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- बथुआ का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह कई विटामिंस और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो कई बीमारियां से दूर रखने में मददगार हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं बथुआ का बीज भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है?बथुआ बीज के फायदेआायुर्वेद में बथुआ के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है। बथुआ के बीजों में रक्तपित्त, जोड़ों में दर्द, अनियमित पीरियड्स की समस्याओं को दूर करने के गुण होता है। इसके अलावा इससे आपको कई फायदे हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इसके फायदे और इस्तेमाल करने का तरीका-1. रक्त पित्त को करे दूरबथुआ का इस्तेमाल रक्तपित्त को दूर करने के लिए किया जाता है। नाक-कान से खून निकलने की परेशानी से राहत पाने के लिए आप बथुआ के बीजों को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। इससे आपको रक्त पित्त में काफी लाभ मिलेगा।2. जोड़ों में दर्द से राहतजोड़ों के दर्द को दूर करने के लिए आप बथुआ के बीजों का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए 10 ग्राम बीजों को करीब 200 मिलिलीटर पानी में उबाल लें। इस पानी को तब तक उबालें जब तक यह 50 मिलिलीटर न रह जाए। इसके बाद गर्मागर्म इसका सेवन करें। महीने भर सुबह शाम इसका सेवन करने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलेगा।3. दांतों के दर्द से आरामबथुआ के बीजों से दांतों में दर्द की परेशानी को भी दूर कर सकते हैं। इसके लिए बथुआ के बीजों को भुनकर इसका चूर्ण तैयार कर लें। अब इस चूर्ण से अपने दांतों को रगड़ें। इससे दांत दर्द से छुटकारा मिलेगा। साथ ही मसूड़ों में होने वाली सूजन से भी राहत मिल सकता है। इसके अलावा बथुओ की पत्तियों को उबालकर पीने से भी दांतों के दर्द से आराम मिलता है।4. अनियमित मासिक धर्म में असरकारीपीरियड्स में अनियमितता को दूर करने के लिए बथुआ के बीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। पीरियड्स की अनियमितता को दूर करने के लिए बथुआ के बीजों और सोँठ को बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर तैयार कर लें। फिर 400 मिलीलीटर पानी मे करीब 15-20 ग्राम पाउडर मिला कर पानी को अच्छे से उबाल लें। जब पानी 100 ग्राम रह जाए, तो इसे छानकर दिन में 2 बार इसका सेवन करें। इस नुस्खो को आजमाने से तुरंत लाभ मिलेगा।5. लिवर के लिए फायदेमंदलिवर की परेशानियों को दूर करने और पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए बथुआ के बीजों का प्रयोग कर सकते हैं। साथ ही इससे लिवर के आस-पास की सख्ती भी दूर होती है। पीलिया की समस्या से ग्रसित होने पर छह ग्राम बथुआ के बीजों का सुबह शाम सेवन करने से पीलिया रोग से निजात मिल सकता है।6. चेहरे के दाग-धब्बों को दूरचेहरे के दाग-धब्बों को दूर करने के लिए बथुआ के बीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए बथुआ के बीजों को सिल पर अच्छे से पीस लें। अब इस पेस्ट को उबटन की तरह अपने शरीर पर लगाएं। इससे शरीर पर मौजूद मैल साफ हो जाएंगे। साथ ही चेहरे के दाग-धब्बे भी दूर हो सकते हैं।7. पेट के कीड़ेपेट में कीड़े हो होने पर बथुआ के बीज का सेवन करें। खासतौर पर अगर बच्चों को पेट में कीड़ा हो गया है, तो इसके बीजों को पीसकर इसमें थोड़ा शहद मिलाकर अपने बच्चों को चटाएं। इससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा।बथुआ के बीजों का इस्तेमाल करके आप कई परेशानियों को दूर कर सकते हैं। हालांकि, अगर आपकी परेशानी गंभीर है, तो डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।
- कान में मौजूद वैक्स को अक्सर हम मैल समझकर साफ करने लग जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कान का यह मैल आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। जी हां, कान में मौजूद वैक्स को अपशिष्ट मानना हमारी गलती हो सकती है। दरअसल, यह वैक्स कान में होने वाली कई परेशानियों से बचाने में हमारी मदद कर सकता है। यह मैल कान की नलिकाओं के ऊपरी जमी परत को सूखने से रोकना है। साथ ही यह कान में धूलकण और पानी जानें से रोकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कान में मैल के क्या फायदे हैं?क्यों जरूरी है कान में मैल?कान में मौजूद वैक्स या मैल भूरे, लाल, पीले या फिर नारंगी रंग का होता है। अक्सर यह वैक्स कान की नली में होता है। दरअसल, हमारे कान के अंदर कई तरह की ग्रंथियां होती हैं, जो मोम यानि वैक्स का निर्माण करती हैं। यह मैल आपके कान की स्किन को चोट से पहुंचाने से बचाता है। साथ ही इससे कई अन्य फायदे हो सकते हैं-एंटी-माइक्रोबियल गुणकान का मैल मुख्य रूप से मृत केराटिनोसाइट्स कोशिकाओं का बना होता है, जो देखने में मोम की तरह लगता है। इसलिए कई लोग इसे ईयर वैक्स भी कहते हैं। इसमें कई पदार्थों का मिश्रण होता है। कान के मैल में लाइसोज़ाइम होता है, जो एक एंटी-बैक्टिरियल एंजाइम है। ऐसे में कान में मौजूद वैक्स या मैल कई तरह के बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव करती हैं।कान के स्किन की करे सुरक्षाकान के आसपास की स्किन को सुरक्षा प्रदान करने में ईयर वैक्स काफी मददगार होता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और ऑयली गुण स्किन को सुरक्षा प्रदान करता है।नलियों की आउटर लेयर को सूखने से रोकेकान के मैल कान के नलियों की आउट लेयर को सूखने में मददगार होती हैं। दरअसल, यह मैल मोम और हल्का सा ऑयली होता है, जो कान की नलियों के लेयर को सूखने से रोकने में असरदार होती हैं।फंगस और पानी बचावकान में ईयर वैक्स होने से आपके कान के अंदरुनी हिस्सों में फंगल और पानी से होने वाली परेशानियों से बचाव किया जा सकता है। दरअसल, इसमें पानी को सुखाने का गुण होता है, कान के अंदर पानी जाने से रोकने में मददगार होता है। इसलिए बार-बार अपने कानों को साफ करने से बचें।बेहतर स्वास्थ्य की निशानीकान का मैल आपके बेहतर स्वास्थ्य की निशानी हो सकती है। जी हां, अगर कान के मैल के रंग से आप अपने बेहतर स्वास्थ्य का पता लगा सकते हैं। अगर आपके कान का वैक्स या मैल पीले रंग का है, जो समझ जाएं कि आपका कान स्वस्थ है। कान का मैल शरीर में विषाक्त पदार्थों का इकट्ठा होने का संकेत दे सकता है। ज्यादा वैक्स जमा होने पर यह खुद-ब-खुद निकल जाती है।--------------
- आपने अक्सर महसूस किया होगा कि जब भी आप रोते हैं तो कुछ देर बाद आपकी नाक भी बहने लगती है जिसे आप चाह कर भी नहीं रोक सकते। यह प्रक्रिया लगभग हर इंसान में एक सी है। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल में जनरल फिजिशियन डॉ विनय भट्ट बताते हैं कि हमारा शरीर अलग-अलग भावनात्मक क्रियाओं के लिए अलग अलग तरीके से अपनी प्रतिक्रिया देता है। होता यह है कि जब हम काफी आवेग में रो रहे होते हैं तब हमारे आंसू हमारी पलकों के नीचे कोनों में स्थित टियर डक्ट यानी कि आंसू की नलिकाओं जिनको लैक्रिमल पंक्टा कहा जाता है, से नेज़ल कैविटी जिसको लैक्रिमल कैनालिकुली कहा जाता है, में चले जाते हैं और जो नाक के रास्ते से बाहर आते हैं।आपके आंसू और नाक बहने में क्या है संबंधआपका शरीर रोजाना 1.2 एमएल आंसू बना पाता है। जो आपकी आंखों से बाहर निकलते हैं। यह आंसू दो छोटी-छोटी ओपनिंग में घुस जाते हैं और आपकी अंदरूनी आंख के कोने से बाहर निकलते हैं। यह फ्लूइड आपकी नाक के पिछले भाग और गले के डक्ट में ड्रेन होना शुरू हो जाता है। जब आप रोते हैं तो आपके मस्तिष्क का एक भाग ट्रिगर हो जाता है जिस कारण लैक्रिमल ग्लैंड आंसू बनाने शुरू कर देती है। जब आप थोड़े बहुत रोते हैं तो आपके नाक में केवल महसूस सा ही होता है और नाक एक-दो बार बहने के बाद बंद हो जाती है। लेकिन जब आप बहुत अधिक रोते हैं तो आपके चुप होने के बाद भी आपकी नाक बहती रहता है। इससे आप का चेहरा के साथ ही नाक लाल भी हो जाती है।नाक बहना असल में क्या हैमेडिकल जगत में बहती नाक को दो भागों में विभाजित किया गया है। जिसका नाम हैं राइनोरिया और राइनाइटिस। जब सामान्य रूप से आपकी नाक बहती है तो उसे राइनोरिया कहा जाता है, लेकिन जब आपकी नाक के टिश्यू के आस पास सूजन आ जाती है तो उस स्थिति को राइनाइटिस कहा जाता है। यह स्थिति अलग-अलग कारणों की वजह से हो सकती है। किसी केस में तो आपकी नाक ब्लॉक भी हो सकती है।नाक बहने के कुछ अन्य कारणअगर आप का नाक बिना आंसुओं के या कुछ ही आंसू आने के बाद भी काफी ज्यादा बह रहा है तो इसके पीछे और भी बहुत से कारण हो सकते हैं। इस के कुछ आम कारणों में निम्न उपलब्ध हैं :-जब आप प्याज काट रहे हों या आसपास कोई प्याज काट रहा हो।-जब बाहर का तापमान काफी कम हो गया हो और ठंड बढ़ गई हो।-जब आपको ठंड लग गई हो।-जब आपने काफी अधिक गर्म या फिर स्पाइसी खाना खा लिया हो।-जब आपको धूल मिट्टी, परफ्यूम और अन्य कारणों से एलर्जी हो तो उसके रिएक्शन के रूप में भी आप को आंसू देखने को मिल सकते हैं।-मौसमी एलर्जी होने के कारण।
- ठंड का मौसम आते ही सरसों का साग बड़े चाव से खाया जाता है। यह स्वाद और पोषक तत्वों से समृद्ध हरी सब्जी है। सरसों का साग व्यक्ति को कई बीमारियों से बचाने में सहायता कर सकता है। आइये जानते हैं इसे खाने के फायदेकब्ज से राहतसरसों के साग के फायदे पाचन क्रिया को बेहतर करने के लिए भी देखे जा सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध में साफ तौर से बताया गया है कि सरसों के साग में अच्छी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, जो खाने को पचाने में मदद कर सकता है। साथ ही फाइबर पाचन क्रिया को भी बेहतर कर सकता है। वहीं कब्ज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मल त्याग करते समय कठिनाई होती है । इस स्थिति से छुटकारा पाने के लिए सरसों के साग का सेवन लाभकारी हो सकता है। दरअसल, सरसों के साग में फाइबर की समृद्ध मात्रा होती है । फाइबर मल को मुलायम कर कब्ज की समस्या से छुटकारा दिला सकता है । इस तरह कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए सरसों का सेवन उपयोगी हो सकता है।प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए मजबूतशरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारियों को दूर रखने में मदद करती है, इसलिए इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए सरसों के साग का सेवन कर सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश वैज्ञानिक अध्ययन में इस बात का जिक्र मिलता है कि सरसों के साग में विटामिन ए होता है, जिसमें रेटिनोइड्स शामिल हैं। यह पोषक तत्व प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने में मदद कर सकता है ।विटामिन केसरसों के साग के फायदे सेहत पर कई तरह से दिखाई दे सकते हैं, क्योंकि इसमें शरीर के लिए जरूरी विटामिन के मौजूद होता है। विटामिन के को क्लॉटिंग विटामिन के तौर पर भी जाना जाता है, जो ब्लड क्लॉट यानी रक्त का थक्का जमने से रोक सकता है। साथ ही यह हड्डियों को मजबूत करने में भी सहायता कर सकता है ।एंटीऑक्सीडेंट से भरपूरसरसों के साग का सेवन एंटीऑक्सीडेंट के लिए भी किया जा सकता है। यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर की वेबसाइट पर पब्लिश जानकारी के मुताबिक, यह एंटी-ऑक्सीडेंट गुण से समृद्ध होता है, जो कैंसर और हृदय रोग के जोखिम को कम करने का काम कर सकता है ।हृदय के लिएसरसों के साग के फायदे हृदय पर नजर आ सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध की मानें, तो सरसों के साग में कैरोटेनॉयड जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो हृदय रोग के खिलाफ काम कर सकते हैं । वहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो हृदय रोग की समस्या को पनपने से रोक सकते हैं । इस तरह हृदय को स्वस्थ रखने में सरसों उपयोगी साबित हो सकती है।आंखों के लिएआंखों को स्वस्थ रखने में सरसों का साग लाभकारी हो सकता है। इससे संबंधित एक शोध में बताया गया है कि सरसों के साग में विटामिन ए, कैरोटीनॉयड और बी-कैरोटीन होता है, जो विजन हेल्थ यानी आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है । इस आधार पर माना जा सकता है कि सरसों का साग आंखों पर सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकता है।मधुमेह से राहतमधुमेह की स्थिति में सुधार करने के लिए भी सरसों के साग के फायदे हो सकते हैं। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सरसों के साग में एंटी-डायबिटिक गुण होता है, जो हाइपरग्लाइसेमिया को कम करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने का काम कर सकता है। इससे मधुमेह के जोखिम को कम करने और डायबिटीज की स्थिति में सुधार हो सकता है ।लिवर के लिए लाभकारीसरसों का साग लिवर के लिए भी लाभकारी हो सकता है। इस संबंध में किए गए शोध में पाया गया कि सरसों के साग में एंटी ओबेसिटी गुण मौजूद होता है, जो मोटापे को कम कर लिवर स्वास्थ्य में सुधार कर सकता ह । साथ ही यह लिवर डीटॉक्सीफिकेशन का भी काम कर सकता है, जो लिवर से संबंधित समस्या को पनपने से रोक सकता है ।
- घरों में गेहूं के अलावा मक्का, चावल के आटे और बाजरे की रोटियां भी खाने में खाई जाती है. आपको बता दें कि बाजरे की रोटी को हमेशा ही सर्दी के मौसम में ही खाया जाता है. बाजरे की रोटी स्वाद के साथ-साथ सेहत की दृष्टि से भी काफी फायदेमंद होती है. कहा जाता है बाजरा खाने में काफी गरम होता है, जिस कारण से इसका सेवन हमेशा सर्दियों में ही किया जाता है.आइए, जानते हैं स्वाद और प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, फास्फोरस, फाइबर तथा आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर बाजरे की रोटी के फायदों के बारे में-1. वजन घटाने में फायदेमंदअगर अपना अपना वजन घटाने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको गेहूं की रोटी की जगहखाने में बाजरे की रोटी को शामिल करना चाहिए. फाइबर की उच्च मात्रा होने के कारण इसे पचने में समय लगता है जिस कारण पेट भरा हुआ रहता है, और भूख भी नहीं लगती है.2. सेहतमंद स्किन के लिएबाजरा में एंटीऑक्सीडेंट, सेलेनियम, विटामिन-सी, विटामिन-ई जैसे लाभदायक पोषक तत्व पाए जाते हैं जो स्किन के लिए सेहतमंद होते हैं. एंटीऑक्सीडेंट स्किन को फ्री-रेडिकल से बचाते हैं. फ्री-रेडिकल स्किन को खराब कर देते हैं. विटामिन-सी और विटामिन-ई स्किन के लिए लाभदायक होता है.3. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और एनर्जी के लिएबाजरा को खाने से एनर्जी भी मिलती है. ये ऊर्जा का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है. आपको बता दें कि बाजरे में मैग्नीशियम और पोटैशियम की भी पर्याप्त मात्रा मौजूद होती है, जो ब्लड प्रेशर सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं,4. कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने के लिएबाजरा को कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए भी उपयोगी है. जिन लोगों का कोलेस्टॉल बढ़ा रहता है उनको खाने में बाजरे की रोटी को ही शामिल करना चाहिए.इसके सेवन से दिल की सेहत अच्छी बनी रहती है और दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है.5. अच्छी नींद के लिएबाजरे में ट्रिप्टोफेन भी उचित मात्रा में पाया जाता है, जो सेरोटोनिन प्रोड्यूज करता है. कहा जाता है कि इससे टेंशन कम होती है. तनाव कम होने से अच्छी नींद आने में मदद मिलती है. ऐसे में अगर आपको अच्छी नींद चाहिए है तो आपको रात के खाने में इसको शामिल करना चाहिए.6. ग्लूटेन फ्री डाइट है बाजरे की रोटीबाजरा ग्लूटेन फ्री होता है. दरअसल ग्लूटेन युक्त भोजन खाने से पाचन में दिक्कत होती है, इसलिए बाजरे की रोटी खाने के लिए बेस्ट ऑप्शन है.7. कैंसर और डायबिटीज से बचाता हैकहा जाता है कि डायबिटीज पेशेंट्स को अपनी डाइट में बाजरा जरूर शामिल करना चाहिए. यह अचानक से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने नहीं देता है. यह दोनों ब्लड शुगर लेवल सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं.इतना ही नहीं स्टडीज में कहा गया है कि बाजरा कैंसर से बचाव में भी सहायक है.
- प्याज को गंध के कारण कई बार लोग खाने से बचते हैं. इस लिस्ट में महिलाएं टॉप पर आती हैं. महिलाओं को कच्चा प्याज खाना पसंद नहीं होता है क्योंकि इसके खाने के बाद मुंह से गंध आने लगती है. अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो कच्चा प्याज नहीं खाते, तो आप इन स्वास्थ्य लाभों से ( Benefits of Onion for Women) वंचित हैं. आपको बता दें कि प्याज में काफी कम कैलोरी होती है.इतना ही नहीं प्याज में विटामिन सी, बी, आयरन, फोलेट और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो अच्छी सेहत के लिए काम में आते हैं. प्याज सर्दी जुकाम के लिए भी फायदेमंद होता है। प्याज में फाइटोकेमिकल्स, अल्लियम और एलिल डिसुलफाइड जैसे तत्व भी होते हैं, जो एलिसिन पोस्ट इनग्रेशन में परिवर्तित हो जाते हैं.आज हम आपको बताएंगे कि प्याज महिलाओं के लिए कितना लाभदायक है और जरूरी भी है-मेनोपॉज के लक्षणों को करता है कममेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजेन का उत्पादन काफी कम हो जाता है. जिसकी वजह से महिलाओं का शरीर आहार से कैल्शियम को कम पाने लगता है.यही कारण है कि ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या को रोकने के लिए कैल्शियम सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है. ऐसे में महिलाओं के लिए प्याज कारगर साबित होता है.समय से पहले बूढ़ा होने से करता है बचावअगर आप समय से पहले होने वाले बुढ़ापे से बचना चाहती हैं, तो प्याज बहुत उपयोगी है. प्याज में विटामिन ए, सी, और ई पाए जाते हैं. यही कारण है कि ये स्किन के लिए भी लाभदायक होता है.प्याज में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण, बैक्टीरिया के संक्रमण को रोकने में आपकी मदद कर सकती है. ऐसे में अपनी स्किन के लिए आपको प्याज का उपयोग करना चाहिए.मुहांसों और फुंसियों का करे इलाजप्याज से कई तरह के लाभ मिलते हैं, क्योंकि इसमें जीवाणुरोधी, रोगाणुरोधी और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण पाए जाते हैं. यानी कि इससे मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया दूर किया जा सकता है. जी हां कहा जाता है कि प्याज के सेवन से मुंहासे और पिंपल्स की समस्या भी कम होती है. इसके साथ ही आप प्याज के रस में 1 चम्मच जैतून के तेल को मिलाकर अपने चेहरे पर लगा सकती हैं.इसको अपने चेहरे पर 20 मिनट लगाने के बाद साफ पानी से धो दें. इससे लाभ मिलेगा.बालों के विकास में मददगार है प्याजकैरोटीन एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो बालों, नाखूनों और हमारी स्किन की परेशानियों को दूर करने का काम करता है, जबकि प्याज में सल्फर भरपूर रूप से पाया जाता है. यही कारण है कि सल्फर बालों के विकास को बढ़ावा देने के साथ ही पतले बालों से छुटकारा दिलाने में भी मदद करता है. बालों को उचित पोषण देने के लिए प्यार के रस का उपयोग हर किसी को करना चाहिए.
- कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ती है. कार्तिक महीने की पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व माना गया है. इस साल कार्तिक पूर्णिमा 19 नवंबर शुक्रवार को पड़ रही है. इस दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण को खीर का भोग लगाना चाहिए. इससे भगवान प्रसन्न होते हैं.रबड़ी की खीर एक स्वादिष्ट डेजर्ट है. इसे रबड़ी, चावल, दूध, चीनी, मेवा और किशमिश का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है. सूखे मेवों का कुरकुरापन इस खीर को एक अनोखा स्वाद देता है. ये डेजर्ट विशेष अवसरों और त्योहारों पर बनाई जाती है. इस स्वादिष्ट डेजर्ट रेसिपी को ट्राई करें और अपने प्रियजनों के साथ इसका आनंद लें. आइए जानें इसकी रेसिपी.रबड़ी की खीर की सामग्री---रेडीमेड रबड़ी – 250 ग्रामचीनी – 1/2 कपकिशमिश – 1 बड़ा चम्मचकाजू – 10आवश्यकता अनुसार पानीचावल – 1/4 कपहरी इलाइची – 1/2 छोटा चम्मचबादाम – 10दूध – 1 लीटररबड़ी की खीर बनाने की विधिस्टेप – 1सबसे पहले इलाइची को ग्राइंडर में डाल कर बारीक पीस लीजिए. दूसरी ओर चावल को अच्छी तरह से धोकर आधे घंटे के लिए पानी में भिगो दें. आधे घंटे के बाद, अधिक पानी निकाल दें और फिर चावल को ग्राइंडर से दरदरा पीस लें.स्टेप – 2इसके बाद एक गहरे तले के बर्तन में दूध डालकर धीमी आंच पर रख दें. इसे उबाल लें और इसे 2-3 मिनट तक उबलने दें. जब दूध में उबाल आने लगे तो इसमें चावल को दरदरा पीस कर अच्छी तरह मिला लें. अब हर 1-2 मिनट के अंतराल पर दूध को चलाते रहें और आंच को मध्यम कर दें.स्टेप – 3अब काजू और बादाम को चॉपिंग बोर्ड पर रख कर बारीक काट लें. जब चावल पक जाएं तो पैन में दूध डालें और लगातार चलाते हुए सारी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें. फिर मिश्रण में आधी मात्रा में कटे हुए काजू, बादाम डाल दीजिए. अब पैन में किशमिश डालें और अच्छी तरह मिलाएं.स्टेप – 4जब चावल और मेवे नरम हो जाएं और खीर गाढ़ी हो जाए तो गैस बंद कर दें. अब पैन में चीनी मिलाएं और इलायची पाउडर डालें. पैन को ढक्कन से ढक दें. पैन को 2-3 मिनट के लिए अलग रख दें जब तक कि चीनी पूरी तरह से घुल न जाए. ढक्कन खोल कर खीर को अच्छे से चला दीजिए. अब खीर को ठंडा होने दें और फिर इसमें रबड़ी डाल दें.स्टेप -5रबड़ी की खीर बनकर तैयार है. खीर को बाउल में निकालिये और बारीक कटे काजू और बादाम से गार्निश करें और इसका आनंद लें.
- तिल के लड्डू सर्दियों में खाई जानें वाली एक लोकप्रिय मिठाई है. ये बनाने में बेहद आसान हैं. इसे गुड़ और मूंगफली के साथ बनाया जाता है. तिल के बीज अपने पोषक लाभों के लिए जाने जाते हैं, जबकि गुड़ मीठे का स्वस्थ विकल्प है. मेहमानों को परोसने के लिए ये एक अच्छी रेसिपी है. इन लड्डूओं को बनाना बहुत ही आसान है. आप इन्हें किसी खास अवसर पर भी बना सकते हैं. आइए जानें इसकी रेसिपी.तिल के लड्डू की सामग्रीतिल – 200 ग्रामघी – 3 बड़े चम्मचकच्ची मूंगफली – 50 ग्रामकटा हुआ गुड़ – 300 ग्रामतिल के लड्डू बनाने की विधिस्टेप -1 मूंगफली और तिल को सूखा भून लेंएक पैन में तिल डालकर भूनें. इन्हें एक ट्रे में निकाल लें और ठंडा होने के लिए अलग रख दें. अब उसी पैन में मूंगफली के दाने डालकर सुनहरा होने तक भून लें. भुनी हुई मूंगफली को दूसरी ट्रे में निकाल लें और ठंडा होने दें. ठंडा होने पर मूंगफली को मोर्टार और मूसल में पीस लें.स्टेप – 2 गुड़ को घी में पिघलाकर इसमें भुनी हुई मूंगफली और बीज डालकर मिला लेंअब उसी कड़ाही में धीमी आंच पर घी पिघलाएं. पैन में गुड़ डालें और पिघलने दें. इसे लगातार चलाते रहें. अब पैन को आंच से हटा दें और 3 मिनट के लिए अलग रख दें. इनमें तिल और भुनी हुई मूंगफली डालें और एक स्पैटुला के साथ अच्छी तरह मिलाएं.स्टेप -3 मिश्रण को 5 मिनट के लिए ठंडा करें और लड्डू का आकार देंऊपर दिए गए पेस्ट को एक अलग प्लेट में निकाल लें और 5 मिनट के लिए ठंडा होने दें. अब, पेस्ट को एक-एक करके बॉल के आकार में लड्डू का आकार दें. इन्हें अपने मेहमानों के लिए एक बाउल में परोसें.तिल के बीज के स्वास्थ्य लाभतिल के बीज या तिल पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. तिल के कई स्वास्थ्य लाभ हैं. तेल से भरपूर ये छोटे बीज प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट के बेहतरीन स्रोत हैं. तिल के बीज तेल से भरपूर होते हैं, जो आपकी त्वचा, हड्डियों और बालों के लिए बहुत अच्छा होता है.तेल में ऐसे कम्पाउंड होते हैं जो हड्डियों को स्वस्थ बनाते हैं. ये लिवर और त्वचा के लिए भी फायदेमंद हैं. तिल के बीज विशेष रूप से कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. ये मिनरल नई हड्डियों को बनाने और हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.
- मां लक्ष्मी की कृपा जिस घर पर होती है वहां कोई कष्ट कभी नहीं आता है. मां लक्ष्मी को धन वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है. मां लक्ष्मी अपनी कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनाती हैं. अगर मां लक्ष्मी किसी घर से रुष्ट हो जाएं तो घर में दुख और दरिद्रा का वास हो जाता है. इसलिए हर किसी की कोशिश यही होती है कि मां लक्ष्मी की कृपा बनी रही. मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए लोग तरह तरह की पूजा अर्चना भी करते हैं.रसोई में भी मां अन्नपूर्णा का वास माना जाता है. वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी चीजों को बारे में बताया गया है, जिन्हें रसोई में कभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं होने देना चाहिए. बताया गया है कि अगर रसोई में ये चीजें खत्म हो जाती है तो नकारात्मकता बढ़ती है और मां लक्ष्मी रुष्ट होती हैं. आइए जानते हैं कि कौन सी हैं वो चीजें-आटाआटा के बिना हर एक रसोई अधूरी रहती है. लेकिन कई बार ऐसा हो जाता है कि घर का पूरा आटा खत्म हो जाता है, लेकिन वास्तु के अनुसार आटा खत्म होने से पहले ही लाकर रख देना चाहिए. कहते हैं कि आटे के बर्तन को खाली नहीं रखना चाहिए, क्यों इससे आपके घर में अन्न और धन की की होने लगती है व मान-सम्मान की हानि भी हो सकती है.हल्दीहल्दी का उपयोग सबसे ज्यादा कारगार माना जाता है. तमाम चीजों को बनाने में भी हल्दी का ही ही उपयोग किया जाता है. हल्दी का शुभ कार्यों और देव पूजा में भी इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी का संबंध गुरु ग्रह से माना गया है. ऐसे में कहा जाता है कि इसकी कमी गुरु दोष होती है. अगल किचम में पूरी तरह से हल्दी खत्म हो जाती है तो सुख-समृद्धि की कमी हो सकती व शुभ कार्यों में व्यवधान हो जाती है.चावलकई बार हम लोगों ने देखा है कि चावल में कीड़े ना पड़ जाएं इस कारण से पूरे खत्म होने के बाद ही मंगवाते हैं, जबकि ये सब गलत होता है.चावल को शुक्र का पदार्थ माना गया है और शुक्र को भौतिक सुख सुविधा का कारक माना जाता है. घर में हमेशा चावल के खत्म होने के पहले ही मंगवा लें.नमकनमक एक ऐसी चीज है जो हर एक घर में होती है, क्योंकि नमक के बिना खाने का हर एक स्वाद अधूरा सा रहता है. ऐसे में आपको बता दें कि चाहें कुछ भी हो जाए घर में नमक का डिब्बा पूरी तरह से खाली नहीं होना चाहिए.अगर घर में नमक का डिब्बा खाली रहता है तो आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ जाता है. इसके साथ ही कभी भी दूसरे के घर से नमक नहीं मांगना चाहिए.
- पाचन क्रिया को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सभी लोगों को कम मसाले और हल्के तेल वाले भोजन करने की सलाह दी जाती है। अगर संतुलित मात्रा में मसालों का सेवन किया जाए तो इसके नुकसान नहीं होते हैं। इतना ही नहीं आयुर्वेद में कई मसालों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद भी बताया गया है। चेन्नई स्थित श्री रामचंद्र विश्वविद्यालय के हर्बल एंड इंडियन मेडिसिन रिसर्च लेबोरेटरी विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि भारतीय मसाले हृदय के साथ शरीर के कई अन्य अंगों के लिए बेहद फायदेमंद हो सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि भारतीय मसाले प्रकृति का वरदान हैं जिनका सही मात्रा में सेवन करना सेहत, विशेष रूप से हृदय के लिए लाभदायक हो सकता है। आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही मसालों के बारे में-लहसुनअध्ययन में पाया गया कि लहसुन, हृदय रोग के कारकों को कम करने में सहायक हो सकता है। लहसुन का सेवन बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है, जिसे हृदय रोगों का मुख्य कारण माना जाता है। इसके अलावा लहसुन, रक्तचाप को कम करने के साथ एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा को बढ़ाता है।हल्दीहल्दी में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लामेटरी गुण के कारण वर्षों से इसे पेट दर्द, दांत दर्द, सीने में दर्द और मासिक धर्म की कठिनाइयों में प्रयोग में लाया जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि आहार में हल्दी का उपयोग करने से 4 सप्ताह के भीतर गुड कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि करते हुए बैड कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है। ऐसे में मधुमेह, किडनी और हृदय रोगियों के लिए हल्दी का सेवन विशेष लाभप्रद हो सकता है।काली मिर्चकाली मिर्च में प्रभावशाली एंटीऑक्सीडेंट और जीवाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन को ठीक रखने के साथ वजन घटाने में मदद करते हैं। काली मिर्च वैनेडियम से भरपूर होने के कारण मायोकार्डियल इंफाक्र्शन (हार्ट अटैक) से उबरने में मदद कर सकती है। बुखार, सर्दी-जुकाम के घरेलू उपचार के रूप में वर्षों से काली मिर्च के सेवन की सलाह दी जाती रही है।
- आमतौर पर नमक का इस्तेमाल सिर्फ खाने में ही काम में किया जाता है लेकिन अगर आप नहाने के पानी में नमक मिलाकर इस्तेमाल किया जाए तो न सिर्फ त्वचा की रंगत को सुधार होता है, बल्कि कई समस्याओं से भी बचा जा सकता है।आइए जानते हैं नमक के पानी से नहाने के बेहतरीन फायदे।चेहरे पर आता है निखारये बात सही है कि अगर आप पानी में नमक मिलाकर उससे नहाते हैं तो आपकी स्किन में छिपी अशुद्धियां निकल जाती हैं और आपके चेहरे पर निखार बढ़ जाता है। इतना ही नहीं नमक वाले पानी से नहाने पर आपकी स्किन में छिपे डेड सेल्स भी बाहर निकल जाते हैं और स्किन सॉफ्ट के साथ-साथ चमकदार भी बनती है।हड्डियों के दर्द से मिलता है आरामअगर बीते कुछ दिनों से आपकी हड्डियों में दर्द हो रहा है तो आपको कुछ दिनों तक नमक के पानी से नहाने की जरूरत है, जो कि हड्डियों के दर्द में राहत देने का काम करता है। इतना ही नहीं अगर आप नमक के पानी से नहाते हैं तो आपको जॉइंट पेन की समस्या भी दूर होती है। इसलिए इस स्थिति में आपको नमक के पानी से नहाना चाहिए।-ब्लड सर्कुलेशन रहता है ठीकनमक के पानी से नहाने से ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और ब्रेन फंक्शंस बेहतर तरीके से काम करते है। नमक के पानी से नहाने पर तनाव दूर होकर दिमाग को शांति मिलती है।मसल्स को मिलता है आरामअगर मांसपेशियों में थकान की वजह से दर्द हो रहा है तो आपको बिना देर किए नमक के पानी से नहाना चाहिए, जिससे मसल्स पेन से राहत मिलती है।-स्किन की होती है सफाईदरअसल नमक के पानी में मौजूद मग्नीशियम, कैल्शियम, सोडियम जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्किन के अंदर गहराई से जाकर सफाई करते हैं। नमक वाला पानी आपके स्किन में छिपे इन्फेक्शन को खत्म करता है और आपकी स्किन को हेल्दी रखता है।बॉडी ऑयल रहता है कंट्रोलअगर आपके चेहरे से बार-बार ऑयल निकलता है या फिर आपकी बॉडी ऑय़ली है तो आपको अपने नहाने के पानी में नमक डालना चाहिए, जो शरीर का ऑयल लेवल कंट्रोल करता है। इतना ही नहीं यह शरीर में एसिडिटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।---
- आप भी बहुत ज्यादा थकान महसूस करते हैं या फिर कभी-कभी चक्कर खाकर जमीन पर ही गिर जाते हैं. तो सावधान हो जाइए, क्योंकि ये लक्षण विटामिन 12बी की कमी के लक्षण हो सकते हैं. जिन लोगों को भूख नहीं लगती या फिर दिल की धड़कन तेज हो जाती है, उन्हें अपनी डाइट पर खास फोकस करना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये सभी संकेत विटामिन बी-12 की कमी होने पर दिखते हैं, अगर शरीर में ये विटामिन कम हो जाए तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है.सेहत के लिए क्यों जरूरी है विटामिन बी 12हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि विटामिन बी 12 एक हेल्दी शरीर के लिए बेहद जरूरी है. गर्भावस्था के दौरान आपको विटामिन बी-12 की बहुत जरूरत होती है. इससे बुढ़ापे में भूलने वाली बीमापी डिमेंशिया का खतरा भी कम हो जाता है. विटामिन बी-12 की कमी से हड्डी और जोड़ों में दर्द की समस्या होने लगती है. इससे शरीर में एनीमिया का खतरा भी बढ़ जाता है.विटामिन बी- 12 की कमी के लक्षणजीभ में दाने या फिर लाल हो जानासांस फूल जानासिरदर्द और कान बजनाभूख कम लगनात्वचा का पीला पड़ जानामुंह में छाले की समस्याआंखो की रोशनी कम होनाडिप्रेशन, कमजोरी और सुस्तीविटामिन बी 12 की कमी क्यों होती हैअगर आप विटामिन बी 12 के लिए आवश्यक फूड का सेवन नहीं कर रहे हैं, तो यह प्रमुख कारण हो सकता है. एचआईवी जैसी बीमारियों की वजह से शरीर में विटामिन बी 12 का अवशोषण (Absorb) नहीं हो पाता है. कुछ बैड बैक्टीरिया, एंटीबायोटिक, सर्जरी और टेपवर्म भी विटामिन बी 12 की कमी की वजह हो सकती है.विटामिन बी 12 की कमी से होने वाले नुकसान1-जोड़ों और हड्डियों में दर्द होनाशरीर में विटामिन बी-12 की कमी होने पर हड्डियों में दर्द की समस्या होने लगती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि विटामिन बी-12 कम होने पर हड्डी से संबंधित कमर और पीठ में दर्द रहने लगता है.2 मानसिक बीमारीविटामिन बी-12 की कमी होने पर भूलने और भ्रम में रहने की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज्यादातर लोग इस समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं, लेकिन ज्यादा दिन तक विटामिन बी-12 की कमी से झूझना ठीक नहीं है आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.3. नर्व सिस्टम को नुकसानहेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि शरीर में विटामिन बी-12 की कमी होने से हमारा पूरा तंत्रिका-तंत्र भी बुरी तरह से प्रभावित होता है. इससे शरीर के हर अंग तक खून पहुंचाने में भी परेशानी होने लगती है. विटामिन बी-12 की कमी से तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुंचती है और जीवन भर के लिए आपको ये समस्या झेलनी पड़ सकती है.विटामिन बी 12 से भरपूर फूडहेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसे कई फूड्स हैं, जिनके नियमित सेवन से आप विटामिन बी 12 की कमी को पूरा कर सकते हैं. मांस, मछली, चिकन आदि में भरपूरा मात्रा में विटामिन बी 12 मौजूद होता है. इसके अलावा कम फैट वाला दूध, छांछ और चीज में भी विटामिन बी 12 मौजूद होता है. वहीं अंडा और मछली विटामिन बी 12 का बढ़िया स्रोत है. इसके अलावा आप टूना, ट्रॉट, सेलमन मछली का सेवन भी कर सकते हैं. इनमें विटामिन बी खूब पाया जाता है.
- जब बात सेहत की आती है तो हम खुद को फिट रखने के लिए बहुत कुछ करते हैं. जिम में घंटों वर्कआउट करना और ढेर सारा पानी पीना आदि. लेकिन ये समझना जरूरी है कि स्वस्थ और फिट रहने के लिए सही खान-पान की जरूरत होती है.इन हेल्दी फूड्स में कुछ ऐसे में फूड्स शामिल हैं जिनका सेवन आप सुबह के समय भिगो कर करना चाहिए. ये 5 चीजें आपको पेट की समस्याओं, इम्युनिटी, वजन घटाने और गठिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने में मदद करेंगी.इन 5 को रातभर भिगोकर रखें और सुबह खाएंमेथीरात को मेथी को पानी में भिगो दें और सुबह खा लें. पानी भी पी ले. ऐसा करने से आपको जोड़ों के दर्द से राहत मिलेगी जो कि आजकल महिलाओं में एक आम समस्या है. मेथी का दाना भी पेट के लिए फायदेमंद होता है. ये कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है. ये आंतों को साफ करता है और पाचन में सुधार करता है. मेथी डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत अच्छी होती है. ये मासिक धर्म के दर्द को कम करने में भी मदद करती है.किशमिशआयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर किशमिश आपकी सेहत के लिए बहुत अच्छी होती है. जब आप रात में किशमिश भिगोकर सुबह खाते हैं, तो ये आपकी त्वचा को स्वस्थ और ग्लोइंग बनाती है. बहुत सी महिलाओं को आयरन की कमी का सामना करना पड़ता है और किशमिश खाने से आपको इसे पूरा करने में मदद मिल सकती है.सन बीज1 चम्मच अलसी आपके संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार कर सकती है. इन बीजों को रात को पानी में भिगो दें और सुबह इनका सेवन करें. ये बीज फाइबर, आयरन और प्रोटीन से भरपूर होते हैं जो वजन घटाने के लिए बहुत अच्छे होते हैं. इन बीजों का रोजाना सेवन करने से आपकी इम्युनिटी मजबूत होती है. ये बीज आपको कैंसर और डायबिटीज से भी बचाते हैं.बादामबादाम को रोज सुबह भिगोकर रखने से आपके मस्तिष्क की सेहत में सुधार होता है. बादाम मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं जो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या से निपटने वालों के लिए बहुत अच्छा है. भीगे हुए बादाम वजन घटाने के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं.अंजीरअंजीर विटामिन, मैंगनीज, पोटैशियम, फाइबर और फास्फोरस से भरपूर होता है. अंजीर में एंटीऑक्सीडेंट - फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स भी होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं. 1 अंजीर रात को पानी में भिगो दें और सुबह खा लें.
- सेहतमंद रहने के लिए हमेशा से ही हरी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती रही है। यह शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचाकर स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करती हैं। ऐसी ही एक हरी सब्जी है तुरई। कई लोग इसे खाना पसंद नहीं करते, लेकिन यह पौष्टिता से भरपूर है।1. एंटी-इंफ्लामेटरीएंटी-इंफ्लामेटरी प्रभाव तुरई के सूखे पत्तों के इथेनॉल अर्क में पाया जाता है। इस प्रभाव को एडिमा (शरीर के ऊतकों में तरल जमने की वजह से सूजन) और ग्रेन्युलोमा (इंफ्लामेशन) प्रभावित व्यक्तियों पर जांचा गया। शोध में पाया गया कि इथेनॉल अर्क एडिमा को कम करने में मदद कर सकता है। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि तुरई एंटी-इंफ्लामेटरी की तरह भी कार्य कर सकती है । माना जाता है कि तुरई के अर्क में पाया जाने वाला एंटी-इंफ्लामेटरी प्रभाव इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स जैसे फ्लेवोनोइड्स, टैनिन और टरपेनोइड्स की वजह से होता है।2. सिरदर्द के लिए तुरई के फायदेएक शोध के मुताबिक तुरई के पत्ते और इसके बीज के एथनॉलिक अर्क सिर दर्द को कम करने में सहायक हो सकते हैं। रिसर्च के अनुसार इसमें एनाल्जेसिक और एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं। यह दोनों गुण दर्द को कम करने और राहत दिलाने के लिए जाने जाते हैं।3. एंटी-अल्सरतुरई को पेट के अल्सर यानी ग्रेस्ट्रिक अल्सर को कम करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें मौजूद गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव प्रभाव कुछ हद तक अल्सर के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। यह प्रभाव सूखे तुरई के गूदे के अर्क के मेथोनॉलिक और पानी के अर्क में पाया जाता है।4. डायबिटीज के लिए तुरई के फायदेतुरई को पुराने समय से ही डायबिटीज को नियंत्रित करने वाली सब्जी के रूप में जाना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार तुरई के एथनॉलिक अर्क में ग्लूकोज के स्तर को कम करने वाला हाइपोग्लाइमिक प्रभाव पाया जाता है। इसी प्रभाव की वजह से तुरई को डायबिटीज नियंत्रित करने के लिए लाभकारी माना जाता है।5. पेचिश में तुरई के फायदेपेचिश को रोकने में भी तुरई को लाभदायक माना गया है। साथ ही इसके पत्तों को भी पेचिश के लिए लाभकारी माना जाता है । दरअसल, दस्त का गंभीर रूप पेचिश होने की वजह पैरासाइट और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होती है। वहीं, तुरई में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण ग्राम नेगेटिव बैक्टिरिया को कुछ हद तक पनपने से रोकने में मदद कर सकता है। इ6. पीलिया में तुरई के फायदेपीलिया से बचाव के लिए भी तुरई को इस्तेमाल में लाया जाता है। दरअसल, इसमें हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण पाया जाता है, जो लिवर को क्षति से बचाता है। यही गुण शरीर में बढ़े हुए सिरम बिलीरुबिन को कम करने का काम करता है, जिसके कारण पीलिया होता है।7. दाद में तुरई के फायदेरिंगवॉर्म (दाद) में भी तुरई को लाभदायक माना जाता है। इसकी पत्तियों को पीसकर, दाद प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिलने की बात कही जाती है।8. अस्थमा के लिए तुरई के फायदेअगर किसी व्यक्ति को अस्थमा या सांस संबंधी समस्या है, तो वह तुरई का सेवन कर सकते हैं। इससे उन्हें आराम मिलेगा।
- हृदय रोगियों के लिए एक्यूप्रेशर एक बेहतर चिकित्सा साबित हो सकती है. यदि हार्ट के मरीज हैं तो दोनों पैरों की उंगलियों के बीच वाले प्रेशर प्वाइंट को दबाएं. इससे दिल के रोग का खतरा कम होगा. यदि धड़कन धीमी हो रही हो तो इस पॉइंट से हार्ट रेट बेहतर हो जाएगा.कमर के दर्द और कब्ज की समस्या से परेशान हैं तो पैरों के बीच का हिस्सा दबाएं. यहां मौजूद प्वाइंट आंतों से भी जुड़ा होता है. इससे लोअर बैक पेन के साथ डाइजेशन सिस्टम भी बेहतर होता है और कब्ज में आराम मिलता है.लिवर की समस्या है तो पैर के पंजे के ऊपर की तरफ अंगूठे और उसके पास वाली उंगली के बीच के हिस्से को दबाएं. काफी आराम मिलेगा.इन दिनों सर्वाइकल की समस्या आम है. ऐसे में एक्यूप्रेशर पद्धति लाभदायक हो सकती है. इसके दर्द से राहत पाने के लिए पैर की बड़ी उंगली का पॉइंट दबाएं. इसका कनेक्शन गले से होता है, इसलिए इस पॉइंट को दबाने से काफी आराम मिलता है.
- सर्दियां आ चुकी हैं और बदलते मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है. सर्दियों में अक्सर मौसमी सर्दी, खांसी और फ्लू जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इम्युनिटी का मजबूत होना बेहद जरूरी है. इसके लिए आप कई तरह के हेल्दी डिटॉक्स ड्रिंक्स डाइट में शामिल कर सकते हैं. इन ड्रिंक्स को आप घर पर बना सकते हैं और इनका आनंद ले सकते हैं.हल्दीहल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होते हैं. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-वायरल गुण होते हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं. खासकर सर्दियों में दूध या चाय में एक चुटकी हल्दी मिलाने से जोड़ों के दर्द, शरीर के दर्द और मांसपेशियों की सूजन को ठीक करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्युनिटी में सुधार करने में मदद करते हैं, कोशिका क्षति के उपचार में मदद करते हैं. हल्दी वाली चाय बनाने के लिए, अदरक के साथ उबलते पानी में एक चुटकी हल्दी डालें और थोड़ा शहद मिलाएं. हल्दी वाला दूध बनाने के लिए, दूध को पतला करने के लिए 1/2 कप पानी के साथ 1 कप दूध गरम करें, इसमें एक चुटकी हल्दी, एक चुटकी काली मिर्च डालें या अगर आपको मीठा पसंद है तो आप थोड़ी चीनी मिला सकते हैं. लेकिन, अगर आप वजन कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने और मेटाबॉलिज्म ड्रिंक का सेवन कर रहे हैं तो इसमें चीनी शामिल करने से बचें.सेब, खजूर और चिया स्मूदीअगर आप इम्युनिटी के साथ- साथ मेटाबॉलिज्म को बढ़ाना देना चाहते हैं तो ये सेब की स्मूदी आपके लिए बहुत फायदेमंद है. इस ड्रिंक को बनाने के लिए 1 सेब को क्यूब्स में काट लें, 3 खजूर और 3 बादाम दूध में मिला लें. फिर 2 बड़े चम्मच भीगे हुए चिया सीड्स डालें. ये आयरन, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन से भरपूर पेय आंत के स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक हेल्दी ड्रिंक है.पालक और एवोकैडो स्मूदीइस एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, विटामिन और आयरन से भरपूर स्मूदी को घर पर बनाने के लिए. एक ब्लेंडर लें, इसमें 1 कप धुले हुए पालक के पत्ते और आधा एवोकैडो मिलाएं, इसे अच्छी तरह से ब्लेंड करें और इसमें आधा नींबू का रस, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं. ये पेय न केवल आपको पोषक तत्व प्रदान करेगा बल्कि आयरन और एंटीऑक्सीडेंट की उपस्थिति इम्युनिटी को बढ़ावा देगी और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करेगी.चुकंदर की चायइस चाय को बनाने के लिए अदरक, 1 1/2 कप पानी और 1/2 कप कद्दूकस किया हुआ चुकंदर लें. इस मिश्रण को उबालें और इसमें 2 बड़े चम्मच नींबू का रस, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं. चुकंदर के मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं और काली मिर्च, नींबू का रस और अदरक के साथ न केवल मौसमी एलर्जी, सर्दी, खांसी और बुखार के खिलाफ इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है ब्लकि ये शरीर को स्वस्थ रखता है.आंवला जूसहोममेड आंवला ड्रिंक बनाने के लिए, बस 4-5 अंवला लें, इन्हें छोटे टुकड़ों में काट लें, बीज हटा दें. एक कप पानी के साथ इसे ब्लेंड करें. इसमें 1 चुटकी काली मिर्च, 1 चुटकी सेंधा नमक, 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस मिलाएं. अगर आप इसे थोड़ा मीठा बनाना चाहते हैं तो इसमें शहद मिला सकते हैं. एक साधारण मिश्रण बनाएं और इसे सुबह पीएं.अमीनो एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला का रस शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने में मदद करता है. ये टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है. आंवला मेटाबॉलिजम में सुधार करने में मदद करता है और तेजी से वजन घटाने में मदद करता है.
- किशमिश सबसे लोकप्रिय सूखे मेवे में से एक है. मिठाइयां बनाने के लिए इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. ये ड्राई फ्रूट न केवल स्वाद के लिए जाना जाता है बल्कि ये सेहत के लिए भी फायदेमंद है. आप किशमिश के पानी (Raisin Water) का भी सेवन कर सकते हैं.ये आपको ऊर्जा प्रदान करने का एक अच्छा तरीका है. हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने से लेकर आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने तक किशमिश के पानी के कई स्वास्थ्य लाभ हैं. आइए जानें कैसे बनाएं किशमिश का पानी और इसके स्वास्थ्य लाभ क्या हैं.किशमिश का पानी कैसे बनाएंइसके लिए आपको पानी, किशमिश और नींबू (वैकल्पिक) की जरूरत होगी. 2 कप पानी और 150 ग्राम किशमिश लें. एक पैन में पानी डालकर उबाल लें. किशमिश डालें और रात भर भीगने दें. सुबह इस पानी को छान लें और धीमी आंच पर गर्म करें. इस पानी को सुबह खाली पेट पिएं. अगर आप इसका स्वाद बढ़ाना चाहते हैं तो पानी में नींबू मिलाएं.किशमिश का पानी पीने के फायदेलिवर को डिटॉक्सीफाई करता हैकिशमिश का पानी पीने से आपके शरीर से सभी हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद मिलेगी. ये पेय लिवर की जैव रासायनिक प्रक्रिया में सुधार करता है और आपको खून को साफ करने में मदद करता है. ये आपके लिवर को आसानी से डिटॉक्सीफाई करता है.पेट में एसिड को नियंत्रित करता हैअगर आप एसिडिटी की समस्या से जूझ रहे हैं तो किशमिश का पानी पीना आपके लिए एक बेहतरीन उपाय है. ये पानी आपके पेट में एसिड को नियंत्रित करता है.इम्युनिटी को बढ़ाता हैकिशमिश के पानी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो आपके इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में मदद करते हैं. इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए किशमिश के पानी को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं.हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखता हैकिशमिश का पानी आपके खून को साफ करने का काम करता है और आपके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है. ये आपके शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को खत्म करता है और ये आपके हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है.कैंसर से बचाता हैकिशमिश में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आपके शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में भी मदद करते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं.वजन घटाने में मदद करता हैसुबह किशमिश का पानी पीने से भी आपको वजन घटाने में मदद मिलती है. किशमिश फ्रुक्टोज और ग्लूकोज से भरपूर होती है जो आपको ऊर्जा से भरपूर रखती है. इनमें फाइबर भी होता है जो आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है.
- पिस्ता खाना बहुत से लोगों को पसंद है। खास कर कि कई मीठी चीजें, बिना पिस्ता के गार्निश के अधूरी नजर आती हैं। पिस्ता की खास बात ये है कि ये सबसे ज्यादा हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। राज में नींद नहीं आने की समस्या है तो सोने से पहले पिस्ता खाने की आदत डाल लें। इससे शरीर को अनेक फायदे भी मिलेंगे। आइये जानते हैं रात में पिस्ता खाने के फायदे-1. नींद को बेहतर बनाता हैजिन लोगों को नींद नहीं आती पिस्ता उनके लिए बहुत ही फायदेमंद है। ये मेलाटोनिन को बढ़ावा देता है और आपकी नींद को बेहतर बनाने और गहरी नींद से सोने में मदद करता है। इस तरह ये आपके हार्मोन हेल्थ में भी सुधार लाता है और आपकी दिन भर की थकान को दूर करके आपकी नींद को बेहतर बनाता है।2. तनाव कम करता हैपिस्ता में कुछ ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि तनाव को कम करने में मदद करते हैं। ये ब्रेन को मुक्त कणों के नुकसानों और कुछ सेलुलर क्षति से बचाता है। इससे ब्रेन को कंट्रोल कर पाते हैं और तनाव कम कर पाते हैं। इसके अलावा इसका ओमेगा-3 दिमाग को शांत करने में मददगार है।3. क्रेविंग कंट्रोल करने में मदद करता हैअगर आप रात में सोने से पहले पिस्ता खा लें तो ये क्रेविंग को कंट्रोल करने में मदद करता है। दरअसल, इसमें फाइबर की एक अच्छी मात्रा होती है जो कि पेट भर देता है। दूसरा इसका प्रोटीन दिमाग को संकेत भेजता है कि शरीर में पर्याप्त एनर्जी है और आपको कुछ खाने की जरूर नहीं है। तो, इस तरह ये होर्मोनल और न्यूरल फंक्शन का तालमेल बिठा तक क्रेविंग को रोकने में मदद करता है।4. नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता हैपिस्ता विटामिन बी 6 का एक अच्छा स्रोत है जो माइलिन के निर्माण में मदद करता है जो तंत्रिकाओं के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है। इस प्रकार तंत्रिका तंत्र की रक्षा करता है और इसके कामकाज को बढ़ाता है। विटामिन बी6 की मात्रा अमाइन्स को भी अच्छी तरह से काम करने में मदद करती है, जो शरीर में संदेश देने वाले मोलिक्यूलस होते हैं। पिस्ता का सेवन आंतरिक एसिड के प्रोडक्शन में मदद करता है जो नसों को शांत करने में मदद करता है।5. ब्रेन के फंक्शन को सही रखता हैपिस्ता शरीर में सूजन को कम कर सकता है। दरअसल, पिस्ता में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सेलुलर स्तर पर शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही पिस्ता का ल्यूटिन, बीटा-कैरोटीन और गामा-टोकोफेरोल ऑक्टिसीडेटिव तनाव के कारण होने वाली क्षति से बचाता है। इसके अलावा पिस्ता का पोषक तत्व रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन की आपूर्ति में मदद करते हैं, इस प्रकार व्हाइट ब्लज सेल्स के उत्पादन में मदद करते हैं जो इम्यूनिटी बनाढ़े में मदद करता है। साथ ही इसका विटामिन बी 6 की खून में हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन के उत्पादन को भी बढ़ाता है। जितना अधिक ऑक्सीजन और खून में इसका प्रवाह बेहतर होता है, मस्तिष्क उतना ही बेहतर कार्य करता है और स्वस्थ होता है।
- कलौंजी का तेल स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है। यह मानसिक और शारीरिक परेशानियों को दूर करने में आपकी मदद करता है। शरीर के बढ़ते वजन को कम करने के साथ-साथ पाचन को दुरुस्त करने में कलौंजी के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। कलौंजी के तेल में प्रोटीन, सोडियम, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर जैसे तत्व भरपूर रूप से मौजूद होते हैं। इसके अलावा इसमें कई तरह के विटामिंस मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं।1. डायबिटीज को करें कंट्रोलडायबिटीज रोगियों के लिए कलौंजी का तेल काफी लाभकारी होता है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए ब्लैक टी में कलौंजी का तेल मिक्स करके पिएं। इसके लिए सुबह खाने से पहले और रात में खाने के बाद ब्लैक टी में आधा चम्मच कलौंजी तेल मिलाकर पिएं। इस तरह नियमित रूप से कलौंजी के तेल का सेवन करने डायबिटीज कंट्रोल हो सकती है।2. पाचन को रखे स्वस्थकलौंजी के तेल का सेवन करने से पाचन दुरुस्त हो सकता है। पाचन को दुरुस्त करने के लिए 1 गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच कलौंजी का तेल और काला नमक मिलाएं। इस पानी का सेवन करने से पाचन में सुधार किया जा सकता है। वहीं, पेट से जुड़ी अन्य परेशानी दूर हो सकती है।3. ब्लड प्रेशर को करें कंट्रोलब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में कलौंजी का तेल लाभकारी होता है। इसके लिए 1 कप चाय में आधा चम्मच कलौंजी के तेल को मिक्स करें। इस चाय का सेवन दिन में कम से कम दो बार करें। इससे ब्लड प्रेशर काफी हद तक कंट्रोल हो सकता है।4 वजन को करे कमवजन को घटाने के लिए कलौंजी के तेल का सेवन कर सकते हैं। शरीर में एक्स्ट्रा चर्बी को घटाने के लिए एक गिलास पानी लें। इसमें नींबू के रस और कलौंजी के तेलों की कुछ बूंदें मिक्स करके पिएं। सुबह खाली पेट इस ड्रिंक का सेवन करने से शरीर का वजन कम हो सकता है।5. मानसिक स्वास्थ्य को करें कंट्रोलकलौंजी का तेल मानसिक स्वास्थ्य के लिए असरकारी हो सकता है। दिमाग को दुरुस्त और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए कलौंजी के तेल का सेवन किया जा सकता है। इसके लिए आधा चम्मच कलौंजी के तेल में 10 ग्राम करीब पुदीने के पत्तों का रस मिलाएं। अब इस मिश्रण का नियमित रूप से सेवन करें। इससे आपको कुछ दिन में बेहतर रिजल्ट मिल सकता है।6. आंखों के लिए लाभकारीआंखों के स्वास्थ्य के लिए कलौंजी के तेल का सेवन कर सकते हैं। यह आपके लिए लाभकारी हो सकता है। इसके लिए 1 कप गाजर का जूस लें। अब इसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल और शहद मिक्स करें। नियमित रूप से सुबह और शाम इस मिश्रण का सेवन करने से आंखें हेल्दी हो सकती हैं। बढ़ती उम्र में आंखों की परेशानी होने पर नियमित रूप से इसका सेवन करें।
- खाने में रंगत लानी हो या खाने का स्वाद बढ़ाना हो तो, करी पत्ता बेहद काम आ सकता है। करी पत्ते के अंदर भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, विटामिन सी आदि पोषक वक्त पाए जाते हैं जो सेहत को कई समस्याओं से दूर रख सकता है। वहीं करी पत्ते के लेप से सेहत की कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से शरीर की ये पांच समस्याएं दूर की जा सकती हैं-1 - किसी कीड़े के काटने पर करी पत्ते का इस्तेमालकीड़े-मकौड़े के काटने पर करी पत्ता की जड़ से छाल अलग कर लें। अब उसे पीसकर एक लेप तैयार कर लें। अब प्रभावित स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से ना केवल कीड़े के काटने पर दर्द दूर हो सकता है बल्कि सूजन से भी आराम मिल सकता है।2 - दाद-खाज-खुजली से राहत दिलाए करी पत्तादाद-खाज-खुजली होने पर करी पत्ता के रस में नींबू के रस को मिलाएं और इस लेप को प्रभावित स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से ना केवल खुजली की समस्या दूर हो सकती है बल्कि पित्ती निकलने की समस्या और दाद की समस्या से राहत मिल सकती है।3 - मुंह से संबंधित समस्याओं को करें दूरगलत खानपान के कारण या मुंह से संबंधित कई समस्याओं को दूर करने के लिए करी पत्ता आपके बेहद काम आ सकती है। ऐसे में आप करी पत्ते का काढ़ा तैयार करें और इससे गरारे करें। ऐसा करने से ना केवल छालों की समस्याओं से राहत मिलती है बल्कि मसूड़ों की समस्या से भी राहत मिल सकती है।4 - सिर दर्द हो दूरसिर दर्द को दूर करने में करी पत्ता आपके बेहद काम आ सकता है। ऐसे में आप करी पत्तों के फूलों को पानी के साथ पीस लें और बने लेप को सिर पर लगाएं। ऐसा करने से सिर का दर्द दूर हो सकता है।5 - बाल झडऩे हो जाएं बंदबाल झडऩे की समस्याओं को दूर करने में करी पत्ता आपके बेहद काम आ सकता है। करी पत्ते को पानी के साथ पीसकर उसमें छाछ मिलाएं और बालों की जड़ों पर लगाएं। ऐसा करने से बाल झडऩे की समस्या से दूर हो सकती है। इसके अलावा जो लोग रूसी से परेशान हैं वे भी इस लेप से रूसी की समस्या को दूर कर सकते हैं। इससे अलग बाल झडऩे से रोकने के लिए तिल के तेल में करी पत्ते को पका लें और उससे मालिश करें। ऐसा करने से बाल झडऩे की समस्या को दूर किया जा सकता है।
- हरी मिर्च के बिना स्वादिष्ठ और चटपटा खाना नहीं बन सकता. खास बात ये है कि हरी मिर्च ना सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि ये सेहत के लिए भी फायदेमंद है. हम देखते हैं कि अक्सर लोग हरी मिर्च खाने से परहेज करते हैं, लेकिन आप जानते हैं कि ये कई बीमारियों का उपचार करने में मददगार है. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह वजन घटाने से लेकर ब्लड सर्कूलेशन में तेजी लाने का काम करती है.हरी मिर्च में पाए जाने वाले पोषक तत्वहरी मिर्च में ऐसे कई तत्व पाए जाते हैं, जो एक स्वस्थ शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं. यह विटामिन ए, बी6, सी, आयरन, कॉपर, पोटेशियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती है. यही नहीं इसमें बीटा कैरोटीन, क्रीप्टोक्सान्थिन, लुटेन -जॅक्सन्थिन आदि स्वास्थ्यवर्धक चीजें मौजूद हैं.साइनस और दमे का इलाजहेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ताजी मिर्च का एक चम्मच रस निकाल कर उसे शहद में मिलाकर खाली पेट खाने से दमे के मरीजों को राहत मिलती है. इसके अलावा हरी मिर्च खाने से गर्मी निकलती है, ये दर्द को कम करती है. इसमें कैप्सेइसिन मौजूद होता है, जो नाक में रक्त प्रवाह को आसान बनाता है. इससे सर्दी और सायनस की समस्या में राहत मिलती है. ठंड के मौसम में इसका सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है.हरी मिर्च के जबरदस्त जादुई फायदेब्लड सर्कूलेशन तेज करती हैडाइट एक्सपर्ट डॉक्टर रंजना सिंह कहती हैं कि हरी मिर्च में कैप्सियासिन नामक यौगिक मौजूद होता है, जो इसे तीखा बनाता है. मिर्च खाने से खून साफ होता है और नसों में खून का फ्लो तेजी से होता है, जिससे चेहरे पर पिंपल्स की समस्या से भी छुटाकारा पाया जा सकता है.इम्यूनिटी बूस्ट करती हैकोरोना काल में हरी मिर्च खाने पर जोर दिया जा रहा है. इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए हरी मिर्च का सेवन कर सकते हैं. हरी मिर्च में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर को बैक्टीरिया-फ्री रखने में मदद कर सकता है. हरी मिर्च इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद कर सकती है.मूड ठीक करती हैहरी मिर्च मूड बूस्टर का भी काम करती है। यह मस्तिष्क में एंडोर्फिन का संचार करती है, जिससे हमारा मूड काफी हद तक खुशनुमा रहता है।आंखों के लिए फायदेमंदआंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए हरी मिर्च का सेवन लाभकारी हो सकता है. क्योंकि इसमें विटामिन ए पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद कर सकता है.वजन घटाती हैहरी मिर्च वजन घटाने में मददगार है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स गुण भरपूर मात्रा में होने के अलावा कैलोरी नहीं होती. हरी मिर्च मेटाबॉलिज्म के लिए भी अच्छी मानी जाती है.चेहरे पर निखार लाती हैहरी मिर्च आपके चेहरे पर निखार लाने में मदद करती है. इसमें विटामिन ई और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आपकी स्किन को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है.-
- बदलते मौसम में अक्सर लोग बीमार पड़ने लगते हैं. सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं घेरने लगती हैं. सबसे ज्यादा समस्या उन लोगों को होती है, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है. ऐसे में शलजम को काफी उपयोगी माना जाता है. शलजम को लोग सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं. लेकिन आयुर्वेद में इसे औषधि माना गया है. शलजम में एंटीऑक्सिडेंट्स, मिनरल्स, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम आदि तमाम पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसे वात, पित्त और कफ के विकारों को दूर करने वाला माना जाता है. जानिए इसके अन्य फायदों के बारे में.मौसमी संक्रमण में उपयोगीशलजम में एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं. ये किसी भी तरह के मौसमी संक्रमण से बचाने में मददगार है. सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसी समस्याओं को ये कुछ ही समय में दूर करने की क्षमता रखती है.पुरानी खांसी और सांस की समस्या दूर करेअगर आपको पुरानी खांसी है या बार बार खांसी की समस्या हो जाती है तो शलजम को काटकर, भूनकर और नमक डालकर खाएं. इससे काफी आराम मिलता है. शलजम का तेल को छाती पर लगाने से सांस नली में आई सूजन कम होती है.भूख न लगने परअगर आपको भूख नहीं लगती तो शलजम का सेवन अदरक के साथ करें. इससे आपका भोजन अच्छे से पचता है और भूख न लगने की समस्या दूर होती है. शलजम के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से अपच, गैस, कब्ज और बवासीर जैसी समस्या दूर होती है.शरीर को डिटॉक्स करने में मददगारअगर आपको शरीर को स्वस्थ रखना है तो समय समय पर शरीर को डिटॉक्स करना बहुत जरूरी है. इसके लिए सुबह खाली पेट शलजम का जूस निकालकर पीएं. इससे आपका शरीर भी डिटॉक्स होगा और आपको हल्का महसूस होगा.वजन घटाती शलजममोटापे को तमाम बीमारियों की जड़ माना जाता है. अगर आपका भी वजन बहुत ज्यादा है और आप वजन घटाना चाहते हैं, तो आप शलजम को अपना वेट लॉस पार्टनर बना सकते हैं. ये आपके शरीर में एक्सट्रा कैलोरी को बर्न करता है और चर्बी को बढ़ने से रोकता है.हड्डियों को करे मजबूतअगर आपकी हड्डियों से जुड़ी तकलीफ है, तो आपको शलजम को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. शलजम में काफी मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने का काम करता है. आर्थराइटिस और अन्य सूजन संबंधी परेशानियों में शलजम काफी उपयोगी है.--
- डायबिटीज के मरीजों के लिए हल्दी का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, हल्दी (Turmeric Benefits) औषधीय गुणों से भरपूर होती है. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. हल्दी में भरपूर मात्रा में करक्यूमिन होता है. डायबिटीज में हल्दी के सेवन से ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद मिलती है.हल्दी और काली मिर्चडायबिटीज के मरीज हल्दी के साथ काली मिर्च का सेवन भी कर सकते हैं. इसे दूध में मिलाकर पिएं. काली मिर्च में पिपेरिन नामक तत्व होता है, जो खून की नली को स्वस्थ रखने में मदद करता है. ये ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है.हल्दी और अदरकडायबिटीज के मरीज अदरक और हल्दी का सेवन दूध में मिलाकर या फिर चाय या काढ़े के रूप में कर सकते हैं. इससे ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.हल्दी और आंवलाहल्दी के साथ आंवले का सेवन भी डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है. आंवले में विटामिन सी और क्रोमियम की अच्छी मात्रा होती है. ये कोलेस्ट्रॉल लेवल और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है. आंवला पाउडर और हल्दी पाउडर को मिक्स करके पानी के साथ इसका सेवन करें.हल्दी और दालचीनीएक ग्लास दूध में हल्दी और दालचीनी का पाउडर मिलाकर पिएं. इसे आप ब्रेकफास्ट के साथ ले सकते हैं. ये दोनों चीजें ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती हैं. दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेट्री गुण होते हैं. टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को इसका फायदा मिलता है.
- हरी मिर्च और लाल मिर्च दोनों दिखने में एक जैसी होती हैं लेकिन दोनों के अलग-अलग स्वाद हैं और अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ भी हैं. हरे रंग की मिर्च जब पुरानी होने लगती है या फिर सूख जाती है तो वो लाल हो जाती है और अधिक तीखी हो जाती है. ऐसे में जानना जरूरी है कि दोनों मिर्च में से हमारे शरीर के लिए कौन सी अधिक फायदेमंद है.लाल मिर्च या हरी मिर्च में अंतरलाल मिर्च पाउडर की तुलना में हरी मिर्च निश्चित रूप से ज्यादा हेल्दी होती है. हरी मिर्च में पानी की मात्रा अधिक होती है और कैलोरी शून्य होती है. ये उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी है जो अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं. हरी मिर्च बीटा-कैरोटीन, एंटीऑक्सिडेंट और एंडोर्फिन का एक समृद्ध स्रोत है, जबकि लाल मिर्च का अधिक सेवन करने से आंतरिक सूजन हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप पेप्टिक अल्सर हो सकता है. वहीं बाजार में मौजूद लाल मिर्च पाउडर में आर्टिफिशियल कलर और सिंथेटिक कलर्स का इस्तेमाल होने की संभावना बहुत अधिक है.हरी मिर्च के फायदे- हरी मिर्च का नियमित रूप से सेवन करने से इंसुलिन लेवल को कंट्रोल करके हाई ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करने में मदद मिलती है.- फाइबर से भरपूर, हरी मिर्च बेहतर पाचन में मदद करती है.- हरी मिर्च विटामिन ई और विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है जो स्वस्थ त्वचा के लिए बहुत अच्छी है.- बीटा-कैरोटीन होने के कारण हरी मिर्च कार्डियोवस्कुालर सिस्टटम (cardiovascular system) के कार्य को ठीक से बनाए रखने में मदद करती है और इम्यूनिटी (immunity)को बढ़ाने में भी मदद करती है.- हरी मिर्च कैलोरी बर्न करने और मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करती है, इसलिए वजन घटाने में मदद करती है.लाल मिर्च के फायदे- लाल मिर्च में हाई पोटेशियम होने के कारण ये रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करती है.- लाल मिर्च में कैप्साइसिन नामक यौगिक शरीर में मेटाबॉलिज्म दर को बढ़ाता है जो सीधे कैलोरी बर्न करता है.- लाल मिर्च विटामिन सी से भरपूर होती है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को सपोर्ट करने और पुरानी बीमारियों से लड़ने में मदद करती है.- लाल मिर्च में बहुत शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो रक्त वाहिकाओं और धमनियों की रुकावटों को दूर करने में मदद करते हैं.लाल मिर्च या हरी मिर्च कौन सी है बेहतरनिश्चित रूप से साबूत सूखी लाल मिर्च, लाल मिर्च पाउडर की तुलना में अधिक फायदेमंद होती है क्योंकि वो मूल रूप से सूखी, पकी हुई हरी मिर्च ही हैं. लाल सूखी मिर्च का उपयोग खाने में तीखेपन के लिए और स्वाद के लिए अधिक किया जाता है. लाल मिर्च पाउडर की तुलना में लाल मिर्च का उपयोग करना सुरक्षित है. लेकिन हरी मिर्च खाना अधिक फायदेमंद है क्योंकि ये ताजी होती है और ये ज्यादा फायदा पहुंचाती है.
- विटामिन ए और सी के एक समृद्ध स्रोत के रूप में, पपीता शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालकर इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद कर सकता है. यह बीमारियों और संक्रमणों को दूर रखने में भी मदद करता है. पपीता में पाए जाने वाले पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें विटामिन ए, बी, डी और कैल्शियम, लोह, प्रोटीन आदि तत्त्व विपुल मात्रा में होते हैं, इसके नियमित सेवन से त्वचा के रोग दूर होते हैं.पपीता खाने के जबरदस्त फायदेस्किन के लिए लाभकारीपपीता सेहत के साथ स्किन के लिए भी लाभकारी होता है. इसका उपयोग मुंहासे के इलाज के लिए किया जा सकता है. आपको बस इतना करना है कि शरीर के प्रभावित क्षेत्र पर पपीते की त्वचा का मांसल हिस्सा लगाएं. फल खाने से त्वचा भी साफ होगी. आप पपीते से लेटेक्स भी प्राप्त कर सकते हैं और निशान कम करने के लिए इसे जले हुए क्षेत्र पर लगा सकते हैं.कब्ज का इलाजपपीते का सेवन डाइजेशन में मदद करता है. इससे आपका पेट साफ करता है. इस फल में विटामिन सी, फोलेट और विटामिन ई होता है, जो पेट में टॉनिक बनाता है और गति बीमारी को कम करता है.कोलेस्ट्रॉल कम करन में मददगारपपीते में उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. साथ ही ये विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होता है. अपने इन्हीं गुणों के चलते ये कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी असरदार है.इंफेक्शन से बचाव करता हैहेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पपीता कई फंगल इंफेक्शन्स से लड़ने में भी मददगार माना जाता है और आंतों के कीड़ों को मारने के लिए भी जाना जाता है, जो कई संक्रमणों और जटिलताओं का कारण बनता है.गठिया की बीमारी में लाभकारीपपीता गठिया की बीमारी के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहिए. इसे खाने से गठिया की बीमारी से छुटकारा मिल सकता है. क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी एंजाइम अच्छी मात्रा में पायी जाती है, जो गाठ के चलते होने वाले दर्द में अपना खास असर दिखाती है.इस तरह करें पपीता का सेवनडाइट एक्सपर्ट कहती हैं कि वैसे तो पपीता पका हुआ होना चाहिए, अगर कच्चा भी है तो इसे डेसर्ट, सलाद और स्मूदी में इसका सेवन किया जा सकता है.इन लोगों को नहीं खाना चाहिए पपीता?1. पपीते में लेटेक्स होता है, जो यह गर्भाशय के संकुचन का कारण हो सकता है, यही वजह है कि गर्भवती महिलाओं को इस फल से बचने की सलाह दी जाती है.2. पपीते का सेवन ब्लड प्रेशर के शिकार लोगों के लिए नुकसानदायक साबित होता है. इसलिए जो लोग ब्लड प्रेशर की दवाई ले रहे हैं, उन्हें पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए.3. दस्त से परेशान लोगों को पपीता का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए.-











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