो में दर्द, अत्यधिक थकान, सिर दर्द अधिक वाटरी डायरिया के लक्षण पाये जाते हैं।कैसे फैलते हैं - संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से एवं बॉडी फ्लूइड से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता हैं।जॉच - इसके लिए जॉच के लिए मुख्य रूप से आरटीपीसीआर जॉच किया जाता हैं।विशेषकर अफ्रीकी देशों में वर्तमान में इबोला-बायरस पाया गया हैं। जो कि 05 मई 2026 को मिला एवं 15 मई 2026 को पहचान किया गया एवं 17 मई 2026 को डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित किया गया।आइसोलेशन -अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों (विशेषकर अफ्रीकी देश) की एयरपोर्ट पर क्लीनिकल स्क्रीनिंग किया जा रहा हैं। जिसमें रिस्क कैटेगरी के आधार पर कैटेगरी 01 से 03 में चिन्हांकित किया जा रहा हैं। इबोला वायरस से प्रभावित देशो (विशेषकर अफ्रीकी देश) से अंतर्राष्ट्रीय यात्रा कर दुर्ग आये कैटेगरी 01 अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा जाना हैं एवं 21 दिन तक प्रतिदिवस स्वास्थ्य निगरानी एवं स्वास्थ्य सलाह दिया जायेगा।
- -अनोखी स्थापत्य कला और इंटरलॉकिंग निर्माण शैली से पर्यटकों व शोधकर्ताओं को कर रहा आकर्षित-मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का झुका हुआ प्राचीन मंदिर, जो सदियों से प्राकृतिक चुनौतियों को दे रहा मातरायपुर । छत्तीसगढ़ की धरती प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है। इन्हीं अनमोल धरोहरों में शामिल है मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर क्षेत्र के समीप स्थित घाघरा मंदिर। यह प्राचीन मंदिर अपनी अद्भुत निर्माण शैली और रहस्यमयी अस्तित्व के कारण वर्षों से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। बिना किसी गारा, चूना या सीमेंट के, केवल पत्थरों को आपस में संतुलित (इंटरपिनिंग/इंटरलॉकिंग) कर निर्मित यह मंदिर भारतीय स्थापत्य कला और प्राचीन इंजीनियरिंग कौशल का अद्वितीय उदाहरण है।जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित घाघरा मंदिर को देखकर पहली नज़र में ही आश्चर्य होता है। सदियों पुरानी यह संरचना समय, मौसम और कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हुए आज भी मजबूती से खड़ी है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण में भारी-भरकम पत्थरों को इस प्रकार संतुलित किया गया है कि उन्हें जोड़ने के लिए किसी अन्य बाहरी सामग्री की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। यही खूबी इसे देश की अनूठी पुरातात्विक धरोहरों की श्रेणी में खड़ा करती है।घाघरा मंदिर का एक ओर झुका हुआ होना इसकी सबसे रोमांचक विशेषताओं में से एक है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि किसी समय भूगर्भीय हलचल अथवा तीव्र भूकंप के कारण इसका संतुलन प्रभावित हुआ होगा। इसके बावजूद, आश्चर्यजनक रूप से यह संरचना आज भी पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है, जो प्राचीन शिल्पकारों की अद्वितीय दक्षता को प्रमाणित करती है।मंदिर के निर्माण काल को लेकर इतिहासकारों के बीच विभिन्न मत हैं। कुछ विद्वान इसे 10वीं शताब्दी की कलाकृति मानते हैं, तो कुछ इसे बौद्धकालीन स्थापत्य से जोड़कर देखते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहां श्रद्धालु विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। हालांकि, मंदिर के गर्भगृह के भीतर किसी प्रतिमा का न होना इसके रहस्य को और भी गहरा बना देता है, जो शोधकर्ताओं के लिए आज भी एक पहेली है। घाघरा मंदिर केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान का जीवंत प्रतीक है। जनकपुर से इसकी सुगम पहुंच और मार्ग में चारों ओर बिखरी प्राकृतिक सुंदरता यहां की यात्रा को और भी यादगार बना देती है। प्रकृति और इतिहास के इस अनूठे संगम को निहारने के लिए प्रदेश और देश भर से पर्यटक एवं इतिहासप्रेमी लगातार यहां पहुंच रहे हैं।
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-सफलता की कहानी
-श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यमरायपुर / छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है।केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है। ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं।ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है। - रायपुर / विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने शुकवार को नवा रायपुर के सेक्टर-19 स्थित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल की केंद्रीय प्रयोगशाला परिसर में मौलश्री पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव आर. शंगीता, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल के सदस्य सचिव राजु अगसिमनि सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मिलेगी नई उम्मीद, रायपुर में होगा उपचार-मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया बना जरूरतमंदों के लिए राहत और भरोसे का केंद्ररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कोरबा जिले की 66 वर्षीय कैंसर पीड़ित महिला श्रीमती उमातिन बाई के उपचार के लिए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 21 लाख 69 हजार 344 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस सहायता से उनका उपचार रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) में कराया जाएगा।जानकारी के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से पीड़ित उमातिन बाई के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज के लिए सहायता की मांग करते हुए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन प्राप्त होते ही मामले पर त्वरित संज्ञान लिया गया और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत उपचार हेतु 21.69 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई।मुख्यमंत्री की इस संवेदनशील पहल से मरीज और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आर्थिक सहायता मिलने से अब बेहतर और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग उनके परिवार के लिए संबल और नई उम्मीद लेकर आया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई कर जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य जनकल्याणकारी मामलों में लोगों को त्वरित राहत मिल रही है, जिससे शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की भावना के साथ संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया आज जरूरतमंदों के लिए आशा, विश्वास और सहारे का सशक्त केंद्र बन गया है।
- रायपुर /मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में शुकवार को यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के 7 जिलें बस्तर, कांकेर,दंतेवाड़ा, सुकमा,बीजापुर, नारायणपुर और मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी में एकीकृत आजीविका कार्यक्रम के तहत यहां के ग्रामीण परिवारों की आय और जीवन स्तर को बेहतर बनाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए है।मुख्य सचिव ने कार्यक्रम के तहत प्रत्येक लक्षित परिवारों को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एकीकृत आजीविका कार्यक्रम छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वकांक्षी पहल है। इसके तहत इन जिलों के प्रत्येक लक्षित परिवारों को विविधिकृत आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इन गतिविधियों में सामान्यतः कृषि, वन, पशुपालन, गैर कृषि क्षेत्र में नए नवाचार के माध्यम से आमदनी बढ़ाने के लिए कार्य किया जाएगा। इसके लिए प्रोसेसिंग एकाईयां, कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे का विकास होगा। लोगों को सहकारी समितियों से भी जोड़ा जाएगा।पशुपालन एवं संबद्ध गतिविधियों के अंतर्गत कुक्कुट पालन, बकरी पालन, डेयरी, सूकरपालन, मत्स्य पालन जैसे सेक्टरों से जोड़कर लोगों की आमदनी में इजाफा किया जाना है। इसी तरह से वन एवं वृक्ष के माध्यम से इमली, महुआ, चिरोंजी, काजू, बांस, कोसा रेशम, लाख, मधुमक्खी पालन के प्रमुख उत्पादों से जोड़कर परिवारों की आय एवं जीवन स्तर में बेहतर बनाया जाएगा।बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विभाग श्री भीम सिंह सहित ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
- रायपुर, /मुख्य सचिव श्री विकासशील ने शुकवार को यहां मंत्रालय महानदी भवन में सीएम हेल्पलाइन के संबंध में अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन के जरिये प्राप्त होने वाले शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश हैं।मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों केा निर्देश दिए है कि सीएम हेल्पलाइन 9 जून 2026 से प्रारंभ की जा रही है। सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को सीएम हेल्पलाइन के क्रियान्वयन के संबंध में दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु पत्र जारी किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से आमजनों की शिकायतों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा में हो यह सुनिश्चित होना चाहिए। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव श्री राहुल भगत ने सीएम हेल्पलाइन के तहत आधुनिक शिकायत प्रबंधन प्रणाली के संबंध में प्रस्तुतिकरण के जरिये विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन हेतु विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता पूर्ण शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। शिकायतों के निराकरण के लिए एल-1 से एल-4 स्तर के अधिकारियों तक स्वचालित रूप से ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने नागरिकों से उनकी शिकायतों के संबंधों में उनकी संतुष्टि का फीडबैक लेने की पारदर्शी प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में सीएम हेल्पलाइन लॉन्चिंग के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके, वेब पोर्टल, समर्पित मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी शिकायतें सीधे तौर पर दर्ज करा सकेंगे।बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, कौशल विकास एवं तकनीकी विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस., सामान्य प्रशासन, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैंसर अब्दुल हक, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर और वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा सहित मंत्रालय में पदस्थ विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
- रायपुर /मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में शुकवार को यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम परिक्षेत्र विकास निधि की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने एनएमडीसी परिक्षेत्र विकास निधि के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए है।बैठक में एनएमडीसी सीएसआर मद के अंतर्गत बस्तर संभाग के 6 जिले दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर से प्राप्त 49 करोड़ 95 लाख 65 हजार रुपए की प्रस्तुत कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में सीएसआर मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु नवीन कार्यों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कार्यों में पोषण आहार, स्वास्थ्य, शिक्षा, अधोसंरचना, सांस्कृतिक एवं अन्य निर्माण कार्यों को स्वीकृत किया गया। इसमें बस्तर जिले के 29, कोण्डागांव के 18, नारायणपुर के 14, दंतेवाड़ा के 17, बीजापुर के 86, सुकमा के 106 कार्य शामिल है।बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री एवं खनिज विकास विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, एनएमडीसी के सीएमडी सहित खनिज विभाग के अन्य अधिकारी एवं दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर जिले के कलेक्टर शामिल हुए।
- -17.15 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगी परियोजना, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा आवासीय परिसररायपुर / छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम गिनाबहार में शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना के तहत क्षेत्र की पहली आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी। यह परियोजना न केवल गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती आवास उपलब्ध कराएगी, बल्कि कुनकुरी क्षेत्र में योजनाबद्ध शहरी विकास की नई शुरुआत भी करेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश के सभी 33 जिलों में आवासीय योजनाओं का विस्तार करते हुए नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयासरत है। इसी क्रम में कुनकुरी की यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास और स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि जशपुर जिले में शीघ्र ही अटल विहार योजना के अंतर्गत बालाछापर एवं पत्थलगांव तथा अटल आवास योजना के तहत महुआ टोली एवं कंदोरा में भी नई आवासीय परियोजनाएं प्रारंभ की जाएंगी।आवास एवं पर्यावरण मंत्री तथा जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष निर्देश पर ग्राम गिनाबहार, तहसील कुनकुरी में लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना विकसित की जाएगी। इसके लिए 17 करोड़ 15 लाख 71 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आय वर्गों के लिए कुल 97 आवास निर्मित किए जाएंगे, जिनमें 91 आवास आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के हितग्राहियों के लिए होंगे।अटल विहार योजना के अंतर्गत शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को मात्र 1 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से भूमि आबंटित की गई है। साथ ही पात्र ईडब्ल्यूएस हितग्राहियों को 80 हजार रुपये तथा एलआईजी वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 40 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे आवास प्राप्त करना और अधिक सुलभ एवं किफायती बन सके।छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि प्रस्तावित कॉलोनी आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी। कॉलोनी में चौड़ी एवं सुव्यवस्थित सड़कें, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, समुचित जल निकासी प्रणाली, स्वच्छ एवं हरित वातावरण सहित सभी आवश्यक आधारभूत अधोसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक नियोजित एवं आधुनिक आवासीय परिसर के रूप में यह परियोजना क्षेत्रवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।परियोजना स्थल कुनकुरी-बगीचा मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एशिया के द्वितीय सबसे बड़े चर्च, हॉलीक्रॉस मिशन अस्पताल, लोयला स्कूल एवं लोयला महाविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थान भी परियोजना स्थल से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे यह क्षेत्र आवासीय दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है।भविष्य में इस क्षेत्र के आसपास शासकीय अस्पतालों, कार्यालयों एवं अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थानों के निर्माण की भी योजना है। वर्तमान में परियोजना स्थल के निकट शासकीय अस्पताल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे क्षेत्र के सुनियोजित विकास को नई गति मिलने के साथ-साथ भूमि मूल्य में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे यह परियोजना आवासीय एवं निवेश, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।उल्लेखनीय है कि यह परियोजना मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी में विकसित की जा रही है। क्षेत्रवासियों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पहल साबित होगी।
- -छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलिरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शुकवार को राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि श्री सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद श्री सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली।मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वर्गीय श्री सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में श्री सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, विधायक श्री अमर अग्रवाल, विधायक श्री धरमलाल कौशिक, विधायक श्री अजय चंद्राकर, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, श्री रमेश बैस, श्री राम प्रताप, श्री पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, श्री राम दत्त, श्री राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।
- -पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री-9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधिरायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शुकवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।श्री डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्री साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।
- रायपुर /राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय मेडिटेशन शिविर का शुकवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। शिविर के अंतिम दिन हार्टफुलनेस संस्था के प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को प्रार्थना के माध्यम से ध्यान की विधि की जानकारी दी तथा ध्यान का अभ्यास भी कराया।शिविर के दौरान लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी करते हुए मेडिटेशन के विभिन्न पहलुओं को समझा और नियमित अभ्यास के महत्व को जाना। प्रशिक्षकों ने बताया कि ध्यान मानसिक शांति, एकाग्रता और तनाव प्रबंधन का प्रभावी माध्यम है, जिसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर बेहतर कार्यक्षमता और संतुलित जीवन प्राप्त किया जा सकता है। इस शिविर में प्रतिभागियों ने ध्यान की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास किया और इसके सकारात्मक प्रभावों का अनुभव किया।
- -इको-फ्रेंडली उत्पादों के निर्माण से बढ़ी आय, ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया अवसररायपुर/ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लटोरी की स्व-सहायता समूह की महिलाएं इस पहल का सफल उदाहरण बनकर उभरी हैं। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बल पर यहां की महिलाओं ने हस्तशिल्प आधारित स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है।बिहान योजना के तहत महामाया एवं रेखा स्व-सहायता समूह की 20 महिलाओं को छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा तीन माह का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने प्राकृतिक संसाधनों से आकर्षक एवं उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने की तकनीक सीखी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद महिलाएं अब डलिया, टोकरी, सजावटी गुलदस्ते, पूजा ट्रे तथा फ्रूट बास्केट जैसे इको-फ्रेंडली उत्पाद तैयार कर रही हैं।इन हस्तनिर्मित उत्पादों को स्थानीय बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है। बढ़ती मांग के कारण समूह की महिलाओं की आय में भी वृद्धि हो रही है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्वरोजगार के इस माध्यम ने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने का अवसर भी प्रदान किया है।रेखा स्व-सहायता समूह की सदस्या श्रीमती कौशल्या राजवाड़े बताती हैं कि पहले उनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। बिहान योजना से जुड़ने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब वे स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि समूह की सभी महिलाएं मिलकर अपने हस्तशिल्प व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मिले और उनके गांव की पहचान भी बने।महिलाओं ने उन्हें प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त किया है।ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने की यह पहल न केवल महिला सशक्तिकरण को गति दे रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। आज लटोरी की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।
- -धान, गेहूं और सब्जियों की खेती में किसानों को मिल रहे सकारात्मक परिणामरायपुर / छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत उर्वरकों के उपयोग से खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन रही है। राज्य के किसान अब पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ नवाचार को अपनाते हुए उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में सफल प्रयास कर रहे हैं। नैनो यूरिया का बढ़ता उपयोग इसी परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में किसान नैनो यूरिया के उपयोग से सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराता है, जिससे फसलों की वृद्धि बेहतर होती है और उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। साथ ही इसके उपयोग से पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में लागत में कमी आती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम बड़ादमाली के प्रगतिशील किसान श्री कपूर सिंह ने अपनी लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि में नैनो यूरिया का सफल उपयोग कर अच्छे परिणाम प्राप्त किए हैं। धान, गेहूं एवं विभिन्न सब्जी फसलों में इसके प्रयोग से उन्हें बेहतर फसल विकास और लागत में कमी का अनुभव हुआ है। उनका मानना है कि समय पर और वैज्ञानिक तरीके से किए गए छिड़काव से फसलों को अधिक लाभ मिलता है।कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि नैनो यूरिया का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है। इसके अलावा मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी यह तकनीक सहायक सिद्ध हो रही है।राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। नैनो यूरिया के सफल उपयोग से प्रेरित किसान अब आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। इससे न केवल खेती की लागत कम हो रही है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता को भी मजबूती मिल रही है।
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*लोरमी में 250 युवाओं को कंप्यूटर, सिलाई और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण, उप मुख्यमंत्री ने किया संवाद*
बिलासपुर/उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोरमी में कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने युवाओं को जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और अपने कौशल को लगातार विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रशिक्षण केंद्र में संचालित गतिविधियों का अवलोकन कर प्रशिक्षणार्थियों के अनुभव भी सुने।श्री साव ने कहा कि स्थानीय युवाओं को उनकी रुचि और आवश्यकता के अनुरूप निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसईसीएल के सहयोग से 1 अप्रैल से 250 युवा कंप्यूटर, सिलाई एवं ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। युवाओं में नए कौशल सीखने को लेकर उत्साह और उमंग दिखाई दे रहा है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि, आज के समय में शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है। पढ़ाई के साथ किसी एक व्यावहारिक कौशल का होना भी अत्यंत आवश्यक है। ब्यूटीशियन, सिलाई, डाटा एंट्री जैसे प्रशिक्षण युवाओं को अतिरिक्त दक्षता प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि, कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही उनके व्यक्तित्व को भी सशक्त बनाता है।श्री साव ने युवाओं से कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए। निरंतर अभ्यास और सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता का आधार है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के पास अतिरिक्त कौशल होता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह हर परिस्थिति में सम्मानपूर्वक जीवन जीने में सक्षम बनता है। यही आत्मविश्वास जीवन में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी शक्ति है जो सफलता की नई राहें खोलता है। -
स्मृति शेष : रुप नारायण सिन्हा
--गणेशा जाधव पाटिल, सभासद, महाराष्ट्र मंडल रायपुर
हमारे भैयाजी यानी रुप नारायण सिन्हा अपने विराट व्यक्तित्व के कारण एक युगपुरुष थे। उनके साथ बिताए गए हर एक पल जीवन के अनमोल पल हैं। जिन्होंने अपने पास के किसी भी व्यक्ति को कभी छोटा महसूस नहीं होने दिया। यही भैयाजी का सबसे बड़ा गुण था। ग्राम कुम्हली से कबीर नगर के नए पते से लेकर अंतिम सांस तक, वे सबके लिए ‘भैयाजी’ ही रहे। पद बढ़ा, कद बढ़ा, इसके साथ ही उनके दिल का दायरा और बड़ा होता गया।प्रचारक, विभाग प्रचारक, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री जैसे पदों पर काम करने से परे भैयाजी कार्यकर्ता के लिए छत अर्थात आधार थे। धूप में छांव, बारिश में आड़। ओजस्वी और प्रखर वक्ता होते हुए भी उनका असली ओज सामान्य स्वयंसेवक को असामान्य बना देना था। सम्मान देने की विलक्षण कला मंच से 10- 20 कार्यकर्ताओं का नाम लेकर उनका सम्मान बढ़ाना" सहज हृदय की विशालता थी। भैयाजी भली भांति जानते थे कि संगठन का भवन ईंट-गारे से नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान से बनता है।उनका इतना बड़ा व्यक्तित्व, इतनी विनम्रता, जिज्ञासा व शिष्य से सीखने का भाव ही उन्हें सच्चा गुरु बनाता था। प्रवास पर स्थान का भूगोल, लोग, कार्यकर्ता सहित हर पहलू पर बारीकी से पूछना उनके जमीन से जुडने का प्रणाम था। संस्कारगत दृष्टि से भैयाजी को हम सभी ने अपने माता- पिता की सेवा करते तो देखा होगा लेकिन जब स्वयं की बच्चों से सेवा लेने की बारी आई तो उन्होंने ये अवसर किसी को नहीं दिया। हमेशा दूसरों की चिंता करने वाला यह व्यक्तित्व सबसे बाद में अपने बारे में सोचता था। भैयाजी का जीवन दरअसल तपस्वी का जीवन... नि:स्वार्थ, निष्कपट, पारदर्शी और समर्पित।योग आयोग और गौ सेवा आयोग के संयुक्त कार्यक्रम में मेरी भैयाजी से अंतिम भेंट हुई। यहां आयोग का अध्यक्ष बनने पर कबीर नगर छोड़ने का दुःख तो उन्हें था, लेकिन अब इस लोक से विदाई का महादुःख उन्होंने हमें दे दिया। यहां उनकी रिक्तता हमेशा बनी रहेगी।भैयाजी के व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक समन्वयता की भी थी। संत यात्रा 2023 में बम्लेश्वरी संत यात्रा के स्वागत की जिम्मेदारी उन्होंने मराठा समाज रायपुर को दी थी। समाज के सभी घटकों को जोड़कर समरसता का भाव जगाना उनकी विशेषता थी।शिवाजी महाराज से विशेष लगावछत्रपति शिवाजी महाराज और धमतरी मराठा समाज से उनका विशेष लगाव था। शिवाजी महाराज का शौर्य, धर्मनिष्ठा और सुराज का विचार उनके जीवन का आदर्श था। धमतरी की भूमि और वहां के कार्यकर्ताओं से उनका विशेष आत्मीय रिश्ता सदैव बना रहा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उनके लिए ‘जीवन पद्धति’ था। शाखा से निकला कार्यकर्ता ही घर-परिवार तक संघ के विचार पहुंचाता है। शाखा में किसी भी अधिकारी का प्रवास होता, तो नए स्वयंसेवकों को वरिष्ठों से मिलवा कर वे उनका मनोबल बढ़ाते थे। इस विश्वास के साथ ही यही कार्यकर्ता संगठन के निर्माण व विकास की असली प्रक्रिया है। संघ के कार्यक्रमों में उनका सान्निध्य हमें मिलता रहता था। वे केवल मार्गदर्शक नहीं, सह-यात्री बनकर साथ चलते थे।भैयाजी को 45 विधानसभा का प्रभारी बनाया गया। चुनाव के बाद दूसरे दिवस उनके निवास पर जाने पर उन्होंने चुनाव संबंधी सटीक आंकलन बताया। उन्होंने जो कहा, वो बाद में अक्षरश: सत्य हुआ। जमीनी पकड़, आंकड़ों की समझ और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद जैसी विशेषताओं के साथ उनकी राजनीतिक दूरदृष्टि अलग थी। प्रतिवर्ष गौशाला में गोपाष्टमी को पूजन में हमारे मां बगलामुखी गौशाला में गौ पूजन करने के लिए वे आते थे। गौ, गंगा, गीता उनके जीवन के आधार थे। श्रीमद भागवत, राम कथा में रुपनारायण हमारे मार्गदर्शक होने के कारण हमेशा उनसे मिलना होता था। धर्म और अध्यात्म को वे जीवन का आधार मानते थे। इसी तरह गौशाला और मंदिर से उनका विशेष लगाव था। ऐसे सेवाभावी स्वभाव व कार्यों से वे लोगों को भी प्रेरित करते रहते थे। संस्कृति के केंद्रों को जीवंत रखना ही उनका मिशन था।*दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन:*योग आयोग अध्यक्ष का शपथ ग्रहण पद उनके लिए सेवा का माध्यम बना। भैयाजी ने योग को घर-घर पहुंचाया। इसके प्रचार– प्रसार में कभी कोई कमी नहीं रखी। मेरे जैसे जिस साधारण कार्यकर्ता को उन्होंने अंगुली पकड़कर चलाया, उसी ने उन्हें कंधों से अंतिम विदाई दी। यह गुरु-शिष्य परंपरा का एक और उदाहरण है।*।।सब धरती कागद करूँ, लेखनी सब बनराय।**सात समुद्र की मसि करूँ, आपके गुण लिखा न जाय।।*

























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