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- नयी दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, रोजगार और कौशल बढ़ाने और मानव संसाधन और सामाजिक न्याय को ऊपर उठाने का वादा किया गया है। गडकरी ने कहा कि बुनियादी ढांचे, नवाचार, अनुसंधान और अगली पीढ़ी के सुधारों पर मजबूत ध्यान बिन्दु के साथ यह बजट सभी क्षेत्रों में भारत की महत्वपूर्ण उन्नति के लिए मंच तैयार करता है। उन्होंने हैशटैग ‘बजट फॉर विकसित भारत' के साथ ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘एक उज्जवल, अधिक समृद्ध भविष्य हम सभी की प्रतीक्षा कर रहा है।'' गडकरी ने आगे कहा कि यह दूरदर्शी बजट सतत विकास, नवाचार और स्थायी प्रगति को बढ़ावा देता है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के लिए एक टिकाऊ और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करता है।
- नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से मंगलवार को संसद में पेश किए गए 2024-25 के आम बजट को दूरदर्शी, जनहितैषी और विकासोन्मुखी करार दिया और कहा कि यह रोजगार तथा अवसरों के एक नए युग की शुरुआत करके देश को एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने की राह पर ले जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बजट भारत की उद्यमशीलता को बढ़ाने और व्यापार करने में सुगमता के साथ आर्थिक विकास को दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘दृढ़ प्रतिबद्धता' को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बजट में कर आकलन नियमों को सरल बनाकर करदाताओं को राहत दी गई है।शाह ने कहा कि यह न केवल भारत के उद्देश्य, उम्मीद और आशावाद की नयी भावना का उदाहरण प्रस्तुत करता है, बल्कि उन्हें मजबूत भी करता है। उन्होंने हैशटैग ‘बजटफॉरविकसितभारत' के साथ ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत के युवाओं, महिलाओं और किसानों की शक्ति का उपयोग करते हुए यह बजट रोजगार और अवसरों के एक नए युग की शुरुआत करके एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने के मार्ग पर राष्ट्र की गति को बढ़ावा देता है।''केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बजट देशवासियों की आशाओं, आकांक्षाओं और विश्वास को पूरा करने के लिए मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के संकल्प का परिचायक भी है। उन्होंने कहा, ‘‘यह बजट युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ किसानों के लिए कई अवसर प्रदान करते हुए एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।'' उन्होंने कहा, ‘‘जनहितैषी और विकासोन्मुखी दूरदर्शी बजट के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करता हूं।'' शाह ने कहा कि आज बजट में कृषि क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये की घोषणा इस क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होने वाली है। उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट में 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक कृषि के लिए सर्टिफाई करने, 10 हजार बायो-इनपुट सेंटर्स की स्थापना, कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण, 400 जिलों में खरीफ फसलों का क्रॉप सर्वे और तिलहनों के लिए एक कार्यनीति का निर्माण जैसे निर्णयों से कृषि क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ेगा।''बजट में ‘राष्ट्रीय सहकारी नीति' के निर्माण की घोषणा का उल्लेख करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह देश में सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाने और जमीनी स्तर पर इसकी पहुंच को मजबूत करने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि साथ ही मत्स्य सहकारिता को झींगा की खेती, प्रसंस्करण और निर्यात के लिए नाबार्ड के माध्यम से वित्तपोषण की सुविधा से नई गति मिलेगी। देश के पूर्वी क्षेत्र के विकास को नई गति देने के लिए बजट में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के लिए ‘पूर्वोदय' योजना की घोषणा का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि इस योजना से इन क्षेत्रों में अवसंरचना, मानव संसाधन, रोजगार व आर्थिक विकास के अवसरों को नई ऊर्जा मिलेगी और विकसित व आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में ये क्षेत्र महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बजट में जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ‘पीएम जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान' शुरू किए जाने की घोषणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान से 63 हजार गांवों के लगभग 5 करोड़ जनजातीय बहन-भाई लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा, ‘‘इससे न सिर्फ ये गांव विकास की मुख्यधारा में जुड़ेंगे, बल्कि उत्तम अवसंरचना व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति से वे आदर्श ग्राम भी बनेंगे।''
- नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को पेश आम बजट में आयकर मोर्चे पर मध्यम वर्ग एवं नौकरीपेशा लोगों को राहत देने और अगले पांच साल में रोजगार सृजन के लिए दो लाख करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल सहयोगी दलों के शासन वाले राज्यों- बिहार और आंध्र प्रदेश के लिए कई परियोजनाओं का भी ऐलान किया। भाजपा को लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं मिलने के लिए ग्रामीण असंतोष और बेरोजगारी को जिम्मेदार माना गया है। सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में ग्रामीण विकास के लिए 2.66 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया। वहीं आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बजट में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 प्रतिशत है। सीतारमण ने अपना सातवां और नरेन्द्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए स्टार्टअप में सभी श्रेणी के निवेशकों के लिए ‘एंजल कर' समाप्त करने की घोषणा की। जब कोई गैर-सूचीबद्ध या स्टार्टअप कंपनी शेयर जारी कर पूंजी जुटाती है और उसका मूल्य कंपनी के उपयुक्त बाजार मूल्य से अधिक होता है, तब उस पर ‘एंजल कर' लगाया जाता है। बजट में मोबाइल फोन एवं सोने पर सीमा शुल्क में कटौती की गई है और पूंजीगत लाभ कर को सरल बनाया गया है। हालांकि, वित्त मंत्री ने प्रतिभूतियों के वायदा एवं विकल्प खंड में प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को बढ़ा दिया। इस कदम से शेयर बाजारों में गिरावट आई। वित्त मंत्री ने बिहार के लिए एक्सप्रेसवे, बिजलीघर, हेरिटेज कॉरिडोर और नए हवाई अड्डों जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन करने की घोषणा की। यह घोषणा ऐसे समय की गयी है, जब राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।बिहार को वित्तीय समर्थन पूंजीगत परियोजनाओं के रूप में है। यह सब्सिडी या नकद सहायता के रूप में नहीं है। बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी जदयू (जनता दल यूनाइटेड) राज्य के लिए आर्थिक पैकेज और विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है। इसी तरह, आंध्र प्रदेश के लिए बहुपक्षीय एजेंसियों के माध्यम से वित्तीय सहायता के रूप में 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) हाल ही में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हुई है। सीतारमण ने कहा, ‘‘ऐसे समय जब दुनिया में अनिश्चिततताएं हैं, भारत की आर्थिक वृद्धि एक अपवाद बनी हुई है और आने वाले वर्षों में भी ऐसा ही रहेगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘इस बजट में हम विशेष रूप से रोजगार, कौशल विकास, एमएसएमई और मध्यम वर्ग और पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।'' वित्त मंत्री ने कहा कि 4.1 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और अन्य अवसर उपलब्ध कराने की योजनाओं और उपायों के लिए पांच साल की अवधि में दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा शिक्षा, रोजगार और कौशल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये का निर्धारण किया गया है। उन्होंने मध्यम वर्ग के लिए मानक कटौती को 50 प्रतिशत बढ़ाकर 75,000 रुपये करने के साथ नई आयकर व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले करदाताओं के लिए कर स्लैब में बदलाव किया। मानक कटौती के तहत आयकर की गणना करने से पहले वर्ष में अर्जित कुल वेतन में से निश्चित राशि घाटा दी जाती है। उन्होंने कहा कि इससे करदाताओं को नई कर व्यवस्था के तहत सालाना 17,500 रुपये तक की बचत होगी। नई व्यवस्था में कर की दरें कम हैं। हालांकि, इसमें मिलने वाली छूट भी न के बराबर है। रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बजट में कंपनियों के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इसमें पहली बार काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक महीने के वेतन का भुगतान और रोजगार के पहले चार वर्षों में उनके सेवानिवृत्ति निधि अंशदान के संबंध में नियोक्ताओं को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के ईपीएफओ योगदान के लिए दो साल के लिए 3,000 रुपये प्रति माह तक का ‘रिम्बर्समेंट' शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कौशल में सुधार के साथ छात्रों के लिए इंटर्नशिप के लिए एक कार्यक्रम चलाया जाएगा। उच्च शिक्षा के लिए रियायती कर्ज भी प्रदान किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में भारत की आधिकारिक बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत आंकी गई है, लेकिन निजी एजेंसियों के मुताबिक इसका स्तर कहीं अधिक है। सीतारमण ने कहा कि सरकार का राजकोषीय घाटा 2024-25 में जीडीपी का 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह 2024-25 के लिए फरवरी में पेश अंतरिम बजट में अनुमानित 5.1 प्रतिशत से कम है। इसका कारण मजबूत कर संग्रह और भारतीय रिजर्व बैंक से अपेक्षा से अधिक लाभांश प्राप्ति है। उन्होंने सकल बाजार उधारी को मामूली रूप से घटाकर 14.01 लाख करोड़ रुपये कर दिया।वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन करोड़ किफायती आवासों के निर्माण के लिए सहायता, छोटे और मझोले उद्यमों को कर्ज सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, मुद्रा योजना के तहत छोटे उद्यमों के लिए कर्ज सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये, 12 औद्योगिक पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का उद्यम पूंजी कोष स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। बजट में उधारियों को छोड़कर कुल प्राप्तियां 32.07 लाख करोड़ और व्यय 48.21 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया है। शुद्ध कर प्राप्ति 25.83 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है।
- नयी दिल्ली,। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को घोषणा की कि बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और बोधगया में महाबोधि मंदिर कॉरिडोर के व्यापक विकास को सरकार समर्थन देगी ताकि उन्हें ‘विश्व स्तरीय तीर्थ और पर्यटन स्थल' बनाया जा सके। वित्त मंत्री ने कहा कि ये गलियारे सफल काशी विश्वनाथ मंदिर गलियारे की तर्ज पर बनाए जाएंगे।विष्णुपद मंदिर फल्गू नदी के किनारे स्थित सबसे प्राचीन हिंदू मंदिरों में से एक है, वहीं महाबोधि मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘पर्यटन हमेशा हमारी सभ्यता का हिस्सा रहा है। भारत को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के हमारे प्रयासों से रोजगार सृजन होगा, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा अन्य क्षेत्रों के लिए आर्थिक अवसर खुलेंगे।'' अंतरिम बजट में रेखांकित उपायों के अलावा वित्त मंत्री ने पर्यटन क्षेत्र के लिए कुछ और प्रस्ताव रखे।उन्होंने कहा, ‘‘बिहार के गया में विष्णुपद मंदिर और बोधगया में महाबोधि मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर के व्यापक विकास को सहयोग दिया जाएगा और इन्हें सफल काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के प्रारूप पर विश्व स्तरीय तीर्थ और पर्यटन स्थलों में तब्दील किया जाएगा।'' वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बिहार के राजगीर तथा नालंदा में विकास की घोषणाएं भी कीं।उन्होंने कहा, ‘‘राजगीर हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखता है। जैन मंदिर परिसर में 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रत का प्राचीन मंदिर है। सप्तऋषि या सात गर्म झरने गर्म पानी वाले पवित्र ब्रह्म कुंड का निर्माण करते हैं। राजगीर के लिए एक व्यापक विकास पहल की जाएगी।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘हमारी सरकार नालंदा विश्वविद्यालय को उसके गौरवशाली स्वरूप में पुनर्जीवित करने के अलावा नालंदा को एक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का समर्थन करेगी।'
- नयी दिल्ली । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की। लोकसभा में 2024-25 का बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि अनुसंधान, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, तिलहन और दलहन उत्पादन को बढ़ाने और कृषि परिदृश्य में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक योजना की रूपरेखा तैयार की गई है। अपने बजट भाषण में, सीतारमण ने उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों को विकसित करने के लिए कृषि अनुसंधान ढांचे की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु-सहिष्णु किस्मों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कृषि अनुसंधान ‘सेटअप' की व्यापक समीक्षा करेगी।'' शोध निधि चुनौती-आधारित होगी और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खुली होगी, जिसमें किसी विशेष क्षेत्र के विशेषज्ञ शोध के संचालन की देखरेख करेंगे। सीतारमण ने घोषणा की कि किसानों की जल्द ही 32 खेत और बागवानी फसलों में 109 नई उच्च उपज वाली, जलवायु-सहिष्णु किस्मों तक पहुंच होगी। महत्वपूर्ण फसलों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए, मंत्री ने दलहन और तिलहन पर केंद्रित मिशन की योजनाओं का खुलासा किया, जिसका उद्देश्य उनके उत्पादन, भंडारण और विपणन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। सीतारमण ने कहा, ‘‘अंतरिम बजट में घोषित की गई रणनीति के अनुसार, सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे तिलहनों के लिए 'आत्मनिर्भरता' हासिल करने के लिए एक रणनीति बनाई जा रही है।'' अनुसंधान और फसल विविधीकरण पर सरकार का जोर टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ आता है।सीतारमण ने अगले दो वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के तहत लाने की पहल की घोषणा की, जिसे प्रमाणन और ब्रांडिंग प्रयासों द्वारा समर्थित किया जाएगा। इस क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए उन्होंने तीन वर्षों में किसानों और उनकी भूमि को कवर करते हुए कृषि में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) को लागू करने की योजनाओं की रूपरेखा तैयार की। इस पहल में डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान और भूमि रजिस्ट्री का निर्माण शामिल है।सीतारमण ने कहा, ‘‘चालू वित्त वर्ष में सरकार 400 जिलों में डीपीआई का उपयोग करके खरीफ मौसम के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण करेगी। छह करोड़ किसानों और उनकी भूमि का विवरण किसान और भूमि रजिस्ट्री में लाया जाएगा।'' बजट में प्रमुख उपभोग केंद्रों के पास बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन क्लस्टर विकसित करने, आपूर्ति श्रृंखला में किसान-उत्पादक संगठनों और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के प्रावधान भी शामिल हैं। मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सीतारमण ने झींगा मछली उत्पादन और निर्यात के लिए नाबार्ड के माध्यम से न्यूक्लियस प्रजनन केंद्रों का एक नेटवर्क स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की। उन्होंने कुछ ब्रूडस्टॉक, पॉलीचेट वर्म, झींगा और मछली चारे पर मूल सीमा शुल्क को घटाकर पांच प्रतिशत करने तथा झींगा एवं मछली चारे के निर्माण के लिए विभिन्न आदानों पर सीमा शुल्क में छूट देने का भी प्रस्ताव रखा। वित्त मंत्री ने सहकारी क्षेत्र को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सहयोग नीति की योजनाओं का खुलासा किया। इसके अतिरिक्त, पांच राज्यों में जन समर्थ-आधारित किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने को सक्षम किया जाएगा। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये का आवंटन ग्रामीण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह आवंटन कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के 1.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
- नयी दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को 2024-25 के रक्षा बजट के लिए 6,21,940 करोड़ रुपये आवंटित किए, जो पिछले साल के 5.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। पूंजीगत व्यय 1,72,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रक्षा क्षेत्र का कुल बजट भारत सरकार के कुल बजट का 12.9 प्रतिशत है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि घरेलू पूंजी खरीद के लिए 1,05,518 करोड़ रुपये का आवंटन रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और गति प्रदान करेगा। सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘जहां तक रक्षा मंत्रालय के लिए आवंटन की बात है, मैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 6,21,940.85 करोड़ रुपये के सर्वाधिक आवंटन के लिए धन्यवाद देता हूं जो 2024-25 के लिए सरकार के कुल बजट का 12.9 प्रतिशत है।'' उन्होंने कहा, ‘‘1,72,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत परिव्यय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को और मजबूत करेगा। घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए 1,05,518.43 करोड़ रुपये का प्रावधान आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा देगा।'' सिंह ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि सीमा सड़क संगठन के लिए पूंजीगत मद में पिछले बजट की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक आवंटन किया गया है। बीआरओ को 6,500 करोड़ रुपये का यह आवंटन हमारे सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को और गति देगा।''
- नयी दिल्ली। जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रमुख परियोजना खेलो इंडिया को एक बार फिर खेल मंत्रालय के लिए केंद्रीय बजट में सबसे अधिक राशि आवंटित हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा मंगलवार को पेश केंद्रीय बजट में खेल मंत्रालय के लिए 3,442.32 करोड़ रुपये में से खेलो इंडिया के लिए 900 करोड़ रुपये आवंटित किए गये हैं। यह रकम पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 880 करोड़ रुपये के संशोधित आवंटन से 20 करोड़ रुपये अधिक है।इस साल अगस्त में पेरिस ओलंपिक चक्र समाप्त होने वाला है और राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों अभी भी दो साल का समय है। ऐसे में खेल मंत्रालय के बजट में पिछले चक्र की तुलना में केवल 45.36 करोड़ रुपये की मामूली वृद्धि की गयी है। खेल मंत्रालय के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के लिए पिछले चक्र का बजट 3,396.96 करोड़ रुपये था।सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलो इंडिया में भारी निवेश किया है क्योंकि यह कार्यक्रम देश के सभी हिस्सों से प्रतिभाओं को सामने लाने का काम करता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में खेलो इंडिया का वास्तविक आवंटन 596.39 करोड़ रुपये था। अगले साल (2023-24) के बजट में लगभग 400 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इसे हालांकि संशोधित कर 880 करोड़ रुपये किया गया था। खेलो इंडिया युवा खेलों 2018 (केआईवाईजी) की शुरुआत के बाद से सरकार ने इसमें और खेल आयोजनों को जोड़ना जारी रखा है। मंत्रालय ने उसी वर्ष खेलो इंडिया शीतकालीन खेल और 2023 में खेलो इंडिया पैरा खेलों शुरू करने के साथ 2020 में खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेलों की शुरुआत की। देश भर में सैकड़ों खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (केआईएससीई) स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य प्रतिभाशाली उदीयमान खिलाड़ियों को सुविधाएं प्रदान करना है। खेलो इंडिया के कई एथलीट वर्तमान में भारतीय ओलंपिक दल में शामिल हैं। राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को सरकार की सहायता में भी 15 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है । यह 2023-24 में 325 करोड़ रुपये से बढ़कर नवीनतम बजट में 340 करोड़ रुपये हो गई है। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) का बजट भी 795.77 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 822.60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें 26.83 करोड़ रुपये का उछाल है। साइ देश भर में अपने स्टेडियमों के रख रखाव अलावा वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) का प्रबंधन भी करता है। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) को बजट में मामूली वृद्धि मिली है। नाडा और एनडीटीएल का काम खिलाड़ियों की डोपिंग जांच करना है। नाडा के बजट को 21.73 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 22.30 करोड़ रुपये कर दिया गया है जबकि एनडीटीएल के बजट को 19.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 22 करोड़ कर दिया गया है।
- नयी दिल्ली । सरकार ने 2024-25 के बजट में भारत में और विदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को 309.74 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। ये प्रावधान चालू वित्त वर्ष के लिए कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के लिए निर्धारित 2,328.56 करोड़ रुपये के अंतर्गत हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2024-25 के अनुसार, कुल 309.74 करोड़ रुपये में से 103.05 करोड़ रुपये ‘प्रशिक्षण प्रभाग, सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान (आईएसटीएम) तथा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए)' के लिए, 120.56 करोड़ रुपये ‘प्रशिक्षण योजनाओं' के लिए और 86.13 करोड़ रुपये ‘राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम' या मिशन कर्मयोगी के लिए हैं। कार्मिक मंत्रालय के अंतर्गत कार्मिक मंत्रालय, दिल्ली में आईएसटीएम और मसूरी स्थित एलबीएसएनएए ‘फाउंडेशन पाठ्यक्रम, रिफ्रेशर पाठ्यक्रम, करियर के मध्य में प्रशिक्षण सहित कई कार्यक्रमों की व्यवस्था करते हैं, ताकि सचिवालय के सभी स्तर के कर्मचारियों को नवीनतम नियमों और विनियमों, योग्यता आदि के बारे में पर्याप्त जानकारी दी जा सके। इसमें केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) और केंद्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवा (सीएसएसएस) के अधिकारियों के संबंध में घरेलू अथवा विदेशी यात्रा और पाठ्यक्रम शुल्क आदि पर व्यय का भी प्रावधान है।मिशन कर्मयोगी को नौकरशाही में सबसे बड़ी सुधार पहल बताया जाता है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को अधिक ‘रचनात्मक, सक्रिय, पेशेवर और प्रौद्योगिकी-सक्षम' बनाना है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, 120.56 करोड़ रुपये की राशि ‘सभी के लिए प्रशिक्षण', विदेशी में प्रशिक्षण के लिए घरेलू वित्त पोषण, एलबीएसएनएए को उत्कृष्टता केंद्र में अद्यतन करने और आईएसटीएम में प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार जैसी योजनाओं के लिए है। प्रशासनिक सुधारों के लिए 80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें सरकारी कार्यालयों का आधुनिकीकरण और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना शामिल है। चालू वित्त वर्ष के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रचार-प्रसार के लिए 2.6 करोड़ रुपये का कोष निर्धारित किया गया है। लोक सेवकों की शिकायतों के निवारण का जिम्मा संभाल रहे केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) को 157.72 करोड़ रुपये और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) को 418.15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। एसएससी के तहत केंद्र सरकार के लिए विभिन्न पदों पर भर्ती की जाती है।
- नयी दिल्ली,। सरकार ने घरेलू दूरसंचार उपकरण विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बजट 2024-25 में मदरबोर्ड पर आयात शुल्क पांच प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। मदरबोर्ड को तकनीकी रूप से प्रिंटेड सर्किट बोर्ड कहा जाता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा, “घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए मैं निर्दिष्ट दूरसंचार उपकरणों के पीसीबीए (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली) पर बीसीडी (मूल सीमा शुल्क) को 10 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।” बजट में दूरसंचार पीसीबी असेंबली के लिए मूल सीमा शुल्क में वृद्धि के साथ-साथ संचार उपकरणों के विनिर्माण में उपयोग किए जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों को छूट देने का भी प्रस्ताव दिया गया है। वित्त मंत्री ने 25 खनिजों- लिथियम, तांबा, कोबाल्ट को सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने का प्रस्ताव किया है। ये खनिज परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, दूरसंचार और उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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नयी दिल्ली,। सरकार ने मंगलवार को कहा कि विदेशी निवेश को सुगम बनाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित नियमों एवं विनियमों को सरल बनाया जाएगा। यह घोषणा इस लिहाज से अहम है कि हाल के समय में भारत में आने वाले एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई है। सेवाओं, कंप्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर, दूरसंचार, वाहन एवं दवा जैसे क्षेत्रों में कम निवेश के कारण वित्त वर्ष 2023-24 में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 3.49 प्रतिशत घटकर 44.42 अरब डॉलर रह गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश करते हुए एफडीआई प्रोत्साहन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘एफडीआई को सुगम बनाने और विदेशी निवेश के लिए मुद्रा के तौर पर भारतीय रुपये का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए एफडीआई और विदेशी निवेश से संबंधित नियम एवं विनियम आसान बनाए जाएंगे।'' वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान देश में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 46.03 अरब डॉलर रहा था। इक्विटी प्रवाह, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी समेत कुल एफडीआई निवेश पिछले वित्त वर्ष में एक प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 70.95 अरब डॉलर रह गया जबकि 2022-23 में यह 71.35 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष 2021-22 में देश में अबतक का सबसे अधिक 84.83 अरब डॉलर का एफडीआई आया था।
पिछले वित्त वर्ष में मॉरीशस, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), केमैन आइलैंड्स, जर्मनी और साइप्रस सहित प्रमुख देशों से आने वाले एफडीआई इक्विटी निवेश में कमी आई। सेवाओं, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर, दूरसंचार, वाहन, दवा और रसायन क्षेत्रों में विदेशी निवेश में कमी आई। भारत की एफडीआई नीति के मुताबिक, इसके प्रावधानों के अनुपालन का दायित्व निवेश हासिल करने वाली कंपनी पर होता है। एफडीआई नियमों का कोई भी उल्लंघन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के दंडात्मक प्रावधानों के दायरे में आता है, क्योंकि एफडीआई एक पूंजीगत खाता लेनदेन है। आरबीआई फेमा का प्रशासन करता है, और वित्त मंत्रालय के तहत प्रवर्तन निदेशालय फेमा के प्रवर्तन के लिए प्राधिकरण है और कानून के उल्लंघन के मामलों की जांच करता है। हालांकि, अधिकांश क्षेत्रों में स्वत: मंजूर मार्ग के जरिये एफडीआई की अनुमति है, लेकिन मीडिया, दवा एवं बीमा जैसे कुछ क्षेत्रों में, निर्दिष्ट सीमा से परे विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत होती है। सरकारी मार्ग के तहत विदेशी निवेशकों को संबंधित मंत्रालय या विभाग की पूर्व-मंजूरी लेनी होती है। वहीं स्वत: मंजूर मार्ग के जरिये निवेशक को निवेश करने के बाद आरबीआई को केवल अवगत कराना होता है। हालांकि लॉटरी कारोबार, जुआ एवं सट्टेबाजी, चिट फंड, निधि कंपनी, रियल एस्टेट व्यवसाय और सिगार, चुरूट एवं सिगरेट का निर्माण जैसे आठ क्षेत्रों में एफडीआई को प्रतिबंधित किया हुआ है। डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि एफडीआई और विदेशी निवेश के लिए सरल नियम एवं विनियम आने से निश्चित रूप से देश में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश के लिए रुपये को बढ़ावा देने से स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ेगी और इसके मूल्य को भी समर्थन मिलेगा। -
नयी दिल्ली। आम बजट 2024-25 के दस्तावेजों के अनुसार सरकारी खजाने में आने वाले हर एक रुपये में सबसे बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का है। बजट दस्तावेजों में कहा गया है कि प्रत्येक एक रुपये में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से 63 पैसे, उधार और अन्य देनदारियों से 27 पैसे, विनिवेश जैसे गैर-कर राजस्व से नौ पैसे और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों एक पैसा आएगा। कुल मिलाकर 36 पैसे प्रत्यक्ष करों से आएंगे, जिसमें कॉरपोरेट कर और व्यक्तिगत आयकर शामिल हैं। बजट के मुताबिक, आयकर से 19 पैसे मिलेंगे, जबकि कॉरपोरेट कर से सरकार के खाते में 17 पैसे आएंगे। अप्रत्यक्ष करों में माल और सेवा कर (जीएसटी) सरकार को मिलने वाले प्रत्येक एक रुपये में अधिकतम 18 पैसे का योगदान देगा। इसके अलावा, सरकार उत्पाद शुल्क से पांच पैसे और सीमा शुल्क से चार पैसे कमाने की उम्मीद कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में आम बजट 2024-25 पेश किया। इसके अनुसार उधार और अन्य देनदारियों से 27 पैसे प्रति रुपये जुटाए जाएंगे। सरकार के खर्च की बात करें तो प्रत्येक रुपये में ब्याज भुगतान पर 19 पैसे और करों तथा शुल्कों में राज्यों के हिस्से के लिए 21 पैसे जाएंगे। रक्षा के लिए आवंटन आठ पैसे प्रति रुपया है। केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं पर व्यय प्रत्येक रुपये में 16 पैसे होगा, जबकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आवंटन आठ पैसे है। सब्सिडी और पेंशन पर क्रमशः छह पैसे और चार पैसे खर्च होंगे। वित्त आयोग और अन्य हस्तांतरण पर व्यय नौ पैसे तय किया गया है।
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नयी दिल्ली । सरकार ने केंद्रीय बजट में कच्चे माल की लागत में कटौती, मूल्य संवर्धन में वृद्धि, निर्यात प्रतिस्पर्धा और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सोने, चांदी, महत्वपूर्ण खनिजों, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं सहित कई उत्पादों पर सीमा शुल्क में कटौती का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा शीया नट्स, समुद्री क्षेत्र के सामान जैसे झींगा व उसका चारा, मछली का चारा, चारा बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे लिपिड तेल...कैंसर की दवाएं, चांदी तथा प्लैटिनम जैसी अन्य कीमती धातुएं, कपड़ा, इस्पात, तांबा, पूंजीगत सामान, पोत परिवहन, चिकित्सकीय उपकरण और चमड़ा क्षेत्र की वस्तुओं पर भी शुल्क कम कर दिया गया है। कीमती धातुओं के सिक्कों, सोने/चांदी फाइंडिंग और सोने तथा चांदी की छड़ पर मूल सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत करने की घोषणा की गई। सोने और चांदी के ‘डोर' के लिए इसे 14.35 प्रतिशत से घटाकर 5.35 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया। प्लैटिनम, पैलेडियम, ऑस्मियम, रूथेनियम और इरीडियम पर शुल्क 15.4 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। रत्न एवं आभूषण निर्यातक पिछले कई साल से निर्यात तथा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कीमती धातुओं पर शुल्क में कटौती की मांग कर रहे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘‘ सीमा शुल्क के लिए मेरे प्रस्ताव का मकसद घरेलू विनिर्माण को समर्थन देना, स्थानीय मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना, निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना तथा आम जनता और उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोपरि रखते हुए कराधान को सरल बनाना है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ देश में सोने तथा बहुमूल्य धातु के आभूषणों में घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाने के लिए, मैं सोने व चांदी पर सीमा शुल्क को घटाकर छह प्रतिशत और प्लैटिनम पर 6.4 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।'' वित्त मंत्री ने कारोबार सुगमता, उलट शुल्क हटाने और विवादों में कमी लाने के लिए इसे तर्कसंगत और सरल बनाने को अगले छह माह में दर संरचना की व्यापक समीक्षा करने का भी प्रस्ताव रखा। मोबाइल फोन और उसके कलपुर्जों के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में घरेलू उत्पादन में तीन गुना वृद्धि और मोबाइल फोन के निर्यात में करीब 100 गुना वृद्धि के साथ, भारतीय मोबाइल फोन उद्योग परिपक्व हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं उपभोक्ताओं के हित में मोबाइल फोन, मोबाइल पीसीबीए और मोबाइल चार्जर पर बीसीडी (मूल सीमा शुल्क) को घटाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।'' दूसरी ओर उन्होंने कहा कि सरकार अमोनियम नाइट्रेट पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत तथा गैर-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक पर 25 प्रतिशत करेगी। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को उनके उत्पाद बेचने में सक्षम बनाने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) में ई-कॉमर्स निर्यात केंद्र स्थापित किए जाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कारीगर अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेच पाएंगे।मंत्री ने सौर सेल और पैनल के विनिर्माण में प्रयुक्त छूट प्राप्त पूंजीगत वस्तुओं की सूची का विस्तार करने का भी प्रस्ताव रखा। -
नयी दिल्ली,। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा देने के लिए लिथियम, तांबा और कोबाल्ट जैसे खनिजों पर सीमा शुल्क में कटौती की घोषणा की। ये खनिज परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय और अन्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजट भाषण के दौरान अंतरिम बजट का जिक्र किया, जब उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के साथ अधिक संसाधन कुशल आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, ‘‘हम उचित ऊर्जा बदलाव मार्गों पर एक नीति दस्तावेज लाएंगे, जो रोजगार, वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता की जरूरतों को संतुलित करता है।'' उन्होंने 25 महत्वपूर्ण खनिजों पर सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट देने और उनमें से दो पर बीसीडी (मूल सीमा शुल्क) को कम करने का प्रस्ताव रखा। लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और रेयर अर्थ तत्व जैसे खनिज परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, दूरसंचार और उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इससे ऐसे खनिजों के प्रसंस्करण और शोधन को बढ़ावा मिलेगा तथा रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में ऊर्जा बदलाव महत्वपूर्ण है।उन्होंने देश में सौर सेल और पैनल के निर्माण में उपयोग के लिए छूट वाली पूंजीगत वस्तुओं की सूची का विस्तार करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सौर ग्लास और टिंड कॉपर इंटरकनेक्ट की पर्याप्त घरेलू विनिर्माण क्षमता को देखते हुए, इन्हें दी गई सीमा शुल्क की छूट को आगे नहीं बढ़ाने का प्रस्ताव है। उन्होंने फेरो निकल और ब्लिस्टर कॉपर पर बीसीडी को हटाने का प्रस्ताव रखा। -
नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशी कंपनियों पर कॉरपोरेट कर की दर को घटाकर 35 प्रतिशत करने की घोषणा की। वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में विदेशी कंपनियों (विशेष दरों पर वसूले जाने वाले कर को छोड़कर) की आय पर लगने वाले आयकर की दर को 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘हमारी विकास जरूरतों के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए मैं विदेशी कंपनियों पर कॉरपोरेट कर की दर को 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।‘‘ बजट से पहले सोमवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2023-24 में चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बाजार का फायदा उठाने के लिए चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाने की बात कही गई थी। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोप के देश चीन से अपनी विनिर्माण इकाइयों को हटा रहे हैं, लिहाजा चीनी कंपनियों का भारत में निवेश करना और फिर उत्पादों का इन बाजारों में निर्यात करना अधिक कारगर हो सकता है। डेलॉयट इंडिया के भागीदार रोहिंटन सिधवा ने कहा कि विदेशी कंपनियों के लिए कर की दर 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करना और निर्यातकों पर लगने वाले दो प्रतिशत समानीकरण शुल्क को खत्म करना अचरज भरा कदम है।
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नयी दिल्ली ।केंद्रीय बजट में मंगलवार को बिहार के लिए कई बड़े कदम उठाए गए। इनमें राज्य में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय का प्रस्ताव किया गया। इनमें तीन एक्सप्रेसवे, एक बिजली संयंत्र, विरासत गलियारों, नए हवाई अड्डे एवं खेल बुनियादी ढांचे के लिए योजनाओं की रूपरेखा पेश की गई। आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन सड़क संपर्क परियोजनाओं - पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे, तथा बोधगया, राजगीर, वैशाली और दरभंगा एक्सप्रेसवे और बक्सर में गंगा नदी पर एक अतिरिक्त दो-लेन पुल के विकास के लिए केंद्र के समर्थन की घोषणा की। सीतारमण ने कहा कि इन चार परियोजनाओं की कुल लागत 26,000 करोड़ रुपये होगी।
बिहार के लिए अन्य सौगातों में भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2,400 मेगावाट का विद्युत संयंत्र स्थापित करना शामिल है, जिसपर 21,400 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सरकार बिहार में हवाई अड्डे, मेडिकल कॉलेज और खेल संबंधी बुनियादी ढांचा भी स्थापित करेगी।इसके अलावा, केंद्र बिहार की बाढ़ में भी मदद करेगा। बिहार नेपाल से निकलने वाली कई नदियों की बाढ़ से अक्सर पीड़ित रहता है। कोसी से संबंधित बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई परियोजनाओं का सर्वेक्षण और जांच भी की जाएगी।सरकार बाढ़ से निपटने के लिए राज्य को 11,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार बहुपक्षीय विकास एजेंसियों की सहायता से बिहार को वित्तीय सहायता की व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में राजमार्गों के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।सीतारमण ने कहा, “बिहार में नए हवाई अड्डों और खेल अवसंरचना का निर्माण किया जाएगा तथा पूंजीगत निवेश को समर्थन देने के लिए अतिरिक्त आवंटन प्रदान किया जाएगा…। बहुपक्षीय विकास बैंकों से बाह्य सहायता के लिए बिहार सरकार के अनुरोध पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।” देश के पूर्वी भाग को संपदा से समृद्ध बताते हुए उन्होंने कहा, “हम गया में औद्योगिक ‘नोड' के निर्माण का समर्थन करेंगे...यह हमारे सांस्कृतिक महत्व के प्राचीन केंद्रों को आधुनिक अर्थव्यवस्था के भविष्य के केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक अच्छा मॉडल भी होगा।” यह मॉडल वृद्धि पथ में ‘विकास भी विरासत भी' प्रदर्शित करेगा।इसके अलावा, बजट में राजगीर के लिए एक व्यापक विकास पहल का भी प्रस्ताव किया गया। राजगीर हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों के लिए धार्मिक महत्व रखता है। सीतारमण ने घोषणा की कि सरकार बिहार के नालंदा को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में भी सहयोग करेगी। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार नालंदा विश्वविद्यालय को उसका गौरवशाली स्वरूप प्रदान करने के अलावा नालंदा को पर्यटन स्थल केंद्र के रूप में भी विकसित करने में सहयोग करेगी।' वित्त मंत्री ने बिजली परियोजनाओं के बारे में भी बात की। इसमें पीरपैंती (बिहार) में 2,400 मेगावाट बिजली संयंत्र की स्थापना भी शामिल है, जिस पर 21,400 करोड़ रुपये की लागत आएगी। - नयी दिल्ली,। सरकार ने मंगलवार को कहा कि विदेशी निवेश को सुगम बनाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित नियमों एवं विनियमों को सरल बनाया जाएगा। यह घोषणा इस लिहाज से अहम है कि हाल के समय में भारत में आने वाले एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई है। सेवाओं, कंप्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर, दूरसंचार, वाहन एवं दवा जैसे क्षेत्रों में कम निवेश के कारण वित्त वर्ष 2023-24 में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 3.49 प्रतिशत घटकर 44.42 अरब डॉलर रह गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2024-25 का बजट पेश करते हुए एफडीआई प्रोत्साहन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘एफडीआई को सुगम बनाने और विदेशी निवेश के लिए मुद्रा के तौर पर भारतीय रुपये का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए एफडीआई और विदेशी निवेश से संबंधित नियम एवं विनियम आसान बनाए जाएंगे।'' वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान देश में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 46.03 अरब डॉलर रहा था। इक्विटी प्रवाह, पुनर्निवेशित आय और अन्य पूंजी समेत कुल एफडीआई निवेश पिछले वित्त वर्ष में एक प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 70.95 अरब डॉलर रह गया जबकि 2022-23 में यह 71.35 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष 2021-22 में देश में अबतक का सबसे अधिक 84.83 अरब डॉलर का एफडीआई आया था।पिछले वित्त वर्ष में मॉरीशस, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), केमैन आइलैंड्स, जर्मनी और साइप्रस सहित प्रमुख देशों से आने वाले एफडीआई इक्विटी निवेश में कमी आई। सेवाओं, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर, दूरसंचार, वाहन, दवा और रसायन क्षेत्रों में विदेशी निवेश में कमी आई। भारत की एफडीआई नीति के मुताबिक, इसके प्रावधानों के अनुपालन का दायित्व निवेश हासिल करने वाली कंपनी पर होता है। एफडीआई नियमों का कोई भी उल्लंघन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के दंडात्मक प्रावधानों के दायरे में आता है, क्योंकि एफडीआई एक पूंजीगत खाता लेनदेन है। आरबीआई फेमा का प्रशासन करता है, और वित्त मंत्रालय के तहत प्रवर्तन निदेशालय फेमा के प्रवर्तन के लिए प्राधिकरण है और कानून के उल्लंघन के मामलों की जांच करता है। हालांकि, अधिकांश क्षेत्रों में स्वत: मंजूर मार्ग के जरिये एफडीआई की अनुमति है, लेकिन मीडिया, दवा एवं बीमा जैसे कुछ क्षेत्रों में, निर्दिष्ट सीमा से परे विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत होती है। सरकारी मार्ग के तहत विदेशी निवेशकों को संबंधित मंत्रालय या विभाग की पूर्व-मंजूरी लेनी होती है। वहीं स्वत: मंजूर मार्ग के जरिये निवेशक को निवेश करने के बाद आरबीआई को केवल अवगत कराना होता है। हालांकि लॉटरी कारोबार, जुआ एवं सट्टेबाजी, चिट फंड, निधि कंपनी, रियल एस्टेट व्यवसाय और सिगार, चुरूट एवं सिगरेट का निर्माण जैसे आठ क्षेत्रों में एफडीआई को प्रतिबंधित किया हुआ है। डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि एफडीआई और विदेशी निवेश के लिए सरल नियम एवं विनियम आने से निश्चित रूप से देश में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश के लिए रुपये को बढ़ावा देने से स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ेगी और इसके मूल्य को भी समर्थन मिलेगा।
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नई दिल्ली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 2024 के केंद्रीय बजट की आलोचना की। उन्होंने इस बजट को “कुर्सी बचाओ” बजट कहा। कांग्रेस नेता ने कहा कि वित्त मंत्री का बजट दस्तावेज कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणापत्र से नकल किया गया है। एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में, कांग्रेस नेता ने कहा कि यह एक “कुर्सी बचाओ” बजट है।उन्होंने आरोप लगाया कि सहयोगियों को खुश करने के लिए दूसरे राज्यों की कीमत पर उन्हें खोखले वादे किए गए हैं, चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आम भारतीयों को कोई राहत नहीं दी गई है, और कांग्रेस के घोषणापत्र और पिछले बजटों से कॉपी-पेस्ट किया गया है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 2024 के केंद्रीय बजट को “निराशाजनक” बताया। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया। थरूर ने कहा कि आम आदमी की समस्याओं के बारे में कुछ नहीं सुना और मनरेगा का कोई जिक्र नहीं था।उन्होंने एंजेल टैक्स खत्म करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसकी सिफारिश उन्होंने पांच साल पहले अरुण जेटली को की थी। कांग्रेस पार्टी ने बजट भाषण पर हमला करते हुए कहा कि यह कार्रवाई की बजाय दिखावे पर ज्यादा केंद्रित है। पार्टी ने आरोप लगाया कि “कॉपी-पेस्ट सरकार” ने कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र से कई चीजें जस की तस ली हैं।कांग्रेस पार्टी ने एक पोस्ट में कहा कि सरकार ने माना है, “बड़े पैमाने पर बेरोजगारी एक राष्ट्रीय संकट है” और 2024 का बजट राजनीतिक मजबूरियों से भरा हुआ है। शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बजट भाजपा को अगले पांच साल तक बचाने का एक तरीका है। उन्होंने इसे “पीएम सरकार बचाओ योजना” कहा। चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार ने अपने गठबंधन सहयोगियों को खुश करने के लिए बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने से इनकार करने के बाद अब उन्हें फंड दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र को केंद्र द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है और यह एक ऐसा राज्य बन गया है जहां से केवल पैसा लिया जाता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए 2024-25 के बजट को ‘विकास की नयी ऊंचाई’ पर ले जाने वाला महत्वपूर्ण बजट करार दिया और कहा कि यह समाज के हर वर्ग को शक्ति देने वाला है। उन्होंने एक वीडियो संदेश के माध्यम से बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ‘उत्प्रेरक’ का काम करेगा और विकसित भारत की नींव भी रखेगा। वित्त मंत्री और उनकी पूरी टीम को इस बजट के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह बजट देश के गांव, गरीब, किसान को समृद्धि की राह पर ले जाने वाला बजट है।’’मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और इससे नया मध्यम वर्ग बना है, यह उनके सशक्तीकरण की निरंतरता का भी बजट है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह नौजवानों को अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। इस बजट से शिक्षा और स्किल (कौशल) को नयी गति मिलेगी। यह मध्यम वर्ग को नयी ताकत देने वाला बजट है। यह जनजातीय समाज, दलित, पिछड़ों को सशक्त करने की मजबूत योजनाओं के साथ आया है।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बजट से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और इससे छोटे व्यापारियों व लघु उद्योगों को प्रगति का नया रास्ता मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसमें विनिर्माण और अवसंरचना विकास पर भी बल दिया गया है जिससे आर्थिक विकास को नयी गति मिलेगी और निरंतरता मिलेगी।रोजगार और स्वरोजगार के ‘अभूतपूर्व’ अवसर को अपनी सरकार की पहचान करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का बजट इसे और सुदृढ़ करता है। रोजगार संबंधी बजट घोषणाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे देश में करोड़ों नए रोजगार बनेंगे और जीवन में पहली नौकरी पाने वाले युवा की पहली तनख्वाह सरकार देगी।उन्होंने कहा, ‘‘कौशल विकास और उच्च शिक्षा के लिए मदद हो या फिर एक करोड़ नौजवानों को इंटेंसिव (प्रोत्साहन) की योजनाएं, इससे गांव के गरीब युवाओं को देश की शीर्ष कंपनियों में काम करने का अवसर मिलेगा, उनके सामने संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे। हमें हर शहर, हर गांव में घर-घर उद्यमी बनाना है।’’बिना गारंटी मुद्रा लोन की सीमा को 10 लाख से बढ़कर 20 लाख रुपए बढ़ाए जाने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों विशेष रूप से महिलाओं, दलित, पिछड़़े, आदिवासी परिवारों में स्वरोजगार को बल मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम सब लोग मिलकर भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि बजट में भारत के रक्षा क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के लिए अनेक प्रावधान हैं और इसमें पर्यटन क्षेत्र पर भी ध्यान दिया गया है। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बच्चों के लिए नई पेंशन योजना ‘वात्सल्य’ शुरू करने की घोषणा की।वित्त मंत्री ने संसद में 2024-25 का बजट पेश करते हुए कहा कि इस पेंशन योजना में माता-पिता और अभिभावक अंशदान करेंगे। बच्चे के वयस्क होने पर, इस योजना को सहज रूप से एक सामान्य एनपीएस खाते में बदला जा सकेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि एनपीएस की समीक्षा के लिए गठित समिति ने अपने काम में पर्याप्त प्रगति की है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने मार्च, 2023 में एनपीएस लाभ को बेहतर बनाने के लिए वित्त सचिव टी वी सोमनाथन की अगुवाई में एक समिति का गठन किया था।
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नई दिल्ली। सैलरीड क्लास के लिए बजट 2024 (Budget 2024) से बड़ी खबर निकल कर आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने मंगलवार को 2024 का बजट पेश करते हुए न्यू टैक्स रिजीम (New tax regime) में बड़ा बदलाव किया है।बता दें कि न्यू टैक्स रिजीम में अब आप स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) के तहत 50,000 रुपये की जगह 75,000 रुपये तक का फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत टैक्स स्लैब में भी कुछ बदलाव किया है।
न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) के तहत अब सालाना 3 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। 3 लाख से 7 लाख रुपये की कमाई पर 5 प्रतिशत, 7 लाख से 10 लाख रुपये पर 10 प्रतिशत, 10 लाख से 12 लाख रुपये पर 15 प्रतिशत, 12 लाख से 15 लाख रुपये पर 20 प्रतिशत और 15 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा।सरकार का कहना है कि इन बदलावों से नौकरीपेशा लोगों (Salaried Class) को सालाना 17,500 रुपये तक की बचत हो सकती है। हालांकि, पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।बदलाव के बाद क्या होगा नया टैक्स स्लैबइनकम टैक्स रेट3 लाख तक शून्य3 से 7 लाख तक 5%7 से 10 लाख तक 10 %10 से 12 लाख तक 15%12 से 15 लाख तक 20%15 लाख रुपये से ज्यादा 30%न्यू टैक्स रिजीम के तहत अभी कितना है टैक्स स्लैब
इनकम टैक्स रेट3 लाख तक शून्य3 से 6 लाख तक 5%6 से 9 लाख तक 10%9 से 12 लाख तक 15%12 से 15 लाख तक 20%15 लाख से ऊपर 30%2020 में शुरू की गई थी न्यू टैक्स रिजीमफिलहाल देश में इनकम टैक्स की दो प्रणाली मौजूद हैं। पहली, जिसे ओल्ड टैक्स स्लैब (Old Tax Slab Or Regime) के नाम से जाना जाता है। वहीं साल 2020 में सरकार ने नई टैक्स प्रणाली (New Tax Slab) शुरू की। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में आसानी करने के लिए ये नई व्यवस्था शुरू की गई थी। देश में हालांकि नई टैक्स प्रणाली शुरू करने के साथ ही अभी पुरानी टैक्स प्रणाली को भी बरकरार रखा गया है। -
नई दिल्ली। मंगलवार को केंद्रीय बजट 2024-25 पेश करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक नई इंटर्नशिप योजना की घोषणा की। इस योजना के तहत, अगले पांच सालों में एक करोड़ युवाओं को फायदा मिलेगा। सीतारमण ने कहा कि देश की टॉप 500 कंपनियों में युवाओं को इंटर्नशिप के मौके दिए जाएंगे।इस कदम का मकसद है उत्पादन और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देना और युवाओं को काम का अनुभव दिलाना। उन्होंने अपने भाषण में बताया कि सरकार इस व्यापक योजना को लागू करेगी, जिससे युवाओं को बड़ी कंपनियों में काम सीखने का मौका मिलेगा।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस इंटर्नशिप योजना के तहत युवाओं को 12 महीने तक असली बिजनेस माहौल में काम करने का मौका मिलेगा। वे विभिन्न पेशों और नौकरियों का अनुभव ले सकेंगे। हर इंटर्न को हर महीने 5,000 रुपये भत्ता दिया जाएगा।
साथ ही, एक बार में 6,000 रुपये की अतिरिक्त मदद भी दी जाएगी। सीतारमण ने यह भी कहा कि कंपनियां प्रशिक्षण का खर्च उठाएंगी और अपने सीएसआर फंड से इंटर्नशिप के खर्च का 10 प्रतिशत देंगी। केंद्रीय बजट 2024-25 में सरकार ने नौ प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें शामिल हैं: खेती को मजबूत और उत्पादक बनाना, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट, सामाजिक न्याय, उत्पादन और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा, शहरी विकास, ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचे का विकास, नए शोध और अनुसंधान को प्रोत्साहन, और अगली पीढ़ी के सुधार। इन प्राथमिकताओं का मकसद है देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना, और समाज के हर वर्ग का विकास सुनिश्चित करना। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ की घोषणा की। यह घोषणा इसी साल फरवरी में पेश किए गए अंतरिम बजट का हिस्सा है। इस योजना के तहत, घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जाएंगे। इससे एक करोड़ परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी।बजट 2024 में वित्त मंत्री ने ग्रीन ग्रोथ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई कदमों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत पर सोलर पैनल लगाने की योजना का बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और 1.28 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन और 14 लाख आवेदन आए हैं।
सरकार का कहना है कि सोलर पैनल लगाने से घरों को सालाना 15,000 से 18,000 रुपये तक की बचत होगी, क्योंकि उन्हें मुफ्त बिजली मिलेगी और बची हुई बिजली वे बिजली कंपनियों को बेच सकेंगे।इसके अलावा, इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चार्ज करने के लिए, सामान की सप्लाई और इंस्टालेशन के लिए बड़ी संख्या में विक्रेताओं के लिए बिज़नेस के मौके बनेंगे और मैन्युफैक्चरिंग, इंस्टालेशन और मेंटेनेंस में तकनीकी स्किल वाले युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार सातवीं बार बजट पेश करते हुए इतिहास रच दिया। यह बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पिछले महीने फिर से चुने जाने के बाद पहला बजट है। सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2024 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इस सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2025 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.5% से 7% के बीच रह सकती है। हालांकि, 2024-25 के लिए अनुमानित यह वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 8.2% की आर्थिक वृद्धि दर से कम है। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशी कंपनियों पर कॉरपोरेट कर की दर को घटाकर 35 प्रतिशत करने की घोषणा की।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए विदेशी कंपनियों पर कॉरपोरेट कर की दर को घटाकर 35 प्रतिशत करने की घोषणा की। वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में विदेशी कंपनियों (विशेष दरों पर वसूले जाने वाले कर को छोड़कर) की आय पर लगने वाले आयकर की दर को 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘हमारी विकास जरूरतों के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए मैं विदेशी कंपनियों पर कॉरपोरेट कर की दर को 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।‘‘ बजट से पहले सोमवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2023-24 में चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बाजार का फायदा उठाने के लिए चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाने की बात कही गई थी।आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोप के देश चीन से अपनी विनिर्माण इकाइयों को हटा रहे हैं, लिहाजा चीनी कंपनियों का भारत में निवेश करना और फिर उत्पादों का इन बाजारों में निर्यात करना अधिक कारगर हो सकता है। डेलॉयट इंडिया के भागीदार रोहिंटन सिधवा ने कहा कि विदेशी कंपनियों के लिए कर की दर 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करना और निर्यातकों पर लगने वाले दो प्रतिशत समानीकरण शुल्क को खत्म करना अचरज भरा कदम है।सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘हमारी विकास जरूरतों के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए मैं विदेशी कंपनियों पर कॉरपोरेट कर की दर को 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।‘‘बजट से पहले सोमवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2023-24 में चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बाजार का फायदा उठाने के लिए चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाने की बात कही गई थी। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोप के देश चीन से अपनी विनिर्माण इकाइयों को हटा रहे हैं, लिहाजा चीनी कंपनियों का भारत में निवेश करना और फिर उत्पादों का इन बाजारों में निर्यात करना अधिक कारगर हो सकता है। डेलॉयट इंडिया के भागीदार रोहिंटन सिधवा ने कहा कि विदेशी कंपनियों के लिए कर की दर 40 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत करना और निर्यातकों पर लगने वाले दो प्रतिशत समानीकरण शुल्क को खत्म करना अचरज भरा कदम है। -
नई दिल्ली। भारत सरकार ने आज यानी 23 जुलाई को वित्त वर्ष 24-25 के लिए बजट पेश कर दिया है। लगातार सातवीं बार बजट पेश करके रिकॉर्ड बनाते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि उनका इस बार बजट का फोकस महिलाओं, युवाओं, गरीबों और किसानों पर है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि अगर महिलाएं किसी प्रॉपर्टी को खरीदती हैं तो उन्हें प्रॉपर्टीज पर लगने वाला शुल्क कम देना होगा। बता दें कि अभी यह लागू नहीं हो रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इसके लिए सरकार विचार करेगी। साथ ही साथ केंद्र सरकार इसे शहरी विकास योजनाओं के लिए एक जरूरी कंपोनेंट (essential component of urban development schemes) बनाने पर विचार करेगी।केंद्रीय बजट 2024 के भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान उद्देश्यों (taxation purposes) के संबंध में आधार नंबर (Aadhaar number) की जगह आधार इनरोलमेंट आईडी (Aadhaar Enrolment ID) लगाने की जरूरत को समाप्त करने का भी प्रस्ताव रखा।स्टांप पर लगने वाला शुल्क भी घटेगावित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जमीन की खरीदारी पर एक और राहत की खबर दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदता है तो हम राज्यों से अपील करेंगे कि वे जमीन खरीदते समय लगने वाले ज्यादा शुल्क यानी स्टांप ड्यूटी पर ज्यादा चार्ज को कम करें। साथ ही साथ केंद्र राज्यों से यह भी कहेगा कि अगर महिलाएं जमीन खरीदती हैं तो उसपर और छूट दी जाए।वित्त मंत्री कहा कि यह सुधार शहरी विकास योजनाओं के तहत जरूरी बनाया जाएगा ताकि रेट को कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा खरीदी गई संपत्तियों के लिए शुल्क को और कम किया जाएगा।महिलाओं के कल्याण के लिए आवंटित किए गए 3 लाख करोड़ रुपयेवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान महिलाओं से संबंधित कई योजनाओं और उनकी फंडिंग के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं के तहत 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आवंटित किए हैं।बजट के दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए किए गए सुधार सरकार की वादों को लेकर प्रतिबद्धता की ओर इशारा करती है।महिलाओं के स्किल डेवलपमेंट के लिए भी बजट में योजनाकार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने 5 योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री पैकेज का भी ऐलान किया। महिलाओं से जुड़ी योजना में कहा गया कि सरकार उद्योग के सहयोग से कामकाजी महिला छात्रावासों (hostels) की स्थापना करेगी और कार्यबल में महिलाओं की उच्च भागीदारी की सुविधा प्रदान करेगी। इसके अलावा, महिलाओं के लिए विशिष्ट कौशल कार्यक्रम (specific skilling programms) आयोजित करने के रूप में महिलाओं के लिए बाजार पहुंच को बढ़ावा देने का प्रयास करेगी। -
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने संसद में एन.डी.ए. सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया।
बजट में दो लाख करोड रुपये के परिव्यय से पांच वर्ष की अवधि में चार करोड से अधिक युवाओं के लिए रोजगार और कौशल अवसर बढाने की पांच योजनाओं और पहल के प्रधानमंत्री पैकेजकी घोषणा।करदाताओं के लिए राहत के तहत नई कर व्यवस्था में वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन पचास हजार रुपये से बढाकर 75 हजार रुपये।विकास आवश्यकताओं के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए विदेशी कम्पनियों पर कॉरपोरेट कर दर चालीस प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत की गई।बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, ओडिसा और आंध्र प्रदेश के समग्र विकास के लिए सरकार पूर्वोदय योजना लागू करेगी।मौजदा वित्तीय वर्ष में आंध्र प्रदेश के लिए पन्द्रह हजार करोड रुपये की विशेष वित्तीय सहायात।वित्त मंत्री ने ग्रामीण बुनियादी ढांचा सहित समग्र ग्रामीण विकास के लिए दो लाख 66 हजार करोड रुपये के प्रावधान की घोषणा की।अगले दो वर्ष में प्रमाणन और ब्रैंडिंग समर्थित प्राकृतिक खेती में एक करोड किसानों को शामिल किया जाएगा।सरकार, जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान चलाएगी।महिला नीत विकास को बढावा देने के उद्देश्य से महिलाओं और बालिकाओं के लिए लाभकारी योजनाओं पर तीन लाख करोड रुपये से अधिक का आवंटन।प्रधानमंत्री आवाज योजना शहरी के दूसरे चरण में सरकार एक करोड शहरी निर्धन और मध्यवर्गीय परिवारों की आवास जरूरतें पूरी करने के लिए दस लाख करोड रुपये का निवेश करेगी।

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