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नयी दिल्ली. असम का होलोंगापार अभयारण्य राज्य में तितलियों के सबसे समृद्ध बसेरों में भी शामिल है, जहां कई दुर्लभ तितलियां पाई जाती हैं। यह जानकारी एक नयी किताब में दी गई है। प्रकृतिविद और वन्यजीव फोटोग्राफर सारंगापाणि नियोग ने अपनी किताब "बटरफ्लाइज ऑफ गिब्बन वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी" में असम के जोरहाट जिले में स्थित इस अभयारण्य में देखी गईं तितलियों की 281 प्रजातियों का दस्तावेज तैयार किया है। इनमें से कई तितलियां बहुत दुर्लभ हैं और आसानी से दिखाई नहीं देतीं। इसलिए तितलियों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ इन्हें 'ड्रीम बटरफ्लाई' मानते हैं। नियोग के अनुसार, असम फॉरेस्ट बॉब (स्कोबुरा पैरावूलेटी), रेड-वेन्ड लांसर (पाइरोन्यूरा निआसाना) और येलो-वेन्ड लांसर (पाइरोन्यूरा लैटोइया) जैसी दुर्लभ प्रजातियां होलोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य में पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस अभयारण्य में कई दूसरी दुर्लभ तितलियां भी रहती हैं, जो जंगलों पर निर्भर होती हैं। नियोग के अनुसार, यहां का प्राकृतिक वातावरण तितलियों के रहने के लिए बहुत अनुकूल है।
उन्होंने कहा, "यहां विकसित वन क्षेत्र है। ऊपरी हिस्से में ऊंचे होलोंग के पेड़ हैं, जबकि नीचे घनी झाड़ियां और जड़ी-बूटियां हैं। इस तरह की वनस्पति तितलियों की अलग-अलग प्रजातियों के लिए उपयुक्त छोटे-छोटे ठिकाने तैयार करती है।" उन्होंने कहा, 'यहां पेड़, झाड़ियां, बेलें, घास और कई तरह के पौधे पाए जाते हैं। ये पौधे तितलियों की इल्ली के लिए भोजन और बड़ी तितलियों के लिए फूलों का रस उपलब्ध कराते हैं। जंगल की छायादार पगडंडियां, धूपदार स्थान, छोटी जलधाराएं और गीली मिट्टी वाली जगहें कई तरह की तितलियों को आकर्षित करती हैं। इसी कारण यह अभयारण्य तितलियां देखने के लिए बहुत अच्छी जगह है।'" उन्होंने बताया कि हालांकि यह अभयारण्य केवल 20.98 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, लेकिन यहां वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन समेत स्तनधारियों की सात प्रजातियां, एशियाई हाथी, तेंदुआ, लेपर्ड कैट, फिशिंग कैट, सिवेट, जंगली सूअर, बार्किंग डियर, पैंगोलिन, कई प्रकार के सरीसृप, पक्षी, गिलहरियां और असंख्य बिना रीढ़ वाले जीव पाए जाते हैं। नियोग ने कहा कि तितलियां देखने के लिए बहुत आसानी से इस अभ्यारण्य पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने कहा, "पर्यटक, शोधकर्ता, फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी तितलियों को उनके प्राकृतिक स्थान पर आसानी से देख सकते हैं और उनकी तस्वीरें ले सकते हैं, बिना उन्हें ज्यादा परेशान किए।" नियोग की 321 पृष्ठवासी यह पुस्तक फोटो म्यूजिंग्स कलर लैब द्वारा प्रकाशित की गई है। -
नयी दिल्ली. संगीतकार ए.आर. रहमान ने अपने भांजे जी.वी. प्रकाश कुमार को फिल्म 'अमरन' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर बधाई दी और इसे ''गर्व का क्षण'' बताया। शनिवार को घोषित 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (बैकग्राउंड स्कोर) के पुरस्कार के लिए कुमार को चुना गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा इन पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिसमें भारतीय सिनेमा की 2024 की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। रहमान ने रविवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा कर कुमार को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "जी. वी. प्रकाश, आपको तीसरे राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बधाई। रहमान ने कहा, "हमारे परिवार के लिए गर्व का क्षण। हमारे परिवार को मिलने वाला यह 10वां राष्ट्रीय पुरस्कार है। संगीत के प्रति आपका जुनून, ईमानदारी और समर्पण लगातार प्रेरित करता है। आपको आगे भी ऐसी कई और उपलब्धियां हासिल हों, यही शुभकामनाएं हैं।'' कुमार इससे पहले वर्ष 2022 में फिल्म 'सूररई पोटरु' के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (बैकग्राउंड स्कोर) का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। इसके अलावा उन्हें वर्ष 2025 में फिल्म 'वाथी' के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (गीत) का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।
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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस महीने 22 जुलाई को एक बैठक करेगा। इस महीने ट्रस्ट की यह दूसरी बैठक होगी। ट्रस्ट के महासचिव कृष्ण मोहन के अनुसार, राम मंदिर परिसर में अपराह्न तीन बजे एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद अपराह्न चार बजे ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास मणिराम छावनी में नियमित बैठक होगी। इसके पहले छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक हुई थी। कृष्ण मोहन ने सात जुलाई को ट्रस्टियों को भेजे गए पत्र में बैठक का एजेंडा साझा किया था। इसके अनुसार, 22 जुलाई की बैठक में छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक और उसी दिन अपराह्न तीन बजे आयोजित विशेष बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की जाएगी। बैठक में ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप विभिन्न समितियों के पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, यदि तब तक उपलब्ध हो जाती है तो चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। छह जुलाई को हुई बैठक चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की पहली बैठक थी। उस बैठक में ट्रस्ट ने ट्रस्ट डीड में संशोधन की सिफारिश करने के लिए एक विशेष समिति गठित की थी। साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली भेंट के रखरखाव, मूल्यांकन और निस्तारण के संबंध में दिशा-निर्देश भी तय किए गए थे। यह बैठक पहले मणिराम छावनी में आयोजित होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे राम मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर प्रस्तावित चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार ने मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के आदेश दिए हैं। इस विवाद के बाद प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है और जांच की प्रगति ट्रस्ट की बैठक का प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है।
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श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) . भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले कक्षीय रॉकेट 'विक्रम-1' ने शनिवार को कई तकनीकी पेलोड और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पोस्टकार्ड सहित विभिन्न पोस्टकार्ड को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचा दिया। प्रधानमंत्री ने इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष यात्रा का ''एक निर्णायक क्षण'' बताया। 'मिशन आगमन' नाम से संचालित इस मिशन के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने पहली बार उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने वाले वैश्विक बाजार में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया। इस मिशन का संचालन हैदराबाद आधारित निजी कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने किया। कंपनी ने इस मिशन को ''बड़ी सफलता'' करार दिया।
अपने पहले अभियान में चार चरणों वाला और सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा 'विक्रम-1' रॉकेट शनिवार को बादलों से घिरे मौसम के बीच दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले प्रक्षेपण परिसर से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। प्रक्षेपण के दौरान रॉकेट से नारंगी रंग का धुआं निकला और इस अंतरिक्ष केंद्र से एक नए युग की शुरुआत हुई। इससे पहले दिशा-निर्देशन प्रणाली से जुड़ी संभावित समस्या के कारण प्रक्षेपण को ''अस्थायी रूप से रोक'' दिया गया था, जिसके कारण प्रक्षेपण निर्धारित समय पूर्वाह्न 11:30 बजे के बजाय 12 बजकर पांच मिनट पर किया गया। उड़ान भरने के बाद ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के 'स्कोप' के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों को क्रमवार 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया गया। रॉकेट ने एक सूक्ष्म कलाकृति, 18 कैरेट सोने से बना एक सूक्ष्म रॉकेट, तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथों से लिखा ''वंदे मातरम्'' संदेश वाला पोस्टकार्ड भी सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया। इसके साथ ही इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के पोस्टकार्ड भी भेजे गए। कंपनी ने बताया कि इस सूक्ष्म कलाकृति पेलोड में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई, वैज्ञानिक सर सी. वी. रमन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं शामिल हैं। इन्हें ''भारत की वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्रा को दिशा देने वाली तीन दूरदर्शी हस्तियों के प्रति सम्मान'' के रूप में तैयार किया गया। कंपनी ने कहा, ''स्काईरूट ने गर्व के साथ अपने रॉकेटों और इंजनों का नाम इन्हीं महान विभूतियों के नाम पर रखा है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश के आत्मनिर्भरता अभियान को नयी मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री ने शनिवार को इस उपलब्धि के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं संस्थापक पवन कुमार चांदना तथा सह-संस्थापक नागा भरत डाका से टेलीफोन पर बात कर उन्हें और उनकी कंपनी को बधाई दी। प्रक्षेपण के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें ''हार्दिक शुभकामनाएं'' देते हुए कहा कि उनका आज का 'मिशन आगमन' इसी तरह आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि यह मिशन साबित करता है कि ''हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं।'' इस पर चांदना ने प्रधानमंत्री को बताया कि रॉकेट का पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और निर्माण किया गया है। चांदना ने प्रधानमंत्री के उस पोस्टकार्ड का उल्लेख किया, जिस पर 'वंदे मातरम्' लिखा था और जिसे प्रक्षेपण यान 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली पृथ्वी की निचली कक्षा तक लेकर गया। उन्होंने कहा, ''आपका पोस्टकार्ड सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंच गया है। 'वंदे मातरम्' अब अंतरिक्ष की कक्षा में है।'' इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश इस समय 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्र गीत ने अनगिनत लोगों को देश के लिए जीने और बलिदान देने की प्रेरणा दी है। बाद में, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक निर्णायक क्षण है।'' उन्होंने कहा, ''निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी नयी संभावनाओं के द्वार खोल रही है और नवाचार को गति दे रही है। यह उपलब्धि अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने और निर्भीक होकर नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी।'' चांदना ने कहा, ''हमें इस बात पर बेहद गर्व है कि सरकार ने हमें सक्षम बनाया और इस क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला। आज हम भारत की पहली निजी कंपनी हैं जिसने रॉकेट को कक्षा में पहुंचाया है और वैश्विक स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पूरी तरह भारत में, पूरी तरह भारतीय टीम द्वारा और शत-प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है।'' डाका ने कहा कि निजी क्षेत्र की प्रक्षेपण क्षमता के मामले में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरा देश बन गया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को दिया। उन्होंने कहा, ''2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की गई थी। आज, मात्र छह वर्षों के भीतर एक स्टार्टअप कंपनी ने अपने पहले ही प्रयास में उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया। यह वास्तव में अत्यंत गर्व और संतोष का क्षण है।'' नारायणन ने स्काईरूट एयरोस्पेस की युवा टीम की सराहना की। उन्होंने कहा, ''जब प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की थी, तब हमारे पास केवल एक स्टार्टअप कंपनी थी। आज 400 से अधिक स्टार्टअप विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। हालांकि, प्रक्षेपण यान का विकास अत्यंत जटिल कार्य है और मुझे बेहद खुशी है कि हम पहले ही प्रयास में सफल हुए हैं।'' स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के दौरान प्राप्त इंजीनियरिंग आंकड़ों का विश्लेषण कर रॉकेट की दिशा-निर्देशन प्रणालियों की कार्यक्षमता का सत्यापन किया जाएगा। इसने कहा कि साथ ही इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इस मिशन के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस ने 'विक्रम-1' प्रक्षेपण यान की पहली उड़ान के जरिए अपनी कक्षीय प्रक्षेपण क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। इसके साथ ही कंपनी ने वर्ष 2022 में 'विक्रम-एस' मिशन के तहत हासिल की गई उप-कक्षीय उड़ान की उपलब्धि से आगे बढ़ते हुए एक नया मुकाम हासिल किया। इस सफल उड़ान ने वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में रॉकेट की पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना और थ्री-डी प्रिंटेड इंजनों के प्रदर्शन को प्रमाणित किया। कंपनी का दावा है कि ये दोनों तकनीक अपने प्रकार की ''पहली'' प्रौद्योगिकी हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों संस्थापक चांदना और डाका इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं। प्रक्षेपण के दौरान दोनों इसरो प्रमुख वी. नारायणन के साथ इसरो के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। इसरो के पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला तथा आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी एमसीसी से इस प्रक्षेपण को देखा। यह ऐतिहासिक उपलब्धि तेजी से बढ़ रहे वैश्विक लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने तथा इसरो के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उपस्थिति का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 'विक्रम-1' के साथ भेजे गए पेलोड में कॉसमोसर्व स्पेस का 'एम्ब्रेस' मिशन शामिल है। यह कक्षा में रोबोटिक भुजाओं (यांत्रिक हाथों) के प्रदर्शन से जुड़ा मिशन है, जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने की क्षमता का परीक्षण करना है। इसके अलावा ग्राहा स्पेस का 'सोलारस' भी भेजा गया। यह एक कॉम्पैक्ट उपग्रह मिशन है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा में नई तकनीकी क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार, स्काईरूट एयरोस्पेस का 'स्कोप' उपग्रह एक आंतरिक प्रायोगिक पेलोड है, जिसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए विकसित किया गया है। इसके अलावा कॉस्मोस डायमंड्स द्वारा तैयार 'कॉस्मिक ब्लूम', जो प्रयोगशाला में तैयार हीरे पर आधारित एक कलात्मक कृति है, तथा जर्मनी की कंपनी डीक्यूब्ड के परीक्षण पेलोड 'यूडी3पीपी' और 'एमडी3आरएन' भी शनिवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंच गए। -
नई दिल्ली। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने बताया कि आधार ऐप ने 4 करोड़ डाउनलोड का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। यह सुविधाजनक और डिजिटल आधारित पहचान सेवाओं में निवासियों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है।आधार ऐप के लॉन्च होने के बाद से, इसने 11.65 लाख पते अपडेट करने की सुविधा प्रदान की है, जिससे निवासियों को आधार केंद्र जाए बिना ही अपने आधार विवरण को अपडेट रखने में आसानी होती है। इस ऐप की मदद से लगभग 49 लाख मोबाइल नंबर अपडेट किए जा सके हैं, जिससे निवासियों को अपने आधार से जुड़ी सटीक संपर्क जानकारी बनाए रखने में मदद मिली है।
दरअसल, आधार ऐप का बढ़ता उपयोग इस बात को दर्शाता है कि यह घर बैठे ही पते को अपडेट करने, मोबाइल नंबर अपडेट करने, ईमेल अपडेट करने, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक करने और ई-आधार डाउनलोड करने सहित आधार से संबंधित सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंचने के लिए एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है।वहीं, 1 जुलाई को ईमेल अपडेट सुविधा शुरू होने के बाद से, आधार ऐप के माध्यम से लगभग 12.5 लाख ईमेल पते जोड़े या अपडेट किए गए हैं, जिससे निवासियों और यूआईडीएआई के बीच संचार और मजबूत हुआ है, जहां भी यह लागू होता है। यह सुविधा, जिसकी कीमत पहले 75 रुपये थी, आधार ऐप पर 31 दिसंबर 2026 तक निःशुल्क कर दी गई है।इस ऐप की गोपनीयता और सुरक्षा सुविधाओं को भी व्यापक रूप से अपनाया गया है। निवासियों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक सुविधा का उपयोग 19.1 मिलियन (1.91 करोड़) से अधिक बार किया है। यह सुविधा आधार नंबर धारकों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अपने बायोमेट्रिक्स को लॉक या अनलॉक कर सकते हैं, और कुछ ही टैप के माध्यम से सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ सकते हैं। आधार ऐप को आधार नंबर धारकों को अपनी पहचान दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने का एक सुविधाजनक और गोपनीयता को प्राथमिकता देने वाला तरीका प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह विकसित भारत के लिए डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप जीवन की सुगमता को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लिखित एक लेख साझा किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे पारंपरिक भारतीय शिल्प कौशल नवाचार और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है।पीएम मोदी ने कहा कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल स्थानीय शिल्पों को बाजार तक पहुंच हासिल करने, स्थायी आजीविका सृजित करने, विरासत को संरक्षित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद कर रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ एक्स पर पोस्ट किया, “केंद्रीय मंत्री श्रीमती @nsitharaman ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पारंपरिक भारतीय शिल्प कौशल नवाचार और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल स्थानीय शिल्पों को बाजार तक पहुंच हासिल करने, स्थायी आजीविका सृजित करने, विरासत को संरक्षित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद कर रही है।”वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ इस बात का उदाहरण है कि फ्रांस जैसे देशों के साथ सहयोग भारतीय कारीगरों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में कैसे मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भारत में फ्रांस के राजदूत ने ‘वस्त्रकला’ का जिक्र किया था। यह भारत-फ्रांस की साझेदारी का एक अनूठा उदाहरण है, जिसने फ्रांस की हाउट कूचर यानी उच्चस्तरीय फैशन कला को भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई परंपरा के साथ जोड़ा है।भारत लौटने के बाद वित्त मंत्री चेन्नई के निकट तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला गई थीं।वित्त मंत्री ने कहा कि कारीगरों की टीम के साथ दोपहर का भोजन करते समय उन्हें पता चला कि वस्त्रकला ने जानबूझकर अपनी पहली चेन्नई स्थित कार्यशाला को गुडापक्कम स्थानांतरित किया, ताकि पीढ़ियों से इन पारंपरिक कौशलों को संजोए हुए गांवों के लोगों तक उच्च मूल्य वाले रोजगार पहुंचाए जा सकें। यह मानो समय का पहिया उल्टा घूम गया हो। आमतौर पर युवा रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन यहां एक कंपनी ने शहर छोड़कर गांव में बसने का फैसला किया। सीतारमण ने बताया कि वस्त्रकला कांचीपुरम-श्रीपेरंबुदूर-तिरुवल्लूर के सूखा-प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने कहा, “पुराने समय में जब बारिश नहीं होती थी, तो खेती का काम रुक जाता था। जब हल चलना बंद हो जाता था, तब किसान सुई-धागा उठाकर सूती और रेशमी कपड़ों पर सुंदर कढ़ाई किया करते थे। अपनी रचनात्मकता के बल पर ग्रामीण सूखे की कठिनाइयों का सामना कर लेते थे। यह कला असाधारण धैर्य, बारीकी और अनुशासन की मांग करती है, और ये गुण शुष्क क्षेत्रों के किसानों में भरपूर होते हैं।” -
नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (आरएएएफ) बेस डार्विन में एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026 शुरू कर रही है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 20 जुलाई 2026 से 7 अगस्त 2026 तक चलने वाला यह अभ्यास पिच ब्लैक, आरएएएफ का प्रमुख द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है।इस अभ्यास का नाम ‘पिच ब्लैक’ उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल निर्जन क्षेत्रों में रात्रि उड़ान विशेष अभियान के कारण रखा गया है।अभ्यास के 45 वर्षों के लंबे इतिहास में, इस संस्करण में बड़ी संख्या में प्रतिभागी बल शामिल हैं, जो जटिल बड़े बल प्रयोग और बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभियानों के लिए सैन्य कर्मियों को एक साथ ला रहे हैं।
भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, नियंत्रक और अन्य विशेषज्ञ सहित उच्च कुशल वायु योद्धा शामिल हैं। यह टुकड़ी राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमान का संचालन करेगी, जिसे सी-17 ग्लोबमास्टर-III और आईएल-78 वायु-से-वायु ईंधन भरने वाले विमानों का समर्थन प्राप्त होगा। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को अंतरसंचालनीयता बढ़ाने, बल एकीकरण को मजबूत करने और वैश्विक परिदृश्यों में सहयोगात्मक संचालन की दिशा में परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा।गौरतलब हो, अभ्यास पिच ब्लैक 26 लंबी दूरी पर अभियान संबंधी हवाई अभियानों को परखने, बहुराष्ट्रीय अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेशेवर साझेदारियों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बहुराष्ट्रीय वातावरण में संचालन करने में सक्षम बनाएगा, जिससे परिचालन समन्वय और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय वायु सेना ने इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में इस अभ्यास में भाग लिया है, जो रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समेत कई प्रमुख नेताओं ने महान क्रांतिकारी मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें नमन किया है। पीएम मोदी ने कहा कि मंगल पांडे का साहसिक जीवन आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देता है।प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महान क्रांतिकारी मंगल पांडे को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। मातृभूमि के स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका साहसिक जीवन आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देता है। राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत उनकी शौर्यगाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।”
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी, अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक वीर मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।”उन्होंने लिखा, “29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में उनका साहस और देशप्रेम भारतीय इतिहास का वह निर्णायक क्षण बना, जिसने विदेशी शासन की नींव को चुनौती दी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उनका बलिदान आने वाले दशकों तक अनगिनत क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहा। वीर मंगल पांडे जी का जीवन आज भी करोड़ों भारतवासियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता है।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “1857 के स्वाधीनता संग्राम के नायक व अद्वितीय साहस और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और कोटि-कोटि नमन।”उन्होंने पोस्ट किया, “मंगल पांडे ने विदेशी शासन के विरुद्ध जिस निर्भीकता से क्रांति का शंखनाद किया, उसने पूरे भारत में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया और असंख्य देशवासियों को मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण सदैव हमें राष्ट्रसेवा और राष्ट्रनिर्माण के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।”केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पोस्ट किया, “क्रांतिवीर मंगल पांडे ने 1857 की क्रांति का बिगुल फूंककर स्वसंस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष की जनचेतना जागृत की। अंग्रेजी दमन और अन्याय से मां भारती को मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपने प्राणों तक की आहुति दे दी। उनके बलिदान से प्रज्वलित हुई क्रांति की चिंगारी आगे चलकर स्वतंत्रता की महाज्वाला में परिवर्तित हुई। ऐसे अद्वितीय बलिदानी और अमर क्रांतिवीर मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।” वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा, “ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 1857 में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले महान स्वाधीनता सेनानी मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन करता हूं। मां भारती के महान सपूत मंगल पांडे जी के अदम्य साहस और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी तथा पूरे देश में स्वाधीनता की लौ प्रज्वलित की। उनका अदम्य साहस और मातृभूमि के लिए दिया गया बलिदान सदैव हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।” - भोपाल। मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले में शनिवार को मोटरसाइकिल सवार 30 वर्षीय एक व्यक्ति पैंट की जेब में रखा मोबाइल फोन फटने से झुलस गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद्र परिहार ने बताया कि यह घटना शनिवार पूर्वाह्न करीब साढ़े 10 बजे पांढुर्णा-परसोडी मार्ग पर हुई। उन्होंने बताया कि एक निजी कंपनी में कार्यरत संदीप परतेती मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे कि इसी दौरान उनकी पैंट की जेब में रखा मोबाइल फोन फट गया, जिससे उनकी पैंट में आग लग गई। अधिकारी ने बताया कि विस्फोट के कारण मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर फिसल गई और परतेती करीब 12 फुट तक सड़क पर घिसटते चले गए। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. निलेश धाडसे ने बताया कि परतेती की जांघ और कमर के ऊपरी हिस्सा झुलस गया, इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय जांच में उनके एक पैर की हड्डी के टूटने की पुष्टि हुई है। धाडसे ने बताया कि जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद परतेती को नागपुर के एक अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया और उनके पैर का ऑपरेशन रविवार को किया जाएगा। परतेती के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे उनके सहकर्मी विजय ने बताया कि उन्होंने तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन तब तक परतेती की जांघ बुरी तरह झुलस चुकी थी। उन्होंने बताया कि परतेती ने संबंधित मोबाइल फोन करीब दो वर्ष पहले नागपुर से खरीदा था। पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन में विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
- नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि देश में ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आए जबरदस्त उछाल के दम पर, भारत तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक सुरक्षा साझेदार के तौर पर उभर रहा है और हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सिंह ने कहा कि नयी दिल्ली ने आतंकवाद पर अपना नजरिया पूरी दुनिया के सामने साफ तौर पर रखा है और साथ ही कहा कि ''आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने का नजरिया हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई की एक नीति है।'' उन्होंने कहा, ''हम आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ उसकी दहलीज पर ही नहीं, बल्कि उसके घर में घुसकर भी कार्रवाई करेंगे। पूरी दुनिया ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान यह देखा था।'' रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की सफलता का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि भारत में बने रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 100 देशों को किया जा रहा है और देश के रक्षा उत्पादन का कुल मूल्य सालाना लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, ''आज भारत न केवल अपने लिए रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार भी बन रहा है। हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक, भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि देश 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, ''अगर कोई देश हथियारों, गोला-बारूद, नौवहन प्रणाली, मिसाइलों, रडार और ड्रोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी सीमित हो जाती है। हम इसे पूरी तरह से बदलने के पक्के इरादे के साथ काम कर रहे हैं।'' सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता भारत के उद्योगों में भरोसे का सबूत है।रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार ने जो ''सबसे बड़ा कदम'' उठाया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ''रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने का हमारा नजरिया भारत की क्षमताओं पर भरोसा करने वाला है। लेकिन पिछली सरकारों का नजरिया भारत की क्षमता और काबिलियत को लेकर कुछ हद तक शक वाला था। शायद उन्हें भारत की क्षमताओं पर उतना भरोसा नहीं था, जितना हमारी सरकार को है।'' सिंह ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में तकनीकी युद्ध का एक शानदार उदाहरण था। इस ऑपरेशन में आकाशतीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणाली के साथ-साथ कई अत्याधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया।" सिंह ने कहा कि इससे साबित होता है कि भारत की सेनाएं न सिर्फ बदलाव को समझती हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ उसे अपना भी रही हैं। उन्होंने कहा, "यह सब इसलिए मुमकिन हो पा रहा है, क्योंकि पिछले 12 वर्षों में एक नयी नींव रखी गई है।" उन्होंने कहा कि साल 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, लेकिन 2025-26 में यह 38,000 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर को पार कर गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की लगातार कोशिशों से मिले "सकारात्मक नतीजों" का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि सालाना रक्षा उत्पादन 2014 के आस-पास के 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, "हमारा रक्षा उत्पादन लक्ष्य इस साल 2 लाख करोड़ रुपये और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करना है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 2029 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाए। प्रगति की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, मुझे भरोसा है कि हम इन लक्ष्यों को हासिल करने में सफल होंगे।"
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नयी दिल्ली । चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए पैर में होने वाले छोटे-से छाले, घाव या पैर की उंगली की मामूली चोट को भी नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम ला सकता है। यदि इन मामूली घावों का समय पर उपचार नहीं किया जाए, तो वे गंभीर संक्रमण का रूप ले सकते हैं तथा अंततः पैर या उसका कोई हिस्सा काटने तक की नौबत आ सकती है। गुरुग्राम के मारेन्गो एशिया हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने बताया कि 'डायबिटिक फुट सिंड्रोम' की बढ़ती समस्या चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यह मधुमेह की सबसे अधिक नजरअंदाज की जाने वाली जटिलताओं में से एक है, जबकि शुरुआती जांच और समय पर उपचार के जरिए इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। अस्पताल ने 15 जुलाई को विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस के अवसर पर एक विशेष प्रयोगशाला शुरू की, जिसका उद्देश्य पैरों में छाले बनने से पहले ही उनसे जुड़ी समस्याओं का पता लगाना है। 'इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन' (आईडीएफ) के डायबिटीज एटलस 2025 के अनुसार, भारत में 8.9 करोड़ से अधिक वयस्क मधुमेह से पीड़ित हैं। इस कारण भारत दुनिया में मधुमेह रोगियों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है।
अध्ययनों के अनुसार, मधुमेह से पीड़ित 15 से 25 प्रतिशत लोगों को जीवनकाल में कभी न कभी पैरों में छाले हो जाते हैं। वहीं, मधुमेह के कारण होने वाली दिक्कतों के बाद पैर का निचला हिस्सा सर्जरी कर अलग किए जाने से संबंधित लगभग 85 प्रतिशत मामलों में परेशानी की शुरुआत पैरों में छाले से होती है, जिसे अधिकतर मामलों में समय रहते पहचान और उपचार के जरिए रोका जा सकता है। 'डायबिटिक फुट अल्सर' पैर के तलवे पर होने वाला एक खुला घाव है, जो नसों की खराबी और रक्त प्रवाह के प्रभावित होने के कारण होता है। 'डायबिटिक फुट अल्सर' अक्सर क्यों नजरअंदाज हो जाते हैं, इस बारे में डॉक्टर अमिताभ सिंह ने बताया कि लंबे समय तक अनियंत्रित रहने वाली मधुमेह नसों को नुकसान पहुंचाती है, पैरों की मांसपेशियों को कमजोर करती है और रक्त संचार कम कर देती है। उन्होंने कहा, ''अधिकांश डायबिटिक फुट अल्सर की शुरुआत बिना दर्द वाले घाव से होती है। शरीर में लंबे समय तक शर्करा का स्तर अधिक रहने से नस क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और पैर सुन्न होने लगता है। ऐसे में लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उनके पैर में घाव हो गया है, क्योंकि उन्हें दर्द महसूस नहीं होता।'' सिंह ने कहा, ''जब ऐसे लोग डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है और संक्रमण गहरे ऊतकों तक फैल चुका होता है। कई मामलों में पैर काटने की नौबत एक छोटे से छाले से शुरू होती है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है।''
- डिंडोरी (मध्यप्रदेश)। डिंडोरी जिले में साल के जंगलों को साल बोरर कीट के प्रकोप से बचाने के लिए वन विभाग ने जनभागीदारी पर आधारित एक अनूठा अभियान शुरू किया है जिसके तहत ग्रामीणों को पकड़े गए प्रत्येक कीट के बदले दो रुपये का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस अभियान में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में जंगलों में जाकर कीट पकड़ रहे हैं। ग्रामीण 100 कीटों के कटे हुए सिरों की माला बनाकर निर्धारित संग्रह केंद्रों पर जमा कर रहे हैं, जहां उन्हें भुगतान किया जा रहा है।पश्चिम करंजिया के परिक्षेत्र अधिकारी (आरएफओ) कौशांबी झा ने कहा, ''इस पहल का उद्देश्य स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से साल बोरर कीट की संख्या को नियंत्रित करना और साल के जंगलों की रक्षा करना है।'' वन अधिकारियों ने बताया कि भारत, बांग्लादेश, नेपाल, तिब्बत और हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले साल के वृक्ष मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं और हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं। उन्होंने बताया कि 2026-27 में अब तक करीब 30,487 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लगभग 1.47 लाख साल के पेड़ इस कीट के प्रकोप से प्रभावित हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, करीब 30 वर्ष पहले भी इस क्षेत्र में ऐसा ही प्रकोप हुआ था, जिसके बाद संक्रमण रोकने के लिए हजारों प्रभावित पेड़ों को काटना पड़ा था। अधिकारियों ने बताया कि साल बोरर कीट का जीवन चक्र लगभग 15 दिन का होता है और इसकी मादा एक बार में 300 से 500 अंडे देती है। मानसून के बाद यह कीट पेड़ों में प्रवेश कर कुछ ही दिनों में हरे-भरे वृक्षों को भीतर से खोखला कर देता है। उन्होंने बताया कि डिंडोरी जिले में लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें करीब 1.5 लाख हेक्टेयर में साल के जंगल फैले हैं। इन जंगलों में साल के लगभग 40 करोड़ पेड़ हैं। इस प्रकोप के नियंत्रण के लिए वन विभाग ने 'ट्रैप ट्री' अभियान भी शुरू किया है जिसके प्रत्येक दो हेक्टेयर क्षेत्र में साल के एक पेड़ की कटाई या छंटाई की जाती है जिसके बाद इससे निकलने वाली गंध से साल बोरर कीट आकर्षित होकर उस पेड़ पर एकत्र हो जाते हैं और फिर उन्हें आसानी से पकड़ लिया जाता है। उप वनमंडलाधिकारी (वन) एस. के. जाटव ने कहा, ''ग्रामीण सुबह पांच बजे से सात बजे के बीच इन 'ट्रैप ट्री' से कीट एकत्र करते हैं। अब तक 11 लाख से अधिक साल बोरर कीट एकत्र किए जा चुके हैं।'' अधिकारियों ने बताया कि इन कीटों को खरीडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में बनाए गए पांच संग्रह केंद्रों पर जमा कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से जहां कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिल रही है, वहीं ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिला है। उत्पादन वनमंडलाधिकारी भारती ठाकरे ने बताया कि विभाग ने साल के ऐसे 1,46,784 पेड़ों की पहचान की है, जो कीटों के प्रकोप से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा, ''ये पेड़ कीटों के हमले से भीतर से खोखले हो चुके हैं। इन्हें काटने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई है, जिसके मिलने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं। तब तक शेष हरे-भरे पेड़ों की सुरक्षा के लिए यह अभियान जारी रखा जाएगा।''
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पुरी. ओडिशा के बारिश प्रभावित पुरी में 'जय जगन्नाथ' और 'हरिबोल' के उद्घोष के बीच लाखों श्रद्धालु शनिवार शाम उस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बने, जिसके तहत रथ यात्रा उत्सव के हिस्से के रूप में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का गुंडिचा मंदिर में प्रवेश हुआ। 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचे रथों पर पुष्पांजलि समेत अन्य अनुष्ठान पूरे होने के बाद शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे देवताओं की 'पहंडी' शुरू हुई। परंपरा के अनुसार, तीनों देवताओं की प्रतिमाएं रातभर रथों पर ही विराजमान रहीं। मंदिर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि रथ यात्रा के हिस्से के रूप में आयोजित 'अडापा मंडप बिजे' अनुष्ठान के तहत देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को रथों से गुंडिचा मंदिर के गर्भगृह में ले जाया गया। तीनों देवी-देवता सात दिनों तक गुंडिचा मंदिर (भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र का जन्मस्थान) में रहेंगे और 24 जुलाई को 'बहुदा यात्रा' (वापसी रथ यात्रा) के तहत मुख्य मंदिर (जगन्नाथ मंदिर) में लौटेंगे। इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि रथों पर विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन और 'अडापा मंडप बिजे' अनुष्ठान में शामिल होने के लिए पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह अनुष्ठान पुरी में रथ यात्रा के पहले चरण के समापन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही भारी बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालु श्री गुंडिचा मंदिर के सामने स्थित रेत के मैदान 'सारधा बाली' में एकत्र हुए। बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं के प्रबंधन के वास्ते ओडिशा पुलिस ने दर्शन के लिए सख्त एकतरफा व्यवस्था लागू की है, ताकि तीर्थयात्रियों की आवाजाही सुचारु बनी रहे और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस वर्ष रथ यात्रा उत्सव के दौरान बृहस्पतिवार को भीड़ अचानक बढ़ने और खराब मौसम के कारण दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग बीमार पड़ गए थे।
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नई दिल्ली। रामनगर और देहरादून के बीच पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए। नई ट्रेन से कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा और लंबे समय से चली आ रही लोगों की मांग पूरी होगी। रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को संचालित होगी। ट्रेन संख्या 15310 सुबह 5:50 बजे रामनगर से रवाना होकर दोपहर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 15309 दोपहर 3:55 बजे देहरादून से चलकर रात 11:30 बजे रामनगर पहुंचेगी। मार्ग में काशीपुर, रोशनपुर, पिपल्सना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर ठहराव होगा।
ट्रेन में एसी सेकेंड क्लास, एसी थर्ड क्लास, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, सेकेंड सिटिंग और जनरल सेकेंड क्लास कोच उपलब्ध होंगे। इससे उत्तराखंड के नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। छात्र, किसान, व्यापारी और अन्य यात्रियों को एक ही दिन में यात्रा कर अपने कार्य पूरे करने में सुविधा मिलेगी।नई रेल सेवा से जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, गिरिजा देवी मंदिर और सीतामढ़ी-सीतावनी जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। हरिद्वार और देहरादून के जरिए बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चारधाम यात्रा के लिए भी बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होगा।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हरिद्वार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी और यात्रियों की आवाजाही अधिक सुगम बनेगी।रेल मंत्री ने बताया कि राज्य में देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लाल कुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर सहित 11 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के विकास में गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही भीड़भाड़ नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान रहेगा।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस उत्तराखंड की रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से काम चल रहा है, जो राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास की जीवनरेखा साबित होगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड को रेलवे के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपए का बजट मिला है और राज्य में 40,000 करोड़ रुपए से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर काम जारी है। -
नई दिल्ली। संचार मंत्रालय के डाक विभाग ने इंडिया पोस्ट के आधिकारिक शुभंकर (मैस्कॉट) डिजाइन करने के लिए ‘इनोवेट इंडिया माईगॉव’ प्लेटफॉर्म पर प्रतियोगिता शुरू की है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से देशभर के नागरिकों को ऐसा शुभंकर तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया है, जो इंडिया पोस्ट के विश्वास, विश्वसनीयता, सेवा, समावेशिता और डिजिटल नवाचार जैसे मूल्यों को दर्शा सके। प्रतियोगिता में कुल 2 लाख रुपए की पुरस्कार राशि रखी गई है। यह प्रतियोगिता सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुली है। प्रतिभागियों को माईगॉव प्लेटफॉर्म के माध्यम से मौलिक शुभंकर डिजाइन, उसका उपयुक्त नाम और एक संक्षिप्त अवधारणा पत्र प्रस्तुत करना होगा। प्रतियोगिता 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक चलेगी।
डाक विभाग ने रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए तीन सर्वश्रेष्ठ शुभंकर डिजाइनों के लिए क्रमशः 75,000 रुपए, 50,000 रुपए और 25,000 रुपए के नकद पुरस्कार घोषित किए हैं। इसके अलावा तीन सर्वश्रेष्ठ शुभंकर नामों के लिए 25,000 रुपए, 15,000 रुपए और 10,000 रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। प्रतियोगिता में चयनित शुभंकर को इंडिया पोस्ट का आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। इसे डाक विभाग के प्रचार अभियानों, डाक टिकट संबंधी उत्पादों, जन जागरूकता कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य आधिकारिक संचार माध्यमों में शामिल किया जाएगा। डाक विभाग ने देशभर के छात्रों, डिजाइनरों, कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों से इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की है। विभाग का उद्देश्य इंडिया पोस्ट की भविष्य की दृश्य पहचान को एक नए और रचनात्मक स्वरूप के साथ विकसित करना है। प्रतियोगिता के दिशा-निर्देश, नियम और शर्तों तथा प्रविष्टियां जमा करने से जुड़ी पूरी जानकारी इनोवेट इंडिया माईगॉव प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। -
नई दिल्ली। भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 ने शनिवार को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंचकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक निर्णायक क्षण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से बात कर विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी नए अवसरों के द्वार खोल रही है, नवाचार को गति दे रही है और यह उपलब्धि देश के अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने तथा निर्भीक होकर नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट ‘मिशन आगमन’ के तहत सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचा। इसके साथ ही भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है।आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित 24 मीटर लंबे कार्बन-कॉम्पोजिट रॉकेट ने उड़ान के सभी निर्धारित चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और अपने पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मिशन को “वास्तव में ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह भारत के युवाओं की नवाचार क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम है। वहीं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक मील का पत्थर करार दिया।मिशन के दौरान पहले चरण के ठोस ईंधन मोटर कलाम-1200 ने रॉकेट को वायुमंडल के सबसे घने हिस्से से बाहर पहुंचाया। इसके बाद कलाम-250 और कलाम-100 चरणों ने भी निर्धारित प्रदर्शन किया। अंत में ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) ने अपने 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन की मदद से रॉकेट को अंतिम कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। 450 किलोमीटर की लो अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम विक्रम-1 अपने साथ कई पेलोड लेकर गया। इनमें बेंगलुरु स्थित कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा विकसित लैब-ग्रोन डायमंड ‘डायमंड लोटस’ भी शामिल है। मिशन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित “वंदे मातरम्” संदेश वाला पोस्टकार्ड भी भेजा गया। इसके अलावा स्काईरूट की टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी इस मिशन का हिस्सा रहे। -
नई दिल्ली। भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक उड़ान भरते हुए अपनी निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) हासिल कर ली। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारत निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट ने अपने सभी मिशन चरण सफलतापूर्वक पूरे करते हुए पेलोड्स को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित किया।
स्काईरूट एयरोस्पेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बताया कि ‘विक्रम-1’ (टेस्ट फ्लाइट-1) ने अपना अंतिम बर्न सफलतापूर्वक पूरा करते हुए सभी पेलोड्स को निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। कंपनी ने इसे भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। लॉन्च के बाद ‘विक्रम-1’ ने लॉन्च टॉवर से सुरक्षित दूरी बनाई। इसके बाद पहला सॉलिड-फ्यूल चरण ‘कलाम-1200’ सफलतापूर्वक अलग हुआ और रॉकेट को वायुमंडल के घने हिस्से से बाहर ले गया। इसके बाद पेलोड फेयरिंग अलग हुई, जिससे उपग्रह पहली बार अंतरिक्ष के खुले वातावरण में पहुंचे। दूसरे चरण ‘कलाम-250’ ने अपना बर्न पूरा कर अलगाव किया, जबकि तीसरे चरण ‘कलाम-100’ ने रॉकेट को अंतिम वेग प्रदान किया। इसके बाद लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल ने पेलोड्स को 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित किया।विक्रम-1 को 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60 डिग्री झुकाव वाली 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल चरण और एक 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से लैस ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है। पूरी तरह कार्बन कम्पोजिट संरचना वाला यह रॉकेट भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।अपने पहले मिशन में ‘विक्रम-1’ ने कई ग्राहक पेलोड्स को कक्षा में स्थापित किया। इनमें स्काईरूट का ‘स्कोप’ सैटेलाइट, डीक्यूब्ड का टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड, ग्रह स्पेस का ‘सोलर्स एस-3’ सैटेलाइट और कॉस्मोसर्व स्पेस का ‘इमब्रेस’ रोबोटिक आर्म शामिल हैं। ‘इमब्रेस’ को अंतरिक्ष में मौजूद मलबे (स्पेस डेब्रिस) को पकड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।मिशन के साथ ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक फूलों के आकार की कलाकृति भी अंतरिक्ष में भेजी गई। इसके अलावा 18 कैरेट सोने से बना एक माइक्रो-रॉकेट भी पेलोड का हिस्सा रहा, जिस पर नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रमन, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई और पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं अंकित हैं।‘विक्रम-1’ की सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। यह उपलब्धि निजी कंपनियों की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के साथ-साथ भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा देने वाली साबित होगी। -
नई दिल्ली। भारत टेक्स 2026 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से अपनी भागीदारी का समापन किया। चार दिवसीय आयोजन में मंत्रालय के पवेलियन ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी लखपति दीदियों की उद्यमशीलता, शिल्प कौशल और बाजार क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। इस दौरान देश-विदेश के खरीदारों, उद्योग प्रतिनिधियों और आगंतुकों के साथ संवाद के जरिए ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार और नए बाजारों तक पहुंच का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन पर वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव, ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव जयश्री और संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने मंत्रालय के पवेलियन का दौरा किया। डीएवाई-एनआरएलएम की निदेशक डॉ. मोलिश्री ने उनका स्वागत किया। अधिकारियों ने लखपति दीदियों से बातचीत कर उनके उद्यमों की जानकारी ली और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के दौरान मंत्रालय के स्टॉल पर भारत और विदेश से आए खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आगंतुकों ने रुचि दिखाई। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने, उद्योग विशेषज्ञों से विचार साझा करने और नए बाजारों की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला।पवेलियन में भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा को प्रदर्शित करते हुए पट्टाचित्र, पेन कलमकारी, फुलकारी कढ़ाई, एरी रेशम, पश्मीना सहित विभिन्न क्षेत्रों के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इन कृतियों ने ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता, कौशल और उद्यमशीलता क्षमता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ रहा। डीएवाई-एनआरएलएम के तहत संचालित इस पहल में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों को एक मंच पर प्रदर्शित किया गया। गुणवत्ता, डिज़ाइन, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने वाली यह पहल महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को संस्थागत और प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रही है, साथ ही पारंपरिक शिल्पों की मौलिकता भी संरक्षित कर रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डीएवाई-एनआरएलएम के तहत देशभर में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, कौशल विकास, उद्यम विस्तार और बाजार संपर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। तीन करोड़ लखपति दीदियों का आंकड़ा पार करने के बाद सरकार अब छह करोड़ लखपति दीदियां तैयार करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।मंत्रालय ने कहा कि भारत टेक्स 2026 में भागीदारी से ग्रामीण महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर मिले हैं। इसके साथ ही भारत की समृद्ध वस्त्र और हस्तशिल्प विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने तथा महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। -
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी की पुस्तक ‘आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पिछले एक सदी में सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को मजबूत किया है तथा निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस की शताब्दी वर्षगांठ पर प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन समारोह में शामिल होना उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान की बात है। उन्होंने संघ पर लिखी एक तमिल कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें संगठन की तुलना पवित्र गंगा से की गई है, जो दूसरों के कल्याण के लिए निरंतर बहती है और सेवा भावना का प्रतीक है।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तक का शीर्षक संघ की मूल भावना को दर्शाता है। उनके अनुसार, सेवा समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण का प्रतीक है, एकता भारत की विविधताओं को जोड़ने वाली शक्ति है और त्याग यह संदेश देता है कि स्थायी संस्थाएं समर्पण और निरंतर प्रयासों से ही बनती हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरएसएस अपनी दैनिक शाखाओं के माध्यम से चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास का कार्य करता है। उन्होंने पुस्तक का उल्लेख करते हुए शाखा को “आत्मा की कार्यशाला” बताया, जहां युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्रीय चरित्र में ढाला जाता है।उन्होंने कहा कि आरएसएस ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, विविध परंपराओं, भाषाओं और आध्यात्मिक विचारों के प्रति गौरव की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष लाखों स्वयंसेवकों के समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है। उपराष्ट्रपति ने पुस्तक के “एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री: मोदी युग” अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयंसेवक से प्रधान सेवक तक की यात्रा में ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘सेवा’ को शासन के केंद्र में रखा है। उन्होंने कहा कि यह आरएसएस की निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की विचारधारा का प्रतिबिंब है।सीपी राधाकृष्णन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अपने शुरुआती सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए कहा कि दोनों ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह गंगा एक छोटी धारा से विशाल नदी बनती है, उसी तरह आरएसएस भी छोटे संगठन से दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में शामिल हो गया।कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, आरएसएस क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, सह-लेखक श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। -
नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) के तहत अब तक 47.59 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं। योजना के अंतर्गत 16,759 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है, जबकि 46,782 से अधिक विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा देशभर में 24,133 ग्राम विकास योजनाएं तैयार की गई हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 750 विद्यार्थियों के आवास की व्यवस्था हेतु दो बालिका छात्रावासों सहित तीन छात्रावास परियोजनाओं के निर्माण के लिए 22.50 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीएम-अजय के तहत आदर्श ग्राम योजना में 47,316 गांवों को शामिल किया गया है, जिससे 47,59,399 नागरिक लाभान्वित हुए हैं। योजना के तहत अब तक 46,782 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं और 24,133 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं। अधिकारी के अनुसार, 16,759 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है। यह अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचना, मूलभूत सेवाओं और जीवन स्तर में हुए उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है।अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 750 विद्यार्थियों के आवास की व्यवस्था हेतु दो बालिका छात्रावासों सहित तीन छात्रावास परियोजनाओं के निर्माण के लिए 22.50 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता मंजूर की है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि पीएम-अजय लक्षित हस्तक्षेपों और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाने, सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना सामुदायिक भागीदारी और विभिन्न एजेंसियों के तालमेल से जमीनी स्तर पर संस्थाओं को मजबूत कर रही है।पीएम-अजय के तहत आदर्श ग्राम योजना, सहायता-अनुदान और छात्रावास तीन प्रमुख घटक हैं। आदर्श ग्राम योजना अनुसूचित जाति बहुल गांवों के समग्र विकास पर केंद्रित है। सहायता-अनुदान के माध्यम से आजीविका, कौशल विकास और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है, जबकि छात्रावास घटक विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण और मरम्मत के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।मंत्रालय ने पीएम-अजय पोर्टल और अजय मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन को पूरी तरह ऑनलाइन बनाया है। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए ग्राम विकास योजनाओं की तैयारी, परियोजनाओं का मूल्यांकन, निधि की निगरानी, लाभार्थियों की मॉनिटरिंग और जियो-टैग रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो रही है।मंत्रालय ने बताया कि पीएम-अजय के तहत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। अवसंरचना, शिक्षा, आजीविका और डिजिटल शासन में निरंतर निवेश के माध्यम से यह योजना अनुसूचित जाति समुदायों को सशक्त बनाने और उन्हें देश की विकास यात्रा में समान भागीदारी दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। - -पर्याप्त वर्षा मिलते ही रोपाई पूरी करें, अधिक देरी होने पर कम अवधि वाली धान किस्में एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाहनई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून में विलंब तथा छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में वर्षा की अनिश्चितता के मद्देनजर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर ने प्रदेश के धान किसानों के लिए विशेष वैज्ञानिक कृषि परामर्श जारी किया है। संस्थान ने खरीफ मौसम में फसल की सफल स्थापना सुनिश्चित करने तथा संभावित उत्पादन हानि को न्यूनतम रखने के लिए किसानों से मौसम की स्थिति के अनुरूप समयबद्ध वैज्ञानिक एवं आकस्मिक कृषि प्रबंधन उपाय अपनाने का आग्रह किया है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर के प्रक्षेत्र में धान की 'देवभोग' किस्म की पौध रोपाई के लिए तैयारसंस्थान के अनुसार, पर्याप्त वर्षा होने पर किसान 20 से 25 दिन पुराने स्वस्थ पौधों की अनुशंसित दूरी पर शीघ्र रोपाई पूरी करें। यदि रोपाई में अधिक विलंब हो, तो कम से मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों का चयन किया जाए। जिन क्षेत्रों में रोपाई संभव न हो, वहां अंकुरित बीजों का उपयोग करते हुए ड्रम सीडर अथवा छिड़काव विधि से धान की सीधी बुवाई की जा सकती है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने कहा कि बदलती जलवायु और अनिश्चित वर्षा की परिस्थितियों में समय पर वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा आकस्मिक कृषि योजना अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विज्ञान केंद्रों तथा कृषि विशेषज्ञों के नियमित संपर्क में रहकर वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की।संस्थान ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए फास्फोरस एवं पोटाश की अनुशंसित मात्रा आधार खाद के रूप में देने तथा नत्रजन उर्वरक का प्रयोग फसल की आवश्यकता के अनुसार विभाजित मात्रा में करने की सलाह दी है। साथ ही भारी वर्षा की संभावना से ठीक पहले यूरिया का प्रयोग नहीं करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पोषक तत्वों के बहाव से होने वाली हानि को रोका जा सके।किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण, खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने तथा जलभराव की स्थिति में प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही तना छेदक, पत्ती लपेटक जैसे प्रमुख कीटों तथा ब्लास्ट एवं जीवाणुजनित पत्ती झुलसा जैसे रोगों की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक अनुशंसाओं पर आधारित पौध संरक्षण उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि विलंबित मानसून की स्थिति में फसल की प्रारंभिक अवस्था सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। किसानों को खेत संबंधी कार्यों में अनावश्यक विलंब से बचते हुए संतुलित पोषण, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।संस्थान ने यह भी सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक वर्षा का अभाव बना रहने से धान की खेती प्रभावित होने की आशंका है, वहां स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मक्का, अरहर, उड़द, मूंग, तिल तथा मोटे अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार किया जा सकता है। संस्थान ने किसानों से मौसम आधारित कृषि परामर्श और वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन कर खरीफ फसलों को सुरक्षित एवं उत्पादक बनाने की अपील की है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की ओर से जारी सीट संबंधी अद्यतन विवरण के अनुसार, नए मेडिकल कॉलेजों के खुलने और मौजूदा कॉलेजों में सीट बढ़ने से वर्ष 2026-27 के शिक्षण सत्र के लिए देश में एमबीबीएस की 1,36,939 सीट उपलब्ध होंगी। एनएमसी के 'मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड' (एमएआरबी) ने बुधवार को एमबीबीएस की उपलब्ध सीट का आधिकारिक विवरण जारी किया, लेकिन इसमें राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को शामिल नहीं किया गया है। पिछली बार मंजूर की गई 1,27,028 सीट की तुलना में इस बार एमबीबीएस की सीट संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
विनियामक संस्था ने कहा कि एनएमसी द्वारा नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी देने समेत मौजूदा कॉलेजों की सालाना सीट संख्या में बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने से बढ़ी सीटों को संशोधित सीट संबंधी विवरण में शामिल किया गया है। हालांकि, एनएमसी ने चेतावनी दी है कि जारी की गई सीट संख्या अस्थायी है।नोटिस में कहा गया है, ''अपील कमेटी या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी के पास लंबित किसी भी अपील के नतीजे के आधार पर सीट संबंधी विवरण में बदलाव हो सकता है। किसी भी बदलाव की स्थिति में, अद्यतन सीट संबंधी विवरण को वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।'' कमीशन ने केंद्र और राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल उतनी ही सीट पर ही दाखिला लें जितने की मंजूरी प्राप्त है। एनएमसी ने कहा कि मंजूर की गई संख्या से अधिक सीट पर दाखिला लेने पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के तहत सख़्त कार्रवाई की जाएगी। विनियामक संस्था ने कहा, ''मेडिकल कॉलेज मंजूरी प्राप्त सालाना सीट संख्या से अधिक सीट पर छात्रों को प्रवेश नहीं देंगे। तय सीमा से अधिक दाखिले को एनएमसी अधिनियम, 2019 के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और उचित नियामकीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।'' सभी मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों और काउंसलिंग प्राधिकरणों को भेजे गए एक पत्र में, एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने दोहराया कि वर्ष 2026-27 में शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रवेश देने में मंजूर सीट सीमा का सख्ती से पालन किया जाए। विनियामक संस्था ने नए कॉलेज खोलने या सीट संख्या बढ़ाने की मंजूरी प्राप्त करने वाले निजी मेडिकल कॉलेजों को सात दिनों के भीतर तय इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश दिया है। -
नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भले ही युद्ध के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए सशस्त्र बलों में आधुनिक हथियार और अन्य उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, लेकिन भविष्य में भी बंदरगाह, सड़क और सुरंग जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे अपरिहार्य भूमिका निभाते रहेंगे। सिंह ने यहां सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही युद्धकला की बदलती प्रकृति से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और उपकरण शामिल किए जा रहे हैं, फिर भी बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़कें और सुरंगें भविष्य में अपरिहार्य भूमिका निभाती रहेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यद्यपि युद्ध का परिणाम बहुत हद तक सैन्य शक्ति, सटीक क्षमताओं और आधुनिक प्रौद्योगिकियों द्वारा निर्धारित होता है, फिर भी बुनियादी ढांचा सैन्य अभियानों को सक्षम बनाने के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। 'सीमा सड़क संगठन' (बीआरओ) द्वारा आयोजित 'रणनीतिक अवसंरचना सम्मेलन' में अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यद्यपि युद्ध का नतीजा मुख्य रूप से सैन्य ताकत, सटीक हमले की क्षमता और आधुनिक तकनीकों से तय होता है, लेकिन सैन्य अभियानों को संभव बनाने के लिए बुनियादी ढांचा बहुत जरूरी है। सिंह ने कहा, ''कभी-कभी युद्ध का पहला मोर्चा सीमा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है, जो हमारे सैनिकों को अग्रिम मोर्चे तक ले जाती है। इसलिए, जो व्यक्ति वह सड़क बनाता है, वह भी राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण रक्षक होता है, जितना कि सीमा पर तैनात सैनिक।'' उन्होंने मजबूत बुनियादी ढांचा बनाने के लिए खास तकनीकों को अपनाने और विश्व-स्तरीय बुनियादी ढांचा बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को लगातार मज़बूत करने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुसार 2047 तक भारत को 'विकसित भारत' बनाने के सरकार के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए बीआरओ की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध में भी सीमावर्ती बुनियादी ढांचा अपरिहार्य रूप से अहम बना रहेगा। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी सभ्यता के विकास का एक जरूरी हिस्सा है और सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाला कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नवाचार, अनुसंधान और काम को बेहतरीन ढंग से पूरा करना 'भविष्योन्मुखी रणनीतिक अवसंरचना' के लिए जरूरी है। सिंह ने कहा, ''भले ही युद्ध के बदलते स्वरूप से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए रक्षा बलों में अत्याधुनिक हथियार और अन्य उपकरण शामिल किए जा रहे हों, फिर भी भविष्य में बंदरगाह, हवाई पट्टियां, सड़कें और सुरंगें अहम भूमिका निभाती रहेंगी।'' बुधवार को शुरू हुए दो दिन के इस सम्मेलन में कई अहम विषयों पर चर्चा हुई, जैसे-नई प्रौद्योगिकी, नवोन्मेषी इंजीनियरिंग समाधान, उत्पादकता बढ़ाने के लिए नियोजन, परियोजना निगरानी और काम पूरा करने में डिजिटल बदलाव, टिकाऊ निर्माण के तरीके और भारत के सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक अवसंरचना के विकास को तेज गति प्रदान करने के लिए अपनाए जाने वाले सबसे अच्छे तरीके। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, अवसंरचना विशेषज्ञ, बीआरओ के अधिकारी, उद्योग जगत की हस्तियां और प्रौद्योगिकी साझेदार एक साथ आए, ताकि रणनीतिक अवसंरचना के विकास के भविष्य पर मिलकर चर्चा कर सकें। सिंह ने बताया कि पिछले साढ़े छह दशकों में, बीआरओ ने खुद को सिर्फ सड़क बनाने वाली एजेंसी की बजाय रणनीतिक अवसंरचना तैयार करने वाले दुनिया के सबसे सम्मानित संगठनों में से एक के रूप में पहचान बनाई है। उन्होंने अटल सुरंग, उमलिंग ला दर्रा और सेला सुरंग जैसी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये बीआरओ की क्षमता और कड़ी मेहनत के 'जीवंत प्रमाण' हैं। उन्होंने कहा कि इसके समर्पित कर्मचारियों ने बार-बार साबित किया है कि देश सेवा की भावना के साथ, सबसे मुश्किल हालात में भी किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है। बीआरओ को नई प्रौद्योगिकी अपनाने में सबसे आगे रहने वाला संगठन बताते हुए, सिंह ने सुरंग बनाने की प्रौद्योगिकी का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस प्रौद्योगिकी ने शहरों में मेट्रो बनाने से लेकर पहाड़ी इलाकों में राजमार्ग बनाने तक, हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों में बीआरओ जिस तेजी से सड़कें और राजमार्ग बनाता है, वह 'अभूतपूर्व' है। उन्होंने इसे इंसानी संकल्प और आधुनिक प्रौद्योगिकी की मिली-जुली ताकत का नतीजा बताया। इस मौके पर बीआरओ के निदेशक जनरल लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक क्षमता का पैमाना 'अब सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि हम क्या बनाते हैं; बल्कि यह इस बात से तय होता है कि हम कितनी समझदारी से योजना बनाते हैं, कितनी तेजी से काम पूरा करते हैं, कितनी अच्छी तरह निगरानी करते हैं और अवसंरचना संपत्तियों का रखरखाव कितना टिकाऊ तरीके से करते हैं।'' रक्षा मंत्री ने बीआरओ की अलग-अलग परियोजना के लिए पुरस्कार भी प्रदान किए। मंत्रालय ने बताया कि उन्होंने परियोजना प्रबंधन और भर्ती के लिए दो डिजिटल मंच की भी शुरुआत की, जो बीआरओ के डिजिटल बदलाव और संगठन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और अहम कदम है। सिंह ने बीआरओ के तीन खास प्रकाशन, 'पथ प्रदर्शक', 'ऊंची सड़कें' और 'पथ विकास' जारी किए, जिनमें संगठन की उपलब्धियों, इंजीनियरिंग नवाचार, बेहतरीन तौर-तरीकों और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण का जिक्र किया गया है।
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कोलकाता/तामलुक. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के स्कूलों की मध्याह्न भोजन योजना में अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) को शामिल करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन के पास बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का पर्याप्त अनुभव है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस्कॉन एक अगस्त से कोलकाता के स्कूलों में मध्याह्न भोजन का वितरण शुरू करेगा। इसके बाद इस कार्यक्रम का विस्तार नादिया जिले और फिर धीरे-धीरे पूरे राज्य में किया जाएगा। सरकार के इस फैसले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस्कॉन देश के कई शहरों में इसी तरह की योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर चुका है और अब उसके अनुभव का लाभ पश्चिम बंगाल को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ''स्कूल मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों को उचित पोषण देना भी है। पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है। हमारे स्कूलों में मध्याह्न भोजन पर निर्भर रहने वाले अधिकतर छात्र मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, इसलिए कुपोषण से निपटने के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक है।'' पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर निशाना साधते हुए शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में मध्याह्न भोजन योजना में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में राज्य की मध्याह्न भोजन योजना में जिस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। बच्चों के भोजन में अनियमितता किसी पाप से कम नहीं है। आने वाले दिनों में इस्कॉन मध्याह्न भोजन की जिम्मेदारी निभाएगा और सुनिश्चित करेगा कि हमारे बच्चों को बेहतर गुणवत्ता वाला पौष्टिक आहार मिले। यही हमारा कर्तव्य है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भविष्य में कल्याणकारी कार्यक्रमों में और आध्यात्मिक एवं धर्मार्थ संगठनों को शामिल करने का इरादा रखती है।
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लखनऊ/गाजियाबाद. गाजियाबाद नगर निगम ने दिल्ली को शहर से जोड़ने वाली 11 किलोमीटर लंबी 'एलिवेटेड रोड' (उपरिगामी सड़क) का नाम 'राम सेतु' रखा है। इस मार्ग को अलग सांस्कृतिक पहचान देने के लिए इसके दिल्ली वाले सिरे पर एक भव्य प्रवेश द्वार भी बनाया जा रहा है, जिस पर भगवान राम के धनुष-बाण जैसी आकृति लगाई जाएगी। गाजियाबाद नगर निगम ने कहा कि राज नगर एक्सटेंशन से दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर तक फैली 'एलिवेटेड रोड' को अब 'राम सेतु' के नाम से जाना जाएगा और इसी नयी पहचान के हिसाब से भव्य प्रवेश द्वार भी तैयार किया जा रहा है। नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि प्रवेश द्वार के ऊपर भगवान राम का प्रतीक एक विशाल धनुष-बाण लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम के अधिकारी इस ढांचे के आसपास सजावटी लाइट समेत सुंदरता बढ़ाने का काम भी कर रहे हैं, ताकि यह दिन और रात दोनों समय एक खास स्थल के रूप में दिखे। गाजियाबाद में महापौर सुनीता दयाल ने संवाददाताओं को बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ाना है, बल्कि गाजियाबाद को एक अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी देना है। उन्होंने कहा, "राम सेतु गेट लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। इसका निर्माण पूरा होने के बाद यह शहर के मुख्य आकर्षणों में से एक बन जाएगा और दिल्ली से गाजियाबाद आने वाले लोगों के लिए एक भव्य स्वागत स्थल का काम करेगा।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगभग 1,147 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 11 किलोमीटर लंबी इस उपरिगामी सड़क का उद्घाटन 30 मार्च 2018 को किया था, जिससे गाजियाबाद और दिल्ली के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम की कार्यकारी समिति ने फरवरी 2024 में इस 'एलिवेटेड रोड' का नाम बदलकर 'राम सेतु' रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।








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