- Home
- देश
-
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को सभी मार्गों पर सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की शुरुआत की, जिससे महिला यात्रियों में खुशी देखी गई। सुबह के व्यस्त समय में काम पर जाने वाली महिलाओं ने सरकारी बसों के फेरे बढ़ाने की मांग की।
भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की शुरुआत की है। बालीगंज स्टेशन से मध्य कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित अपने कार्यस्थल के लिए बस में चढ़ने के दौरान माला बिस्वास नामक महिला यात्री ने कहा ''मैं खुश हूं, लेकिन सरकारी बसों के फेरे बढ़ाने की जरूरत है।'' उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से सरकारी बसों की संख्या में भारी कमी आई है।
दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट से आईटी हब सॉल्ट लेक सेक्टर पांच जा रही सरकारी वातानुकूलित बस में सफर कर रही सुमाना सिंह ने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में कई सरकारी बस रूट बंद हो गए हैं जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।'' अपनी दो बेटियों के साथ सिलीगुड़ी से कूच बिहार के लिए उत्तर बंगाल राज्य परिवहन कंपनी की बस से यात्रा कर रहीं मनीषा बर्मन ने कहा कि इस योजना के कारण उनके पैतृक गांव तक की लगभग 170 किलोमीटर की यात्रा आसान हो जाएगी। सरकार ने एक जून से पश्चिम बंगाल परिवहन निगम, दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम और उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम की सभी बसों में महिलाओं के लिए यात्रा निःशुल्क कर दी है। इस कदम का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण करना और परिवहन सुविधाओं तक उनकी पहुंच में सुधार करना है।
राज्य सरकार ने कहा है कि योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाभार्थियों की तस्वीरों और नामों के साथ डिजिटल स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे।
-
नयी दिल्ली. नव नियुक्त प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने सोमवार को यहां राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति कार्यालय ने 'एक्स' पर पोस्ट में मुलाकात की एक तस्वीर साझा की। पोस्ट में कहा गया, ''प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एन एस राजा सुब्रमणि ने अपनी पत्नी महालक्ष्मी सुब्रमणि के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।'' पाकिस्तान और चीन संबंधी सैन्य मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले जनरल सुब्रमणि ने रविवार को भारत के नए सीडीएस के रूप में कार्यभार संभाला।
- लखनऊ. उत्तर प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) की सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता के बीच 'कॉकरोच' का वेश धारण कर यमुना नदी की बदहाली की ओर अधिकारियों और आम लोगों का ध्यान आकर्षित करने की अनोखी पहल की। मथुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं कथावाचक दीपक शर्मा 22 मई को 'कॉकरोच' का वेश धारण यमुना के तट पर पहुंचकर त्रिवेणी की बदहाली की ओर ध्यान खींचा। शर्मा ने कहा कि यमुना नदी की खराब स्थिति की ओर ध्यान खींचने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया और इस दौरान उन्हें इस छोटे जीव की प्रतीकात्मक ताकत का एहसास हुआ। उन्होंने बताया कि इस पहल के बाद उन्हें मथुरा नगर आयुक्त कार्यालय से अधिकारियों से मिलने के लिए फोन आया था लेकिन उन्होंने अधिकारियों को स्वयं घाट पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने का आग्रह किया। शर्मा ने अपनी संस्था 'कॉमन जस्टिस प्लेटफॉर्म' (सीजेपी) की शुरुआत की है।उनका कहना है कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करना और युवाओं को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करना है। सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि वह 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ भी सहयोग की योजना बना रहे हैं। दिपके ने 16 मई को 'एक्स' पर ''क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?'' शीर्षक से एक पोस्ट किया था, जिसके बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' चर्चा में आई। यह मंच खुद को युवाओं की आवाज बताता है।शर्मा ने कहा कि लोगों में 'कॉकरोच' को लेकर पैदा हुई अचानक दिलचस्पी का उपयोग यमुना प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक मथुरा निवासी होने के नाते उन्हें हिंदुओं की आस्था से जुड़ी यमुना नदी की स्थिति देखकर निराशा होती है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, मथुरा के केशी घाट, विश्राम घाट और गोकुल बैराज सहित कई स्थानों पर यमुना का प्रदूषण स्तर चिंताजनक पाया गया है। 'बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी' के अधिकारी के.पी. सिंह के अनुसार, तापमान व पीएच स्तर स्वीकार्य सीमा में होने के बावजूद कई अन्य प्रदूषण संकेतक सुरक्षित मानकों से काफी अधिक हैं। रिपोर्ट में 'टोटल कोलीफॉर्म' और 'फीकल कोलीफॉर्म' बैक्टीरिया की अत्यधिक मात्रा दर्ज की गई है, जो गंभीर सीवेज प्रदूषण का संकेत है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में नदी का पानी पीने योग्य नहीं रह जाता और बिना शोधन के उसमें स्नान करना भी स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है, जिससे जलीय जीव-जंतुओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शर्मा ने बताया कि उनकी मुहिम को अच्छा समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़ने वालों को 'कॉकरोच' की तस्वीर वाला पहचान पत्र जारी किया जा रहा है।समाजसेवी के अनुसार अब तक लगभग 800 लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं। हालांकि, इस पहल को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। लखनऊ के अधिवक्ता अंकुर सक्सेना ने इसे सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक अभियान करार देते हुए इसकी आलोचना की। वहीं, राष्ट्रीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि किसान भी उपेक्षा का सामना कर रहे हैं और इस प्रतीकात्मक आंदोलन से स्वयं को जोड़ सकते हैं। शर्मा ने स्पष्ट किया कि सीजेपी एक गैर-राजनीतिक आंदोलन है और उसका उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं बल्कि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और स्वच्छ बनाना है।
-
नयी दिल्ली. जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार को भारत के नए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) का पदभार संभाल लिया। उनके सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी महत्वाकांक्षी थिएटराइजेशन योजना को लागू करना और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को और मजबूत करना होगी। जनरल सुब्रमणि ने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जिन्होंने शनिवार को देश के वरिष्ठतम सैन्य कमांडर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। पाकिस्तान और चीन मामलों के विशेषज्ञ माने जाने वाले जनरल सुब्रमणि इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। वह पिछले वर्ष 31 जुलाई को सेना के उप प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में जनरल सुब्रमणि का प्रमुख दायित्व थिएटराइजेशन मॉडल को लागू करना होगा, जिसके तहत एकीकृत सैन्य कमान स्थापित की जाएगी। चार दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर में जनरल सुब्रमणि ने विभिन्न प्रकार के संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवाएं दी हैं। उन्होंने सेना में अनेक कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने एक जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्य किया। इससे पहले वह मार्च 2023 से जून 2024 तक मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे थे।
-
ईटानगर. भारतीय सेना के जवानों ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश के शि-योमी जिले में समुद्र तल से लगभग नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित पसांग सोनम झील तट पर योग सत्र में भाग लिया। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले चल रहे महीनेभर के कार्यक्रमों के तहत किया गया।
एक विज्ञप्ति के अनुसार, अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों ने उत्साहपूर्वक योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया। इस अवसर पर सैनिकों के लिए योग के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया कि इससे शारीरिक तंदुरुस्ती, मानसिक दृढ़ता और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए योग लचीलापन, एकाग्रता और तनाव प्रबंधन में भी सहायक है। कार्यक्रम का उद्देश्य सैनिकों के बीच टीम भावना और सामूहिक प्रेरणा को मजबूत करना भी था। -
जयपुर। ओटीटी के दौर में सिनेमाघरों की चमक भले ही फीकी पड़ गई हो, लेकिन जयपुर का प्रतिष्ठित राजमंदिर अपनी शाही शैली और अनोखे माहौल के साथ आज भी सिने प्रेमियों का दिल जीत रहा है। एक जून को राजमंदिर के 50 साल पूरे होने पर सिने प्रेमियों को पांच फिल्में मुफ्त दिखाई जाएंगी। राजमंदिर सिनेमा के संचालकों ने बताया कि गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन के तहत राजमंदिर में उन फिल्मों को दिखाया जाएगा, जिन्होंने सिनेमा प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई है। इन फिल्मों में 'हम आपके हैं कौन', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'राम तेरी गंगा मैली', 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' और 'चुपके-चुपके' शामिल हैं। फिल्मों का चयन परिवारों को ध्यान में रखकर किया गया है। दर्शकों को टिकट 'बुकमायशो' और राजमंदिर के बॉक्स ऑफिस विंडो से बुक करनी होगी। राजमंदिर के वित्त प्रबंधक किशोर काला ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि राजमंदिर सिनेमाघर ने मनोरंजन उद्योग के हर उतार चढ़ाव को देखा और झेला है। हर दौर से गुजरा राजमंदिर अपनी खास पहचान की बदौलत आज गुलाबी नगर के आकर्षणों में शुमार है।" अभिनेता राजकपूर, जितेन्द्र, अमिताभ बच्चन हो या धर्मेंद्र से लेकर सनी देओल, रणबीर कपूर, राजकुमार राव, विद्या बालन, विक्की कौशल, जाह्नवी कपूर तक, सभी ने राजमंदिर को भरपूर प्यार दिया है। जो आगंतुक डायरी में लिखी उनकी टिप्पणी से झलकता है। पूर्व राजमाता गायत्री देवी से लेकर वर्तमान में उपमुख्यंत्री दिया कुमारी भी राजमंदिर की मुरीद रही हैं। जयपुर की व्यस्ततम और विख्यात मिर्जा इस्माइल रोड (एमआईरोड) के पांच बत्ती चौराहे के पास स्थित राजमंदिर में पहली फिल्म 'चरस' लगी, जो 101 दिन तक चली। वित्त प्रबंधक किशोर ने बताया कि राजमंदिर में "हम आपके हैं कौन" फिल्म 525 दिन तक चली थी। उन्होंने कहा, राजमंदिर एक पैलेस सिनेमा है। राजमंदिर में प्रवेश करते ही महल जैसा महसूस होता है। इसको चारों तरफ चाप की लकड़ी से सजाया गया है। इसमें जगह-जगह कांच का काम हुआ है। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि यह दो तरह की रोशनी से सुसज्जित है। जब दर्शक फिल्म देखने के लिए अंदर आते हैं तो उन्हें सफेद रंग देखने को मिलता है। मध्यांतर में जब दर्शक बाहर आते हैं तो नीली रोशनी से उनका स्वागत होता है। वित्त प्रबंधक ने कहा, "राजमंदिर को काफी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक देखने आते हैं। जो भी जयपुर में घूमने आता है वह इस सिनेमाघर को जरूर देखने आता है। अब तो यह उनके टूर पैकेज में शामिल हो गया है।" किशोर का दावा है कि इसके परदे का आकार 73 गुणा 35 है, जोकि देश में सबसे बड़ा है और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सिनेमाघर है। इसमें एक समय में 1,186 लोग बैठकर फिल्म का आनंद ले सकते थे। अब इसे नए स्वरूप में लाने पर सीटों की संख्या 862 कर दी। राजमंदिर के कार्यालय प्रभारी अंकुर खंडेलवाल ने बताया कि इसके मालिकों ने कभी इसे कमाई का जरिया नहीं समझा। इस सिनेमाघर से जयपुरवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और यह अपने आप में सबसे अलग है इसलिए इसका विशेष रखरखाव किया जा रहा है ताकि यह पर्यटनस्थल हमेशा बना रहे। संचालकों ने बताया कि शहर के पर्यटनस्थल के रूप में भी प्रसिद्ध राजमंदिर का उद्घाटन एक जून 1976 को हुआ था। यह सिनेमाघर जयपुर के प्रतिष्ठित जौहरी राजमल सुराणा के पुत्र कुशलचंद सुराणा, विमलचंद सुराणा और कमलचंद सुराणा का है जिन्होंने अपने जवाहरात के व्यवसाय के अनुरुप ही इस सिनेमाघर की श्रेणियों का नाम डायमंड, एमरल्ड, रूबी, सफायर और पर्ल रखा। सीनियर प्रोजेक्शन हैड 84 वर्षीय कैलाश चंद शर्मा की भी राजमंदिर के साथ गोल्डन जुबली होगी। वे 50 साल से भी अधिक समय से यहां काम कर रहे हैं। कैलाश ने बताया कि जब वे 35 वर्ष के थे, तब यहां आए थे, लेकिन अब तक थिएटर में बैठकर पूरी फिल्म नहीं देखी। कैलाश ने कहा कि उन्होंने 50 साल में सैकड़ों फिल्में चलाई। एक भी फिल्म का प्रिंट खराब नहीं होने दिया। एक बार अभिनेता राज कपूर साहब यहां अपनी फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' देखने आए थे। देखने के बाद उन्होंने चीफ टेक्निशियन को बुलाया। मैं डरते हुए गया कि कोई गड़बड़ तो नहीं हो गई। तब उन्होंने पूछा कि इस फिल्म का प्रिंट अब तक कितनी बार बदला। मैंने कहा कि सर अभी तक एक बार भी नहीं बदला दो हफ्ते से चला रहा हूं। राजकपूर साहब हो यह सुनकर ताज्जुब हुआ तब उन्होंने कहा मैं मुंबई जाउंगा तो तुम्हारे लिए इनाम भेजूंगा। हालांकि इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। फिल्म वितरक राज बंसल का कहना है कि देश में सिंगल स्क्रीन में राजमंदिर पहले स्थान पर है। निश्चित रूप से राजमंदिर राजस्थान की शान है। हमारी यहां 50 से ज्यादा फिल्में चली हैं। फिल्म वितरक संजय छेतर ने कहा, " राजमंदिर देश का नंबर एक सिनेमाघर है, जो कि अपनी स्थापत्य कला को बनाए हुए हैं। हर फिल्म वितरक चाहता है कि उसकी यहां पर फिल्म लगे। मैं पिछले बीस साल से राजमंदिर से जुड़ा हुआ हूं।
-
नयी दिल्ली. एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने तेजी से बदलते क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा परिदृश्य के बीच रविवार को भारत के नए नौसेना प्रमुख का पदभार संभाला। एडमिरल स्वामीनाथन ने एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का स्थान लिया, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं। एडमिरल स्वामीनाथन इससे पहले पश्चिमी नौसैन्य कमान के 'फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' के रूप में कार्यरत थे। नए नौसेना प्रमुख ने पत्रकारों के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण को ''चुनौतीपूर्ण, जटिल और अप्रत्याशित'' बताया तथा कहा कि उच्चतम अभियानगत तत्परता बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''भारतीय नौसेना देश के हितों की रक्षा के लिए हर समय सतर्क है और वह ऐसे क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में सक्रिय रूप से तैनात है, जो लगातार चुनौतीपूर्ण, जटिल, अप्रत्याशित एवं अनिश्चित बना हुआ है।'' एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, ''मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होगी कि भारतीय नौसेना उच्चतम स्तर की अभियानगत तत्परता और युद्धक क्षमता बनाए रखे, ताकि वह देश के सुरक्षा और आर्थिक हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।'' उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना क्षमता-वृद्धि और आधुनिकीकरण की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है।
नौसेना प्रमुख ने कहा, ''मेरा प्रयास होगा कि नौसेना की प्रगति की गति को बनाए रखा जाए, जारी सभी परियोजनाओं को सुदृढ़ किया जाए, जहां आवश्यकता हो वहां उन्हें और विस्तार दिया जाए तथा अत्याधुनिक व उभरती प्रौद्योगिकियों को शामिल करके हमारी अभियानगत क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाया जाए।'' उन्होंने कहा, ''मैं अपने जीवन का हर एक दिन नौसेना को और अधिक बेहतर, मजबूत, सक्षम तथा प्रभावशाली बनाने के लिए समर्पित करूंगा, ताकि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय विकास और देश की आर्थिक समृद्धि के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सके।'' एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारतीय नौसेना एकीकृत सैन्य कमान, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी की भी सराहना करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे ''उत्कृष्ट'' सैन्य पेशेवरों में से एक बताया। स्वामीनाथन एक जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे और वह संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ हैं। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला, ज्वाइंट सर्विसेस कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, श्रीवेनहम, ब्रिटेन, कॉलेज ऑफ नेवल वारफेयर, करांजा और यूएस वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट के पूर्व छात्र हैं। परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित एडमिरल स्वामीनाथन ने अपने नौसैनिक करियर में अभियानों, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने मिसाइल पोत आईएनएस विद्युत और आईएनएस विनाश, मिसाइल कार्वेट आईएनएस कुलिश, दिशा निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मैसूरु तथा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली। रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैन्य कमान मुख्यालय में 'चीफ स्टाफ ऑफिसर' (प्रशिक्षण) के रूप में सेवा दी। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन भारतीय नौसेना सुरक्षा दल की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों में शामिल रहे। यह दल नौसेना की सभी शाखाओं में अभियान सुरक्षा की निगरानी करता है। पश्चिमी नौसैन्य कमान का नेतृत्व संभालने से पहले वह उप नौसेना प्रमुख के पद पर भी रहे।
उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बीएससी, कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से दूरसंचार में एमएससी, तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से रक्षा अध्ययन में एमए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से सामरिक अध्ययन में एमफिल और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 11वीं सदी के ‘चोल ताम्र-पत्रों’ के बारे में बात की, जिन्हें उनकी हाल की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत वापस लाया गया था। इन ‘चोल ताम्र-पत्रों’ 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टियां हैं, जो मुख्य रूप से तमिल भाषा में लिखी हुई हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हर भारतीय के लिए यह एक खुशी का पल है।
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “बीते दिनों मुझे यूरोप के नीदरलैंड जाने का अवसर मिला। वहां मैं कई बैठकों में शामिल हुआ। इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया, जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। उस कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं। लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं। दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है।”‘चोल ताम्र-पत्रों’ के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है। इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम की ओर से अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है। इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है।” उन्होंने कहा कि चोला साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है। हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है। यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं। ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये शिलालेख छठी-सातवीं सदी के हैं, यानि चौदह-सौ, पंद्रह-सौ साल पुराने ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं। इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमिलनाडु के नागरकोइल की एक शिक्षिका गिरिजा अम्मा से हुई अपनी मुलाकात का अनुभव शेयर किया। पीएम मोदी ने गिरिजा अम्मा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ। इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है। इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूं। तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई। करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था। मैं बात कर रहा हूं, गिरिजा अम्मा की। इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा छात्र भी उनके साथ थे।”कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गिरिजा अम्मा करीब 15 स्कूल चलाती हैं। इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय बहुत प्रमुख है। उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के छात्रों को प्रेरित किया।पीएम मोदी ने बताया, “गिरिजा अम्मा ने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपए जमा हुए। इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपए इकट्ठा हुए। गिरिजा अम्मा ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा। उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि मां भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है।” प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिंदू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं। देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटवर्क की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उन छात्रों की भी विशेष सराहना करता हूं, जिन्होंने अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भीषण गर्मी के मौजूदा मौसम के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है। आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय करके ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गर्मी से राहत के लिए आम पन्ना, छाछ, लस्सी, सत्तू, शरबत, बेल पन्ना, पनाकम, नीर मोर, सांभरम, कोकम शरबत और सोल कढ़ी का सेवन करना उपयोगी है। उन्होंने कहा कि ये पेय पदार्थ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाते हैं और इनमें पीढ़ियों का अनुभव समाहित है।प्रधानमंत्री ने काशी के लंगड़ा, महाराष्ट्र के अल्फाज़ो, गुजरात के केसर और पश्चिम बंगाल के हिमसागर आम की चर्चा करते हुए कहा कि हर क्षेत्र के आम का स्वाद अनूठा और उसकी महक सोंधी होती है। श्री मोदी ने कहा कि आम ने वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाई है और आम हमारी कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड्स की अपनी हाल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि नीदरलैंड्स सरकार ने चोलकालीन ताम्र-पट्टिकाएं भारत को लौटाई हैं। इससे दुनिया भर के तमिल समुदाय विशेष उत्साह है। उन्होंने कहा कि ये पट्टिकाएं चोल साम्राज्य की समुद्री ताक़त और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ उनके संबंधों को दर्शाती हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश की अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में छठी-सातवीं शताब्दी के पांडु वंश के महर्षि बलार्जुन से जुड़ी दुर्लभ तांबे की तीन प्लेटें भी मिली हैं।प्रधानमंत्री ने झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित राष्ट्रीय वरिष्ठ एथलेटिक्स महासंघ प्रतियोगिता की चर्चा की। इसमें लगभग 800 एथलीटों ने भाग लिया था। श्री मोदी ने गुरिंदर वीर सिंह, विशाल टी.के., तेजस्विन शंकर, देव मीना और कुलदीप कुमार को चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने पर बधाई दी। उन्होंने 100 मीटर दौड़ में रिकॉर्ड तोड़ने वाले गुरिंदर वीर सिंह और अनिमेष कुजूर से बात भी की।प्रधानमंत्री ने कहा कि खगोल विज्ञान ने देश की हर पीढ़ी में जिज्ञासा जगाई है। उन्होंने कहा कि खगोल विज्ञान देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। श्री मोदी ने युवाओं से खगोल विज्ञान क्लब में शामिल होने और छुट्टियों के दौरान तारामंडल देखने की अपील की।प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश में एक नहर में गंगा डॉल्फिन को बचाने वाले वीडियो का हवाला भी दिया। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे अभियान के तहत बनाई गई भारत की पहली गंगा डॉल्फिन बचाव एम्बुलेंस ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री मोदी ने कहा कि गंगा डॉल्फिन संरक्षण से नदी की जैव विविधता और अमूल्य प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण भी होता है।प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में अलुवा के साजी वलाशेरिल के प्रयासों की सराहना की, जो निःशुल्क तैराकी क्लब चलाते हैं। वे 15 हजार से अधिक लोगों को तैराकी सिखा चुके हैं।प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश के बस्ती के आकाश गुप्ता का जिक्र किया जिन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर गाँव की मनोरमा नदी को साफ किया। श्री मोदी ने गोवा के सेवानिवृत्त शिक्षक बालकृष्ण अय्या की कहानी भी साझा की जिन्होंने मद्दी-टोलाप क्षेत्र में जल-संकट के समाधान के लिए काम करना शुरू किया है।प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के नागरकोइल में 15 स्कूल चलाने वाली शिक्षिका गिरिजा अम्मा की भी बात की जिन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरित होकर देश के सैनिकों के लिए योगदान देने का संकल्प लिया है। गिरिजा अम्मा ने बहादुर सैनिकों के लिए रोज़ एक रुपया दान करने की अपील बच्चों से की और इससे मिले लगभग 40 लाख रुपये प्रधानमंत्री को सौंपे।प्रधानमंत्री मोदी ने चेन्नई के पहले हिंदू विद्यालय का उल्लेख किया जिसने पिछले वर्ष अपनी 50 वर्ष पूरे किए थे। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय नेटवर्क ने देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने में सराहनीय भूमिका निभाई है। श्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास समाज की बेहतरी के लिए लगातार काम कर रहे लोगों को पहचानें और स्वयं भी अच्छे कार्यों से जुड़ें।
- नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को घोषणा की है कि 1 जून से 30 जून तक पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी संरक्षण, मौसम आधारित कृषि सलाह और सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ना है। अभियान को केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाले राष्ट्रीय जनअभियान के रूप में विकसित करने की तैयारी की गई है।नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का मुख्य फोकस खेतों की सेहत बचाने, कृषि लागत को नियंत्रित करने और किसानों को सही समय पर सही सलाह उपलब्ध कराने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान केंद्र, राज्य और पंचायतों की साझी भागीदारी के मॉडल पर संचालित होगा। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख लक्ष्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित खेती, संतुलित खाद उपयोग, हरी खाद, जैविक उत्पादों और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों को देखते हुए किसानों को क्षेत्र-विशेष सलाह दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि किस परिस्थिति में कौन-सी फसल उपयुक्त होगी, कहां फसल विविधीकरण अपनाया जा सकता है और कम पानी या जोखिम वाली परिस्थितियों में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान को गांव स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पंचायत स्तर पर कृषि मशीनरी वितरण, विभिन्न योजनाओं के लाभ और कृषि संबंधी कार्यक्रमों को अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को एक ही मंच पर अधिकतम सुविधाएं मिल सकें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान को विभागीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से इसमें भागीदारी का आग्रह किया जाएगा, ताकि इसे राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। अभियान के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को प्रमुख समन्वयक बनाया गया है। देशभर में 1600 से अधिक टीमें गठित की गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा आईसीएआर और केवीके की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से कार्य करेंगी। अभियान के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान योजना से वंचित किसानों को जोड़ने, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन, कॉटन मिशन, जल संरक्षण, मिट्टी स्वास्थ्य और संतुलित पोषण जैसी योजनाओं को भी किसानों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि कृषि विकास से जुड़ी सभी प्रमुख पहलों को एकीकृत रूप से गांवों तक पहुंचाया जाए।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संदेश व्यवहारिक हो और उसका असर जमीन पर दिखाई दे। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग, मौसम आधारित कृषि सलाह, पंचायतों की सक्रियता, योजनाओं का लाभ और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी अभियान के प्रमुख आधार होंगे। अभियान का लक्ष्य है कि खेत सुरक्षित रहें, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरे, लागत नियंत्रित हो और किसानों में वैज्ञानिक कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो।
- नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी सहित राज्य सरकार और सीमावर्ती जिलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, तस्करी, आर्थिक अपराध और तटीय सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। अमित शाह ने कहा कि बॉर्डर फेंसिंग, समुद्री सीमा सुरक्षा और राज्य सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण गुजरात के सुरक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि राज्य में घुसपैठ और सीमा पार तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी अनधिकृत अतिक्रमण को जीरो टॉलरेंस नीति के तहत समाप्त किया जाए। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथी गतिविधियों के संभावित केंद्रों पर भी लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता बताई।अमित शाह ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में जिला मजिस्ट्रेट नियमित रूप से जनसांख्यिकी परिवर्तनों की निगरानी करें और इसकी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के कारण हो रहे रिवर्स माइग्रेशन को सकारात्मक संकेत बताया। बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि पहले से बसे अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के लिए प्रशासन के सभी स्तरों को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि हर सीमावर्ती जिला अपनी स्थानीय चुनौतियों के अनुसार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करे, जिसमें ड्रोन गतिविधियों, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ की पहचान शामिल हो।अमित शाह ने कहा कि प्रत्येक सीमावर्ती जिले में सुरक्षा समन्वय समूह गठित किया जाए। इसमें सीमा सुरक्षा बल, भारतीय तटरक्षक बल, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और लीड बैंक प्रबंधकों को शामिल किया जाएगा, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों में हवाला लेनदेन, म्यूल अकाउंट, शेल कंपनियों, संदिग्ध वाहनों और जीएसटी संग्रह की गहन निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर व्यापक सर्वे अभियान चलाया जाए, ताकि आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के निकट स्थित क्षेत्रों में तटीय सुरक्षा को और मजबूत करने तथा भारतीय तटरक्षक बल के साथ बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का 100% संतृप्ति स्तर तक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि आयकर, मनी लॉन्ड्रिंग और कस्टम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और बॉर्डर रेंज के आईजी स्तर के अधिकारियों की होगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास और प्रशासनिक समन्वय को और मजबूत बनाना है।
- सोलन। हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में लगी भीषण जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए भारतीय वायु सेना ने दिन-रात लगातार हवाई अग्निशमन अभियान चलाया। वायुसेना ने एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्र में 93,000 लीटर से अधिक पानी का छिड़काव कर आग को व्यापक विनाश का रूप लेने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वायुसेना को 26 मई को कसौली के निकट जंगल में आग लगने की सूचना मिली थी। स्थिति का आकलन करने के लिए तत्काल एक चीता हेलीकॉप्टर भेजा गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए एमआई-17 वी5 मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। कसौली के सोलन जिले स्थित कसौली बीट क्षेत्र में लगी आग ने लगभग 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया था। आग से आवासीय इलाकों, महत्वपूर्ण नागरिक ढांचों और सैन्य प्रतिष्ठानों को भी खतरा पैदा हो गया था।राज्य प्रशासन, वन विभाग, भारतीय सेना और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वायुसेना ने बम्बी बकेट अभियान संचालित किया। इस दौरान हेलीकॉप्टर सुखना झील से पानी भरकर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाते रहे। प्रत्येक उड़ान में लगभग 2,000 से 2,500 लीटर पानी ले जाकर आग बुझाने का प्रयास किया गया। भारतीय वायुसेना के इतिहास में पहली बार नाइट विजन गॉगल्स (एनवीजी) की सहायता से रात्रिकालीन बम्बी बकेट अग्निशमन अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया। पहाड़ी इलाकों में सीमित दृश्यता और कठिन भूभाग के बीच इस अभियान को अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण था।वायुसेना के विमान चालक दल ने रात्रिकालीन अभियानों से जुड़े जोखिमों के बावजूद उच्च स्तर की सटीकता, परिचालन दक्षता और साहस का परिचय देते हुए मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अभियान ने आपदा प्रबंधन और नागरिक सहायता में वायुसेना की क्षमता को एक बार फिर साबित किया।हवाई अभियानों के साथ-साथ वायुसेना के तकनीकी और स्थलीय कर्मियों ने भी खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया। उन्होंने हेलीकॉप्टरों की त्वरित सर्विसिंग, मरम्मत और पुनः तैनाती सुनिश्चित की, जिससे चौबीसों घंटे बिना रुकावट अभियान जारी रखा जा सका। राज्य प्रशासन, वन विभाग, सेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयासों के कारण आग पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया और संभावित बड़े नुकसान को टालने में सफलता मिली। यह अभियान आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय का भी उदाहरण बनकर सामने आया।
-
नयी दिल्ली. सेवानिवृत्त हो रहे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अपने कार्यकाल को शनिवार को ''बेहद संतोषजनक'' करार दिया। जनरल चौहान ने शीर्ष सैन्य पद पर तीन साल एवं आठ महीने का कार्यकाल पूरा किया और इस दौरान उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) भारत के अगले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) के रूप में रविवार को पदभार संभालेंगे। निवर्तमान सीडीएस ने तीनों सेनाओं की ओर से औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिए जाने के बाद संवाददाताओं से कहा, ''मेरा कार्यकाल बेहद संतोषजनक और उत्कृष्ट रहा।'' सेना की पूर्वी कमान के कमांडर रह चुके जनरल चौहान ने सितंबर 2022 में देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर के रूप में पदभार संभाला था। इससे करीब नौ महीने पहले देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत की तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में जनरल चौहान ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मिलकर 'ऑपरेशन सिंदूर' की योजना बनाने और इसे क्रियान्वित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष ने एकीकृत सैन्य कमान बनाने की भारत की योजना, यानी 'थिएटराइजेशन' मॉडल को लागू करने की दिशा में भी कई कदम उठाए। जनरल चौहान ने कहा, ''तीनों सेनाओं की ओर से 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ सेवानिवृत्त होना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। इसके लिए मैं तीनों सेनाओं और मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) को धन्यवाद देता हूं। मैं 'गार्ड ऑफ ऑनर' के समापन के साथ अपने वर्दीधारी सहयोगियों और साथियों से विदाई लेता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मैंने अभी युद्ध स्मारक पर वर्दी पहनकर आखिरी बार पुष्पचक्र अर्पित किया, यह उन लोगों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने मेरा स्वागत किया। यह मेरे सैन्य से असैन्य जीवन में प्रवेश करने का प्रतीक है।'' जनरल चौहान का कार्यकाल पिछले साल 30 सितंबर को समाप्त होना था लेकिन उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था।
वह मई 2021 में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन भारत के दूसरे प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद उन्होंने चार सितारा जनरल का पद ग्रहण किया। फरवरी 2019 में जब भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया था, तब जनरल चौहान सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) थे। माना जाता है कि उन्होंने इस अभियान के लिए अहम जानकारी उपलब्ध कराई थी। 18 मई, 1961 को जन्मे जनरल चौहान को 1981 में भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल्स में शामिल किया गया था।
अपने विशिष्ट करियर में जनरल चौहान ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं तथा उन्हें जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद-रोधी अभियानों का व्यापक अनुभव है। वह खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं।
मेजर जनरल के पद पर रहते हुए उन्होंने उत्तरी कमान के संवेदनशील बारामूला सेक्टर में एक पैदल सेना डिवीजन की कमान संभाली थी। बाद में उन्होंने पूर्वोत्तर में एक कोर की कमान संभाली और इसके बाद पूर्वी कमान के 'जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' बने। भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल चौहान को परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। -
आगरा (उप्र. ) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप ने शनिवार को यहां अपने पति माइकल बोलस के साथ विश्व धरोहर ताजमहल का दीदार किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि टिफ़नी पूर्वाह्न लगभग 11 बजे माइकल बोलस और कुछ करीबी दोस्तों के साथ ताजमहल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि करीब एक घंटे के इस दौरे के दौरान उन्होंने स्मारक परिसर के भीतर विभिन्न स्थानों पर तस्वीरें लीं। पर्यटक गाइड रमेश दीवान ने बताया कि टिफनी ने स्मारक के इतिहास और वास्तुकला में गहरी दिलचस्पी दिखाई एवं इसके निर्माण के बारे में कई सवाल पूछे। उन्होंने बताया कि टिफनी ने यह भी पूछा कि ताजमहल के निर्माण में इस्तेमाल किए गए पत्थर कहां से लाये गये थे। दीवान ने बताया कि टिफनी ने ताजमहल की खूबसूरती की तारीफ की और इस अनुभव को 'अविश्वसनीय' बताया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि टिफनी दिल्ली से एक 'चार्टर्ड' विमान से आगरा हवाई अड्डे पर उतरने के बाद सड़क मार्ग से एक होटल गईं और फिर गोल्फ कोर्स मार्ग से होते हुए ताजमहल पहुंचीं एवं पूर्वी द्वार से ताजमहल परिसर में प्रवेश किया। उन्होंने बताया कि इस हाई-प्रोफ़ाइल दौर के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे और अधिकारियों ने हवाई अड्डे से ताजमहल तक एक 'हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर' बनाया था। सूत्रों ने बताया कि मार्ग पर और स्मारक के आसपास अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किये गये थे। सूत्रों ने बताया कि ताजमहल का दौरा करने के बाद टिफनी अपने पति के साथ अपने होटल लौट गईं. -
कोलकाता. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर काम करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित अन्य कई राज्यों की तरह 'डबल इंजन' सरकार के सभी लाभ प्राप्त हों। केंद्रीय विद्युत तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहरलाल की उपस्थिति में राज्य में 'स्वच्छ ऐप' की शुरुआत के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि विद्युत एवं शहरी विकास के मामले में राज्य के पुनर्निर्माण की काफी संभावनाएं हैं।
मनोहरलाल ने शुभेंदु और राज्य की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल की उपस्थिति में इस ऐप की शुरुआत की। यह ऐप प्रौद्योगिकी और नागरिकों की भागीदारी के माध्यम से नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। शुभेंदु ने कहा, ''मैं पश्चिम बंगाल के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम केंद्र सरकार के हर मंत्रालय के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि 'डबल इंजन' सरकार के सभी लाभ, जो 20 अन्य राज्यों को मिल रहे हैं, हमारे राज्य को भी मिलें।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बार-बार इस बात पर खेद व्यक्त किया है कि स्वतंत्रता के बाद उद्योग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अग्रणी होने के बावजूद पश्चिम बंगाल का विकास अपेक्षित गति से नहीं हुआ। शुभेंदु ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल के साथ पश्चिम बंगाल में शहरी और विद्युत क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार मिलकर क्या कर सकती हैं, इस पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा, ''उन्होंने राज्य के पुनर्निर्माण के लिए हर क्षेत्र में केंद्रीय सहयोग का आश्वासन दिया, जिसमें कुछ परियोजनाएं लागत-साझाकरण के आधार पर लागू की जाएंगी।'' उन्होंने कहा कि 'स्वच्छ ऐप' पहल के तहत स्वच्छता अभियान से शुरुआत में 10 शहरी स्थानीय निकायों को लाभ मिलेगा, जिनमें आसनसोल और दुर्गापुर के नगर निगम तथा बसीरहाट, पुजाली, तूफानगंज, कोंटाई, कृष्णानगर, नलहाटी, बैद्यबाती और मध्यमग्राम की नगरपालिकाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ 39,000 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर डिजिटल माध्यम से किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य को चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2,103 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत मिशन के तहत 976 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से शहरी चुनौती कोष के तहत राज्य की छोटी नगरपालिकाओं और नगर निगमों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देने का आग्रह किया। उन्होंने पर्यावरण और प्रदूषण संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य में ई-परिवहन विकल्पों को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से समर्थन मांगा। शुभेंदु ने कहा कि राज्य के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में केंद्र सरकार की 'रूफटॉप सोलर पावर' के लिए राष्ट्रीय मिशन 'पीएम सूर्य घर योजना' को लागू किया जाना चाहिए और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए उनकी सरकार की एक टीम दिल्ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की पिछली सरकार ने दक्षिण बंगाल में हर साल आने वाली बाढ़ के लिए दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) को गलत तरीके से दोषी ठहराया था। उन्होंने कहा, ''आगामी मानसून के दौरान डीवीसी और राज्य सरकार मिलकर काम करेंगे। -
नयी दिल्ली. दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार शाम को पांच मंजिला एक इमारत गिरने से कई लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, पूरी बहुमंजिला इमारत ढह गई और मलबे के विशाल ढेर में तब्दील हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इमारत के भूतल पर एक कोचिंग संस्थान था और ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य चल रहा था। आशंका है कि फंसे हुए लोग छात्र हो सकते हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) को शाम 7.44 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। यह घटना सैदुलाजाब में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास वेस्टर्न मार्ग पर हुई। दमकल की सात गाड़ियों को मौके पर भेजा गया है।
घटनास्थल से प्राप्त तस्वीरों में इमारत कंक्रीट, मुड़ी हुई धातु और टूटे हुए खंभों के ढेर में तब्दील हो चुकी थी, और मलबा पूरे क्षेत्र में बिखरा हुआ था। स्थानीय निवासी और पड़ोसी टॉर्च और मोबाइल फोन लेकर घटनास्थल पर पहुंचे, ताकि नुकसान की सीमा का पता लगाया जा सके और यह जांचा जा सके कि कहीं कोई मलबे के नीचे फंसा तो नहीं है। दमकल कर्मियों और पुलिस टीमों द्वारा खोज और बचाव अभियान शुरू किए जाने के बाद, चिंतित स्थानीय लोगों को मलबे में खोजबीन करते देखा गया। संकरी गली और घनी आबादी वाले इलाके में अफरा-तफरी का मंजर देखने को मिला। स्थानीय निवासी बचाव वाहनों और कर्मियों के लिए रास्ता खाली करने की कोशिश कर रहे थे। कई लोगों ने खोजबीन में मदद के लिए मोबाइल फोन की लाइट का इस्तेमाल किया। आस-पास की इमारतों को तत्काल कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। अधिकारियों ने अभी तक फंसे हुए लोगों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। बचाव अभियान जारी है। -
नयी दिल्ली. सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शनिवार को उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में बारिश हुई, जिससे पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली। वहीं, राजस्थान के कई हिस्सों में भीषण धूलभरी आंधी ने जनजीवन को प्रभावित किया। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के कारण चूरू, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, अलवर और सीकर जिलों में तेज धूलभरी आंधी चली, जबकि जयपुर में तेज हवाओं के बाद बारिश हुई। आंधी के दौरान धूल और रेत के घने गुबार ने कई शहरों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे दृश्यता लगभग शून्य हो गई और वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार, आंधी की शुरुआत हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्रों से हुई, जहां हवा की गति लगभग 56 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। हालांकि आंधी से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ, लेकिन इसके साथ हुई बारिश ने राज्य के कई हिस्सों में भीषण गर्मी से राहत पहुंचाई। चूरू के एक निवासी ने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ''हमने कभी नहीं सोचा था कि इतनी भीषण धूलभरी आंधी पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लेगी। अपराह्न करीब दो बजे आसमान में ऐसा अंधेरा हो गया मानो रात हो गई हो। लोग वाहनों की हेडलाइट जलाकर चल रहे थे। जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।'' इसी बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी 'रेड' और 'ऑरेंज अलर्ट' के बीच दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी धूलभरी आंधी चली। मौसम विभाग ने गरज-चमक, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और बारिश की संभावना जताई है। आईएमडी के अनुसार, मध्य, उत्तर-पूर्वी, दक्षिण-पश्चिमी, पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में धूलभरी आंधी के बाद बिजली चमकने, ओलावृष्टि तथा हल्की से मध्यम बारिश के साथ भीषण आंधी आने की आशंका है। विभाग ने कहा कि हवा की गति 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है और यह 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उससे जुड़े चक्रवाती परिसंचरण के कारण क्षेत्र में नमी और अस्थिरता बढ़ी है, जिससे मौसम में यह बदलाव आया है। पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में भी शनिवार को बारिश हुई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। पंजाब में मोहाली, पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, फाजिल्का और फिरोजपुर में वर्षा हुई, जबकि पठानकोट में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। हरियाणा में नारनौल, सिरसा, गुरुग्राम, रोहतक, सोनीपत और करनाल में बारिश हुई। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में 18.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यहां अधिकतम तापमान 25.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 14 डिग्री कम था। मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, दोनों राज्यों के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से आठ से 10 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश में भी बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई। बहराइच, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी, नजीबाबाद और मेरठ में तीन से 18 मिलीमीटर तक वर्षा दर्ज की गई। हालांकि लखनऊ में बारिश नहीं हुई, लेकिन वहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 6.1 डिग्री कम था। मुरादाबाद उत्तर प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से दर्ज हो रहे 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान की तुलना में काफी कम था। मौसम विभाग ने राज्य के कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ आंधी आने की संभावना जताई है।
हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश और ओलावृष्टि हुई, जिसके बाद मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश क्षेत्रों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। शुक्रवार शाम शिमला और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। शिमला जिले के चौपाल और कोटखाई में भी ओले गिरे। मौसम विभाग ने रविवार को राज्य के 12 में से 10 जिलों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। जनजातीय जिले किन्नौर और लाहौल-स्पीति को इस चेतावनी से बाहर रखा गया है। विभाग के अनुसार, राज्य में पांच जून तक वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। शिमला स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, मंडी जिले के पंडोह में सर्वाधिक 37.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा ऊना, नैना देवी, गुलेर, सुंदरनगर, कांगड़ा, जोत, सराहन और देहरा गोपीपुर में 15 से 34 मिलीमीटर तक बारिश हुई। बारिश के कारण राज्यभर में अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। ऊना 28.8 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म स्थान रहा, जहां तापमान शुक्रवार की तुलना में लगभग 11 डिग्री कम दर्ज किया गया। -
नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक साथ एक मंच पर जुटे। इस दो दिवसीय सम्मेलन में कृषि को केवल उत्पादन का विषय नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, किसान आय और भविष्य की सुरक्षा से जोड़ते हुए एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखने का संकल्प लिया गया।
पूसा परिसर में आयोजित इस सम्मेलन में पहले दिन राज्यों के कृषि और बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, जल प्रबंधन और फसल योजना पर विस्तार से चर्चा की। दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों ने मिलकर खरीफ रणनीति को नीतिगत और क्रियान्वयन स्तर पर मजबूत करने का संकल्प लिया।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि केवल योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी और राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि किसानों तक योजनाओं का लाभ सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को प्रमुख पहल के रूप में सामने रखा गया, जिसका उद्देश्य केवल कृषि भूमि की रक्षा नहीं, बल्कि पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखना बताया गया। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग पर भी जोर दिया गया, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे।इस सम्मेलन की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि कई राज्यों के कृषि मंत्रियों ने स्वयं अपने खेतों में प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया। इस कदम को नीति और व्यवहार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे किसानों के बीच इसका संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।सम्मेलन में दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, उत्पादन बढ़ाने, लागत नियंत्रण और संसाधनों के संरक्षण को एकीकृत रणनीति के रूप में देखा गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि नीतिगत निर्णयों को जन-अभियान में बदलने के लिए व्यापक संचार और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए पद नहीं, बल्कि संकल्प की आवश्यकता होती है। इस विचार ने पूरे सम्मेलन की दिशा तय की और मंत्रियों एवं अधिकारियों को अधिक जिम्मेदारी और समन्वय के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया।दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस को कृषि सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जहां केंद्र और राज्यों ने मिलकर कृषि को मिशन मोड में आगे बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया। इसमें ‘खेत बचाओ अभियान’, प्राकृतिक खेती और आत्मनिर्भर कृषि जैसे लक्ष्यों को प्राथमिकता दी गई। -
नई दिल्ली। वाइस एडमिरल अजय कोचर, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 29 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 48वें उप-प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद वाइस एडमिरल अजय कोचर ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को नमन किया। उन्होंने देश की सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और राष्ट्रसेवा के संकल्प को दोहराया।पुणे स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल अजय कोचर को 1 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। तोप और मिसाइल प्रणालियों के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने 37 वर्षों से अधिक लंबे नौसैनिक करियर में कई महत्वपूर्ण कमान, परिचालन और स्टाफ दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।अपने करियर के दौरान उन्होंने भारतीय नौसेना के युद्धपोत नाशक, विभूति और कृपाण की कमान संभाली। वे त्रिकंद फ्रिगेट के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर भी रहे। इसके अलावा उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली, जिसके दौरान एयर विंग का सफल एकीकरण और परिचालन संचालन पूरा किया गया।वाइस एडमिरल अजय कोचर ने वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, गोवा स्थित नेवल वॉर कॉलेज और यूनाइटेड किंगडम स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से उच्च सैन्य शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नेवल प्लान्स में संयुक्त निदेशक, स्टाफ आवश्यकताओं के निदेशक और प्रधान निदेशक डीएससीटी जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पदों पर कार्य किया।2018 में फ्लैग रैंक पर पदोन्नति के बाद उन्होंने कैरियर प्रोजेक्ट्स के सहायक नियंत्रक और युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण के सहायक नियंत्रक के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 2021 में पश्चिमी बेड़े की कमान संभाली और बाद में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के कमांडेंट के रूप में प्रशिक्षण मानकों और अवसंरचना के उन्नयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।25 मई 2024 को उन्होंने पश्चिमी नौसैनिक कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार ग्रहण किया। इस दौरान पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों के बीच उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर सहित उच्च गति वाले नौसैनिक अभियानों का नेतृत्व किया और पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने में अहम भूमिका निभाई।नौसेना उप प्रमुख बनने से पहले उन्होंने अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने त्रि-सेवा समन्वय और संयुक्तता को मजबूत किया। उनकी असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2026 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। वाइस एडमिरल अजय कोचर का विवाह रेमन से हुआ है, जो एक कलाकार हैं और विज्ञापन तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी कार्य कर चुकी हैं। उनके दो बच्चे हैं- बेटी सबा, जो स्वतंत्र पत्रकार हैं, और बेटा करण, जो एक वित्तीय परामर्श फर्म में कार्यरत हैं। - नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता के बीच सोने और चांदी ने शुक्रवार को हल्की कमजोरी के साथ शुरुआत की। हालांकि, दोनों कीमती धातुओं में एक सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है।मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,60,903 रुपए के मुकाबले 449 रुपए की कमजोरी के साथ 1,60,454 रुपए पर था।सुबह 10:15 बजे यह 0.17 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 1,60,622 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,60,197 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,60,962 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ।वहीं, चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,69,537 रुपए के मुकाबले 1,169 रुपए की कमजोरी के साथ 2,68,368 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,68,018 रुपए का न्यूनतम स्तर और 2,69,400 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में हल्की तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,540 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.25 प्रतिशत की तेजी के साथ 76 डॉलर प्रति औंस पर था।अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी हुई है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान 60 दिन के सीजफायर के एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। रिपोर्ट्स में कहा गया कि इस समझौते का मकसद सीजफायर को बढ़ाने के साथ परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक बातचीत शुरू होना है। साथ ही, इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर भी बातचीत होगी।
- नई दिल्ली। भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर जा रहा एक तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जानकारी समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली कई वेबसाइटों से मिली है। ‘निसोस केरोस’ नाम का यह जहाज विशाखापत्तनम जा रहा है और इसके 3 जून तक वहां पहुंचने की उम्मीद है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह जहाज 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था। शुक्रवार सुबह 6 बजे भारतीय समय के अनुसार इसे भारत के पश्चिमी तट के पास उत्तरी अरब सागर में देखा गया।ईरान की समाचार एजेंसी आईआरएनए ने गुरुवार को बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने पिछले 24 घंटों में 23 वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी, जिनमें तेल टैंकर और कंटेनर जहाज शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ईरानी सेना के अनुसार, सभी जहाजों की आवाजाही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नौसेना अधिकारियों के साथ औपचारिक समन्वय के बाद हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों को कोई शुल्क देना पड़ा या नहीं।ईरान पहले ही कह चुका है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क ले सकता है। इसी महीने ईरान ने समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ नाम की एजेंसी बनाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने के लिए शुल्क वसूलने को अवैध बताया है।अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह जलडमरूमध्य में स्वतंत्र आवाजाही बहाल करे। फरवरी में अमेरिका द्वारा इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी करने के बाद ईरान ने इस मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं और जहाजों पर हमले किए थे। होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र आवाजाही बहाल करना ईरान युद्ध खत्म करने की बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, ‘यह जलडमरूमध्य सभी के लिए खुला रहेगा।’ ईरान की कार्रवाई से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत गैस और तेल सप्लाई प्रभावित हुई है जो इसी रास्ते से गुजरती है।इससे वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक संकट गहरा गया है।बुधवार को अचानक ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ओमान ने ईरान के साथ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क वसूलने को लेकर कोई समझौता किया, तो अमेरिका ओमान पर हमला कर सकता है। ओमान, ईरान के सामने जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है। जहाजों की जानकारी रखने वाली संस्था ऑकविसर के अनुसार, ‘विशाखापत्तनम की ओर आ रहे जहाज निसोस केरोस’ का मालिक अरेथुसा शिपिंग कॉरपोरेशन है और इसका संचालन किक्लेड्स मैरीटाइम कॉरपोरेशन कर रही है। हुंडई द्वारा निर्मित यह जहाज 333 मीटर लंबा है और इसकी क्षमता 3,18,744 टन या 3,38,648 घन मीटर है।
- नई दिल्ली। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत अन्य भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी है। इसके साथ ही चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही है। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी ने एक्स पर लिखा, “किसानों, मजदूरों और ग्रामीण भारत की आवाज को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। उनका सादगीपूर्ण जीवन, किसानों के प्रति समर्पण और जनकल्याण की राजनीति हम सभी को सदैव प्रेरणा देती रहेगी।”दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री, किसानों और वंचितों की मुखर आवाज़, चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। कृषि और ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए समर्पित उनके ऐतिहासिक निर्णय और जन-कल्याणकारी नीतियां सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी। राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।”उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा, किसान कल्याण हेतु आजीवन समर्पित, पूर्व प्रधानमंत्री “भारत रत्न” चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन। कृषक और गरीब कल्याण को समर्पित आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।”राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने चौधरी चरण सिंह को विनम्र श्रदांजिल देते हुए एक्स पर लिखा, “किसानों के कल्याण व उत्थान के लिए समर्पित नेता, ग्रामीण भारत की सशक्त आवाज, पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह का समर्पित जीवन किसानों, ग्रामीण भारत और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। किसानों के अधिकारों और आत्मसम्मान के लिए किए गए उनके प्रयास राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे।”बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट सिंह चौधरी ने एक्स पर लिखा, “भारत रत्न से अलंकृत, देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसानों के हितों की प्रबल आवाज जननेता स्व. चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। किसानों, ग्रामीण भारत और सामाजिक न्याय के प्रति उनका समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।”मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, “महान किसान नेता एवं स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। उनका पूरा जीवन किसान कल्याण, ग्रामीण भारत के पुनरुत्थान और वंचितों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित रहा। राष्ट्रहित और ईमानदारी को लेकर उनकी प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणापुंज है।”असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, “चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन। देश के शीर्ष नेतृत्व में रहते हुए भी उन्होंने कभी किसान को नहीं भुलाया। खेत की मिट्टी से जुड़ा उनका नाता केवल राजनीतिक नहीं था, वह उनकी आत्मा में था। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सादगी और दृढ़ता मिलकर इतिहास बनाती है।”हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर लिखा, “किसानों के कल्याण के लिए आजीवन समर्पित रहे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र निर्माण के प्रति आपका त्याग, संघर्ष एवं किसानों के कल्याण और उत्थान के लिए समर्पित आपका सम्पूर्ण जीवन हमारे लिए प्रेरणा का पर्याय है।”वहीं, राष्ट्रीय लोकदल ने एक पर कई पोस्ट के जरिए श्रद्धांजलि अर्पित की है। आरएलडी ने लिखा, “भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की अमर स्मृतियों को सादर नमन। उनके विचार और किसान हित का संकल्प सदैव जीवंत रहेगा।”एक अन्य पोस्ट में लिखा, “भारत की विकास यात्रा को समझना हो तो चौधरी चरण सिंह के विचारों को समझना होगा। उनका दृढ़ विश्वास था कि राष्ट्र की समृद्धि का मार्ग गांवों, खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है। उन्होंने किसान को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और सामाजिक शक्ति का केंद्र भी माना। किसान मसीहा, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।”आरएलडी ने आगे कहा, “चौधरी साहब ने भारतीय राजनीति को सत्ता के गलियारों से निकालकर खेत-खलिहानों, गांवों और किसानों की चौपाल तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने किसान को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव माना। उनका जीवन सादगी, सिद्धांत और किसान हितों के प्रति अडिग समर्पण का जीवंत प्रतीक रहा। उनके विचार सदैव देश के किसान-कमेरे वर्ग को अधिकार, सम्मान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।”--
- नई दिल्ली। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला वायरस के प्रकोप के बीच अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और यात्रा संबंधी उपायों पर एक संयुक्त त्रिपक्षीय बयान जारी किया है।संयुक्त बयान में कहा गया कि तीनों देशों ने इबोला वायरस से सर्वाधिक प्रभावित अफ्रीकी क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए समन्वित सार्वजनिक स्वास्थ्य यात्रा उपाय लागू करने का निर्णय लिया है।बयान में कहा गया, “यह समन्वित पहल हमारे नागरिकों तथा फीफा विश्व कप 2026 के दौरान आने वाले लाखों आगंतुकों, प्रशंसकों, खिलाड़ियों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। साथ ही हमारे देशों के बीच यात्रा और व्यापार गतिविधियों को भी सुचारु बनाए रखा जाएगा।”तीनों देशों ने कहा कि उत्तरी अमेरिका में विश्वभर के लोगों का स्वागत करते समय क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य और सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।इससे पहले बुधवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इबोला के मामलों को अमेरिका में प्रवेश करने से रोकने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है।व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान रुबियो ने कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों को वायरस के संभावित प्रसार से सुरक्षित रखना है।उन्होंने कहा, “हम किसी भी स्थिति में इबोला के मामलों को अमेरिका में प्रवेश नहीं करने देंगे।”रुबियो ने बताया कि अमेरिकी विदेश विभाग, रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC), स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) और अन्य कई संघीय एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, में प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं।उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में वायरस को नियंत्रित करने के लिए सहायता बढ़ाई गई है और अमेरिकी एजेंसियां यात्रियों तथा सीमा गतिविधियों की भी निगरानी कर रही हैं, ताकि संक्रमित व्यक्ति अमेरिका में प्रवेश न कर सकें।इस बीच, युगांडा ने इबोला के प्रसार को रोकने के लिए बड़े सार्वजनिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बुधवार देर रात जारी परिपत्र के अनुसार, संगीत कार्यक्रम, सांस्कृतिक उत्सव, सार्वजनिक रैलियां, राजनीतिक सभाएं, मैराथन और सीमा पार विपणन गतिविधियों सहित बड़ी भीड़ जुटाने वाले सभी कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गई है।
-
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में नवगठित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के काम को मजबूत करने के लिए सात दिनों के भीतर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को 600 हेक्टेयर भूमि सौंप दी है।
गांधीनगर जिले के सोनीपुर गांव में 340 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा ने राज्य में सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी लाने के अपने चुनावी वादे को पूरा किया है।अमित शाह ने कहा, “हमने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि यदि आप हमें सत्ता सौंपते हैं तो हम कुछ ही दिनों के भीतर बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू कर देंगे।” उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को बधाई देते हुए कहा, “मैं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को महज सात दिनों के भीतर बीएसएफ को 600 हेक्टेयर भूमि सौंपने के लिए बधाई देना चाहता हूं। चिकन नेक क्षेत्र में 121 हेक्टेयर भूमि भी केंद्र सरकार को सौंप दी गई है।”अमित शाह ने इस कदम को भाजपा के व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे से जोड़ा और दावा किया कि बंगाल में सरकार परिवर्तन के बाद बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ पहले ही कम हो गई है। उन्होंने कहा, “पहले ममता के शासनकाल में हर दिन घुसपैठ होती थी, लेकिन अब घुसपैठिए खुद ही वापस लौटने लगे हैं।”केंद्रीय गृह मंत्री ने ये टिप्पणियां भाजपा के देश भर में बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को उजागर करते हुए कीं। उन्होंने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को निर्णायक रूप से हराया था। उन्होंने कहा, “आज भाजपा देश के 80 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में शासन कर रही है। हाल ही में बंगाल में चुनाव हुए, जहां दीदी की सरकार पूरी तरह से साफ हो गई।”गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा कि भाजपा का ‘भगवा झंडा’ अब पूरे गंगा क्षेत्र में ‘उत्तराखंड से गंगासागर तक लहरा रहा है। यह भाषण अमित शाह के गांधीनगर दौरे के दौरान दिया गया, जहां वे कई विकास कार्यक्रमों में भाग लेने आए थे, जिनमें कलोल और गांधीनगर उत्तर विधानसभा क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं का उद्घाटन, सौंदर्याकृती आंगनबाड़ी केंद्र और ग्राम विकास परियोजनाएं शामिल थीं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों के भीतर दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 1,200 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का उद्घाटन या शुभारंभ किया गया है। उन्होंने इन परियोजनाओं का श्रेय राज्य सरकार, केंद्र सरकार और निजी औद्योगिक समूहों से प्राप्त कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी निधि को दिया।



.jpg)




.jpg)


















