- Home
- सेहत
- सावन महीने में अधिकांश लोगों का व्रत होगा. ऐसे में सबके मन में यह सवाल होता है कि सावन सोमवार के व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं. सावन के व्रत में कुछ लोग नमक नहीं खाते हैं तो कुछ लोग सेंधा नमक का प्रयोग करते हुए व्रत करते हैं. वहीं कुछ लोग फलाहार करते हैं तो कुछ लोग सिर्फ एक वक्त खाते हैं. शास्त्रों में कुछ सब्जियों को शुद्ध सात्विक माना जाता है. आप इन्हें व्रत में खा सकते हैं. इससे आपका पाचन भी ठीक रहेगा और इनसे आपका पेट भी भरा रहेगा.सावन सोमवार व्रत में दिन की शुरूआत कैसे करेंअगर आपने भी सावन सोमवार का व्रत रखा है तो सबसे पहले सुबह स्नान करके शिवजी को जल चढ़ाएं और उसके बाद पूजापाठ करके स्वयं जल ग्रहण करें.पानी के साथ आप थोड़ा सा गुड़ या थोड़ी सी मिश्री ले सकते हैं. व्रत में नींबू की शिकंजी और नारियल पानी के साथ भी दिन की शुरुआत कर सकते हैंसावन सोमवार व्रत में सुबह क्या खाएंसुबह जल ग्रहण करने के बाद आप एक कप चाय के साथ मूंगफली या मखाने भूनकर खा सकते हैं. इनको खाने से आपको भूख भी नहीं लगेगी. आप चाहें तो स्नैक्स के तौर पर थोड़े से ड्राईफ्रूट्स भी ले सकते हैं. चाय से आपकी थकान दूर हो जाएगी और आपको सूखी मेवा से आपको शरीर को चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहेगी.दोपहर में क्या खाएंआप आलू उबालकर उन्हें जरा से घी में फ्राई करके खा सकते हैं.आप चाहें तो सब्जियों में लौकी, कद्दू या फिर अरबी भी खा सकते हैं.आप कुट्टू के आटे या फिर सिंघाड़े के आटे की पूरियां खा सकते हैं.सावन सोमवार व्रत में ये फल खा सकते हैंव्रत रखकर फल खाना बहुत जरूरी माना जाता है. माना जाता है कि व्रत में फल खाने से फाइबर खूब मिलता है और इस वजह से आपका पेट नहीं खराब होता. व्रत में आप केला, सेब, संतरा और अनार खा सकते हैं. इससे आपके शरीर में पानी की भी भरपूर मात्रा बनी रहती है.चायअक्सर लोग व्रत में खाली पेट चाय का सेवन करते रहते हैं. ऐसा करने से बचें, क्योंकि खाली पेट चाय पीने से गैस की समस्या हो सकती है.खाली पेट रहने की न करें गलतीव्रत में खाली पेट रहने से गैसे की समस्या के साथ पेट दर्द, सिरदर्द, उल्टी और थकान महसूस हो सकती है. इससे बचने के लिए थोड़े-थोड़े समय पर कुछ न कुछ खाते रहें.फ्राइड चीजों से करें परहेजव्रत के दौरान तली- भूनी चीजें खाने से परहेज करें. ऐसा करने से व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर होकर पेट दर्द, गैस और अपच का कारण बन सकता है.इन बातों का रखें ध्यानव्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए. प्रतिदिन 6-8 गिलास पानी जरूर पिएं.डायट में ऐसे फल शामिल करें, जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो जैसे- अंगूर, लीची, संतरा, मौसमी आदि.पेट खाली रहने से एसिडिटी बढ़ सकती है, लिहाजा थोड़े-थोड़े अंतराल पर कुछ न कुछ फलाहार करते रहें.ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं, इससे जरूरी एनर्जी मिलेगी और कमजोरी नहीं महसूस होगी.
-
मौसम बदलने के साथ ही लोगों को तरह-तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। ज्यादातर लोगों को सर्दी-जुकाम, बुखार और एलर्जी की समस्याएं हो जाती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनमें इस तरह की दिक्कतें होने का खतरा अधिक होता है। मौसम में बदलाव के साथ एलर्जी की समस्या होना भी काफी सामान्य माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को अक्सर ऐसी दिक्कतें हो जाती हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
एलर्जी एक तरह की प्रतिक्रिया होती है जो भोजन, दवाइयों, कपड़े या फिर धूल आदि के कारण हो सकती है। सामान्य तौर पर एलर्जी के कारण त्वचा पर दाने निकलने, खुजली होने, आंखों में जलन, सिरदर्द और छींक आने जैसी समस्या हो सकती है। मानसून का मौसम में चूंकि वातावरण में आद्रता बढ़ जाती है, ऐसे में लोगों को एलर्जी की समस्या होना भी इस मौसम में काफी आम हो जाता है। डॉक्टरों का मानें तो जीवनशैली में कुछ प्रकार के बदलाव करने तथा आहार में कुछ चीजों को शामिल करके आप मौसम के साथ होने वाली एलर्जी की दिक्कतों से आसानी से बचे रह सकते हैं।
गर्म पानी पीने से मिलता है लाभ
कोरोना के दौर में लोगों ने नियमित रूप से गर्म पानी का सेवन करना शुरू कर दिया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म पानी का सेवन करने से श्वसन तंत्र साफ रहता है जिससे सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं के होने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा दिनभर बाहर रहने के दौरान त्वचा पर धूल-मिट्टी और एलर्जी पैदा करने वाले कारक जमा हो सकते हैं। ऐसे में घर जाकर हल्के गुनगुने पानी से नहाने से एलर्जी बढ़ने की आशंका कम हो जाती है। बेहतर लाभ के लिए नियमित रूप से सुबह गर्म पानी का सेवन सभी लोगों को अवश्य करना चाहिए।
लहसुन से मिलता है लाभ
पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक आहार में हमें उन चीजों को शामिल करना चाहिए जो एंटी-एलर्जिक गुणों से युक्त हों। लहसुन को कई तरह के फायदों के लिए वर्षों से उपयोग में लाया जाता रहा है। इसमें मौजूद एंटीबायोटिक गुण इसे खास बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सेवन हमें एलर्जी से सुरक्षा दे सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो रोजाना खाली पेट दो से चार कलियों का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। लहसुन पेट को ठीक रखने में भी काफी सहायक माना जाता है।
नमक पानी के करें गरारे
ऊपरी श्वसन तंत्र में एलर्जी का प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। साल 2008 में हुए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि नाक को सलाइन से साफ करने से ऊपरी श्वसन तंत्र में होने वाली एलर्जी से छुटकारा पाया जा सकता है। गुनगुने पानी में नमक मिलाकर उससे गरारे करने से भी एलर्जी के लक्षणों में राहत मिलती है। नमक पानी के गरारे करने से ऊपरी श्वसन तंत्र पूरी तरह से साफ भी हो जाता है।
हल्दी के हैं अनेकों फायदे
हल्दी में प्रभावी तौर पर एंटीऑक्सिडेंट के साथ एंटीएंफ्लामेटरी गुण पाए जाते हैं जो एलर्जी जनित लक्षणों को ठीक करने में सहायक हो सकते हैं। हल्दी को शहद के साथ मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है। खासतौर पर बदलते मौसम में इसका सेवन और भी आवश्यक हो जाता है। दूध में भी हल्दी को मिलाकर पीने से लाभ मिलता है। अध्ययनों में साबित हो चुका है कि भोजन में हल्दी का उपयोग करने वाले लोगों को एलर्जी का खतरा काफी कम होता है।
- - लौंग का आयुर्वेद में अपना महत्व है. मसाले के रूप में इसका उपयोग किया जाता है. इससे सेहत के लिए जबरदस्त लाभ मिलते हैं. लौंग हमें कई तरह की बीमारियों से भी बचाती है. खासकर पुरुषों के लिए लौंग का सेवन चमत्कारिक फायदे दे सकता है. इसके नियमित सेवन से आप स्टैमिना भी बढ़ा सकते हैं. लौंग में पाए जाने वाले तत्वों की बात करें तो इसमें विटमिन-B1,B2,B4,B6,B9 और विटमिन-सी तथा बीटा कैरोटीन जैसे तत्व शामिल हैं. इसके साथ ही विटमिन-K, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट भी हमें लौंग से मिलता है.रोज 3 लौंग का करें सेवन --शोध में किए गए दावे के अनुसार, आप खाली पेट 3 लौंग का सेवन कर सकते हैं. रात को सोने से पहले भी लौंग को खाया जा सकता है.पुरुषों के लिए फायदेमंद है लौंग ---डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार, जिन पुरुषों को यौन संबंधित कोई समस्या है, उन्हें लौंग का सेवन जरूर करना चाहिए. लौंग कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और जिंक जैसे खनिज से भरपूर होता है. यह सभी सेहत के लिए जरूरी तत्व माने जाते हैं. हेल्थ विशेषज्ञों का भी मानना है कि लौंग पौरुष शक्ति और स्टैमिना को बढ़ाती है.लौंग के अन्य फायदे ---लौंग फाइबर से भरा होता है, जो आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है.डायबिटीज मरीजों के लिए लौंग खाना चाहिए. इससे फायदा मिलता है.लौंग पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाती है, जो पाचन संबंधी विकारों को रोकती है.लौंग शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है.लौंग का सेवन हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में मदद करता है.इस बात का ध्यान रखनाज जरूरी----डॉक्टर अबरार मुल्तानी सलाह देते हैं कि अधिक मात्रा में लौंग का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि अगर आप ज्यादा मात्रा में लौंग खाते हैं तो मेल हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन गड़बड़ा सकता है, इसलिए लौंग और इससे जुड़े प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल किसी आर्युवेदाचार्य की देखरेख में ही करना चाहिए.
- हमारे शरीर के लिए अच्छा खानपान बेहद जरूरी है। अगर हमें स्वस्थ रहना है, बीमारियों से कोसों दूर रहना है तो हमें अच्छी डाइट लेनी चाहिए। वहीं, जिस तरह हमारे शरीर के लिए खानपान जरूरी है, ठीक वैसे ही हमारे लिए पानी भी बेहद जरूरी है। पानी पीने से ये हमारे शरीर को हाइड्रेट रखता है, और साथ ही विषैले तत्वों को बाहर भी निकालता है। हर दिन हमें काफी अच्छी मात्रा में यानी कम से कम 8 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। अमूमन देखा जाता है कि लोग कुछ भी खाने के बाद ऊपर से पानी पी लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे गलत माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार खाने की कई ऐसी चीजें हैं, जिनके सेवन के तुरंत बाद हमें पानी पीने से बचना चाहिए। तो चलिए आपको कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में बताते हैं।चनाआपने अगर अभी चने या फिर चने की चाट जैसी चीज खाई है, तो आपको तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए। चने को पचाने के लिए शक्ति लगती है, लेकिन जब हम पानी पी लेते हैं तो ये ठीक से पच नहीं पाते हैं। ऐसे में पाचन क्रिया में फर्क पड़ना और पेट दर्द जैसी दिक्कतें होती हैं।फलफल हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायेदमंद होते हैं। ये हमारे शरीर को कई लाभ देते हैं। लेकिन हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी फल के सेवन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि फलों में पहले से लगभग 90 फीसदी तक पानी होता है। ऐसे में अगर हम फिर पानी पीते हैं, तो इससे पेट गड़बड़ना, खांसी, गले मे खराश जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके लिए आपको कम से कम एक घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए।आइसक्रीमलोगों को आइसक्रीम खाना काफी पसंद होता है। लेकिन अमूमन देखा जाता है कि लोग इसे खाने के बाद तुरंत पानी पी लेते हैं। लेकिन यहां समझने वाली ये बात है कि ठंडी आइसक्रीम के ऊपर से पानी पीने से ठंडा गर्म होता है, जिसके कारण आपकी तबियत बिगड़ सकती है। गैस, एसिडिटी, खांसी-जुकाम जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।मूंगफलीसर्दियों के दिनों में लोग मूंगफली का काफी सेवन करते हैं। लेकिन अगर आप मूंगफली खाने के तुरंत बाद पानी पीते हैं, तो आपको कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। मूंगफली के ऊपर जब पानी पीते हैं, तो इससे गले में खराश व खुजली और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए मूंगफली खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बचें।
- मॉनसून में शहद का सेवन सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है. शहद एक ऐसी चीज है, जो लगभग हर घर में आसानी के साथ मिल जाती है. शहद सुपरफूड तो कहलाता ही है साथ ही इसको आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी जाना जाता है. शहद एक ऐसा स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ है, जिसे हम कई प्रकार से अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं. कई लोग इसे दूध के साथ मिलाकर पीते हैं तो कई लोग किसी व्यंजन को बनाने में इसका इस्तेमाल करते हैं.शहद स्वाद से भरा होने के साथ-साथ या पौष्टिक तत्वों से भरपूर भी होता है. जाने माने आयुर्वेद डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार, शहद वजन घटाने से लेकर चेहरे की चमक बरकरार रखने में कारगर है. सुबह के वक्त सेवन करने पर यह आपको दिनभर के लिए ऊर्जा देता है. इसके अलावा सेहत के लिए इससे जबरदस्त लाभ मिलते हैं.शहद में पाए जाने वाले पोषक तत्वशहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. साथ ही इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन ए, बी, सी, ज़िंक, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम और सोडियम जैसे कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जो सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं.शहद का सेवन करने से लाभशहद खाने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं.शहद का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है.शहद खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है.कब्ज़ की दिक्कत से आराम मिलता है.गले की खराश दूर करने में मदद करता है.थकान और कमज़ोरी को दूर करने में सहायता करता है.अनिद्रा की दिक्कत को दूर करने में मदद करता है.खांसी-ज़ुकाम की दिक्कत दूर करता है.पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है.यह थकान को दूर करता है.कैसे करें शहद का सेवन ?आयुर्वेद डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार, आप रोज सुबह गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं. इसके अलावा दो चम्मच शहद में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं. गुनगुने दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर रोज़ाना इसका सेवन करने से आप दिनभर एनर्जेटिक रहते हैं. वजन कम करने के लिए हल्के गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर शहद का सेवन कर सकते हैं.
- आमतौर पर सभी घरों में साधारण नमक का इस्तेमाल होता है, काले नमक का इस्तेमाल बहुत कम लोग करते हैं, लेकिन क्या आप काले नमक के फायदों के बारे में जानते हैं? अगर नहीं जानते तो खबर आपके काम आ सकती है, काला नमक हमें कई गंभीर बीमारियों से निजात दिला सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो काले नमक के सेवन से उल्टी एसिडीटी या कब्ज जैसी समस्याएं आसानी से दूर हो जाती है.क्या कहते हैं आयुर्वेद डॉक्टरजाने माने आयुर्वेद डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार, काला नमक एसिडीटी को खत्म कर देता है. इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, डिप्रेशन और पेट से जुड़ी कई दिक्कतों को दूर करने में काला नमक कारगर माना जाता है. अगर काले नमक को हर रोज सुबह के वक्त गर्म पानी में मिलाकर पीने से शरीर स्वस्थ रहता है.काले नमक का सेवन करने के फायदे00काला नमक वजन घटाने में मददगार है. इसमें मौजूद खनिज एंटीबैक्टीरियल का काम भी करते हें. इसकी वजह से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं.00काला नमक में सोडियम अधिक होता है और इसका अधिक सेवन करने से शरीर में अधिक क्रिस्टल बनने लगता है, जिससे पथरी की समस्या हो सकती है. इसलिए काले नमक का सेवन लिमिट में करें.00काला नमक पाचन को दुरुस्त करके शरीर की कोशिकाओं तक पोषण पहुंचाता है, जिससे मोटापा कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है.00 काला नमक कई तरह के पोषक तत्वों और मिनरल्स से भरपूर होता है. अगर नियमित रूप से इसका सेवन किया जाए तो शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं.00 शुगर के मरीजों को सफेद नमक की जगह काले नमक का अधिक सेवन करना चाहिए. काला नमक शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा नियंत्रित रखने का काम करता है और वे अधिक हेल्दी महसूस करेंगे.
- लगातार वजन बढऩा किसी समस्या को न्योता देने से कम नहीं है। अगर आपका भी वजन बढ़ रहा है तो आपको सबसे पहले अपने खान-पान और व्यायाम करने पर ध्यान देना चाहिए। अगर आप वजन घटाने के लिए तमाम नुस्खों का प्रयोग कर चुके हैं और फिर भी वजन कम नहीं हो रहा है तो इस लेख के माध्यम से हम आपको वजन घटाने के एक कारगर उपाय के बारे में बताएंगे। जी हां, वजन कम करने के लिए मेथी की चाय पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है।1. वजन कम करने में मददगारवजन कम करने के लिए मेथी की चाय पीना एक कारगर विकल्प साबित होता है। मेथी की चाय में मुख्य रूप से डायटरी फाइबर, विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं, जो शरीर में जमे हुए एक्सट्रा फैट को निकालने में काफी मददगार होता है।2. पाचन तंत्र में करे सुधारमेथी का इस्तेमाल कब्ज के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। मेथी की चाय में डायजेस्टिव प्रॉपर्टीज पाई जाती हैं, जो कब्ज और पेट संबंधी अन्य समस्याओं से निपटने में काफी कारगर साबित होती है। इसकी डायजेस्टिव प्रॉपर्टीज पाचन तंत्र को सक्रिय रखने के साथ ही उसे सुचारू रूप से काम करने में सक्षम भी बनाती है।3. कोलेस्ट्रॉल कम करेजिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल हाई है उन्हें तो खासतौर पर मेथी की चाय का सेवन करना चाहिए। एक शोध के अनुसार मेथी के दानों में काफी मात्रा में सॉल्यूबल फाइबर की मात्रा पाई जाती है, जो शरीर से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में काफी सहायक माना जाता है। साथ ही यह एक लो सोडियम ड्रिंक है, जो कोलेस्ट्रॉल घटाने में मददगार होती है। इसमें स्टीरॉइडल सेपोनिन्स पाए जाते हैं, जो आंत में कोलेस्ट्रॉल का अवशोषण नहीं होने देते हैं।4. ब्लड प्रेशर कम करने में मददगारजहां मेथी का पानी ब्लड प्रेशर कम करने में मददगार होता है वहीं इसकी चाय भी हाई ब्लड प्रेशर को आसानी से कम कर सकती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स आपके हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार होते हैं।5. डायबिटीज में फायदेमंदडायबिटीज के मरीजों में अक्सर खान-पान को लेकर असमंजस रहता है। लेकिन डायबिटीज के मरीज मेथी की चाय बिना किसी संकोच के पी सकते हैं। इसमें ट्रिगोनेला फोएनम ग्राइकम नामक तत्व पाया जाता है, जो मुख्य रूप से ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।मेथी की चाय बनाने की विधिमेथी की चाय बनाना काफी आसान है।-इसके लिए सबसे पहले पानी को गर्म करें। अब इसमे मेथी पत्ता या फिर मेथी का पाउडर मिलाएं। आप चाहें तो इसमें पुदीने के पत्ते भी मिला सकते हैं।-इस पानी को 5 मिनट तक उबालें। अच्छे से पक जाने के बाद इस पानी को उतारें और इसे छान लें।-आप चाहें तो इसमें उपर से नींबू की भी मात्रा मिला सकते हैं।-लीजिए आपकी वेट लॉस करने वाली चाय बनकर तैयार है।
- हमारे देश में शुभ अवसर पर मीठा खिलाने की परंपरा पुरानी है. मीठा खाना सीमित मात्रा में सही है, लेकिन कभी-कभी अत्यधिक शुगर हमारी सेहत के लिए हानिकारक भी होती है. चीनी से बनी मिठाई हर किसी को पसंद है और इसके टेस्ट के आगे अब लोगों ने पाररंपरिक देसी खांड का सेवन करना भी बंद कर दिया है. देसी खांड को गुड़िया शक्कर भी कहा जाता है. बहुत कम लोगों को ये जानकारी है कि देसी खांड चीनी से कहीं ज्यादा लाभकारी है.क्या है देसी खांडदेसी खांड भी गन्ने के रस से ही बनती है, जिससे शक्कर बनी होती है. शक्कर अत्यधिक रिफाइन की जाती है, जिससे उसके अंदर मौजूद फाइबर और पोषण खत्म हो जाते हैं, जबकि खांड गन्ने के रस का कम रिफाइंड रूप है. खास बात ये है कि देसी खांड में कोई भी केमिकल इस्तेमाल नहीं किये जाते हैं, जो इसे चीनी से बेहतर विकल्प बनाता है.कैसे तैयार होता है देसी खांड/गुड़िया शक्करपुराने समय से ही लोग इसे खांड या गुड़िया शक्कर के नाम से जानते हैं. चीनी आ जाने के बाद इसका इस्तेमाल बंद कर दिया हैय गन्ने के रस को गर्म करके पलटे सहायता से घुमाया जाता है. इसे पानी और दूध से साफ किया जाता है. इस तरह खांड भूरे रंग के पाउडर के रूप में तैयार हो जाता है.क्या कहती हैं डाइट एक्सपर्टडाइट एक्सपर्ट डॉक्टर रंजना सिंह कहती हैं कि देसी खांड शरीर को ठंडक प्रदान करने का काम करती है. साथ ही खांड में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं, जो इसे सेहत का भंडार बनाते हैं. इसके सेवन से आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं.देसी खांड के फायदेखांड में फाइबर भी होता है, जो कि पेट की सफाई के साथ-साथ हेल्दी गट बैक्टीरिया को बनाये रखने में मददगार है. खांड में मौजूद आयरन खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा के लिए जरूरी है.देसी खांड न सिर्फ आपको डायबिटीज, जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस जैसी समस्याओं से बचाता है बल्कि ये वजन घटाने में भी कारगर है.देसी खांड कैल्शियम से भरपूर होता है. हड्डियों और दांतों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम आवश्यक है. ये जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस जैसी समस्याओं को दूर रखता है.बेहतर पाचन के लिए भी खांड बेहद फायदेमंद होती है. इसकी वजह यह है कि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है. इसलिए अगर आप भी पेट संबंधी समस्याओं से दो चार हैं तो खांड बेहतर पाचन में मददगार हो सकती है.खांड को खाने का तरीकालोग इसे भोजन में घी के साथ खाते हैं. रोटी के ऊपर खांड और घी को मिलाकर खा सकते हैं. मीठे के शौक़ीन चीनी की जगह खांड का उपयोग डेढ़ गुना तक कर सकते हैं.
- हेल्दी डाइट और लगातार स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने से आंखें कमजोर होने लगती हैं। लिहाजा नजर का पॉवर बढ़ाने के लिए चश्मे का इस्तेमाल करना पड़ता है। अगर आप चश्मा नहीं लगाना चाहते हैं और आंखों की रोशनी को तेज करना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम आ सकती है। इसमें हम आपको तीन ऐसी चीजों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो आंखों का खास ख्याल रखते हैं औऱ रोशनी बढ़ाते हैं।अपनी डाइट में कुछ खास होममेड जूस को शामिल करके आप अपने आंखों को कमजोर होने से बचा सकते हैं। खबर में बताए जा रहे 3 प्रकार के ये होममेड जूस न सिर्फ आपके स्वास्थ्य के लिए लिए अच्छे हैं, बल्कि ये आपकी आंखों की रोशनी को भी तेज करेंगे।गाजर का जूसआंखों के लिए गाजर का जूस बेहद लाभकारी है, क्योंकि आंखों की रोशनी के लिए विटामिन ए बहुत जरूरी होता है। गाजर में विटामिन ए अधिक मात्रा में होता है, जो आंखों के रेटिनल हेल्थ को इंप्रूव करने में मदद करता है। अगर आप गाजर के जूस में टमाटर को भी मिलाकर कर पी सकते हैं। इस जूस को आप नाश्ते के वक्त भी पी सकते हैं। इस जूस को नियमित पीने से आंखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या धीरे-धीरे कम हो जाएगी।पालक का जूसअगर आप आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो पालक बेहतर विकल्प है। डाइट एक्सपर्ट डॉक्टर रंजना सिंह के अनुसार, आंखों की सेहत के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां लाभदायक होती हैं, खासकर पालक। पालक की सब्जी सेहत के लिए जितनी हेल्दी होती है, उतना ही हेल्दी पालक का जूस भी होता है। अगर आप हर रोज एक गिलास पालक का जूस पिएंगे तो इससे आपकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे बढ़ जाएगी। पालक में विटामिन ए के अलावा विटामिन सी, विटामिन के, मैग्नीशियम, मैगनीज और आयरन पर्याप्त मात्रा में होता है। आप इसे खाली पेट पी सकते हैं।आंवले का जूसआंखों की रोशनी बढ़ाने में आंवले का जूस भी मददगार साबित हो सकता है। इसमें विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है जो आंखों की रोशनी को बढ़ाने का काम करता है। वैसे तो आप आंवले का इस्तेमाल आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए किसी भी रूप में कर सकते हैं। फिर चाहे वह कच्चा आंवला हो या फिर जूस के रूप में।
-
बढ़ती उम्र में आजकल ज्यादातर लोगों को घुटनों और जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है। इससे मुक्ति पाने के लिए लोग कई बार पेन किलर से लेकर कई आयुर्वेदिक उपचार ट्राई कर चुके होते हैं लेकिन फिर भी जोड़ों का दर्द बार-बार लौटकर आ जाता है। ऐसे में दर्द का इलाज करने से पहले इसका कारण जानना बहुत जरूरी है जिससे कि दर्द से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
दर्द को अनदेखा करना
हम सभी के शरीर में यहां-वहां छोटे-छोटे दर्द होते रहते हैं। ज्यादातर समय हम बिना ज्यादा परेशानी के उस दर्द से उबर जाते हैं, लेकिन, अगर आपको दर्द है जो आपके नियमित जीवन को एक हफ्ते से ज्यादा है तो आपको कारण का पता लगाने की जरूरत है।
वजन बढ़ना
घुटने के जोड़ शरीर के भार का चार गुना भार उठाते हैं। तो, शरीर के वजन में एक किलो वृद्धि घुटने के जोड़ पर 4 किलो अतिरिक्त भार डाल देगी। यह अतिरिक्त दबाव दो कठोर बोनी सिरों के बीच घुटने के कार्टिलेज को कम कर सकता है। ऐसे में सबसे पहले अपने वजन को कम करें।
पुरानी चोट को भूलना
कई बार ऐसा होता है कि बचपन या बहुत साल पहले हमें घुटनों के आसपास कोई गुम चोट लग जाती है। समय के साथ हम तो वे चोट भूल जाते हैं लेकिन घुटनों के आसपास कहीं जख्म रह जाता है। उम्र बढ़ने के साथ चोट का दर्द बढ़ने लगता है। वहीं, कभी-कभी कुछ खेल फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, रग्बी, स्केटिंग आदि ऐसे खेल के कारण घुटनों और जोड़ों में खिचांव आ जाता है। मेनिसिस और कार्टिलेज को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। - पूरे साल व्रत और त्योहार आते रहते हैं. अभी सावन के महीने में कई लोग हर सोमवार व्रत करते हैं. कई लोग आस्था और विश्वास के चलते उपवास करते हैं तो वहीं कई लोग पतला होने या डाइटिंग करने के लिए भी व्रत करते हैं. ऐसे में व्रत में आपको ऑयली और ज्यादा तला भुना खाने से बचना चाहिए. कई लोग व्रत वाले दिन ज्यादा घी और फ्राइड चीजें खा लेते हैं. इससे गैस और कई तरह की परेशानी बढ़ जाती हैं. आज हम आपको एक ऐसी सिंपल और बिना तेल वाली रेसिपी बता रहे हैं जिसे आप व्रत में खा सकते हैं. आपने व्रत में अभी तक सिघाड़े के आटे से बनी पूरी तो खाई होंगी लेकिन क्या आपने सिंघाड़े के आटे से बनी मीठी कतली खाई हैं. सिंघाड़े की कतली बनाने में बिल्कुल भी ऑइल नहीं लगता. इन्हें खाकर पेट में जल और गैस की समस्या भी नहीं होती है. आप सावन के सोमवार का व्रत रहने में इन्हें बनाकर जरूर खाएं.जानते हैं कैसे बनाएं सिंघाड़े की मीठी कतली.सिंघाड़े की कतली बानाने के लिए साम्रगी1- एक कटोरी सिघाड़े का आटा2- एक चम्मच घी3- आधा कटोरी चीनी4- चार छीली हुई इलायचीसिंघाड़े की कतली बनाने की रेसिपी1- सिंघाड़े की कतली बनाने के लिए सबसे पहले एक कढ़ाही लें, उसमें घी डालकर गर्म कर लें.2- जब घी गर्म हो जाए तो उसमें सिंघाड़े का आटा डालें और इसे हल्का गुलाबी होने तक भूने लें.3- अब गैस की फ्लेम धीमी कर लें और भूने हुए आटे में तीन गुना पानी और चीनी डालकर मिल लें.4- अब इसे लगातार चलाते हुए उबाल आने पर करीब 4-5 मिनट तक पकाते रहें.5- जब गाढ़ा सा हलवा तैयार हो जाए तो गैस बंद कर दें.6- अब एक थाली लें और उसमें चारों ओर घी लगा दें.7- अब थाली में हलवा को डालकर फैला दें.8- थोड़ा ठंडा होने पर आप इसे चाकू की मदद से बर्फी की शेप में काट लें.9- अब सिंघाड़े की कतली को आप दही या दूध के साथ खाएं. आप चाहें तो इन्हें प्लेन भी खा सकते हैं.10- सिंघाड़े की स्वादिष्ट और बिना तेल वाली मीठी कतली तैयार है आप इसे किसी भी व्रत में खा सकते हैं.
- हम आपके लिए पिकैन नट के फायदे लेकर आए हैं. हालांकि हमारे देश में यह नट उतना प्रचलित नहीं है लेकिन आपको जानकर खुशी होगी कि यह सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैक्सिको और अमेरिका के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला पिकैन नट कई न्यूट्रिशनल तत्वों से भरा हुआ होता है. पिकैन नट में विटामिन ए, विटामिन ई, जिंक, ओमेगा-थ्री फैटी एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम आदि भरपूर मात्रा में होता है. इसके अलावा भी इसमें आयरन, फास्फोरस, विटामिन बी 6, प्रोटीन, कैलोरी, फाइबर इसे और भी हेल्दी बनाता है.हार्ट को हेल्दी बनाता हैयह हेल्दी हार्ट के लिए बहुत फायदेमंद ड्राई फ्रूट माना जा रहा है. इसमें मौजूद कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कम रखने में मदद करता है. यह बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है और हेल्दी कोलेस्ट्रॉल को बढाता है. जिस वजह से हार्ट की बीमारियां दूर रहती हैं.डाइबिटीज को दूर रखने में मददगारकई शोधों में पाया गया है कि जो लोग हार्ट डिजीज के शिकार हैं उन्हें डाइबिटीज से बचने के लिए पिकैन नट का सेवन करना चाहिए. आप इसे स्पैक्स के रूप में खा सकते हैं. यह आपके पेट को भरा भी रखेगा और ब्लड शुगर लेवल को भी ठीक रखेगा.अर्थराइटिस के दर्द को ठीक करता हैइसमें मौजूद ओमेगा 3 फैट सूजन को कम करता है जिससे ज्वाइंट के दर्द से राहत मिलती है. इसके अलावा इसमें मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिन ई और जिंक भी इन्फ्लेमेशन को कम करते हैं.इम्युनिटी को मजबूत कराता हैपिकैन नट में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेट गुण होते हैं, जो कई बीमारियों को दूर रखते हैं. यह अल्जाइमर, पारकिंसन आदि को ठीक करने में भी सहायक होता है. यह हमारी इम्यूनिटी को भी स्ट्रॉन्ग बनाता है.
- सूखे बादाम खाने की अपेक्षा हरे बादाम खाने से स्वास्थ्य को अधिक लाभ मिलते हैं। इसका सेवन आपको कई रोगों से बचाता है। हरा बादाम भी सूखे बादाम के ही आकार का होता है, लेकिन हरा बादाम सूखे बादाम से ज्यादा गुणकारी माना जाता है। इस बादाम के सेवन से आपको सूखे बादाम के मुकाबले अधिक फायदा पहुंचता है। हरे बादाम में फ्लेवेनॉइड्स, एंटीऑकसीडेंट्स और विटामिन की प्रचुरता होती है, जो आपके दिल, पेट और मांसपेशियों आदि में होने वाली समस्याओं को काफी कम करता है। आइये जानते हैं कि हरा बादाम आपके लिए कैसे फायदेमंद है।1. हड्डियों को करे मजबूतहरे बादाम मे कैल्शियम की भी अधिक मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। हरे बादाम में पाए जाने वाले गुण शरीर में हो रहे हड्डियों के विकार को कम करने मे मदद करते हैं। इसके सेवन से न सिर्फ हड्डियां मजबूत रहती हैं बल्कि हड्डियों से संबंधित समस्याएं जैसे स्पॉंडिलाइटिस, स्लिप डिस्क और ओस्टियोपोरोसिस आदि का भी खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। खासतौर पर बच्चों को शुरू से ही इसका सेवन कराना चाहे, जिससे उनकी हड्डियां मजबूत रहें। हरे बादाम में विटामिन डी की भी मात्रा पाई जाती है।2. खून साफ करने में करे मददहरे बादाम में अच्छी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो आपकी शरीर में से जहरीले तत्वों को निकाल देते हैं और रक्त संचार को सुचारू बनाकर उसे साफ करते हैं। इसका सेवन करने से खून हमेशा स्वच्छ और शुद्ध रहता है। वहीं इसमें आयरन की भी मात्रा पाई जाती है, जो खून साफ करने में मददगार है। शरीर में गंदा खून बहुत सी बीमारियों को आमंत्रित करता है। लेकिन हरा बादाम के पोषक तत्व खून में घुसकर विषैले तत्वों का खात्मा करते हैं।3. हृदय के लिए फायदेमंदहरे बादाम में फ्लेवेनॉइड्स और बायोफ्लेवेनॉइड्स की मात्रा मौजूद होती है, जो हृदय की रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचने से बचाती हैं और हृदय में सुचारू रूप से खून का संचार करती है। इसलिए इसका नियमित सेवन करने से वॉल्व्यूलर हार्ट डिजीज, कोरोनरी आर्टरी डिजिज समेत कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से भी खुद को बचाकर रखा जा सकता है। फ्लेवेनॉइड्स की मात्रा शरीर में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स की कार्यक्षमता को भी बढ़ाती हैं।4. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएरोग प्रतिरोधक क्षमता को बरकरार रखने और बढ़ाने के लिए हरे बादाम का सेवन किसी औषधि से कम नहीं है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता की गतिशीलता में इजाफा लाते हैं। यही नहीं इसके सेवन से पेट संबंधी विकारों में भी राहत मिलता है।5. याददाश्त बढ़ाएसूखा बादाम दिमाग को तेज करता है। वहीं हरा बादाम आपकी याददाश्त को तेज करने में काम आता है। अल्जाइमर और डिमेंशिया के मरीजों के लिए भी हरा बादाम काफी काम आता है। हरा बादाम न्यूरोट्रांसमीटर का कार्य करते हैं। इसमें पाए जाने वाले तत्व आपके न्यूरोलॉजिकल विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे दिमाग सुचारू रूप से कार्य कर ने में सक्षम रहता है।6. पीएच के स्तर को संतुलित रखेशरीर में पीएच के स्तर को संतुलित रखने के लिए हरे बादाम का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इसके सेवन से शरीर में क्षारीयता बनी रहती है। कई बार हमारे शरीर की संपूर्ण प्रणाली अम्लीय हो जाती है, जिस कारण शरीर में पीएच का स्तर सामान्य से परिवर्तित हो जाता है। ऐसे समय में हरे बादाम का सेवन आपको इस समस्या से छुटकारा दिला सकता है।7. त्वचा के लिए फायदेमंदत्वचा को मखमली और खूबसूरत बनाने के लिए भी हरे बादाम का सेवन काफी अच्छा माना जाता है। इसमें विटामिन ई की भरपूर मात्रा के साथ ही एंटी ऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। यह आपको फ्री रेडिकल्स से छुटकारा दिलाने में सहायक माने जाते हैं।8. बालों के विकास के लिए अच्छाअगर आप बालों के रुके हुए विकास से परेशान हैं तो हरा बादाम आपकी मदद कर सकता है। इसमें पाए जाने वाले विटामिन,. मिनिरल्स के साथ ही अन्य तत्व आपके स्रकैल्प को पोष्कता प्रदान करते हैं। लंबे और खूबूसूरत बालों के लिए इसमें जिंक की भी मौजूदगी रहती है। जो बालों के विकास के लिए अच्छा माना जाता है।
- लोग अपने शरीर की देखभाल को बहुत ही प्रमुखता देते हैं, लेकिन अपने चेहरे को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते. खास तौर से पुरुष वर्ग अपने चेहरे की देखभाल (facial care) को लेकर बहुत ही ज्यादा लापरवाह होते हैं. इस खबर में हम आपको एक ऐसे फेस पैक के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिसे घर बैठे आप तैयार कर सकते हैं और अपने चेहरे को खूबसूरत बना )सकते हैं.दरअसल, जब त्वचा की देखभाल (Care of skin) की बात आती है तो नीम (neem) सबसे अच्छे नेचुरल इनग्रेडिएंट्स में से एक होता है. ये न केवल एक युवा चमक बनाए रखने के लिए अच्छी तरह से काम करता है, बल्कि मुंहासे (acne) और उसके निशान को कम करने में भी मदद करता है. हालांकि, नीम का उपयोग (use of neem) सबसे स्वच्छ और बेहतर संभव तरीके से करना महत्वपूर्ण है. नीम के पत्तों (neem leaves) को साफ करने की जरूरत है ताकि उस पर जमा सारी गंदगी से छुटकारा मिल सके.काफी लोग ऐसे भी हैं जो बाजारों में मिलने वाले क्रीम और दूसरे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल अपने चेहरे की रंगत को निखारने के लिए करते हैं, जिसका नुकसान चेहरे को झेलना पड़ता है. इन प्रोडक्ट्स के कई सारे साइड इफेक्ट्स होते हैं क्योंकि इनमें कई सारे केमिकल्स मिले होते हैं जो आपके चेहरे को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं. ऐसे में नीम का फेस पैक आपको बहुत काम आ सकता है.2. नीम-मुल्तानी मिट्टी का फेस मास्कजरूरी सामान15 नीम के पत्ते2 चम्मच गुलाब जल2 चम्मच मुल्तानी मिट्टीकैसे करें उपयोगसबसे पहले नीम के 10-15 पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लेंअब इसमें गुलाब जल की कुछ स्प्रे डालें.इस मिक्सचर में 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी मिलाएं और एक पतला पेस्ट बना लें.पेस्ट को मिलाने के तुरंत बाद अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें.फिर ठंडे पानी से धो लें और अपने चेहरे को गुलाब जल से स्प्रे करें.एक निश्चित मात्रा में मॉइस्चराइजर के साथ अपने लाड़ प्यार वाले सेशन को पूरा करें.2. शहद-नीम का फेस पैकजरूरी सामानचुटकी भर दालचीनी10 नीम के पत्ते2 चम्मच शहदकैसे करें उपयोग10-12 नीम के पत्ते लें और इसे पीसकर पेस्ट बना लें.अगर आपकी त्वचा पर मुंहासे हैं तो इसमें शहद और एक चुटकी दालचीनी मिलाएं.इसे अपने पूरे चेहरे पर लगाएं और 10 मिनट के लिए छोड़ दें.अब ठंडे पानी से धो लें और टोनर और मॉइस्चराइजर से रूटीन पूरा करें.
- सोया के पत्तों के स्वाद को आपने मेथी, आलू, दाल, अचार जैसी कई और चीजों के ज़रिये बहुत बार चखा होगा. सोया को पकाते हुए इसकी खुशबू को भी आपने महसूस किया होगा. लेकिन आपको बता दें कि ये केवल स्वाद और खुश्बू में ही बेहतरीन नहीं होते बल्कि ये विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, कैल्शियम और मैंगनीज जैसे कई पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं. इसकी वजह से ये सेहत को भी कई सारे फायदे पहुंचाते हैं. इनको सोआ भी कहा जाता है. आइये आज हम आपको बताते हैं कि सेहत के लिए सोया के पत्तों के क्या फायदे होते हैं.पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैंसोया के पत्तों में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. ये पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. साथ ही इसमें फाइबर की भरपूर मात्रा भी होती है और ये गैस, बदहजमी, पेट फूलने जैसी दिक्कत से छुटकारा दिलाते हैं. इसके साथ ही कब्ज़ जैसी परेशानी भी दूर करते हैं.अनिद्रा की परेशानी दूर करते हैंआज के दौर की लाइफ स्टाइल में नींद न आने की दिक्कत आम है. इस दिक्कत को दूर करने में सोया के पत्ते काफी मदद करते हैं. सोया में काफी मात्रा में फ्लेवोनाइड्स और विटामिन बी पाया जाता है. जो अनिद्रा सहित शरीर में कोर्टिसोल के लेवल को कम करने में भी खासी मदद करता है और तनाव को भी कम करता है.वजन घटाने में मदद करते हैंवजन घटाने में भी सोया के पत्ते काफी मदद करते हैं. इसमें कैलोरी की मात्रा काफी होती है और ये पत्ते एंटी-ऑक्सीडेंट से भी भरपूर होते हैं. ये शरीर में बेड कोलेस्ट्रोल के लेवल को कम करने में मदद करते हैं और मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाने में भी काफी सहायता करते हैं.मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करते हैंसोया के पत्ते मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में भी मददगार साबित होते हैं. ये फैट बर्नर की तरह काम करते हैं. इन पत्तों को आप चाय या ग्रीन टी में डालकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.हड्डियों को मजबूत बनाते हैंसोया हड्डियों को मजबूत बनाने में भी काफी मदद करता है. इसको हड्डियों की मजबूती के लिए औषधि माना जाता है. इतना ही नहीं हड्डियों में होने वाले दर्द को कम करने में भी ये काफी मददगार साबित होता है
- देश में कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर अभी भी जारी है। बीते दिनों में रोजाना मिलने वाले नए मामलों की संख्या में कमी आई थी हालांकि देश में कोरोना के खिलाफ चल रहा टीकाकरण अभियान लगातार जारी है। लेकिन इन सबसे बीच कोरोना से संक्रमित हुए लोगों के ठीक होने के बाद भी परेशानियां कम नहीं हो रही है। शुरुआत में कोरोना से ठीक हुए लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण देखे जा रहे थे जिसे डॉक्टर्स ने कोरोना के साइड इफेक्ट्स बताये थे। लेकिन अब एक बार फिर से कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में इस बात की जानकारी दी गयी है कि कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों में ठीक होने के बाद भी कुछ लक्षण लंबे समय तक रह सकते हैं जो चिंता का विषय है।कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षण देखे जा रहे हैं। हाल ही में एआईजी अस्पताल द्वारा किये गए एक ऑनलाइन सर्वे में पता चला है कि कोरोना से ठीक हो चुके 5 में से लगभग 2 लोगों में लॉन्ग कोविड के लक्षण रहते हैं। इस सर्वे में 2038 लोगों को शामिल किया गया था जिसमें से 40 प्रतिशत लोगों को ठीक होने के बाद भी कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद इनमें से ज्यादातर लोगों को कमजोरी और थकान के साथ बुखार की समस्या हो रही है। एआईजी अस्पताल के प्रेसिडेंट डी नागेश्वर रेड्डी ने इस सर्वे में मिली जानकारियां साझा की। उन्होनें एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि देश की 1 करोड़ आबादी जो कोरोनावायरस के संक्रमण से उबर चुकी है, को लॉन्ग कोविड का खतरा है। डॉ रेड्डी के मुताबिक कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद भी लोगों में दिख रहे लक्षण लॉन्ग कोविड का खतरा हैं।कोरोनावायरस संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों को तमाम समस्याएं हो रही हैं। लोगों में कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में तकलीफ और सिरदर्द जैसे लक्षण लॉन्ग कोविड का संकेत हैं। एआईजी हॉस्पिटल द्वारा किये गए सर्वे में मिली जानकारी के मुताबिक लंबे समय तक कोरोना के लक्षण उन लोगों में ज्यादा दिख रहे हैं जिन्होंने इलाज के दौरान स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया था। हालांकि अस्पताल की तरफ से इस सर्वे में यह भी कहा गया है कि कोरोना से संक्रमित होने के दौरान ऑक्सीजन की आवश्यकता से लॉन्ग कोविड का कोई संबंध नही है। लॉन्ग कोविड के लक्षण हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षणों वाले सभी मरीजों में हो सकते हैं।एआईजी हॉस्पिटल द्वारा किये गए इस सर्वे के मुताबिक कोरोना से रिकवर हो चुके कुछ मरीजों में लॉन्ग कोविड के गंभीर लक्षण भी देखने को मिले हैं। अस्पताल के प्रेसिडेंट डी नागेश्वर रेड्डी ने प्रेस कांफ्रेंस में यह कहा कि कोविड से ठीक होने वाले 30 से कम उम्र के रोगियों में दिल का दौरा पडऩे की समस्या भी देखी गयी है। ऐसे तमाम लोगों ने उनसे सलाह भी ली है। ठीक होने के चार से छह सप्ताह के बाद कुछ मरीजों में दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या आदि देखने को मिली है। कुछ लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बैक्टीरिया पूरी तरह से बदल गयाजिससे अपच, या दस्त की समस्या भी हुई है। इसके अलावा कई अन्य गंभीर समस्याएं भी कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों को हो रही हैं।इस अध्ययन में यह कहा गया है कि कोरोना से ठीक होने के बाद ज्यादातर लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या स्टेरॉयड के इस्तेमाल की वजह से भी देखने को मिल रही है। कोरोना संक्रमित होने के बाद इलाज के दौरान स्टेरॉयड का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। इस सर्वे के मुताबिक अस्पतालों में जरूरत से अधिक लोगों को स्टेरॉयड थेरेपी देने की वजह से उनमें लॉन्ग कोविड का खतरा बढ़ जाता है।
- आयुर्वेद में तुलसी को रोग नाशक जड़ी-बूटी माना जाता है। कई बीमारियों में दवा की तरह इस्तेमाल करने के साथ ही तुलसी को स्किन इन्फेक्शन के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। आइए, जानते हैं तुलसी के फायदे-तुलसी के पोषक तत्वतुलसी में पाए जाने वाले पोषक तत्व तुलसी की पत्तियों में विटामिन और खनिज तत्व मौजूद होते हैं। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी, कैल्शियम, जिंक और आयरन आदि हैं। इसके साथ ही तुलसी में सिट्रिक, टारटरिक एवं मैलिक एसिड पाया जाता है।तुलसी के फायदे-खांसी अथवा गला बैठने पर तुलसी की जड़ सुपारी की तरह चूसने से आराम मिलता है।-श्वास रोगों में तुलसी के पत्ते काले नमक के साथ सुपारी की तरह मुंह में रखने से आराम मिलता है।-तुलसी की हरी पत्तियों को आग पर सेंक कर नमक के साथ खाने से खांसी तथा गला बैठना ठीक हो जाता है।-तुलसी के पत्तों के साथ 4 भूनी लौंग चबाने से खांसी से आराम मिलता है।-तुलसी के कोमल पत्तों को चबाने से खांसी और नजले से राहत मिलती है।-खांसी-जुकाम में - तुलसी के पत्ते, अदरक और काली मिर्च से तैयार की हुई चाय पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है।-10-12 तुलसी के पत्ते तथा 8-10 काली मिर्च के चाय बनाकर पीने से खांसी जुकाम, बुखार ठीक होता है।-फेफड़ों में खरखराहट की आवाज़ आने व खांसी होने पर तुलसी की सूखी पत्तियां 4 ग्राम मिश्री के साथ लेने से लाभ मिलता है।-काली तुलसी का स्वरस लगभग डेढ़ चम्मच काली मिर्च के साथ देने से खाँसी एकदम शान्त हो जाती है।-10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी, अस्थमा एवं श्वांस रोगों को ठीक किया जा सकता है।
- सिर्फ जिम जाने वाले या बॉडी बनाने वाले लोगों को ही प्रोटीन की जरूरत नहीं होती है. बल्कि एक सामान्य व्यक्ति को भी रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन चाहिए होता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक, एक सामान्य व्यक्ति को रोजाना अपने शारीरिक वजन के प्रति किलोग्राम के हिसाब से 0.8-1 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए. लेकिन, शाकाहारी लोगों को लगता है कि प्रोटीन सिर्फ मीट-मछली या अंडे से प्राप्त किया जा सकता है. यह बात बिल्कुल भी सच नहीं है. बल्कि आप शाकाहारी आहार यानी वेजिटेरियन फूड्स से भी भरपूर प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं. इस आर्टिकल में प्रोटीन युक्त शाकाहारी आहार के बारे में बताया जा रहा है.टोफूप्रोटीन प्राप्त करने के लिए टोफू सबसे बेहतर वेजिटेरियन फूड है. यह पनीर की तरह दिखता है. इसका अपना कोई टेस्ट नहीं होता है, लेकिन यह फ्लेवर्स को अच्छी तरह सोख लेता है और आप इसे पनीर की तरह बना सकते हैं. इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम और आयरन भी मौजूद होता है. 100 ग्राम टोफू में 9.41 ग्राम प्रोटीन होता है.दालआप घर में आसानी से मिल जाने वाली दाल को कम मत आंकना. प्रोटीन के मामले में यह दूसरे हेल्दी फूड्स से बिल्कुल भी कम नहीं है. क्योंकि आप दालों का सेवन करके आसानी से रोजाना की जरूरत का प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं. FDA के मुताबिक, 100 ग्राम पकी हुई दाल में करीब 9.02 ग्राम प्रोटीन होता है. हालांकि, प्रोटीन की मात्रा विभिन्न दालों में थोड़ी-बहुत ऊपर-नीचे हो सकती है.काबुली चनाभारत में चना को चावल के साथ खाना पसंद किया जाता है. आप प्रोटीन प्राप्त करने के लिए इसका भी सेवन कर सकते हैं. इसमें प्रोटीन के अलावा कॉप्लैक्स कार्ब्स, फाइबर, आयरन, फोलेट, पोटैशियम आदि पोषक तत्वों की भी भरमार होती है. FDA के मुताबिक 100 ग्राम चनों में करीब 8.86 ग्राम प्रोटीन होता है.हरी मटरआप हरी मटर के छोटे-छोटे दानों को कम समझने की भूल कभी मत करिएगा. इन छोटे-छोटे दानों में कई हेल्दी फूड से ज्यादा प्रोटीन छिपा होता है. हरी मटर के सेवन से आप प्रोटीन के अलावा विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, थियामिन, फोलेट आदि भी प्राप्त कर सकते हैं. FDA के मुताबिक आप 100 ग्राम हरी मटर से 4.71 ग्राम प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं.
- आजकल समय से पहले लोगों के आखों की रोशनी कमजोर होने लगी है, क्योंकि बदलती लाइफ स्टाइल के साथ ही हम सभी को कुछ घंटे मोबाइल या कम्यूटर स्क्रीन के सामने रहना होता है। लेकिन यदि हम अपने खान-पान में थोड़ी ध्यान दें तो शायद इस समस्या को बढऩे से रोका जा सकता है। जानें, उन चीजों के बारे में जिनके रोज खाने से आखों की रोशनी दुरुस्त रहती है-हरी सब्जियांअपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन की भरपूर मात्रा पायी जाती है, जो आंखों के लिए बहुत ही जरूरी है।गाजरगाजर का जूस पीना सेहत के लिए तो अच्छा है ही साथ ही आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीने से आंखों पर चढ़ा चश्मा तक उतर सकता है।बादाम का दूधसप्ताह में कम से कम तीन बार बादाम का दूध पिएं। इसमें विटामिन ई होता है जो कि आंखों में किसी भी बीमारी से लडऩे के लिए फायदेमंद है।अंडेअंडे में अमीनो एसिड, प्रोटीन, सल्फर, लैक्टिन, ल्युटिन, सिस्टीन और विटामिन बी2 होता है। विटामिन बी सेल के कार्य करने में महत्वपूर्ण होता है।मछलीमछली में हाई प्रोटीन होता है। मछली आंखों के अलावा बालों के लिए भी बहुत अच्छी होती है। जिन्हें मछली खाने से परहेज है, वो मछली के तेल से बने कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।
- सावन महीना 25 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में कई लोग सावन के सोमवार पर व्रत रखते हैं। कई लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं, जिसके कारण कमजोरी और जल्दी थकान होना आम बात है, लेकिन कोरोना महामारी की तीसरी लहर के खतरों के बीच व्रत रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में अगर आप व्रत में कुछ खाने से परहेज करते हैं, तो भी आपको सावन के व्रत में कुछ ड्रिंक्स का सेवन करना चाहिए जिससे कि कमजोरी दूर होने के साथ इम्युनिटी भी बनी रहे-नारियल पानीशरीर को हाइड्रेट रखने के लिए साधारण पानी की जगह नारियल पानी एक बेहतर विकल्प होता है। यह विटामिन ई से भरपूर है। खुद को हाइड्रेट और स्वस्थ रखने के लिए आप रोजाना नारियल पानी पिएं।मिंट ड्रिंकआप पुदीने की पत्तियों को पीसकर उसे सेंधा नमक के साथ ठंडे पानी में पी सकते हैं। पुदीने में एंटीऑक्सीडेंट है। साथ ही इसमें विटामिन सी, आयरन और विटामिन 'ए' भरपूर मात्रा में होता है।लस्सीगर्मियों में लस्सी पीना सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है. खासकर जब आप व्रत में कुछ नहीं खाते, तो आपको लस्सी में चीनी डालकर जरूर पीना चाहिए।खीरे और टमाटर का शर्बतव्रत में आप खीरे और टमाटर को बारीक काटकर दही में मिलाकर सेंधा नमक और बर्फ के साथ पी सकते हैं। खीरे में विटामिन ए, सी, और के होने के अलावा पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। वहीं, टमाटर में विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट होता है।
- आमतौर पर रसोई में खाने का स्वाद बढ़ाने और मसालों के रूप में इस्तेमाल होने वाली सफेद मिर्च (White Pepper) स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. इसे कुछ लोग दखनी मिर्च के नाम से भी जानते हैं, जिसके चमत्कारी गुण आंखों की रोशनी के लिए रामबाण का काम करते हैं. साथ ही ये हमारे शरीर की कई आम बीमारियों से राहत दिलाने में मददगार है. आइए जानते हैं क्या है इसके फायदे..मोतियाबिंद के लिए है फायदेमंदआयुर्वेद में सफेद मिर्च को एक जड़ी बूटी माना जाता है. इसमें फ्लेवोनोइड, विटामिन, आयरन और कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं. जो लोग आंखों में दिक्कत महसूस करते हैं, वे लोग इसका सेवन करना शुरू कर दें. इसे मोतियाबिंद जैसी समस्याओं के लिए भी उपयोगी माना जाता है.दिल को भी पहुंचाती है लाभदखनी मिर्च खाने से बॉडी के टॉक्सिक एलीमेंट्स शरीर से बाहर निकल जाते हैं. जिसका फायदा दिल को मिलता है. इसका सेवन करने से दिल स्वस्थ रहता है और दिल के रोग होने के चांसेज काफी हद तक कम हो जाते हैं.पेट के लिए फायदेमंदसफेद मिर्च पेट से जुड़ी समस्या से भी छुटकारा दिलाने का काम करती है. आप इसका खाना बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर सलाद में भी डाल सकते हैं. इसका नियमित रूप से सेवन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेटदर्द, एसिडिटी, कब्ज, अल्सर जैसे रोगों में आराम मिलता है.वजन घटाने में भी सहायकसफेद मिर्च का सेवन वजन घटाने में भी मदद करता है. इसका काढ़ा पीने से न सिर्फ इम्यूनिटी बढ़ती है बल्कि वजन भी नियंत्रित रहता है. इसमें कैप्साइसिन मौजूद है जो फैट बर्न करने में मदद करती है.कैंसर सेल्स बनने से रोकती हैअध्ययन के अनुसार, कैप्साइसिन सामग्री शरीर में कैंसर कोशिकाओं को मार सकती है. ये सफेद मिर्च प्रोस्टेट कैंसर को ठीक करने में कारगर है. इसमें विटामिन, आयरन, एंटी-ऑक्सीडेंट आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसलिए रोजाना इसका सेवन करने से यह शरीर में कैंसर के सेल्स बनने में नियंत्रण होता है.हड्डी-जोड़ों के दर्द में आरामदखनी मिर्च या सफेद मिर्च में मौजूद पोषक तत्वों से शारीरिक दर्द में आराम होता है. शरीर में होने वाले दर्द से ये राहत दिलाती है और इसे रोजाना खाने से मसल्स में होने वाली सूजन और जोड़ों का दर्द कम होता है.ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिएये फ्लेवोनोइड्स और विटामिन सी और ए से भरपूर होती है. ये ब्लड प्रेशर को नियंत्रण रखने में मदद करता है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए अपने दैनिक आहार में सफेद मिर्च को शामिल कर सकते हैं.
- अचार से लेकर साउथ इंडियन खाने में राई का काफी इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसे आमतौर पर खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए व्यंजनों में डाला जाता है. लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक, राई के प्रयोग से कफ-पित्त दोष को संतुलित किया जा सकता है. राई में कई औषधीय गुण होते हैं, जो त्वचा के रोग, पेट के रोग, बवासीर व गठिया जैसी कई समस्याओं में लाभदायक होते हैं. आइए राई के चमत्कारिक फायदे जानते हैं.राई के इस्तेमाल से होने वाले फायदेकाली राई का पौधा होता है, जिसपर पीले रंग के फूल आते हैं. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों की भरमार होती है. आइए इसके फायदे जानते हैं.अगर आप सिरदर्द से परेशान रहते हैं, तो राई को पीसकर माथे पर लगाएं. इससे सिरदर्द में लाभ मिलता है.आप राई का काढ़ा बनाकर उससे बाल धो सकते हैं. जिससे सिर में जूं, फुंसी व खाज-खुजली आदि से राहत मिलती है.अगर आपको उल्टी आ रही है, तो आप राई और कपूर को पीसकर थोड़ा गर्म कर लें. इसके बाद इसे पेट पर लगाएं, उल्टी से आराम मिल जाएगा.राई का प्रयोग आपका पाचन सही करता है. आप 1-2 ग्राम राई के साथ शक्कर मिलाकर खा लें. इसके बाद आधा कप पानी पी लें. अपच या पेट दर्द से राहत मिल जाएगी.गठिया या अन्य कारण से होने वाली सूजन को कम करने के लिए आप राई और कपूर का लेप लगाएं. इससे दर्द और सूजन में राहत मिलेगी.अगर आपको त्वचा पर खुजली, दाद या फिर अन्य स्किन प्रॉब्लम्स हैं, तो आप राई के आटे को गाय के घी में मिलाकर त्वचा पर लगाएं. इससे राहत प्राप्त होगी.अगर शरीर में किसी जगह खून जम गया है, तो आप राई के तेल से मालिश करें. ऐसा करने से खून का जमाव खत्म हो जाएगा.अगर आपके बच्चे को खांसी परेशान कर रही है, तो आप उनकी छाती पर राई के तेल से मालिश कर सकते हैं.अगर आप जुकाम या नाक बहने से परेशान हो रहे हैं, तो राई का फायदा उठाएं. आप राई के तेल से पैरों और तलवों की मालिश करें. इससे जुकाम व नाक बहने की समस्या कम होती है.सांस की तकलीफ में आप 500 मिलीग्राम राई के चूर्ण में घी और शहद मिलाकर सुबह-शाम खाएं. इससे आपको सांस और फेफड़ों के रोगों में आराम मिलता है.
- बरसात का मौसम शुरू होते ही सेहत से जुड़ी कई परेशानियां व्यक्ति को परेशान करने लगती हैं। इस मौसम में वातावरण में मौजूद नमी के कारण संक्रमण यानी बैक्टीरिया अधिक सक्रिय हो जाते हैं। यही वजह होती है कि बारिश के दिनों में संक्रमण से होनेवाली बीमारियां अधिक पनपती और तेजी से फैलती हैं। इन रोगों से बचने के लिए सिर्फ साफ-सफाई ही नहीं बल्कि खाने-पीने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में अगर आप कभी बारिश के पानी में भीग जाएं तो खुद को बीमार होने से बचाने के लिए पिएं दालचीनी और अदरक की चाय। ये चाय कई बीमारियों से बचाती है और कफ और कोल्ड के खतरे को कम करती है। आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह चाय।दालचीनी और अदरक की चाय बनाने की विधि-इस चाय को बनाने के लिए 1/2 चम्मच सूखे अदरक का पाउडर और 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर को 1 गिलास पानी में डालकर अच्छी तरह से उबालें। जब पानी आधा रह जाए तब गैस बंद कर दें और इसका सेवन करें। अगर आपके पास दालचीनी और अदरक (अदरक और दालचीनी की चाय के फायदे ) का पाउडर नहीं है तो आप इसकी जगह ताज़ी अदरक और आधा इंच दाल चीनी स्टिक का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। इसके सेवन से तुरंत एनर्जी मिलने के साथ बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।दालचीनी और अदरक की चाय पीने के फायदे--रोजाना इस चाय का सेवन सुबह खाली पेट और डिनर के बाद करने से व्यक्ति को कैलोरी बर्न करने में सहायता मिलती है। इसके अलावा शरीर का मैटाबॉलिज्म अच्छा होने के साथ वजन कम करने में भी मदद मिलती है।-पीरियड्स के दर्द को दूर करने के लिए भी यह चाय बेहद फायदेमंद मानी जाती है। यह सूजन कम करके क्रैंप्स को दूर करने में मदद करती है।-यह चाय पेट के एसिड को बैलेंस करके अपच की समस्या को भी दूर करती है।-यह प्राकृतिक ड्रिंक शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करके मधुमेह के लक्षणों को ठीक करने में मदद करती है।-ये हर्बल चाय शरीर को अंदर से साफ करती है। यानि शरीर को डिटॉक्स करती है। जिससे आपका शरीर स्वस्थ रहता है।
- तुलसी की पत्तियां किसी वरदान से कम नहीं। इससे बनने वाला काढ़ा हो या चाय या फिर फेसपैक। हर एक चीज़ इतनी असरदार है कि कुछ ही हफ्तों के इस्तेमाल के बाद आपको इसका फर्क नजर आने लगेगा।तुलसी की पत्तों से होने वाले सेहत के फायदों के बारे में तो आपने सुना और इस्तेमाल किया ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं इसकी पत्तियां चेहरे और बालों से जुड़ी समस्याएं दूर करने में भी बेहद कारगर हैं। आए दिन चेहरे पर नजर आने वाले कील-मुंहासे के साथ अगर आप बढ़ती उम्र में भी जवां बने रहना चाहती हैं तो तुलसी को अपने ब्यूटी रूटीन में जरूर शामिल करें। आइए जानते हैं इन्हें बनाने औ इस्तेमाल करने के तरीके।त्वचा को गहराई से करती है साफ------------- इसके लिए तुलसी की पत्तियां लें और उन्हें तोड़कर पानी के साथ मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार करें।- इस पेस्ट को चेहरे पर कम से कम 15 मिनट तक लगाकर रखें फिर नॉर्मल पानी से धो लें।- इसे हफ्ते में दो बार जरूर इस्तेमाल करें।- आप नोटिस कर पाएंगी कि स्किन पहले से ज्यादा क्लियर और चमकदार हो रही है।कील-मुंहासों का इलाज--------- इसके लिए एक चम्मच तुलसी की पत्तियां लें, एक चम्मच चंदन पाउडर और कुछ बूंदें गुलाब जल की।- इस पैक को अपने चेहरे पर अप्लाई करें और अच्छी तरह सूखने दें।- इसके बाद ठंडे पानी से धो लें। जल्द रिजल्ट पाने के लिए हफ्ते में कम से कम तीन बार तो जरूर इस्तेमाल करें।दूसरा तरीका- तुलसी और नीम की बराबर मात्रा में पत्तियां लेकर इसे पीस लें। इसमें कुछ बूंद नींबू के रस की मिलाएं और चेहरे पर लगा लें। सूखने के बाद पानी से धो लें।बढ़ती उम्र के असर का करती है कम============बुढ़ापे के असर को थामना चाहती हैं तो इसके लिए तुलसी को लगाना नहीं बल्कि कुछ अलग तरह से इस्तेमाल करना है।- इसके लिए तुलसी के पत्तों को कुछ देर पानी में उबालें और सुबह-सुबह पी लें।रंगत निखारती है तुलसी--------------------- इसके लिए तुलसी की पत्तियों, बेसन और पानी को एक साथ मिक्स कर पीस लें।- इसे चेहरे पर अच्छी तरह से अप्लाई करें और खुद से सूखने दें।- जल्दीबाजी न करें जैसे पंखे और एसी द्वारा जल्द सुखाने की कोशिश करना।- इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धोएं। इसका इस्तेमाल और रोजाना करें और फिर देखें असर।
- जल पिप्पली एक आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है। इसका उपयोग शरीर के कई रोगों को नष्ट करने में किया जाता है। इसकी सही मात्रा सही लाभ देती है।आयुर्वेद में ऐसी कई वनस्पतियां हैं जो औषधि के रूप में काम आती हैं। इसी तरह जल पिप्पली है। यह जल में उगने वाला एक पौधा है, भारत समेत दुनिया के कई देशों में यह पाया जाता है। जल पिप्पली का प्रयोग आयुर्वेद में सांस संबंधी बीमारियां, पुरुषों से जुड़ी बीमारियां और रक्त संबंधी बीमारियों में किया जाता है। जल पिप्पली का वानस्पतिक नाम पिप्पिया नोडिफ्लोरा है। इसे फाइला नोडिफ्लोरा, लिप्पिया कैनेसेन्स भी कहा जाता है।जल पिप्पली एनाल्जेसिक, एंटी-इन्फ्लामेटरी, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबायल, एंटीपारेटिक, एंटीट्युमर, लिपिड आदि गुण पाए जाते हैं। जल पिप्पली के निम्न फायदे हैं-1. आंखों को रखे स्वस्थजल पिप्पली का उपयोग आंखों की परेशानियों को दूर करने में बहुत लाभकारी है। इसमें आंखों की रोशनी बढ़ाने वाले गुण होते हैं।2. पुरुषों की परेशानियांपुरुषों में स्पर्म काउंट की परेशानी को करने में जल पिप्पली बहुत लाभकारी है। यह स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों बढ़ाने में मददगार है। इसमें जल पिप्पली का पाउडर और जूस दोनों प्रयोग में लाए जा सकते हैं।3.रक्त विकारों में मददगाररक्त संबधी परेशानियों को दूर करने में जल पिपप्ली लाभकारी है। पुरुषों में हीमोफिलिया की परेशानी ज्यादा होती है। रक्त विकारों हीमोफिलिया के अलावा ब्लड क्लॉट, एनिमिया आदि जैसी परेशानियों में जल पिप्पली लाभ करती है। रक्त विकारों में जल पिप्पली का उपयोग जूस या चूर्ण के रूप में किया जा सकता है।4. मुंह से जुड़ी परेशानियों में लाभकारीमुंह में जलन, छाले आदि होने पर जल पिप्पली लाभकारी है। इसके अलावा मुंह से दुर्गंध आने पर भी जल पिप्पली को प्रयोग में लाया जाता है। जल पिप्पली का काढ़ा बनाकर मुंह में घुमाने से मुंह से जुड़ी परेशानियों के निदान में मदद मिलती है। पर ध्यान रहे कि काढ़ा बनाने से पहले जल पिप्पली के पत्तों को साफ कर लें फिर पत्तों को उबालकर काढ़ा बनाएं। इसके अलावा अगर दांतों में दर्द हो रहा है तो जल पिप्पली की पत्तियों को पीसकर दांतों में मलें या काढ़े को कुछ देर में मुंह रखें। इससे दांत दर्द ठीक हो जाएगा।5. हाथों-पैरों, गले की जलनहाथों या पैरों में जलन के कई कारण हो सकते हैं। इस बर्निंग सेंसेशन को दूर करने में भी जल पिप्पली लाभकारी है। इसके अलावा पेशाब में जलन होने पर जल पिप्पली का सेवन लाभकारी है। जोड़ों के दर्द में भी जल पीपल लाभकारी है।6. घाव भरने में लाभकारीजल पिप्पली के पत्ते एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इनका लेप बनाकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी सूख जाता है।7. सांस संबंधी परेशानियांसांस संबंधी परेशानियां होने पर जल पीपल की पत्तियों का रस निकालकर उसमें काली मिर्च का चुर्ण मिलाएं। इसका सेवन करने से सांस संबंधी परेशानियों में लाभ मिलता है।8. सिर दर्द में लाभकारीसिर दर्द से निपटने में जल पिप्पली लाभकारी है। इसके लिए आपको जल पिप्पली की पत्तियों का लेप माथे पर लगाना है। इन पत्तियों से आपको राहत मिलेगी और तनाव रहित महसूस करेंगे।







.jpg)





.jpg)













.jpg)