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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि कुछ भारतीय कंपनियों को चीन से दुर्लभ मृदा चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट)के आयात के लिए लाइसेंस प्राप्त हुए हैं। चुंबकों के आयात के लिए कम से कम तीन भारतीय कंपनियों कॉन्टिनेंटल इंडिया, हिताची और जय उशिन को प्रारंभिक सरकारी मंजूरी मिल गई है। ये कंपनियां भारत के ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए पुर्जे उपलब्ध कराती हैं।
अप्रैल की शुरुआत में बीजिंग द्वारा इन चुंबकों के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लगाए जाने के बाद से यह पहली मंजूरी है। इस कदम का उद्देश्य आपूर्ति संबंधी उन समस्याओं को दूर करना है, जिनका भारत के प्रमुख उद्योगों पर असर पड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि अमेरिका और चीन के बीच वार्ता हमारे क्षेत्र में किस प्रकार से प्रभाव डालेगी।आयात लाइसेंस में विशिष्ट शर्तें जुड़ी हैं। आयातित चुंबकों को यूएस को पुनः निर्यात नहीं किया जा सकता और न ही उनका उपयोग रक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने जून 2025 में पहले ही पुष्टि कर दी थी कि वह दुर्लभ मृदा सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और व्यापार आपूर्ति शृंखला में पूर्वानुमानशीलता लाने के लिए चीन के साथ बातचीत कर रहा है।भारत सरकार और उद्योग निकाय आपूर्ति संबंधी बाधाओं का समाधान खोजने के लिए काम कर रहे हैं। ऑटोमोटिव क्षेत्र, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माता, निर्यात प्रतिबंधों से विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। लाइसेंसों के इस प्रारंभिक अनुदान से दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है। -
टोक्यो. मारुति सुजुकी अगले पांच साल में आठ एसयूवी पेश करेगी, जिससे उसके कुल मॉडल की संख्या 28 हो जाएगी। सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि निदेशक और अध्यक्ष तोशीहिरो सुजुकी ने बुधवार को कहा कि कंपनी घरेलू यात्री वाहन खंड में 50 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। सुजुकी ने ‘जापान मोबिलिटी शो' के दौरान यहां आए भारतीय पत्रकारों से बातचीत में भारतीय कार बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया और कहा कि 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना मारुति सुजुकी के लिए कठिन लक्ष्य होगा। सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन (एसएमसी) की देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) में लगभग 58 प्रतिशत हिस्सेदारी है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में घरेलू यात्री वाहन बाजार में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी घटकर लगभग 39 प्रतिशत रह गई है। सुजुकी ने 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की योजना के बारे में पूछने पर कहा, ‘‘बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए हम अगले 5-6 साल में आठ एसयूवी पेश करेंगे, जिससे हमारी कुल उत्पाद श्रृंखला 28 मॉडल तक पहुंच जाएगी।'' उन्होंने कहा कि कंपनी 50 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल करने और इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण तथा निर्यात में भी अव्वल बनने के लिए प्रतिबद्ध है। मारुति सुजुकी इस समय घरेलू बाजार में 18 मॉडल बेच रही है और उसकी बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018-19 के 51.2 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में 38.8 प्रतिशत रह गई है। सुजुकी ने भारत के लिए अपनी रणनीति के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मारुति सुजुकी घरेलू बाजार में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के साथ ही निर्यात बढ़ाने पर भी ध्यान देगी। उन्होंने कहा कि घरेलू और निर्यात, दोनों बाजारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए एमएसआई संयंत्रों की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 40 लाख इकाई प्रति वर्ष की जाएगी। सुजुकी ने बताया कि भारत जैसे बड़े देश में ग्राहकों की विविध जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और सीएनजी मॉडल सहित सभी प्रकार की कारें पेश करेगी। उन्होंने कहा कि कंपनी गुजरात में नौ बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना के साथ बायोगैस से चलने वाले वाहनों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। सुजुकी ने बताया कि भारत में अपनी समग्र उपस्थिति को मजबूत करने के लिए एसएमसी ने पहले ही वित्त वर्ष 2030-31 तक 70,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।
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नयी दिल्ली. आयकर विभाग ने बुधवार को आकलन वर्ष 2025-26 के लिए कंपनियों और ऑडिट की जरूरत वाले करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 10 दिसंबर कर दी। सामान्य तौर पर ऐसे करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर होती है। आयकर विभाग के प्रशासकीय निकाय केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बयान में कहा, ‘‘बोर्ड ने आकलन वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित तिथि को 31 अक्टूबर से बढ़ाकर अब 10 दिसंबर, 2025 कर दिया है।'' इसके अलावा, इन करदाताओं के लिए ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि भी 10 नवंबर तय की गई है।
आयकर अधिनियम के मुताबिक, ऑडिट की अनिवार्यता वाली कंपनियों, साझेदारी फर्मों और प्रोप्राइटरशिप इकाइयों को 31 अक्टूबर तक रिटर्न दाखिल करना होता है। वहीं, व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए यह समयसीमा 31 जुलाई रहती है। आयकर विभाग ने समयसीमा बढ़ाने का निर्णय उद्योग जगत के आग्रह और प्राकृतिक आपदाओं एवं बाढ़ से प्रभावित राज्यों में कारोबारी गतिविधियों में आई बाधाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। इससे पहले विभाग ने 25 सितंबर को ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा एक माह बढ़ाकर 31 अक्टूबर की थी। अब उसे और बढ़ाकर 10 नवंबर कर दिया गया है। आकलन वर्ष 2025-26 के लिए व्यक्तिगत करदाताओं के आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि भी इस साल 31 जुलाई से बढ़ाकर 16 सितंबर कर दी गई थी। इस दौरान 7.54 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल किए गए, जिनमें से 1.28 करोड़ करदाताओं ने स्वयं मूल्यांकन कर का भुगतान किया। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बुधवार को कहा कि लगातार सुधारों और आर्थिक मजबूती के कारण भारत आने वाले दशकों या संभवतः अगले कुछ वर्षों में ही 'उभरते हुए बाजार' से 'उभर चुके बाजार' का दर्जा हासिल कर सकता है। गुप्ता ने ‘बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट' में कहा कि भारत के नीतिगत ढांचे लगातार विकसित हो रहे हैं और ये इस समय वैश्विक स्तर पर सबसे अच्छे ढाचों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि देश की विनिमय दर 1991 तक विनियमित थी और अब यह तेजी से बाजार संचालित हो रही है। इसके बाहरी खाते का प्रबंधन भी अच्छी तरह से किया गया है। डिप्टी गवर्नर ने कहा, ‘‘देश के विविध भुगतान संतुलन में अंतर्निहित ताकतें हैं। चालू खाते की बात करें तो वस्तु व्यापार घाटा मजबूत सेवा निर्यात और प्रेषण प्राप्तियों से संतुलित किया गया है। तेल की कीमतें पहले की तरह निराशाजनक नहीं हैं। कुल मिलाकर चालू खाता लचीलापन दर्शाता है और पूरी तरह से टिकाऊ दायरे में है।'' उन्होंने आगे कहा कि महामारी जैसे बड़े झटकों को छोड़कर, भारत ने मोटे तौर पर राजकोषीय समेकन के मार्ग का पालन किया है। गुप्ता ने कहा, ‘‘लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण को अपनाने के बाद बेहतर परिणाम मिले हैं। मुद्रास्फीति कम है और कम अस्थिर हो गई है। मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाएं बेहतर ढंग से स्थिर हैं और मौद्रिक नीति अधिक प्रभावी हो गई है।'' डिप्टी गवर्नर ने कहा, "ऐसे सामूहिक प्रयास निश्चित रूप से भारत को आगामी दशकों में (और संभवतः आने वाले वर्षों में ही) उभरते हुए बाजार से उभर चुके बाजार की स्थिति में ले जाएंगे।" उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों के पूरे ढांचे के चलते भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और प्रति व्यक्ति आय वृद्धि दर समय के साथ तेज हुई है। वृद्धि दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है।
- नयी दिल्ली। फेडरल रिजर्व के नीतिगत नतीजों से पहले सुरक्षित निवेश के लिए खरीदारी के नए दौर के बीच बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 2,600 रुपये बढ़कर 1,24,400 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। इससे दो सत्रों से चली आ रही गिरावट थम गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने बताया कि 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 2,600 रुपये बढ़कर 1,23,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,21,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना मंगलवार को 1,21,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ जिंस विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘बुधवार को सोने की कीमतों में उछाल आया और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक बैठक के नतीजे आने से पहले यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर पर पहुंच गया।'' चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल आया और इसकी कीमतें 6,700 रुपये बढ़कर 1,51,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गईं। मंगलवार को चांदी की कीमत 1,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। गांधी ने कहा कि पश्चिम एशियाई क्षेत्र में भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ने के बाद सौदेबाजी में खरीदारी और सुरक्षित निवेश वाले संसाधनों की फिर से मांग बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 77.26 डॉलर यानी 1.95 प्रतिशत बढ़कर 4,029.53 डॉलर प्रति औंस हो गया। इस तरह तीन दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। हाजिर सोना वर्तमान में 4,020 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है क्योंकि यह कीमती धातु फेडरल रिजर्व की मौद्रिक बैठक से पहले मंगलवार के 3,886 डॉलर के निचले स्तर से उबरने की कोशिश कर रही है। मिराए एसेट शेयरखान में प्रमुख (जिंस एवं मुद्रा) प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘फेडरल रिजर्व द्वारा रेपो दर में 0.25 प्रतिशत कटौती की व्यापक उम्मीद है क्योंकि उसने अपना ध्यान कमजोर होते रोजगार बाजार पर केंद्रित कर दिया है।'' उन्होंने कहा कि धातु अभी भी संकट से बाहर नहीं है लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कटौती से यह गिरावट सीमित रहेगी। इस बीच, फेडरल रिजर्व के नतीजों से पहले डॉलर सूचकांक 0.15 प्रतिशत बढ़कर 98.82 पर पहुंच गया।हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव कम होने के संकेतों से सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग में तेजी थम सकती है। विदेशी बाजारों में हाजिर चांदी 2.85 प्रतिशत बढ़कर 48.40 डॉलर प्रति औंस हो गई।
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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ बंद हुआ। बाजार में चौतरफा तेजी देखी गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 368.97 अंक या 0.44 प्रतिशत की मजबूती के साथ 84,997.13 और निफ्टी 117.70 अंक या 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,053.90 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी का नेतृत्व एनर्जी और मेटल शेयरों ने कियाबाजार में तेजी का नेतृत्व एनर्जी और मेटल शेयरों ने किया। निफ्टी एनर्जी 1.93 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी आईटी 0.64 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस 0.49 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 0.90 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.62 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 1.22 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 1.68 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।केवल निफ्टी ऑटो 0.73 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआकेवल निफ्टी ऑटो 0.73 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, सन फार्मा, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, एसबीआई, आईटीसी, टाइटन, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और अल्ट्राटेक सीमेंट गेनर्स थे। बीईएल, इटरनल (जोमैटो), एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, एचयूएल और बजाज फिनसर्व लूजर्स थे।लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़त दर्ज की गईलार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 383.70 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,149.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 79.95 अंक या 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 18,487.55 पर था।अमेरिका-भारत में ट्रेड डील को लेकर ट्रंप के सकारात्मक बयान ने सेंटीमेंट को बूस्ट करने का काम किया हैजानकारों के मुताबिक, एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत और वैश्विक बाजार से स्पष्ट रुझान के कारण घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए। अमेरिका-भारत में ट्रेड डील को लेकर ट्रंप के सकारात्मक बयान ने सेंटीमेंट को बूस्ट करने का काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि ब्याज दरों को लेकर आने वाले फेड के फैसले पर निवेशकों की निगाहें हैं। माना जा रहा है कि इस बार फेड ब्याज दरों में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है।भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुबह में तेजी के साथ हुई थीभारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। सुबह करीब 9 बजकर 27 मिनट पर सेंसेक्स 202 अंक या 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 84,830.28 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 70.75 अंक या 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,006.95 स्तर पर बना हुआ था। - नयी दिल्ली. भारतीय दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इस साल जुलाई-सितंबर तिमाही में 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के कुल 72 सौदे हुए। ग्रांट थॉर्नटन भारत के डीलट्रैकर के अनुसार, इसमें 42.8 करोड़ डॉलर मूल्य के तीन आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और 8.8 करोड़ डॉलर मूल्य का एक पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) शामिल है। ग्रांट थॉर्नटन भारत ने बयान में कहा कि सार्वजनिक बाजार गतिविधियों को छोड़कर 68 लेनदेन में निजी सौदों का मूल्य तीन अरब डॉलर रहा। यह उछाल 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सात उच्च मूल्य सौदों के कारण हुआ। इसमें कहा गया कि इस तिमाही का सबसे उल्लेखनीय सौदा टोरेंट फार्मा द्वारा जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स में 46 प्रतिशत हिस्सेदारी का 1.4 अरब डॉलर में अधिग्रहण रहा। इससे उच्च वृद्धि वाले चिकित्सीय खंडों और ‘क्रोनिक केयर' बाजारों में इसकी स्थिति मजबूत हुई। ग्रांट थॉर्नटन भारत के साझेदार भानु प्रकाश कलमथ एस. जे. ने कहा, ‘‘ तीसरी तिमाही में सौदों ने जोर पकड़ा जो क्षमता और नवाचार-आधारित निवेश के स्वस्थ मिश्रण से प्रेरित रहे।'' उन्होंने कहा कि रणनीतिक समेकन द्वारा समर्थित औषधि एवं जैव प्रौद्योगिकी में गति, भारत की जीवन विज्ञान क्षमता में बढ़ते विश्वास का संकेत है। विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) परिदृश्य में 2025 की तीसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में गतिविधियां बढ़ीं। इसमें 2.5 अरब डॉलर मूल्य के 36 सौदे हुए जो पिछली तिमाही की तुलना में 57 प्रतिशत अधिक है। निजी इक्विटी (पीई) के मोर्चे पर स्वास्थ्य सेवा एवं औषधि क्षेत्र ने 2025 की तीसरी तिमाही में 42.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के 32 सौदे देखे। यह पिछली तिमाही की तुलना में मात्रा के लिहाज से तीन प्रतिशत की गिरावट और मूल्य के हिसाब से 27 प्रतिशत की कमी है। ग्रांट थॉर्नटन भारत ने कहा कि गतिविधियां स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, कल्याण और औषधि सेवाओं पर केंद्रित रही जिसमें प्रारंभिक एवं मध्य-चरण के निवेश को स्पष्ट प्राथमिकता दी गई।
- नयी दिल्ली. कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र की अमेरिकी कंपनी ओपनएआई ने चार नवंबर से भारत में ‘चैटजीपीटी गो' की सेवाएं एक वर्ष के लिए मुफ्त में प्रदान करने की मंगलवार को घोषणा की। ‘चैटजीपीटी गो' ओपनएआई द्वारा हाल में उपलब्ध कराई गई सेवा है जो भारत में उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधा प्रदान करती है। चैटजीपीटी भारत को अपना दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार मानता है। कंपनी ने कहा, ‘‘चार नवंबर को बेंगलुरु में ओपनएआई का ‘डेवडे एक्सचेंज इवेंट' मनाया जाएगा जो भारत में इसका पहला आयोजन होगा। इस अवसर पर ओपनएआई भारत में सभी उपयोगकर्ताओं के लिए चैटजीपीटी गो को एक पूरे वर्ष के लिए मुफ्त उपलब्ध करा रहा है। उपयोगकर्ता चार नवंबर से शुरू होने वाली सीमित प्रचार अवधि के दौरान ‘साइन अप' करते हैं।'' ओपनएआई के अनुसार, चैटजीपीटी गो को भारत में अगस्त में शुरू किया गया था। इसे चैटजीपीटी की सबसे उन्नत सुविधाओं तक किफायती पहुंच मुहैया कराने की उपयोगकर्ताओं की मांग को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था।
- भिलाई । भिलाई इस्पात संयंत्र के बार एवं रॉड मिल ने उत्कृष्ट उत्पादन करते हुए 26 अक्टूबर 2025 को चुनौतीपूर्ण 10 मिलीमीटर टीएमटी बार श्रेणी में 2598 टन (1261 बिलेट्स) का रिकॉर्ड उत्पादन कर नया “दिवस कीर्तिमान” स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ ही बीआरएम ने 21 सितंबर 2024 को दर्ज 2590 टन (1259 बिलेट्स) के रिकॉर्ड को पार किया।इस उपलब्धि पर भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी श्री चित्त रंजन महापात्र तथा कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार ने बीआरएम बिरादरी को बधाई दी और टीम को नये लक्ष्यों की ओर अग्रसर होने और आगे भी नयी उपलब्धियाँ अर्जित करने के लिए संकल्पित किया।इस उल्लेखनीय सफलता पर विभागाध्यक्ष एवं मुख्य महाप्रबंधक (बीआरएम) श्री योगेश शास्त्री ने टीम बीआरएम को मिठाई खिलाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और अपनी शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संचालन से लेकर प्रबंधन तक पूरे कार्यबल के समर्पण और मेहनत का परिणाम है। टीम बीआरएम ने उत्पादन दक्षता बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों में सुधार लाने और क्षमता विस्तार की दिशा में लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने प्रबंधन समूह, कर्मचारियों, यूनियन प्रतिनिधियों तथा सहयोगी विभागों के प्रति उनके निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर उपस्थित बीआरएम के महाप्रबंधकगण श्री एस.एन. त्रिपाठी, श्री आशीष, श्री शाश्वत मोहंती, श्री समीर पांडे एवं श्री शिखर तिवारी ने भी सम्पूर्ण मिल बिरादरी को बधाई दी एवं आगे भी सफलता की नई मिसाल कायम करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।उल्लेखनीय है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के बीआरएम में निर्मित उत्पादों का प्रयोग सेंट्रल विस्टा, बुलेट ट्रेन, श्री राम मंदिर (अयोध्या) जैसी सामरिक महत्व की राष्ट्रीय परियोजनाओं में किया गया हैं जो देश के बुनियादी ढाँचे के विकास और राष्ट्र निर्माण में प्रत्यक्ष योगदान दे रहे हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक देश की संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इस वर्ष मार्च से सितंबर तक की अवधि में केंद्रीय बैंक ने विदेशों में रखा अपना 64 टन सोना वापस मंगवा लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनिया भर के देश भू-राजनीतिक दबाव के हथियार के तौर पर फाइनेंशियल बैन और एसेट फ्रीज का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस वर्ष सितंबर अंत के आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई के पास 880.8 टन सोना है। इसमें से 575.8 टन का एक बड़ा हिस्सा भारत में सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा, 290.3 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास रखा गया है। वहीं, 14 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट अरेंजमेंट का हिस्सा है।आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2023 से आरबीआई ने विदेशों से अपना 274 टन सोना भारत में वापस ला चुका है। आरबीआई की ओर से यह फैसला बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए विदेशी रिजर्व की सुरक्षा को लेकर उठाया गया है।इस बीच, बुधवार के कारोबारी दिन पीली धातु की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना पिछले बंद भाव 1,19,646 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले लगभग 1,19,647 रुपए प्रति 10 ग्राम पर सपाट खुला।शुरुआती कारोबार के दौरान सोने की कीमत में मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 1,20,047 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, दूसरी ओर चांदी की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। चांदी 1,44,761 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली और शुरुआती कारोबार में 1,45,331 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई। ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड ने बीते कारोबारी दिन मंगलवार को 7 अक्टूबर के बाद से अपना निचला स्तर छूने के बाद 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करवाई और यह 3,957.42 डॉलर प्रति औंस हो गया। अमेरिका-चीन व्यापार को लेकर चिंताएं कम होने से यह तेजी सीमित रही। दूसरी ओर, निवेशक अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती का इंतजार कर रहे हैं।सोने की कीमतों में तेजी की बात करें तो इस वर्ष अब तक गोल्ड के दाम 52 प्रतिशत बढ़े हैं। इसी के साथ 20 अक्टूबर को सोने की कीमतें 4,381.21 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। यह रैली वैश्विक अनिश्चितताओं, ब्याज दर में कटौती की उम्मीद और आरबीआई के अलावा दूसरे केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार खरीदारी के कारण देखी जा रही है। -
मुंबई. जीएसटी दरों में की गई कटौती का फायदा उठाते हुए ग्राहकों ने त्योहारी मौसम में न सिर्फ अपने जमकर वाहन खरीदे बल्कि उन्होंने इस छूट का इस्तेमाल ऊंचे मॉडल और बेहतर ब्रांड की गाड़ियां खरीदने में भी किया। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह निष्कर्ष पेश किया गया है। बाजार अनुसंधान मंच 'स्मिटेनपल्स एआई' की तरफ से कराए गए इस अध्ययन से यह पता चलता है कि खरीदारों के लिए एसयूवी लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है जबकि बुनियादी ढांचे की कमियों के बावजूद पर्यावरण के प्रति जागरूकता इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों के रुझान में तेजी से वृद्धि का कारण रही। ‘जीएसटी कटौती के बाद कार खरीद के व्यवहार' पर किया गया यह अध्ययन अक्टूबर महीने में देश के बड़े, मझोले व छोटे शहरों में 5,000 से अधिक लोगों के बीच किया गया। अध्ययन में कहा गया, ‘‘जीएसटी कर में कटौती से वाहनों की मांग को रफ्तार मिली। हालांकि ग्राहकों ने कर कटौती से वाहनों की कीमतों में आई गिरावट का फायदा उठाने के बजाय कहीं ‘प्रीमियम' वाहन खरीदने पर जोर दिया। करीब 79 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे जीएसटी बचत का इस्तेमाल उच्च मॉडल, बेहतर ब्रांड या प्रीमियम ऐड-ऑन खरीदने में कर रहे हैं।'' इसके मुताबिक, 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने अपने पसंदीदा वाहन ब्रांड के थोड़े ऊंचे संस्करण को खरीदने की मंशा जताई जबकि 46 प्रतिशत लोग पहले ही हैचबैक की जगह एसयूवी जैसे बड़े आकार वाली वाहन श्रेणी का रुख कर चुके थे। अध्ययन के अनुसार, त्योहारों के दौरान एसयूवी की बिक्री सबसे अधिक रही। वहीं पर्यावरणीय जागरूकता के कारण ईवी को लेकर भी दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। 67 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि बैटरी संबंधी चिंताओं और बैटरी बदलने पर आने वाली ऊंची लागत के बावजूद पारिस्थितिक लाभ ईवी के प्रति रुचि को बढ़ा रहे हैं। स्मिटेन पल्सएआई के सह-संस्थापक स्वागत सारंगी ने कहा, ‘‘जीएसटी दरों में कटौती ने कारों को किफायती बनाने से कहीं अधिक भूमिका निभाई है। इसने मध्यवर्गीय खरीदारों की आकांक्षाओं को एक नई उड़ान दी है।
- नयी दिल्ली. राउरकेला स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) और तुर्की स्थित अजरबैजान स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक्स के शोधकर्ताओं ने इस बात का अध्ययन किया है कि किस प्रकार डिजिटल उपकरण और नवीकरणीय ऊर्जा 27 विकासशील देशों में कृषि उत्पादकता और स्थिरता में बदलाव ला सकते हैं। अनुसंधान दल ने भारत सहित 27 विकासशील देशों को शामिल करते हुए अध्ययन किया है, जिसमें यह बताया गया है कि किस प्रकार इंटरनेट का उपयोग, मोबाइल कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि भूमि और उर्वरक की खपत सामूहिक रूप से तेजी से बदलती दुनिया में खाद्य उत्पादन की प्रकृति को आकार देते हैं। शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित “टेक्नोलॉजी एनालिसिस एंड स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट” जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। एनआईटी-राउरकेला के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नारायण सेठी के अनुसार, वर्तमान प्रौद्योगिकी-संचालित परिवेश में प्रगति का कोई भी पहलू डिजिटल प्रौद्योगिकियों से अछूता नहीं है। सेठी ने कहा, “हम किस प्रकार संवाद करते हैं और काम करते हैं, से लेकर हम किस प्रकार भोजन का उत्पादन करते हैं और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, सब कुछ इंटरनेट और नवीकरणीय ऊर्जा द्वारा संचालित क्रांति का अनुभव कर रहा है। कृषि में इंटरनेट ने खाद्यान्न उत्पादन, विपणन और उपभोग के तरीके को बदल दिया है। किसान अब अपनी उपज बेचने से पहले बाजार भाव देख सकते हैं, ऑनलाइन उर्वरकों की कीमतों की तुलना कर सकते हैं और टिकाऊ खेती की तकनीकें सीख सकते हैं।” शोध दल ने वर्ष 2000 से 2021 तक 27 विकासशील देशों के कृषि-संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए उन्नत अर्थमितीय विधियों का उपयोग किया। ये देश हैं: भारत, अर्जेंटीना, चीन, पाकिस्तान, घाना, मलेशिया, टोगो, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, बोलीविया, निकारागुआ, ट्यूनीशिया, बोत्सवाना, जॉर्डन, तुर्की, श्रीलंका, पनामा, तंजानिया, कोस्टा रिका, मैक्सिको, फिलिपीन, केन्या, डोमिनिकन गणराज्य, मोजाम्बिक और अल साल्वाडोर। शोधकर्ताओं ने पाया कि इंटरनेट का उपयोग, मोबाइल फोन और नवीकरणीय ऊर्जा, प्रत्येक व्यक्तिगत रूप से कृषि उत्पादकता को बढ़ाते हैं।
- मुंबई. एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के प्रबंध निदेशक आलोक सिंह ने मंगलवार को कहा कि उसकी किफायती सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेड़े में अगले कैलेंडर वर्ष में 20 से 24 विमान शामिल किए जा सकते हैं। एयर इंडिया के बेड़े में फिलहाल 110 विमान हैं जिनमें एयरबस 320/321, बोइंग 737 व 737 मैक्स शामिल हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस के पहले रेट्रोफिटेड विमान के प्रदर्शन के लिए यहां आयोजित एक कार्यक्रम में सिंह ने कहा, ‘‘ हम अगले कैलेंडर वर्ष में 20 से 24 विमान लाने की योजना बना रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि हालांकि यह आपूर्ति श्रृंखला और बोइंग विनिर्माण सुविधा में उत्पादन की प्रगति पर निर्भर करेगा। सिंह ने कहा कि एयर इंडिया एक्सप्रेस अब घरेलू बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तुलना में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
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नई दिल्ली। सोने और चांदी के भाव में गिरावट लगातार जारी है। घरेलू सर्राफा बाजार में आज बुधवार के कारोबार को देखा जाए तो सोना 2,250 रुपये से लेकर 2,460 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। इस गिरावट के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना आज 1,20,810 रुपये से लेकर 1,20,960 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,10,740 रुपये से लेकर 1,10,890 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। चांदी की कीमत में भी गिरावट आने के कारण ये चमकीली धातु दिल्ली सर्राफा बाजार में आज 1,50,900 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है। दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 1,20,960 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,10,890 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।
वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,20,810 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,10,740 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,20,860 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,10,790 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,20,810 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,10,740 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है।कोलकाता में भी 24 कैरेट सोना 1,20,810 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,10,740 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,20,960 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,10,890 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,20,860 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,10,790 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,20,960 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,10,890 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोना सस्ता हुआ है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,20,810 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,10,740 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। -
नयी दिल्ली. देश का औद्योगिक उत्पादन विनिर्माण क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन के दम पर सितंबर में चार प्रतिशत बढ़ा है। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी मिली। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में मापा गया औद्योगिक उत्पादन सितंबर 2024 में 3.2 प्रतिशत बढ़ा था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने अगस्त, 2025 के लिए औद्योगिक उत्पादन के वृद्धि के आंकड़ों को चार प्रतिशत के अस्थायी अनुमान से संशोधित कर 4.1 प्रतिशत कर दिया है। एनएसओ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन सितंबर, 2025 में 4.8 प्रतिशत बढ़ा जबकि सितंबर, 2024 में यह चार प्रतिशत बढ़ा था। खनन उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि एक साल पहले इसमें 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। बिजली उत्पादन में सितंबर 2025 में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि एक साल पहले इसी अवधि में इसमें 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-सितंबर अवधि (पहली छमाही) के दौरान देश के औद्योगिक उत्पादन में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि 2024-25 की पहली छमाही में यह 4.1 प्रतिशत रही थी।
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चांदी 6,250 रुपये टूटी
नयी दिल्ली. अमेरिका-चीन व्यापार तनाव कम होने के बीच सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में मांग कम होने के कारण मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 4,100 रुपये गिरकर 1,21,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गईं और वैश्विक बाजारों में 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सोमवार को सोने की कीमत 1,25,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। स्थानीय सर्राफा बाजार में, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 4,100 रुपये गिरकर 1,21,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गया, जो पिछले बंद भाव 1,25,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘मंगलवार को सोने में और गिरावट आई और सुरक्षित निवेश मांग में कमी के कारण यह और बढ़ गई। बिकवाली तेज हो गई और सोने की कीमतें तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गईं।'' उन्होंने कहा, ‘‘इस गिरावट का कारण तकनीकी बिक्री है।' चांदी की कीमतों में भी मंगलवार को 6,250 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई। संघ के अनुसार, चांदी की कीमत सोमवार को 1,51,250 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना दबाव में रहा और 94.36 डॉलर या 2.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,887.03 डॉलर प्रति औंस रह गया। पिछले सत्र में, यह 132.02 डॉलर या 3.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान में जिंस और मुद्रा के प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘अमेरिका-चीन व्यापार समझौते के आशावाद के कारण सुरक्षित निवेश मांग में कमी के कारण हाजिर सोना दबाव में कारोबार कर रहा है।'' इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी चिनफिंग संभावित अनुवर्ती बैठकों के साथ व्यापार समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने जापान के साथ व्यापार समझौते पर भी भरोसा जताया, जिससे सर्राफा कीमतों पर असर पड़ा। प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘निवेशक बुधवार को अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, जहां केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत अंक की कटौती की व्यापक उम्मीद है।'' हाजिर चांदी में भी भारी गिरावट देखी गई और यह 2.85 प्रतिशत टूटकर दिन के कारोबार के निचले स्तर 45.56 डॉलर प्रति औंस रह गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि सोने में सुधार जारी रहेगा, 5-10 प्रतिशत की गिरावट की संभावना है, क्योंकि इस साल कीमत में 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी के बाद बड़े कारोबारी मुनाफावसूली करेंगे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के विकास से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में जानकारी देते हुए कहा, “सितंबर 2025 में स्मार्टफोन एक्सपोर्ट ने 1.8 अरब डॉलर का नया रिकॉर्ड बनाया।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत से निर्यात होने वाले सभी सामानों की लिस्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम अब तीसरे स्थान पर हैं। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में ग्रोथ से हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी।इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन की हालिया रिपोर्ट में जानकारी दी गई थी कि भारत का स्मार्टफोन निर्यात बीते वर्ष की समान अवधि की तुलना में 95 प्रतिशत बढ़कर 1.8 अरब डॉलर को पार कर गया है।आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने निर्यात में हो रही इस लगातार बढ़ोतरी को लेकर कहा था कि यह प्रदर्शन दिखाता है कि भारत के मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की नींव मजबूत हो रही है।इससे पहले, केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 5,532 करोड़ रुपए की 7 परियोजनाओं के पहले चरण की मंजूरी की घोषणा की। योजना के तहत 36,559 करोड़ रुपए मूल्य के कलपुर्जों का उत्पादन होगा और 5,100 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां सृजित होंगी।इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी), एचडीआई पीसीबी, कैमरा मॉड्यूल, कॉपर क्लैड लैमिनेट और पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स भारत में ही बनाई जाएंगी।ईसीएमएस को घरेलू और वैश्विक दोनों कंपनियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। 1.15 लाख करोड़ रुपए के निवेश भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धता है।इन योजनाओं के आर्थिक और औद्योगिक प्रभावों की बात करें तो योजनाओं से मैन्युफैक्चरिंग के अलावा, रिसर्च एंड डेवलपमेंट में भी हाई-स्किल वाली नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। साथ ही, देश की आयात पर से निर्भरता घटेगी और घरेलू बाजारों में उत्पादों की कीमत भी कम होंगी। -
नई दिल्ली। भारत के कोयला क्षेत्र को समर्पित एक ऐतिहासिक पहल के तहत साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), जो कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सहायक कंपनी है, ने डाक विभाग, छत्तीसगढ़ परिमंडल के सहयोग से इंडिया पोस्ट का विशेष आवरण (Special Cover) जारी किया। यह आवरण कोल इंडिया की स्वर्ण जयंती (50 वर्ष) तथा एसईसीएल की रूबी जयंती (40 वर्ष) के उपलक्ष्य में जारी किया गया। इस अवसर पर एक विशेष निरस्तीकरण कैशे (Special Cancellation Cachet) का भी अनावरण किया गया।
यह समारोह सरकार की “स्पेशल कैंपेन 5.0” पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें श्री पी. एम. प्रसाद, अध्यक्ष, कोल इंडिया लिमिटेड, तथा श्री हरीश दुःहान, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशकगण, मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा डाक विभाग, छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।यह विशेष आवरण एक संग्रहणीय डाक-फिलेटेलिक निर्गम है, जो कोल इंडिया के पाँच दशकों की अभूतपूर्व उपलब्धियों तथा एसईसीएल की चार दशकों की परिचालन उत्कृष्टता और नवाचार को अमर करता है। यह आवरण भारत की औद्योगिक प्रगति और संस्थागत विरासत के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है।स्पेशल कैंपेन 5.0 के अंतर्गत यह पहल सरकार की संस्थागत स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन की दक्षता तथा सार्वजनिक उपक्रमों की ऐतिहासिक उपलब्धियों को स्मरणीय बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।1975 में स्थापित कोल इंडिया लिमिटेड, जो विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है, देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ रही है। यह भारत की कोयला आवश्यकता का 70 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति करती है। अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में, कोल इंडिया ने उत्पादन, प्रेषण और ओवरबर्डन हटाने के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ दर्ज कीं, जिससे वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय कोयला क्षेत्र द्वारा 1 अरब टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया गया।यह विशेष आवरण भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यात्रा तथा देश की कोयला उद्योग की राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का गौरवपूर्ण प्रतीक है। - नयी दिल्ली. रिलायंस जियो ने सितंबर 2025 में नए ग्राहक जोड़ने में अग्रणी बने रहते हुए इस महीने 2,12,662 वायरलाइन ग्राहक और 32.49 लाख मोबाइल कनेक्शन जोड़े। ट्राई की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएसएनएल ने भी सितंबर में नए मोबाइल ग्राहक जोड़ने के मामले में भारती एयरटेल पर अपनी बढ़त बनाए रखी। फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड ग्राहक आधार में वृद्धि के साथ रिलायंस जियो का कुल ग्राहक आधार पहली बार 50 करोड़ को पार कर गया। इसका कुल ग्राहक आधार 50.64 करोड़ से अधिक रहा। बीएसएनएल ने मोबाइल ग्राहक आधार के मामले में भारती एयरटेल पर अपनी बढ़त बनाए रखी।दूरसंचार नियामक ट्राई की सितंबर, 2025 की मासिक ग्राहक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल ने 5.24 लाख ग्राहक जोड़े, जबकि भारती एयरटेल ने 4.37 लाख ग्राहक जोड़े। वोडाफोन आइडिया (वीआई), सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एमटीएनएल और रिलायंस कम्युनिकेशंस के मोबाइल ग्राहकों की संख्या में गिरावट जारी रही। वीआई ने 7.44 लाख मोबाइल ग्राहक, एमटीएनएल ने 56,928 और आरकॉम ने 13 ग्राहक गंवाएं.
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नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि भारत को अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों में वैश्विक अग्रणी बनाने के लिए तेज़ी से कदम उठाए जा रहे हैं।तेजी से हो रहे 5G नेटवर्क के विस्तार और अपनाने के बाद अब सरकार का ध्यान “भारत 6G विज़न” के तहत 6G तकनीक विकसित करने पर है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत को उन्नत दूरसंचार नवाचार का केंद्र बनाना है।
सरकार के अनुसार, भारत का 6G विज़न सस्ती, टिकाऊ और सर्व-सुलभ कनेक्टिविटी के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य है कि हर नागरिक उच्च गति की इंटरनेट सेवा का लाभ उठा सके, साथ ही देश में स्थानीय अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से भी जुड़ी हुई है।6G तकनीक वायरलेस संचार का अगला बड़ा कदम है, जो 5G से लगभग 1000 गुना तेज़ और लगभग शून्य विलंब (zero latency) वाली डेटा ट्रांसफर सुविधा प्रदान करेगी। इससे रिमोट सर्जरी, एडवांस रोबोटिक्स, स्मार्ट सिटीज़ और वर्चुअल रियलिटी जैसे रियल-टाइम अनुप्रयोगों को बढ़ावा मिलेगा।सरकार ने 6G विकास को समर्थन देने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। इसमें दो उन्नत टेस्टबेड — 6G टेराहर्ट्ज़ (THz) टेस्टबेड और एडवांस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेस्टबेड — शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शोध और नवाचार को बढ़ावा देना है।इसके अलावा, देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 100 से अधिक 5G लैब्स स्थापित की गई हैं ताकि 6G के लिए पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सके और उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत किया जा सके।अब तक 6G नेटवर्क से जुड़े 104 अनुसंधान प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिससे भारत की अनुसंधान दिशा वैश्विक 6G रोडमैप के अनुरूप हो सके।स्वदेशी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने “टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF)” भी शुरू किया है। इसके तहत अब तक 115 प्रोजेक्ट्स, जिनकी कुल कीमत ₹310 करोड़ से अधिक है, को मंजूरी मिल चुकी है।इस विज़न की दिशा में एक बड़ा कदम है “भारत 6G एलायंस (B6GA)” का गठन — जो सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के संयुक्त प्रयास से बना है। इसका उद्देश्य एक आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। -
नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, जीवन बीमा निगम (LIC) ने शनिवार को कहा कि अदाणी समूह (Adani Group) की कंपनियों में उसके निवेश स्वतंत्र रूप से और बोर्ड-स्वीकृत नीतियों के अनुसार किए गए हैं। LIC ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे निवेश निर्णयों में वित्त मंत्रालय की वित्तीय सेवा विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था की कोई भूमिका नहीं है।
LIC ने बताया कि उसने सालों में विभिन्न कंपनियों में निवेश निर्णय केवल उनके मौलिक आधार और विस्तृत जांच-पड़ताल (due diligence) के बाद लिए हैं। कंपनी के अनुसार, भारत की टॉप 500 कंपनियों में उसके निवेश का मूल्य 2014 से दस गुना बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये से 15.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो मजबूत फंड प्रबंधन का संकेत देता है।LIC ने Adani समूह में अपने निवेश को लेकर विदेशी मीडिया की रिपोर्ट का खंडन किया है। जीवन बीमा निगम ने कहा कि उसके निवेश निर्णय पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से, बोर्ड-स्वीकृत नीतियों और विस्तृत ड्यू डिलिजेंस के आधार पर लिए जाते हैं।LIC ने स्पष्ट किया कि उसके सभी निवेश निर्णय नियमानुसार और हितधारकों के सर्वोत्तम हित में लिए जाते हैं। इस कदम का उद्देश्य LIC की निर्णय प्रक्रिया और भारत के वित्तीय क्षेत्र की मजबूत नींव की छवि को प्रभावित करना नहीं होना चाहिए।यह बयान अमेरिका के अखबार The Washington Post में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि LIC को इस साल Adani समूह में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था, जबकि समूह अमेरिकी जांच और कर्ज दबाव का सामना कर रहा था। रिपोर्ट में LIC द्वारा मई 2025 में Adani Ports & SEZ (APSEZ) में 570 मिलियन डॉलर निवेश का उल्लेख किया गया था, जिसे भारत की सबसे उच्च ‘AAA’ क्रेडिट रेटिंग प्राप्त है।LIC ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निवेश निर्णयों में वित्त मंत्रालय या अन्य किसी सरकारी संस्था की कोई भूमिका नहीं है। LIC भारत का सबसे बड़ा संस्थागत निवेशक है, जिसके पास 41 ट्रिलियन रुपये से अधिक ($500 बिलियन) की संपत्ति है। यह 351 सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश करता है और सरकारी बांड तथा कॉर्पोरेट ऋण में भी भारी निवेश है, जिससे उसका पोर्टफोलियो काफी विविध है।LIC का Adani समूह में कुल निवेश उसके कुल कर्ज का 2% से कम है। वहीं, Reliance Industries, ITC और Tata समूह LIC के सबसे बड़े निवेश हैं। LIC Adani के शेयरों का 4% हिस्सा रखता है, जबकि Reliance में 6.94%, ITC में 15.86%, HDFC बैंक में 4.89%, SBI में 9.59% और TCS में 5.02% निवेश है। -
नयी दिल्ली. एनटीपीसी लिमिटेड ने शनिवार को कहा कि पतरातू परियोजना में 800 मेगावाट इकाई का परीक्षण संचालन पूरा होने के साथ उसकी स्थापित क्षमता बढ़कर 84,849 मेगावाट हो गई है। एनटीपीसी ने शेयर बाजार को बताया कि उसकी सहायक कंपनी पतरातू बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड ने यूनिट-1 (800 मेगावाट) का परीक्षण संचालन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी ने कहा, ''पतरातू बिजली उत्पादन निगम लिमिटेड के पतरातू सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, चरण-1 (3x800 मेगावाट) की इकाई-1 (800 मेगावाट) ने सफलतापूर्वक परीक्षण संचालन पूरा कर लिया है और 16 अक्टूबर से एनटीपीसी समूह की स्थापित क्षमता में शामिल हो गई है।'' इसके साथ ही, एनटीपीसी समूह की कुल स्थापित क्षमता 84,849 मेगावाट तक पहुंच गई है।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नया ड्राफ्ट सर्कुलर जारी किया है, जिसमें भारतीय कंपनियों को घरेलू या विदेशी फर्मों में पूरा या कंट्रोलिंग स्टेक खरीदने के लिए बैंकों द्वारा लोन की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। केंद्रीय बैंक की ओर से इन मानदंडों को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है।
बैंक द्वारा दिया जाने वाला यह लोन शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग के बजाय लॉन्ग-टर्म वैल्यू बनाने वाले स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट का हिस्सा होगाबैंक द्वारा दिया जाने वाला यह लोन शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग के बजाय लॉन्ग-टर्म वैल्यू बनाने वाले स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट का हिस्सा होगा। हालांकि, आरबीआई ने एक्वायर करने वाली कंपनियों को लेकर यह भी स्पष्ट किया है कि यह कंपनियां लिस्टेड होनी चाहिए और इनकी नेट वर्थ भी अच्छी होनी चाहिए, जिसके लिए इन कंपनियों के पिछले तीन वर्ष का प्रॉफिट रिकॉर्ड भी ध्यान रखा जाएगा।आरबीआई के ड्राफ्ट के अनुसार, “बैंक अधिग्रहण मूल्य का अधिकतम 70 प्रतिशत फंड कर सकता है। अधिग्रहण मूल्य का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने धन का इस्तेमाल कर इक्विटी के रूप में फंड करना होगा।”आरबीआई द्वारा इस तरह के एक्विजिशन फाइनेंस में किसी बैंक के कुल एक्सपोजर को उसके टियर-I कैपिटल के 10 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया गया हैआरबीआई द्वारा इस तरह के एक्विजिशन फाइनेंस में किसी बैंक के कुल एक्सपोजर को उसके टियर-I कैपिटल के 10 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि बैंक सीधे एक्वायरिंग कंपनी को ही लोन दे सकते हैं या इस कंपनी द्वारा टारगेट एंटिटी को खरीदने के लिए सेट अप किए गए स्टेप-डाउन स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) को लोन दिया जा सकता है।केंद्रीय बैंक का कहना है कि लोन देने वाले बैंकों के पास एक्विजिशन फाइनेंस पर एक पॉलिसी होनी चाहिएइसके अलावा, केंद्रीय बैंक का कहना है कि लोन देने वाले बैंकों के पास एक्विजिशन फाइनेंस पर एक पॉलिसी होनी चाहिए। इस तरह की पॉलिसी में उधार लेने वालों की एलिजिबिलिटी, सिक्योरिटी, रिस्क मैनेजमेंट, मार्जिन और मॉनिटरिंग टर्म्स की लिमिट, नियर और शर्तों की जानकारी मौजूद होनी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने प्रस्ताव दिया है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि एक्वायरिंग कंपनी और एक्विजिशन के लिए बनाई गई एसपीवी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड जैसे फाइनेंशियल इंटरमीडियरी न हो।बैंकों को यह भी वेरिफाई करने की जरूरत होगी कि एक्वायर करने वाली कंपनी और टारगेट कंपनी आपस में रिलेटेड पार्टी न होंबैंकों को यह भी वेरिफाई करने की जरूरत होगी कि एक्वायर करने वाली कंपनी और टारगेट कंपनी आपस में रिलेटेड पार्टी न हों। नियमों के अनुसार, टारगेट कंपनी की एक्विजिशन वैल्यू बाजार नियामक सेबी के नियमों के तहत तय की जानी चाहिए। इसके अलावा, क्रेडिट असेस्मेंट के लिए बैंकों को दोनों कंपनियों की कम्बाइन्ड बैलेंसशीट को चेक करना होगा। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। बाजार के ज्यादातर सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 344.52 अंक या 0.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,211.88 और निफ्टी 96.25 अंक या 0.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,795.15 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व बैंकिंग शेयरों ने किया। निफ्टी बैंक 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, मीडिया, प्राइवेट बैंक और इन्फ्रा इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। मेटल, रियल्टी, एनर्जी और कमोडिटीज हरे निशान में थे।लार्ज कैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 140 अंक या 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,231.20 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.21 प्रतिशत या 38.10 अंक की कमजोरी के साथ 18,253.35 पर था।सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, सन फार्मा, आईटीसी, टाटा स्टील, एमएंडएम और ट्रेंट टॉप गेनर्स थे। एचयूएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एसबीआई टॉप लूजर्स थे।एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र था, जब बाजार बुलिश टोन के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ, जो दिखाता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि बाजार की मौजूदा संरचना बताती है कि किसी भी नए संकेत के मौजूद न होने के कारण ट्रेडर्स सतर्क बने हुए हैं। आने वाले सत्र काफी अहम होंगे, जो बताएंगे कि यह एक छोटी-अवधि की कमजोरी है या एक बड़ा कंसोलिडेशन है।भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट हुई थी। सुबह करीब 9 बजकर 32 मिनट पर सेंसेक्स 62.31 अंक या 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 84,494.09 स्तर पर था। वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 8.45 अंक या 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,882.95 स्तर पर था। -
नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 17 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 4.5 अरब डॉलर बढ़कर 702.3 अरब डॉलर हो गया। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में दी गई। केंद्रीय बैंक के अनुसार, समीक्षा अवधि में भारत का गोल्ड रिजर्व, जो कि विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होता है, 6.2 अरब डॉलर बढ़कर 108.5 अरब डॉलर हो गया है। इसमें बढ़ोतरी की वजह सोने की कीमतों में इजाफा होना और केंद्रीय बैंक द्वारा खरीद का बढ़ना है।
फॉरेन करेंसी एसेट्स, जो कि विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं, 1.7 अरब डॉलर गिरकर 570.4 अरब डॉलर हो गई हैं। ये एसेट्स यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के मूल्य में बदलाव से प्रभावित होती हैं।आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पॉजिशन 3 करोड़ डॉलर घटकर 4.62 अरब डॉलर रह गई है।बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड रिजर्व की हिस्सेदारी बढ़कर 14.7 प्रतिशत हो गई है, जो कि कई दशकों का उच्चतम स्तर है।बीते एक दशक में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है, जो कि पहले 7 प्रतिशत थी।मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने 2024 से अपने गोल्ड रिजर्व में लगभग 75 टन की वृद्धि की है, जिससे कुल गोल्ड होल्डिंग 880 टन हो गई है, जो अब भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 14 प्रतिशत है।भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है और अपनी मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर है। सोना खरीदना भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित है। इसे निवेश एवं प्रतिष्ठा के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है।


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