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अयोध्या (उप्र)। अयोध्या में राम मंदिर की सुरक्षा दीवार का काम पूरा करने के लिए जन्मभूमि परिसर से सटी जमीन के मालिकों से अधिग्रहण पर बातचीत चल रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि ये सुरक्षा दीवार लगभग 12 मीटर ऊंची और 14 फीट चौड़ी है और इस दीवार के निर्माण पर लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। सूत्रों ने बताया कि यह सुरक्षा दीवार लगभग 70 एकड़ क्षेत्र को कवर करेगी और इसका कुल घेरा लगभग चार किलोमीटर होगा। उन्होंने बताया कि टेढ़ी बाज़ार से दुराही कुआं रोड पर गोकुल भवन बैरियर के सामने परिसर के अंदर काम शुरू हो गया है। सूत्रों ने बताया कि पाइलिंग के लिए खुदाई पूरी हो गई है और मंदिर के पश्चिमी हिस्से में निर्माण का काम तेज़ी से हो रहा है, जबकि सीधी घेरा पक्का करने के लिए जमीन अधिग्रहण के बारे में संबंधित जमीन मालिकों से बातचीत चल रही है। मंदिर के सूत्रों ने बताया कि निर्माण का काम रक्षा मंत्रालय के उपक्रम 'इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' की विशेषज्ञ निगरानी में किया जा रहा है, क्योंकि यह सुरक्षा दीवार कोई सामान्य घेरा नहीं है, बल्कि सेंसर और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होगी। सूत्रों ने बताया कि परियोजना को लागू करने का काम उत्तराखंड की दो एजेंसियों को अलग-अलग जगहों पर सौंपा गया है। सूत्रों ने कहा, ''मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए लगभग तीन दर्जन 'वाच टावर' भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से लगभग एक दर्जन पूरे हो चुके हैं।
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नयी दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापक शुल्क आदेशों को उच्चतम न्यायालय की तरफ से रद्द कर दिए जाने के बाद अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर नया वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा की है जिसके तहत भारत को अब पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत के जवाबी सीमा शुल्क का ही सामना करना होगा। ट्रंप की इस घोषणा के मुताबिक, यह अस्थायी आयात शुल्क 10 प्रतिशत का होगा और 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने 20 फरवरी को इस संबंध में एक आधिकारिक घोषणा जारी की।
आयात शुल्क वह कर है जो कोई देश अन्य देशों से आयात की गई वस्तुओं पर लगाता है। आयातक को यह शुल्क सरकार को चुकाना होता है। आम तौर पर कंपनियां यह शुल्क अंतिम उपयोगकर्ता या उपभोक्ता पर डाल देती हैं। इस वजह से आयातित वस्तुएं उस देश में महंगी हो जाती हैं। जहां तक जवाबी शुल्क का सवाल है तो इस कर को अमेरिका ने पहली बार लगाया था। अप्रैल, 2025 में अमेरिका ने भारत सहित लगभग 60 देशों पर यह शुल्क लगाया था, ताकि अमेरिकी निर्यातकों को समान अवसर मिल सके। उदाहरण के लिए, यदि कोई देश अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश की वस्तुओं पर उतना ही शुल्क लगाएगा। यह मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जाता है। भारत के संदर्भ में अमेरिका ने अप्रैल, 2025 में 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। जुलाई में यह 25 प्रतिशत कर दिया गया और अगस्त में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया गया। इस तरह भारतीय उत्पादों पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया। फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद अमेरिका ने कहा कि भारत पर यह शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा और अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि फिलहाल भारत की वस्तुओं पर अमेरिका में 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क लागू है।
हालांकि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप के वैश्विक शुल्क आदेशों को रद्द करने के बाद और ट्रंप द्वारा नया आदेश जारी करने के बाद 24 फरवरी, 2026 से भारतीय उत्पादों पर केवल 10 प्रतिशत जवाबी शुल्क ही लगेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु पर अमेरिका में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) के तौर पर पहले से पांच प्रतिशत शुल्क लागू है, तो अब इसके ऊपर 10 प्रतिशत जोड़कर कुल 15 प्रतिशत शुल्क लगेगा। पहले यह पांच प्रतिशत एमएफएन और 25 प्रतिशत आपसी समान शुल्क मिलकर कुल 30 प्रतिशत हो जाता था। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा कि कुछ वस्तुओं पर यह अस्थायी आयात शुल्क लागू नहीं होगा। इसमें महत्वपूर्ण खनिज, मुद्रा और सोने में उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा एवं ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक शामिल हैं, जिन्हें अमेरिका में उगाया या उत्पादित नहीं किया जा सकता या पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, गोमांस, टमाटर, संतरे, दवाएं एवं औषधीय सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, यात्री वाहन, हल्के, मध्यम एवं भारी वाहन, बसें और इन वाहनों के कलपुर्जे और कुछ अंतरिक्ष उत्पाद भी इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। भारत पर उद्योग क्षेत्रों के हिसाब से लागू शुल्क की बात करें तो इस्पात, एल्युमिनियम और तांबे पर 50 प्रतिशत और वाहनों के कुछ पुर्जों पर 50 प्रतिशत शुल्क जारी रहेगा। अमेरिका का कहना है कि वह भारत के साथ व्यापार घाटा झेल रहा है। उसका आरोप है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यात भारतीय बाजार में सीमित हो जाता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और अमेरिका अगले महीने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बदले हुए हालात में भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लाभों का नए सिरे से मूल्यांकन करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्था जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि "व्यापार समझौते कोई दान नहीं हैं। इसमें दोनों पक्षों को लाभ होना चाहिए। अब भारत के लाभों का पुनर्मूल्यांकन होना जरूरी है।" राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने अमेरिका में आयातित सभी वस्तुओं पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क लागू करने की भी घोषणा की। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं। 2021 से 2025 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत के पक्ष में 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा। सेवाओं के क्षेत्र में भारत ने 28.7 अरब डॉलर का निर्यात किया और 25.5 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे 3.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ हुआ। -
गुवाहाटी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च की समयसीमा तक देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। पूर्वोत्तर में पहली बार आयोजित 87वीं सीआरपीएफ दिवस परेड को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां पत्थरबाजी की घटनाओं की संख्या घटकर शून्य हो गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मणिपुर में जातीय हिंसा से निपटने और केवल तीन वर्षों में माओवादियों की कमर तोड़ने के लिए भी सीआरपीएफ को तैनात किया गया। उन्होंने कहा, ''मैं सीआरपीएफ पर भरोसा कर सकता हूं और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या का सफाया कर देंगे।'' गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुटा पहाड़ियों में 21 दिनों के 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' के लिए सीआरपीएफ की प्रशंसा की, जिसमें अप्रैल-मई 2025 में 31 नक्सली मारे गए थे। उन्होंने कहा कि 46 डिग्री सेल्सियस के तापमान में काम करते हुए, जब पसीने में प्रतिदिन 15 लीटर पानी बह जाता था, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने झुलसा देने वाली गर्मियों का सामना करते हुए पहाड़ को नक्सलियों के चंगुल से मुक्त कराया और उनके गढ़ को ध्वस्त कर दिया। शाह ने कहा कि 10-11 साल पहले देश में ''जख्मों को कुरेदने वाले'' तीन बड़े 'हॉटस्पॉट' थे-जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में नक्सलवाद और उग्रवाद-जो अब शांति और प्रगति के केंद्र बन गए हैं। उन्होंने कहा, "ये तीनों क्षेत्र, जो कभी बमबारी, गोलीबारी, नाकाबंदी और विनाश के लिए जाने जाते थे, आज देश के विकास का हिस्सा हैं। विकास का इंजन बनकर, वे पूरे देश के विकास को गति देने में योगदान दे रहे हैं।" गृह मंत्री ने कहा कि सीआरपीएफ के योगदान के बिना ऐसी शांति संभव नहीं होती।
उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में सीआरपीएफ के 700 जवान मारे गए, 780 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और 540 जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए। उन्होंने कहा, ''इन बलिदानों के बिना, आज इन तीनों संवेदनशील क्षेत्रों को विकास के पथ पर ले जाना असंभव होता। अगर मैं असम की बात करूं, तो 79 जवानों ने असम में शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।'' शाह ने कहा कि सीआरपीएफ के 86 साल के इतिहास में पहली बार इसकी स्थापना दिवस परेड पूर्वोत्तर में, ''हमारे असम'' में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा, ''यह हम सभी के लिए, पूरे पूर्वोत्तर के लिए गर्व की बात है।'' गृह मंत्री ने कहा ''86 वर्षों में सीआरपीएफ ने न केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, बल्कि देश की सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बनकर ठोस परिणाम भी दिए हैं। इस दौरान 2,270 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। मैं उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।'' उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में एक भी गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ी, और इसमें सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गृह मंत्री ने इस अवसर पर सीआरपीएफ के 15 जवानों को वीरता पदक प्रदान किए, जबकि छह जवानों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली बटालियन को ट्राफी प्रदान की गईं। इससे पहले, सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) जी पी सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। देश भर की विभिन्न इकाइयों से चुनी गई सीआरपीएफ की आठ टुकड़ियों ने शनिवार को यहां सरुसजाई स्टेडियम में औपचारिक परेड का आयोजन किया। परेड का नेतृत्व 225वीं बटालियन के कमांडेंट दीपक ढोंडियाल ने किया। परेड में भाग लेने वाले दस्ते में उत्तरी सेक्टर की महिला कर्मी, साथ ही उत्तर पश्चिमी सेक्टर, झारखंड, ओडिशा, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), कोबरा यूनिट और पश्चिमी और उत्तर पूर्वी सेक्टरों की टुकड़ियां शामिल थीं। सीआरपीएफ की पहली बटालियन का गठन 1939 में ब्रिटिश शासन के तहत क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस (सीआरपी) के रूप में किया गया था। स्वतंत्रता के बाद, 1949 में, प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया। -
नयी दिल्ली. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के घोषणापत्र पर कुल 86 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं। घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क और जर्मनी भी शामिल हैं। यह कृत्रिम मेधा (एआई) के प्रभावों पर आयोजित शिखर सम्मेलन को वैश्विक समर्थन को दर्शाता है। वैष्णव ने कहा कि दुनिया भर के देशों ने 'सभी के कल्याण और सभी की खुशी' के सिद्धांतों को मान्यता दी है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मानव-केंद्रित एआई की दृष्टि को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है। एआई संसाधनों, सेवाओं और प्रौद्योगिकी को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने का लक्ष्य सभी देशों ने स्वीकार किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक भलाई को संतुलित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। वैष्णव ने कहा, "सिर्फ आर्थिक वृद्धि ही नहीं, सामाजिक सामंजस्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। सुरक्षा और भरोसा इस योजना के केंद्र में हैं और इन्हें मुख्य बिंदुओं में शामिल किया गया है।" उन्होंने कहा कि घोषणापत्र के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और मानव संसाधन के विकास पर भी जोर दिया गया है। वैष्णव ने कहा, "इन सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सभी देशों ने सहमति जताई है। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकांश देशों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क, मिस्र, इंडोनेशिया और जर्मनी शामिल हैं।" एआई इंपैक्ट समिट में केवल एआई से संबंधित बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक का निवेश सुनिश्चित किया गया। वैष्णव ने शुक्रवार को कहा था कि इस सम्मेलन में पांच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो भारत की एआई पहल में घरेलू और वैश्विक मजबूत रुचि एवं सहभागिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "प्रदर्शनी में पांच लाख से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया, बहुत कुछ सीखा और दुनिया भर के कई विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। कई स्टार्टअप को अपने काम को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। कुल मिलाकर, चर्चाओं की गुणवत्ता अद्भुत थी।" वैष्णव ने यह भी कहा कि मंत्री स्तरीय संवाद, नेताओं की बैठक, मुख्य उद्घाटन समारोह या सम्मेलन की पूरी प्रक्रिया में भागीदारी और संवाद की गुणवत्ता अत्यधिक प्रभावशाली रही।
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नयी दिल्ली,। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सिमाला प्रसाद ने अपनी नई किताब "शी गोज मिसिंग" में हर साल हजारों नाबालिग लड़कियों के गुम होने की जांच की है, साथ ही कानून प्रवर्तन और समाज के "ध्यान नहीं देने, सवाल नहीं करने या कार्रवाई नहीं करने" पर भी बात की है। पुस्तक के प्रकाशक ओम बुक्स इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा कि अभी जबलपुर में रेलवे की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात प्रसाद की नई किताब उन सामाजिक-मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक और व्यवस्थागत वजहों की जांच करती हैं जो छोटी लड़कियों को उनके घरों से निकालकर गुमनामी में धकेल देती हैं। उन्होंने कहा, "परंपरागत अपराध कथाओं के उलट, 'शी गोज मिसिंग' लापता लड़कियों को आंकड़ों या कभी-कभी होने वाली घटनाओं तक सीमित नहीं करती... यह घर से भाग जाने, बगावत करने या 'बुरे फैसलों' जैसी जानी-पहचानी वजहों को चुनौती देती है, और यह दिखाती है कि कैसे भावनात्मक अनदेखी, लैंगिक आधार पर स्थितियों का आकलन, डर, जबरदस्ती और संस्थागत उदासीनता मिलकर छोटी जिंदगियों को खत्म कर देती हैं।"
सच्ची घटनाओं पर आधारित इस किताब का मकसद यह दिखाना है कि कैसे गुमशुदा होना शायद ही कभी अचानक होता है, बल्कि "बार-बार चुप्पी साधने, चेतावनियों को नजरअंदाज करने और सामान्य बन गए अन्याय का नतीजा होता है।" प्रसाद किताब में लिखती हैं, "मुझे उम्मीद है कि यह किताब कार्रवाई करने के लिए आह्वान करेगी, और हमें सिर्फ आंकड़ों से आगे बढ़कर इन युवाओं की जिंदगी और भविष्य को देखने के लिए कहेगी। लड़कियों के लापता होने के कारणों को बताकर और उनके पुनर्वास के रास्ते खोजकर, मेरा मकसद पाठकों को इन मुद्दों को संवेदनशीलता और करुणा के साथ देखने के लिए जानकारी और समझ प्रदान करना है।" पुलिस सेवा में अपने पेशेवर अनुभव के आधार पर, प्रसाद एक आलोचनात्मक पक्ष भी पेश करती हैं, जिसमें यह बताया गया है कि कैसे कानून प्रवर्तन और प्रशासनिक तंत्र "अक्सर सही से प्रतिक्रिया नहीं देते"। प्रसाद एक गांव में एक महिला की हत्या की तुलना में एक लापता लड़की के मामले से निपटने के तरीके का उदाहरण देती हैं, जहां वह अपने करियर की शुरुआत में तैनात थीं। हत्या की घटना पर तो पुलिस बल और स्थानीय प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पूरा ध्यान गया, लेकिन 15 साल की लड़की के गायब होने के मामले को सुबह की 'ब्रीफिंग' में एक वाक्य में समेट दिया गया। वह किताब में लिखती हैं, "मैं हैरान थी: मामला जघन्य था, फिर भी इसे इस तरह नहीं देखा गया। हम इसकी गंभीरता नहीं समझ सके। और 'हम' से मेरा मतलब है प्रत्येक पक्ष से है जिसमें मैं भी शामिल हूं तथा पुलिस और पूरा समाज भी है।"
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इंदौर । मध्यप्रदेश सरकार ने इंदौर में मरणोपरांत अंगदान करने वाले 49 वर्षीय व्यक्ति को 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ बृहस्पतिवार को अंतिम विदाई दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। 'इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन' के समन्वयक संदीपन आर्य ने बताया कि संपत्ति कारोबारी विजय जायसवाल (49) को सड़क हादसे में सिर में गंभीर चोट आने पर शहर के एक निजी अस्पताल में 15 फरवरी को भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि खरगोन कस्बे के निवासी जायसवाल की हालत में इलाज के बाद भी सुधार नहीं हुआ और चिकित्सकों ने उन्हें दिमागी रूप से मृत घोषित कर दिया। आर्य ने बताया, ''हमारे परामर्श के बाद जायसवाल के परिजन उनके मरणोपरांत अंगदान के लिए राजी हो गए। इसके बाद शल्य चिकित्सकों ने उनके मृत शरीर से हृदय, यकृत (लिवर) और दोनों गुर्दे (किडनी) प्राप्त कर लीं।'' उन्होंने बताया कि जायसवाल के मरणोपरांत अंगदान से हासिल हृदय को विशेष विमान के जरिये अहमदाबाद भेजा गया, जबकि उनका लिवर और दो किडनी स्थानीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित की गईं। इस बीच, जायसवाल को राज्य सरकार ने खरगोन में 'गार्ड ऑफ ऑनर' के साथ अंतिम विदाई दी। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के आला अफसर मौजूद थे। चश्मदीदों ने बताया कि 'गार्ड ऑफ ऑनर' के दौरान वर्दीधारी पुलिसकर्मी अपनी राइफल लेकर कतार में खड़े हुए। गारद का नेतृत्व करने वाले पुलिस अधिकारी के आदेश पर इस दस्ते के सदस्यों ने राइफल को सलामी की स्थिति में लाकर अंगदानी के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस मौके पर मौजूद जायसवाल की भावुक पत्नी आराधना ने कहा, ''मेरे पति के मरणोपरांत अंगदान के कारण तीन-चार परिवारों के गंभीर रूप से बीमार सदस्यों की जान बच सकेगी। हमने इसी भाव से उनके अंगों को दान करने का फैसला किया।''
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नयी दिल्ली। भारत द्वारा फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का निर्णय लेने के कुछ दिनों बाद, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि "मेक इन इंडिया" इस कार्यक्रम का एक "मुख्य" घटक होगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस भारत के साथ पनडुब्बियों पर सहयोग बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है।फ्रांस के राष्ट्रपति 'एआई इम्पैक्ट समिट' के इतर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हमारे पास सिर्फ रणनीतिक साझेदारी नहीं है, बल्कि एक विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है जो भारत और फ्रांस दोनों के लिए अनूठी है।" फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों पक्ष रक्षा, नवाचार और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। राफेल खरीद कार्यक्रम से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि फ्रांस रखरखाव और क्षमता निर्माण के पहलुओं में सहयोग बढ़ाना चाहता है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ दिन पहले ही भारत ने राफेल की नई खेप की खरीद की इच्छा जताई है... और मेक इन इंडिया इसका एक प्रमुख पहलू होगा। उन्होंने कहा, "मौजूदा सहयोग को स्पष्ट रूप से मजबूत करने की दिशा में यह एक नया कदम है।"भारत ने अपने अब तक के सबसे बड़े रक्षा अधिग्रहण अभियान के तहत, पिछले सप्ताह फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार ढांचे के तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, 'मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट' (एमआरएफए) परियोजना के तहत, राफेल निर्माता डसॉल्ट एविएशन द्वारा 18 विमान उड़ान भरने की स्थिति में आपूर्ति किए जाएंगे और शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिसमें लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। जेट विमानों की खरीद का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय वायु सेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या आधिकारिक तौर पर स्वीकृत 42 की संख्या से घटकर 31 रह गई है। मोदी सरकार ने 2015 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए सरकार-से-सरकार के बीच एक समझौते की घोषणा की थी। भारतीय वायु सेना अब इन विमानों का संचालन कर रही है। पिछले साल भारतीय नौसेना ने राफेल जेट के 26 समुद्री संस्करण खरीदने के लिए 64,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था। फ्रांस तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने पर भी विचार कर रहा है। इन पनडुब्बियों का निर्माण सरकारी स्वामित्व वाली मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) और फ्रांसीसी रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी नेवल ग्रुप द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना प्रस्तावित है। -
नयी दिल्ली, । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' ने नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत हासिल की गई उपलब्धियों के आधार पर देश को एक नये युग में नेतृत्व के लिए तैयार किया है। शाह ने 'एक्स' पर की गई कई पोस्ट में कहा कि वैश्विक नेताओं और तकनीकी दिग्गजों के सबसे बड़े सम्मेलन की मेजबानी करके, भारत ''सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" के प्राचीन मंत्र के साथ नये युग के लिए नैतिक दिशा तय कर रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ''भारत का दुनिया से किया गया ऐसा वादा है, जिसके माध्यम से वह अपनी नवाचार की असीम क्षमता और संस्कृति में गहराई तक रची-बसी लोकतांत्रिक भावना के बल पर मानवता की प्रगति की यात्रा को निरंतर गति प्रदान करेगा।'' उन्होंने कहा, ''भविष्य भले ही कई लोगों के लिए अनिश्चित हो, लेकिन भारत ने पहले ही अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।'' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सम्मेलन में प्रस्तुत भारत की एआई परिकल्पना मानवता को एक त्रुटिरहित भविष्य की ओर दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि नैतिकता, जवाबदेही, राष्ट्रीय डाटा संप्रभुता, सुलभता और विश्वसनीय प्रणालियों के सिद्धांतों के साथ दुनिया सभ्यतागत छलांग लगाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ''इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रदर्शित सर्वम एआई इस बात का प्रमाण है कि भविष्य भारत का है। बाईस भारतीय भाषाओं में अत्याधुनिक एआई समाधान प्रदान करते हुए, यह सुनिश्चित करता है कि प्रौद्योगिकी हर व्यक्ति तक पहुंचे, जिससे मोदी जी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने का मार्ग प्रशस्त होता है, जहां प्रौद्योगिकी नागरिकों की भरोसेमंद सहयोगी है।'' यह शिखर सम्मेलन 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले दुनियाभर के नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेई प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लै, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो आदि शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार भारतीय आईटी उद्योग के सामने कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण उत्पन्न चुनौतियों से अवगत है और प्रतिभाओं का कौशल बढ़ाने (अपस्किल) के लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ काम कर रही है। 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' 2026 के उद्घाटन सत्र में वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय बजट में एक बड़ा नीतिगत बदलाव घोषित किया है जिसका उद्देश्य दुनिया के डेटा को भारत में आकर्षित करना, उन्हें यहीं संग्रहित और संसाधित करना तथा यहां से उच्च-मूल्य सेवाएं वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, '' हम अपने आईटी उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों के प्रति भी सजग हैं और उन्हें कम करने के लिए उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि प्रतिभाओं का कौशल बढ़ाया जा सके और इस नए बुद्धिमत्ता युग के लिए नई प्रतिभा श्रृंखला तैयार की जा सके। '' वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सदैव स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है और वर्तमान में भारत की विद्युत उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वच्छ स्रोतों से आ रहा है। उन्होंने कहा, "हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री ने हाल ही में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सुधार किए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा के आधारभूत भार की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पिछले एक दशक में हमने अपने विद्युत ग्रिड को लगभग पूरी तरह से सुदृढ़ और पुनर्निर्मित किया है।"
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नयी दिल्ली. वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों की एक नई समीक्षा के बाद देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या आठ से घटकर सात रह गई है। यह बदलाव केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की घोषणा के अनुरूप है। ' एक न्यूज़ एजेंसी ' को अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने हाल में नौ फरवरी से प्रभावी सभी नक्सल प्रभावित राज्यों का नया वर्गीकरण जारी किया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में 'एलडब्ल्यूई से निपटने की राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना' की व्यापक समीक्षा की, जिसमें झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल सहित नौ राज्यों के 38 जिलों का विश्लेषण किया गया। पिछली समीक्षा दिसंबर 2025 में हुई थी। राष्ट्रीय कार्य योजना सुरक्षा संबंधी व्यय श्रेणी के दो मुख्य मद के तहत इन राज्यों और जिलों को आवंटित संसाधनों को विनियमित करती है। ये मद हैं- 'एलडब्ल्यूई प्रभावित जिले' और 'विरासत और विशेष महत्व (लिगेसी एंड थ्रस्ट) के जिले'। नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों को तीन और उप-वर्गों में बांटा गया है। नए वर्गीकरण के अनुसार, दिसंबर 2025 की समीक्षा में चिह्नित आठ जिलों की तुलना में अब नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों (जहां नक्सली हिंसा और गतिविधियां अभी दर्ज की जा रही हैं) की संख्या घटकर सात रह गई है। ये सात जिले छत्तीसगढ़ में बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर और दंतेवाड़ा; झारखंड में पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा में कंधमाल हैं। नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों की तीन उप-श्रेणियां हैं: 'सबसे अधिक प्रभावित जिले', 'चिंताजनक स्थिति वाले जिले' और 'अन्य नक्सली हिंसा से प्रभावित जिले'। सबसे अधिक प्रभावित जिले पिछली समीक्षा के समान ही हैं - छत्तीसगढ़ में बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा। दो 'चिंताजनक स्थिति वाले जिले' भी हैं, जहां नक्सलवाद कम हो रहा है पर संसाधनों की केंद्रित तैनाती अब तक आवश्यक है। ये जिले छत्तीसगढ़ में कांकेर और झारखंड में पश्चिम सिंहभूम हैं। दिसंबर 2025 से 'अन्य उग्रवाद प्रभावित जिलों' की श्रेणी में एक जिले की कमी आई है। वर्तमान में इस श्रेणी में दो जिले हैं: छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा और ओडिशा का कंधमाल। 'विरासत और निगरानी की जरूरत वाले जिलों की श्रेणी में अब नौ राज्यों के 31 जिले हैं, जबकि दिसंबर 2025 में यह संख्या 30 थी। गृह मंत्रालय की परिभाषा के अनुसार, 'विरासत' जिले' वे हैं जो अब वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नहीं हैं, लेकिन उन्हें कुछ समय के लिए सुरक्षा और विकास कार्यों के संदर्भ में सहायता की आवश्यकता है। विशेष महत्व के जिले वे हैं जो नक्सली विस्तार के संभावित स्थल हैं और इसलिए उन्हें निरंतर समर्थन की आवश्यकता है। शाह ने नक्सली हिंसा को लोकतंत्र के लिए एक चुनौती बताते हुए कहा था कि इसमें अब तक लगभग 17,000 नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है.
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नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है, क्योंकि इस प्रक्रिया के अप्रैल से शुरू किये जाने के आसार हैं। एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) इसके दायरे में आ जाएंगे। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के अखिल भारतीय एसआईआर का आदेश पिछले साल जून में दिया गया था। बिहार में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभी जारी है। असम में एसआईआर के बजाय 'विशेष पुनरीक्षण' 10 फरवरी को पूरा हो गया था।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में बृहस्पतिवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की प्रगति तब देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का 11 भाषाओं में सीधा प्रसारण किया गया, साथ ही एआई-सक्षम सांकेतिक भाषा अनुवाद की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। भारत मंडपम के सभागार में प्रधानमंत्री के पीछे लगी एक बड़ी स्क्रीन पर एआई-सक्षम सांकेतिक भाषा अनुवाद प्रदर्शित किया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनका भाषण सभी के लिए सुलभ हो। मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 को संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में सुलभता और समावेश के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उनका भाषण एआई तकनीक के माध्यम से सांकेतिक भाषा में वास्तविक समय में उपलब्ध कराया गया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि दिव्यांग व्यक्ति भी कार्यवाही में पूरी तरह से भाग ले सकें। प्रधानमंत्री के भाषण का वास्तविक समय में जिन 11 भाषाओं में अनुवाद किया गया उनमें असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु शामिल हैं। मोदी ने बहुभाषी और सांकेतिक भाषा में अनूदित अपने भाषण के वीडियो सोशल मीडिया मंच पर साझा किए।
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत उन नवाचारों को बढ़ावा देना जारी रखेगा जो विभाजन को पाटते हैं और प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा,''एआई इम्पैक्ट समिट में एआई का उपयोग कर मेरे भाषण का वास्तविक समय में सांकेतिक भाषा में अनुवाद किया गया। यह एआई के संदर्भ में सुलभता और समावेशन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम हमेशा यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक विमर्श दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ हो।'' -
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और उन्नत तकनीक में साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय भारत के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने एआई और उन्नत तकनीकों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस यूएई के राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए। नई दिल्ली में आयोजित इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में समिट का उद्घाटन करते हुए एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत नई तकनीकों के विकास और उनके व्यापक उपयोग दोनों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। समिट के दौरान एआई आधारित सांकेतिक भाषा व्याख्या प्रणाली का प्रदर्शन किया गया, जिसने तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को प्रदर्शित किया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक एआई समुदाय से मानवता की भलाई के लिए जिम्मेदार तकनीकी विकास की अपील की। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के “एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर आज नई दिल्ली में पूसा स्थित ए.पी. शिंदे हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम ने उनके व्यक्तिगत व्रत को राष्ट्रीय हरित जनआंदोलन का स्वर देने की दिशा में ठोस कदमों को जन्म दिया। मंच से उन्होंने अपने विभागों के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत पौधारोपण से करने का निर्देश देने के साथ ही स्वागत में स्मृति चिन्ह के स्थान पर पेड़ लगाकर फोटो भेंट करने की अपील की, वहीं पेड़ बैंक और ‘अंकुर’ जैसे मंच की अवधारणा रखी। समारोह में साध्वी दीदी माँ ऋतंभरा, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, श्रीमती साधना सिंह और वरिष्ठ पत्रकार श्री आशुतोष झा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस मौके पर प्रारंभ में पूसा परिसर में पौधारोपण किया।
श्री चौहान ने कार्यक्रम में बताया कि यह संकल्प किसी एक दिन की भावनात्मक प्रेरणा से नहीं, बल्कि वर्षों से विकसित पर्यावरणीय दृष्टि से उपजा है। 2017 में उनके नेतृत्व में निकली ऐतिहासिक नर्मदा सेवा यात्रा के समापन पर मध्य प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, जिसने नदी, जंगल और जलवायु संरक्षण को जनआंदोलन में बदल दिया। इसी क्रम में “अंकुर अभियान” शुरू किया गया, जिसमें नागरिकों को पौधा लगाकर उसकी फोटो/सेल्फी पोर्टल पर अपलोड करने और उसकी रक्षा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया; इस अभियान के माध्यम से लगभग 1 करोड़ पौधे लगाए गए और समाज के विभिन्न वर्ग इस हरित यात्रा से जुड़े। समय के साथ यह पहल मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयाम ले चुकी है; जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, विशेष अवसरों पर लोगों ने पौधे लगाकर इस यात्रा को अपना व्यक्तिगत उत्सव बना लिया है।श्री चौहान ने मंच से घोषणा की कि:- कृषि मंत्रालय के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत अब पौधारोपण से करने की अपील।- आईसीएआर के डीजी से उन्होंने कहा- आईसीएआर के अधीन हर कार्यक्रम, सेमिनार, सम्मेलन व समारोह पेड़ लगाकर ही शुरू करें।- कृषि विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में पहले पेड़ लगाए जाएंगे और विद्यार्थियों से संकल्प दिलवाया जाएगा कि वे जीवनभर अपने जन्मदिन पर पौधा लगाएंगे।- केवीके, एग्रीकल्चर कॉलेज और रिसर्च से जुड़े किसी भी आयोजन की शुरुआत पेड़ लगाकर करें ।उन्होंने कहा कि जब कृषि विभाग अपने हर कार्यक्रम की शुरुआत पेड़ लगाकर करेगा तो सहज ही बड़ी संख्या में पौधे लगते चले जाएँगे और इससे बेहतर शुरुआत होगी।श्री चौहान ने अपने लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय साझा किया कि अब वे अपने स्वागत में फूल-मालाएँ, पटका या स्मृति चिन्ह स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अक्सर सम्मान व्यक्ति से अधिक पद का होता है और पद समाप्त होने पर वही भीड़ गायब हो जाती है; इसलिए इस भ्रम से बाहर निकलना आवश्यक है। किसी भी संस्था या व्यक्ति को यदि उनका स्वागत करना है, तो वह पाँच सौ रुपये के स्मृति चिन्ह की जगह पाँच पौधे लगाए और उसकी फोटो उन्हें भेंट करे – वही उनके लिए सच्चा अभिनंदन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कपड़े के पटके या माला का बाद में कोई उपयोग नहीं होता, जबकि उसी खर्च में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायी धरोहर बन जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि उनके मंत्रालय और अन्य आयोजकों को स्मृति चिन्ह की जगह पेड़ लगाकर फोटो देने की परंपरा अपनानी चाहिए।श्री चौहान ने पेड़ बैंक की अवधारणा रखी जिसके तहत दानदाता या संस्थाएं बड़ी संख्या में पौधे खरीदने के लिए धन दे सकें। समर्पित संस्था गड्ढा खोदने, पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले, ताकि जिनके पास समय नहीं है, वे भी दान के माध्यम से पौधारोपण में भागीदार बन सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि एक राष्ट्रीय मंच बनाया जाए, जिसका नाम “संभावना” या “अंकुर” हो सकता है, जहां नागरिक जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों की वर्षगांठ, किसी प्रियजन की जयंती या पुण्यतिथि पर पौधा लगाने या लगवाने के लिए पंजीकरण कर सकें। महानगरों में रहने वाले लोग तय राशि (जैसे ₹100–₹150) देकर अपने नाम से पेड़ लगवा सकें, और बदले में उन्हें उस पेड़ की फोटो और स्थान की जानकारी भेजी जाए। उन्होंने कहा कि देश में दानदाताओं की कोई कमी नहीं, कमी केवल काम करने वाले हाथों और व्यवस्थित मंच की है; यदि यह व्यवस्था खड़ी हो जाए तो “एक पौधा प्रति दिन” जैसे संकल्प एक महाअभियान में रूपांतरित हो सकते हैं।श्री चौहान ने प्रस्ताव रखा कि अभियान में जुड़ने के इच्छुक नागरिकों के लिए एक मिस्ड कॉल नंबर तय किया जाए। जो भी नागरिक इस नंबर पर मिस्ड कॉल दें या संदेश भेजें, उनके लिए आगे चलकर विशेष कार्यक्रम, सामूहिक पौधारोपण और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं, ताकि यह आंदोलन मजबूरी नहीं, स्वैच्छिक भावना और प्रेरणा से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों, बच्चों और अन्य वर्गों की सेवा की तरह पेड़ लगाना भी सेवा है, बल्कि संपूर्ण संसार की सेवा है, क्योंकि पेड़ का अर्थ है ऑक्सीजन, जीव-जंतुओं का आश्रय, बारिश व नदियां– संपूर्ण जीवन-श्रृंखला का संरक्षण।अंत में श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की जनसंख्या 140–144 करोड़ होने के बावजूद वह कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है; यदि इनमें से केवल 2–5 करोड़ लोग भी पौधारोपण आंदोलन से जुड़ जाएँ, तो करोड़ों पेड़ लगाए जा सकते हैं और भारत दुनिया के लिए दिशा-दर्शक बन सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन कितने दिनों का है, यह किसी के हाथ में नहीं, लेकिन जितनी साँसें बची हैं, उन्हें बेहतर दुनिया, अपने देश और अपनी जनता के लिए समर्पित करना हमारे हाथ में है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे न्यूनतम कोई न कोई संकल्प लेकर जाएँ – प्रतिदिन, प्रति माह या विशेष अवसरों पर – और “एक पौधा प्रति दिन” जैसी भावना को अपने-अपने स्तर पर आत्मसात करके जीवन को अर्थपूर्ण बनाएँ। उपस्थितजनों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण का संकल्प लिया।साध्वी दीदी माँ ऋतंभराजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में वृक्षों को सनातन संस्कृति की आत्मा से जोड़ते हुए भावपूर्ण अपील की कि दिखावटी खर्च, आतिशबाजी और क्षणिक उत्सवों की बजाय लोग अपने शुभ अवसरों पर पौधारोपण को “सच्चा यज्ञ” मानें और हर पौधे की रक्षा को वैसा ही धर्म समझें जैसा हम मंदिर में दिए व्रतों का पालन करते हैं।डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि श्री शिवराज सिंह चौहान ने जो आंदोलन खड़े किए हैं, वे देश का दृश्य परिदृश्य बदलने, लोगों को सकारात्मकता के साथ जोड़ने और प्रकृति के लिए कार्य करने के लिए हैं।वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व चिंतक श्री आशुतोष झा ने इस अवसर पर श्री शिवराज सिंह के पौधारोपण के प्रण को सभी से जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में पेड़ हर किसी को सुकून देते हैं, पेड़ केवल वृक्ष नहीं होते, बल्कि वे तो पीढ़ियों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना पुण्य का काम और सभी को पेड़ों से लगाव होना चाहिए, हमें प्रकृति की रक्षा करना चाहिए। - -शिवाजी जयंती पर उमड़ा युवा सैलाब, मशाल लेकर निकली माय भारत की ‘जय शिवाजी, जय भारत’ पदयात्रा- तिरंगा, भगवा और युवा जोश—सातारा में शिवाजी जयंती पर दिखा राष्ट्रभक्ति का विराट स्वरूप--जब 12 हजार युवाओं ने कहा—जय शिवाजी, जय भारत; सातारा बना युवा शक्ति का केंद्र-शिवाजी की धरती पर युवा शक्ति का महाकुंभ, सातारा में दिखा राष्ट्रनिर्माण का संकल्पनई दिल्ली। स्वराज के महानायक, सुशासन के प्रणेता और भारतीय संस्कृति के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर सातारा की ऐतिहासिक धरती राष्ट्रभक्ति और युवा शक्ति के अभूतपूर्व उत्साह से सराबोर नजर आई। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के स्वायत्तशासी संगठन मेरा युवा भारत (माय भारत) द्वारा जिला प्रशासन सातारा के सहयोग से आयोजित “जय शिवाजी, जय भारत” पदयात्रा में पूरे महाराष्ट्र से आए 12 हजार से अधिक माय भारत स्वयंसेवकों ने शामिल होकर शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों पर चलकर विकसित भारत निर्माण का संकल्प लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ सातारा के ऐतिहासिक रजवाड़ा परिसर से हुआ, जहां केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। महाराष्ट्र के राज्यगीत के साथ कार्यक्रम की भव्य शुरुआत हुई। केंद्रीय राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने स्वयं मशाल थामकर पदयात्रा का नेतृत्व किया। उनकी अगुवाई में कई हजार युवा हाथों में तिरंगा, माय भारत का ध्वज और भगवा पताका लिए कदम से कदम मिलाकर विकसित भारत रचने का संकल्प दोहराते हुए आगे बढ़े।केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्यमंत्री रक्षा निखिल खडसे ने युवा शक्ति को संबंधित करते हुए कहा कि जय शिवाजी, जय भारत पदयात्रा का उद्देश्य युवा पीढ़ी को वीर शिवाजी के महान जीवन गाथा से परिचित कराना है ताकि युवा भी स्वयं में अदम्य साहस, जीवंत प्रेरणा और नव ऊर्जा का संचार कर विकसित भारत निर्माण में योगदान देने के लिए सहभागी बने। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए।वहीं महाराष्ट्र सरकार से कैबिनेट मंत्री शंभुराज विजयादेवी शिवाजीराव देसाई ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, विचारों और मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि स्वराज की स्थापना कर वीर शिवाजी ने संदेश दिया कि आत्मसम्मान, न्याय और जनहित सर्वोपरि हैं।पदयात्रा रजवाड़ा से प्रारंभ होकर गोलबाग, राजपथ, शाहू चौक और अन्य प्रमुख मार्गों से होते लगभग 2.5 किमी दूरी तय करते हुए पोवई नाका तक पहुंची। पूरे मार्ग में जगह-जगह नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा पदयात्रा का भव्य स्वागत किया गया। विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां कलाकारों ने पारंपरिक मराठी लोकनृत्य, लेझीम, ढोल-ताशा वादन और युद्ध कौशल की प्रस्तुति देकर शिवाजी महाराज की वीरता और मराठी गौरव की झलक प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों ने युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया।कार्यक्रम में शामिल युवाओं के उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सुसज्जित होकर पदयात्रा का हिस्सा बने। युवतियां नौवारी साड़ी और युवाओं ने पारंपरिक पगड़ी और धोती-कुर्ता पहनकर शिवाजी महाराज की परंपरा को जीवंत कर दिया। ढोल-ताशों की गूंज और “जय शिवाजी, जय भारत”, “माय भारत, विकसित भारत” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।पदयात्रा के दौरान युवाओं के लिए लगाए गए विशेष सेल्फी स्टैंड आकर्षण का केंद्र बने जहां युवाओं ने खूब सेल्फी ली और माय भारत के क्यूआर कोड को स्कैन कर स्वयंसेवक बनने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण किया। माय भारत पोर्टल mybharat.gov.in पर पंजीकरण कर युवाओं ने राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपनी प्रतिबद्धता जताई। इस आयोजन के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं ने माय भारत से जुड़ने में रुचि दिखाई, जो भविष्य में राष्ट्र निर्माण की विभिन्न गतिविधियों में अपनी भूमिका निभाएंगे।कार्यक्रम के दौरान युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और अभियानों से संबंधित डॉक्यूमेंट्री वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। इन वीडियो के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका, नेतृत्व क्षमता के विकास और सामाजिक परिवर्तन में योगदान के लिए प्रेरित किया गया। विशेष रूप से ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के एंथम का प्रदर्शन युवाओं के लिए प्रेरणादायक रहा, जिसने उन्हें देश के भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में माय भारत प्लेटफॉर्म पर संचालित बजट क्वेस्ट क्विज 2026 की भी जानकारी दी गई।पदयात्रा मार्ग को विशेष रूप से श्वेत और भगवा रंग से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण शिवाजी महाराज की परंपरा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत नजर आया। रजवाड़ा परिसर में युवाओं के लिए फूड और रिफ्रेशमेंट स्टॉल भी लगाए गए। आयोजन की व्यवस्थाएं जिला प्रशासन सातारा और माय भारत के सहयोग से सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित की गईं।इस आयोजन में विभिन्न माय भारत यूथ क्लब, महाविद्यालयों की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाइयों, एनसीसी कैडेट्स, सामाजिक संगठनों और अन्य युवा समूहों से जुड़े युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। युवाओं ने न केवल पदयात्रा में भाग लिया, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा और राष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन भी किया।पदयात्रा के दौरान कलाकारों की प्रस्तुतियों को अतिथियों ने विशेष रूप से सराहा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ उनमें राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, विचारों और मूल्यों से परिचित कराना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा। शिवाजी महाराज का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वराज की स्थापना कर भारत के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी।युवाओं ने भी इस आयोजन को अत्यंत प्रेरणादायक बताया। विभिन्न स्वयंसेवकों ने बताया कि इस पदयात्रा ने शिवाजी महाराज के आदर्शों को करीब से समझने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को महसूस करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि वे माय भारत के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेकर विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।जिला प्रशासन और माय भारत के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस पदयात्रा ने न केवल युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव से भी जोड़ने का कार्य किया। इस भव्य आयोजन ने सातारा को एक बार फिर शिवाजी महाराज की वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया। पदयात्रा के समापन पर युवाओं ने एक स्वर में “जय शिवाजी, जय भारत” के उद्घोष के साथ विकसित भारत निर्माण का संकल्प दोहराया और यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य सुरक्षित और मजबूत हाथों में है।महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री शिवेंद्र सिंह अरुणाराजे अभयसिंहराजे भोसले, कैबिनेट मंत्री जयकुमार कमल भगवानराव गोरे, विधानसभा सदस्य मनोजदादा घोरपड़े, सातारा नगराध्यक्ष अमोल मोहिते, जिलाधिकारी संतोष पाटिल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी याशनी नागराजन, पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी, माय भारत राज्य निदेशक महाराष्ट्र कालिदास घटवाल, माय भारत सलाहकार प्रकाश वैद्य, उप-निदेशक अरुण कुमार तिवारी, नगर पालिका चीफ ऑफिसर अभिजीत बापट, जिला युवा अधिकारी माय भारत सातारा स्वप्निल देशमुख सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
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नई दिल्ली। अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को वर्ल्ड लीडर्स से कहा कि एआई वह तकनीक है जिसने उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरित किया और यह “हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म परिवर्तन” है। पिचाई ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, “कोई भी तकनीक मुझे एआई से ज्यादा बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित नहीं करती। यह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव है। हम तीव्र प्रगति और नई खोजों के कगार पर हैं जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को पारंपरिक कमियों को दूर करने में मदद कर सकती हैं।”
उन्होंने सरकारों और उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे सहयोगपूर्ण ढंग से साहसिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से कार्य करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस तकनीक से सभी को लाभ मिले। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई से सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित या स्वचालित नहीं हैं। गूगल के सीईओ ने अल्फाफोल्ड का उदाहरण देते हुए एआई द्वारा संचालित वैज्ञानिक प्रगति का ज्रिक किया। गूगल डीपमाइंड की प्रोटीन फोल्डिंग तकनीक ने अभूतपूर्व प्रगति की है, जिसका उपयोग 190 से अधिक देशों में तीन मिलियन से अधिक शोधकर्ताओं द्वारा मलेरिया के टीके विकसित करने के लिए किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि अल्फाफोल्ड ने दशकों के शोध को एक डेटाबेस में संकलित किया है जो अब दुनिया के लिए उपलब्ध है। उन्होंने आगे कहा कि गूगल डीएनए रोग मार्करों का सूचीकरण कर रहा है और ऐसे एआई एजेंट बना रहा है जो वैज्ञानिक पद्धति में सच्चे भागीदार के रूप में कार्य करते हैं। गूगल के सीईओ ने भारत में कंपनी के बढ़ते निवेशों का भी जिक्र किया, जिसमें विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक एआई हब शामिल है, जो 15 अरब डॉलर के अवसंरचना निवेश का हिस्सा होगा। इसके अलाव पिचाई ने कहा कि वह भारत में बदलाव की रफ्तार से प्रभावित हैं। साथ ही, कहा हमें एआई को लेकर रुख साहसिक रखना चाहिए, क्योंकि यह अरबों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है। कंपनी इंडिया-अमेरिका कनेक्ट पहल के तहत अमेरिका और भारत के बीच चार नई प्रणालियों सहित सब-सी फाइबर ऑप्टिक केबलों का एक विशाल नेटवर्क भी बना रही है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “भारत में, हम किसानों को उनकी आजीविका की रक्षा करने में मदद कर रहे हैं। पिछले साल भारतीय सरकार ने एआई-आधारित पूर्वानुमान लाखों किसानों को भेजे, जिससे उन्हें खराब मौसम के बारे में चेतावनी मिली।” -
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान नेताओं के प्लेनरी सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित यह समिट मानव-केंद्रित और संवेदनशील वैश्विक एआई इकोसिस्टम के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि मानवता ने हर बड़े बदलाव को अवसर में बदला है और अब एआई के रूप में दुनिया के सामने ऐसा ही एक अवसर मौजूद है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की धरती है और सही समझ से ही सही निर्णय संभव होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि एआई का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब सही समय पर सही नियत के साथ सही फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोविड वैश्विक महामारी के दौरान दुनिया ने देखा कि सहयोग से असंभव भी संभव हो सकता है। वैक्सीन विकास से लेकर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और डाटा साझाकरण तक, तकनीक ने मानवता की सेवा की। भारत के डिजिटल वैक्सीनेशन प्लेटफॉर्म और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने संकट के समय करोड़ों लोगों की मदद की और डिजिटल डिवाइड को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई तकनीक सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई गवर्नेंस के केंद्र में ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को स्थान दिया जाना आवश्यक है, ताकि तकनीकी प्रगति वैश्विक समानता को बढ़ावा दे।प्रधानमंत्री ने एआई के नैतिक उपयोग के लिए तीन प्रमुख सुझाव दिए। पहला, डाटा सोवरेनिटी का सम्मान करते हुए भरोसेमंद वैश्विक डाटा फ्रेमवर्क विकसित किया जाए। दूसरा, एआई प्लेटफॉर्म अपने सुरक्षा नियम पारदर्शी रखें और ‘ब्लैक बॉक्स’ की जगह ‘ग्लास बॉक्स’ दृष्टिकोण अपनाएं। तीसरा, एआई को स्पष्ट मानवीय मूल्यों और दिशा-निर्देशों से संचालित किया जाए, ताकि तकनीक मानव नियंत्रण में रहे।उन्होंने कहा कि भारत एआई की वैश्विक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत के एआई मिशन के तहत देश में 38,000 GPUs स्थापित किए जा चुके हैं और अगले छह महीनों में 24,000 और जोड़े जाएंगे। साथ ही स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग पावर उपलब्ध कराई जा रही है। राष्ट्रीय संसाधन के रूप में हजारों डाटा सेट्स और सैकड़ों एआई मॉडल भी साझा किए गए हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई मानवता की भलाई के लिए साझा संसाधन है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से ऐसा एआई भविष्य बनाने का आह्वान किया, जो नवाचार को बढ़ावा दे, समावेशन को मजबूत करे और मानव मूल्यों पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि जब तकनीक और मानव विश्वास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे, तब एआई का वास्तविक प्रभाव दुनिया के सामने आएगा। -
नई दिल्ली । होली के त्योहार पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारतीय रेल ने 30 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। इनमें 8 ट्रेनें लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सुल्तानपुर और वाराणसी के बीच चलाई जा रही हैं, जबकि 22 सेवाएं रक्सौल, सहरसा और धनबाद के लिए बढ़ाई गई हैं। यह व्यवस्था यात्रियों को बेहतर सुविधा देने और भीड़ कम करने के उद्देश्य से की गई है।
लोकमान्य तिलक टर्मिनस से सुल्तानपुर के बीच चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ट्रेन संख्या 04211 होली स्पेशल 27.02.2026 और 03.03.2026 को मुंबई से 14:35 बजे रवाना होकर अगले दिन 23:00 बजे सुल्तानपुर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04212 26.02.2026 और 02.03.2026 को सुल्तानपुर से 04:00 बजे रवाना होकर अगले दिन 12:20 बजे मुंबई पहुंचेगी।वाराणसी के लिए चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। ट्रेन संख्या 04225 26.02.2026 और 02.03.2026 को मुंबई से 14:35 बजे रवाना होकर तीसरे दिन 02:05 बजे वाराणसी पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04226 25.02.2026 और 01.03.2026 को वाराणसी से 01:35 बजे रवाना होकर अगले दिन 12:20 बजे मुंबई पहुंचेगी। इन ट्रेनों के ठहराव में ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, चालीसगांव, पचोरा, भुसावल, खंडवा, इटारसी जंक्शन, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, ओराई, कानपुर सेंट्रल और लखनऊ जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। वाराणसी सेवाओं में सुल्तानपुर और जौनपुर सिटी भी पड़ाव हैं। प्रत्येक ट्रेन में 16 एसी थ्री-टियर इकोनॉमी कोच और 2 जनरेटर वैन लगाए गए हैं।मुंबई–रक्सौल ट्रेन संख्या 05558 को 12.03.2026 से 02.04.2026 तक और वापसी ट्रेन 05557 को 10.03.2026 से 31.03.2026 तक बढ़ाया गया है। मुंबई–सहरसा ट्रेन संख्या 05586 को 08.03.2026 से 29.03.2026 तक तथा वापसी 05585 को 06.03.2026 से 27.03.2026 तक चलाया जाएगा। मुंबई–धनबाद ट्रेन संख्या 03380 को 12.03.2026 से 26.03.2026 तक और वापसी 03379 को 10.03.2026 से 24.03.2026 तक बढ़ाया गया है। रेलवे के अनुसार इन ट्रेनों के समय और ठहराव में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विस्तारित सेवाओं के लिए बुकिंग 20.02.2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि एसी स्पेशल ट्रेनों के लिए आरक्षण 22.02.2026 से खुलेगा। रेलवे ने यात्रियों से समय पर टिकट बुक करने और स्पेशल सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की है। -
नई दिल्ली। भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को बड़ी सफलता मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ड्रोग पैराशूट का सफल क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट पूरा किया है। यह परीक्षण टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज सुविधा में किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित ‘गगनयान’ भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है। इस मिशन के तहत तीन सदस्यीय भारतीय दल को 400 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा में तीन दिन के लिए भेजने और सुरक्षित वापस लाने की योजना है।
ड्रोग पैराशूट अंतरिक्ष कैप्सूल की सुरक्षित वापसी में अहम भूमिका निभाता है। यह पहले खुलकर कैप्सूल की गति कम करता है और उसे स्थिर करता है, ताकि मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके। इस बार परीक्षण में पैराशूट को वास्तविक उड़ान में आने वाले अधिकतम भार से भी अधिक दबाव में परखा गया, जिससे इसकी अतिरिक्त सुरक्षा क्षमता सिद्ध हुई। परीक्षण के दौरान पैराशूट को असली मिशन से अधिक दबाव वाली स्थिति में जांचा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि कठिन परिस्थितियों में भी यह प्रणाली सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम करेगी। इस सफलता से भारत ने उच्च क्षमता वाले पैराशूट के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में अपनी तकनीकी दक्षता प्रदर्शित की है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और संबंधित संस्थानों को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता पर टीमों को शुभकामनाएं दीं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परीक्षण में इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और टीबीआरएल की विशेषज्ञ टीमों ने भाग लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि गगनयान मिशन की तैयारियों को और मजबूत बनाती है तथा भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान योजना के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। -
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के लिए ‘मानव’ विजन प्रस्तुत करते हुए मानव-केंद्रित वैश्विक एआई ढांचे की वकालत की। उन्होंने कहा कि एआई के दौर में नवाचार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विदेश मंत्रालय भारत ने बताया कि भारत ने एआई के लिए एम.ए.एन.ए.वी. (MANAV) विजन प्रस्तुत किया है। इसके तहत एम– नैतिक मूल्य आधारित प्रणाली, ए– जवाबदेह शासन, एन– राष्ट्रीय संप्रभुता, ए– सुलभ और समावेशी ढांचा तथा वी– वैध और विश्वसनीय एआई व्यवस्था पर जोर दिया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित समिट में विश्व नेताओं ने जिम्मेदार, लोकतांत्रिक और समावेशी एआई की आवश्यकता पर सहमति जताई। भारत ने एआई को सभी की भलाई के लिए उपयोग करने की दिशा में वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है, जो सही दिशा में उपयोग होने पर समाधान बन सकती है, जबकि गलत दिशा में जाने पर गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने कहा कि आज असली प्रश्न यह नहीं है कि एआई भविष्य में क्या करेगा, बल्कि यह है कि मानवता आज एआई का उपयोग किस दिशा में करती है।नवाचार के साथ मानवीय मूल्यों पर जोर प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई को खुला अवसर मिलना चाहिए, लेकिन अंतिम नियंत्रण मानव के हाथ में रहना चाहिए। उन्होंने एआई को 21वीं सदी के लिए मानव-केंद्रित विकास का प्रमुख आधार बताते हुए भविष्य की पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाने की अपील की। -
नयी दिल्ली. राज्यसभा की 37 सीट पर 16 मार्च को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत रहने की संभावना है क्योंकि जिन 10 राज्यों में ये सीट रिक्त हो रही हैं, उनमें से छह में पार्टी की सरकार है या वह सत्तारूढ़ गठबंधन में साझेदार है। कुल 37 सीट दो और नौ अप्रैल को रिक्त होने वाली हैं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन राज्यों में ये सीट रिक्त हो रही हैं उनमें महाराष्ट्र (सात सीट), ओडिशा (चार), तेलंगाना (दो), तमिलनाडु (छह), छत्तीसगढ़ (दो), पश्चिम बंगाल (पांच), असम (तीन), हरियाणा (दो), हिमाचल प्रदेश (एक) और बिहार (पांच) शामिल हैं। चुनाव के लिए अधिसूचनाएं 26 फरवरी को जारी की जाएंगी।
स्थापित परंपरा के अनुसार, 16 मार्च को मतदान सुबह नौ बजे से शाम चार बजे के बीच होगा और उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना की जाएगी। महाराष्ट्र, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा और असम में भाजपा की सरकारें हैं या वह सत्तारूढ़ गठबंधन में साझेदार है। इससे पार्टी को उच्च सदन में बहुमत हासिल करने में मदद मिलेगी। वहीं, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में, विपक्षी पार्टियां सत्ता में हैं।
महाराष्ट्र में, यदि विपक्षी महाविकास आघाडी (एमवीए) एकजुट होकर चुनाव लड़ता है, तो वह राज्यसभा में एक सीट हासिल कर सकता है। राज्य में सात सीट रिक्त हो रही हैं। जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार), अभिषेक सिंघवी (कांग्रेस), साकेत गोखले (तृणमूल कांग्रेस), रामदास आठवले (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-आठवले), एम थंबीदुरई (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम) और तिरुची शिवा (द्रविड़ मुनेत्र कषगम) शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ अलग-अलग बैठकें कीं तथा कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते ने भारत-यूरोप संबंधों में एक ''स्वर्णिम युग की शुरुआत'' की है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति सांचेज के साथ उनकी एक सार्थक बैठक हुई और खासकर रक्षा, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत-स्पेन मित्रता को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दोनों देश (भारत और स्पेन) 2026 को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) वर्ष के रूप में मना रहे हैं। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। विश्वविद्यालयों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल को भारत आते देखकर खुशी हुई। इससे भी दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क स्थापित करने में काफी मदद मिलेगी।'' उन्होंने कहा, ''यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) स्पेन के साथ आर्थिक साझेदारी पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा और दोनों देशों के लोगों को नये अवसर प्रदान करेगा।'' भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
राष्ट्रपति सांचेज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उन्होंने स्पेन और भारत के बीच शानदार संबंधों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसे दोनों नेता और मजबूत करना जारी रखेंगे। सांचेज ने 'एक्स' पर स्पेनिश भाषा में एक पोस्ट में कहा, ''मैंने उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी। हम दोनों इस बात से सहमत हैं कि मानव-केंद्रित एआई की दिशा में कदम बढ़ाते रहना आवश्यक है।'' प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सांचेज ने द्विपक्षीय वार्ता की तथा भारत-स्पेन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की, जिनमें व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, जलवायु और नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, अंतरिक्ष, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान शामिल हैं। उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग में सकारात्मक गति का स्वागत किया और वडोदरा में सी-295 परिवहन विमान के निर्माण के लिए टाटा-एयरबस सहयोग में हुई प्रगति पर खुशी व्यक्त की, जिसका उद्घाटन दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में संयुक्त रूप से किया था। बयान के अनुसार, मोदी और सांचेज ने भारत-स्पेन की संस्कृति, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दोहरे वर्ष पर जोर दिया, जिसे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस वर्ष मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी, नवाचार, व्यापार और लोगों के बीच संबंधों को और बढ़ावा देने में सहायक होगा। दोनों नेताओं ने सह-विकास और सह-उत्पादन पर आधारित रक्षा औद्योगिक सहयोग के महत्व पर जोर दिया। स्पेन के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मोदी के न्योते पर 18 से 19 फरवरी तक आधिकारिक दौरे पर यहां हैं।
सांचेज ने एआई समिट के महत्व को रेखांकित किया और भरोसा जताया कि इसके परिणाम वैश्विक एआई शासन को आकार देने में सार्थक योगदान देंगे। बयान के अनुसार, मोदी और सांचेज ने एआई को एक परिवर्तनकारी शक्ति बताया तथा समावेशी विकास और सामाजिक लाभ के लिए इसकी क्षमता का लाभ उठाने के वास्ते भारत-स्पेन के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। बयान में कहा गया है कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की, विशेष रूप से भारत की नयी शिक्षा नीति के आलोक में। इस संदर्भ में, उन्होंने 19 और 20 फरवरी को नयी दिल्ली में आयोजित होने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और स्पेनिश विश्वविद्यालयों के अधिशिक्षक (रेक्टर) के सम्मेलन का स्वागत किया। बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नयी शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए स्पेन के प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों, विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और गणित (स्टेम) क्षेत्रों में, को आमंत्रित किया है। मोदी और सांचेज ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें स्पेन का 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' में शामिल होने का निर्णय भी शामिल है। बयान के अनुसार, उन्होंने सभी तरह के आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंकवाद से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। अक्टूबर 2024 की यात्रा के बाद, सांचेज की भारत की यह दूसरी आधिकारिक यात्रा है। उनके साथ डिजिटल परिवर्तन और सिविल सेवा मंत्री ऑस्कर लोपेज़ अगुएदा और कृषि, मत्स्य पालन और खाद्य मंत्री लुइस प्लानास पुचाडेस भी आए हैं। फिनलैंड के प्रधानमंत्री ओर्पो के साथ अपनी ''विस्तृत चर्चा'' के दौरान, मोदी ने भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए उनके व्यक्तिगत समर्थन को लेकर उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह (एफटीए) भारत-यूरोप संबंधों में एक ''स्वर्णिम युग की शुरुआत'' करता है। मोदी ने 'एक्स' पर एक अन्य पोस्ट में कहा, ''भारत और फिनलैंड का लक्ष्य व्यापार को दोगुना करना है, जिससे आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी। हमने 6जी, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, जैव ईंधन, वस्तुओं के पुन:उपयोग वाली अर्थव्यवस्था और अन्य भविष्यवादी प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।'' पीएमओ द्वारा जारी एक अन्य बयान के अनुसार, मोदी और ओर्पो ने 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान संपन्न हुए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत किया। उन्होंने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की भावना से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। सांचेज और ओर्पो यहां 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' में भाग लेने आए हैं, जो वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों, केंद्र और राज्य सरकारों तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक मंच पर लाता है। प्रधानमंत्री यहां 'भारत मंडपम' में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026' का बृहस्पतिवार को उद्घाटन करेंगे। -
लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिमी देशों पर ''जड़वाद'' फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि इन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और जो भी बाधक बने उसे मिटा दो, और आज यही काम अमेरिका और चीन कर रहे हैं। भागवत ने यह भी कहा कि भारत को अगर 'विश्व गुरु' बनना है तो उसे सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान में वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है। उन्होंने कहा, ''पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया। उन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने उन्हें मिटा दो। यही काम आज अमेरिका और चीन कर रहे हैं।'' भागवत ने कहा कि आज दुनिया भर की समस्याओं का जवाब भारत के पास है, मगर यदि उसे विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा, क्योंकि दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो। संघ प्रमुख ने शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं है और यह व्यवसाय नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए। भागवत ने अंग्रेजों पर भारत की शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम के लोगों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी व्यवस्था थोपी, जिससे उन्हें काम करने के लिए ''काले अंग्रेज'' मिल जाएं। उन्होंने कहा, ''अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा।''
आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है और संघ को समझना है तो संघ के अंदर आकर कर देखें, क्योंकि संघ को पढ़ कर नहीं समझा जा सकता।'' उन्होंने कहा, ''संघ को सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाला एक ही काम करना है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए।'' भागवत ने शोध की भूमिका के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। उन्होने शोधार्थियों से कहा कि जो भी शोध करें उसे उत्कृष्ट रूप से, प्रामाणिकता पूर्वक और निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें। संघ प्रमुख ने कहा कि संघ को लेकर बहुत ''दुष्प्रचार'' होता है, और शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए। उन्होंने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ''सृष्टि जिन नियमों से चलती है वह धर्म है। धर्म सबको सुख पहुंचाता है। हमारी सभी बातों में धर्म लागू है।'' विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) संबंधी नये नियमों को लेकर जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं से मुलाकात की। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के सदस्यों ने भागवत के विश्वविद्यालय के दौरे के खिलाफ प्रदर्शन किया। एनएसयूआई की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष अहमद रजा खान ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि संगठन का यह प्रदर्शन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय आगमन के विरोध में था। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ ने समाज के ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया है, ऐसे में संघ प्रमुख का एक ऐसे विश्वविद्यालय में जाना सही नहीं है जो धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। प्रदर्शन में शामिल रहे खान ने कहा कि उनके साथ शामिल हुए पांच और लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। एक पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों को स्थानीय हसनगंज थाने ले जाया गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में रखा गया। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत-भूटान की "स्थायी" मित्रता आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित है तथा यह दोनों देशों के बीच साझेदारी को नए व परिवर्तनकारी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन करती रही है। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के साथ बैठक के बाद, मोदी ने चर्चा को "उत्कृष्ट" बताया।
मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के साथ बैठक शानदार रही। हमने इस बात पर चर्चा की कि हम वैश्विक भलाई के लिए और स्थिरता के सिद्धांतों के अनुरूप एआई की शक्ति का उपयोग कैसे कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "आपसी विश्वास, सद्भावना और दोनों देशों के लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों पर आधारित हमारी अटूट भारत-भूटान मित्रता, हमारी साझेदारी को नए और परिवर्तनकारी क्षेत्रों की ओर आगे बढ़ाती रही है।" भूटान के प्रधानमंत्री ने मोदी को अपना "बड़ा भाई" बताते हुए भारत में "ग्लोबल साउथ का पहला एआई शिखर सम्मेलन" आयोजित करने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने भूटान के नरेश, सरकार और भूटान की जनता की ओर से बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। तोबगे यहां चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने आए हैं।
इस शिखर सम्मेलन में 500 से अधिक वैश्विक एआई नेता भाग ले रहे हैं, जिनमें सीईओ/सीएक्सओ, 150 शिक्षाविद और शोधकर्ता, और 400 मुख्य तकनीकी अधिकारी और उपाध्यक्ष आदि शामिल हैं। इसमें 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख तथा लगभग 60 मंत्री और उप मंत्री शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अधिकारियों को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत छह करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "जोर शोर" से काम करने का निर्देश दिया। चौहान ने उन्हें 10 करोड़ महिलाओं को वित्तीय समावेशन पहल से जोड़ने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए चौहान ने मिशन की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन विस्तारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक केंद्रित रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए महिलाओं के बीच बैंक संपर्क, ऋण तक पहुंच, बीमा कवरेज और वित्तीय साक्षरता का विस्तार करना आवश्यक होगा। उन्होंने जोर दिया कि स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों की आजीविका को मजबूत करने और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय समावेशन महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा, ''छह करोड़ लखपति दीदी बनाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की विभिन्न वित्तीय समावेशन पहल से कम से कम 10 करोड़ महिलाओं को जोड़ना होगा।" उन्होंने अधिकारियों को इन लक्ष्यों की कामयाबी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ करीबी समन्वय में काम करने का निर्देश दिया। चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोष का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में प्रदर्शन या व्यय अपेक्षा से कम है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, सहायता और प्रोत्साहन प्रदान किया जाना चाहिए। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस मिशन के तहत अब तक लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की बैंक-संबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, करीब पांच करोड़ लोगों को वित्तीय साक्षरता पहल से जोड़ा गया है और लगभग सात करोड़ लाभार्थियों को बीमा कवरेज प्रदान किया गया है।





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