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नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और उन्नत तकनीक में साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय भारत के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने एआई और उन्नत तकनीकों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस यूएई के राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए। नई दिल्ली में आयोजित इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में समिट का उद्घाटन करते हुए एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत नई तकनीकों के विकास और उनके व्यापक उपयोग दोनों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। समिट के दौरान एआई आधारित सांकेतिक भाषा व्याख्या प्रणाली का प्रदर्शन किया गया, जिसने तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को प्रदर्शित किया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक एआई समुदाय से मानवता की भलाई के लिए जिम्मेदार तकनीकी विकास की अपील की। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के “एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर आज नई दिल्ली में पूसा स्थित ए.पी. शिंदे हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम ने उनके व्यक्तिगत व्रत को राष्ट्रीय हरित जनआंदोलन का स्वर देने की दिशा में ठोस कदमों को जन्म दिया। मंच से उन्होंने अपने विभागों के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत पौधारोपण से करने का निर्देश देने के साथ ही स्वागत में स्मृति चिन्ह के स्थान पर पेड़ लगाकर फोटो भेंट करने की अपील की, वहीं पेड़ बैंक और ‘अंकुर’ जैसे मंच की अवधारणा रखी। समारोह में साध्वी दीदी माँ ऋतंभरा, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, श्रीमती साधना सिंह और वरिष्ठ पत्रकार श्री आशुतोष झा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस मौके पर प्रारंभ में पूसा परिसर में पौधारोपण किया।
श्री चौहान ने कार्यक्रम में बताया कि यह संकल्प किसी एक दिन की भावनात्मक प्रेरणा से नहीं, बल्कि वर्षों से विकसित पर्यावरणीय दृष्टि से उपजा है। 2017 में उनके नेतृत्व में निकली ऐतिहासिक नर्मदा सेवा यात्रा के समापन पर मध्य प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, जिसने नदी, जंगल और जलवायु संरक्षण को जनआंदोलन में बदल दिया। इसी क्रम में “अंकुर अभियान” शुरू किया गया, जिसमें नागरिकों को पौधा लगाकर उसकी फोटो/सेल्फी पोर्टल पर अपलोड करने और उसकी रक्षा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया; इस अभियान के माध्यम से लगभग 1 करोड़ पौधे लगाए गए और समाज के विभिन्न वर्ग इस हरित यात्रा से जुड़े। समय के साथ यह पहल मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयाम ले चुकी है; जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, विशेष अवसरों पर लोगों ने पौधे लगाकर इस यात्रा को अपना व्यक्तिगत उत्सव बना लिया है।श्री चौहान ने मंच से घोषणा की कि:- कृषि मंत्रालय के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत अब पौधारोपण से करने की अपील।- आईसीएआर के डीजी से उन्होंने कहा- आईसीएआर के अधीन हर कार्यक्रम, सेमिनार, सम्मेलन व समारोह पेड़ लगाकर ही शुरू करें।- कृषि विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में पहले पेड़ लगाए जाएंगे और विद्यार्थियों से संकल्प दिलवाया जाएगा कि वे जीवनभर अपने जन्मदिन पर पौधा लगाएंगे।- केवीके, एग्रीकल्चर कॉलेज और रिसर्च से जुड़े किसी भी आयोजन की शुरुआत पेड़ लगाकर करें ।उन्होंने कहा कि जब कृषि विभाग अपने हर कार्यक्रम की शुरुआत पेड़ लगाकर करेगा तो सहज ही बड़ी संख्या में पौधे लगते चले जाएँगे और इससे बेहतर शुरुआत होगी।श्री चौहान ने अपने लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय साझा किया कि अब वे अपने स्वागत में फूल-मालाएँ, पटका या स्मृति चिन्ह स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अक्सर सम्मान व्यक्ति से अधिक पद का होता है और पद समाप्त होने पर वही भीड़ गायब हो जाती है; इसलिए इस भ्रम से बाहर निकलना आवश्यक है। किसी भी संस्था या व्यक्ति को यदि उनका स्वागत करना है, तो वह पाँच सौ रुपये के स्मृति चिन्ह की जगह पाँच पौधे लगाए और उसकी फोटो उन्हें भेंट करे – वही उनके लिए सच्चा अभिनंदन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कपड़े के पटके या माला का बाद में कोई उपयोग नहीं होता, जबकि उसी खर्च में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायी धरोहर बन जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि उनके मंत्रालय और अन्य आयोजकों को स्मृति चिन्ह की जगह पेड़ लगाकर फोटो देने की परंपरा अपनानी चाहिए।श्री चौहान ने पेड़ बैंक की अवधारणा रखी जिसके तहत दानदाता या संस्थाएं बड़ी संख्या में पौधे खरीदने के लिए धन दे सकें। समर्पित संस्था गड्ढा खोदने, पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले, ताकि जिनके पास समय नहीं है, वे भी दान के माध्यम से पौधारोपण में भागीदार बन सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि एक राष्ट्रीय मंच बनाया जाए, जिसका नाम “संभावना” या “अंकुर” हो सकता है, जहां नागरिक जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों की वर्षगांठ, किसी प्रियजन की जयंती या पुण्यतिथि पर पौधा लगाने या लगवाने के लिए पंजीकरण कर सकें। महानगरों में रहने वाले लोग तय राशि (जैसे ₹100–₹150) देकर अपने नाम से पेड़ लगवा सकें, और बदले में उन्हें उस पेड़ की फोटो और स्थान की जानकारी भेजी जाए। उन्होंने कहा कि देश में दानदाताओं की कोई कमी नहीं, कमी केवल काम करने वाले हाथों और व्यवस्थित मंच की है; यदि यह व्यवस्था खड़ी हो जाए तो “एक पौधा प्रति दिन” जैसे संकल्प एक महाअभियान में रूपांतरित हो सकते हैं।श्री चौहान ने प्रस्ताव रखा कि अभियान में जुड़ने के इच्छुक नागरिकों के लिए एक मिस्ड कॉल नंबर तय किया जाए। जो भी नागरिक इस नंबर पर मिस्ड कॉल दें या संदेश भेजें, उनके लिए आगे चलकर विशेष कार्यक्रम, सामूहिक पौधारोपण और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं, ताकि यह आंदोलन मजबूरी नहीं, स्वैच्छिक भावना और प्रेरणा से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों, बच्चों और अन्य वर्गों की सेवा की तरह पेड़ लगाना भी सेवा है, बल्कि संपूर्ण संसार की सेवा है, क्योंकि पेड़ का अर्थ है ऑक्सीजन, जीव-जंतुओं का आश्रय, बारिश व नदियां– संपूर्ण जीवन-श्रृंखला का संरक्षण।अंत में श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की जनसंख्या 140–144 करोड़ होने के बावजूद वह कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है; यदि इनमें से केवल 2–5 करोड़ लोग भी पौधारोपण आंदोलन से जुड़ जाएँ, तो करोड़ों पेड़ लगाए जा सकते हैं और भारत दुनिया के लिए दिशा-दर्शक बन सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन कितने दिनों का है, यह किसी के हाथ में नहीं, लेकिन जितनी साँसें बची हैं, उन्हें बेहतर दुनिया, अपने देश और अपनी जनता के लिए समर्पित करना हमारे हाथ में है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे न्यूनतम कोई न कोई संकल्प लेकर जाएँ – प्रतिदिन, प्रति माह या विशेष अवसरों पर – और “एक पौधा प्रति दिन” जैसी भावना को अपने-अपने स्तर पर आत्मसात करके जीवन को अर्थपूर्ण बनाएँ। उपस्थितजनों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण का संकल्प लिया।साध्वी दीदी माँ ऋतंभराजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में वृक्षों को सनातन संस्कृति की आत्मा से जोड़ते हुए भावपूर्ण अपील की कि दिखावटी खर्च, आतिशबाजी और क्षणिक उत्सवों की बजाय लोग अपने शुभ अवसरों पर पौधारोपण को “सच्चा यज्ञ” मानें और हर पौधे की रक्षा को वैसा ही धर्म समझें जैसा हम मंदिर में दिए व्रतों का पालन करते हैं।डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि श्री शिवराज सिंह चौहान ने जो आंदोलन खड़े किए हैं, वे देश का दृश्य परिदृश्य बदलने, लोगों को सकारात्मकता के साथ जोड़ने और प्रकृति के लिए कार्य करने के लिए हैं।वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व चिंतक श्री आशुतोष झा ने इस अवसर पर श्री शिवराज सिंह के पौधारोपण के प्रण को सभी से जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में पेड़ हर किसी को सुकून देते हैं, पेड़ केवल वृक्ष नहीं होते, बल्कि वे तो पीढ़ियों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना पुण्य का काम और सभी को पेड़ों से लगाव होना चाहिए, हमें प्रकृति की रक्षा करना चाहिए। - -शिवाजी जयंती पर उमड़ा युवा सैलाब, मशाल लेकर निकली माय भारत की ‘जय शिवाजी, जय भारत’ पदयात्रा- तिरंगा, भगवा और युवा जोश—सातारा में शिवाजी जयंती पर दिखा राष्ट्रभक्ति का विराट स्वरूप--जब 12 हजार युवाओं ने कहा—जय शिवाजी, जय भारत; सातारा बना युवा शक्ति का केंद्र-शिवाजी की धरती पर युवा शक्ति का महाकुंभ, सातारा में दिखा राष्ट्रनिर्माण का संकल्पनई दिल्ली। स्वराज के महानायक, सुशासन के प्रणेता और भारतीय संस्कृति के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर सातारा की ऐतिहासिक धरती राष्ट्रभक्ति और युवा शक्ति के अभूतपूर्व उत्साह से सराबोर नजर आई। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के स्वायत्तशासी संगठन मेरा युवा भारत (माय भारत) द्वारा जिला प्रशासन सातारा के सहयोग से आयोजित “जय शिवाजी, जय भारत” पदयात्रा में पूरे महाराष्ट्र से आए 12 हजार से अधिक माय भारत स्वयंसेवकों ने शामिल होकर शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों पर चलकर विकसित भारत निर्माण का संकल्प लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ सातारा के ऐतिहासिक रजवाड़ा परिसर से हुआ, जहां केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। महाराष्ट्र के राज्यगीत के साथ कार्यक्रम की भव्य शुरुआत हुई। केंद्रीय राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने स्वयं मशाल थामकर पदयात्रा का नेतृत्व किया। उनकी अगुवाई में कई हजार युवा हाथों में तिरंगा, माय भारत का ध्वज और भगवा पताका लिए कदम से कदम मिलाकर विकसित भारत रचने का संकल्प दोहराते हुए आगे बढ़े।केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने युवा शक्ति को संबंधित करते हुए कहा कि जय शिवाजी, जय भारत पदयात्रा का उद्देश्य युवा पीढ़ी को वीर शिवाजी के महान जीवन गाथा से परिचित कराना है ताकि युवा भी स्वयं में अदम्य साहस, जीवंत प्रेरणा और नव ऊर्जा का संचार कर विकसित भारत निर्माण में योगदान देने के लिए सहभागी बने। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए।वहीं महाराष्ट्र सरकार से कैबिनेट मंत्री शंभुराज विजयादेवी शिवाजीराव देसाई ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, विचारों और मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि स्वराज की स्थापना कर वीर शिवाजी ने संदेश दिया कि आत्मसम्मान, न्याय और जनहित सर्वोपरि हैं।पदयात्रा रजवाड़ा से प्रारंभ होकर गोलबाग, राजपथ, शाहू चौक और अन्य प्रमुख मार्गों से होते लगभग 2.5 किमी दूरी तय करते हुए पोवई नाका तक पहुंची। पूरे मार्ग में जगह-जगह नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा पदयात्रा का भव्य स्वागत किया गया। विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां कलाकारों ने पारंपरिक मराठी लोकनृत्य, लेझीम, ढोल-ताशा वादन और युद्ध कौशल की प्रस्तुति देकर शिवाजी महाराज की वीरता और मराठी गौरव की झलक प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों ने युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया।कार्यक्रम में शामिल युवाओं के उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सुसज्जित होकर पदयात्रा का हिस्सा बने। युवतियां नौवारी साड़ी और युवाओं ने पारंपरिक पगड़ी और धोती-कुर्ता पहनकर शिवाजी महाराज की परंपरा को जीवंत कर दिया। ढोल-ताशों की गूंज और “जय शिवाजी, जय भारत”, “माय भारत, विकसित भारत” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।पदयात्रा के दौरान युवाओं के लिए लगाए गए विशेष सेल्फी स्टैंड आकर्षण का केंद्र बने जहां युवाओं ने खूब सेल्फी ली और माय भारत के क्यूआर कोड को स्कैन कर स्वयंसेवक बनने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण किया। माय भारत पोर्टल mybharat.gov.in पर पंजीकरण कर युवाओं ने राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। इस आयोजन के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं ने माय भारत से जुड़ने में रुचि दिखाई, जो भविष्य में राष्ट्र निर्माण की विभिन्न गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाएंगे।कार्यक्रम के दौरान युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और अभियानों से संबंधित डॉक्यूमेंट्री वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। इन वीडियो के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका, नेतृत्व क्षमता के विकास और सामाजिक परिवर्तन में योगदान के लिए प्रेरित किया गया। विशेष रूप से ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के एंथम का प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणादायक रहा, जिसने उन्हें देश के भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में माय भारत प्लेटफॉर्म पर संचालित बजट क्वेस्ट क्विज 2026 की भी जानकारी दी गई।पदयात्रा मार्ग को विशेष रूप से श्वेत और भगवा रंग से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण शिवाजी महाराज की परंपरा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत नजर आया। रजवाड़ा परिसर में युवाओं के लिए फूड और रिफ्रेशमेंट स्टॉल भी लगाए गए। आयोजन की व्यवस्थाएं जिला प्रशासन सातारा और माय भारत के सहयोग से सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित की गईं।इस आयोजन में विभिन्न माय भारत यूथ क्लब, महाविद्यालयों की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाइयों, एनसीसी कैडेट्स, सामाजिक संगठनों और अन्य युवा समूहों से जुड़े युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। युवाओं ने न केवल पदयात्रा में भाग लिया, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और राष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन भी किया।पदयात्रा के दौरान कलाकारों की प्रस्तुतियों को अतिथियों ने विशेष रूप से सराहा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ उनमें राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, विचारों और मूल्यों से परिचित कराना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा। शिवाजी महाराज का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वराज की स्थापना कर भारत के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी।युवाओं ने भी इस आयोजन को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। विभिन्न स्वयंसेवकों ने बताया कि इस पदयात्रा ने शिवाजी महाराज के आदर्शों को करीब से समझने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को महसूस करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि वे माय भारत के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।जिला प्रशासन और माय भारत के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस पदयात्रा ने न केवल युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव से भी जोड़ने का कार्य किया। इस भव्य आयोजन ने सातारा को एक बार फिर शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया। पदयात्रा के समापन पर युवाओं ने एक स्वर में “जय शिवाजी, जय भारत” के उद्घोष के साथ विकसित भारत निर्माण का संकल्प दोहराया और यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य सुरक्षित और मजबूत हाथों में है।महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवेंद्र सिंह अरुणाराजे अभयसिंहराजे भोसले, कैबिनेट मंत्री जयकुमार कमल भगवानराव गोरे, विधानसभा सदस्य मनोजदादा घोरपड़े, सातारा नगराध्यक्ष अमोल मोहिते, जिलाधिकारी संतोष पाटिल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी याशनी नागराजन, पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी, माय भारत राज्य निदेशक महाराष्ट्र कालिदास घटवाल, माय भारत सलाहकार प्रकाश वैद्य, उप-निदेशक अरुण कुमार तिवारी, नगर पालिका चीफ ऑफिसर अभिजीत बापट, जिला युवा अधिकारी माय भारत सातारा स्वप्निल देशमुख सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
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नई दिल्ली। अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को वर्ल्ड लीडर्स से कहा कि एआई वह तकनीक है जिसने उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरित किया और यह “हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म परिवर्तन” है। पिचाई ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, “कोई भी तकनीक मुझे एआई से ज्यादा बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित नहीं करती। यह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव है। हम तीव्र प्रगति और नई खोजों के कगार पर हैं जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पारंपरिक कमियों को दूर करने में मदद कर सकती हैं।”
उन्होंने सरकारों और उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे सहयोगपूर्ण ढंग से साहसिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से कार्य करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस तकनीक से सभी को लाभ मिले। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई से सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित या स्वचालित नहीं हैं। गूगल के सीईओ ने अल्फाफोल्ड का उदाहरण देते हुए एआई द्वारा संचालित वैज्ञानिक प्रगति का ज्रिक किया। गूगल डीपमाइंड की प्रोटीन फोल्डिंग तकनीक ने अभूतपूर्व प्रगति की है, जिसका उपयोग 190 से अधिक देशों में तीन मिलियन से अधिक शोधकर्ताओं द्वारा मलेरिया के टीके विकसित करने के लिए किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि अल्फाफोल्ड ने दशकों के शोध को एक डेटाबेस में संकलित किया है जो अब दुनिया के लिए उपलब्ध है। उन्होंने आगे कहा कि गूगल डीएनए रोग मार्करों का सूचीकरण कर रहा है और ऐसे एआई एजेंट बना रहा है जो वैज्ञानिक पद्धति में सच्चे भागीदार के रूप में कार्य करते हैं। गूगल के सीईओ ने भारत में कंपनी के बढ़ते निवेशों का भी जिक्र किया, जिसमें विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक एआई हब शामिल है, जो 15 अरब डॉलर के अवसंरचना निवेश का हिस्सा होगा। इसके अलाव पिचाई ने कहा कि वह भारत में बदलाव की रफ्तार से प्रभावित हैं। साथ ही, कहा हमें एआई को लेकर रुख साहसिक रखना चाहिए, क्योंकि यह अरबों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है। कंपनी इंडिया-अमेरिका कनेक्ट पहल के तहत अमेरिका और भारत के बीच चार नई प्रणालियों सहित सब-सी फाइबर ऑप्टिक केबलों का एक विशाल नेटवर्क भी बना रही है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “भारत में, हम किसानों को उनकी आजीविका की रक्षा करने में मदद कर रहे हैं। पिछले साल भारतीय सरकार ने एआई-आधारित पूर्वानुमान लाखों किसानों को भेजे, जिससे उन्हें खराब मौसम के बारे में चेतावनी मिली।” -
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान नेताओं के प्लेनरी सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित यह समिट मानव-केंद्रित और संवेदनशील वैश्विक एआई इकोसिस्टम के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि मानवता ने हर बड़े बदलाव को अवसर में बदला है और अब एआई के रूप में दुनिया के सामने ऐसा ही एक अवसर मौजूद है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की धरती है और सही समझ से ही सही निर्णय संभव होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि एआई का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब सही समय पर सही नियत के साथ सही फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोविड वैश्विक महामारी के दौरान दुनिया ने देखा कि सहयोग से असंभव भी संभव हो सकता है। वैक्सीन विकास से लेकर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और डाटा साझाकरण तक, तकनीक ने मानवता की सेवा की। भारत के डिजिटल वैक्सीनेशन प्लेटफॉर्म और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने संकट के समय करोड़ों लोगों की मदद की और डिजिटल डिवाइड को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई तकनीक सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई गवर्नेंस के केंद्र में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को स्थान दिया जाना आवश्यक है, ताकि तकनीकी प्रगति वैश्विक समानता को बढ़ावा दे।प्रधानमंत्री ने एआई के नैतिक उपयोग के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए। पहला, डाटा सोवरेनिटी का सम्मान करते हुए भरोसेमंद वैश्विक डाटा फ्रेमवर्क विकसित किया जाए। दूसरा, एआई प्लेटफॉर्म अपने सुरक्षा नियम पारदर्शी रखें और ‘ब्लैक बॉक्स’ की जगह ‘ग्लास बॉक्स’ दृष्टिकोण अपनाएं। तीसरा, एआई को स्पष्ट मानवीय मूल्यों और दिशा-निर्देशों से संचालित किया जाए, ताकि तकनीक मानव नियंत्रण में रहे।उन्होंने कहा कि भारत एआई की वैश्विक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत के एआई मिशन के तहत देश में 38,000 GPUs स्थापित किए जा चुके हैं और अगले छह महीनों में 24,000 और जोड़े जाएंगे। साथ ही स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग पावर उपलब्ध कराई जा रही है। राष्ट्रीय संसाधन के रूप में हजारों डाटा सेट्स और सैकड़ों एआई मॉडल भी साझा किए गए हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई मानवता की भलाई के लिए साझा संसाधन है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से ऐसा एआई भविष्य बनाने का आह्वान किया, जो नवाचार को बढ़ावा दे, समावेशन को मजबूत करे और मानव मूल्यों पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि जब तकनीक और मानव विश्वास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे, तब एआई का वास्तविक प्रभाव दुनिया के सामने आएगा। -
नई दिल्ली । होली के त्योहार पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेल ने 30 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। इनमें 8 ट्रेनें लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सुल्तानपुर और वाराणसी के बीच चलाई जा रही हैं, जबकि 22 सेवाएं रक्सौल, सहरसा और धनबाद के लिए बढ़ाई गई हैं। यह व्यवस्था यात्रियों को बेहतर सुविधा देने और भीड़ कम करने के उद्देश्य से की गई है।
लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सुल्तानपुर के बीच चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ट्रेन संख्या 04211 होली स्पेशल 27.02.2026 और 03.03.2026 को मुंबई से 14:35 बजे रवाना होकर अगले दिन 23:00 बजे सुल्तानपुर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04212 26.02.2026 और 02.03.2026 को सुल्तानपुर से 04:00 बजे रवाना होकर अगले दिन 12:20 बजे मुंबई पहुंचेगी।वाराणसी के लिए चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ट्रेन संख्या 04225 26.02.2026 और 02.03.2026 को मुंबई से 14:35 बजे रवाना होकर तीसरे दिन 02:05 बजे वाराणसी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04226 25.02.2026 और 01.03.2026 को वाराणसी से 01:35 बजे रवाना होकर अगले दिन 12:20 बजे मुंबई पहुंचेगी। इन ट्रेनों के ठहराव में ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, चालीसगांव, पचोरा, भुसावल, खंडवा, इटारसी जंक्शन, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, ओराई, कानपुर सेंट्रल और लखनऊ जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। वाराणसी सेवाओं में सुल्तानपुर और जौनपुर सिटी भी पड़ाव हैं। प्रत्येक ट्रेन में 16 एसी थ्री-टियर इकोनॉमी कोच और 2 जनरेटर वैन लगाए गए हैं।मुंबई–रक्सौल ट्रेन संख्या 05558 को 12.03.2026 से 02.04.2026 तक और वापसी ट्रेन 05557 को 10.03.2026 से 31.03.2026 तक बढ़ाया गया है। मुंबई–सहरसा ट्रेन संख्या 05586 को 08.03.2026 से 29.03.2026 तक तथा वापसी 05585 को 06.03.2026 से 27.03.2026 तक चलाया जाएगा। मुंबई–धनबाद ट्रेन संख्या 03380 को 12.03.2026 से 26.03.2026 तक और वापसी 03379 को 10.03.2026 से 24.03.2026 तक बढ़ाया गया है। रेलवे के अनुसार इन ट्रेनों के समय और ठहराव में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विस्तारित सेवाओं के लिए बुकिंग 20.02.2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि एसी स्पेशल ट्रेनों के लिए आरक्षण 22.02.2026 से खुलेगा। रेलवे ने यात्रियों से समय पर टिकट बुक करने और स्पेशल सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की है। -
नई दिल्ली। भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को बड़ी सफलता मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित ‘गगनयान’ भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इस मिशन के तहत तीन सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में तीन दिन के लिए भेजने और सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
ड्रोग पैराशूट अंतरिक्ष कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाता है। यह पहले खुलकर कैप्सूल की गति कम करता है और उसे स्थिर करता है, ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके। इस बार परीक्षण में पैराशूट को वास्तविक उड़ान में आने वाले अधिकतम भार से भी अधिक दबाव में परखा गया, जिससे इसकी अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता सिद्ध हुई। परीक्षण के दौरान पैराशूट को असली मिशन से अधिक दबाव वाली स्थिति में जांचा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कठिन परिस्थितियों में भी यह प्रणाली सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम करेगी। इस सफलता से भारत ने उच्च क्षमता वाले पैराशूट के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में अपनी तकनीकी दक्षता प्रदर्शित की है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर टीमों को शुभकामनाएं दीं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण में इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और टीबीआरएल की विशेषज्ञ टीमों ने भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि गगनयान मिशन की तैयारियों को और मजबूत बनाती है तथा भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान योजना के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। -
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के लिए ‘मानव’ विजन प्रस्तुत करते हुए मानव-केंद्रित वैश्विक एआई ढांचे की वकालत की। उन्होंने कहा कि एआई के दौर में नवाचार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विदेश मंत्रालय भारत ने बताया कि भारत ने एआई के लिए एम.ए.एन.ए.वी. (MANAV) विजन प्रस्तुत किया है। इसके तहत एम– नैतिक मूल्य आधारित प्रणाली, ए– जवाबदेह शासन, एन– राष्ट्रीय संप्रभुता, ए– सुलभ और समावेशी ढांचा तथा वी– वैध और विश्वसनीय एआई व्यवस्था पर जोर दिया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित समिट में विश्व नेताओं ने जिम्मेदार, लोकतांत्रिक और समावेशी एआई की आवश्यकता पर सहमति जताई। भारत ने एआई को सभी की भलाई के लिए उपयोग करने की दिशा में वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है, जो सही दिशा में उपयोग होने पर समाधान बन सकती है, जबकि गलत दिशा में जाने पर गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने कहा कि आज असली प्रश्न यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या करेगा, बल्कि यह है कि मानवता आज एआई का उपयोग किस दिशा में करती है।नवाचार के साथ मानवीय मूल्यों पर जोर प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई को खुला अवसर मिलना चाहिए, लेकिन अंतिम नियंत्रण मानव के हाथ में रहना चाहिए। उन्होंने एआई को 21वीं सदी के लिए मानव-केंद्रित विकास का प्रमुख आधार बताते हुए भविष्य की पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाने की अपील की। -
नयी दिल्ली. राज्यसभा की 37 सीट पर 16 मार्च को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत रहने की संभावना है क्योंकि जिन 10 राज्यों में ये सीट रिक्त हो रही हैं, उनमें से छह में पार्टी की सरकार है या वह सत्तारूढ़ गठबंधन में साझेदार है। कुल 37 सीट दो और नौ अप्रैल को रिक्त होने वाली हैं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन राज्यों में ये सीट रिक्त हो रही हैं उनमें महाराष्ट्र (सात सीट), ओडिशा (चार), तेलंगाना (दो), तमिलनाडु (छह), छत्तीसगढ़ (दो), पश्चिम बंगाल (पांच), असम (तीन), हरियाणा (दो), हिमाचल प्रदेश (एक) और बिहार (पांच) शामिल हैं। चुनाव के लिए अधिसूचनाएं 26 फरवरी को जारी की जाएंगी।
स्थापित परंपरा के अनुसार, 16 मार्च को मतदान सुबह नौ बजे से शाम चार बजे के बीच होगा और उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना की जाएगी। महाराष्ट्र, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा और असम में भाजपा की सरकारें हैं या वह सत्तारूढ़ गठबंधन में साझेदार है। इससे पार्टी को उच्च सदन में बहुमत हासिल करने में मदद मिलेगी। वहीं, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में, विपक्षी पार्टियां सत्ता में हैं।
महाराष्ट्र में, यदि विपक्षी महाविकास आघाडी (एमवीए) एकजुट होकर चुनाव लड़ता है, तो वह राज्यसभा में एक सीट हासिल कर सकता है। राज्य में सात सीट रिक्त हो रही हैं। जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार), अभिषेक सिंघवी (कांग्रेस), साकेत गोखले (तृणमूल कांग्रेस), रामदास आठवले (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-आठवले), एम थंबीदुरई (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम) और तिरुची शिवा (द्रविड़ मुनेत्र कषगम) शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ अलग-अलग बैठकें कीं तथा कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते ने भारत-यूरोप संबंधों में एक ''स्वर्णिम युग की शुरुआत'' की है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति सांचेज के साथ उनकी एक सार्थक बैठक हुई और खासकर रक्षा, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत-स्पेन मित्रता को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दोनों देश (भारत और स्पेन) 2026 को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) वर्ष के रूप में मना रहे हैं। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। विश्वविद्यालयों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल को भारत आते देखकर खुशी हुई। इससे भी दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क स्थापित करने में काफी मदद मिलेगी।'' उन्होंने कहा, ''यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) स्पेन के साथ आर्थिक साझेदारी पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा और दोनों देशों के लोगों को नये अवसर प्रदान करेगा।'' भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
राष्ट्रपति सांचेज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने स्पेन और भारत के बीच शानदार संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसे दोनों नेता और मजबूत करना जारी रखेंगे। सांचेज ने 'एक्स' पर स्पेनिश भाषा में एक पोस्ट में कहा, ''मैंने उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी। हम दोनों इस बात से सहमत हैं कि मानव-केंद्रित एआई की दिशा में कदम बढ़ाते रहना आवश्यक है।'' प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सांचेज ने द्विपक्षीय वार्ता की तथा भारत-स्पेन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की, जिनमें व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, जलवायु और नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, अंतरिक्ष, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान शामिल हैं। उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग में सकारात्मक गति का स्वागत किया और वडोदरा में सी-295 परिवहन विमान के निर्माण के लिए टाटा-एयरबस सहयोग में हुई प्रगति पर खुशी व्यक्त की, जिसका उद्घाटन दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में संयुक्त रूप से किया था। बयान के अनुसार, मोदी और सांचेज ने भारत-स्पेन की संस्कृति, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दोहरे वर्ष पर जोर दिया, जिसे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस वर्ष मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार और लोगों के बीच संबंधों को और बढ़ावा देने में सहायक होगा। दोनों नेताओं ने सह-विकास और सह-उत्पादन पर आधारित रक्षा औद्योगिक सहयोग के महत्व पर जोर दिया। स्पेन के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोदी के न्योते पर 18 से 19 फरवरी तक आधिकारिक दौरे पर यहां हैं।
सांचेज ने एआई समिट के महत्व को रेखांकित किया और भरोसा जताया कि इसके परिणाम वैश्विक एआई शासन को आकार देने में सार्थक योगदान देंगे। बयान के अनुसार, मोदी और सांचेज ने एआई को एक परिवर्तनकारी शक्ति बताया तथा समावेशी विकास और सामाजिक लाभ के लिए इसकी क्षमता का लाभ उठाने के वास्ते भारत-स्पेन के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। बयान में कहा गया है कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की, विशेष रूप से भारत की नयी शिक्षा नीति के आलोक में। इस संदर्भ में, उन्होंने 19 और 20 फरवरी को नयी दिल्ली में आयोजित होने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और स्पेनिश विश्वविद्यालयों के अधिशिक्षक (रेक्टर) के सम्मेलन का स्वागत किया। बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नयी शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए स्पेन के प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों, विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित (स्टेम) क्षेत्रों में, को आमंत्रित किया है। मोदी और सांचेज ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें स्पेन का 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' में शामिल होने का निर्णय भी शामिल है। बयान के अनुसार, उन्होंने सभी तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंकवाद से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। अक्टूबर 2024 की यात्रा के बाद, सांचेज की भारत की यह दूसरी आधिकारिक यात्रा है। उनके साथ डिजिटल परिवर्तन और सिविल सेवा मंत्री ऑस्कर लोपेज़ अगुएदा और कृषि, मत्स्य पालन और खाद्य मंत्री लुइस प्लानास पुचाडेस भी आए हैं। फिनलैंड के प्रधानमंत्री ओर्पो के साथ अपनी ''विस्तृत चर्चा'' के दौरान, मोदी ने भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए उनके व्यक्तिगत समर्थन को लेकर उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह (एफटीए) भारत-यूरोप संबंधों में एक ''स्वर्णिम युग की शुरुआत'' करता है। मोदी ने 'एक्स' पर एक अन्य पोस्ट में कहा, ''भारत और फिनलैंड का लक्ष्य व्यापार को दोगुना करना है, जिससे आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी। हमने 6जी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, जैव ईंधन, वस्तुओं के पुन:उपयोग वाली अर्थव्यवस्था और अन्य भविष्यवादी प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।'' पीएमओ द्वारा जारी एक अन्य बयान के अनुसार, मोदी और ओर्पो ने 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान संपन्न हुए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत किया। उन्होंने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की भावना से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। सांचेज और ओर्पो यहां 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' में भाग लेने आए हैं, जो वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों, केंद्र और राज्य सरकारों तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक मंच पर लाता है। प्रधानमंत्री यहां 'भारत मंडपम' में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026' का बृहस्पतिवार को उद्घाटन करेंगे। -
लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिमी देशों पर ''जड़वाद'' फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि इन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और जो भी बाधक बने उसे मिटा दो, और आज यही काम अमेरिका और चीन कर रहे हैं। भागवत ने यह भी कहा कि भारत को अगर 'विश्व गुरु' बनना है तो उसे सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान में वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है। उन्होंने कहा, ''पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया। उन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने उन्हें मिटा दो। यही काम आज अमेरिका और चीन कर रहे हैं।'' भागवत ने कहा कि आज दुनिया भर की समस्याओं का जवाब भारत के पास है, मगर यदि उसे विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा, क्योंकि दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो। संघ प्रमुख ने शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं है और यह व्यवसाय नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए। भागवत ने अंग्रेजों पर भारत की शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम के लोगों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी व्यवस्था थोपी, जिससे उन्हें काम करने के लिए ''काले अंग्रेज'' मिल जाएं। उन्होंने कहा, ''अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा।''
आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है और संघ को समझना है तो संघ के अंदर आकर कर देखें, क्योंकि संघ को पढ़ कर नहीं समझा जा सकता।'' उन्होंने कहा, ''संघ को सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाला एक ही काम करना है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए।'' भागवत ने शोध की भूमिका के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। उन्होने शोधार्थियों से कहा कि जो भी शोध करें उसे उत्कृष्ट रूप से, प्रामाणिकता पूर्वक और निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें। संघ प्रमुख ने कहा कि संघ को लेकर बहुत ''दुष्प्रचार'' होता है, और शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए। उन्होंने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ''सृष्टि जिन नियमों से चलती है वह धर्म है। धर्म सबको सुख पहुंचाता है। हमारी सभी बातों में धर्म लागू है।'' विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) संबंधी नये नियमों को लेकर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से मुलाकात की। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के सदस्यों ने भागवत के विश्वविद्यालय के दौरे के खिलाफ प्रदर्शन किया। एनएसयूआई की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष अहमद रजा खान ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि संगठन का यह प्रदर्शन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय आगमन के विरोध में था। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ ने समाज के ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया है, ऐसे में संघ प्रमुख का एक ऐसे विश्वविद्यालय में जाना सही नहीं है जो धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। प्रदर्शन में शामिल रहे खान ने कहा कि उनके साथ शामिल हुए पांच और लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। एक पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों को स्थानीय हसनगंज थाने ले जाया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में रखा गया। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत-भूटान की "स्थायी" मित्रता आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित है तथा यह दोनों देशों के बीच साझेदारी को नए व परिवर्तनकारी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन करती रही है। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के साथ बैठक के बाद, मोदी ने चर्चा को "उत्कृष्ट" बताया।
मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के साथ बैठक शानदार रही। हमने इस बात पर चर्चा की कि हम वैश्विक भलाई के लिए और स्थिरता के सिद्धांतों के अनुरूप एआई की शक्ति का उपयोग कैसे कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "आपसी विश्वास, सद्भावना और दोनों देशों के लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों पर आधारित हमारी अटूट भारत-भूटान मित्रता, हमारी साझेदारी को नए और परिवर्तनकारी क्षेत्रों की ओर आगे बढ़ाती रही है।" भूटान के प्रधानमंत्री ने मोदी को अपना "बड़ा भाई" बताते हुए भारत में "ग्लोबल साउथ का पहला एआई शिखर सम्मेलन" आयोजित करने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने भूटान के नरेश, सरकार और भूटान की जनता की ओर से बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। तोबगे यहां चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने आए हैं।
इस शिखर सम्मेलन में 500 से अधिक वैश्विक एआई नेता भाग ले रहे हैं, जिनमें सीईओ/सीएक्सओ, 150 शिक्षाविद और शोधकर्ता, और 400 मुख्य तकनीकी अधिकारी और उपाध्यक्ष आदि शामिल हैं। इसमें 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख तथा लगभग 60 मंत्री और उप मंत्री शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अधिकारियों को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत छह करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "जोर शोर" से काम करने का निर्देश दिया। चौहान ने उन्हें 10 करोड़ महिलाओं को वित्तीय समावेशन पहल से जोड़ने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए चौहान ने मिशन की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन विस्तारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक केंद्रित रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए महिलाओं के बीच बैंक संपर्क, ऋण तक पहुंच, बीमा कवरेज और वित्तीय साक्षरता का विस्तार करना आवश्यक होगा। उन्होंने जोर दिया कि स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों की आजीविका को मजबूत करने और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय समावेशन महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा, ''छह करोड़ लखपति दीदी बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की विभिन्न वित्तीय समावेशन पहल से कम से कम 10 करोड़ महिलाओं को जोड़ना होगा।" उन्होंने अधिकारियों को इन लक्ष्यों की कामयाबी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ करीबी समन्वय में काम करने का निर्देश दिया। चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोष का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में प्रदर्शन या व्यय अपेक्षा से कम है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, सहायता और प्रोत्साहन प्रदान किया जाना चाहिए। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस मिशन के तहत अब तक लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की बैंक-संबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, करीब पांच करोड़ लोगों को वित्तीय साक्षरता पहल से जोड़ा गया है और लगभग सात करोड़ लाभार्थियों को बीमा कवरेज प्रदान किया गया है।
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चंडीगढ़. पंजाब के तरनतारन में एक शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें दूल्हा और कई मेहमान दुल्हन पर 'करोड़ों रुपये' के नोटों की बारिश करते दिख रहे हैं और 'डांस फ्लोर' पर ढेर सारे नोट नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को लेकर लोगों ने इस रकम के 10 करोड़ रुपये होने समेत कई तरह के दावे किए हैं। हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद डीजे संचालक सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी रही इन अटकलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया। यह विवाह कार्यक्रम पट्टी इलाके में 14 फरवरी को संपन्न हुआ। इससे संबंधित वीडियो में दूल्हा एक बैग से नोटों की गड्डियां निकालकर हवा में उछालता नजर आ रहा है। उसके साथ कई मेहमान भी इसमें शामिल हो जाते हैं, जिससे देखते ही देखते पूरा 'डांस फ्लोर' नोटों से भर जाता है। डीजे संचालक सिंह ने दुल्हन पर करोड़ों रुपये के नोटों की बारिश के दावों को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "कुछ लोग अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आठ करोड़, 10 करोड़ या 10 लाख रुपये उड़ाने के दावे कर रहे हैं। वे ऐसे दावे इसलिए कर रहे हैं ताकि वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लोग देखें।" उन्होंने कहा कि इसमें शामिल कुल नकदी वास्तव में 2.5 लाख से तीन लाख रुपये के बीच थी। इनमें से अधिकांश नोट 10 रुपये के थे, हालांकि कुछ डॉलर भी थे।
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नयी दिल्ली/ भारत की एआई (कृत्रिम मेधा) क्षमता पर बड़ा दांव लगाते हुए गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने बुधवार को भारत, अमेरिका और अन्य स्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए समुद्र के भीतर केबल बिछाने की एक नयी पहल की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने 800 जिलों के दो करोड़ से अधिक लोक सेवकों को क्लाउड अवसंरचना मंच सहायता प्रदान करने के लिए साझेदारी की भी घोषणा की। 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में हिस्सा लेने आए पिचाई ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद एक मीडिया कार्यक्रम में कहा, ''एआई हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा बदलाव है। भारत जैसे देशों के लिए यह पुरानी कमियों को दूर करने और नए अवसर पैदा करने का एक बड़ा मौका है।'' शोध एवं वैज्ञानिक नवोन्मेषण को बढ़ावा देने के लिए गूगल ने तीन करोड़ डॉलर के 'एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज' की घोषणा की। यह पहल अगली पीढ़ी की वैज्ञानिक खोजों में लगे एआई शोधकर्ताओं का समर्थन करेगी। पिचाई ने विशाखापत्तनम में हाल ही में घोषित 15 अरब डॉलर के एआई केंद्र का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें 'गीगावाट-स्केल कंप्यूट' सुविधा और एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल केंद्र होगा। जब यह बनकर तैयार होगा, तो यह पूरे भारत के व्यवसायों और लोगों तक उन्नत एआई के लाभ पहुंचाएगा और बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करेगा। गूगल प्रमुख ने 'इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव' का अनावरण किया। यह अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के विभिन्न स्थानों के बीच एआई संपर्क बढ़ाने के लिए बिछाई जाने वाली समुद्री केबल मार्गों की एक श्रृंखला है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा इसे नवाचार के लिए एक शक्तिशाली आधार बनाता है। गूगल ने 800 जिलों के दो करोड़ से अधिक लोक सेवकों की सहायता के लिए 'कर्मयोगी भारत' के साथ एक बड़ी साझेदारी की घोषणा की है। गूगल क्लाउड इसके लिए 18 भारतीय भाषाओं में सुरक्षित बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा। इसके अलावा, 'अटल टिंकरिंग लैब्स' के साथ मिलकर 10,000 स्कूलों के 1.1 करोड़ विद्यार्थियों को 'जनरेटिव एआई', रोबोटिक्स और कोडिंग की शिक्षा दी जाएगी। विद्यार्थियों और शुरुआती करियर वाले पेशेवरों के लिए हिंदी और अंग्रेजी में 'गूगल एआई पेशेवर प्रमाणपत्र कार्यक्रम' शुरू किया गया है। साथ ही, गूगल डीपमाइंड और भारत सरकार के बीच 'राष्ट्रीय साझेदारी कार्यक्रम' के तहत समझौता हुआ है, जिससे उन्नत एआई क्षमताओं तक पहुंच और व्यापक होगी। पिचाई ने 'एक्स' पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपनी तस्वीरों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में एआई को हर स्तर पर लागू करने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने भी भारतीय विद्यार्थियों और पेशेवरों के साथ गूगल के सहयोग की सराहना की। पिचाई ने कहा कि भारत में 'जेमिनी' ऐप का तेजी से विस्तार हो रहा है और यह यहां 10 भाषाओं में उपलब्ध है। उन्होंने जोर दिया कि एआई को पारदर्शी, जिम्मेदार और स्थानीय संदर्भों के अनुरूप होना चाहिए ताकि लोग प्रौद्योगिकी पर भरोसा कर सकें।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां भारत मंडपम में जारी 'एआई इम्पैक्ट समिट' में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा सहित विश्व के नेताओं का स्वागत किया। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका और भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे का स्वागत ढोल, नादस्वरम और तानपुरा सहित पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन से किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने गर्मजोशी से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया। मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, क्रोएशियाई प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लई, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो उन नेताओं में शामिल थे, जिनका मोदी ने भव्य रूप से सजाये गए भारत मंडपम में स्वागत किया। यूनान के प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोटाकिस और गुयाना के उपराष्ट्रपति भरत जगदेव भी उन नेताओं में शामिल थे, जिनका प्रधानमंत्री ने स्वागत किया। इस शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के 500 से अधिक एआई दिग्गज, करीब 100 सीईओ एवं संस्थापक, 150 शिक्षाविद एवं शोधकर्ता और 400 मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ), उपाध्यक्ष तथा धर्मार्थ कार्य करने वाले व्यक्ति शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भी भाग लेंगे जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष एवं शासन-प्रमुख तथा करीब 60 मंत्री एवं उप मंत्री शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे और इस दौरान दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा उन्हें नए और उभरते क्षेत्रों तक विस्तारित करने पर केंद्रित रहेगी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। आधिकारिक बयान में कहा गया, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी को मुंबई जाएंगे, जहां वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे।'' इसमें कहा गया कि इस दौरान दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह भारत द्वारा आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में भाग लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। यह उनकी भारत की चौथी और मुंबई की पहली यात्रा होगी।
कार्यक्रम के अनुसार, 17 फरवरी को अपराह्न लगभग सवा तीन बजे दोनों नेता मुंबई स्थित लोक भवन में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके बाद शाम लगभग सवा पांच बजे वे 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026' का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं तथा नवाचारकर्ताओं को संबोधित करेंगे। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत कृत्रिम मेधा (एआई) से आ रहे बदलाव के क्षेत्र में अग्रणी है और एआई क्षेत्र में उसकी प्रगति महत्वाकांक्षा एवं दायित्व दोनों को दर्शाती है। मोदी की यह टिप्पणी उस दिन आई है जब वह यहां भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो' 2026 का उद्घाटन करने वाले हैं। 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो' 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के साथ किया जाएगा। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, '' एआई पर चर्चा करने के लिए दुनिया को एक साथ ला रहे हैं! आज से, भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी कर रहा है। मैं इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूं।'' उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन का विषय ''सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय'' है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए कृत्रिम मेधा का उपयोग करने की ''हमारी साझा प्रतिबद्धता'' को दर्शाता है। मोदी ने कहा कि आज एआई स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। उन्होंने कहा कि 'एआई इम्पैक्ट समिट' एआई के विविध पहलुओं जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदार उपयोग आदि पर वैश्विक चर्चा को समृद्ध करेगा। मोदी ने कहा, ''मुझे विश्वास है कि शिखर सम्मेलन के परिणाम एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत की 1.4 अरब जनता की बदौलत हमारा देश एआई से आए परिवर्तन में अग्रणी स्थान पर है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर जीवंत स्टार्टअप तंत्र और अत्याधुनिक अनुसंधान तक, एआई में हमारी प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।" इससे पहले रविवार को मोदी ने भारत को डिजिटल बुनियादी ढांचे और कृत्रिम मेधा के वैश्विक केंद्र के रूप में पेश किया और कहा कि भारत दुनिया के डेटा को संभालने एवं प्रौद्योगिकी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
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जयपुर. राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी शहर में सोमवार को एक रसायन कारखाने में आग लगने से सात श्रमिक जिंदा जल गए और अब भी दो कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना भिवाड़ी के खुशखेड़ा करौली औद्योगिक क्षेत्र की है।
पुलिस अधीक्षक प्रशांत किरण ने हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि मरने वालों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अतिरिक्त जिलाधिकारी सुमिता मिश्रा ने बताया कि पुलिस टीम ने नियमित गश्त के दौरान कारखाने में आग लगी देखी जिसके बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने कहा, ''कारखाने में नौ लोग फंसे हुए थे। अब तक सात शव निकाले जा चुके हैं। -
अमरावती. माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स सोमवार को यहां राज्य सचिवालय पहुंचे, जहां आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने उनका स्वागत किया। आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई। विज्ञप्ति के अनुसार बाद में मुख्यमंत्री ने अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्यों से उनका परिचय कराया। इसके बाद गेट्स ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की। नायडू ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "आपका फिर से स्वागत है, बिल गेट्स! आंध्र प्रदेश आपका स्वागत करता है।" इससे पहले गेट्स का गन्नावरम हवाई अड्डे पर लोकेश और उनके वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों ने स्वागत किया था। लोकेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "अमरावती में आपका स्वागत है, बिल गेट्स। आज गन्नावरम हवाई अड्डे पर गेट्स फाउंडेशन के प्रमुख का स्वागत करना खुशी की बात है।" गेट्स आंध्र प्रदेश के मंत्रियों के साथ स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी योजनाओं में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा के लिए सचिवालय पहुंचे। लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश जनकल्याण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले समाधान तैयार करने हेतु फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है। मुख्यमंत्री ने गेट्स से राज्यभर में जारी स्वास्थ्य पहलों को विस्तार देने का अनुरोध किया है और चर्चा में कृत्रिम मेधा (एआई) पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। गेट्स फाउंडेशन चित्तूर जिले के कुप्पम में स्वास्थ्य संबंधी परियोजनाओं पर पहले से ही काम कर रहा है और माना जा रहा है कि इन पहलों को राज्य भर में विस्तार देने पर विचार किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, बाद में गेट्स 'रियल टाइम गवर्नेंस सिस्टम' (आरटीजीएस) का अवलोकन करेंगे, जहां वे शासन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को देखेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री नायडू इस प्रणाली के काम करने का तरीका और परिणाम के बारे में उन्हें बताएंगे। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ''स्वर्ण आंध्र 2047'' दृष्टिकोण और चिकित्सा प्रौद्योगिकी, निदान सेवाओं और स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटलीकरण कार्यक्रम संजीवनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों पर भी प्रस्तुति देंगे। सचिवालय में इन कार्यक्रमों के बाद, गेट्स और उनकी टीम अमरावती के उंडावल्ली गांव में स्थित एक कृषि केंद्र जाएगी, जहां वे ड्रोन और एआई के उपयोग का अवलोकन करेंगे। मंत्री पी नारायण ने कहा कि गेट्स इससे पहले अविभाजित आंध्र प्रदेश का दो बार दौरा कर चुके हैं। उनके अनुसार, गेट्स का वर्तमान दौरा मुख्यमंत्री नायडू द्वारा राज्य सरकार के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए दिए गए आमंत्रण के बाद हो रहा है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को कहा कि भारत कृत्रिम मेधा (एआई) के ''महाकुंभ'' की मेजबानी कर रहा है, जहां पांच दिवसीय एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन के लिए दुनिया भर के नेता, नवोन्मेषी उद्यम, नवप्रवर्तक और शोधकर्ता एकत्र हुए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन के नतीजों पर न केवल भारत की बल्कि पूरी दुनिया की नजर है। उन्होंने कहा, '' दुनिया यहां एकजुट हो रही है और यह वास्तव में ऐतिहासिक है। यह भारत की प्रगति यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि एवं गौरव का क्षण है कि हम इतनी व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के साथ इस 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' की मेजबानी कर रहे हैं जिसमें राष्ट्राध्यक्षों से लेकर प्रौद्योगिकी जगत के दिग्गज तक शामिल हो रहे हैं। '' मंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन के लिए नवोन्मेषी उद्यम, नवप्रवर्तक और शोधकर्ता भी यहां पहुंचे हैं।
प्रसाद ने कहा, '' इसलिए मैं कह सकता हूं कि यह वास्तव में प्रयागराज के कुंभ जैसा है। यह एआई का महाकुंभ है जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है।'' यह सम्मेलन 16 से 20 फरवरी तक राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित किया जा रहा है। इसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं जिनमें मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, विदेशी प्रतिनिधि तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य शामिल हैं। यह सम्मेलन ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में हुए पिछले आयोजनों के बाद चौथा एआई शिखर सम्मेलन है।
वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन के साथ-साथ ब्राजील व फ्रांस सहित लगभग 20 देशों के नेता भी शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले लगभग 100 देशों के प्रतिभागियों में शामिल हैं। गौरतलब है कि 'महाकुंभ' दुनिया का सबसे बड़ा एवं पवित्र हिंदू तीर्थ आयोजन माना जाता है। यह हर 12 वर्ष में प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में आयोजित किया जाता है और इसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। पिछला महाकुंभ वर्ष 2025 में आयोजित किया गया था। -
नयी दिल्ली. भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बक्र अहमद ने सोमवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और दोनों ने कई मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी ''भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबू बक्र अहमद साहब के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''सामाजिक सद्भाव, भाईचारा बढ़ाने और शिक्षा में सुधार लाने के उनके प्रयास सराहनीय हैं।'' प्रधानमंत्री ने मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं।
शेख अबू बक्र अहमद भारत के 10वें और वर्तमान ग्रैंड मुफ्ती हैं, जिन्हें फरवरी 2019 में नियुक्त किया गया था। केरल के एक प्रमुख सुन्नी विद्वान के रूप में, वह अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलमा का नेतृत्व करते हैं। -
नयी दिल्ली. इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मुख्य 2026 में 12 अभ्यर्थियों ने 'परफेक्ट 100' अंक प्राप्त किए हैं, जिनमें से अधिकांश राजस्थान से हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने सोमवार को यह घोषणा की। इस महत्वपूर्ण परीक्षा के पहले संस्करण में 13.04 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।
सूत्रों के अनुसार, छात्रों और अन्य हितधारकों द्वारा विसंगतियों को उजागर किए जाने के बाद अंतिम उत्तर कुंजी से कम से कम नौ प्रश्न हटा दिए गए। एक सूत्र ने बताया, "कई पालियों में हटाए गए नौ प्रश्नों के लिए, उस विशेष पाली में उपस्थित होने वाले सभी उम्मीदवारों को पूरे अंक दिए जाएंगे।" पिछले साल ऐसे सवालों की संख्या छह थी।
जिन प्रतिभागियों ने एनटीए में 'परफेक्ट 100' अंक प्राप्त किए हैं, उनमें से तीन राजस्थान से, दो आंध्र प्रदेश से और एक-एक दिल्ली, बिहार, ओडिशा, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना से हैं। ये सभी 12 अभ्यर्थी लड़के हैं और इनमें से 11 सामान्य श्रेणी से हैं।
शीर्ष अभ्यर्थियों में - राजस्थान से कबीर छिल्लर, चिरंजीव कर और अर्नव गौतम, आंध्र प्रदेश से नरेंद्रबाबू गारी माहिथ और पासाला मोहित, श्रेयस मिश्रा (दिल्ली), शुभम कुमार (बिहार), भावेश पात्रा (ओडिशा), अनय जैन (हरियाणा), माधव विराडिया (महाराष्ट्र), पुरोहित निमय (गुजरात) और विवान शरद माहिश्वरी (तेलंगाना) शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, एनटीए स्कोर प्राप्त अंकों के प्रतिशत के समान नहीं है, बल्कि यह मानकीकृत स्कोर है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "एनटीए स्कोर ऐसे सामान्यीकृत अंक हैं, जो कई पालियों में आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्रों में समान रूप से मापने के लिए तैयार किए जाते हैं। ये अंक उस पाली में परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों के सापेक्ष प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। प्रत्येक पाली में उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंक 0 से 100 तक के पैमाने में परिवर्तित किए जाते हैं। एनटीए अंक प्राप्त अंकों के प्रतिशत के समान नहीं होते।" एनटीए के अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा के सुचारू संचालन की निगरानी और सुविधा प्रदान करने के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष खोलने समेत कई उपाय किये गए थे। -
नई दिल्ली। ‘ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज सोमवार को ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की 25 लाख लाभार्थी महिलाओं के खाते में एक क्लिक से 10 हजार रुपये भेजे। मुख्यमंत्री ने 10 हजार रुपये प्रति महिला को 2,500 करोड़ रुपये की राशि का रिमोट का बटन दबाकर हस्तांतरण किया।
इसके पूर्व 1.56 करोड़ लाभार्थी महिलाओं के खाते में 15,600 करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है। अब कुल मिलाकर 1.81 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये की राशि भेजी जा चुकी है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंस से बड़ी संख्या में जुड़ीं सभी महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस योजना में दी गई सहायता से काफी संख्या में महिलाओं ने अपनी पसंद का रोजगार शुरू किया है। जो महिलाएं अपना रोजगार अच्छे से करेंगी, उन्हें आगे दो लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।उन्होंने कहा कि अब इसके बाद जो परिवार बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही सहायता राशि दे दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने शुरू से ही महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया है। पहले बिहार में स्वयं सहायता समूह की संख्या बहुत कम थी, लेकिन अब संख्या काफी बढ़ गई है।बता दें कि अगले पांच वर्षों में विकास की गति को और तेज करने के लिए ‘सात निश्चय-3’ का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत पहले निश्चय ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के तहत राज्य की प्रति व्यक्ति औसत आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है। नीतीश कुमार ने इस दौरान कई लाभार्थी महिलाओं से वार्ता भी की। इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सहित कई अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिलाधिकारी, लाभार्थी भी जुड़े हुए थे। -
नई दिल्ली। भारतीय वाणिज्य एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने पांच दिवसीय ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ‘महाकुंभ’ बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का बड़ा स्तर और भारी भागीदारी भारत की डिजिटल यात्रा के लिए एक ऐतिहासिक पल है।
फ्रॉम एआई यूजर टू क्रिएटर’ सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने नवाचारकों और उद्यमियों से अपील की कि वे एआई को अपनाएं और इसके जरिए नए समाधान तैयार करें, जो भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाएं।मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब एआई का सिर्फ उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि एआई बनाने वाला देश बन रहा है। उनके अनुसार तकनीक और व्यापार देश की आर्थिक प्रगति के दो मुख्य इंजन बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो सरकारें तेजी से बदलती तकनीक के साथ खुद को नहीं ढालेंगी, वे वैश्विक दौड़ में पीछे रह जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की ‘टैलेंट कैपिटल’ है, लेकिन भविष्य की तकनीकों को अपनाते रहना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि एआई केवल पढ़ाई का विषय नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे युवाओं के कौशल विकास का साधन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एआई का उपयोग अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों की जरूरतों के अनुसार किया जाए, न कि चर्चा केवल बड़े भाषा मॉडल तक सीमित रहे।उनके अनुसार ग्लोबल साउथ के देश अब सैद्धांतिक बहस नहीं, बल्कि ऐसे एआई समाधान चाहते हैं जो लोगों के जीवन पर सीधा असर डालें और कारोबार करने तथा जीवन जीने को आसान बनाएं। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीक समाज के हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए। डेटा को एआई इकोसिस्टम का ‘ईंधन’ बताते हुए उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाला डेटा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि तकनीक वास्तव में लोगों के जीवन में बदलाव ला सके। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ में 2.5 लाख से अधिक लोगों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन का उद्देश्य वैश्विक एआई क्षेत्र में नई साझेदारियां और व्यापार के अवसर पैदा करना है। (



























