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नयी दिल्ली. म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले को अब निवेश राशि निकालते समय जल्द पैसा मिलेगा। परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां एक फरवरी यानी बुधवार से इक्विटी योजनाओं के निवेशकों के यूनिट भुनाने के बाद भुगतान सौदा होने के दो दिन दिन के भीतर (टी प्लस 2) ही करेंगी। फिलहाल, म्युचुअल फंड इकाइयां निवेशकों को उनके बैंक खाते में पैसा यूनिट भुनाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन दिन के भीतर भेजती हैं। यह कदम शेयर बाजार में कारोबार होने के एक दिन के भीतर निपटान व्यवस्था के अनुरूप है। इससे म्युचुअल फंड निवेशकों को लाभ होगा।
मोतीलाल ओसवाल एएमसी के मुख्य कारोबार अधिकारी अखिल चतुर्वेदी ने इस पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे निवेशकों को तेजी से नकदी उपलब्ध होगी और वे उसका उपयोग फिर से उसका निवेश करने या समयद्धब तरीके से बाध्यताओं को पूरा करने में कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि घरेलू शेयर बाजार में 27 जनवरी से बाजार में सौदों का निपटान अब कारोबार के बाद एक दिन के भीतर (टी प्लस 1) ही हो रहा है। इससे निपटान में लगने वाला समय एक दिन कम हो गया है और शेयर बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि निवेशकों के पास जल्दी आ जाएगी। म्यूचुअल फंड निकाय 'एसोसएिशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया' (एम्फी) ने एक बयान में कहा कि इस व्यवस्था का लाभ म्यूचुअल फंड निवेशकों को देने के लिये यह निर्णय किया गया है कि सभी संपत्ति प्रबंधन कंपनियां एक फरवरी से इक्विटी योजनाओं में यूनिट भुनाने के बाद दो दिन के भीतर भुगतान की व्यवस्था लागू करेंगी।
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नयी दिल्ली. संसद में मंगलवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2022-23 में कहा गया है कि निर्यात में स्थिरता तथा चालू खाते का घाटा (कैड) और बढ़ने से रुपया और कमजोर हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, ऊंचे व्यापार घाटे की वजह से देश का चालू खाते का घाटा जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत हो गया। यह अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी का 2.2 प्रतिशत था। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में विदेशी मुद्रा की निकासी और घरेलू शेयरों में सुस्ती के रुख के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे गिरकर 81.64 प्रति डॉलर पर आ गया। भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका के केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को कड़ा करने से रुपये पर दबाव पड़ा है। रुपया 83 प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर चुका है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जिंसों की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आ गई हैं। हालांकि, ये अब भी रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले के स्तर से ऊंची हैं। इसमें कहा गया है कि उच्च जिंस कीमतों के बीच मजबूत घरेलू मांग भारत के कुल आयात बिल को बढ़ाएगी। इससे देश का चालू खाते का शेष प्रभावित होगा।
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नयी दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष में घटकर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आर्थिक समीक्षा 2022-23 में मंगलवार को यह अनुमान जताया गया। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। पिछले साल यह 8.7 प्रतिशत थी। दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह भारत को भी यूरोप में लंबे समय से चल रहे युद्ध से वित्तीय चुनौतियां का सामना करना पड़ा है और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं भी आई हैं। समीक्षा में कहा गया, ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत ने चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत पीपीपी (क्रय शक्ति समानता) के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और विनिमय दर के मामले में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। समीक्षा में कहा गया, अर्थव्यवस्था ने जो कुछ खोया था, उसे लगभग फिर से पा लिया है। जो रुका हुआ था, उसे नया कर दिया है, और महामारी के दौरान तथा यूरोप में संघर्ष के बाद जो गति धीमी हो गई थी, उसे फिर से सक्रिय कर दिया है। इसमें संकेत दिया गया है कि मुद्रास्फीति की स्थिति बहुत चिंताजनक नहीं हो सकती है, हालांकि, कर्ज की लागत ‘लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहने की संभावना है। एक जटिल मुद्रास्फीति सख्ती के चक्र को लंबा कर सकती है।
समीक्षा में कहा गया है कि महामारी के बाद भारत में पुनरुद्धार अपेक्षाकृत तेज था, ठोस घरेलू मांग से वृद्धि को समर्थन मिला, पूंजी निवेश में तेजी आई, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के अनुमान से रुपये के लिए चुनौतियां बढ़ीं। चालू खाते के घाटे (कैड) में बढ़ोतरी जारी रह सकती है, क्योंकि वैश्विक जिंस कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। अगर कैड और बढ़ता है, तो रुपया दबाव में आ सकता है। समीक्षा के मुताबिक, निर्यात के मोर्चे पर चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि में कमी आई है। धीमी वैश्विक वृद्धि, सिकुड़ते वैश्विक व्यापार के कारण चालू वर्ष की दूसरी छमाही में निर्यात प्रोत्साहन में कमी आई। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वर्तमान कीमतों पर वृद्धि दर के 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है। समीक्षा में कहा गया कि आगामी वित्त वर्ष के दौरान ज्यादातर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की वृद्धि दर मजबूत रहेगी। ऐसा निजी खपत में सुधार, बैंकों द्वारा ऋण देने में तेजी और कंपनियों द्वारा पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी के कारण होगा। समीक्षा में कहा गया है कि मजबूत खपत के कारण भारत में रोजगार की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन रोजगार के अधिक मौके तैयार करने के लिए निजी निवेश में वृद्धि जरूरी है।
- मुंबई । घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को मामूली तेजी रही और बीएसई सेंसेक्स 49 अंक से अधिक के लाभ में रहा। निवेशकों ने केंद्रीय बजट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत दर को लेकर निर्णय से पहले सतर्क रुख अपनाया। कारोबार के अंतिम घंटे में लिवाली से 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 49.49 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,549.90 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह ऊंचे में 59,787.63 अंक तक गया और नीचे में 59,104.59 अंक तक आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 13.20 अंक यानी 0.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 17,662.15 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के शेयरों में महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, भारतीय स्टेट बैंक, आईटीसी, टाटा मोटर्स और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख रूप से लाभ में रहे। दूसरी तरफ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एशियन पेंट्स और एचडीएफसी प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘घरेलू शेयर बाजार का प्रदर्शन दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में हल्का रहा। इसका कारण शेयरों का उच्च मूल्य पर होना है...इसके अलावा बाजार पर अडाणी समूह के मामले का भी असर है। एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) की बिक्री बढ़ी है। अब निवेशकों की नजर बजट और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर है। इसको लेकर बाजार की मिली-जुली राय है।'' एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट का रुख था। अमेरिकी बाजार में सोमवार को गिरावट रही। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83.90 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 6,792.80 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
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मुंबई। सोने की वैश्विक मांग 2022 में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 4,741 टन पर पहुंच गई है, जो 2011 के बाद से सबसे ऊंचा स्तर है। इसकी वजह अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में मांग का मजबूत रहना और केंद्रीय बैंकों द्वारा पीली धातु की जबर्दस्त तरीके से खरीद करना है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की तरफ से मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। वर्ष 2021 में सोने की वैश्विक मांग 4,012.8 टन थी।
डब्ल्यूजीसी की वार्षिक रिपोर्ट ‘स्वर्ण मांग रुझान' में बताया गया कि केंद्रीय बैंकों से मिलने वाली मांग 2022 में दोगुनी से भी अधिक होकर 1,136 टन पर पहुंच गई और यह इसके पहले के वर्ष से 450 टन से अधिक होने के साथ-साथ 55 साल का नया उच्चस्तर भी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले वर्ष चौथी तिमाही में मांग 417 टन पर पहुंच गई जिसके साथ 2022 की दूसरी छमाही में कुल मांग 800 टन से अधिक रही।
डब्ल्यूजीसी के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक लुइस स्ट्रीट ने कहा, ‘‘पिछले वर्ष सोने की वार्षिक मांग का स्तर एक दशक में सर्वाधिक है। बड़े केंद्रीय बैंकों की ओर से सुरक्षित परिसंपत्तियों के लिए आने वाली मांग कुछ हद तक इसकी वजह है।'' आभूषणों की मांग 2022 में तीन प्रतिशत कम होकर 2,086 टन रही।
मोटे तौर पर इसकी वजह चीन की आभूषण की वार्षिक मांग में कमी आना है जो 15 फीसदी घट गई। रिपोर्ट में कहा गया कि कुल वार्षिक आपूर्ति 2022 में दो प्रतिशत बढ़कर 4,755 टन रही है जो महामारी से पहले के स्तर से अधिक है।
फाइल फोटो - मुंबई । वर्ष 2022-23 की आर्थिक समीक्षा में देश का निर्यात सुस्त रहने तथा चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ने का अनुमान लगाए जाने के बाद रुपये पर दबाव कायम हो गया तथा अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में मंगलवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 41 पैसे लुढ़ककर 81.93 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार सूत्रों ने कहा कि विदेशी कोषों की निकासी और घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती से भी निवेशकों की कारोबारी धारणा प्रभावित हुई। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 81.61 पर कमजोर खुला लेकिन दिन के कारोबार में यह 82 प्रति डॉलर तक लुढ़क गया। कारोबार के अंत में रुपया अपने पिछले बंद भाव से 41 पैसे लुढ़ककर 81.93 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये ने 81.58 के दिन के उच्च स्तर और 82.07 के निम्न स्तर को छुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 81.52 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.15 प्रतिशत बढ़कर 102.43 हो गया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.18 प्रतिशत घटकर 83.90 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था।विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि निवेशक फेडरल रिजर्व से ब्याज दर के फैसले और 2023-24 के आम बजट के लिए तैयार हैं, दोनों की घोषणा बुधवार को होनी है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि निर्यात में स्थिरता रहने और बाद में चालू खाते के घाटे के बढ़ने के कारण भारतीय रुपय का मूल्य दबाव में रह सकता है। घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 49.49 अंक की तेजी के साथ 59,549.90 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने सोमवार को शुद्ध रूप से 6,792.80 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
- नयी दिल्ली,। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने का भाव 105 रुपये की गिरावट के साथ 56,780 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 56,885 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।चांदी की कीमत भी 379 रुपये की गिरावट के साथ 68,418 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एक विश्लेषक ने कहा, ‘‘दिल्ली में सोने की हाजिर कीमत 105 रुपये की गिरावट के साथ 56,780 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।'' विदेशी बाजारों में सोना गिरावट के साथ 1,913 डॉलर प्रति औंस पर रहा। जबकि चांदी तेजी के साथ 23.27 डॉलर प्रति औंस पर थी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में जिंस शोध विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवनीत दमानी ने कहा कि बाजार के कारोबारियों को केंद्रीय बजट 2022-23 में सोने पर आयात शुल्क में कटौती किये जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हमें इस बारे में आधिकारिक घोषणा किये जाने का इंतजार है।''
- नयी दिल्ली । घरों के दाम कोरोना काल के दो साल के दौरान ‘मंदा’ रहने के बाद अब फिर चढ़ने शुरू हुए हैं। मांग बढ़ने से खाली पड़े घरों की संख्या भी कम हो रही है। मंगलवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह जानकारी दी गई। समीक्षा में कई निर्माण सामग्रियों पर आयात शुल्क कम किए जाने से आवासीय संपत्तियों के दाम कम होने की उम्मीद जताई गई है।समीक्षा के अनुसार, इस वित्त वर्ष में आवास ऋण पर बढ़ती ब्याज दरों और संपत्ति की कीमतों में वृद्धि जैसी बाधाओं के बावजूद घरों की बिक्री बढ़ी है। इससे देश के संपत्ति बाजार में सुधार आया है।समीक्षा में कहा गया है कि आवास ऋण की मांग बढ़ने की वजह से ‘दबी मांग’ का निकलना है। समीक्षा में कहा गया कि वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करने वाले रूस-यूक्रेन युद्ध से निर्माण लागत बढ़ने के चलते घरों के दाम चढ़े थे।
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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष-आई.एम.एफ. ने कहा है कि विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत तीव्र गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने आज अपने विश्व आर्थिक दृष्टिकोण के जनवरी अपडेट को जारी किया है। इसमें कहा गया है कि घरेलू मांग में लचीलेपन के कारण वर्ष 2024 में छह दशमलव आठ प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने से पहले वर्ष 2023 में भारत का छह दशमलव एक प्रतिशत की दर से विकास होगा।
मुद्राकोष ने यह भी कहा है कि विकासशील और उभरते हुए एशियाई क्षेत्र में वर्ष 2023 में पांच दशमलव तीन प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी, जबकि वर्ष 2024 में यह दर पांच दशमलव दो प्रतिशत रहेगी। मुद्राकोष ने सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए कहा है कि मंदी के डर के बावजूद वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद या प्रति व्यक्ति वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में नकारात्मक वृद्धि की सम्भावना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने यह भी कहा है कि चीन में वर्ष 2023 में पांच दशमलव दो प्रतिशत की दर से वृद्धि का आकलन है। -
दिल्ली. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) कारोबारी अनुबंधों की संख्या के लिहाज से 2022 में एक बार फिर दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज के रूप में उभरा है। वायदा उद्योग संघ (एफआईए) ने यह जानकारी दी। एनएसई ने रविवार को एक बयान में कहा कि यह लगातार चौथा साल है, जब उसने शीर्ष स्थान हासिल किया है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक शेयर बाजार परिसंघ (डब्ल्यूएफई) के आंकड़ों के अनुसार एनएसई 2022 में इक्विटी खंड में सौदों की संख्या (इलेक्ट्रॉनिक ऑर्डर बुक) के लिहाज से तीसरे स्थान पर रहा। यह स्थान इससे पिछले साल चौथा था। एनएसई के व्यवसाय विकास प्रमुख श्रीराम कृष्णन ने कहा, ''इक्विटी खंड में तीसरा स्थान और डेरिवेटिव में सबसे बड़ा एक्सचेंज होने की उपलब्धि सभी हितधारकों के सहयोग का नतीजा है। - नयी दिल्ली । अडाणी समूह के शेयरों में शुक्रवार को 20 फीसदी तक की गिरावट आई जिसकी वजह से सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्यांकन 4.17 लाख करोड़ रुपये घट गया। अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च के समूह पर कई आरोप लगाने के बाद यह लगातार दूसरा कारोबारी दिन है जब उसकी कंपनियों के शेयर टूटे हैं।हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में उद्योगपति गौतम अडाणी की अगुवाई वाले समूह पर ‘खुले तौर पर शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। कंपनी के इस आरोप के बाद विविध कारोबार से जुड़े समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।बीएसई पर अडाणी टोटल गैस के शेयर 20 फीसदी टूटे, अडाणी ट्रांसमिशन के 19.99 फीसदी, अडाणी ग्रीन एनर्जी के 19.99 फीसदी और अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर में 18.52 फीसदी की गिरावट आई है।वहीं, अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के शेयर 16.03 फीसदी गिरे, अडाणी विल्मर के पांच फीसदी और अडाणी पॉवर के शेयर में भी पांच फीसदी की गिरावट आई।अंबुजा सीमेंट्स के शेयर 17.16 फीसदी टूटे और एसीसी के शेयर में 13.04 फीसदी की गिरावट आई।दो दिन के भीतर, अडाणी समूह की कंपनियों का बाजार मूल्यांकन (एमकैप) 4,17,824.79 करोड़ रुपये घट गया है।अडाणी टोटल गैस का बाजार मूल्यांकन 1,04,580.93 करोड़ रुपये घटा, वहीं अडाणी ट्रांसमिशन का एमकैप 83,265.95 करोड़ रुपये कम हो गया। अडाणी एंटरप्राइजेज के बाजार मूल्यांकन में 77,588.47 करोड़ रुपये की गिरावट आई वहीं अडाणी ग्रीन एनर्जी ने 67,962.91 करोड़ रुपये तथा अडाणी पोर्ट्स ने 35,048.25 करोड़ रुपये गंवाए।अंबुजा सीमेंट्स का बाजार मूल्यांकन 23,311.47 करोड़ रुपये घट गया, अडाणी पॉवर का 10,317.31 करोड़ रुपये, एसीसी का 8,490.8 करोड़ रुपये और अडाणी विल्मर के बाजार मूल्यांकन में 7,258.7 करोड़ रुपये की गिरावट आई।जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट की वजह एशिया के सबसे अमीर प्रवर्तक समूह की कंपनियों के बारे में आई नकारात्मक शोध रिपोर्ट है।’’अडाणी समूह ने गुरुवार को कहा कि वह अपनी प्रमुख कंपनी के शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तहत ‘बिना सोचे-विचारे’ काम करने के लिये अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ ‘दंडात्मक कार्रवाई’ को लेकर कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है। वहीं अमरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह कायम है।कंपनी के विधि मामलों के प्रमुख जतिन जलुंधवाला ने कहा, ‘‘हिंडनबर्ग रिसर्च ने गलत इरादे से बिना कोई शोध और पूरी जानकारी के समूह के खिलाफ 24 जनवरी, 2023 को रिपोर्ट प्रकाशित की। इससे अडाणी समूह, हमारे शेयरधारकों और निवेशकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। भारतीय शेयर बाजार में रिपोर्ट के जरिये जो उतार-चढ़ाव आया, वह काफी चिंता की बात है…।’’उन्होंने कहा कि रिपोर्ट और उसकी निराधार बातें कुछ और नहीं, बल्कि अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतों को नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार की गयी थीं।जलुंधवाला ने कहा, ‘‘एक विदेशी इकाई ने जानबूझकर और बिना सोचे-विचारे निवेशक समुदाय और आम लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया है। उसने अडाणी समूह, उसके नेतृत्व की साख को बट्टा लगाने के साथ हमारी प्रमुख कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज के एफपीओ (अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम) की बिक्री को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। हम उसकी इन हरकतों से काफी परेशान हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ अमेरिकी और भारतीय कानून के तहत निपटने और दंडात्मक कार्रवाई पर गौर कर रहे हैं।’’इससे पहले बुधवार को अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग ने कहा था कि उसके दो साल के शोध के बाद यह पता चला कि अडाणी समूह दशकों से ‘खुले तौर पर शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल रहा है।
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नयी दिल्ली. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी और अन्य राज्यों से की गई खरीद के कारण पिछले आठ वर्षों में मात्रा और मूल्य के लिहाज से गेहूं और धान की खरीद में काफी वृद्धि हुई है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह कहा। खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए नोडल एजेंसी, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा अधिक मात्रा में गेहूं और धान की खरीद के कारण एमएसपी के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। खाद्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव सुबोध सिंह ने कहा, ‘‘विपणन सत्र 2013-14 और 2021-22 के बीच गेहूं और धान की केंद्रीय खरीद में काफी वृद्धि हुई है। खरीद का आधार व्यापक हो गया है और हम अब अधिक राज्यों से अनाज खरीद रहे हैं। एमएसपी में काफी वृद्धि हुई है।'' उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश, असम और त्रिपुरा में खरीद हो रही है, उन्होंने कहा कि एफसीआई ने राजस्थान से धान खरीदना शुरू कर दिया है। वर्ष 2013-14 से गेहूं और धान का उत्पादन भी बढ़ा है।
गेहूं के मामले में खरीद, वर्ष 2013-14 के 250.72 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2021-22 में 433.44 लाख टन हो गई। खरीदे गये गेहूँ का मूल्य 33,847 करोड़ रुपये से बढ़कर 85,604 करोड़ रुपये हो गया। सिंह ने कहा कि वर्ष 2016-17 में 20.47 लाख किसानों के मुकाबले वर्ष 2021-22 में गेहूं उगाने वाले 49.2 लाख किसान लाभान्वित हुए। वर्ष 2016-17 से पहले लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। गेहूं का एमएसपी बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है जो वर्ष 2013-14 के 1,350 रुपये प्रति क्विंटल से 57 प्रतिशत अधिक है। धान के मामले में, एमएसपी वर्ष 2013-14 के 1,345 रुपये प्रति क्विंटल की तुलना में लगभग 53 प्रतिशत बढ़कर 2,060 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। विपणन वर्ष 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) में धान की खरीद वर्ष 2013-14 के 475.30 लाख टन से बढ़कर 857 लाख टन हो गई है। विपणन वर्ष 2021-22 के दौरान धान किसानों को भुगतान किया गया एमएसपी मूल्य पहले के लगभग 64,000 करोड़ रुपये से बढकर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सिंह ने कहा कि गेहूं और धान के अलावा केंद्र ने राज्यों से मोटा अनाज खरीदने और इसे वितरित करने को कहा है और आश्वासन दिया है कि वह लागत वहन करेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में नौ राज्य मोटे अनाज खरीद रहे हैं - जिसमें हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मक्का, बाजरा, ज्वार और रागी को एमएसपी पर खरीदा जा रहा है। सिंह ने कहा कि मोटे अनाज की खरीद, वर्ष 2022-23 में बढ़कर लगभग 9.5 लाख टन होने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष लगभग 6.5 लाख टन थी। -
मुंबई |देश में बिकने वाले करीब 25-30 प्रतिशत उत्पाद जाली हैं और यह चलन कपड़ों एवं एफएमसीजी (दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाले) क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नजर आता है। इसके अलावा दवा, वाहन एवं टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्रों में भी नकली उत्पादों की भरमार देखी जाती है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया। इसके मुताबिक, परिधान क्षेत्र में करीब 31 प्रतिशत उत्पाद नकली पाए जाते हैं जबकि रोजमर्रा के उत्पादों के मामले में यह अनुपात 28 प्रतिशत का है। वहीं वाहन क्षेत्र के 25 प्रतिशत उत्पाद नकली होते हैं। क्रिसिल और ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स एसोसिएशन की तरफ से जारी इस संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, दवा एवं औषधि क्षेत्र के 20 प्रतिशत उत्पाद, टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र के 17 प्रतिशत उत्पाद और कृषि-रसायन क्षेत्र के 16 प्रतिशत उत्पाद नकली पाए गए हैं। इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि 27 प्रतिशत खरीदारों को यह पता ही नहीं होता है कि वे नकली उत्पाद खरीद रहे हैं। वहीं 31 प्रतिशत लोग जानबूझकर नकली उत्पादों को खरीदते हैं। इस रिपोर्ट को दिल्ली, आगरा, जालंधर, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोलकाता, पटना, चेन्नई, बेंगलुरु एवं हैदराबाद शहरों में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है। क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स के वरिष्ठ निदेशक सुरेश कृष्णमूर्ति ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कहा कि नकली उत्पाद सिर्फ लग्जरी उत्पादों तक ही सीमित नहीं हैं। सामान्य उत्पादों की भी तेजी से नकल हो रही है।
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नयी दिल्ली। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खंड में कई उत्पाद लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का पहला इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल अगले साल मार्च में आ सकता है। कंपनी के प्रबंध निदेशक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अत्सुशी ओगाता ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने एक्टिवा स्कूटर का नया संस्करण सोमवार को पेश किया है, यह आगामी एवं सख्त उत्सर्जन नियमों के अनुरूप है। इसकी दिल्ली में शुरुआती शोरूम कीमत 74,536 रुपये है। एचएमएसआई, अपने इलेक्ट्रिक वाहन ग्राहकों का समर्थन करने के लिए चार्जिंग विनिर्माण सुविधा के साथ आने की योजना बना रही है।
एचएमएसआई की अगले महीने 100 सीसी क्षमता बाइक पेश कर मोटरसाइकिल खंड में अपनी स्थिति मजबूत करने की योजना है। कंपनी 56 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ स्कूटर क्षेत्र में अग्रणी बनी हुई है। कंपनी इस बाइक के साथ ग्रामीण और अर्धशहरी बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ चाहती है।
ओगाता ने नये एक्टिवा को पेश करने के मौके पर कहा, ‘‘हम मार्च, 2024 में पहला इलेक्ट्रिक मॉडल पेश करेंगे... इसे पूरी तरह से नए मंच पर विकसित किया जा रहा है और यह भारतीय बाजार की जरूरतों पर आधारित है।'' उन्होंने आने वाले उत्पादों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अगले साल पहले मॉडल में ‘फिक्स' बैटरी होगी।
जबकि दूसरा मॉडल बैटरी बदलने वाली प्रणाली के साथ आएगा। ओगाता ने कहा कि कंपनी अपनी ईवी श्रृंखला के लिए चार्जिंग विनिर्माण सुविधा लगाने को 6,000 से अधिक आउटलेट्स के अपने मौजूदा बिक्री नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही है। -
नयी दिल्ली। देश की प्रमुख वाहन कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने अपने एसयूवी मॉडल ग्रांड विटारा की 11,177 इकाइयों को वापस मंगाने की घोषणा की है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजारों को इसकी सूचना देते हुए कहा कि पिछली सीट की बेल्ट में कुछ तकनीकी खामी को दूर करने के लिए इन वाहनों को वापस मंगाने का फैसला किया गया है।
प्रभावित इकाइयों का विनिर्माण आठ अगस्त, 2022 से 15 नवंबर, 2022 के बीच हुआ था। ऐसी आशंका है कि ग्रांड विटारा की इन इकाइयों के रियर सीट बेल्ट के ब्रैकेट आगे चलकर ढीले हो सकते हैं। इसी खामी को दूर करने के लिए इन वाहनों को वापस मंगाकर दुरुस्त किया जाएगा।
इस बारे में कंपनी की तरफ से वाहन मालिकों को अधिकृत डीलर वर्कशॉप पर लाने के बारे में सूचना दी जाएगी। वहां पर प्रभावित हिस्से का मुआयना कर निःशुल्क उसे बदल दिया जाएगा। मारुति ने पिछले हफ्ते भी अपने कुछ अन्य मॉडलों की 17,362 इकाइयों को वापस मंगाने की घोषणा की थी। आठ दिसंबर, 2022 से 12 जनवरी, 2023 के बीच बने इन वाहनों के एयरबैग कंट्रोलर को बदला जाएगा। -
हैदराबाद। अमेजन इंडिया ने अपने परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करने तथा ग्राहकों तक डिलिवरी में तेजी लाने के उद्देश्य से सोमवार को देश में अमेजन एयर की शुरुआत की। तेलंगाना के उद्योग मंत्री के टी रामाराव ने अमेजन के वरिष्ठ अधिकरियों की मौजूदगी में यहां राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सेवा की शुरुआत की।
अमेजन ने एक विज्ञप्ति में बताया कि वह भारत की ऐसी पहली ई-वाणिज्य कंपनी है जिसने हवाई मार्ग से माल ढुलाई के लिये अलग से नेटवर्क शुरू किया है। अमेजन में उपाध्यक्ष (ग्राहक संतुष्टि) अखिल सक्सेना ने कहा कि अभी दो विमानों का परिचालन किया जा रहा है...तीसरे पक्ष की कंपनी क्विकजेट से हमने विमान पट्टे पर लिया है। कंपनी विमान का परिचालन और देखरेख हमारे लिए करेगी।'' -
गुवाहाटी. जी-20 सम्मेलन के साथ-साथ यूथ-20 (वाई20) समूह की पहली बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक असम के सबसे बड़े शहर गुवाहाटी में छह से आठ फरवरी के बीच होगी। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया कि पूरे भारत में पांच वाई20 थीम पर होने वाली विभिन्न बैठकों में यह पहली बैठक होगी और अंतिम यूथ-20 सम्मेलन अगस्त 2023 में होगा। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘‘ असम में तीन दिवसीय आयोजन में दुनियाभर के करीब 250 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह बैठक भविष्य के कार्यों के लिए पांच थीम- जलवायु परिवर्तन और आपदा से होने वाले खतरों में कमी, शांति स्थापना और मेलमिलाप, लोकतंत्र में युवा और स्वास्थ्य, कुशलता और खेल पर केंद्रित होगी।'' जी-20 के तहत गठित आठ कार्य समूहों में वाई20 एक है। आमतौर पर पारंपरिक सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले युवा सम्मेलन होता है ताकि यह समझा जा सके कि युवा क्या सोचते हैं और उनके सुझाव को नीति प्रस्तावों में शामिल किया जा सके। बयान के मुताबिक वाई20 में सहभागिता और समावेशी विचार विमर्श की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए राज्य के करीब 50 विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में संगोष्ठी, कार्यशाला, वाद-विवाद और परिचर्चा का आयोजन 19 जनवरी से ही उनके परिसरों में किया जा रहा है। पीआईबी ने बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता सहित कुल 400 प्रतिभागी सात फरवरी को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी में आयोजित मुख्य आयोजन में हिस्सा लेंगे।
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नयी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी दोपहिया कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर विडा ए1 की आपूर्ति जयपुर में शुरू कर दी है। कंपनी की इस साल कई अन्य शहरों में भी इस ब्रांड को पेश करने की योजना है।
कंपनी के एमर्जिंग मोबिलिटी बिजनेस यूनिट प्रमुख स्वदेश श्रीवास्तव ने रविवार को बयान में कहा कि कंपनी अब बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने और नए शहरों में पहुंचने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि विडा वी1 स्कूटर की बिक्री दिल्ली में भी जल्द शुरू होगी। उन्होंने कहा कि हीरो मोटोकॉर्प का इरादा ग्राहकों को सुविधाजनक विकल्प देकर स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने का है। बेंगलुरु में इस ई-स्कूटर की आपूर्ति कंपनी पहले ही शुरू कर चुकी है। कंपनी ने पिछले साल अक्टूबर में इस ई-स्कूटर को दो संस्करणों में उतारा था। - नई दिल्ली। एमसीएक्स (MCX) पर शुक्रवार को सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन 56,850 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। एमसीएक्स पर इससे पहले गुरुवार को कारोबार के दौरान (इंट्राडे ट्रेडिंग) सोने की कीमत 56,588 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी । चांदी की कीमतों में भी फिलहाल मजबूती देखी जा रही है।जानकारों के अनुसार, ग्लोबल मार्केट में कल यानी गुरुवार को आई जोरदार तेजी की वजह से घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती आई है। सोना आज हालांकि ग्लोबल मार्केट में नरमी के साथ कारोबार कर रहा है।घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का बेंचमार्क फरवरी वायदा आज अपने पिछले क्लोजिंग प्राइस 56,546 रुपये के मुकाबले बढ़कर 56,641 रुपये प्रति 10 ग्राम खुला। 56,850 और 56,603 के दायरे में कारोबार करने के बाद यह 214 रुपये यानी 0.38 फीसदी की मजबूती के साथ 56,760 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया।वहीं चांदी का बेंचमार्क मार्च वायदा आज अपने पिछले क्लोजिंग प्राइस यानी 68,359 रुपये के मुकाबले चढकर 68,654 रुपये प्रति किलोग्राम खुला। 68,980 और 68,580 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में कारोबार करने के बाद यह 586 रुपये यानी 0.86 फीसदी की मजबूती के साथ 68,945 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था।घरेलू हाजिर (स्पॉट) बाजार में भी आज सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त देखने को मिली।Indian Bullion and Jewellers Association (IBJA) के अनुसार सोना (999) आज 320 रुपये की तेजी के साथ 56,990 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया । सोना (995) और सोना (916) भी क्रमश: 319 और 293 रुपये की मजबूती के साथ 56,762 और 52,203 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किए गए । जबकि चांदी की कीमतें 1,065 रुपये की तेजी के साथ 68,509 रुपये प्रति किलोग्राम पर दर्ज की गई।डॉलर इंडेक्स में मजबूती के चलते ग्लोबल मार्केट में स्पॉट (हाजिर) गोल्ड 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 1,926.78 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। गुरुवार को हाजिर कीमतें 1.5 फीसदी बढ़कर अप्रैल 2022 के ऊपरी लेवल तक पहुंच गई थी। विश्व की 6 प्रमुख करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन को दर्शाने वाले यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) में फिलहाल 0.12 फीसदी की मजबूती है।
- नई दिल्ली। . वैश्विक मंदी की आशंका के बीच कर्मचारियों की छंटनी करने वाली बड़ी टेक कंपनियों की सूची में गूगल का नाम भी शामिल हो गया है।गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट करीब 12,000 कर्मचारियों को कंपनी से निकालेगी। यह संख्या कंपनी में काम कर रहे कुल कर्मचारियों का 6 प्रतिशत है।गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने शुक्रवार को एक ईमेल में कर्मचारियों को बताया कि वह ‘उन फैसलों की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं जिसकी वजह से यह कदम उठाना पड़ा है।’ यह छंटनी वैश्विक स्तर पर और पूरी कंपनी में नौकरियों को प्रभावित करेगी।इस छंटनी के साथ गूगल कई अन्य टेक कंपनियों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने लड़खड़ाती वैश्विक अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के बीच बड़े पैमाने पर अपनी ऑपरेशन लागत को कर रही हैं। इससे पहले मेटा, ट्विटर और Amazon ने भी कर्मचारियों को निकालने की सूचना दी है।पिचाई ने ईमेल में लिखा, “ये हमारे ध्यान को तेज करने, हमारे लागत आधार को फिर से तैयार करने और हमारी प्रतिभा और पूंजी को हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में निर्देशित करने के लिए महत्वपूर्ण क्षण हैं।”ह्यूमन रिसोर्स सलाहकार फर्म चैलेंजर, ग्रे एंड क्रिसमस इंक के अनुसार, 2022 में सबसे अधिक नौकरी में छंटनी टेक सेक्टर में हुई है। इस दौरान 97,171 कर्मचारियों को छंटनी की गई जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में 649% अधिक है।
- नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की सगाई हो गई। मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया में सगाई के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इससे पहले 29 दिसंबर को अनंत अंबानी का राधिका से रोका हुआ था। तब कपल की रोका सेरेमनी से पहली तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं। रोके का यह कार्यक्रम राजस्थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में हुआ था। हालांकि, अनंत और राधिका की शादी कब होगी, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।शाम के उत्सव के लिए सबसे पहले अनंत की बहन ईशा और परिवार के अन्य सदस्यों ने राधिका को उनके मर्चेंट निवास पर जाकर आमंत्रित किया। इसके बाद अंबानी परिवार ने अपने आवास पर आरती और मंत्रोच्चारण के बीच वधू पक्ष का गर्मजोशी से स्वागत किया। जोड़े के उज्जव भविष्य के लिए भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेने, पूरा परिवार अनंत और राधिका के साथ मंदिर गया। वहां से सभी गणेश पूजा के लिए समारोह स्थल पर गए और उसके बाद पारंपरिक लगन पत्रिका का पाठ किया गया। गोल-धना और चुनरी विधि के बाद अनंत और राधिका के परिवारों के बीच उपहार लिए दिए गए। बहन ईशा ने रिंग सेरेमनी शुरू होने की घोषणा की और अनंत व राधिका ने परिवार और दोस्तों के सामने एक दूसरे को रिंग पहनाई और उनका आशीर्वाद लिया। परिवार की तरफ से कहा गया कि अनंत और राधिका कुछ सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और आज की सगाई की रस्में उन्हें और करीब ले आएंगी। दोनों परिवार राधिका और अनंत के लिए सभी का आशीर्वाद और शुभकामनाएं चाहते हैं।राधिका मर्चेंट एनकोर हेल्थकेयर के सीईओ विरेन मर्चेंट और शैला मर्चेंट की बेटी हैं। राधिका के पिता विरेन की भी देश के समृद्ध शख्सियतों में गिनती होती है। राधिका ने अपनी स्कूलिंग मुंबई में की है। इसके बाद वे स्टडी के लिए न्यूयॉर्क गईं थीं। वहां उन्होंने पॉलिटिक्स और इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। ग्रैजुएशन पूरी करने के बाद 2017 में उन्होंने इसप्रावा में एक सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम किया। उन्हें रीडिंग, ट्रैकिंग और स्वीमिंग का शौक है।नीता और मुकेश अंबानी के बेटे अनंत ने अमेरिका में ब्राउन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की और तब से वे रिलायंस इंडस्ट्रीज में विभिन्न क्षमताओं में जुड़े रहे हैं। वे जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल वेंचर्स के बोर्ड में रहे हैं। वह वर्तमान में रिलायंस के ऊर्जा कारोबार का नेतृत्व कर रहे हैं।
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मुकेश अंबानी ब्रांड संरक्षकता सूचकांक 2023 में भारत में पहले, दुनिया में दूसरे स्थान पर
नयी दिल्ली । उद्योगपति मुकेश अंबानी ने ब्रांड संरक्षकता सूचकांक 2023 में माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला और गूगल के सुंदर पिचाई को पीछे छोड़ दिया है। मुकेश अंबानी इस सूचकांक में भारत में पहले और विश्व में दूसरे स्थान पर हैं। ब्रांड फाइनेंस ने ब्रांड मजबूती सूचकांक की तरह ही अपना ब्रांड संरक्षकता सूचकांक तैयार किया है। ब्रांड मजबूती सूचकांक अपनी कॉरपोरेट ब्रांड मूल्यांकन को रेखांकित करता है। ब्रांड फाइनेंस ने 2023 की रिपोर्ट में कहा, ''हमने एक संतुलित सूचकांक बनाया है। इसमें कंपनी के संरक्षक के रूप मे कार्य करने की कंपनियों के सीईओ की क्षमताओं और दीर्घकालिक स्तर पर शेयरधारक मूल्य को आगे बढ़ाने में भूमिका को मापा गया है।'' रिपोर्ट में कहा गया, ''ब्रांड फाइनेंस की ब्रांड संरक्षकता सूचकांक (बीजीआई) 2023 में एनविडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जेनसेन हुआंग पहले और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट के मुकेश अंबानी दूसरे स्थान पर आ गए हैं।'' इन दोनों ने पहले दो स्थानों पर कब्जा कर पिछले साल शीर्ष पर रहने वाले माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला को तीसरे स्थान पर कर दिया है। सूचकांक में शीर्ष 10 में सबसे ज्यादा लोग भारतीय या भारतीय मूल से हैं।एडोब के शांतनु नारायण चौथे जबकि सुंदर पिचाई पांचवें स्थान पर हैं। डेलॉयट के पुनीत राजन छठे जबकि टाटा समूह के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन आठवें स्थान पर हैं। डीबीएस के पीयूष गुप्ता नौवें स्थान पर हैं जबकि टेंसेंट के हुआतेंग मा 10वें स्थान पर हैं। महिंद्रा समूह के प्रमुख आनंद महिंद्रा 23वें स्थान पर हैं।रिलायंस के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन अंबानी दूसरे स्थान पर हैं। वह समूह के प्रमुख की भूमिका में 40 साल से हैं। -
विशाल कपूर ने सीईएसएल के सीईओ का अतिरिक्त कार्यभार संभाला
नयी दिल्ली। विशाल कपूर ने गुरुवार को एनर्जी एफीशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) की पूर्ण अनुषंगी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया। कपूर सार्वजनिक क्षेत्र की ईईएसएल के सीईओ हैं। सीईएलएल, ईईएसएल की अनुषंगी है और इलेक्ट्रिक वाहन, कार्बन वित्त पोषण और बैटरी ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में काम करती है। उन्होंने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक बस कार्यक्रम (एनईबीपी) का लक्ष्य देशभर में 50,000 बसें लाने का है और उसे राज्य परिवहन से भारी मांग की उम्मीद है।'' उन्होंने ईईएसएल में दो नवंबर 2022 को पदभार संभाला था, जिससे पहले वे ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के तौर पर कार्यरत थे। - नयी दिल्ली। उद्योग मंडल फिक्की ने आगामी बजट 2023-24 में एल्युमीनियम और उसके उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर कम से कम 12.5 प्रतिशत करने की मांग की है। फिक्की ने एक बयान में कहा कि इससे एल्युमीनियम उत्पादों को फेंके जाने पर लगाम लगने के साथ-साथ घरेलू उत्पादकों की वृद्धि और पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा। एल्युमीनियम और इसके उत्पादों पर मौजूदा आयात शुल्क 10 प्रतिशत है।फिक्की ने एक बयान में कहा कि हालांकि, हालिया वर्षों में खराब गुणवत्ता के एल्युमीनियम उत्पादों के विशेष रूप से चीन से आयात में वृद्धि हुई है। इसके अलावा भारत में अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया और पश्चिम एशिया से भी एल्युमीनियम का आयात होता है। इनमें से कई देश अपने घरेलू उद्योगों को कम ब्याज दरों पर ऋण और सस्ती बिजली जैसी छूट और लाभ देकर फायदा पहुंचाते हैं। वर्तमान में भारत की लगभग 60 प्रतिशत एल्युमीनियम मांग की आपूर्ति आयात से हो रही है।फिक्की ने घरेलू विनिर्माताओं को बढ़ावा देने और आयात में कमी लाने के लिए कई प्रमुख पदार्थों पर उल्टे शुल्क ढांचे को तर्कसंगत करने की भी मांग की है। उल्टा शुल्क अभी 7.5 प्रतिशत है, जिसे 2.5 प्रतिशत किए जाने की मांग की गई है। उल्टा शुल्क ढांचे में तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल पर शुल्क अधिक लगाया जाता है। फिक्की ने एल्युमीनियम जैसे उद्योगों की मदद के लिए कोयले से उपकर हटाने की भी मांग की है।वित्त मंत्री एक फरवरी को संसद में 2023-24 का आम बजट पेश करेंगी।
- मुंबई । महाराष्ट्र सरकार ने महिंद्रा एंड महिंद्रा को 10,000 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रिक वाहन बनाने का कारखाना लगाने को मंजूरी दे दी है। पुणे में यह कारखाना इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिये राज्य की औद्योगिक संवर्धन योजना के तहत लगाया जाएगा। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने गुरुवार को कहा कि दोनों पक्षों ने बुधवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान इसको लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किये। कंपनी ने कहा कि कारखाना लगाने और अपने इलेक्ट्रिक वाहन बॉर्न के विकास और उत्पादन के लिये वह अपनी अनुषंगी के जरिये यह निवेश सात-आठ साल में करेगी। महिंद्रा एंड महिंद्रा के कार्यकारी निदेशक (वाहन और कृषि क्षेत्र) राजेश जेजुरिकर ने कहा कि कंपनी को पुणे में अपना ईवी विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिये महाराष्ट्र सरकार से यह मंजूरी मिली है।






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